Author: bharati

  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

    थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?




    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह रहा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया और स्पष्ट रूप से टकराव से बचने की अपील की। उनके इस बयान को अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन इस ऐतिहासिक “ट्रैप” से बाहर निकलकर सहयोग और स्थिरता का नया मॉडल विकसित कर सकती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का साथ आना आवश्यक है, ताकि दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उनके बयान का अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि चीन टकराव के बजाय सहयोग की नीति को प्राथमिकता देना चाहता है, हालांकि इसके पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति भी देखी जा रही है।

    ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ शब्द कोई नया राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने आधुनिक राजनीति में लोकप्रिय बनाया था। यह सिद्धांत प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के अध्ययन पर आधारित है, जिन्होंने लगभग ढाई हजार साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। थ्यूसीडाइड्स का मानना था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच तनाव बढ़ना लगभग स्वाभाविक हो जाता है और कई बार यह स्थिति युद्ध तक पहुंच जाती है।

    आधुनिक वैश्विक राजनीति में इस सिद्धांत को अमेरिका और चीन के रिश्तों से जोड़ा जाता है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वैश्विक सुपरपावर की भूमिका में रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान मुद्दा और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और गहरा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात काफी हद तक ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसी स्थिति को दर्शाते हैं, जहां एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव की संभावना बनी रहती है, भले ही कोई भी पक्ष युद्ध नहीं चाहता हो। इसी कारण शी जिनपिंग का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल चेतावनी नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है कि दोनों देशों को बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।

    जिनपिंग ने पहले भी कई मौकों पर इस सिद्धांत का उल्लेख किया है और हमेशा यही संदेश दिया है कि अमेरिका और चीन यदि साझा हितों पर काम करें तो वैश्विक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान चीन की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को अमेरिका के बराबर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    कुल मिलाकर यह बैठक और ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन, प्रतिस्पर्धा और सहयोग—इन तीनों के बीच आगे का रास्ता किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

  • US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध

    US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क (10% Global Import Duty) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था।

    राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है।


    क्या है धारा 122?

    यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था।


    इन क्षेत्रों पर असर नहीं

    ध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं।


    सरकार की दलील?

    ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था।


    आगे क्या होगा?

    अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।

  • नेपाल में फीकी पड़ी बालेन शाह का चमक…. महज दो माह में टूटने लगा Gen Z का भरोसा!

    नेपाल में फीकी पड़ी बालेन शाह का चमक…. महज दो माह में टूटने लगा Gen Z का भरोसा!


    काठमांडु।
    नेपाल (Nepal) में पारंपरिक राजनेताओं (Traditional Politicians) के खिलाफ जेनरेशन जेड (Gen-Z) के आंदोलन के रूप में देखे गए ऐतिहासिक चुनावों के जरिए सत्ता में आए बालेन शाह (Balen Shah) की सरकार के लिए शुरुआती उम्मीदें और चमक अब फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। महज दो महीने के भीतर ही सरकार चौतरफा विवादों, अदालती झटकों और कूटनीतिक मोर्चों पर आलोचनाओं से घिर गई है। संसद सत्र को टालकर अध्यादेशों की बाढ़ लाने और आलोचनाओं पर प्रधानमंत्री शाह की चुप्पी ने उनके समर्थकों को भी निराश किया है।

    बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के पास 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 181 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत है, लेकिन नेशनल असेंबली (ऊपरी सदन) में उनका एक भी सदस्य नहीं है। विधायी संशोधन और कानून पारित करने के लिए उच्च सदन की भूमिका अनिवार्य होती है।

    इस विधायी गतिरोध से बचने के लिए शाह सरकार ने एक विवादास्पद रास्ता चुना। 30 अप्रैल को शुरू होने वाले निचले सदन के सत्र को 11 मई तक टाल दिया गया और इस 12 दिनों के अंतराल में सरकार ने आठ अध्यादेश पारित कर दिए। समर्थकों का मानना है कि यह उस सुधार के एजेंडे के साथ विश्वासघात है जिसके दम पर वे सत्ता में आए थे।


    न्यायपालिका से जुड़ा विवाद

    सबसे बड़ा विवाद संवैधानिक परिषद से जुड़े अध्यादेश को लेकर हुआ। यह परिषद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति की सिफारिश करती है। नए अध्यादेश के जरिए प्रधानमंत्री को वीटो पावर दे दी गई। इसके तहत यदि किसी नाम पर टाई होता है, तो पीएम का फैसला अंतिम होगा और वे बहुमत के फैसले को भी पलट सकते हैं। परिषद के दो सदस्यों उच्च सदन के अध्यक्ष नारायण दहाल और भीष्मराज आंगदाम्बे ने इस पर असहमति जताई।

    राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी इसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था, लेकिन सरकार द्वारा बिना बदलाव के दोबारा भेजे जाने पर उन्हें इसे मंजूरी देनी पड़ी। अध्यादेश के तुरंत बाद परिषद ने डॉ. मनोज शर्मा को मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की, जिससे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सपना मल्ला प्रधान सहित तीन वरिष्ठ न्यायाधीश पीछे छूट गए। नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने इसप कहा, “बालेन को इस कृत्य की कीमत चुकानी होगी, जो देश की 15 मिलियन महिलाओं का अपमान है।”


    सुप्रीम कोर्ट का झटका

    प्रशासन को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने के नाम पर सरकार ने एक अन्य अध्यादेश के जरिए संवैधानिक निकायों, राज्य बोर्डों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में तैनात करीब 1,600 लोगों की नियुक्तियां रद्द कर दीं। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संगठनों और कर्मचारी यूनियनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया। हालांकि, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने इस अध्यादेश पर रोक लगा दी है, जो शाह सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है। इससे पहले कोर्ट ने बिना पुनर्वास के सुकुम्बासी (भूमिहीन निवासियों) को हटाने पर भी रोक लगाई थी।


    संसद में बर्ताव और स्थानीय स्तर पर विरोध

    11 मई को शुरू हुए संसद सत्र के पहले ही दिन पीएम बालेन शाह सफेद कैनवास जूते पहनकर पहुंचे, जिसे संसदीय मर्यादा के लिहाज से बहुत अनौपचारिक माना गया। इसके बाद वे राष्ट्रपति के अभिभाषण के बीच में ही अचानक सदन से बाहर निकल गए और बुधवार को बिना किसी सूचना के संसद से गायब रहे, जिसके कारण विपक्ष के हंगामे के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा।

    काठमांडू घाटी में बागमती नदी के किनारे चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान दो भूमिहीन लोगों की आत्महत्या के बाद मानवीय संकट गहरा गया। तीखी आलोचना के बाद शाह ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि सरकार सच्चे भूमिहीनों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन फर्जी भूमिहीनों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी।

    इसके अतिरिक्त, देश के शीर्ष उद्योगपतियों को भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लेने के फैसले से घरेलू और विदेशी निवेशकों में डर का माहौल बन गया है, जिसे संभालने के लिए अब वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले को डैमेज कंट्रोल करना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मोर्चे पर भी नई सरकार अनुभवहीन साबित हो रही है। बालेन शाह ने अप्रैल में 17 देशों के राजदूतों से मुलाकात कर बहुपक्षीय संबंधों का भरोसा दिया था। लेकिन इसके तुरंत बाद भारत और चीन ने नेपाल के क्षेत्रीय दावे की अनदेखी करते हुए लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर सड़क खोलने की घोषणा कर दी, जिस पर काठमांडू को विरोध पत्र भेजना पड़ा।

    बालेन शाह ने संकल्प लिया है कि वे एक साल तक कोई विदेशी दौरा नहीं करेंगे और केवल मंत्रियों या उससे ऊपर के स्तर के गणमान्य व्यक्तियों से ही मिलेंगे। इसी कूटनीतिक कड़े रुख के कारण भारत के विदेश सचिव विवेक मिस्री ने अपना नेपाल दौरा स्थगित कर दिया।

  • होर्मुज रहे हमेशा खुला … ट्रंप-जिनपिंग के बीच बनी सहमति, कई मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

    होर्मुज रहे हमेशा खुला … ट्रंप-जिनपिंग के बीच बनी सहमति, कई मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के बीच बीजिंग (Beijing) के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई ऐतिहासिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस मुलाकात में ताइवान, हॉर्मुज स्ट्रेट, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। साल 2017 के बाद चीन में दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। बैठक ऐसे समय में हुई जब विश्व युद्ध की आशंकाओं, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है।

    जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत करते हुए ताइवान मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने इसे चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। जिनपिंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान पर कोई भी गलत कदम दोनों देशों के बीच टकराव और युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकते हैं? और इसके बजाय बड़े देशों के बीच सहयोग का नया मॉडल बनाने का सुझाव दिया।

    हॉर्मुज और ईरान पर सहमति
    दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि विश्व के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट हमेशा खुला और सुरक्षित रहना चाहिए। जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती या टोल वसूली का विरोध करता है। दोनों पक्ष इस बात पर भी एकमत हुए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाए। वहीं, ट्रंप ने बैठक को ‘बेहद सकारात्मक और सफल’ बताया। उन्होंने जिनपिंग को अपना दोस्त और महान नेता करार दिया। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं ने रिश्तों को और मजबूत बनाने, व्यापार सहयोग बढ़ाने, अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी बाजार खोलने और चीन से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर जोर दिया।


    बैठक में उद्योगपतियों ने भी लिया हिस्सा

    जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि 2026 दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय साबित हो। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाए और रिश्तों को कभी बिगड़ने नहीं दिया जाए। बता दें कि इस बैठक में एलन मस्क, टिम कुक समेत अमेरिका के कई प्रमुख उद्योगपतियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद आयोजित राजकीय भोज में ट्रंप ने जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को सितंबर में वाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया।

  • Coconut Water Benefits: गर्मी में रोजाना नारियल पानी पीना कितना फायदेमंद है?

    Coconut Water Benefits: गर्मी में रोजाना नारियल पानी पीना कितना फायदेमंद है?


    नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी होता है, और ऐसे में कई लोग नेचुरल ड्रिंक्स की तरफ रुख करते हैं। इन्हीं में से एक है नारियल पानी, जिसे हेल्दी और एनर्जी देने वाला पेय माना जाता है। गर्मियों में रोजाना इसका सेवन करने से शरीर पर कई सकारात्मक असर देखने को मिलते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पीने पर कुछ स्थितियों में नुकसान भी हो सकता है।

    Coconut water में इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। यही वजह है कि गर्मी में यह डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प माना जाता है।

    शरीर को तुरंत मिलती है ठंडक और एनर्जी
    गर्मियों में रोजाना नारियल पानी पीने से शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है। यह शरीर के तापमान को बैलेंस करने में मदद करता है और थकान को कम करता है। बहुत ज्यादा पसीना आने पर शरीर में जो इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं, नारियल पानी उन्हें तेजी से पूरा करता है।

    पाचन तंत्र को करता है बेहतर
    नारियल पानी हल्का और आसानी से पचने वाला पेय है। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत दे सकता है। रोजाना इसका सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है।

    स्किन और किडनी के लिए फायदेमं
    नियमित रूप से नारियल पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स बाहर निकलने में मदद मिलती है, जिससे त्वचा साफ और ग्लोइंग बनी रहती है। साथ ही यह किडनी को भी साफ रखने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह शरीर से अतिरिक्त सोडियम और अपशिष्ट को बाहर निकालने में सहायक होता है।

    दिल की सेहत के लिए भी अच्छा
    इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। सीमित मात्रा में इसका सेवन दिल की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है।

    लेकिन ज्यादा पीना भी हो सकता है नुकसानदायक
    हालांकि Coconut water फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन कुछ लोगों के लिए परेशानी भी पैदा कर सकता है। इसमें मौजूद पोटैशियम की अधिक मात्रा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैदा कर सकती है, खासकर किडनी की समस्या वाले लोगों में। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों को भी इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शुगर होती है।

    कितना पीना सही है?
    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में रोजाना 1 नारियल पानी पीना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। इसे सुबह या दोपहर के समय पीना ज्यादा अच्छा होता है, ताकि शरीर दिनभर हाइड्रेटेड रहे।

    गर्मियों में नारियल पानी एक नेचुरल और हेल्दी ड्रिंक है, जो शरीर को ठंडक, एनर्जी और हाइड्रेशन देता है। लेकिन किसी भी चीज की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना जरूरी है, ताकि इसके फायदे पूरी तरह मिल सकें और कोई साइड इफेक्ट न हो।

  • इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स

    इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सेलेब्स और फैंस के बीच दूरी लगभग खत्म हो चुकी है। फिल्मों के अलावा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने स्टार्स को सीधे अपने दर्शकों से जोड़ दिया है। पहले जहां फैंस अपने पसंदीदा सितारों से पत्रों और मैगजीन इंटरव्यू के जरिए जुड़ते थे, वहीं अब एक क्लिक पर उनकी जिंदगी की हर अपडेट सामने आ जाती है।

    इंस्टाग्राम पर भारत के सेलेब्स की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी फॉलोइंग से लगाया जाता है। हाल ही में सामने आई लिस्ट के अनुसार बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इस रेस में सबसे आगे निकल गई हैं। 93 मिलियन फॉलोअर्स के साथ श्रद्धा कपूर नंबर 1 पोजिशन पर बनी हुई हैं, जबकि वे इंस्टाग्राम पर केवल 790 अकाउंट्स को फॉलो करती हैं।

    दूसरे स्थान पर ग्लोबल आइकन बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा हैं, जिनके करीब 92.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं। प्रियंका न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। वे इंस्टाग्राम पर 639 लोगों को फॉलो करती हैं।

    तीसरे स्थान पर आलिया भट्ट हैं, जिनकी फैन फॉलोइंग 85.5 मिलियन तक पहुंच चुकी है। आलिया इन दिनों अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं।

    चौथे नंबर पर दीपिका पादुकोण हैं जिनके 78.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया है और वे शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं।

    पांचवें स्थान पर कैटरीना कैफ हैं जिनके 78.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसके बाद छठे नंबर पर सलमान खान हैं जिनकी फैन फॉलोइंग 71.7 मिलियन है।

    सातवें स्थान पर उर्वशी रौतेला हैं जिनके 68.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि आठवें नंबर पर जैकलीन फर्नांडीस हैं जिनके 68.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    नौवें स्थान पर अनुष्का शर्मा हैं, जो लंबे समय से फिल्मों से दूर होने के बावजूद 67.5 मिलियन फॉलोअर्स के साथ मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

    दसवें स्थान पर खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार हैं जिनके 65.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    यह लिस्ट साफ दिखाती है कि सोशल मीडिया पर स्टार पावर अब भी उतनी ही मजबूत है और फैंस अपने पसंदीदा सितारों से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार जुड़े रहना पसंद करते हैं। 

  • ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें अमेरिका को “ढलता हुआ देश” कहा गया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि जिनपिंग की यह टिप्पणी “100 प्रतिशत सही” थी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के चार साल के कार्यकाल में अमेरिका को कई स्तर पर नुकसान झेलना पड़ा, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

    बाइडन सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
    ट्रंप ने आरोप लगाया कि बाइडन प्रशासन की नीतियों ने देश को कमजोर किया। उन्होंने खुली सीमा नीति, बढ़े हुए टैक्स, DEI नीतियां, महिलाओं के खेलों में पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी, खराब व्यापार समझौते और बढ़ते अपराध को अमेरिका की गिरती स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप के मुताबिक, इन फैसलों का असर देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था दोनों पर पड़ा।

    ट्रंप बोले- मेरे नेतृत्व में तेजी से बदली स्थिति
    अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने पिछले 16 महीनों में तेजी से सुधार किया है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और विदेशी निवेश में भी लगातार इजाफा हुआ है। ट्रंप ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ने इन उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी है।

    अमेरिका फिर बना मजबूत देश
    ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है। उन्होंने वेनेजुएला और ईरान से जुड़े सैन्य कदमों का जिक्र करते हुए अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बताया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक अमेरिका कमजोर स्थिति में था, लेकिन अब देश दोबारा वैश्विक ताकत के रूप में उभर रहा है। साथ ही ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के संबंध और बेहतर हो सकते हैं।

  • बेहद खास है 16 मई की अमावस्या, शनि जयंती के साथ बन रहा दुर्लभ संयोग, इन गलतियों से बचें

    बेहद खास है 16 मई की अमावस्या, शनि जयंती के साथ बन रहा दुर्लभ संयोग, इन गलतियों से बचें

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व प्राप्त है और ज्येष्ठ मास की अमावस्या को और भी महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई को पड़ रही है, जो कई धार्मिक संयोगों के कारण खास मानी जा रही है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी और यह वर्ष की पहली शनि अमावस्या भी होगी।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई 2026 को रात 01:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर अमावस्या का स्नान और दान 16 मई, शनिवार को ही किया जाएगा।

    शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का संयोग
    इस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या का एक साथ संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

    इन कार्यों से बचने की सलाह
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए, अन्यथा जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

    बाल और नाखून काटने से बचें
    मान्यता है कि अमावस्या के दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। विशेषकर शनिवार को शनि जयंती होने के कारण यह नियम और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

    बुजुर्गों का सम्मान जरूरी
    इस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण किया जाता है। ऐसे में बुजुर्गों का सम्मान करना आवश्यक माना गया है। उनका अपमान या अनादर करने से पारिवारिक अशांति बढ़ सकती है।

    तामसिक भोजन से परहेज
    अमावस्या के दिन सात्विक आहार लेने और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही स्वच्छता बनाए रखना और सुबह जल्दी स्नान करना भी शुभ माना जाता है।

    सुनसान जगहों से दूरी
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय मानी जाती है। इसलिए श्मशान घाट या सुनसान स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    नए कार्यों की शुरुआत न करें
    इस दिन नए कार्य शुरू करना या बड़ी खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे कार्यों में बाधा या असफलता आ सकती है।

    धार्मिक महत्व और मान्यताएं
    ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों को समर्पित तिथि माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सही तरीके से किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।

  • भारत के समर्थन में आया बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी के मुसलमानों पर हमले के आरोपों को किया खारिज

    भारत के समर्थन में आया बांग्लादेश, जमात-ए-इस्लामी के मुसलमानों पर हमले के आरोपों को किया खारिज

    नई दिल्ली। भारत में मुसलमानों पर कथित हमलों को लेकर उठे विवाद पर बांग्लादेश ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए ऐसे आरोपों को खारिज कर दिया है। ढाका की ओर से कहा गया है कि उसे भारत में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ किसी तरह के उत्पीड़न की कोई आधिकारिक या कूटनीतिक सूचना नहीं मिली है।

    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद भारत और पड़ोसी देशों के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कुछ संगठनों ने भारत में मुसलमानों पर अत्याचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को आधारहीन बताया है।

    जमात-ए-इस्लामी के आरोपों को किया खारिज
    बांग्लादेश ने जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े संगठनों के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। ढाका प्रशासन का कहना है कि ऐसे दावे किसी प्रमाण या आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं और इनमें कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित पुरानी या भ्रामक वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है।

    गृह मंत्री का बयान
    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार के पास भारत में मुसलमानों के खिलाफ किसी भी तरह के उत्पीड़न की कोई पुष्टि नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या आंकड़े मौजूद नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के राजनयिक मिशन और विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है।

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर रुख
    बांग्लादेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बिना किसी आधार के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करना चाहती। ढाका ने भारत के साथ स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना का भी संकेत दिया गया है, हालांकि कहा गया है कि इस पर अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।