Author: bharati

  • उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती

    उज्जैन में अनोखी पहल: सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, खर्च में भारी कटौती


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Ujjain में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन ने ईंधन बचत की दिशा में एक अनोखी और अनुकरणीय पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत अपील और मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
    अब सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अधिकारी अलग-अलग वाहनों की बजाय एक ही ट्रैवलर बस में यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त सहित करीब 15 अधिकारी एक साथ बस में बैठकर 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के निरीक्षण के लिए पहुंचे।
    पहले स्थिति यह थी कि हर दिन विभिन्न विभागों के अधिकारी 15 अलग-अलग इनोवा वाहनों से निरीक्षण के लिए निकलते थे, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता था। अनुमान के अनुसार, केवल एक दिन के निरीक्षण में लगभग 6750 रुपये तक का ईंधन खर्च हो जाता था।
    नई व्यवस्था के तहत अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा कर रहे हैं, जिससे खर्च में भारी कमी आई है। ट्रैवलर बस के उपयोग से यह पूरा सफर अब लगभग 250 रुपये के डीजल खर्च में पूरा हो रहा है, हालांकि बस का दैनिक किराया करीब 4100 रुपये है।
    प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर भी दबाव घटेगा। पहले कई वाहनों के काफिले से सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती थी, अब एक ही वाहन से यात्रा होने पर यह समस्या कम हो गई है।
    निरीक्षण के दौरान अधिकारी सुबह 6 बजे से घाटों और प्रस्तावित एप्रोच रोड का जायजा लेते हैं और कई किलोमीटर पैदल भी चलते हैं। इस दौरान निर्माण कार्यों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि यह निर्णय न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत होगी। सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे तो समन्वय बेहतर होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
    कलेक्टर ने इसे एक अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था आगे चलकर अन्य जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।

  • जबलपुर में सुसाइड केस: वीडियो रिकॉर्ड कर युवक ने की आत्महत्या, शादी टूटने से था परेशान

    जबलपुर में सुसाइड केस: वीडियो रिकॉर्ड कर युवक ने की आत्महत्या, शादी टूटने से था परेशान


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur में एक दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राजस्थान के झालावाड़ निवासी 25 वर्षीय युवक लोकेश सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अब करीब दो महीने बाद सामने आए एक वीडियो ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।

    घटना 3 मार्च की बताई जा रही है, जब लोकेश का शव जबलपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर नहर किनारे एक पेड़ पर फंदे से लटका मिला था। पुलिस ने उस समय शव का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया था और मामला सामान्य आत्महत्या मानकर जांच बंद कर दी गई थी।

    लेकिन हाल ही में मृतक के मोबाइल से मिला एक वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर से खुल गया है। वीडियो में लोकेश ने आत्महत्या से ठीक पहले अपनी मौत के लिए ससुराल पक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। उसने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उसकी फोटो डालकर उसकी बदनामी की गई, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया।

    मृतक ने वीडियो में कुछ लोगों के नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए और भावनात्मक रूप से आहत होकर आत्महत्या करने की बात कही। वीडियो सामने आने के बाद परिवार ने इसे पुलिस को सौंप दिया है।

    परिजनों के अनुसार लोकेश की शादी बचपन में तय हुई थी, लेकिन बाद में रिश्ते में तनाव बढ़ता चला गया। पिता का आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से लगातार दबाव और विवाद के कारण उनका बेटा मानसिक तनाव में था।

    मामले में एक और पहलू यह भी सामने आया है कि घटना से पहले युवक द्वारा सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक फोटो पोस्ट किए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया था, जिसके बाद रिश्ता टूटने की स्थिति बन गई थी।

    अब पुलिस ने वीडियो के आधार पर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में जिन लोगों के नाम लिए गए हैं, उनसे पूछताछ की जाएगी और सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला आत्महत्या के पीछे के कारणों और सोशल मीडिया विवाद के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • सोनिया गांधी की तबीयत फिर बिगड़ी, गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती, छोटी सर्जरी की तैयारी जारी

    सोनिया गांधी की तबीयत फिर बिगड़ी, गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती, छोटी सर्जरी की तैयारी जारी


    नई दिल्ली । भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और अनुभवी नेता Sonia Gandhi की तबीयत एक बार फिर अचानक बिगड़ने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता का माहौल बन गया है। जानकारी के अनुसार उन्हें गुरुग्राम स्थित Medanta The Medicity में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि यह भर्ती एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया के लिए की गई है, हालांकि स्वास्थ्य स्थिति को लेकर डॉक्टरों ने अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार Sonia Gandhi लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। खासकर श्वसन तंत्र और फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतों के कारण उन्हें समय-समय पर चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता पड़ती रही है। हाल के महीनों में भी उनकी तबीयत में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिसके चलते उन्हें पहले भी अस्पताल में कुछ समय के लिए भर्ती रहना पड़ा था। इस बार भी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद एहतियात के तौर पर उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

    अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन चिकित्सा टीम किसी भी तरह की लापरवाही से बचते हुए लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है। सर्जरी को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और विशेषज्ञों की टीम हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता उत्पन्न न हो।

    इस बीच उनके परिवार के सदस्य भी अस्पताल में मौजूद हैं और लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं। परिवार की ओर से उनकी देखभाल को प्राथमिकता दी जा रही है और हर छोटे-बड़े अपडेट पर ध्यान दिया जा रहा है। उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और राजनीतिक हलकों में भी चिंता देखी जा रही है, जहां लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

    Sonia Gandhi का भारतीय राजनीति में लंबा और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई है और देश की राजनीति में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। ऐसे में उनकी तबीयत से जुड़ी हर खबर को गंभीरता से लिया जाता है और देशभर में उनके समर्थक उनके स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं।

    वर्तमान परिस्थितियों में डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आने वाले समय में उनकी सर्जरी और स्वास्थ्य सुधार को लेकर और स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल अस्पताल में उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखा गया है और चिकित्सा टीम पूरी सावधानी के साथ उनका उपचार कर रही है ताकि जल्द से जल्द उनकी स्थिति सामान्य हो सके।

  • मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं

    मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल जिले में चिकित्सा सुविधाएं बेहद कमजोर हैं और मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है।
    याचिकाकर्ता के अनुसार मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें अधिकांश लोग ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 17 डॉक्टर ही वर्तमान में तैनात हैं।
    याचिका में यह भी बताया गया है कि कई अहम विशेषज्ञ पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर रेफर करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी बाधित हैं, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगे परीक्षण कराने पड़ते हैं।
    सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूति वार्ड की बताई गई है, जहां बिस्तरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
    मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Sachdeva और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई जून में होगी।
    याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थिति सुधारने के लिए कई बार प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
    कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाए, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति समयबद्ध तरीके से हो और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला न सिर्फ मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को भी उजागर कर रहा है।

  • NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने

    NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान मिली है, जिन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था।

    जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के माध्यम से इसे कई राज्यों में फैलाया गया। शुरुआती कड़ी महाराष्ट्र से जुड़ती नजर आई, जहां से प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा।

    सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया। आरोप है कि डिजिटल माध्यमों और कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम के जरिए प्रश्नपत्र साझा किया गया, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग कठिन हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर छात्रों को परीक्षा की तैयारी के नाम पर ऐसे प्रश्न दिए गए, जो असली प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। कई मामलों में प्रश्नों की संरचना, भाषा और पैटर्न लगभग समान पाए गए, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पेपर पहले से ही लीक हो चुका था।

    इसके अलावा, कुछ एजेंटों और मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जो कथित रूप से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और आर्थिक लेन-देन में शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग जुड़े हुए थे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों छात्रों पर बड़ा असर पड़ा है, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।

    इसी बीच, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। परीक्षा को दोबारा कराने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर सबसे पहले कैसे बाहर आया और किन-किन स्तरों पर इसे आगे बढ़ाया गया। कई स्थानों पर पूछताछ और कार्रवाई भी जारी है।

    यह पूरा मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में पेपर लीक जैसे मामलों को रोकना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

  • ग्वालियर मौसम बदला-बदला: रात में ठंडक, सुबह निकलते ही धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी

    ग्वालियर मौसम बदला-बदला: रात में ठंडक, सुबह निकलते ही धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी

    नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के Gwalior में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। कभी तेज बारिश और आंधी तो कभी चिलचिलाती धूप ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते कुछ दिनों से शहर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

    मंगलवार शाम अचानक आई आंधी और बारिश के बाद रात के समय लोगों को हल्की राहत जरूर मिली, जब तापमान में गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री से घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी।
    बुधवार सुबह होते ही तेज धूप ने फिर से शहर को गर्मी की चपेट में ले लिया। हवा में लगभग 60 प्रतिशत नमी के कारण उमस और बढ़ गई, जिससे लोगों को भारी असहजता महसूस हुई। मौसम में इस बदलाव के चलते दिनभर बेचैनी का माहौल बना रहा।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुबह के कुछ ही घंटों में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुबह 5:30 बजे जहां तापमान 25.6 डिग्री था, वहीं 8:30 बजे तक यह बढ़कर 31.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह लगभग 5.8 डिग्री का उछाल दर्शाता है, जो मौसम में अस्थिरता का संकेत है।
    दिन के समय बढ़ती गर्मी का असर शहर की रफ्तार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर होते ही बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है। लोग तेज धूप से बचने के लिए छाते, गमछे और पानी की बोतलों का सहारा ले रहे हैं। चिकित्सकों ने भी सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रह सकता है और तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही लू जैसे हालात बनने की आशंका भी जताई गई है, जिससे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
    फिलहाल मौसम का यह बदलता मिजाज लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आ रहा है, जहां रात की ठंडक के बाद दिन की गर्मी चुनौती बनती जा रही है।
  • स्विमिंग पूल में डूबने से मासूम की मौत, ग्वालियर में दफनाने के बाद पोस्टमॉर्टम की उठी मांग

    स्विमिंग पूल में डूबने से मासूम की मौत, ग्वालियर में दफनाने के बाद पोस्टमॉर्टम की उठी मांग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Gwalior में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया है, जहां एक होटल के स्विमिंग पूल में डूबने से 7 वर्षीय बच्चे वेद पाल की मौत हो गई। घटना गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित एबी रोड के एक होटल में सोमवार रात हुई, जब परिवार डिनर और पूल पार्टी के लिए वहां पहुंचा था। जानकारी के अनुसार, बच्चा पहले बच्चों के पूल में खेल रहा था, लेकिन कुछ समय बाद वह अचानक वहां से गायब हो गया। तलाश के दौरान वह बड़े स्विमिंग पूल की गहराई में मिला, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
    हादसे के बाद परिवार पूरी तरह सदमे में था और देर रात लगभग 1 बजे बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन अगले दिन मामला तब पलटा जब लोगों ने परिजनों को होटल प्रबंधन की संभावित लापरवाही के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने दोबारा मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से संपर्क किया।
    परिजनों का आरोप है कि होटल में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही लाइफगार्ड मौजूद था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इसी आधार पर उन्होंने शव को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।
    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत दफनाए गए शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, जो कि इस तरह का एक दुर्लभ मामला माना जा रहा है।
    घटना के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह जांच का विषय है कि क्या स्विमिंग पूल के पास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, चेतावनी संकेत और निगरानी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
    पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    फिलहाल यह पूरा मामला जांच के दायरे में है और एक मासूम की मौत ने पूरे क्षेत्र को गम और सवालों से भर दिया है।
  • इंदौर में बड़ा मामला: पुलिस पर मारपीट का आरोप, शादी और तलाक विवाद में फंसा परिवार

    इंदौर में बड़ा मामला: पुलिस पर मारपीट का आरोप, शादी और तलाक विवाद में फंसा परिवार


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore में एक पारिवारिक विवाद अब पुलिस और एक डॉक्टर के बीच गंभीर टकराव में बदल गया है। हीरानगर थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना के एक मामले के बाद डॉक्टर अभिषेक ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

    पूरा मामला एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उसने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। महिला का कहना है कि उसकी शादी 29 नवंबर 2025 को हुई थी और शादी के कुछ ही दिनों बाद उसका पति नोएडा चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष उसे कार और पैसों के लिए प्रताड़ित करता था।

    महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, जेठ (डॉक्टर अभिषेक), सास-ससुर सहित पूरे परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सभी पक्षों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।

    इसी दौरान मामला तब और बढ़ गया जब डॉक्टर अभिषेक ने पुलिस पर ही मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगा दिए। उनका कहना है कि उन्हें थाने में बुलाकर उनके साथ गलत व्यवहार किया गया, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

    थाना प्रभारी के अनुसार, पुलिस ने केवल कानूनी कार्रवाई के तहत पूछताछ की थी और आरोपों से बचने के लिए डॉक्टर झूठे आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी कार्रवाई नियमों के तहत की गई है और दहेज प्रताड़ना के मामले में पर्याप्त सबूतों के आधार पर FIR दर्ज हुई है।

    इस पूरे विवाद में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसमें महिला ने आरोप लगाया है कि उसका पति नोएडा में किसी अन्य युवक के साथ रह रहा है और वह उससे तलाक लेना चाहता है।

    वहीं, पूछताछ के दौरान डॉक्टर अभिषेक ने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल भी ले गई, लेकिन जांच में उनकी स्थिति सामान्य पाई गई।

    फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला और जटिल होता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सच्चाई सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • गोल्ड बना और महंगा, एक तोला खरीदने की लागत पहुंची नए रिकॉर्ड स्तर पर

    गोल्ड बना और महंगा, एक तोला खरीदने की लागत पहुंची नए रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने बाजार को एक बार फिर चौंका दिया है और आम खरीदारों की चिंता को बढ़ा दिया है। हाल ही में आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में ही दामों में लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी देखी गई, जिसने पूरे ज्वैलरी बाजार की दिशा बदल दी।

    बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब शादी और त्योहारी सीजन की तैयारी जोरों पर है, और ऐसे में Gold की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाल रही हैं। निवेशकों के साथ-साथ खुदरा खरीदार भी अब खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं क्योंकि दाम लगातार नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ रहे हैं।

    कीमतों में इस तेजी का असर हर कैरेट के सोने पर देखने को मिल रहा है। 24 कैरेट सोना अब ऐतिहासिक स्तरों के करीब पहुंच चुका है, जबकि 22 कैरेट और 18 कैरेट ज्वैलरी की कीमतों में भी समान रूप से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे साफ है कि केवल निवेश ही नहीं बल्कि आभूषण बाजार भी इस तेजी से प्रभावित हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि के पीछे केवल घरेलू नीतिगत बदलाव ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मांग में तेजी आई है। इसके अलावा मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव ने भी कीमतों को और ऊपर धकेल दिया है।

    सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिल रहा है, जहां अब एक तोला सोना खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। भारतीय बाजार में एक तोला लगभग 11.66 ग्राम के बराबर माना जाता है और मौजूदा कीमतों के अनुसार इसका मूल्य करीब 1.90 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इस स्तर पर पहुंचने के बाद कई लोग अपनी खरीदारी योजनाओं को टालने पर मजबूर हो रहे हैं।

    बाजार में यह स्थिति केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मांग पर भी पड़ सकता है। जैसे-जैसे कीमतें बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे ग्राहकों की खरीद क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है। ज्वैलर्स का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में आभूषणों की बिक्री में गिरावट देखने को मिल सकती है।

    हालांकि कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि इतनी तेज बढ़ोतरी के बाद बाजार में स्थिरता या हल्की गिरावट की संभावना भी बनी रहती है, लेकिन फिलहाल का माहौल पूरी तरह तेजी का संकेत दे रहा है। निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर और जोखिम दोनों साथ लेकर आई है।

  • डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

    डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore के द्वारकापुरी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बेसहारा कुत्तों को खाना खिला रहे एक वॉलंटियर अमन तोमर पर आधा दर्जन से अधिक लोगों ने हमला कर दिया। यह पूरी वारदात पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
    जानकारी के अनुसार, पीड़ित अमन तोमर लंबे समय से इलाके में आवारा कुत्तों को भोजन कराने का काम कर रहे हैं। घटना उस समय हुई जब उन्होंने एक व्यक्ति को कुत्ते के साथ मारपीट करते हुए देखा और उसे रोकने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक हो गया।
    आरोप है कि कुछ ही देर बाद कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अमन तोमर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया।
    घटना के बाद स्थानीय पशु प्रेमियों ने पुलिस पर शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया और मामला पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचाया। इसके बाद People For Animals की इंदौर इकाई के प्रतिनिधियों सहित अन्य कार्यकर्ता भी शिकायत लेकर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले का सीसीटीवी फुटेज अधिकारियों को सौंपा।
    शिकायत के बाद पुलिस ने द्वारकापुरी थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
    पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वहीं, इस घटना ने इलाके में पशु सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।