Author: bharati

  • चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव

    चैत्र नवरात्र 2026: पहले तीन दिन रहेगा पंचक का साया, जानिए घटस्थापना पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व माना जाता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित होता है। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इसकी शुरुआत होती है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। नवरात्र के पहले दिन होने वाली सबसे महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना या घटस्थापना होती है जिसे देवी शक्ति के घर में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का वास होता है।

    हालांकि इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत के साथ एक विशेष ज्योतिषीय स्थिति भी बन रही है। दरअसल नवरात्र के पहले दिन से पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार पंचक 16 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 21 मार्च 2026 तक रहेगा। इस तरह नवरात्र के शुरुआती तीन दिन पंचक की अवधि में ही पड़ेंगे। पंचक को ज्योतिष शास्त्र में ऐसा समय माना जाता है जब कुछ विशेष प्रकार के शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान वाहन खरीदना नया व्यवसाय शुरू करना गृह प्रवेश करना या विवाह जैसे बड़े और मांगलिक कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या उनका अपेक्षित फल नहीं मिल पाता। इसी कारण लोग पंचक के दौरान बड़े आर्थिक या सामाजिक निर्णय लेने में सावधानी बरतते हैं।

    हालांकि धार्मिक और नियत तिथि वाले पर्व त्योहारों पर पंचक का प्रभाव नहीं माना जाता। इसी वजह से नवरात्र की घटस्थापना पर पंचक का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करना पूरी तरह से शुभ और शास्त्रसम्मत है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा अर्चना व्रत और मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

    इस वर्ष नवरात्र के पहले तीन दिन पंचक में पड़ने के कारण श्रद्धालुओं को यह सलाह दी जा रही है कि धार्मिक कार्यों को छोड़कर अन्य मांगलिक गतिविधियों से परहेज करें। जैसे वाहन खरीदना नया व्यापार शुरू करना गृह प्रवेश विवाह या मुंडन जैसे संस्कार इन दिनों में टाल देना बेहतर माना जाता है।

    नवरात्र के नौ दिनों में भक्त माता दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं भजन कीर्तन करते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और घरों तथा मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन करते हैं। श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से जीवन में मानसिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

    इस प्रकार पंचक के प्रभाव के बावजूद चैत्र नवरात्र की घटस्थापना और पूजा अर्चना पूरी तरह शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु इस पावन पर्व को पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाते हैं और मां दुर्गा से सुख समृद्धि तथा कल्याण की कामना करते हैं।

  • चैत्र नवरात्र 2026: डोली में आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगा प्रस्थान; 72 साल बाद बन रहा विशेष संयोग

    चैत्र नवरात्र 2026: डोली में आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगा प्रस्थान; 72 साल बाद बन रहा विशेष संयोग

    नई दिल्ली । शक्ति उपासना का महान पर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार नवरात्र की शुरुआत गुरुवार से हो रही है जिसके कारण शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का आगमन डोली पर माना जा रहा है। धार्मिक ग्रंथों में डोली में माता के आगमन को महामारी संघर्ष या प्राकृतिक चुनौतियों का संकेत माना गया है जो समाज को सावधान और सतर्क रहने का संदेश देता है। हालांकि इस बार माता रानी का प्रस्थान हाथी पर होगा जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। हाथी पर माता का गमन अच्छी वर्षा समृद्ध कृषि आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि कई विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि लगभग 72 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है जब अमावस्या तिथि के साये में ही कलश स्थापना की जाएगी। सामान्यतः प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना का विधान होता है लेकिन इस बार सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्रों के अनुसार उसी समय विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य भोला पंडित के अनुसार यह दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी। हालांकि उस समय सूर्योदय अमावस्या तिथि में रहेगा इसलिए शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार उसी अवधि में कलश स्थापना करना शुभ माना जाएगा। इस दिन शुक्ल योग ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का त्रिवेणी संगम भी बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह महासंयोग भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। गुरुवार से पर्व शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन डोली पर होगा जिसे चुनौतियों का संकेत माना गया है लेकिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख शांति और समृद्धि के द्वार खोल सकती है।

    नवरात्रि के पहले दिन यानी 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 40 मिनट तक रहेगा जबकि दूसरा शुभ समय सुबह 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    नवरात्र पर्व को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक भक्तों की सुविधा के लिए सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। मंदिर समितियों और सेवादारों द्वारा व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक कर सुरक्षा यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    इस तरह चैत्र नवरात्र का यह पावन पर्व न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है बल्कि विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण इस वर्ष इसे और भी अधिक महत्वपूर्ण और फलदायी माना जा रहा है।

  • OTT पर दस्तक देने जा रही विजय सेतुपति की मिस्ट्री वेब सीरीज ‘मुथु एंगिरा काट्टान’

    OTT पर दस्तक देने जा रही विजय सेतुपति की मिस्ट्री वेब सीरीज ‘मुथु एंगिरा काट्टान’


    नई दिल्ली। साउथ के सुपरस्टार विजय सेतुपति अपनी आगामी वेब सीरीज ‘मुथु एंगिरा काट्टान’ की रिलीज़ की तैयारियों में जुटे हैं। इस मिस्ट्री ड्रामा का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ किया गया है, जो दर्शकों को मुख्य किरदार मुथु की रहस्यमयी और जटिल दुनिया की झलक दिखाता है।

    कहानी की झलक
    ट्रेलर में मुथु एक ऐसा किरदार दिखाई देता है, जिसे हर कोई अलग-अलग नजरिए से देखता है।

    किसी के लिए मुथु महान हस्ती,

    किसी के लिए खतरा,

    और किसी के लिए चमत्कार है।

    सीरीज की कहानी दर्शकों को मुथु के पीछे की सच्चाई तक पहुँचने का रोमांच देती है और यह समझने की कोशिश करती है कि लोग उसे इतना अलग-अलग नजरिए से क्यों देखते हैं। गहराई और परतों वाला स्टोरीटेलिंग स्टाइल इसे नाटकीय और रोमांचक बनाता है।

    कास्ट और क्रिएटिव टीम
    मुख्य कलाकार: विजय सेतुपति, मिलिंद सोमन
    सपोर्टिंग कलाकार: सुदेव नायर, वदिवेल मुरुगन, ऋषा जैकब्स, VJ पार्वती, कलैवनी भास्कर, मुथुकुमार
    निर्माता और निर्देशक: M. Manikandan, B. Ajithkumar

    OTT रिलीज़ की तारीख और प्लेटफ़ॉर्म
    स्ट्रीमिंग शुरू: 27 मार्च, 2026
    प्लेटफ़ॉर्म: JioHotstar (Hotstar Specials)
    “यारू इंथा मुथु एंगिरा काट्टान? Hotstar Specials ‘मुथु एंगिरा काट्टान’ 27 मार्च से सिर्फ JioHotstar पर।”

    विजय सेतुपति का वर्कफ्रंट
    इस वेब सीरीज के अलावा विजय सेतुपति की आने वाली फिल्में हैं:

    स्लम डॉग: 33 टेम्पल रोड

    पॉकेट नॉवेल

    जेलर 2 (कैमियो)

    अरसन
    इस मिस्ट्री थ्रिलर को देखने के लिए 27 मार्च से Hotstar पर तैयार रहें, और जानें कि मुथु उर्फ काट्टान कौन है!

  • भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त उर्वरक भंडार : विदेश मंत्रालय

    भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त उर्वरक भंडार : विदेश मंत्रालय


    नई दिल्ली।
    केन्द्र सरकार ने कहा है कि भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त उर्वरक भंडार है। शनिवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस समय भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है, विशेष रूप से खरीफ 2026 के लिए। यूरिया का हमारा भंडार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक है। डाई-अमोनियम फास्फेट(डीएपी) का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम (एनपीके) का भंडार भी पिछले वर्ष की तुलना में आज काफी अधिक है। यूरिया के हमारे घरेलू उत्पादन की बात करें तो, हमारा वर्तमान उत्पादन हमारी निर्धारित खपत से अधिक होगा, विशेष रूप से रबी का मौसम समाप्त होने वाला है। इसके अलावा, हमने अपने कुछ संयंत्रों के निर्धारित वार्षिक रखरखाव को समय से पहले पूरा कर लिया है, जिसका अर्थ है कि हम उपलब्ध गैस के साथ उत्पादन को अधिकतम करने में सक्षम हैं।

    पत्रकार वार्ता में रणधीर जायसवाल ने कहा कि उर्वरक विभाग ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय रहते वैश्विक निविदाएं जारी कर दी थीं। इन्हें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और उम्मीद है मार्च के अंत तक विभिन्न स्रोतों से ऑर्डर की गई अधिकांश मात्रा प्राप्त हो जाएगी। उर्वरक विभाग ने प्रतिस्पर्धी आधार पर स्पॉट गैस की खरीद का भी निर्णय लिया है और पहले चरण की खरीद मंगलवार तक पूरी हो जाएगी। 15 मई तक खरीफ की मांग चरम पर पहुंचने तक उर्वरकों का पर्याप्त भंडार प्राप्त हो जाएगा। उर्वरक विभाग वैश्विक और घरेलू दोनों ही रुझानों पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहा है और आवश्यक कदम उठा रहा है।

    ब्रिक्स के संबंध में रणधीर जायसवाल ने कहा कि कुछ सदस्य पश्चिम एशिया क्षेत्र की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं, जिससे चल रहे संघर्ष पर ब्रिक्स के साझा रुख पर आम सहमति बनाने में बाधा आ रही है। ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में, भारत शेरपा चैनल के माध्यम से सदस्य देशों के बीच चर्चाओं को सुगम बना रहा है। पिछली वर्चुअल ब्रिक्स शेरपा बैठक 12 मार्च को आयोजित की गई थी। इसके अतिरिक्त, भारतीय नेतृत्व क्षेत्र में ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है। भारत का यह संपर्क जारी रखेगा।

  • जेएलएन स्टेडियम में ‘ओडिशा पर्व’ की धूम, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हुईं शामिल

    जेएलएन स्टेडियम में ‘ओडिशा पर्व’ की धूम, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हुईं शामिल


    नई दिल्ली।
    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के साथ जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में आयोजित ‘ओडिशा पर्व-2026’ में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित किया और दिल्ली में रहने वाले उड़िया समुदाय को इस सांस्कृतिक उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और आस्था का जीवंत उत्सव बताते हुए इसकी सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत गर्व और खुशी की बात है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ओडिशा की संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं को इतने भव्य रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। दिल्ली में रहने वाला हर उड़िया परिवार आज भी अपनी जड़ों, अपनी सांस्कृतिक विरासत और अपनी मातृभूमि ओडिशा से गहराई से जुड़ा हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने इस भव्य आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 2017 से लगातार आयोजित हो रहा ‘ओडिशा पर्व’ आज लगभग एक दशक की गौरवपूर्ण यात्रा पूरी कर चुका है। दिल्ली में रहने वाला हर उड़िया परिवार पूरे वर्ष इस पर्व का उत्सुकता से इंतजार करता है क्योंकि यह उत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है बल्कि यह लोगों को अपनी परंपराओं और पहचान से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि उन्हें इस मंच से दिल्ली में बसे अपने उड़िया परिवार को अपने विस्तारित परिवार की तरह संबोधित करने का अवसर मिला है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन भारत की विविधता और एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें यह विशेष सौभाग्य प्राप्त हुआ कि जब उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने की जिम्मेदारी मिली तो वह सबसे पहले ओडिशा जाकर प्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने गई। दिल्ली में आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भी उन्होंने श्रद्धापूर्वक भाग लिया और उस यात्रा की परंपराओं का पालन करते हुए ‘छेरा पहरा’ की पवित्र रीति में भी सहभागिता की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में लगभग 15 लाख लोग ओडिशा से जुड़े हुए हैं और यही इस महानगर की विशेषता है कि यहां देश के हर राज्य और हर संस्कृति के लोग मिलकर रहते हैं। दिल्ली सभी को खुले दिल से अपनाती है और हर नागरिक को यह विश्वास दिलाती है कि यह शहर उनका अपना है। उन्होंने ओडिशा में रहने वाले लोगों को भी आश्वस्त करते हुए कहा कि दिल्ली में रहने वाले उनके परिवार जन सुरक्षित हैं और दिल्ली सरकार उनकी हर आवश्यकता और चिंता का पूरा ध्यान रखती है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने पहली बार उत्कल दिवस को सरकारी स्तर पर भव्य रूप से आयोजित कर समाज के लोगों का सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु जगन्नाथ केवल ओडिशा के लोगों की आस्था का केंद्र नहीं हैं, बल्कि दिल्ली में भी विभिन्न समुदायों के लोग अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और रथ यात्राओं का आयोजन करते हैं। उन्होंने उन सभी लोगों का भी अभिनंदन किया जो इस परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य और इतिहास की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश अपनी विविध परंपराओं, लोकनृत्यों, गीतों और साहित्य के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है।

  • हॉकी : फाइनल में इंग्लैंड हराया, फिर भी भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई

    हॉकी : फाइनल में इंग्लैंड हराया, फिर भी भारत ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई


    हैदराबाद।
    एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 क्वालिफायर्स के फाइनल में भारत की महिला हॉकी टीम को इंग्लैंड के हाथों 0-2 की हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस हार के बावजूद भारतीय टीम ने आगामी हॉकी वर्ल्ड कप, बेल्जियम और नीदरलैंड्स 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया।

    जीएमसी बालयोगी हॉकी ग्राउंड में खेले गए मैच में इंग्लैंड की ग्रेस बाल्सडॉन (13’) और एलिजाबेथ नील (43’) ने गोल किए, जबकि भारतीय टीम कोई गोल नहीं कर सकी।

    भारत ने मैच की शुरुआत आक्रामक रूप से की। नवीत कौर की मदद से पहले दो मिनट में ही भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन उनका ड्रैग फ्लिक इंग्लैंड की गोलकीपर ने रोका। पहले क्वार्टर के अंत में इंग्लैंड ने पेनल्टी कॉर्नर का फायदा उठाते हुए ग्रेस बाल्सडॉन ने गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई।

    दूसरे क्वार्टर में खेल समान रूप से संतुलित रहा। भारत ने पहले हाफ में आठ बार सर्कल में प्रवेश किया और इंग्लैंड की रक्षा को चुनौती दी, लेकिन गोलकीपर पर दबाव डालने में सफल नहीं रही। इंग्लैंड ने अपनी एक गोल की बढ़त को पहले हाफ के अंत तक बनाए रखा।

    तीसरे क्वार्टर में इंग्लैंड ने खेल की गति को नियंत्रित किया और गेंद पर कब्जा बनाए रखा। इस दौरान भारत को कुछ मौके मिले, लेकिन वे गोल में बदल नहीं सके। एलिजाबेथ नील का गोल भारतीय डिफेंडर से टकराने के बाद गोलपोस्ट में गया, जिससे इंग्लैंड की बढ़त 2-0 हो गई।

    चौथे क्वार्टर में भारत लगातार गोल की तलाश में आगे बढ़ता रहा और अंतिम क्षणों में पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया। लेकिन टीम गोल नहीं कर पाई और इंग्लैंड ने 2-0 की जीत दर्ज की।

    हालांकि इस हार के बावजूद भारतीय महिला टीम ने वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर सभी भारतीय हॉकी प्रशंसकों के लिए उत्साहजनक संदेश दिया। कोच और खिलाड़ियों ने मैच के दौरान अनुशासन और टीम वर्क का शानदार प्रदर्शन किया।

  • करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

    करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग ने शनिवार को करदाताओं से आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025–26) के लिए अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए ईमेल संदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने करदाताओं से त्रुटिपूर्ण ईमेल को नजरअंदाज करने की अपील की है।

    आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि उसे करदाताओं से गलत जानकारी वाले ईमेल मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई है। विभाग ने इस मुद्दे को ध्यान में लाने के लिए करदाताओं का धन्यवाद किया और असुविधा के लिए माफी मांगी है। आयकर ने बताया कि संचार प्रणाली के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता के समन्वय से इस मामले को सुलझाया जा रहा है।

    आयकर विभाग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए करदाताओं से इन ईमेल को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए कुछ ईमेल में महत्वपूर्ण लेन-देन से संबंधित गलत विवरण थे। दरअसल यह समस्या आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए भेजे गए ईमेल में सामने आई है। विभाग ने करदाताओं को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

    विभाग ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे पहले भेजे गए त्रुटिपूर्ण ईमेल को अनदेखा करें। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी लेन-देन की जानकारी की पुष्टि आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध अनुपालन पोर्टल के ‘ई-अभियान’ टैब के जरिए करें। ये संचार केवल करदाताओं को उनकी वित्तीय जानकारी की समीक्षा करने और अग्रिम कर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करते हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया में करदाताओं से सहयोग की अपेक्षा की है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले एक-दो दिनों से कई करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को आयकर विभाग की ओर से ‘नज’ ईमेल भेजे जा रहे थे। विभाग के इन ईमेल में यह कहा गया था कि करदाता द्वारा किया गया एडवांस टैक्स भुगतान उनके वित्तीय लेन-देन से मेल नहीं खाता है। इसके साथ ही ईमेल में उस साल के दौरान किए गए कुछ ‘महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन’ का भी जिक्र किया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

  • Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    Chaitra Navratri 2026: सेलेब्रिटी जैसा फेस्टिव लुक पाने के लिए ट्राई करें ये 7 ट्रेंडी कॉटन कुर्ता सेट्स

    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का त्योहार आस्था भक्ति और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में हर कोई चाहता है कि पूजा या त्योहार के मौके पर उसका लुक भी खास और आकर्षक लगे। खासतौर पर महिलाएं पारंपरिक परिधानों को प्राथमिकता देती हैं। मार्च के महीने में गर्मी भी बढ़ने लगती है इसलिए इस समय कॉटन कपड़े सबसे आरामदायक और स्टाइलिश विकल्प माने जाते हैं। कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स ऐसे ही आउटफिट्स में शामिल हैं जो स्टाइल और कंफर्ट दोनों का बेहतरीन संतुलन देते हैं।

    फेस्टिव सीजन में फ्लोरल प्रिंट वाले कुर्ता सेट्स काफी ट्रेंड में रहते हैं। पेस्टल रंगों पर बड़े-बड़े फूलों वाले प्रिंट न सिर्फ खूबसूरत लगते हैं बल्कि बहुत ही फ्रेश और एलिगेंट लुक भी देते हैं। इस तरह के कुर्ता सेट आप सुबह की अष्टमी या नवमी पूजा के दौरान आसानी से कैरी कर सकती हैं। इसके अलावा घर के किसी छोटे-मोटे फंक्शन में भी यह आउटफिट बहुत आकर्षक लगता है।

    अगर आप पारंपरिक लुक में थोड़ा फेस्टिव टच चाहती हैं तो जयपुरी गोटा पत्ती वर्क वाले कुर्ता सेट्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। जयपुरी प्रिंट के साथ हल्का गोटा पत्ती का काम सूट को और ज्यादा आकर्षक बना देता है। यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का बेहतरीन कॉम्बिनेशन माना जाता है और किसी भी उम्र की महिलाओं पर खूब जंचता है।

    नवरात्रि के मौके पर व्हाइट चिकनकारी कुर्ता सेट भी बेहद खास लुक देता है। सफेद रंग को शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है। सफेद कॉटन अनारकली कुर्ते के साथ अगर आप कलरफुल दुपट्टा कैरी करती हैं तो यह लुक और भी ज्यादा एलिगेंट और ग्रेसफुल नजर आता है। पूजा या पारिवारिक समारोह में यह स्टाइल बेहद आकर्षक लगता है।

    इन दिनों अंगरखा स्टाइल कुर्ता सेट्स भी काफी ट्रेंड में हैं। अनारकली कुर्ते में अंगरखा डिजाइन पारंपरिक लुक को और ज्यादा खास बना देता है। कई सेलेब्रिटीज भी इस स्टाइल को पसंद कर रहे हैं। यह आउटफिट आपको यूनिक और एथनिक लुक देता है जिससे आपका फेस्टिव लुक और भी अलग नजर आता है।

    इसके अलावा मोनोक्रोम कुर्ता सेट भी आजकल काफी पसंद किए जा रहे हैं। एक ही रंग का कुर्ता और प्लाजो सेट पहनने से लुक स्लीक और क्लासी दिखाई देता है। साथ ही यह स्टाइल हाइट को थोड़ा लंबा भी दिखाता है जिससे पूरा आउटफिट बेहद आकर्षक लगता है।

    नवरात्रि के दौरान बांधनी प्रिंट वाले कुर्ता सेट भी काफी लोकप्रिय रहते हैं। खासतौर पर लाल और पीले रंग के बांधनी अनारकली सूट पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इसके साथ अगर आप हल्की ज्वेलरी कैरी करें तो आपका पूरा फेस्टिव लुक और भी निखर कर सामने आता है।

    वहीं टियर डिजाइन यानी लेयर्स या स्टेप्स वाले अनारकली कुर्ता सेट भी इन दिनों खूब पसंद किए जा रहे हैं। इनका घेर बड़ा होता है जिससे यह डांडिया या गरबा जैसे आयोजनों के लिए परफेक्ट माने जाते हैं। डांस करते समय इनकी फ्लेयर बहुत खूबसूरत दिखाई देती है और यह तुरंत लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। कुल मिलाकर अगर आप इस नवरात्रि में पारंपरिक के साथ स्टाइलिश और आरामदायक लुक चाहती हैं तो कॉटन अनारकली कुर्ता सेट्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।

  • मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण

    मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सुविधाओं के पीछे इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना लगभग भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि मोटापा अब केवल दिखने या शरीर की बनावट से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर का वजन सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो यह केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के अंदरूनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। मोटापे के कारण शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है जो धीरे धीरे इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देती है। यही स्थिति आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है जिनमें Type 2 Diabetes High Blood Pressure Thyroid Disease और धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए विशेषज्ञ मोटापे को कई बीमारियों का प्रवेश द्वार भी मानते हैं।

    मोटापा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज का बदलता खानपान है। फास्ट फूड जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन शरीर में अनावश्यक कैलोरी जमा कर देता है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व कम और वसा व चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत भी मोटापे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और बच्चों का खेल के मैदान के बजाय मोबाइल या टीवी पर समय बिताना शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती।

    इसके साथ ही मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता या लगातार तनाव में रहता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से अधिक जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली और आदतों में बदलाव करें।

    मोटापा नियंत्रित करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना साइकिल चलाना या योग करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। नियमित व्यायाम से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही आहार में भी बदलाव जरूरी है। घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन हरी सब्जियां फल और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि चीनी और तेल का सेवन कम करना चाहिए।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए खासकर बच्चों के लिए। उन्हें अधिक समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर बैठने के बजाय शारीरिक खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना हर एक घंटे के बाद कुछ मिनट टहलना और दैनिक काम खुद करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें तो मोटापे से बचना संभव है और इसके कारण होने वाली कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष

    Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु के स्थान दिशा और उसके उपयोग को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि यदि घर में चीजें सही स्थान और संतुलन के साथ रखी जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। खासतौर पर रसोईघर को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ा होता है। रसोई में रखे फ्रिज का भी वास्तु के अनुसार विशेष महत्व बताया गया है। कई लोग जगह की कमी या सुविधा के कारण फ्रिज के ऊपर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं रख देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें फ्रिज के ऊपर रखना अशुभ माना जाता है।

    सबसे पहले बात करें भारी सामान की। अक्सर देखा जाता है कि लोग फ्रिज के ऊपर बड़े बर्तन डिब्बे या अन्य भारी सामान रख देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं माना जाता। फ्रिज पहले से ही एक भारी और स्थिर ऊर्जा वाला उपकरण होता है ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त वजन रखने से घर की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव या असहजता का माहौल बन सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर ज्यादा भारी सामान न रखा जाए और उस स्थान को हल्का रखा जाए।

    दूसरी महत्वपूर्ण चीज है दवाइयां। कई घरों में दवाइयों का डिब्बा ऐसी जगह रखा जाता है जहां वह आसानी से मिल सके। इसी कारण लोग उसे फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। फ्रिज ठंडक और स्थिर ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है जबकि दवाइयां बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐसे में दोनों को एक साथ रखने से घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना मानी जाती है।

    इसके अलावा फ्रिज के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक सामान रखना भी सही नहीं माना जाता। कई लोग चार्जर एक्सटेंशन बोर्ड एडेप्टर या छोटी इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। लेकिन फ्रिज स्वयं एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा उत्पन्न करता है। ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से ऊर्जा का असंतुलन बढ़ सकता है। वास्तु के अनुसार इससे घर में चिड़चिड़ापन तनाव और आपसी मतभेद बढ़ने की संभावना रहती है।

    धार्मिक वस्तुओं को भी फ्रिज के ऊपर रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना गया है। कई लोग भगवान की तस्वीर पूजा से जुड़ी सामग्री या धार्मिक पुस्तकें फ्रिज के ऊपर रख देते हैं लेकिन ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से भी सही नहीं माना जाता। फ्रिज एक सामान्य घरेलू उपकरण है इसलिए इसके ऊपर धार्मिक वस्तुएं रखने से उनका सम्मान कम माना जाता है। पूजा से संबंधित वस्तुओं को हमेशा घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर ही रखना चाहिए।

    इसी तरह कुछ लोग सजावट के लिए फ्रिज के ऊपर छोटा पौधा या पानी से भरा बर्तन भी रख देते हैं। वास्तु के अनुसार यह भी उचित नहीं माना जाता। फ्रिज बिजली से चलने वाला उपकरण है और उसके ऊपर पानी या पौधा रखने से ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर का स्थान साफ हल्का और लगभग खाली रखा जाए ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।