Author: bharati

  • एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

    नई दिल्ली । जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ रहा है, भारत में एआई और क्रिप्टो का संगम एक नई तकनीकी संरचना को जन्म दे रहा है। शुरुआती दौर में जब जनरेटिव एआई ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं सतही और ट्रेंड आधारित थीं। “एआई टोकन” तेजी से फैल रहे थे, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग सीमित नजर आता था। 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और अब एक अधिक गंभीर दिशा उभर रही है।

    मूल सवाल केवल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए-ऐसा ढांचा जो एआई आधारित गतिविधियों को प्रमाणित कर सके, प्रोत्साहनों को संतुलित करे, डिजिटल संसाधनों का मूल्य तय कर सके और उन प्रतिभागियों के बीच ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके, जो एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते।

    एआई और ब्लॉकचेन अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए हैं। एआई स्वचालन, सामग्री निर्माण और बड़े पैमाने पर निर्णय लेने की क्षमता देता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को नहीं हल करता। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन धीमे और सीमित होते हुए भी सत्यापन, नियमों का अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। इस कारण, दोनों तकनीकों का संयोजन व्यावहारिक जरूरत बनकर सामने आ रहा है-एआई बुद्धिमत्ता और क्रिप्टो भरोसे का आधार प्रदान करता है।

    वैश्विक उदाहरण इस दिशा को दर्शाते हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स का प्रोजेक्ट एटलस यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के सहयोग से क्रिप्टो प्रवाह का विश्लेषण करता है और नियामकीय निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है। सिंगापुर में TokenAIse जैसे जनरेटिव एआई उपकरण क्रिप्टो टोकनाइजेशन को समझने और अपनाने में मदद कर रहे हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसी परियोजनाएं ब्लॉकचेन का उपयोग औद्योगिक अनुपालन, डिजिटल सत्यापन और उत्पाद जीवनचक्र की पारदर्शिता के लिए कर रही हैं।

    भारत के लिए यह महत्वपूर्ण नीतिगत मोड़ है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और फ्रंटियर एआई एजेंडा ने साफ संदेश दिया कि एआई उपयोगी, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। वहीं क्रिप्टो नीति अभी भी अनुपालन-केंद्रित है-कड़े एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम और रिपोर्टिंग बाध्यताएं हैं। इस स्थिति में अवसर है कि क्रिप्टो को केवल ट्रेडिंग गतिविधि के बजाय एआई शासन और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के लिए इस्तेमाल किया जाए।

    क्यों जरूरी है? क्योंकि डीपफेक, स्वचालित फ़िशिंग और बॉट आधारित ठगी जैसी धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। पारदर्शी लेजर लेनदेन, ऑन-चेन निगरानी और गोपनीयता-संवेदनशील पहचान प्रणालियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं। एफएटीएफ का ध्यान स्थिर मुद्राओं और ट्रैवल रूल अनुपालन पर भी इसी दिशा में संकेत देता है।

    भारत में एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों या विकेंद्रीकरण से तय नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। एक जिम्मेदार एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए ब्लॉकचेन भरोसे की परत बन सकता है और एआई को सुरक्षित, उत्तरदायी और ऑडिट योग्य ढांचे में जोड़ सकता है। यही भारत को नई तकनीकी संरचना में नेतृत्व देने का वास्तविक अवसर है।

  • भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया

    भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में निर्यात आधारित कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जाए। इससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि किसानों को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही।

    प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है और कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बदल रही है और इसलिए अब चर्चा निर्यात आधारित खेती, फसल विविधीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रित होनी चाहिए।

    पीएम मोदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों से मिलकर काम करने की अपील की ताकि उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दिया जा सके और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    प्रधानमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मत्स्य पालन को भविष्य का बड़ा निर्यात आधारित क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें नए बिजनेस मॉडल और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ानी होगी।

    पीएम मोदी ने उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुपालन और तटीय मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश और उद्यमियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एसएचई-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की भी बात कही।

    प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वे किया गया है।

    केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती, तकनीक आधारित खेती और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए कई लक्षित कदमों की घोषणा की। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है।

    प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की खेती को समर्थन मिलेगा। इन कदमों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

  • डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

    नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही।

    केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।

    डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया।

    इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है।

    हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही।

    कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।

    निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है।

    वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।
  • भोपाल में 'दोस्ती' की खूनी सजा: सेल्समैन का अपहरण कर बेल्ट-डंडों से पीटा, अधमरा कर अस्पताल में फेंका

    भोपाल में 'दोस्ती' की खूनी सजा: सेल्समैन का अपहरण कर बेल्ट-डंडों से पीटा, अधमरा कर अस्पताल में फेंका


    भोपाल। राजधानी के कोलार क्षेत्र में आपसी रंजिश और गैंगवार जैसी मानसिकता ने एक 22 वर्षीय युवक की जान जोखिम में डाल दी। गारमेंट्स शॉप में काम करने वाले दिनेश अहिरवार को सिर्फ इसलिए अगवा कर बेरहमी से पीटा गया क्योंकि वह बदमाशों के दुश्मन का दोस्त था। आरोपियों ने न केवल उसे मरणासन्न स्थिति में पहुंचाया, बल्कि पकड़े जाने के डर से ‘एक्सीडेंट’ की झूठी कहानी रचकर उसे अस्पताल छोड़ दिया।
    बांसखेड़ी पुलिया से ‘किडनैपिंग’ और 2 घंटे का टॉर्चर घटना 4 मार्च 2026 की दोपहर की है। दिनेश जब बांसखेड़ी पुलिया के पास से गुजर रहा था, तभी निक्की शुक्ला, आकाश प्रजापति और उनके 5-6 साथियों ने उसे घेर लिया।बदमाशों ने चिल्लाकर कहा, तू विशु शर्मा के साथ क्यों घूमता है? उससे हमारी पुरानी रंजिश है, अब उसकी दोस्ती का खामियाजा तुझे भुगतना होगा। बर्बरता: आरोपी उसे जबरन कार में डालकर सोम्या ग्रीन सिटी के पास एक सुनसान इलाके में ले गए।
    वहां करीब दो घंटे तक उसे लाठी, डंडों और बेल्ट से तब तक पीटा गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। मारपीट इतनी भीषण थी कि दिनेश की उंगलियां फ्रैक्चर हो गई और पूरा शरीर नीली चोटों से भर गया। शातिर दिमाग: पिटाई के बाद रचा ‘एक्सीडेंट’ का ड्रामा जब दिनेश बेहोश हो गया, तो आरोपी घबरा गए। खुद को बचाने के लिए उन्होंने एक शातिर चाल चली वे दिनेश को कोलार रोड स्थित सीएचसी अस्पताल ले गए। दिनेश के ही मोबाइल से उसकी बहन शिवानी को फोन किया और झूठ बोला कि तुम्हारे भाई का एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी अस्पताल पहुंचो।
    परिवार जब अस्पताल पहुंचा तो वहां दिनेश लहूलुहान हालत में मिला, जिसके बाद सच्चाई सामने आई। पुलिसिया कार्रवाई: पुराने बदमाशों पर शिकंजा कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी के अनुसार, दिनेश के बयानों के आधार पर निक्की शुक्ला, आकाश, तिलक, दिव्यांशु, नन्नू, अजय और अमन प्रजापति के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आपराधिक रिकॉर्ड: पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। तलाश जारी: आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। “यह घटना भोपाल में बढ़ते ‘स्ट्रीट क्राइम’ और बेखौफ बदमाशों की बानगी है, जहां किसी से दोस्ती रखना भी अब जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस के लिए इन आदतन अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना एक बड़ी चुनौती है।”
  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण पर BJP विधायक का विरोध, बोले- जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ूंगा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सड़क चौड़ीकरण को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने के सरकारी फैसले का विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी की गई तो वह खुद जन आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

    विधायक का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से कई परिवारों की रोजी रोटी प्रभावित होगी लेकिन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी है। अनिल जैन ने जनता से वादा किया कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह सड़क पर जनता के साथ खड़े रहेंगे। जानकारी के अनुसार भैरवगढ़ रोड के किनारे लगभग 410 घर हैं। इनमें से कई बच्चों के बोर्ड एग्जाम भी चल रहे हैं। नगर निगम ने 7 दिन में घर खाली करने का नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक कई घरों का हिस्सा 10 फीट से 20 फीट तक ही बचेगा जबकि बाकी को बुलडोजर से तोड़ने की तैयारी है।

    नोटिस मिलने के बाद स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने विधायक के कार्यालय का घेराव किया और सरकार व विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विधायक ने कहा कि यदि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी हुई तो वह खुद सड़क पर उतरकर जनता का समर्थन करेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण 150 फीट की योजना से शुरू हुई थी जिसे बाद में घटाकर 100 फीट कर दिया गया। वहीं निवासी 80 फीट चौड़ी सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि कई घरों के टूटने से बचा जा सके।

    अनिल जैन ने कहा कि जनता की भावना का सम्मान करना उनका फर्ज है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से कहा कि प्रशासन और अधिकारी कभी कभी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दे देते हैं जिससे जनता को परेशानी होती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब विधायक सरकार के खिलाफ मुखर हुए हैं। पहले वे लैंड पूलिंग एक्ट के विरोध में भी सामने आ चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि एक्ट वापस नहीं लिया गया तो वे किसानों के विरोध में शामिल होंगे।

    विधायक ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उन्होंने सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम का समर्थन किया था। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह स्कीम अभी भी लागू है जिसके चलते उन्होंने किसानों के हित और सम्मान में विरोध जारी रखने का निर्णय लिया। स्थानीय प्रशासन जल्द ही साइट पर सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है जबकि विधायक और जनता की मांगों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

  • गुजराती सिनेमा का चमकता सितारा बनी ‘लालो’ : 100 करोड़ क्लब में एंट्री पर गदगद हुए प्रतीक गांधी बोले -ईमानदार मेहनत ने रचा इतिहास

    गुजराती सिनेमा का चमकता सितारा बनी ‘लालो’ : 100 करोड़ क्लब में एंट्री पर गदगद हुए प्रतीक गांधी बोले -ईमानदार मेहनत ने रचा इतिहास


    नई दिल्ली। गुजराती सिनेमा के लिए साल 2025 बेहद खास साबित हुआ जब फिल्म ‘लालो–कृष्ण सदा सहायताते’ ने इतिहास रचते हुए विश्व स्तर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली। यह उपलब्धि हासिल करने वाली यह पहली गुजराती फिल्म बन गई है। फिल्म की इस बड़ी सफलता ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर नया रिकॉर्ड बनाया बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत को भी नए सिरे से दुनिया के सामने रखा है। फिल्म की कामयाबी से अभिनेता प्रतीक गांधी बेहद उत्साहित और गर्वित नजर आए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरी गुजराती फिल्म इंडस्ट्री के लिए गर्व का क्षण है और इससे क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान मिली है।

    प्रतीक गांधी ने फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘लालो’ का 100 करोड़ के आंकड़े को पार करना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि फिल्म की टीम ने जब इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी तब किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि यह इतना बड़ा मुकाम हासिल कर पाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत के समय कई तरह की अनिश्चितताएं होती हैं लेकिन अगर काम ईमानदारी और समर्पण के साथ किया जाए तो उसका परिणाम जरूर मिलता है। यही बात इस फिल्म की सफलता में भी साफ दिखाई देती है।

    उन्होंने आगे कहा कि इस फिल्म ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सीख भी दी है कि ज्यादा सोचने और परिणाम की चिंता करने के बजाय अपने काम को पूरी ईमानदारी और लगन से करते रहना चाहिए। प्रतीक गांधी के मुताबिक ‘लालो’ की कहानी और उसकी सादगी ने दर्शकों के दिल को छू लिया। यही वजह है कि फिल्म ने धीरे धीरे दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई और देखते ही देखते एक बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई।

    फिल्म अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हो चुकी है। इसकी स्ट्रीमिंग सोनी लाइव पर गुजराती और हिंदी दोनों भाषाओं में शुरू हो गई है। इस पर खुशी जताते हुए प्रतीक गांधी ने कहा कि अब इस फिल्म को और ज्यादा दर्शक देख सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसकी सरल और भावनात्मक कहानी हर वर्ग के दर्शकों तक पहुंचेगी और उन्हें प्रेरित भी करेगी।

    भक्ति आधारित यह फिल्म अक्टूबर 2025 में रिलीज हुई थी। शुरुआत में इसे छोटे स्तर पर रिलीज किया गया था लेकिन दर्शकों की शानदार प्रतिक्रिया के चलते इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ती चली गई। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने विश्व स्तर पर 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली जिसमें भारत में करीब 97 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन और विदेशों में लगभग 7.5 करोड़ रुपये की कमाई शामिल है। इसी के साथ यह गुजराती सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई है।

    फिल्म की कहानी एक साधारण रिक्शा ड्राइवर के इर्द गिर्द घूमती है जो एक फार्महाउस में फंस जाता है। वहीं उसे भगवान कृष्ण के दर्शन होते हैं और उसके जीवन की दिशा बदल जाती है। भगवान कृष्ण उसे अपने पुराने डर और बुरे सपनों से लड़ने की प्रेरणा देते हैं और आत्म खोज की यात्रा पर ले जाते हैं। भक्ति और आध्यात्मिकता से जुड़ी यह कहानी दर्शकों के दिल को छू गई और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई।

    फिल्म में मुख्य भूमिका रीवा राछ ने निभाई है जबकि करण जोशी और मिष्टी कडेचा जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण किरदारों में नजर आए हैं। फिल्म का निर्देशन अंकित सखिया ने किया है और इसकी कहानी कृष्णांश वाजा विक्की पूर्णिमा तथा अंकित सखिया ने मिलकर लिखी है। फिल्म का निर्माण मैनिफेस्ट फिल्म्स जय व्यास प्रोडक्शंस और अजय बलवंत पडारिया ने किया है। ‘लालो’ की ऐतिहासिक सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अच्छी कहानी और सच्ची भावना के साथ बनाई गई फिल्म भाषा की सीमाओं से परे जाकर दर्शकों के दिलों में जगह बना सकती है।

  • भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना

    भोपाल में रंग पंचमी का भव्य जुलूस: पिचकारी वाला अनोखा निमंत्रण और मुख्यमंत्री की सराहना



    भोपाल राजधानी भोपाल इस बार 8 मार्च को होने वाले रंग पंचमी पर्व के लिए पहले से ही उत्साह और उमंग से सराबोर हो गई है। श्री हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस साल के रंग पंचमी जुलूस (चल समारोह) को विशेष और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि इस बार के आयोजन के लिए प्रकाश मालवीय को संयोजक बनाया गया है, जिन्होंने शहर के विभिन्न समाजों, एसोसिएशनों और समितियों के पदाधिकारियों को एक अनोखे अंदाज में निमंत्रित किया है।

    इस बार के निमंत्रण पत्र की खासियत यह है कि इसे पिचकारी के आकार में तैयार किया गया है, जिसमें पूरी जानकारी पिचकारी पर ही अंकित है। समिति ने इस अनोखे कार्ड की प्रतियां मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी भेंट की, जिन्हें यह अभिनव प्रयास बहुत पसंद आया और उन्होंने इसका खुले दिल से स्वागत किया।

    रंग पंचमी का जुलूस केवल उत्सव का प्रदर्शन नहीं बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और पारंपरिक लोक रंगों का जीवंत अनुभव भी है। प्रकाश मालवीय ने बताया कि इस वर्ष जुलूस में ढोल-ताशों की गूंज, घोड़ी की आकर्षक प्रस्तुति, सुसज्जित झांकियां, डीजे की धुनें और रंग-गुलाल की बौछारें शामिल होंगी, जो पूरे शहर को उत्सवधर्मी माहौल में रंगों से सराबोर कर देंगी।

    समिति का कहना है कि यह जुलूस केवल आनंद और मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि शहरवासियों को आपसी मेल-जोल और सांस्कृतिक भागीदारी का संदेश देने का अवसर भी है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी जुलूस का मार्ग विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, ताकि अधिकतम लोग इस पारंपरिक उत्सव का आनंद ले सकें।

    भोपाल के नागरिक और उत्सव प्रेमी इस भव्य आयोजन के लिए पहले से ही उत्साहित हैं। पिचकारी जैसे अनोखे निमंत्रण पत्र और जुलूस की तैयारियों ने रंग पंचमी को और भी खास और यादगार बना दिया है। शहर के लोग अब 8 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब पूरा भोपाल रंगों, संगीत और उत्साह से भरपूर माहौल में झूम उठेगा।

  • RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन

    RTE 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का मौका, 13 मार्च से शुरू होंगे आवेदन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना अब साकार हो सकता है। शिक्षा का अधिकार RTE अधिनियम के तहत सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन 13 मार्च 2026 से शुरू होंगे, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 तय की गई है। इच्छुक अभिभावक आधिकारिक पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे।

    आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए सीटों का आवंटन ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह लॉटरी 2 अप्रैल 2026 को निकाली जाएगी। जिन विद्यार्थियों का चयन होगा, उन्हें संबंधित निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

    शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार निःशुल्क प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी 9 मार्च 2026 से आरटीई पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद वंचित समूह और कमजोर वर्ग के अभिभावक 13 मार्च से 28 मार्च के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित किसी एक आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद अभिभावकों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच संबंधित संकुल केंद्र वाले स्कूल में अधिकृत सत्यापन अधिकारी के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान आवेदक अपनी कैटेगरी और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मूल प्रमाण पत्र के आधार पर सत्यापित करवा सकेंगे।

    शिक्षा विभाग का कहना है कि लॉटरी से पहले दस्तावेजों का सत्यापन होने से बाद में स्कूल आवंटन के समय किसी प्रकार की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण प्रवेश निरस्त होने की समस्या नहीं आएगी। इसके साथ ही आवेदन के दौरान अभिभावकों को त्रुटि सुधार का भी मौका दिया जाएगा।

    यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन करने में समस्या आती है, तो वह अपने क्षेत्र के विकासखंड के बीआरसी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहीं 2 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से छात्रों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे। आवंटन की जानकारी आवेदक को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इसके अलावा लॉटरी की सूची आरटीई पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

    आयु सीमा की बात करें तो नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह तक तय की गई है। वहीं कक्षा 1 में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष 6 माह तक होनी चाहिए। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में की जाएगी, जबकि कक्षा 1 के लिए आयु की गणना 30 सितंबर 2026 के आधार पर होगी। सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी बड़े निजी स्कूलों में पढ़कर बेहतर भविष्य बना सकें।

  • होली के जश्न में मातम: जबलपुर में नाले, तालाब और बरगी बांध में डूबने से 3 की मौत

    होली के जश्न में मातम: जबलपुर में नाले, तालाब और बरगी बांध में डूबने से 3 की मौत


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में होली का त्योहार उस समय मातम में बदल गया, जब अलग-अलग थाना क्षेत्रों में डूबने से तीन लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं में एक बुजुर्ग और दो युवकों ने अपनी जान गंवा दी। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने तीनों शव बरामद कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार तीनों घटनाएं जबलपुर जिले के बरगी, सिहोरा और संजीवनी नगर थाना क्षेत्रों में हुई हैं।
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नशा और लापरवाही इन हादसों की बड़ी वजह बनी।पहली घटना में बुजुर्ग रूपसिंह पटेल की नाले में डूबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वे नशे की हालत में थे और इसी दौरान कछपुरा नाले में गिर गए। काफी देर तक जब उनका कोई पता नहीं चला तो स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नाले से उनका शव बरामद किया।

    दूसरी घटना बरगी बांध के जीरो डिग्री क्षेत्र की है, जहां एक युवक की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान शैलेष नेमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शैलेष अपने दोस्तों के साथ बरगी बांध में नहाने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब तीन दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद युवक का शव बरामद किया गया।

    तीसरी घटना सिहोरा क्षेत्र में सामने आई, जहां तालाब में डूबने से एक अन्य युवक की मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि तीनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही त्योहारों के दौरान लोगों से सावधानी बरतने और नशे की हालत में जलाशयों के पास न जाने की अपील भी की गई है। होली जैसे पर्व के दौरान हुए इन हादसों से इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि त्योहार मनाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम

    तुलसी नगर में शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर का भव्य ध्वजा महोत्सव: श्रद्धालुओं ने अभिषेक और भव्य वरघोड़े से मनाई आस्था की अनूठी धूम


    नई दिल्ली। राजधानी के तुलसी नगर में स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ श्वेतांबर जैन मंदिर में दो दिवसीय ध्वजा महोत्सव का भव्य आयोजन शनिवार और शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे और भगवान पार्श्वनाथ की जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत अनुभव किया। मंदिर परिसर पूरी तरह से भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक आनंद से गूंज उठा। मंदिर समिति के अध्यक्ष आईएल मेहता ने बताया कि इस अवसर पर सभी धार्मिक अनुष्ठानों और विधियों को बड़े श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया।

    इस ध्वजा महोत्सव में विशेष रूप से आचार्य मुक्ति सागर सूरीश्वर महाराज और आचार्य अचल मुक्ति सागर महाराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भक्तों को धर्म, भक्ति और संयम की सीख दी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था बनाए रखने और धार्मिक कृत्यों में भाग लेने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मंदिर की मूलनायक प्रतिमा शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के अभिषेक का सौभाग्य तुलसी नगर मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कोठारी और उनके परिवार को प्राप्त हुआ। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए गौरव का अवसर बना।

    ध्वजा महोत्सव के पहले दिन, शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में विविध धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। अभिषेक, पूजन, प्रार्थना और भजन कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। मंदिर में भक्ति और उल्लास का माहौल पूरे दिन बना रहा। इस दौरान चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री ललित तातेड, श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेश तातेड, मनोज संघवी, शिल्पा कोठारी सहित जैन समाज के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि महोत्सव का दूसरा दिन शनिवार 7 मार्च को सुबह 8 बजे प्रारंभ होगा। इस दिन आचार्य संघ के मार्गदर्शन में ध्वजाओं का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। इस भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में डूबेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि जैन समाज के सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करता है।

    ध्वजा महोत्सव के माध्यम से मंदिर समिति ने यह संदेश दिया कि भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाते हैं। तुलसी नगर का यह आयोजन जैन धर्म के इतिहास और परंपरा का प्रतीक बनकर उभरा है। महोत्सव ने लोगों को न केवल भगवान के प्रति आस्था बढ़ाने का अवसर दिया, बल्कि समाज में मेलजोल, सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवित रखा।

    इस प्रकार, शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में ध्वजा महोत्सव ने भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहेगा।