बुधवार को जिले में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर रैली निकालते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचे जहां उन्होंने MSP और गेहूं की स्लॉट बुकिंग में हो रही देरी समेत कई मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना और अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे दिवाकर नारायण पटेल ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों और किसानों के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी कि गेहूं स्लॉट बुकिंग की समस्या को अगले दो दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। साथ ही अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया गया।
हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा इसलिए इस बार सभी मांगों पर लिखित आश्वासन जरूरी है। इसी मांग के चलते आंदोलन को फिलहाल दो दिन के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी है ताकि प्रशासन को समाधान लागू करने का समय मिल सके।
जन क्रांति आंदोलन के संयोजक राजेंद्र पटेल ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे और बिना किसी पूर्व सूचना के कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक जिले की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों से जुड़ी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि किसानों के मुद्दे अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे बल्कि वे एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं। MSP और कृषि व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार किसानों की चिंता का कारण बनी हुई हैं और यदि समय रहते इनका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन के पास दो दिन का समय है जिसमें उसे अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या किसानों को लिखित आश्वासन मिलेगा या फिर हरदा एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनेगा।









