Author: bharati

  • रसोई बना मौत का मंजर ,तेज विस्फोट में बुजुर्ग की जान गई ,पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

    रसोई बना मौत का मंजर ,तेज विस्फोट में बुजुर्ग की जान गई ,पत्नी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती


    राजगढ़ । मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। बायपास स्थित शिवधाम कॉलोनी में एक घर के रसोईघर में गैस सिलेंडर में हुए भीषण विस्फोट ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में पति की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और बाद में अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई जबकि पत्नी गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा सुबह करीब पांच बजे हुआ जब सुरेंद्र सिंह भल्ला अपने घर में मौजूद थे। रसोईघर में रखे गैस सिलेंडर में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ ही पलों में पूरी कॉलोनी में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    विस्फोट की चपेट में आकर 60 वर्षीय सुरेंद्र सिंह भल्ला और उनकी पत्नी पद्मा भल्ला बुरी तरह झुलस गए। दोनों को तत्काल बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में नरसिंहगढ़ पहुंचते ही सुरेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं उनकी पत्नी का इलाज जारी है और उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

    घटना के समय दंपती घर में अकेले थे जिससे किसी को तुरंत मदद के लिए बुलाने का मौका भी नहीं मिल पाया। घर में पीएनजी गैस कनेक्शन के साथ एलपीजी सिलेंडर भी मौजूद था जिससे हादसे की वजह को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले आग लगी और उसके बाद विस्फोट हुआ या फिर विस्फोट के कारण आग भड़की।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल ब्यावरा भेजकर पोस्टमार्टम कराया और मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    इस हादसे ने एक बार फिर घरेलू गैस सिलेंडर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गैस सिलेंडर के उपयोग में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है इसलिए समय समय पर सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।

    पूरी कॉलोनी में इस घटना के बाद शोक और डर का माहौल है। स्थानीय लोग इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध हैं और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना एक चेतावनी भी है कि घर में उपयोग होने वाली गैस से जुड़ी सावधानियों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

  • धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध: Bhopal में कर्मचारियों को बांधा कलावा, प्रदर्शन तेज

    धार्मिक प्रतीकों पर रोक का विरोध: Bhopal में कर्मचारियों को बांधा कलावा, प्रदर्शन तेज


    नई दिल्ली । राजधानी Bhopal के एमपी नगर स्थित एक निजी कंपनी में कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तिलक, बिंदी, मंगलसूत्र और कलावा जैसे प्रतीकों पर रोक के फैसले ने सामाजिक और धार्मिक संगठनों को नाराज़ कर दिया है, जिसके बाद मामला सड़कों तक पहुंच गया।
    हिंदू उत्सव समिति का प्रदर्शन, कर्मचारियों को बांधा कलावा
    इस फैसले के विरोध में Hindu Utsav Samiti ने जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष Chandrashekhar Tiwari ने आरोप लगाया कि कंपनी ने नोटिस जारी कर कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीक पहनकर आने से मना किया है, जो आस्था पर सीधा हमला है।
    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने फैक्ट्री पहुंचकर कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा, ताकि विरोध दर्ज कराया जा सके। साथ ही प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई।
    कर्मचारी का आरोप-तिलक लगाकर आने पर रोका गया
    विवाद तब और बढ़ गया जब एक कर्मचारी ने दावा किया कि वह तिलक और कलावा लगाकर काम पर पहुंचा, लेकिन उसे गेट पर ही रोक दिया गया। इस घटना के बाद कर्मचारियों में नाराज़गी बढ़ गई है और मामला संवेदनशील होता जा रहा है।
    कंपनी का पक्ष-प्रोडक्ट क्वालिटी का हवाला
    वहीं कंपनी प्रबंधन ने इस फैसले को धार्मिक नहीं, बल्कि तकनीकी और गुणवत्ता से जुड़ा बताया है। फैक्ट्री के मैनेजर VS Rajput के अनुसार, इन वस्तुओं के उपयोग से प्रोडक्ट के दूषित होने या रिजेक्ट होने का खतरा रहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन की आपत्ति के बाद नोटिस पर पुनर्विचार किया जा रहा है और समाधान निकालने की कोशिश होगी।
    बहिष्कार की चेतावनी, प्रशासन पर नजर
    Hindu Utsav Samiti ने कंपनी के फैसले को वापस न लेने पर उसके उत्पादों के बहिष्कार की चेतावनी दी है। प्रदर्शनकारियों ने बीडीए कार्यालय से लेकर फैक्ट्री तक रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। फिलहाल दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है
    धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कार्यस्थल नियम-बड़ा सवाल
    यह मामला अब केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बहस भी तेज हो गई है कि कार्यस्थल पर धार्मिक प्रतीकों की सीमा क्या होनी चाहिए। एक ओर जहां कर्मचारी अपनी आस्था को बनाए रखने की बात कर रहे हैं, वहीं कंपनी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख तय करेगा कि यह विवाद शांत होता है या और तूल पकड़ता है
  • सिनेमा अब आपके घर: एक्शन, रोमांस और खौफनाक हॉरर का जबरदस्त कॉकटेल, आज रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों

    सिनेमा अब आपके घर: एक्शन, रोमांस और खौफनाक हॉरर का जबरदस्त कॉकटेल, आज रिलीज हुई इन बड़ी फिल्मों


    नई दिल्ली। सिनेप्रेमियों के लिए यह शुक्रवार किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि आज विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सात नई और प्रभावशाली फिल्में व सीरीज रिलीज हो गई हैं। अगर आप इस वीकेंड घर पर रहकर बेहतरीन कहानियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपके पास एक्शन, इमोशनल ड्रामा और सस्पेंस के कई शानदार विकल्प मौजूद हैं।

    इस सप्ताह की सबसे बड़ी चर्चा एक लोकप्रिय जासूसी थ्रिलर सीरीज के तीसरे सीजन को लेकर है, जिसमें मुख्य नायक एक बार फिर देश के होने वाले प्रधानमंत्री की सुरक्षा और अपनी अगवा बेटी को बचाने की दोहरी चुनौती का सामना करता नजर आ रहा है। तेज रफ्तार कहानी और जबरदस्त एक्शन इसे इस हफ्ते की सबसे अनिवार्य वॉच लिस्ट में शामिल करता है।

    हॉलीवुड फिल्मों के शौकीनों के लिए आज का दिन बेहद खास है। सर्वाइवल थ्रिलर ‘एपेक्स’ में एक महिला रॉक क्लाइंबर और एक शिकारी के बीच की खौफनाक जंग दिखाई गई है, जो दर्शकों की धड़कनें तेज करने के लिए काफी है। वहीं, 1950 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित एक अन्य फिल्म पिंग-पोंग के एक माहिर खिलाड़ी के जुनून और उसके वैश्विक चैंपियन बनने के सपने की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है।

    विज्ञान और विनाश की कहानियों में रुचि रखने वालों के लिए ‘ग्रीनलैंड 2: माइग्रेशन’ एक बेहतरीन विकल्प है, जो तबाही के पांच साल बाद एक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकले परिवार के संघर्ष की दास्तां बयां करती है।

    सिनेमा के वैश्विक फलक से एक दक्षिण कोरियाई हॉरर सीरीज भी आज रिलीज हुई है, जिसमें एक रहस्यमयी मोबाइल ऐप और उसके जरिए पूरी होने वाली इच्छाओं के साथ जुड़ी मौत का खौफनाक खेल दिखाया गया है। क्षेत्रीय सिनेमा की बात करें तो ‘हैप्पी राज’ और ‘बैंड मेलम’ जैसी फिल्में रिश्तों की गहराई और पुराने प्यार की यादों को नए अंदाज में पेश कर रही हैं।

    जहाँ ‘हैप्पी राज’ पिता-पुत्र के जटिल रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहीं ‘बैंड मेलम’ बचपन के उन दो दोस्तों की कहानी है जो वक्त के साथ अलग हो गए लेकिन उनकी मंजिलें उन्हें फिर से आमने-सामने ले आईं। कुल मिलाकर, यह हफ्ता हर तरह के दर्शकों के लिए मनोरंजन का पिटारा लेकर आया है, जो आपके वीकेंड को यादगार बनाने के लिए तैयार है।

  • ‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब

    ‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब


    नई दिल्ली । उज्जैन में संन्यास को लेकर छिड़े विवाद के बीच Swami Harshanand Giri ने एक वीडियो जारी कर संत समाज के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनका संन्यास कोई आवेश में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि आस्था और कर्म का मार्ग है-और अगर भगवान राम ने उनके जीवन में यह लिखा है, तो इसे कोई रोक नहीं सकता।

    ‘डेढ़ साल से सह रही हूं अपमान, अब हो गई मजबूत’

    वीडियो में Swami Harshanand Giri ने कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार आलोचना और अपमान झेल रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने इसे अपनी “अग्नि परीक्षा” बताते हुए कहा कि अब वे किसी भी तरह के विरोध का सामना करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि महाकुंभ 2024 के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने हाल ही में संन्यास ग्रहण किया और अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाती हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में Mahant Sumananand Ji Maharaj ने उन्हें दीक्षा दी थी। हालांकि, उनके इस कदम पर Anilanand Maharaj सहित कुछ संतों ने आपत्ति जताई है।

    मीरा, बुद्ध और सीता का उदाहरण देकर जवाब

    अपने बयान में उन्होंने इतिहास और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब किसी ने सत्य और धर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने Meera Bai, Gautama Buddha, Jesus Christ, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की परीक्षा ली जाती रही है और महिलाओं को अक्सर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है।

    ‘परिवर्तन कभी भी संभव, वाल्मीकि इसका उदाहरण’

    संन्यास की उम्र और परंपरा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परिवर्तन का सिद्धांत हमेशा से रहा है। उन्होंने Valmiki का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में किसी भी समय बदलाव संभव है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे उदाहरण धर्मग्रंथों में क्यों मिलते?

    ‘प्रचार के लिए मुझे बनाया गया निशाना’

    Swami Harshanand Giri ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रसिद्धि पाने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “आपको वायरल होने के लिए एक मुद्दा चाहिए था, और आपने मुझे चुन लिया। साथ ही उन्होंने संतों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई और कहा कि एक महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग संत परंपरा के खिलाफ है।

    युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपील

    वीडियो के अंत में उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे विवाद बढ़ाने के बजाय युवाओं को धर्म से जोड़ने का प्रयास करें। उनका कहना था कि इस तरह के विवाद युवाओं को आस्था से दूर कर सकते हैं।

    उन्होंने अपनी बात “होइहि सोइ जो राम रचि राखा” के साथ खत्म करते हुए कहा कि उनका मार्ग ईश्वर ने तय किया है और उन्हें किसी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

  • विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान

    विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भूमि अधिग्रहण और किसानों के हितों को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब प्रदेश में जमीन देने वाले किसानों को चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले को सरकार की विकास नीति और किसान हितैषी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल मुआवजा देना नहीं बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में भागीदार बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसानों को उनकी जमीन के बदले पर्याप्त और संतोषजनक मुआवजा मिलेगा तो वे न केवल अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएंगे बल्कि नई जमीन खरीदने या अन्य निवेश करने में भी सक्षम होंगे। इससे उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित प्रकरणों का समाधान भी शीघ्र हो सकेगा।

    सीएम ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाएं सड़क निर्माण पुल रेलवे और बांध जैसे बड़े विकास कार्य अक्सर भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित होते रहे हैं। लेकिन अब जब किसानों को चार गुना मुआवजा मिलेगा तो इन परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना आसान होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में किसानों को प्रदान करेगी। यह एक बड़ी आर्थिक राशि है जो सीधे तौर पर किसानों के खातों में पहुंचेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले किसान परिवारों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    इस फैसले को राज्य में कृषि और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ साथ विकास कार्यों को गति देने वाला साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का जमीनी स्तर पर किस तरह क्रियान्वयन होता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कितनी तेजी से मिल पाता है।

  • पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में पीएम मोदी का संबोधन, बड़ी भीड़ और स्थानीय उत्साह के बीच चुनावी गतिविधियों में तेजी

    पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में पीएम मोदी का संबोधन, बड़ी भीड़ और स्थानीय उत्साह के बीच चुनावी गतिविधियों में तेजी


    नई दिल्ली। बारुईपुर पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दूसरे चरण के तहत एक जनसभा को संबोधित किया। पूरे क्षेत्र में सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियों का वातावरण देखने को मिला और जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, सभा स्थल पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती सुनिश्चित की गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई और गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए पानी तथा प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का भी प्रबंध किया गया।

    सभा स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया। दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि वे इस चुनाव को राज्य के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। भीड़ में मौजूद लोगों ने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री के विचारों और कार्यशैली से प्रभावित हैं और उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में विकास की गति को मजबूती मिल सकती है।

    कार्यक्रम के दौरान एक भावनात्मक दृश्य भी सामने आया जब एक स्थानीय नागरिक प्रधानमंत्री के लिए बांग्ला भाषा में लिखी गई एक पुस्तक लेकर पहुंचा। उसने बताया कि इस पुस्तक में प्रधानमंत्री के कार्यों और उनसे जुड़ी जन अपेक्षाओं का वर्णन किया गया है। उसका कहना था कि यह एक व्यक्तिगत प्रयास है जिसमें उसने अपने विचार और अनुभव शामिल किए हैं। उसने यह भी उम्मीद जताई कि यह संदेश किसी माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंच सकेगा। इस पहल ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और माहौल में एक अलग तरह की भावनात्मक जुड़ाव की भावना दिखाई दी।

    स्थानीय लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं का माहौल भी काफी सक्रिय रहा। कई लोगों ने कहा कि राज्य में विकास और स्थिरता की आवश्यकता है और इसके लिए बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। कुछ नागरिकों का मानना था कि पिछले वर्षों में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है और अब वे एक स्थिर और विकासोन्मुखी शासन की उम्मीद कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने यह भी कहा कि चुनावी माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण दिखाई दे रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

    सभा में मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि वे नियमित रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक भाषणों को देखते और सुनते हैं, जिससे उन्हें नीतियों और योजनाओं को समझने में मदद मिलती है। उनके अनुसार इस तरह की जनसभाएं जनता और नेतृत्व के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

    बारुईपुर की यह जनसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी रही और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय बना दिया।

  • इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा

    इंदौर में जनगणना की तैयारी तेज तीसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू 2000 अधिकारी बने प्रक्रिया का हिस्सा


    इंदौर । इंदौर में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और इसी कड़ी में प्रशिक्षण का तीसरा चरण शुरू कर दिया गया है। इस चरण में लगभग 2000 अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं जिन्हें जनगणना की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझाने और लागू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शहर में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम होलकर साइंस कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है जहां मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रतिभागियों को विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

    इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक सटीक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि एकत्रित की जाने वाली जानकारी पूरी तरह विश्वसनीय हो सके। बदलते समय के साथ अब जनगणना की प्रक्रिया भी डिजिटल होती जा रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार डिजिटल डेटा कलेक्शन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार डिजिटल माध्यम से डेटा को सही तरीके से एकत्रित किया जाए और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल और त्रुटिरहित बनाया जाए।

    प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को अलग अलग मॉड्यूल के माध्यम से तैयार किया जा रहा है ताकि वे फील्ड में जाकर बिना किसी परेशानी के अपना कार्य कर सकें। उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि जनगणना के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है और किस प्रकार प्रत्येक परिवार से सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी मौके पर ही किया जा रहा है जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की उलझन न रहे।

    प्रशासन का मानना है कि यदि प्रशिक्षण मजबूत होगा तो फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे और जनगणना की पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न होगी। यही कारण है कि इस बार प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और हर स्तर पर अधिकारियों को तैयार किया जा रहा है।

    जनगणना किसी भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है क्योंकि इसके आधार पर ही भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार की जाती हैं। ऐसे में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी हो जाती है। इंदौर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो आने वाले समय में जनगणना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रशासन को उम्मीद है कि इस तरह के व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त प्रशिक्षण के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी और शहर में इसे बिना किसी त्रुटि के पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा बल्कि विकास योजनाओं को भी सही दिशा देने में मदद मिलेगी।

  • भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..

    भारतीय सिनेमा के ये बड़े नाम नियम से करते हैं हनुमान चालीसा का पाठ, देखें पूरी लिस्ट..


    नई दिल्ली।भारतीय संस्कृति में हनुमान चालीसा की महिमा अपरंपार है और इसका प्रभाव केवल आम जनता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मनोरंजन और खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी इसकी शक्ति की कायल हैं। हाल के दिनों में एक मशहूर क्रिकेटर का वीडियो खूब चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपनी सबसे महंगी कार में सफर करते समय भी हनुमान चालीसा सुनना पसंद करते हैं। इंटरनेट पर हनुमान चालीसा के विभिन्न संस्करणों को मिलने वाले अरबों व्यूज इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्तुति लोगों के दिलों में कितनी गहराई तक बसी है। ताज्जुब की बात यह है कि केवल हिंदू कलाकार ही नहीं, बल्कि कई मुस्लिम सेलिब्रिटीज भी हनुमान चालीसा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा मानते हैं और इसे सुनने से मिलने वाली मानसिक शांति का जिक्र कर चुके हैं।

    अभिनय की दुनिया के दिग्गज अक्षय कुमार ने अपनी पसंद का खुलासा करते हुए बताया कि वे वर्कआउट के दौरान और सामान्य समय में भी हनुमान चालीसा और भजनों को सुनना पसंद करते हैं। उनके अनुसार, यह उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं, मशहूर गायक सोनू निगम का हनुमानजी के प्रति अटूट विश्वास किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने एक पुराने वाकये को याद करते हुए साझा किया था कि एक बड़े हादसे में वे बाल-बाल बचे थे, जिसका पूरा श्रेय वे संकटमोचन की कृपा को देते हैं। वे अपने हर बड़े मंच पर जाने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करते हैं। अपनी फिटनेस के लिए मशहूर शिल्पा शेट्टी भी साझा कर चुकी हैं कि ऊर्जा के स्तर को बढ़ाए रखने के लिए हनुमान चालीसा का श्रवण उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

    युवा पीढ़ी के लोकप्रिय अभिनेता विकी कौशल ने भी बताया है कि सुबह जल्दी शूटिंग पर जाते समय वे अपनी गाड़ी में हनुमान चालीसा चलाकर ही दिन की शुरुआत करते हैं। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन न केवल इसे सुनते हैं, बल्कि एक विशेष सामूहिक गायन में उन्होंने इस पावन स्तुति को अपनी आवाज भी दी है। खेल जगत के उभरते सितारे सूर्यकुमार यादव भी स्नान के पश्चात नियम से इसका श्रवण करते हैं। इस सूची में सबसे प्रभावशाली नाम उन मुस्लिम कलाकारों के हैं, जिन्होंने धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर इस स्तुति को अपनाया है। इनमें दानिश अख्तर का नाम शामिल है, जिन्होंने एक पौराणिक भूमिका निभाने के दौरान हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू किया था और अब यह उनकी आदत में शुमार है। वहीं मशहूर अभिनेत्री नरगिस फाखरी ने भी स्पष्ट किया है कि जब उन्हें मानसिक तनाव या घबराहट महसूस होती है, तो वे शांति पाने के लिए अक्सर हनुमान चालीसा सुनती हैं।

    इन सितारों की आस्था यह सिद्ध करती है कि भक्ति और श्रद्धा की कोई जाति या सीमा नहीं होती। जब बात मन की शांति और संकट से उबरने की आती है, तो हनुमान चालीसा एक ऐसा सार्वभौमिक माध्यम बन जाता है जिससे हर कोई जुड़ाव महसूस करता है। चकाचौंध से भरी इस इंडस्ट्री में ये कलाकार अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता को इस स्तुति के माध्यम से जीवित रखे हुए हैं। संकटमोचन की यह चालीसा आज के तनावपूर्ण दौर में इन सेलिब्रिटीज के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो न केवल उन्हें आत्मिक शक्ति प्रदान करती है बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस भी देती है।

  • Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन

    Yami Gautam ने किरदार के लिए पढ़ी कुरान, डायरेक्टर ने डेढ़ साल किया इस्लामिक लॉ का अध्ययन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Yami Gautam अपने दमदार और कंटेंट-ड्रिवन रोल्स के लिए जानी जाती हैं, और फिल्म Haq में उनके किरदार की तैयारी इसका बड़ा उदाहरण है। इस फिल्म में उन्होंने शाजिया बानो नाम की एक मुस्लिम महिला का किरदार निभाया, जो तीन तलाक जैसी सामाजिक समस्या से जूझती है। इस रोल को जीवंत बनाने के लिए यामी ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि किरदार की गहराई को समझने के लिए उन्होंने Quran तक पढ़ डाली।

    डायरेक्टर का खुलासा: इस्लामिक लॉ समझने में लगा डेढ़ साल

    फिल्म के डायरेक्टर Suparn Verma ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए पूरी टीम ने गंभीर रिसर्च की थी। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ साल तक इस्लामिक कानून और उससे जुड़े पहलुओं को समझने में समय लगाया गया, ताकि फिल्म में दिखाई गई कहानी तथ्यात्मक और संवेदनशील दोनों रहे। उनका मानना था कि अक्सर लोग अधूरी या गलत जानकारी के आधार पर राय बना लेते हैं, इसलिए इस फिल्म में सटीकता बेहद जरूरी थी।

    मेथड एक्टिंग से खुद को ढाला, किरदार में डूबीं यामी

    यामी ने खुद भी स्वीकार किया था कि इस फिल्म के लिए उन्होंने मेथड एक्टिंग का सहारा लिया। उन्होंने अपने किरदार को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे जिया। शाजिया बानो के दर्द, संघर्ष और भावनाओं को समझने के लिए उन्होंने लंबा समय दिया। यही वजह रही कि फिल्म में उनका अभिनय दर्शकों के दिल को छू गया।

    फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। यामी ने सोशल मीडिया पर भी लिखा था कि “वर्ड ऑफ माउथ की ताकत सबसे बड़ी होती है”, और दर्शकों का प्यार ही किसी भी कलाकार के लिए असली सफलता है।

    बॉक्स ऑफिस पर भी दिखा असर, OTT पर भी उपलब्ध

    Haq को Junglee Pictures ने प्रोड्यूस किया था और फिल्म ने करीब 30 करोड़ रुपए का कारोबार किया। आज भी यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर देखी जा सकती है, जहां इसे नई ऑडियंस भी सराह रही है।

    ग्लैमरस इमेज से हटकर मजबूत किरदारों की ओर बढ़ रहीं यामी

    पिछले कुछ समय से यामी गौतम ने अपने करियर में अलग तरह के रोल्स चुनने शुरू किए हैं। Article 370 में उनके अभिनय को भी काफी सराहना मिली थी। इस फिल्म को उनके पति Aditya Dhar ने प्रोड्यूस किया था।

    अपकमिंग प्रोजेक्ट और पर्सनल लाइफ भी चर्चा में

    अब यामी जल्द ही Aanand L Rai की फिल्म “नई नवेली” में नजर आने वाली हैं, जो एक हॉरर-कॉमेडी बताई जा रही है। यह उनके करियर की पहली हॉरर फिल्म होगी, जिसे लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। पर्सनल लाइफ की बात करें तो यामी और आदित्य साल 2024 में माता-पिता बने थे। दोनों अपने बच्चे को लाइमलाइट से दूर रखते हैं और फैमिली टाइम को प्राथमिकता देते हैं।

  • Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया

    Rishi Kapoor का मजेदार किस्सा: लड़की के कपड़ों में पहुंचे जेंट्स वॉशरूम, फिर हुआ ये दिलचस्प वाकया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Rishi Kapoor ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म Rafoo Chakkar से जुड़ा एक किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। इस फिल्म में उन्हें कहानी के अनुसार लड़की का गेटअप लेना पड़ा था, और इसी दौरान उनके साथ एक ऐसा मजेदार वाकया हुआ जिसे सुनकर कोई भी मुस्कुरा उठे।

    फीमेल आउटफिट में मजबूरी में जाना पड़ा जेंट्स वॉशरूम

    दरअसल, फिल्म Rafoo Chakkar की शूटिंग के दौरान ऋषि कपूर पूरी तरह लड़की के लुक में थे। इसी बीच उन्हें वॉशरूम जाने की जरूरत पड़ी। अब समस्या यह थी कि वे महिला शौचालय में जा नहीं सकते थे, इसलिए मजबूरी में उन्हें जेंट्स वॉशरूम जाना पड़ा। लेकिन जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें असली लड़की समझ लिया। हालात ऐसे हो गए कि वॉशरूम में मौजूद लोग खुद शर्म से असहज हो गए और समझ नहीं पाए कि आखिर क्या हो रहा है।

    विदेशी लोग ढूंढते-ढूंढते पहुंच गए सेट तक

    इस मजेदार घटना का जिक्र खुद Rishi Kapoor ने अपनी किताब में किया था। उन्होंने बताया कि वॉशरूम में मौजूद कुछ विदेशी लोग तो उन्हें “लड़की” समझकर बाहर तक ढूंढने निकल पड़े। जब वे लोग सेट तक पहुंचे, तब जाकर उन्हें सच्चाई का पता चला कि जिसे वे ढूंढ रहे थे, वह कोई और नहीं बल्कि फिल्म के स्टार ऋषि कपूर ही हैं। यह सुनकर सभी हैरान रह गए।

    चाइल्ड आर्टिस्ट से सुपरस्टार बनने तक का सफर

    ऋषि कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट Mera Naam Joker से की थी, जिसे उनके पिता Raj Kapoor ने निर्देशित किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने बतौर लीड एक्टर Bobby से डेब्यू किया, जिसमें उनके साथ Dimple Kapadia नजर आईं। यह फिल्म सुपरहिट रही और ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए।

    रोमांटिक हीरो से लेकर मजबूत किरदारों तक

    अपने करियर में उन्होंने Amar Akbar Anthony, Karz, Chandni, Damini और Kapoor & Sons जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। फिल्मों के दौरान ही उन्हें अपनी को-स्टार Neetu Kapoor से प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली।

    कैंसर से जंग और आखिरी सफर

    साल 2018 में ऋषि कपूर को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उन्होंने New York में इलाज कराया। करीब दो साल तक बीमारी से लड़ने के बाद 2020 में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म Sharmaji Namkeen थी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।