वर्षों से प्रतिमा पर सिंदूर और चोले की परत चढ़ी होने के कारण उसका मूल रूप स्पष्ट नहीं दिखता था। लेकिन चोला उतरते ही भगवान गणेश की चार भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा सामने आई, जिसे देखकर श्रद्धालु हैरान रह गए।
प्रतिमा के स्वरूप में भगवान गणेश को रुद्राक्ष माला जपते हुए दिखाया गया है। एक हाथ में वे रुद्राक्ष माला धारण किए हुए हैं, दूसरे हाथ से वे सूंड की सहायता से लड्डू ग्रहण कर रहे हैं। तीसरे हाथ में कमल का फूल और चौथे हाथ में फरसा दिखाई देता है। यह दुर्लभ स्वरूप भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है।
इस घटना की खबर सुबह होते ही पूरे इलाके में फैल गई। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दिनभर बड़ी संख्या में लोग इस दिव्य और दुर्लभ स्वरूप के दर्शन करने के लिए पहुंचते रहे।
स्थानीय श्रद्धालुओं रामबाबू गुप्ता, मोहन गुप्ता और श्याम गुप्ता के अनुसार, यह मंदिर पहले एक कच्चे चबूतरे पर स्थित था। उनके परिवार ने लगभग 60 वर्ष पहले यहां सेवा शुरू की थी और गणेश चतुर्थी पर 10 दिवसीय उत्सव की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए वर्ष 2016 में मंदिर का पुनर्निर्माण तमिलनाडु शैली में किया गया था।
मंदिर समिति के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रतिमा का जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नए चोले और आभूषणों से भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। पुराना चोला ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में विधिवत रूप से विसर्जित किया जाएगा।
इस घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया है। 300 साल पुरानी इस प्रतिमा के वास्तविक स्वरूप के सामने आने के बाद मंदिर अब पूरे क्षेत्र में आस्था और आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है।









