Author: bharati

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम

    गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं करती है तो उसे छद्म हिंदू घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गौ माता के मांस को भैंस का मांस बताकर बचाव किया, जो हिंदुत्व के खिलाफ है।

    शंकराचार्य ने कहा कि अब सरकार को हिंदू होने का प्रमाण देना होगा और वे 40 दिन में यह प्रमाण देने को कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “गाय का मांस बेचकर आप डॉलर से राम राज्य की स्थापना करेंगे,” और यदि 10 मार्च तक गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं किया गया तो वे दिल्ली नहीं जाएंगे बल्कि लखनऊ में संत महंत आचार्य इकट्ठा करके आगे का निर्णय लेंगे।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त गो रक्षा है और सरकार को बताना होगा कि उन्होंने गौ सेवा के लिए क्या किया। उन्होंने यूपी सरकार को महाराष्ट्र और नेपाल से सीखने की नसीहत दी और कहा कि भारत से गौ मांस का निर्यात अधिकतर उत्तर प्रदेश से होता है।

    उन्होंने कहा कि 24 घंटे में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण माँगा गया था, जिसे उन्होंने जवाब दिया और अब योगी सरकार को 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण देना होगा। शंकराचार्य ने साफ कहा कि अगर सरकार यह प्रमाण नहीं दे पाती तो उसे “कालनेमि”, “ढोंगी” और “छद्म हिंदू” कहा जाएगा।

  • कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

    कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार


    टीकमगढ़ । मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से मानवता और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। जहाँ एक ओर शिक्षक को समाज में ‘गुरु’ का दर्जा देकर भगवान से ऊपर माना जाता है, वहीं पलेरा थाना क्षेत्र के एक शासकीय स्कूल में एक 58 वर्षीय शिक्षक ने इस मर्यादा को तार-तार कर दिया। इस कलयुगी शिक्षक ने स्कूल परिसर के भीतर ही एक छह वर्षीय मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाने का प्रयास किया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित मासूम रोज की तरह विद्या के मंदिर में शिक्षा ग्रहण करने पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस शिक्षक की सुरक्षा में वह स्कूल जा रही है, वही उसकी मासूमियत को रौंदने की ताक में बैठा है। आरोपी शिक्षक ने मासूम को बहला-फुसलाकर स्कूल परिसर में ही बन रहे एक निर्माणाधीन कक्ष में ले गया। एकांत का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा के कपड़े उतारे और उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इस घिनौनी हरकत से सहमी मासूम जोर-जोर से रोने लगी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर और पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसे डराया-धमकाया और इस बारे में किसी को न बताने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।

    रोती-बिलखती मासूम जब अपने घर पहुंची, तो उसने अपनी दादी को पूरी आपबीती सुनाई। पोती की जुबानी शिक्षक की काली करतूत सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए परिजन बच्ची को लेकर पलेरा थाने पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस घटना की खबर जैसे ही कस्बे में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिंदू संगठनों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों और संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दोषी शिक्षक के खिलाफ न केवल कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, बल्कि उसके घर पर प्रशासन का बुलडोजर चलाकर कड़ी नजीर पेश की जाए।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और पुलिस हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है कि कैसे शिक्षण संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।

  • इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस

    इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस


    इंदौर । शहर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग छात्र के साथ मारपीट, अपहरण और ब्लैकमेलिंग किए जाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले कुछ नाबालिग लड़कों ने आपसी रंजिश के चलते पीड़ित छात्र को निशाना बनाया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले छात्र के साथ मारपीट की, इसके बाद जबरन उसे गाड़ी में बैठाकर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित एक कमरे में ले गए। वहां उसे बंद कर दोबारा बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि इसी दौरान पीड़ित के कपड़े उतरवाकर उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया गया। बाद में आरोपियों ने इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर छात्र को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले की जड़ स्कूल से जुड़ी आपसी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया है कि मुख्य आरोपी करण की बहन और पीड़ित छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और पांच नाबालिगों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की, तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।

    पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि घटना के समय उसके पिता की तबीयत गंभीर रूप से खराब थी, जिसके कारण वह डर और मानसिक दबाव में रहा और तत्काल किसी को कुछ नहीं बता सका। इसी दौरान आरोपियों ने हद पार करते हुए वीडियो को पीड़ित के पिता के मोबाइल फोन पर भेज दिया। इसके बाद परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई और वे सीधे थाने पहुंचे।

    परिजनों की शिकायत पर जूनी इंदौर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपहरण, मारपीट, ब्लैकमेलिंग, आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पांचों आरोपियों को पकड़ लिया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी विधि-विवादित बालक नाबालिग हैं, जिनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वीडियो कहां-कहां भेजा गया और कहीं उसे वायरल तो नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा: एक सिक्के ने बदली जिंदगी, बचपन के दोस्त संग अफेयर और शाहरुख के साथ किया बॉलीवुड में धमाका!

    डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा: एक सिक्के ने बदली जिंदगी, बचपन के दोस्त संग अफेयर और शाहरुख के साथ किया बॉलीवुड में धमाका!


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री और ‘डिंपल गर्ल’ प्रीति जिंटा आज अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। 1998 में मणिरत्नम की फिल्म ‘दिल से’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। आज भी उनकी स्माइल और डिंपल फैंस के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, हालांकि वे अब फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं।

    फिल्मी दुनिया में किस्मत का सिक्का
    प्रीति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने फिल्मों में आने का फैसला सिक्का उछालकर किया था। उन्होंने कहा कि अगर सिक्का हेड्स आता तो वे फिल्मों में जाएँगी, और टेल्स आने पर नहीं। सिक्का हेड्स आया और इसी के साथ उनका बॉलीवुड सफर शुरू हुआ।

    पहला प्रोजेक्ट रिलीज नहीं हुआ
    प्रीति जिंटा का पहला प्रोजेक्ट ऋतिक रोशन के साथ ‘तारा रम पम पम’ था, लेकिन यह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने शाहरुख खान के साथ ‘दिल से’ से डेब्यू किया, जिसने उन्हें पहचान दिलाई।

    बॉलीवुड में सफल करियर
    इसके बाद प्रीति ने कई हिट फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैं:
    वीर-ज़ारा, शोलज़ार, जान-ए-मन, संघर्ष, हर दिल जो प्यार करेगा, क्या कहना आदि। उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स जैसे शाहरुख खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन, अक्षय कुमार, बॉबी देओल और सनी देओल के साथ काम किया।

    पर्सनल लाइफ: अफेयर से शादी तक
    प्रीति की लव लाइफ भी चर्चा में रही। बताया जाता है कि वह अपने बचपन के दोस्त नेस वाडिया के साथ लंबे समय तक रिलेशनशिप में थीं। बाद में उनके और सलमान खान के बीच करीबी रिश्ते की अफवाहें भी चर्चा में आईं।

    शादी और परिवार
    29 फरवरी 2016 को प्रीति ने अमेरिकी बिजनेसमैन जीन गुडइनफ से शादी की। शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और अब अपने पति और दो जुड़वा बच्चों, जय और जिया के साथ खुशहाल जीवन जी रही हैं।

    आज भी बनी हुई है खास जगह
    हालांकि प्रीति जिंटा अब स्क्रीन से दूर हैं, लेकिन उनकी फिल्मों और अदाकारी की वजह से वह आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं।

  • क्रिप्टिक पोस्ट के बाद गौरव खन्ना की पत्नी आकांक्षा ने दिया पहला बयान, कहा…

    क्रिप्टिक पोस्ट के बाद गौरव खन्ना की पत्नी आकांक्षा ने दिया पहला बयान, कहा…

    नई दिल्ली टीवी एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला ने अपने और ‘बिग बॉस 19’ के विनर गौरव खन्ना के रिश्ते पर खुलकर बात की है। दरअसल, उन्होंने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर किया था जिसके बाद लोग यह अनुमान लगाने लगे कि उनके और गौरव खन्ना के बीच चीजें ठीक नहीं हैं। अब इस पर रिएक्ट करते हुए आकांक्षा ने साफ किया है कि उनके और गौरव खन्ना के बीच सबकुछ सही है।

    क्या बोलीं आकांक्षा?
    आकांक्षा ईटाइम्स को दिए बयान में कहा, “हमारी शादी में कोई परेशानी नहीं है। उस पोस्ट का गौरव से कोई लेना-देना नहीं है। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो सोशल मीडिया पर पर्सनल चीजें लिखूं। ये पोस्ट सिर्फ मेरे अपकमिंग प्रोजेक्ट को प्रमोट करने के लिए किया गया था।”

    ‘मां न बनना एक पर्सनल चॉइस है’
    कुछ लोगों ने आकांक्षा के पोस्ट को गौरव के पिता बनने की इच्छा और उनके मां न बनने के फैसले से भी जोड़ा था। आकांक्षा ने उन्हें जवाब देते हुए कहा, “मैं इस समय ट्रोल क्वीन हूं! मैं हमेशा से इस टॉपिक पर खुलकर बात करती हूं। गौरव ज्यादा सावधान रहते हैं क्योंकि वह मेरी इमेज प्रोटेक्ट करना चाहते हैं। हमारे बीच एज गैप है और वह इतने समझदार हैं कि वह ये मेरी बात समझ सकते हैं। मैंने साफ कहा है कि मैं खुद को मां बनते हुए नहीं देखती। यह एक पर्सनल चॉइस है और मुझे इसे किसी के सामने सही ठहराने की जरूरत महसूस नहीं होती।”

    ‘मुझे विलेन कहलाने में कोई दिक्कत नहीं है’
    आकांक्षा आगे कहती हैं, “सोशल मीडिया के बाहर, मैं कभी किसी ऐसे इंसान से नहीं मिली जिसने मुझसे कहा हो कि मैं गलत हूं या मेरे फैसलों पर सवाल उठाया हो। जिन लोगों से मैं मिलती हूं, वे सपोर्टिव हैं और मुझे अपनी शर्तों पर जिंदगी जीते हुए देखकर खुश होते हैं। मुझे नफरत से कहीं ज्यादा प्यार और पॉजिटिविटी मिलती है। खुशकिस्मती से, मैं इमेज को लेकर कॉन्शियस नहीं हूं। मुझे विलेन कहलाने में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि ये वो लोग हैं जो गौरव से प्यार करते हैं। आखिर में, मेरे पति मेरे साथ खड़े हैं और हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे के लिए क्या मायने रखते हैं।”

  • पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

    पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक


    नई दिल्ली।  भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पी टी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है। इस खबर से खेल और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    कैसे हुआ निधन?
    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वी श्रीनिवासन शुक्रवार तड़के अपने आवास पर अचानक बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    पीटी उषा के जीवन में उनका योगदान
    वी श्रीनिवासन केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी थे और पी टी उषा के जीवन में उनका अहम योगदान रहा। वे उषा के खेल करियर से लेकर राजनीतिक सफर तक हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। उन्हें उषा का मजबूत संबल माना जाता था।

    पीटी उषा के पति वी श्रीनिवासन का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोकपीएम मोदी ने जताया दुख
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन करके पीटी उषा के परिवार को शोक संवेदना जताई और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दी श्रद्धांजलि
    केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा:पी.टी. उषा और उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। इस मुश्किल समय में ईश्वर से हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं।


    उड़नपरी के लिए यह बड़ी क्षति
    पीटी उषा, जिन्हें ‘उड़नपरी’ के नाम से जाना जाता है, भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायक हस्तियों में से एक हैं।
    उनके निजी जीवन में यह क्षति न केवल उनके लिए, बल्कि उनके चाहने वालों के लिए भी बेहद दुखद है।सोशल मीडिया पर खिलाड़ी, कोच, प्रशंसक और आम लोग लगातार उन्हें हिम्मत और संबल देने के संदेश भेज रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के अहिंसा संदेश को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम किया साझा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके अहिंसा के संदेश को स्मरण करते हुए संस्कृत में रचित एक प्रेरणादायी सुभाषितम साझा किया। इस सुभाषितम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी द्वारा मानवता की रक्षा के लिए अहिंसा को सर्वोच्च मूल्य मानने की भावना को देश और दुनिया के सामने पुनः रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन अहिंसा, सत्य और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने बिना हथियार के, केवल नैतिक बल और सत्य की शक्ति से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया। अहिंसा का यह संदेश आज के अशांत वैश्विक वातावरण में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा कि महात्मा गांधी ने मानवता की रक्षा के लिए सदैव अहिंसा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अहिंसा में वह शक्ति निहित है, जो बिना हिंसा और हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम अहिंसा के दर्शन को गहराई से अभिव्यक्त करता है

    अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
    अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥

    इस सुभाषितम का तात्पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है और अहिंसा ही सर्वोच्च तपस्या है। अहिंसा को परम सत्य बताया गया है, जिससे सभी धर्मों और नैतिक मूल्यों की उत्पत्ति होती है। यह संदेश महात्मा गांधी के जीवन दर्शन का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें उन्होंने मानवता, करुणा और नैतिकता को सर्वोपरि रखा।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि अहिंसा केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार भी है। बापू का अहिंसा का विचार सामाजिक समरसता, शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज भी भारत की नीतियों और मूल्यों में प्रतिबिंबित होते हैं।

    देशभर में शहीद दिवस के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषितम न केवल बापू के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि देशवासियों के लिए यह संदेश भी है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्थायी शांति और मानव कल्याण संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश बापू के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर किया नमन, स्वदेशी को बताया आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके विचारों एवं आदर्शों को स्मरण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का जीवन, उनका व्यक्तित्व और उनका कृतित्व देशवासियों को सत्य, अहिंसा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। महात्मा गांधी का स्वदेशी पर दिया गया बल आज के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का मजबूत आधारस्तंभ है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में राष्ट्रपिता को नमन करते हुए कहा कि बापू का स्वदेशी विचार केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मबल और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज के भारत के विकास मॉडल में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जहां स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का संपूर्ण जीवन मानवता, करुणा और नैतिकता का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों के बल पर न केवल भारत को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग भी दिखाया। बापू का यह संदेश आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि महात्मा गांधी का व्यक्तित्व देशवासियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सीख देता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को समानता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और अनुशासन का महत्व समझाया। गांधीजी के विचारों में निहित सादगी और सेवा भाव आज भी राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति बने हुए हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी जड़ें महात्मा गांधी के स्वदेशी और ग्राम स्वराज के विचारों में निहित हैं। स्थानीय से वैश्विक की सोच, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण, बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

    देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और राष्ट्रपिता के बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विचार एक बार फिर यह स्मरण कराते हैं कि महात्मा गांधी केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे आज भी भारत की आत्मा और दिशा के मार्गदर्शक हैं।