Author: bharati

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' का किया पुण्य स्मरण


    भोपाल। गुरूवार, 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रो. रज्जू भैया का प्रखर व्यक्तित्व, उनके विचार और कृतित्व हमेशा राष्ट्रसेवकों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से रज्जू भैया की मां भारती और राष्ट्र की सेवा में समर्पित जीवन की सराहना की और कहा कि उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे।

    मुख्यमंत्री के इस स्मरण ने राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के क्षेत्र में रज्जू भैया की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया। उनकी जयंती पर देशभर में उनके योगदान और विचारों को याद किया जा रहा है।

  • विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया

    विदिशा:लव जिहाद, धर्मांतरण और तीन तलाक का सनसनीखेज मामला सामने आया


    विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक बार फिर लव जिहाद और धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। आरोपी सलीम खान पर आरोप है कि उसने पहले एक हिंदू युवती से दोस्ती की, भावनात्मक रूप से करीब आया और फिर शादी कर उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया।

    युवती ने शिकायत में बताया कि शादी के बाद वह एक बच्चे की मां बनी, लेकिन आरोपी ने किसी अन्य युवती से दूसरी शादी कर ली।

    साथ ही, युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे प्रताड़ित करता रहा और तीन बार तलाक बोलकर छोड़ दिया।

    इसके अलावा, युवती ने यह भी आरोप लगाया कि काजी ने उसे हलाला कराने का प्रयास किया, जो विवादास्पद धार्मिक प्रथा है।

    पुलिस कार्रवाई: कोतवाली थाना में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत चौबे ने बताया कि जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है और आरोपी की तलाश जारी है।

    विदिशा जिले से आने वाले इस मामले ने एक बार फिर लव जिहाद और धर्मांतरण के मुद्दे पर बहस तेज कर दी है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच लगातार जारी है।

  • राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान

    राज्य शिक्षा केन्द्र ने घोषित किए जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम, 1–20 फरवरी तक विजेताओं का होगा सम्मान


    भोपाल । मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 2 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित जिला स्तरीय शैक्षिक ओलम्पियाड के परिणाम राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। इस ओलम्पियाड का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक विकास और शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना रहा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले से प्रत्येक विषय और प्रत्येक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जिला विजेता घोषित किया गया है। कुल मिलाकर प्रत्येक जिले से 32 विद्यार्थियों को जिला स्तरीय विजेता के रूप में चयनित किया गया है। इनके मार्गदर्शक शिक्षक भी इस अवसर पर सम्मानित होंगे।

    जिला स्तर पर विजेताओं के सम्मान समारोह का आयोजन 1 से 20 फरवरी 2026 के बीच किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस आयोजन से शैक्षिक प्रतिभाओं को पहचान मिलने के साथ-साथ उन्हें प्रेरणा भी मिलेगी।

    उल्लेखनीय है कि शैक्षिक ओलम्पियाड की जिला स्तरीय परीक्षाएं 16 एवं 17 जनवरी 2026 को प्रदेश के सभी विकासखंडों में संपन्न हुई थीं। इस प्रतियोगिता में लगभग 2 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था। राज्य शिक्षा केन्द्र ने इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, तार्किक क्षमता और सृजनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

  • MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर

    MP में लाइनमैन की जिज्ञासा बनी जानलेवा, बंदूक चलाते समय लगी गोली, गंभीर हालत में इंदौर रेफर


    राजगढ़।  एक मामूली जिज्ञासा भारी पड़ गई जब पचोर में स्थित एक बिजली कंपनी के कार्यालय में लाइनमैन ने बंदूक कैसे चलती है यह देखना चाहा और हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, कंपनी के गार्ड भगवानसिंह दांगी, जो कि कांकरिया थाना छापीहेड़ा के निवासी हैं, के पास 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक थी। उसी कार्यालय में दो लाइनमैन, रामबाबू परमार (सूरजखेड़ी थाना करनवास) और अजय बैरागी (नरसिंहगढ़ निवासी), जो गार्ड के मित्र भी हैं, कार्यरत थे।

    हादसे के दिन, लाइनमैन ने मजाक-मजाक में बंदूक के काम करने का तरीका देखना चाहा। इसी दौरान बंदूक से अचानक गोली निकल गई और रामबाबू परमार के दाहिने हाथ की कोहनी में जाकर लगी। गोली लगते ही वह बुरी तरह से घायल हो गया। तुरंत मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे पचोर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे इंदौर रेफर कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा किसी आपसी विवाद या बदइच्छा से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुआ। घटना ने यह साफ कर दिया कि लाइसेंसी बंदूक भी सही सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण के बिना कितना खतरनाक साबित हो सकती है।

    स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कंपनी प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सभी कर्मचारियों को हथियारों के सही उपयोग और सुरक्षा नियमों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए। इसके साथ ही कार्यालय में बंदूकों को सुरक्षित स्थान पर रखने और अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने की भी चेतावनी दी गई है।

    हादसे के बाद रामबाबू परमार की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि उसे लंबी अवधि तक फिजियोथेरेपी और देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। यह घटना न सिर्फ पचोर बल्कि पूरे राजगढ़ जिले के लिए चेतावनी बनकर आई है कि हथियारों के प्रति लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है।

    इस घटना ने स्थानीय लोगों और कर्मचारियों को यह याद दिलाया कि सुरक्षा नियमों का पालन करना किसी भी परिस्थिति में अनिवार्य है, चाहे मामला मजाक का ही क्यों न हो। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि हादसे की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

    इस पूरे मामले ने सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हथियारों के सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता को फिर से सबके सामने रखा है।

  • 'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    'मुसलमान रिक्शावाला अगर 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो', हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़की कांग्रेस

    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री पर संविधान की शपथ का उल्लंघन करने तथा समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा और आरएसएस को भी कटघरे में खड़ा किया है।

    रिक्शावाले वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा हमला

    कांग्रेस ने गुरुवार (29 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं, “अगर कोई मुसलमान रिक्शावाला 5 रुपये मांगे तो उसे 4 रुपये दो… खूब परेशान करो।”
    इस वीडियो को साझा करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह बयान न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि समाज को बांटने वाला और नफरत फैलाने वाला है।

    ‘संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला’

    कांग्रेस ने अपने बयान में कहा,
    “यह घटिया बयान असम के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाडले हिमंता बिस्वा सरमा का है। वे संविधान की शपथ लेकर उसी की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह भाजपा-आरएसएस की नफरती सोच का प्रतिबिंब है। यह बयान बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है।”
    पार्टी ने मांग की कि इस बयान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पूरे देश से माफी मांगें।

    ‘मियां’ समुदाय को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान

    यह पहला मौका नहीं है जब असम के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले मंगलवार (27 जनवरी 2026) को डिगबोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संशोधन (एसआईआर) को लेकर कहा था कि इस प्रक्रिया से किसी असमिया नागरिक को दिक्कत नहीं हो रही, बल्कि केवल ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुस्लिम) समुदाय को ही परेशानी है।

    ‘बांग्लादेश में वोट दें’ वाले बयान ने बढ़ाया विवाद

    हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में वोट देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा,
    “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें। अगर उन्हें दिक्कत हो रही है, तो हमें क्यों चिंता करनी चाहिए?”

    राजनीतिक और सामाजिक असर पर सवाल

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। वहीं, यह मुद्दा आने वाले समय में असम की राजनीति में और तीखा होने के संकेत दे रहा है।

  • फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर

    फिर खुली इंदौर की 'सोनम फाइल्स', राजा रघुवंशी हत्याकांड का रहस्य हुआ उजागर



    इंदौर। इंदौर का बहुचर्चित सोनम रघुवंशी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में इस केस पर आधारित एक वेब सीरीज रिलीज हुई है, जिसने केवल अपराध की क्रूरता को ही नहीं दिखाया, बल्कि उन पहलुओं को भी सामने लाया, जो लंबे समय तक पुलिस फाइलों में दबे हुए थे। इस केस ने ना सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

    राजा रघुवंशी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत पल शादी और हनीमून के लिए शिलांग गए थे।

    लेकिन नियति ने उनके इस हसीन सफर को मौत और धोखे का साया बना दिया। वेब सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे शादी और हनीमून की खुशियों के बीच एक सुनियोजित हत्या की साजिश रची गई।

    साल 2025 में हुए इस हादसे ने पूरे इंदौर को स्तब्ध कर दिया था। राजा रघुवंशी की हत्या के पीछे की साजिश और हत्यारे के मानसिक पक्ष पर अब तक बहुत कम प्रकाश डाला गया था। वेब सीरीज ने इसे ‘डिकोड’ करते हुए दिखाया है कि हत्यारे ने किस तरह से योजना बनाई और घटना को अंजाम दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस की खासियत इसके सतह के पीछे की रणनीति और मानसिक चालाकी में है।

    हत्यारे ने इतना सावधानीपूर्वक कदम उठाया कि शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाए। पुलिस ने भी शुरुआती जांच में कई बाधाओं का सामना किया। लेकिन अब, नई जानकारी और वेब सीरीज के माध्यम से जनता के सामने यह सब खुलकर आया है।

    वेब सीरीज दर्शकों को राजा रघुवंशी के अंतिम दिनों की भावनात्मक यात्रा, हनीमून के दौरान घटित घटनाओं और हत्या के पीछे की साजिश को विस्तार से दिखाती है। इसमें यह भी बताया गया है कि किस तरह हत्या के बाद हत्यारे ने अपने कदमों को छुपाने की कोशिश की। इसके साथ ही, कई ऐसे तथ्य उजागर किए गए हैं, जो पहले सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच भी इस केस की जटिलता को दर्शाती है। रिपोर्टों में यह सामने आया कि हत्या सुनियोजित और प्लान्ड थी।

    हत्यारे की मानसिक स्थिति, योजना की बारीकियां और अपराध की गहनता को समझना ही इस केस की सबसे बड़ी चुनौती थी।

    इंदौर के लोग अब भी इस क्राइम ड्रामा को लेकर चर्चा कर रहे हैं। केस की सच्चाई और वेब सीरीज में दिखाई गई घटनाओं के बीच तुलना करने के लिए कई दर्शक इसे देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वेब सीरीज न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि यह लोगों को अपराध की मनोरोग मानसिकता और जटिलताओं के बारे में जागरूक भी करती हैं।

    इस केस ने साबित किया कि प्यार, धोखा और मौत कभी-कभी एक ही सफर में साथ चल सकते हैं। राजा रघुवंशी हत्याकांड ने यह संदेश दिया कि अपराध का मनोवैज्ञानिक पहलू समझना उतना ही जरूरी है जितना कि अपराध की तकनीकी जांच।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या इस केस में हत्यारे के सभी रहस्य उजागर हो पाए हैं? या फिर पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के दौरान कुछ और राज खुलेंगे। इंदौर की जनता और पूरे देश की नजरें इस केस और वेब सीरीज पर बनी हुई हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 30 जनवरी को करेंगे राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का शुभारंभ


    भोपाल । कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अवसर पर राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार, 30 जनवरी को दोपहर 3 बजे शासकीय गुलाब उद्यान, लिंक रोड क्रमांक-1, भोपाल में इस प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। प्रदर्शनी का आयोजन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और मध्यप्रदेश रोज़ सोसायटी के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य में पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देना और उद्यानिकी गतिविधियों में नई प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करना है।

    प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के फूलों की विस्तृत रेंज को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें स्थानीय और विदेशी प्रजातियों के गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी, और अन्य सजावटी पौधे शामिल होंगे। इसके अलावा, प्रदर्शनी में फूलों की खेती, कटिंग, पौधरोपण तकनीक और उद्यानिकी से जुड़े नवाचारों के स्टाल भी लगेंगे।

    इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों और उद्यानिक प्रेमियों को फूलों की खेती और उनके व्यवसायिक अवसरों के बारे में जानकारी दी जाएगी। आयोजकों का कहना है कि यह पहल उद्यानिकी क्षेत्र को न सिर्फ रोजगार के अवसर प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मौके पर पौधरोपण करेंगे और प्रदर्शनी के प्रमुख स्टालों का अवलोकन करेंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रदर्शनी में आएं और पुष्प उत्पादन की महत्वता को समझें।

  • महिलाओ में लक्ष्मी के संकेत: शरीर के इन 6 हिस्सों पर तिल बनाता है धन और समृद्धि का राज

    महिलाओ में लक्ष्मी के संकेत: शरीर के इन 6 हिस्सों पर तिल बनाता है धन और समृद्धि का राज


    नई दिल्ली। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, महिलाओं के शरीर पर कुछ खास जगहों पर तिल होना न केवल सौंदर्य बढ़ाता है, बल्कि उन्हें भाग्यशाली और संपन्न भी बनाता है। माना जाता है कि ऐसे तिल लक्ष्मी का साक्षात रूप होते हैं और जिस घर में ये महिलाएं जाएं, वहां सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य का वास होता है।

    1. माथे के मध्य में तिल – आत्मविश्वास और सम्मान
    माथे के बीच या दाहिनी ओर तिल वाली महिलाएं नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास से भरी होती हैं। ये समाज में प्रतिष्ठित होती हैं और परिवार के लिए तरक्की के रास्ते खोलती हैं।

    2. नाक की नोक पर तिल – आर्थिक राजयोग
    नाक पर तिल भले ही स्वभाव में थोड़ी जिद दिखाए, लेकिन यह आर्थिक मामलों में शुभ है। ऐसे तिल वाली महिलाएं कम मेहनत में भी विलासिता और सफलता प्राप्त करती हैं।

    3. ठुड्डी पर तिल – आर्थिक सुरक्षा
    ठुड्डी पर तिल चेहरे की सुंदरता बढ़ाता है और धन संचय में मदद करता है। यह आर्थिक स्थिरता और परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    4. कमर पर तिल – ऐश्वर्य और विलासिता
    कमर पर तिल होने वाली महिलाएं जीवन में सभी भौतिक सुख-सुविधाओं का आनंद उठाती हैं। इन्हें भाग्यशाली और ऐश्वर्यशाली माना जाता है।

    5. हथेली के अंदर तिल – धन की बरकत
    दाहिनी हथेली के अंदर तिल होने से धन का आगमन होता है। ऐसे महिलाएं धनवान होती हैं और उनके पास पैसा टिकता भी है।

    6. पैरों के तलवों पर तिल – राजयोग और यात्राएं
    पैरों के तलवों पर तिल राजयोग और ऊंचे पद का संकेत देता है। ये महिलाएं देश-विदेश की यात्राओं का अवसर प्राप्त करती हैं।
    सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, ये तिल केवल शरीर का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यक्ति के पूर्व कर्म और भविष्य का आईना भी हैं।
    नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामुद्रिक शास्त्र पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही लें।

  • ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण

    ग्वालियर: कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती से दरिंदगी, शादी का झांसा देकर साल भर तक किया शोषण


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के घाटीगांव क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक युवक ने अपनी ही दूर की रिश्तेदार युवती को नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर हवस का शिकार बनाया। आरोपी यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने शादी के ‘रंगीन सपने’ दिखाकर करीब एक साल तक युवती का शारीरिक शोषण किया। जब पीड़िता ने शादी के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी ने न केवल इनकार कर दिया बल्कि उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

    दोस्त के जन्मदिन के बहाने ले गया खेत

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता घाटीगांव क्षेत्र की रहने वाली है। उसकी पहचान आरोन निवासी रामनिवास बंजारा से थी, जो रिश्ते में उसका दूर का भाई लगता था। जनवरी 2025 की घटना: आरोपी ने दोस्त के जन्मदिन का बहाना बनाकर युवती को साथ घूमने चलने के लिए राजी किया। भरोसे में आकर युवती उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। नशीली कोल्ड ड्रिंक आरोपी उसे गांव से दूर एक सुनसान खेत में बनी झोपड़ी में ले गया। वहां उसने युवती को कोल्ड ड्रिंक पिलाई, जिसमें नशीला पदार्थ मिला था। युवती के बेहोश होते ही आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

    शादी का झांसा और सीक्रेट मोबाइल

    होश आने पर जब युवती ने विरोध किया, तो रामनिवास ने शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया। आरोपी ने युवती को अपने जाल में फंसाए रखने के लिए एक अलग मोबाइल और सिम कार्ड भी दिया था, ताकि वे गुप्त रूप से बात कर सकें। जब भी युवती के माता-पिता घर से बाहर होते, आरोपी वहां पहुंचकर उसका शोषण करता रहा। यह सिलसिला करीब एक साल तक चलता रहा।

    धमकी मिलने पर खुला राज

    हाल ही में जब पीड़िता और उसके परिजनों ने रामनिवास पर शादी का दबाव बनाया, तो उसने अपना असली रंग दिखा दिया। आरोपी ने शादी से साफ इनकार करते हुए युवती को धमकी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया या दोबारा फोन किया, तो वह उसे जान से मार देगा। डरी-सहमी पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और परिजनों के साथ थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई।

    पुलिस की कार्रवाई

    घाटीगांव थाना पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी रामनिवास बंजारा के खिलाफ दुष्कर्म  और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।

  • मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    मायावती का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन, UGC नए नियमों पर रोक को बताया उचित

    जयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाना उचित निर्णय है। मायावती ने यह भी सुझाव दिया कि अगर नए नियम लागू किए जाते समय सवर्ण समाज को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता और सभी पक्षों की सहमति ली जाती, तो विवाद से बचा जा सकता था। UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम लागू किए थे। इन नियमों में विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को लक्षित किया गया, जबकि सामान्य वर्ग के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं था।

    इस पर कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि आजादी के 75 सालों में भारत ने जातिविहीन समाज की दिशा में प्रगति की है, क्या हम अब पीछे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया और 13 जनवरी को लागू हुए नए UGC रेगुलेशंस पर रोक लगा दी। मायावती ने कहा कि नए नियमों के कारण सामाजिक तनाव पैदा हुआ और अगर सभी पक्षों की राय ली जाती और अपरकास्ट/सवर्णों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो विवाद से बचा जा सकता था। बीएसपी सुप्रीमो ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा में समानता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी वर्गों के अधिकार और न्याय का ध्यान रखना जरूरी है।

    उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालयों से अपील की कि सभी नियम पारदर्शी और निष्पक्ष हों ताकि समाज में सामाजिक असंतोष न बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम है। वहीं, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह मामला ध्यानाकर्षक है क्योंकि इसमें देश के सामाजिक संवेदनशील वर्गों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस छिड़ी हुई है। इस फैसले के बाद अब सरकार और UGC को नए नियमों को दोबारा ड्राफ्ट करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जाति या धर्म का नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा है।