Author: bharati

  • इस्लामिक नाटो की तैयारी, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी

    इस्लामिक नाटो की तैयारी, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी


    अंकारा। बीते साल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुई डिफेंस डील वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी। दोनों देशों ने एक ऐसा सुरक्षा समझौता कर लिया है जिसके तहत एक देश पर हमले को दूसरे के विरुद्ध भी हमला माना जाएगा। यह समझौता काफी हद तक नाटो के उस अनुच्छेद की तरह है, जिसमें पश्चिमी देशों के इस समूह में किसी भी सदस्य पर हमले को पूरे समूह के खिलाफ हमला माना जाता है। अब पाक और सऊदी की इस डील से एक और मुस्लिम देश जुड़ना चाहता है और यह तीनों देश मिलकर इस्लामिक नाटो नाम की एक खिचड़ी पका रहे हैं।

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की ने सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस डील का हिस्सा बनने में बेहद दिलचस्पी दिखाई है और इसके लिए बैठकों का दौर भी जारी है। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक यह गठबंधन स्वाभाविक रूप से आकार ले रहा है क्योंकि दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रणनीतिक हित आपस में मिलते हैं। वहीं तीनों देशों के बीच पहले से ही साठ गांठ बनी हुई है।

    इस समूह का संभावित विस्तार इसीलिए भी अहम है क्योंकि तुर्की सिर्फ एक और क्षेत्रीय खिलाड़ी नहीं है। यह अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन का भी हिस्सा है और अमेरिका के बाद नाटो में दूसरी सबसे बड़ी सेना तुर्की की ही है।
    रक्षा संबंध पहले से ही मजबूत

    पाकिस्तान के साथ तुर्की के रक्षा संबंधों की बात की जाए तो वह बेहद अच्छे रहे हैं। तुर्की पाकिस्तानी नौसेना के लिए कार्वेट युद्धपोत बना रहा है, पाकिस्तान के दर्जनों F-16 लड़ाकू विमानों का आधुनिकीकरण किया है और सऊदी और पाक दोनों के साथ ड्रोन तकनीक साझा कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और तुर्की शिया-बहुल ईरान को लेकर एकमत हैं और दोनों सैन्य टकराव के बजाय ईरानी शासन का समर्थन करते हैं। इसके अलावा दोनों देश एक स्थिर, सुन्नी-नेतृत्व वाले सीरिया का समर्थन करने और फिलिस्तीन को लेकर भी एकजुट हैं।
    क्या कह रहे विशेषज्ञ?

    अंकारा स्थित थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहत अली ओजकान के मुताबिक इस समूह में तीनों देशों की भूमिका भी तय हो गई है।

    इस्लामिक नाटो को खड़ा करने में जहां सऊदी अरब वित्तीय सहायता देगा, वहीं पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और मैनपावर देगा। तुर्की अपनी सैन्य विशेषज्ञता और घरेलू रक्षा उद्योग का योगदान दे सकता है। ओजकान के मुताबिक, “जैसे-जैसे अमेरिका इस क्षेत्र में अपने और इजरायल के हितों को प्राथमिकता दे रहा है, बदलते समय में ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान करने के लिए नए तरीके विकसित कर रहे हैं।”
    मिस्र ने भी दिखाई थी दिलचस्पी

    बीते साल कतर पर इजरायल के हमले के बाद दोहा में बुलाई गई आपात बैठक में भी मुस्लिम देशों ने अरब-नाटो पर भी चर्चा की थी। इस बैठक में पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और यूएई सहित 60 मुस्लिम देशों ने हिस्सा लिया था।

    बैठक के दौरान अरब देशों में सबसे बड़ी सेना रखने वाले मिस्र ने अरब-नाटो के प्रस्ताव को पुनर्जीवित करने पर अन्य देशों का समर्थन मांगा था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र ने इस समूह के लिए शुरुआत में 20,000 सैनिकों का योगदान देने की पेशकश भी की थी। वहीं मिस्र की राजधानी काहिरा को अरब-नाटो का मुख्यालय बनाने और एक मिस्र के एक हाई रैंक जनरल को कमांडर बनाने की भी पेशकश की गई थी।
    भारत के लिए चिंता?

    पाकिस्तान और तुर्की जैसे भारत के दुश्मनों का इस तरह के सैन्य संगठन से जुड़ना भारत के लिए एक खतरे की घंटी हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब बीते मई महीने में भारत और पाक के बीच बनी युद्ध जैसी स्थिति के दौरान तुर्की ने पाक को अपने कई अहम हथियार और ड्रोन दिए थे। हालांकि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम्स ने भारत की हिफाजत की औक पाक के कायराना हमलों का माकूल जवाब दिया था। वहीं विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस तरह के समझौते को सक्रिय करने का संकल्प महज बातचीत है और खाड़ी देशों के लिए इसे जमीनी हकीकत बनाना बेहद मुश्किल है।.

  • भारतीय प्रकाशन उद्योग की बदली तस्वीर: 2026 में आएगी नई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट

    भारतीय प्रकाशन उद्योग की बदली तस्वीर: 2026 में आएगी नई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट


    नई दिल्ली। भारत के प्रकाशन उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों को समझने और उनका आकलन करने के लिए अब एक और अहम अध्ययन सामने आने वाला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एफआईपी ने नील्सनआईक्यू बुकडेटा के सहयोग से इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट – एडिशन 3 के लॉन्च की घोषणा कर दी है। यह रिपोर्ट प्रिंट बुक्स के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग और ऑडियोबुक के बढ़ते प्रभाव को न सिर्फ दर्ज करेगी बल्कि पहली बार उनके आर्थिक योगदान का भी विस्तृत विश्लेषण पेश करेगी।इस रिपोर्ट की घोषणा नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 के दौरान आयोजित एक मीडिया बातचीत में की गई। रिपोर्ट के अगस्त-सितंबर 2026 तक जारी होने की संभावना जताई गई है। प्रकाशन जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में पढ़ने की आदतें प्लेटफॉर्म और कंटेंट की खपत तेजी से बदल रही है।

    एफआईपी के उपाध्यक्ष प्रणव गुप्ता ने बताया कि इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा संस्करण पहले के दोनों अध्ययनों से काफी अलग होगा। उन्होंने कहा कि अब तक की रिपोर्ट्स में मुख्य रूप से प्रिंट पब्लिशिंग पर फोकस किया गया था लेकिन नया संस्करण भारतीय बुक इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर सामने लाएगा। इसमें प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग के सभी स्वरूपों-ई-बुक्स और ऑडियोबुक-का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह भी आकलन किया जाएगा कि ये सभी प्रारूप भारतीय अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दे रहे हैं।प्रणव गुप्ता ने इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2022 का हवाला देते हुए बताया कि उस अध्ययन के अनुसार भारत में 24000 से अधिक प्रकाशक सक्रिय हैं और हर साल 2.5 लाख से ज्यादा आईएसबीएन प्रकाशित होते हैं। उस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि प्रिंट बुक मार्केट में स्कूल शिक्षा की हिस्सेदारी सबसे अधिक यानी 71 प्रतिशत थी जबकि उच्च शिक्षा का हिस्सा 25 प्रतिशत और ट्रेड पब्लिशिंग का योगदान करीब 4 प्रतिशत रहा।

    उन्होंने कहा कि नया संस्करण प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों को एक साथ देखकर यह समझने की कोशिश करेगा कि प्रकाशन उद्योग किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। खास बात यह है कि पहली बार डिजिटल पब्लिशिंग के आर्थिक प्रभाव को आंकड़ों के साथ सामने रखा जाएगा जो उद्योग के लिए एक अहम संदर्भ साबित हो सकता है।नील्सनआईक्यू बुकडेटा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विक्रांत माथुर ने बताया कि रिपोर्ट के पहले संस्करणों में कोविड-19 का प्रकाशन उद्योग पर प्रभाव शिक्षा अवसंरचना का विस्तार स्कूल बोर्डों में नामांकन के रुझान आयात-निर्यात कॉपीराइट नीतियां और पाइरेसी जैसी चुनौतियों का अध्ययन किया गया था।

    उन्होंने कहा कि अब पांच साल के अंतराल के बाद बाजार को दोबारा देखना जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि डिजिटल पब्लिशिंग किस तरह बढ़ी है उसका आकार क्या है और स्कूल उच्च शिक्षा तथा जनरल ट्रेड जैसे अलग-अलग सेगमेंट में उसका असर कैसा रहा है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में पब्लिशिंग इंडस्ट्री की तुलना संगीत और फिल्म जैसे अन्य एंटरटेनमेंट सेक्टर से भी की जाएगी।उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष न सिर्फ प्रकाशकों लेखकों और वितरकों के लिए उपयोगी होंगे बल्कि नीति-निर्माण और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

  • साहिबजादा फरहान का विवादित बयान, सोशल मीडिया पर मची हलचल

    साहिबजादा फरहान का विवादित बयान, सोशल मीडिया पर मची हलचल



    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट के ओपनर साहिबजादा फरहान का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने क्रिकेट फैन्स और पूर्व खिलाड़ियों को हैरान कर दिया है। वीडियो में फरहान ने सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, रोहित शर्मा और सईद अनवर जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ते हुए अहमद शहजाद को अपना पसंदीदा और सर्वश्रेष्ठ ओपनर बताया।

    सोशल मीडिया पर हुआ हंगामा
    फरहान के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई। 

    पूर्व पाकिस्तानी खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
    पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने इस बयान को सुनकर मजाकिया अंदाज में कहा,

    “यह सौ फीसदी फेक है। साहिबजादा फरहान अभी पागल नहीं हुए हैं कि वे सचिन तेंदुलकर से ऊपर अहमद शहजाद को चुन लें। मैं हाथ जोड़कर कहता हूं, इस टॉपिक को यहीं खत्म कर दीजिए।”

    वहीं, कामरान अकमल ने कहा,

    “फरहान को अपने जवाब सोच-समझकर देना चाहिए था। अपना आइडल बताना ठीक है, लेकिन सचिन और सईद अनवर जैसे दिग्गजों से तुलना करना सही नहीं है। जवाब देने का तरीका बेहतर हो सकता था।”

    इस विवाद के बाद बासित अली और कामरान अकमल ने मिलकर फरहान से सार्वजनिक माफी भी मांगी।

    साहिबजादा फरहान का क्रिकेट करियर
    फरहान पाकिस्तान के लिए टी20 इंटरनेशनल में नियमित ओपनर बन चुके हैं। अब तक उन्होंने 37 टी20 मैचों में 917 रन बनाए हैं, जिसमें 8 अर्धशतक शामिल हैं। हालांकि उन्हें अभी तक वनडे और टेस्ट डेब्यू का मौका नहीं मिला है।

    आगामी टी20 वर्ल्ड कप में भूमिका
    साहिबजादा फरहान को आगामी टी20 वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान की प्रोविजनल स्क्वाड में शामिल किया गया है। आईसीसी के नियमों के अनुसार 31 जनवरी तक टीम में बदलाव संभव है, इसके बाद किसी भी बदलाव के लिए आईसीसी की अनुमति आवश्यक होगी।

  • राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां

    राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां


    नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

    सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

    इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    एमपी में ठंड का कहर जारी, कोहरे ने रोकी रफ्तार, 16 जनवरी से बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश में जनवरी की ठंड इस बार लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान बीते कई दिनों से 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे नीचे बना हुआ है। भले ही मौसम विभाग ने अब तक औपचारिक रूप से शीतलहर की घोषणा नहीं की हो लेकिन आम लोगों के लिए सर्दी किसी शीतलहर से कम नहीं है। सुबह-शाम की ठिठुरन और दिनभर ठंडी हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।

    उत्तर-पश्चिमी अंचल खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग इन दिनों घने कोहरे की चपेट में है। ग्वालियर भिंड मुरैना और दतिया जिलों में सुबह के समय कोहरा इतना घना हो रहा है कि सड़कें हाईवे और आसपास की इमारतें तक साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के वक्त लोग हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी रफ्तार से सफर करने को मजबूर हैं।मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में कल्याणपुर शहडोल करौंदी खजुराहो और ग्वालियर शामिल रहे। इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। हालांकि दिन में धूप निकलने से कुछ घंटों के लिए राहत जरूर मिलती है लेकिन सूर्यास्त के बाद ठंड फिर से तीखी हो जाती है और रातें बेहद सर्द बनी हुई हैं।

    घने कोहरे का सीधा असर रेल यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली–भोपाल–इंदौर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से पहुंच रही हैं। यात्रियों के मुताबिक मालवा एक्सप्रेस झेलम एक्सप्रेस और सचखंड एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड और अनिश्चितता के बीच इंतजार करना पड़ रहा है जिससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल ठंड का असर बना रहेगा लेकिन 15–16 जनवरी के बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहा एक नया पश्चिमी विक्षोभ मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके असर से 16 जनवरी के बाद अगले 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश या मावठा होने की संभावना है।

    बारिश के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर देखने को मिल सकती है लेकिन ठंड से तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग का कहना है कि बादलों और नमी के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को अभी कुछ दिन और सर्दी से सतर्क रहने की जरूरत है।कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में ठंड और कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले दिनों में बारिश जहां किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है वहीं फिलहाल ठंड का असर बरकरार रहने के संकेत हैं।

  • Bank Holiday: बैंक जानें वालों के लिए अलर्ट, कल 16 जनवरी को इस राज्य में बैंकिंग सेवाएं रहेंगी बंद

    Bank Holiday: बैंक जानें वालों के लिए अलर्ट, कल 16 जनवरी को इस राज्य में बैंकिंग सेवाएं रहेंगी बंद

    नई दिल्ली जनवरी 2026 का महीना बैंकों से जुड़े कामों के लिहाज से थोड़ा सतर्क रहने वाला है. अलग-अलग राज्यों और शहरों में त्योहारों और खास मौकों की वजह से कई दिन बैंक बंद करने का फैसला लिया गया है. ऐसे में अगर आप किसी काम से बैंक ब्रांच जाने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि उस दिन आपके शहर में बैंक खुले रहेंगे या नहीं? जानकारी लिए बिना बैंक जाने से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

    कल यानी 16 जनवरी को भी कुछ जगहों पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने वाली हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बैंक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, 16 जनवरी को कुछ राज्यों में बैंक बंद करने का ऐलान किया गया है. इसलिए कल बैंक जाने से पहले चेक कर लें कि आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद. ताकि आपका कीमती समय और मेहनत दोनों बच सके….

    इस राज्य में 16 जनवरी को बैंक रहेंगे बंद

    कल यानी 16 जनवरी को तमिलनाडु में बैंकों को बंद करने का फैसला लिया गया है. आरबीआई की बैंक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, इस दिन राज्यभर में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. अगर आप तमिलनाडु में रहते हैं और बैंक से जुड़ा कोई काम है, तो बेहतर होगा कि आप किसी और दिन अपना काम पूरा करें.

    दरअसल, 16 जनवरी को तमिलनाडु में तिरुवल्लुवर दिवस मनाया जाता है. यह दिन महान तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की याद में मनाया जाता है. इस अवसर पर आरबीआई ने राज्य में बैंक हॉलिडे घोषित किया है. तमिलनाडु को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में 16 जनवरी को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.

    ऑनलाइन सुविधाएं रहेंगी चालू

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद भी ऑनलाइन सेवाएं पहले की तरह ही सुचारु रूप से चालू रहेंगी. ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. बैंक ग्राहक यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी सुविधाएं सामान्य दिनों की तरह ही इस्तेमाल कर सकेंगे.

    आप पैसे ट्रांसफर करने, बैलेंस चेक करने, बिल भुगतान करने और अन्य डिजिटल लेनदेन आसानी से कर सकेंगे, जिससे जरूरी काम में किसी तरह की रूकावट नहीं आएगी. हालांकि जिन कामों के लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, वैसे काम नहीं हो पाएंगे.

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम

    दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। अब सड़क पर बाइक और स्कूटी चलाने वाले सभी वाहन चालकों और उनके सवारों के लिए डबल हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम दिल्ली और नोएडा में लागू डबल हेलमेट नियम की तर्ज पर राज्यव्यापी प्रभावी होगा।

    क्यों जरूरी है डबल हेलमेट?
    बाइक और स्कूटी पर सवार लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और सिर की चोटों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, कई बार दुर्घटनाओं में सवार का सिर और चालक का सिर दोनों गंभीर रूप से घायल होते हैं, इसलिए केवल चालक के लिए हेलमेट पहनना पर्याप्त नहीं है।

    जुर्माना और दंड
    यदि कोई चालक या सवार डबल हेलमेट नहीं पहनता है, तो उसे 200 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियम के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और यह नियम सभी सड़क और हाईवे पर लागू रहेगा।

    सरकार का उद्देश्य
    उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़क दुर्घटनाओं में मौत और गंभीर चोटों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही यह सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

  • डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स

    डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स


    रीवा। मध्‍य प्रदेश के रीवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं. रीवा शहर की चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहनलाल द्विवेदी का दावा है कि उन्होंने पिछले करीब 50 सालों से एक पल के लिए भी नींद नहीं ली. हैरानी की बात ये है कि इतने लंबे समय तक न सोने के बावजूद उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है और उनकी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य लोगों जैसी है.

    जब मेडिकल साइंस भी रह गई जवाब ढूंढती
    मेडिकल साइंस के मुताबिक एक स्वस्थ इंसान को रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है. नींद की कमी से शरीर और दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है. लेकिन मोहनलाल द्विवेदी इस सिद्धांत को पूरी तरह चुनौती देते नजर आते हैं.

    नका कहना है कि न सिर्फ उन्हें नींद नहीं आती, बल्कि चोट लगने पर भी उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता.
    पहले झाड़-फूंक, फिर बड़े शहरों के डॉक्टर
    शुरुआत में मोहनलाल ने अपनी इस समस्या को किसी से साझा नहीं किया. पूरी रात जागते रहते थे, लेकिन न आंखों में जलन होती थी और न ही कामकाज पर असर. जब परिवार को बताया गया तो पहले झाड़-फूंक करवाई गई. इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया गया. कई तरह की जांचें हुईं, लेकिन बीमारी का कारण आज तक सामने नहीं आ सका.

    शानदार करियर, फिर भी नींद गायब
    मोहनलाल द्विवेदी का करियर भी किसी आम व्यक्ति से कम नहीं रहा. 1973 में लेक्चरर बने, 1974 में एमपीपीएससी पास कर नायब तहसीलदार बने, 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर पद से रिटायर हुए. नींद की समस्या की शुरुआत 1973 के आसपास हुई और तब से आज तक उन्होंने सोने का अनुभव नहीं किया.
    किताबें, टहलना और शांत दिनचर्या
    मोहनलाल अपना ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बिताते हैं.

    रात के समय अक्सर छत पर टहलते नजर आते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि उनकी पत्नी भी दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही सोती हैं.
    डॉक्टर भी बोले-मामला अविश्वसनीय
    रीवा संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर राहुल मिश्रा का कहना है कि यह मामला मेडिकल साइंस के लिए बेहद चौंकाने वाला है. उनके मुताबिक, बिना सोए रहना लगभग असंभव है. हालांकि स्लीप थैरेपी और साइकोलॉजी में लगातार नए शोध हो रहे हैं. उन्होंने सलाह दी कि मोहनलाल को एक बार फिर साइकोलॉजी विभाग से संपर्क करना चाहिएइस्लामिक नाटो को लेकर पाक, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी, भारत के लिए चिंता?
  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।