Author: bharati

  • दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची

    दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची


    नई दिल्ली । देश में थोक स्तर पर महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आई है। विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह सितंबर 2025 के बाद पहली बार है जब थोक महंगाई की दर शून्य से ऊपर दर्ज की गई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसारनवंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे रही थी और यह माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहींएक साल पहले दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तरह साल-दर-साल तुलना में थोक महंगाई अब भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैलेकिन हालिया बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव के संकेत मिलते हैं।

    विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाई महंगाई

    दिसंबर में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा रहा। विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा योगदान होता है और इनकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समग्र महंगाई दर को प्रभावित करती है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसारकच्चे माल की लागतपरिवहन खर्च और मांग में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    तीन महीने बाद राहत खत्म

    सितंबर 2025 के बाद से लगातार तीन महीनों तक थोक महंगाई दर शून्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थीजिससे उद्योग और व्यापार जगत को कुछ राहत मिली थी। हालांकि दिसंबर में दर के फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आने से यह संकेत मिलता है कि कीमतों में स्थिरता की अवधि अब खत्म हो सकती है।

    खुदरा महंगाई से अलग संकेत

    थोक महंगाई और खुदरा महंगाई CPI के रुझान अक्सर अलग-अलग होते हैं। थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिख सकता है। ऐसे में दिसंबर के आंकड़े आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर संभावित दबाव की ओर इशारा कर सकते हैंहालांकि इसका सीधा और त्वरित असर होना जरूरी नहीं है।

    आगे क्या संकेत

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी फिलहाल चिंताजनक नहीं हैलेकिन अगर विनिर्मित उत्पादों और कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहातो इसका असर उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर का 0.83 प्रतिशत पर पहुंचना यह दर्शाता है कि कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि मौजूदा स्तर अभी नियंत्रण में हैलेकिन सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि महंगाई के रुझानों पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

  • राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    नई दिल्ली। नई दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में पिछले सप्ताह एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। आम आदमी पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रचना यादव को उनके घर के पास ही दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले उनसे नाम पूछा और पुष्टि होते ही गोलियां चला दीं। घटना के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में हमलावर साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

    पति की हत्या के मामले में गवाह थीं रचना यादव

    रचना यादव की हत्या अकेली नहीं मानी जा सकती। वर्ष 2023 में उनके पति विजेंद्र यादव की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस मामले में रचना यादव प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह थीं। पुलिस का अनुमान है कि उनकी हत्या का मकसद पुराने मामले को कमजोर करना और गवाहों में डर का माहौल पैदा करना हो सकता है। रचना यादव ने अपने पीछे दो बेटियों का परिवार छोड़ा है, जिन्हें इस घटना से गहरा आघात पहुँचा है।

    AAP नेताओं ने जताया दुख और पुलिस पर उठाए सवाल

    मंगलवार को शालीमार बाग में रचना यादव की शोक सभा आयोजित की गई। इसमें आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा शामिल हुए। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की और रचना यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हत्या के आरोपी सीसीटीवी में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, बावजूद इसके पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी है। उन्होंने इसे राजधानी की कानून-व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वारदात स्थल मुख्यमंत्री के आवास से केवल 400 मीटर दूर है, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा।

    न्याय दिलाने के लिए AAP का संघर्ष

    AAP ने साफ किया कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। पार्टी ने दोहराया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने और परिवार को इंसाफ देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और लोगों में भय का माहौल पैदा किया है।

    रचना यादव की हत्या न सिर्फ दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है, बल्कि यह पुराने हत्या मामलों में गवाहों की सुरक्षा की जरूरत को भी उजागर करती है। AAP नेताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों को तुरंत पकड़ने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • अंगूरी भाभी की तुलना पर रश्मि देसाई का बयान: शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे दोनों का सम्मान जरूरी

    अंगूरी भाभी की तुलना पर रश्मि देसाई का बयान: शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे दोनों का सम्मान जरूरी


    नई दिल्ली/ मुंबई।टीवी की दुनिया में अंगूरी भाभी का किरदार हमेशा से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है। इस किरदार को सबसे पहले लोकप्रिय बनाने वाली अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने करीब दस साल बाद शो भाभीजी घर पर हैं 2.0 में वापसी की है। उनकी इस वापसी के साथ-साथ दिए गए बयान भी चर्चा में आ गए हैं। शिल्पा ने हाल ही में कहा था कि अंगूरी भाभी हमेशा से वही रही हैं और वह अपनी तुलना किसी से नहीं करतीं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।इसी मुद्दे पर अभिनेत्री रश्मि देसाई ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी राय रखी और तुलना की संस्कृति पर सवाल उठाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे दोनों ही बेहतरीन कलाकार हैं और उनकी तुलना करना न तो जरूरी है और न ही सही।

    रश्मि देसाई ने कहा कि शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे ने अपने-अपने समय में अंगूरी भाभी के किरदार को पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ निभाया है। दोनों ने इस किरदार को अपनी-अपनी शैली में जीवंत किया और दर्शकों का प्यार हासिल किया। ऐसे में किसी एक को दूसरे से बेहतर ठहराना या तुलना करना कलाकारों के योगदान को कम करके देखने जैसा है।उन्होंने आगे कहा कि शिल्पा शिंदे एक वरिष्ठ और अनुभवी अभिनेत्री हैं। उनकी तुलना करना सम्मान की कमी जैसा लगता है। अभिनय की दुनिया में किसी कलाकार की पहचान उसकी मेहनतअनुभव और परफॉर्मेंस से बनती हैन कि तुलना से। रश्मि के मुताबिकशिल्पा ने जो भी बयान दिया हैउसे गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

    रश्मि देसाई ने शिल्पा शिंदे के व्यक्तित्व पर बात करते हुए कहा कि वह एक बेबाक और साफ-गोई वाली अभिनेत्री हैं। उन्होंने जो कहावह उनके निजी अनुभव और करियर के सफर का हिस्सा है। शिल्पा ने कभी शो छोड़ने का इरादा नहीं किया था और अब जब वह दोबारा लौटकर आई हैंतो यह उनके लिए घर वापसी जैसा अनुभव है। दर्शकों को इस वापसी को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए।इसके साथ ही रश्मि ने शुभांगी अत्रे की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शुभांगी ने अंगूरी भाभी के किरदार को अपने समय में शानदार तरीके से निभाया और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने इस भूमिका के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखाई और शो की लोकप्रियता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

    रश्मि देसाई ने कहा कि शिल्पा की वापसी निश्चित तौर पर शो के लिए एक नया अध्याय हैलेकिन इससे यह नहीं भूलना चाहिए कि शुभांगी अत्रे ने भी इस किरदार को लंबे समय तक सफलता के साथ आगे बढ़ाया। दोनों कलाकारों का योगदान समान रूप से सराहनीय है।अंत में रश्मि ने यही संदेश दिया कि टीवी इंडस्ट्री में तुलना की बजाय कलाकारों के काम और समर्पण का सम्मान किया जाना चाहिएक्योंकि हर कलाकार अपने तरीके से किसी भी किरदार को खास बनाता है।

  • संसदीय समिति के सामने जस्टिस वर्मा का पक्ष: कैश कांड में पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

    संसदीय समिति के सामने जस्टिस वर्मा का पक्ष: कैश कांड में पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। कैश कांड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय समिति को अपना लिखित जवाब सौंप दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महाभियोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। जस्टिस वर्मा का कहना है कि यदि प्रशासनिक एजेंसियां घटनास्थल को सुरक्षित रखने में विफल रहीं, तो इसकी जिम्मेदारी उन पर डालना न्यायसंगत नहीं है।

    “घटनास्थल पर मैं सबसे पहले नहीं पहुंचा”

    सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा ने समिति को दिए जवाब में स्पष्ट किया कि वह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति नहीं थे। आग लगने जैसी गंभीर घटना में पुलिस और अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि वे तुरंत मौके को सील करें और सुरक्षा मानकों का पालन करें। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो स्थल को सुरक्षित किया और न ही मानक प्रक्रिया का पालन किया, ऐसे में बाद की किसी भी चूक के लिए उन्हें दोषी ठहराना अनुचित है।

    पुलिस और फायर ब्रिगेड की भूमिका पर सवाल

    जस्टिस वर्मा ने अपने जवाब में यह भी कहा कि आग लगने के समय मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड दोनों मौजूद थीं। इसके बावजूद घटनास्थल को सील नहीं किया गया और आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस समय किसी भी तरह की नकदी की औपचारिक बरामदगी नहीं की गई थी, जबकि बाद में नकदी मिलने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, जब घटनास्थल पूरी तरह से प्रशासनिक एजेंसियों के नियंत्रण में था, तो उसकी सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी उन पर कैसे डाली जा सकती है।

    महाभियोग प्रक्रिया को दी चुनौती

    इन्हीं तर्कों के आधार पर जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया और संसदीय समिति के गठन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में शीर्ष अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। अब पूरे घटनाक्रम पर देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा है।

    क्या है कैश कांड की पूरी कहानी

    यह मामला मार्च 2025 में उस समय चर्चा में आया, जब दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोर रूम में आग लग गई। 14 मार्च 2025 को लगी इस आग को बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम को वहां फर्श पर 500 रुपये के नोटों के जले और आंशिक रूप से जले बंडल दिखाई दिए थे। इसी घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी।

    घटना के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस समिति गठित की और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में 140 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया, जिस पर अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तीन सदस्यीय संसदीय समिति का गठन किया।

    अब जस्टिस यशवंत वर्मा के जवाब और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस पूरे मामले की दिशा तय होगी।

  • लोहड़ी: प्यार, परंपरा और खुशियों के रंग में रंगे बॉलीवुड कपल्स

    लोहड़ी: प्यार, परंपरा और खुशियों के रंग में रंगे बॉलीवुड कपल्स


    नई दिल्ली। सर्दियों की ठिठुरन के बीच जब अलाव की गर्माहट दिलों को सुकून देती है, तब लोहड़ी का पर्व अपने साथ उल्लास, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है। पंजाब की इस पारंपरिक खुशियों भरी लोक-परंपरा को बॉलीवुड में भी पूरे जोश और अपनत्व के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर बॉलीवुड के चर्चित कपल्स के लिए लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि परिवार रिश्तों और साथ होने के एहसास का उत्सव है।कहीं सादगी से परिवार के साथ पूजा-अर्चना, तो कहीं दोस्तों के बीच हंसी-ठिठोली और सोशल मीडिया पर झलकती खुशियों की तस्वीरें बॉलीवुड कपल्स लोहड़ी को अपने-अपने अंदाज में खास बना देते हैं। इन सितारों का त्योहार मनाने का तरीका फैंस के लिए भी प्रेरणा बन जाता है।

    विक्की कौशल और कैटरीना कैफ

    विक्की कौशल और कैटरीना कैफ की लोहड़ी सेलिब्रेशन अक्सर सुर्खियों में रहती है। पंजाबी परंपरा से जुड़े विक्की के लिए यह त्योहार खास मायने रखता है, और कैटरीना भी इसे पूरे दिल से अपनाती नजर आती हैं। परिवार के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज, रंग-बिरंगे देसी परिधान और अलाव के चारों ओर बिताए गए सुकून भरे पल इनकी लोहड़ी को बेहद खास बना देते हैं। इनकी तस्वीरों में परंपरा और निजी खुशियों का खूबसूरत संगम साफ नजर आता है।

    सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी

    सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी लोहड़ी को सादगी और शालीनता के साथ मनाना पसंद करते हैं। यह कपल अक्सर करीबी दोस्तों और परिवार के साथ सीमित लेकिन दिल से जुड़े जश्न में शामिल होता है। पारंपरिक कपड़ों में सजे सिद्धार्थ और कियारा लोहड़ी की रस्मों में शामिल होकर त्योहार की सांस्कृतिक भावना को सम्मान देते दिखाई देते हैं। इनका जश्न दिखावे से दूर, भावनाओं से भरपूर होता है।

    पुलकित सम्राट और कृति खरबंदा

    पुलकित सम्राट और कृति खरबंदा त्योहारों को साथ मनाने के लिए जाने जाते हैं। इनकी लोहड़ी खुशहाल महफिलों, हंसी-मजाक और पारंपरिक रस्मों से सजी होती है। दोनों का साथ में त्योहार मनाना उनके मजबूत रिश्ते और जीवन के हर पल को सेलिब्रेट करने के स्वभाव को दर्शाता है। मुस्कुराते चेहरे और अपनापन इनकी लोहड़ी की सबसे बड़ी पहचान बन जाते हैं।

    शाहिद कपूर और मीरा राजपूत

    शाहिद कपूर और मीरा राजपूत के लिए लोहड़ी पूरी तरह पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा त्योहार है। यह कपल अक्सर बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पारंपरिक पूजा और रीति-रिवाजों के जरिए लोहड़ी मनाता है। अपनेपन और क्वालिटी टाइम से भरा यह जश्न फैंस के दिलों में भी खास जगह बना लेता है। शाहिद और मीरा की लोहड़ी यह दिखाती है कि त्योहारों की असली खुशी परिवार के साथ होती है।

    मनीष पॉल और संयुक्ता पॉल

    मनीष पॉल और उनकी पत्नी संयुक्ता पॉल लोहड़ी को बेहद पारंपरिक और घरेलू अंदाज में मनाते हैं। परिवार के साथ स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन, लोक-रीति और सादगी भरा उत्सव इनके लोहड़ी सेलिब्रेशन की पहचान है। बिना किसी तामझाम के, दिल से मनाया गया यह पर्व पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।

    परंपरा और प्यार का संगम

    कुल मिलाकर, बॉलीवुड कपल्स की लोहड़ी सेलिब्रेशन यह साबित करती है कि सितारों की चकाचौंध के बीच भी रिश्तों, परंपराओं और परिवार की अहमियत सबसे ऊपर है। अलाव की आग के साथ जहां ठंड दूर होती है, वहीं इन कपल्स की मुस्कानें त्योहार की असली गर्माहट को दर्शाती हैं। लोहड़ी इन सितारों के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि प्यार, साथ और खुशियों का खूबसूरत उत्सव है।

  • तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती

    तमिल संस्कृति भारत की साझा विरासत पोंगल समारोह में बोले पीएम मोदी- भरी रहे थाली और जेब सुरक्षित रहे धरती


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पोंगल के पावन अवसर पर तमिल संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित भव्य पोंगल समारोह में शामिल होकर प्रधानमंत्री ने न केवल इस उत्सव की खुशियों को साझा किया बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने का एक नया मंत्र भी दिया।

    ग्लोबल फेस्टिवल बना पोंगल: पीएम मोदी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पोंगल केवल एक क्षेत्रीय पर्व नहीं बल्कि एक ग्लोबल फेस्टिवल बन चुका है। उन्होंने कहा दुनिया भर में फैला तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। मैं भी उन प्रेम करने वालों में से एक हूँ और इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने तमिल संस्कृति को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताते हुए इसे सदियों को जोड़ने वाली कड़ी करार दिया।

    अन्नदाता के प्रति आभार और प्रकृति का संतुलन प्रधानमंत्री ने पोंगल के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस त्योहार में हमारे अन्नदाता की कड़ी मेहनत छिपी है। यह सूर्य देव और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पीएम मोदी ने कहा हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगली पीढ़ी के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना और जल संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।तमिल विरासत से प्रधानमंत्री का गहरा जुड़ाव अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पिछले एक साल में तमिल संस्कृति से जुड़े अपने सुखद अनुभवों को साझा किया। उन्होंने गंगई कोंडा चोलपुरम मंदिर में प्रार्थना वाराणसी के ‘काशी तमिल संगमम’ की जीवंत ऊर्जा और रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अनुभव तमिल विरासत की समृद्धि और महानता का साक्षात् प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को और अधिक सशक्त बनाती है।

    एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संदेश प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल जैसे पर्व हमें सिखाते हैं कि प्रकृति के प्रति आभार केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने संसाधनों के समझदारीपूर्ण उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि जब हम प्रकृति की देखभाल करेंगे तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। केंद्रीय मंत्री के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक तमिल वेशभूषा संगीत और पकवानों ने मिनी तमिलनाडु का दृश्य उत्पन्न कर दिया जहाँ प्रधानमंत्री ने सभी को पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

  • मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय

    मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय


    नई दिल्ली।उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ खास हो जाती है। सर्दियों की ठंड में गाजर मटर गोभी और अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी न सिर्फ स्वाद देती है बल्कि शरीर और मन को भी सुकून पहुंचाती है। यह व्यंजन केवल परंपरा या पर्व से जुड़ा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी स्वास्थ्य समझ भी छिपी हुई है जिसे आज आधुनिक चिकित्सा भी स्वीकार करती है।जनवरी का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों त्योहारों और भारी भोजन के बाद अपने शरीर को दोबारा संतुलन में लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर अपने-आप हल्के सादे और आसानी से पचने वाले भोजन की मांग करता है। शायद यही कारण है कि इस मौसम में खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है और यह हमें अंदर से ग्राउंडेड महसूस कराती है।

    इस विषय पर भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों या कमजोरी के समय खाई जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।डॉ. मीरा पाठक के अनुसार खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स का संतुलन होता है। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में पाए जाने वाले मिथिओनीन अमीनो एसिड मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर की मरम्मत और ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिटॉक्स डाइट की बात करें तो खिचड़ी सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। डॉ. मीरा बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में बेहद हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और हल्का भोजन करने से आंतों लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है जिससे शरीर खुद को रिपेयर कर पाता है।खिचड़ी की एक और खासियत यह है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में आम समस्या है। डॉ. मीरा के मुताबिक जूस कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा संतुलित और पोषण से भरपूर विकल्प है।

    इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की सूजन थकान और अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे रिकवरी और बीमारी के समय दिया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ बीमारों का खाना है।खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल प्रकृति है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स अलग-अलग दालें मौसमी सब्जियां पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ का प्रतीक है जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन देता है।

  • हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश

    हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश


    नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने अब ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के आधिकारिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आधिकारिक पत्राचार, अभिलेख या संचार में इन शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। यह निर्णय संवैधानिक निर्देशों और भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, क्योंकि संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का प्रयोग ही स्वीकार्य है।
    इतिहास की बात करें तो महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के लोग’। वहीं, बी.आर. आंबेडकर इसके विरोधी थे और वे इन्हें ‘दलित’ कहना पसंद करते थे। वर्तमान में यह शब्द कुछ विभागों और अधिकारियों द्वारा अब भी आधिकारिक संचार में उपयोग किया जा रहा था। इसी कारण राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करने का आदेश दिया है।

    सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से सभी आधिकारिक दस्तावेज, पत्राचार और संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का प्रयोग पूरी तरह निषिद्ध होगा।

    यह कदम केवल शब्दों पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

    हरियाणा सरकार का यह निर्णय समाज में समानता, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब राज्य के सभी विभाग और अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भाषा और अभिव्यक्ति संवैधानिक और सम्मानजनक हो, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाओं को आघात न पहुंचे।

    सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता।

    राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग अभी तक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

    इस निर्णय से न केवल संवैधानिक सटीकता सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी मजबूत होगी। अब से सरकारी और आधिकारिक संचार में केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का ही प्रयोग किया जाएगा।

    हरियाणा सरकार का यह कदम समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील शब्दावली का उपयोग न हो और सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए।

  • थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी

    थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी


    नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर (WPI) 0.83 प्रतिशत रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई। खाने-पीने की चीजों की थोक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए खाद्य महंगाई दर शून्य प्रतिशत रही। इसका मतलब यह है कि पिछले साल की तुलना में खाने की चीजें महंगी नहीं हुईं, जिससे आम जनता को राहत मिली।

    विनिर्मित वस्तुओं और अन्य समूहों का असर
    थोक महंगाई में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के समूह का वजन 64.23 प्रतिशत है। दिसंबर में इस समूह की कीमतों में 0.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस समूह में शामिल 22 उत्पादों में से 13 की कीमतें बढ़ीं, 8 उत्पादों की कीमतें घटीं और एक उत्पाद की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मूल धातुएं, रसायन और रासायनिक उत्पाद, वस्त्र और गैर-धातु खनिज उत्पादों में हुई।

    वहीं, रबर और प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कागज और पेय पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

    पिछले महीनों का रुझान
    नवंबर 2025 में थोक महंगाई दर -0.32 प्रतिशत थी, जबकि अक्टूबर में यह -1.21 प्रतिशत रही थी। पिछले साल नवंबर में थोक महंगाई 2.16 प्रतिशत थी। दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 0.71 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
    खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने नकारात्मक रही (-2.71 प्रतिशत), जिससे आम लोगों के घर के बजट को स्थिरता और राहत मिली।

    आरबीआई की प्रतिक्रिया और आर्थिक संकेत
    भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई घटने के कारण रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो अब 5.25 प्रतिशत हो गई है।

    उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई में गिरावट ने भारत को एक खास ‘सुनहरा समय’ दिया है, जिसमें विकास और स्थिरता दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में महंगाई नियंत्रण में रही, विनिर्मित वस्तुओं में मामूली बढ़ोतरी और खाद्य महंगाई में लगातार कमी ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी। आम लोगों के लिए खर्च करने की क्षमता बढ़ी और RBI ने रेपो रेट में कटौती कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया।

  • 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता

    2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता


    नई दिल्ली। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार पिछले सालों की स्थिरता के बाद अब 2026 में निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पेश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयरों के मूल्यांकन ठीक हैं, कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदें यथार्थवादी हैं और देश की आर्थिक नींव मजबूत है। हालांकि, वैश्विक घटनाएं निवेशकों के लिए कभी-कभी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं।


    मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार

    स्मॉलकेस मैनेजर्स का कहना है कि भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति अभी भी मजबूत है। देश में नियंत्रित महंगाई, ब्याज दरों में कटौती, टैक्स में राहत और जीएसटी में छूट के कारण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ाएंगे और कर्ज लेना आसान बनाएंगे।

    सोनम श्रीवास्तव, राइट रिसर्च की संस्थापक, बताती हैं कि 2026 में बाजार 2025 की तुलना में ज्यादा संतुलित और सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि निवेश से मिलने वाला लाभ कंपनियों की कमाई पर आधारित होगा, न कि केवल शेयरों की कीमत बढ़ने पर।


    लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों का परिदृश्य

    वेल्थट्रस्ट कैपिटल की स्मॉलकेस मैनेजर और सीईओ स्नेहा जैन के अनुसार, 2025 में मूल्यांकन में गिरावट के बाद अब लार्ज कैप कंपनियों के शेयर मिड और स्मॉल कैप से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लार्ज कैप कंपनियों की बैलेंस शीट, कैश फ्लो और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसलिए अगले 6 से 8 महीनों में ये निवेशकों के लिए अपेक्षा से अधिक आकर्षक साबित हो सकते हैं।

    स्नेहा जैन बताती हैं कि लार्ज कैप को ज्यादा मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में स्थिरता और मजबूत आधार देने के लिए रखना चाहिए। इसके अलावा, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की स्पष्टता, अल्पकालिक प्रोत्साहनों से ज्यादा अहम हैं।


    बजट और निवेशकों की भागीदारी

    प्राची देउस्कर, लोटसड्यू वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सह-संस्थापक, कहती हैं कि आगामी केंद्रीय बजट बुनियादी ढांचे, औपचारिक अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से जुड़े कदम बढ़ाएगा। इससे घरेलू निवेशकों की वित्तीय भागीदारी बढ़ सकती है।

    एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए फाइनेंस तक आसान पहुंच, क्रेडिट गारंटी और उत्पादकता बढ़ाने व बाजार तक पहुंच को मजबूत करने वाले कदम भी देखने को मिल सकते हैं।


    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में निवेश करने वाले निवेशकों को सोच-समझकर कंपनियों के कमाई के आधार पर शेयर चुनने चाहिए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह साल लंबी अवधि के फायदे के लिहाज से अवसरपूर्ण साबित हो सकता है।