भस्म आरती की विशेषताएँ
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

भस्म आरती की विशेषताएँ

मुख्यमंत्री के दौरे की शुरुआत एक रोड शो से होगी, जिसमें वे खुरई शहर में आम जनता से जुड़ेंगे और उन्हें इन विकास कार्यों की सौगातों का एहसास कराएंगे। रोड शो के बाद सीएम डॉ. यादव 165 करोड़ रुपये की लागत से 38 विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। इसके अलावा, 147 करोड़ रुपये की लागत से 48 विकास कार्यों का भूमिपूजन शिलान्यास भी किया जाएगा। ये कार्य मुख्यतः सड़क, जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों से जुड़े होंगे, जो खुरई और आसपास के इलाकों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
मुख्यमंत्री का भोपाल कार्यक्रम

पानी संकट और टैंकर माफिया पर सख्त रुख
घोषणापत्र जारी करते हुए सुप्रिया सुले ने पुणे और मुंबई में सक्रिय टैंकर माफिया का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के बीच अवैध टैंकर कारोबार आम लोगों का शोषण कर रहा है। मेनिफेस्टो में इस माफिया पर नियंत्रण और पारदर्शी जल आपूर्ति व्यवस्था लागू करने का वादा किया गया है, ताकि नागरिकों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े।
यातायात सुधार पर बड़ा जोर
संयुक्त घोषणापत्र में पुणे की गंभीर ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए ठोस रोडमैप रखा गया है। इसके तहत शहर में 33 मिसिंग रोड लिंक को जोड़ने का वादा किया गया है, जिससे सड़क नेटवर्क मजबूत होगा और जाम की समस्या कम होगी। इसके साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है।
फ्री बस और मेट्रो यात्रा का वादा
घोषणापत्र में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। शहरवासियों को मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा उपलब्ध कराने की योजना शामिल की गई है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना, ईंधन खर्च कम करना और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना बताया गया।
स्वास्थ्य सुविधाएं हर नागरिक के पास
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी घोषणापत्र में अहम वादा किया गया है। इसके अनुसार हर नागरिक को उसके घर से दो किलोमीटर के दायरे में अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आपात स्थिति में इलाज तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।
राजनीतिक संकेत भी अहम
सुप्रिया सुले और अजित पवार का एक मंच पर आना सिर्फ नगर निकाय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह तस्वीर आगामी चुनावी समीकरणों के लिए भी संकेत दे सकती है। हालांकि दोनों नेताओं ने मंच से सिर्फ स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं पर ही जोर दिया।
निष्कर्ष:
संयुक्त मेनिफेस्टो के जरिए एनसीपी (एसपी) और एनसीपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के मतदाताओं को विकास, बेहतर सुविधाओं और पारदर्शी प्रशासन का भरोसा दिलाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह एकजुटता चुनावी नतीजों में कितना असर दिखा पाती है।

सबसे ठंडे स्थान और तापमान
कोहरा और कोल्ड डे अलर्ट
मौसम विभाग का अनुमान

साल 1996 के बाद दुनिया में गायब हो गई थीं। अनु ने योगा और आध्यात्म की तरफ रुख कर लिया। साल 1999 में वे एक रोड एक्सिडेंट की शिकार हो गईं। बल्कि, वो पैरालाइज्ड भी हो गई थीं।3 साल तक चला अनु का ट्रीटमेंट
लगभग 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आ गईं। इस एक्सिडेंट में उनकी याददाश्त भी चली गई थी। 3 साल के लंबे ट्रीटमेंट के बाद उनकी याददाश्त वापस आ गईं। इस दौरान उन्होंने और उनके घर वालों ने बहुत सा स्ट्रगल किया।
सोशल एक्टिविस्ट हैं अनु अग्रवाल
अनु अग्रवाल वे अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर करती हैं। वे साल 2001 में ठीक होकर पहाड़ों पर चली गईं। साल 2015 में एक्ट्रेस ने अपना मेमॉयर अनुसुएल मेमॉयर ऑफ ए गर्ल हू केम बैक फ्रॉम द डेड लिखा।
इन दिनों ये काम करती हैं अनु
अनु अग्रवाल इस बात को लाइफ का सबसे सुखद समय कहा। वे अब मुंबई में रहती हैं। इन दिनों एक सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर काम कर रही हैं। अनु अग्रवाल को इसके अलावा किंग अंकल, गजब तमाशा, द क्लाउड डोर, जन्मकुंडली जैसी फिल्मों में देखा जा चुका है।

पुलिस ने किसी तरह युवती को शांत किया और उसे थाने ले गई। इस दौरान लोगों की भीड़ ने लगातार युवती से सवाल किए कि दीपक कौन है और कहां रहता है, जिस पर युवती ने कहा, मैं दीपक के साथ 9 महीने से रह रही हूं और उससे बहुत प्यार करती हूं। मुझे तो दीपक से ही मिलवाइए।
इस घटनाक्रम से सड़क पर जाम लग गया और पुलिस को तुरंत मौके पर पहुंचकर युवती को समझाने की कोशिश करनी पड़ी। अंततः पुलिस ने पूजा को थाने ले जाने के बाद उसे समझाया, और कुछ देर बाद दीपक भी थाने पहुंच गया। दोनों को एक साथ देखकर पुलिस ने उन्हें सख्त लहजे में हिदायत दी कि आगे से ऐसी हरकतें ना करें। इसके बाद दोनों प्रेमी युगल को थाने से जाने की अनुमति दे दी गई।

एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।
हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।

घटनास्थल पर पुलिस और 108 एम्बुलेंस की टीम ने तुरंत पहुंचकर घायलों को जिला अस्पताल दमोह भेजा। घायलों में से दामोदर अहिरवार की हालत गंभीर बताई गई है, और उन्हें इलाज के लिए जबलपुर रेफर कर दिया गया। अन्य दो घायलों का इलाज जिला अस्पताल में ही चल रहा है, और उनकी हालत स्थिर है।ड्यूटी डॉक्टर कौशिकी राजपूत ने बताया कि हादसे में तीनों घायलों को तुरंत भर्ती किया गया था।


OIC के बयान में कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करते हुए कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट 5 जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र आयोग द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव को याद दिलाता है, जिसमें जम्मू और कश्मीर के लोगों को संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के माध्यम से आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि की गई थी। इसमें आगे कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाता है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर के राज्य के रूप में मान्यता का सम्मान करने और 5 अगस्त 2019 और उसके बाद उठाए गए सभी एकतरफा कदमों को वापस लेने की अपील करता है।
बयान में संयुक्त राष्ट्र से भी एक अपील की गई है। इसमें कहा गया, “जनरल सेक्रेटेरिएट ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी पर भरोसा जताया है कि वह जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रस्तावों को लागू करे और UNSC के संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर विवाद का हल निकाले।”