टीम चयन और सस्पेंस
रोहित और विराट पर नजर
भारत बनाम न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड
लाइव प्रसारण
संभावित प्लेइंग-11

टीम चयन और सस्पेंस
भारत बनाम न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड
संभावित प्लेइंग-11

ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।
ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।
इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।

पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI को साफ शब्दों में आगाह किया है कि मौजूदा ढांचे के साथ वनडे क्रिकेट को बचाना मुश्किल होगा। दोनों का मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज की घटती अहमियत और टूर्नामेंट्स की अधिकता ने इस फॉर्मेट की चमक फीकी कर दी है।कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां पांच मैचों की वनडे सीरीज आम बात हुआ करती थीं, वहीं अब ज्यादातर टीमें केवल तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेलती नजर आती हैं। कई देशों के लिए वनडे क्रिकेट अब सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता जा रहा है, जबकि टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स ने दर्शकों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया है।
अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ऐश की बात में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े नाम वनडे क्रिकेट से हटते हैं तो दर्शकों की दिलचस्पी और तेजी से कम हो सकती है। अश्विन ने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को आमतौर पर सीमित दर्शक ही देखते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भारी भीड़ देखने को मिली।उनके मुताबिक, यह साफ संकेत है कि मौजूदा दौर में वनडे क्रिकेट काफी हद तक स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर है। अगर बड़े चेहरे नहीं होंगे, तो दर्शकों को आकर्षित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। अश्विन ने ICC के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से फैंस में थकान पैदा हो रही है और हर इवेंट की अहमियत कम होती जा रही है।
अश्विन ने सुझाव दिया कि ICC को फुटबॉल की तर्ज पर वनडे विश्व कप को चार साल में सिर्फ एक बार आयोजित करना चाहिए ताकि इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच बना रहे। उनका कहना है कि जब कोई इवेंट दुर्लभ होता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।वहीं इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय सीरीज अब दर्शकों को रोमांचित नहीं कर पा रही हैं। इरफान के अनुसार, अगर वनडे क्रिकेट को फिर से लोकप्रिय बनाना है, तो ट्राई सीरीज और क्वाड्रेंगुलर सीरीज जैसे फॉर्मेट्स को दोबारा शुरू करना होगा।
इरफान का मानना है कि जब एक ही सीरीज में तीन या चार टीमें हिस्सा लेती हैं तो मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और हर मैच का महत्व भी ज्यादा होता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और खिलाड़ियों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका मिलता है।कुल मिलाकर अश्विन और इरफान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और साहसिक फैसले नहीं लिए तो वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। 50 ओवर का यह पारंपरिक फॉर्मेट कभी क्रिकेट की पहचान हुआ करता था, लेकिन बदलते दौर में इसे बचाने के लिए बड़े और दूरदर्शी बदलाव अब जरूरी हो गए हैं।

संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।
दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।
हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।

इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक, फिल्म मेंबलोच शब्द को एक या दो जगह म्यूट किया गया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला तब लिया गया, जब पिछले हफ्ते बलोच समुदाय के कुछ लोगों ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में उनके समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।सूत्रों के अनुसार, बलोच समुदाय की आपत्ति खासतौर पर फिल्म के एक डायलॉग को लेकर थी, जिसे अभिनेता संजय दत्त बोलते नजर आते हैं। डायलॉग में समुदाय का जिक्र कथित तौर पर नकारात्मक संदर्भ में किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में इसी डायलॉग को सबूत के तौर पर पेश करते हुए कहा कि यह बयान आपत्तिजनक है और इससे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और अंततः सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर फिल्म के कंटेंट में यह बदलाव किया गया। हालांकि फिल्म की कहानी, मुख्य प्लॉट या किरदारों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ विवादित शब्दों और डायलॉग को एडिट किया गया है।गौरतलब है किधुरंधर 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। वहीं राकेश बेदी, सारा अर्जुन, गौरव गेरा, सौम्या टंडन और दानिश पंडोर ने सपोर्टिंग रोल निभाए हैं।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है और दर्शकों के बीच इसकी जबरदस्त चर्चा रही है। अब कंटेंट में किए गए इन बदलावों के बाद फिल्म नए साल से एक संशोधित वर्जन के साथ सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।इसके अलावा, मेकर्स पहले ही फिल्म के दूसरे पार्ट का ऐलान कर चुके हैं, जो 19 मार्च को रिलीज होने वाला है। ऐसे मेंधुरंधर को लेकर दर्शकों की उत्सुकता आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है।

फैंस न सिर्फ अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं बल्कि कई लोग इसे उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रोल ने अक्षय को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया, उसके लिए शुरुआत में उन्हें कास्ट करने का कोई प्लान ही नहीं था।फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस पूरी कहानी से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि धुरंधर की कास्टिंग आसान नहीं थी और इस फिल्म के लिए उन्हें असाधारण मेहनत करनी पड़ी। मुकेश के मुताबिक फिल्म में दिखाई देने वाला हर एक किरदार बहुत सोच-समझकर चुना गया है, ताकि कहानी में सच्चाई और गहराई बनी रहे।
मुकेश छाबरा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो उन्हें अहसास हुआ कि यह प्रोजेक्ट साधारण नहीं है। आमतौर पर वह किसी फिल्म की कास्टिंग तीन महीने में पूरी कर लेते हैं, लेकिन धुरंधर उनके लिए एक लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर साबित हुई। पहले से ही फिल्म में रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार की कास्टिंग हो चुकी थी, ऐसे में बाकी किरदारों के लिए सही कलाकार ढूंढना और भी मुश्किल हो गया।कास्टिंग डायरेक्टर के अनुसार, चाहे वह छोटा रोल हो या बड़ा, हर कलाकार को भाषा, लुक और किरदार की सच्चाई को ध्यान में रखकर चुना गया। अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और अन्य कलाकारों की कास्टिंग इसी सोच का नतीजा है।
अक्षय खन्ना को लेकर मुकेश छाबरा ने बताया कि उन्हें शुरू से लगता था कि रहमान डकैत के रोल के लिए अक्षय बिल्कुल परफेक्ट हैं। हालांकि जब उन्होंने यह आइडिया निर्देशक आदित्य धर के सामने रखा, तो वह हैरान रह गए। आदित्य को यकीन नहीं हो रहा था और उन्होंने मजाक में कहा कि मुकेश शायद पागल हो गए हैं। लेकिन मुकेश अपने फैसले पर अड़े रहे।इसके बाद उन्होंने खुद अक्षय खन्ना से संपर्क किया। शुरुआत में अक्षय ने भी हैरानी जताई, लेकिन मुकेश ने उन्हें पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए राजी कर लिया। अक्षय बिना किसी टीम के आदित्य धर के ऑफिस पहुंचे और करीब चार घंटे तक पूरी स्क्रिप्ट ध्यान से सुनी। स्क्रिप्ट खत्म होने के बाद अक्षय का रिएक्शन बेहद पॉजिटिव था और उन्होंने फिल्म को लेकर उत्साह दिखाया।
हालांकि अंतिम फैसला लेने में अक्षय ने थोड़ा वक्त लिया, लेकिन एक बार स्क्रिप्ट को दोबारा पढ़ने के बाद उन्होंने फिल्म करने के लिए हां कह दी। मुकेश छाबरा के मुताबिक, इसके बाद चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ीं।आज नतीजा सबके सामने है। धुरंधर में अक्षय खन्ना का किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन गए हैं। सोशल मीडिया पर सिर्फ उन्हीं की चर्चा है। अब जब फिल्म जबरदस्त सफलता हासिल कर चुकी है, तो दर्शकों को इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार है, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाला है।

जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।
जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”
गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?
इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।

हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”
13 लोगों के मरने का दावा
बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत
विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।
इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।

रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।
लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।
इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

इंद्रय्या ने अपनी दिवंगत पत्नी की कब्र के बगल में अपनी कब्र बनवाई है। वह रोज अपनी कब्र की सफाई करने भी जाते हैं और आस-पास के पौधों को पानी देते हैं, पत्थर को साफ करते हैं और फिर बैठकर सुकून के पल बिताते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें यह जानकर सुकून मिलता है कि सब कुछ ठीक वैसे ही तैयार किया गया है जैसा वह चाहते थे।
वह यह भी कहते हैं कि मरने के बाद वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था। मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। हर किसी को मरना है। मुझे भी मरना है। कम से कम मुझे पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा।”