शिलांग: रोशनी और संगीत से सजा क्रिसमस शहर
मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न
असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम
तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस
गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न
असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम
तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस
गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

आज बाजार में तरह-तरह के महंगे लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उनकी कीमत बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में पुराने समय से चले आ रहे देसी नुस्खे एक बार फिर भरोसे का विकल्प बनकर सामने आए हैं। बलिया के वरिष्ठ नागरिक आसिफ जैदी बताते हैं कि उनके बचपन में दादी और नानी के घरेलू नुस्खों में सरसों के उबटन का खास महत्व था। लोग इसे पूरे शरीर पर लगाकर धूप में बैठते और धीरे-धीरे मालिश करते थे, जिससे त्वचा की गहराई से सफाई होती थी।
सरसों का उबटन: सदियों पुरानी परंपरा
सरसों का उबटन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। पुराने जमाने में जब बाजारू साबुन और क्रीम नहीं होती थीं, तब यही उबटन त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था। जब यह उबटन शरीर पर सूखता है, तो डेड स्किन को अपने साथ हटाता है और त्वचा को साफ, कोमल और चमकदार बनाता है। खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जो इसे आधुनिक केमिकल युक्त उत्पादों से अलग बनाता है।
घर पर ऐसे तैयार करें सरसों का उबटन
सरसों के दानों को धीमी आंच पर हल्का भूनकर हल्दी के साथ पीस लें। तैयार पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे पूरे शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। जब उबटन सूख जाए, तो साफ पानी से नहा लें। इसके नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है, टैनिंग की समस्या कम होती है और त्वचा भीतर से मजबूत बनती है।
स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए भी फायदेमंद
सरसों का उबटन सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है, थकान दूर होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। एड़ियों की फटने की समस्या में भी राहत मिलती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं।

सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल
गंभीरता से काम लें आप नेता
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह खेदपूर्ण है कि जब अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सत्ता में थेतब उन्होंने प्रदूषण के कारकों को गंभीरता से नहीं संभाला अब विपक्ष में आने के बाद वही नेता हास्यास्पद बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सत्ता में रहते काम न करके और अब प्रदूषण पर मजाकिया बयान देकर दोनों नेता जनता के बीच अपनी छवि खो रहे हैं । उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा दोनों नेता गंभीरता से काम लें और प्रदूषण पर हास्य व्यंग्य की नौटंकी करने के बजाय दिल्लीवासियों और सरकार को प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने दें ।


वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम पहली बार मैदान पर उतरी और कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने अपने विजयी अभियान को आगे बढ़ायालेकिन मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा।
श्रीलंका द्वारा दिए गए 122 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। युवा ओपनर शेफाली वर्मा दूसरे ही ओवर में 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद स्मृति मंधाना ने एक छोर संभाला और 25 रन की संयमित पारी खेली। इस दौरान जैसे ही उन्होंने आवश्यक रन पूरे किएवह T20I क्रिकेट में 4000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बन गईं।
अब स्मृति मंधाना के नाम T20I क्रिकेट में कुल 4007 रन दर्ज हैंजो उन्होंने 154 मैचों की 148 पारियों में बनाए हैं। उनके T20I करियर में 1 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैंजो उनकी निरंतरता और क्लास को दर्शाता है। खास बात यह है कि मंधाना यह उपलब्धि हासिल करने वाली ओवरऑल दूसरी महिला क्रिकेटर हैं। इस सूची में शीर्ष पर न्यूजीलैंड की दिग्गज बल्लेबाज सूजी बेट्स हैंजिनके नाम 4716 रन का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं हैं। वह 3669 रनों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं और लगातार इस रिकॉर्ड के करीब पहुंच रही हैं। इससे साफ है कि भारतीय महिला क्रिकेट मौजूदा दौर में किस ऊंचाई पर पहुंच चुका है।
अगर मैच की बात करें तो टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 121 रन ही बना सकी। ओपनर विश्मी गुणरत्ने 39 रन के साथ टीम की सबसे सफल बल्लेबाज रहींजबकि अन्य कोई भी बल्लेबाज 25 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका। श्रीलंका की पारी के दौरान तीन रनआउट हुएवहीं भारत की ओर से क्रांति गौड़दीप्ति शर्मा और श्री चरणी ने एक-एक विकेट झटका।
122 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को दूसरा झटका 9वें ओवर में लगाजब स्मृति मंधाना 67 के स्कोर पर आउट हुईं। इसके बाद नंबर तीन पर आई जेमिमा रोड्रिग्स ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। जेमिमा ने शानदार नाबाद 69 रन की पारी खेली और भारत को 8 विकेट से जीत दिलाई। टीम इंडिया ने यह लक्ष्य 32 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज की शुरुआत शानदार अंदाज में की और स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस मैच को हमेशा के लिए यादगार बना गया।

इन परिणामों के बाद भाजपा के लिए यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में अकेले प्रचार कियाजिससे पार्टी को यह जानने का मौका मिला कि वह अपनी शत-प्रतिशत भाजपा के लक्ष्य की दिशा में कितनी दूर तक बढ़ रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगाखासकर 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में।
हालांकिइस जीत के साथ भाजपा के सहयोगी दलों के लिए चिंता भी बढ़ सकती है। भाजपा की बेजोड़ जीत यह संकेत देती है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक राह पर अकेले बढ़ सकती है और इसे अपने सहयोगियों की कम जरूरत हो सकती है। इस परिणाम के बाद कुछ समय पहले से ही कमजोर हो रही महाविकास अघाड़ी गठबंधन की स्थिति और भी अस्थिर हो सकती हैखासकर तब जब भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर विचार करेगी।
इसी तरहविपक्ष के लिए भी यह चुनाव परिणाम चिंता का कारण बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव में पहले ही झटके झेल चुका विपक्ष इस बार भी पिछड़ता दिख रहा हैखासकर जब बीएमसी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी दोनों ही अपनी सीटों के दोहरे आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए और भी समस्याएं पैदा कर सकते हैंक्योंकि फूट के कारण पहले से ही कमजोर पड़ चुकी पार्टियों को अब इस पर काबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है। उद्धव ठाकरे गुट को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैक्योंकि शिवसेना यूबीटी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है

उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी
। 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

भागवत ने कहायदि आप संघ को समझना चाहते हैंतो इसका अनुभव करना पड़ेगा। अगर आप इसे सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैंतो आप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ का काम कभी भी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए। बहुत से लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखते हैंलेकिन यह एक बड़ी गलती है। संघ को राजनीति से परे और समाज की भलाईसुरक्षा और एकता के लिए काम करने वाला संगठन माना जाना चाहिए।
संघ प्रमुख ने मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को भी पूरी तरह से नकारा किया। भागवत ने कहाऐसी धारणा पूरी तरह से तथ्यों के बजाय कथाओं पर आधारित है। हमारा काम पारदर्शी है और जो लोग हमारे काम को समझते हैंउन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हम कट्टर राष्ट्रवादी हैंजो हिंदुओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैंलेकिन हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि वे संघ का दौरा करें और इसे सीधे समझें। भागवत ने संघ के मुख्य उद्देश्य को भी स्पष्ट कियाजिसमें नैतिक रूप से ईमानदार और गुणी व्यक्तियों का निर्माण करना हैजो सेवामूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित हों और देश के विकास में योगदान करें। उन्होंने कहासंघ का उद्देश्य किसी से दुश्मनी रखना नहीं हैबल्कि समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।
इसके अलावाभागवत ने भारतीय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया और हिंदू समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की अपील की। बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंदराजा राम मोहन रॉय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों को याद कियाजिनकी सामाजिक सुधार में अहम भूमिका थी। उन्होंने खास तौर पर राजा राम मोहन रॉय की तारीफ कीजो सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रणी थेऔर कहा कि आरएसएस उसी सुधारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का कर्तव्य है। इसके तहतसंघ ने अपनी शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकातादिल्लीमुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लेक्चर और सेशन आयोजित करने की योजना बनाई हैताकि जनता को संघ के काम और उद्देश्य को समझने का मौका मिल सके। इस दौरानभागवत ने लोगों से अपील की कि वे संघ के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करेंऔर अन्य स्रोतों की बजाय खुद संघ के काम को देखें।

आदित्य धर ने यह निर्णय लिया कि गाने में दो हीरोइनों को कास्ट किया जाए ताकि कहानी की धारा से ध्यान न हटे। अगर गाना सिर्फ एक लड़की पर फोकस करता तो यह गाना उस एक्ट्रेस का गाना बन जाता और फिल्म की मूल कहानी से ध्यान हट सकता था। धुरंधर के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो फिल्म ने 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म के स्टार कास्ट जिसमें रणवीर सिंह अक्षय खन्ना और संजय दत्त शामिल हैं को दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म की कमाई आगे भी जबरदस्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इसके अलावा धुरंधर के दूसरे भाग का भी फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जो 19 मार्च को थिएटर पर रिलीज होगा। धुरंधर ने जहां दर्शकों को अपने कंसीप्ट और एक्टिंग से प्रभावित किया है वहीं फिल्म के गाने और कहानी पर फोकस करने की आदित्य धर की रणनीति ने इसे एक बेहतरीन फिल्म बना दिया है।