Author: bharati

  • क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार

    क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार


    नई दिल्ली/हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस ईसाई समुदाय के लिए सबसे पवित्र और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन ईसा मसीह के जन्म का प्रतीक है, जिसे पूरी दुनिया में रोशनी, सजावट, प्रार्थना और खुशियों के साथ मनाया जाता है। भारत में भी क्रिसमस का रंग देखते ही बनता है, खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां यह पर्व पूरे उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अगर आप इस क्रिसमस घूमने और कुछ अलग अनुभव करने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें आपके सफर को खास बना सकती हैं।

    शिलांग: रोशनी और संगीत से सजा क्रिसमस शहर
    मेघालय की राजधानी शिलांग को ‘ईस्ट का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और क्रिसमस के दौरान यह शहर किसी परी लोक से कम नहीं लगता। यहां के चर्च रंग-बिरंगी लाइट्स से सज जाते हैं और खास प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। क्रिसमस ट्री, कैरोल सिंगिंग और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को जीवंत बना देते हैं। स्थानीय संगीत और नृत्य यहां के जश्न को और खास बना देते हैं।

    मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न

    अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित मेचुका उन यात्रियों के लिए है, जो शांति और प्रकृति के करीब रहकर क्रिसमस मनाना चाहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़, साफ नदियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। क्रिसमस के समय यहां ठंड काफी होती है, लेकिन यही ठंड इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।

    असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम

    असम अपने चाय बागानों, वन्यजीव अभयारण्यों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क, माजुली द्वीप और ऐतिहासिक शहरों की सैर के साथ क्रिसमस मनाना एक अनोखा अनुभव देता है।

    तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस

    अरुणाचल प्रदेश का तवांग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए मशहूर है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तवांग मठ यहां स्थित है। क्रिसमस के दौरान बर्फ से ढका तवांग और उसका शांत माहौल सुकून और यादगार अनुभव देता है।

    गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

    सिक्किम की राजधानी गंगटोक क्रिसमस पर बेहद खूबसूरत नजर आती है। यहां के चर्चों में खास आयोजन होते हैं और शहर की सजी-धजी गलियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। त्सोमगो झील और रुमटेक मठ की सैर इस यात्रा को और खास बना देती है।उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें न सिर्फ क्रिसमस के जश्न को खास बनाती हैं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और शांति का ऐसा अनुभव देती हैं, जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    नई दिल्ली
    ।महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के दौर में भी पुराने देसी नुस्खे अपनी जगह बनाए हुए हैं। बलिया में आज भी एक खास घरेलू उपाय चर्चा में है, जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाने में असरदार साबित हो रहा है। सरसों का उबटन सदियों से त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका रहा है। यह नुस्खा न केवल सस्ता है, बल्कि ठंड के मौसम में डेड स्किन हटाकर त्वचा को पोषण और नमी भी देता है।

    देसी नुस्खों की वापसी और महंगे प्रोडक्ट्स की तुलना

    आज बाजार में तरह-तरह के महंगे लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उनकी कीमत बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में पुराने समय से चले आ रहे देसी नुस्खे एक बार फिर भरोसे का विकल्प बनकर सामने आए हैं। बलिया के वरिष्ठ नागरिक आसिफ जैदी बताते हैं कि उनके बचपन में दादी और नानी के घरेलू नुस्खों में सरसों के उबटन का खास महत्व था। लोग इसे पूरे शरीर पर लगाकर धूप में बैठते और धीरे-धीरे मालिश करते थे, जिससे त्वचा की गहराई से सफाई होती थी।

    सरसों का उबटन: सदियों पुरानी परंपरा

    सरसों का उबटन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। पुराने जमाने में जब बाजारू साबुन और क्रीम नहीं होती थीं, तब यही उबटन त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था। जब यह उबटन शरीर पर सूखता है, तो डेड स्किन को अपने साथ हटाता है और त्वचा को साफ, कोमल और चमकदार बनाता है। खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जो इसे आधुनिक केमिकल युक्त उत्पादों से अलग बनाता है।

    घर पर ऐसे तैयार करें सरसों का उबटन

    सरसों के दानों को धीमी आंच पर हल्का भूनकर हल्दी के साथ पीस लें। तैयार पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे पूरे शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। जब उबटन सूख जाए, तो साफ पानी से नहा लें। इसके नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है, टैनिंग की समस्या कम होती है और त्वचा भीतर से मजबूत बनती है।

    स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए भी फायदेमंद

    सरसों का उबटन सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है, थकान दूर होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। एड़ियों की फटने की समस्या में भी राहत मिलती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं।

  • दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं

    दिल्ली में AAP के प्रदूषण वाले मजाक पर बीजेपी ने कसा तंजकहा जनता के दर्द से खेलना ठीक नहीं


    नई दिल्ली । दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सियासत गरमा गई है आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के बयान पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कड़ा ऐतराज जताया है सचदेवा ने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर मसले पर सुपरमैनस्पाइडरमैनबैटमैन और सैंटा क्लोज की बेहोशी का जिक्र कर हास्य व्यंग्य करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह दिल्ली की जनता की तकलीफ का मजाक उड़ाने जैसा है । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज दिल्लीवासी जिस प्रदूषण का दंश झेल रहे हैंवह अरविंद केजरीवाल की दिल्ली और पंजाब सरकारों की लापरवाही का सीधा परिणाम है उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए ।

    सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने सौरभ भारद्वाज के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वह केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थेतब भी उनकी सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया सचदेवा के मुताबिक दस साल में प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ और उसी दौरान दिल्ली सरकार के अस्पतालों में नकली दवाएं बांटे जाने के मामले सामने आए । वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जिन मोहल्ला क्लीनिकों को अपनी उपलब्धि बताती रहीवे भी बाद में घोटालों के केंद्र बनकर सामने आए उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने केवल प्रचार पर ध्यान दिया ।

    गंभीरता से काम लें आप नेता

    बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह खेदपूर्ण है कि जब अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सत्ता में थेतब उन्होंने प्रदूषण के कारकों को गंभीरता से नहीं संभाला अब विपक्ष में आने के बाद वही नेता हास्यास्पद बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सत्ता में रहते काम न करके और अब प्रदूषण पर मजाकिया बयान देकर दोनों नेता जनता के बीच अपनी छवि खो रहे हैं । उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा दोनों नेता गंभीरता से काम लें और प्रदूषण पर हास्य व्यंग्य की नौटंकी करने के बजाय दिल्लीवासियों और सरकार को प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने दें ।

  • T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्यों नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान, BCCI सचिव ने बताई इसकी वजह

    T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्यों नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान, BCCI सचिव ने बताई इसकी वजह


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी गई है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम इंडिया इस टूर्नामेंट में खेलेगी। सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप के स्क्वॉड से बाहर कर दिया गया है। 20 दिसंबर को बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टी20 वर्ल्ड कप 2026 के साथ-साथ न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20 मैचों की सीरीज के लिए भी टीम इंडिया की घोषणा की।
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए नहीं हुआ रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान
    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया का ऐलान तो हो चुका है लेकिन सेलेक्टर्स ने इस अहम ICC टूर्नामेंट के लिए रिजर्व प्लेयर्स की घोषणा नहीं की है। जब आईसीसी इवेंट के लिए टीम चुनी जाती है तो स्टैंडबाय या रिजर्व खिलाड़ी भी उसमें होते हैं। अब कोई खिलाड़ी टूर्नामेंट के दौरान चोटिल होता है तो बैकअप खिलाड़ियों में से उनकी जगह चुना जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि इस बार क्यों रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान नहीं किया गया है।

    इस वजह से नहीं हुआ प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि टी20 वर्ल्ड कप के लिए स्टैंडबाय खिलाड़ी क्यों नहीं चुने गए। उन्होंने कहा कि क्योंकि यह टूर्नामेंट भारत में खेला जाएगा, इसलिए वे किसी खास स्टैंडबाय खिलाड़ी का नाम नहीं बताना चाहते हैं। भारत में टूर्नामेंट है तो जरूरत पड़ने पर किसी भी खिलाड़ी को टीम में कभी भी शामिल किया जा सकता है। विदेश में होने पर खिलाड़ियों से यहां से भेजने में काफी समय लग जाता है। इसी वजह से इस बार रिजर्व प्लेयर्स का ऐलान नहीं किया गया है।

    पिछले टी20 वर्ल्ड कप में कौन था स्टैंडबाय प्लेयर?
    आपको बता दें कि पिछले टी20 वर्ल्ड कप में शुभमन गिल के साथ रिंकू सिंह, खलील अहमद और आवेश खान स्टैंडबाय खिलाड़ी के रूप में मौजूद थे। इसी साल खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी में यशस्वी जयसवाल, मोहम्मद सिराज और शिवम दुबे स्टैंडबाय के रूप में चुने गए थे। लेकिन अगले साल खेले जाने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए किसी भी स्टैंड बाय या रिजर्व प्लेयर का चयन नहीं किया गया है।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया का स्क्वॉड
    सूर्यकुमार यादवकप्तान, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसनविकेटकीपर, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेलउपकप्तान, रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर और ईशान किशनविकेटकीपर

  • स्मृति मंधाना ने रचा नया इतिहासT20I में 4000 रन पूरे करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

    स्मृति मंधाना ने रचा नया इतिहासT20I में 4000 रन पूरे करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं


    नई दिल्ली । वुमेंस क्रिकेट में भारत की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना ने एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। श्रीलंका के खिलाफ खेले गए पहले महिला T20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भले ही उनकी पारी बड़ी नहीं रहीलेकिन इस मैच ने उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास में अमर कर दिया। विशाखापट्टनम में खेले गए इस मुकाबले में स्मृति मंधाना ने T20I क्रिकेट में 4000 रन पूरे कर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दियाजो इससे पहले कोई भी भारतीय महिला क्रिकेटर हासिल नहीं कर पाई थी।

    वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतने के बाद भारतीय टीम पहली बार मैदान पर उतरी और कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने अपने विजयी अभियान को आगे बढ़ायालेकिन मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा।

    श्रीलंका द्वारा दिए गए 122 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। युवा ओपनर शेफाली वर्मा दूसरे ही ओवर में 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद स्मृति मंधाना ने एक छोर संभाला और 25 रन की संयमित पारी खेली। इस दौरान जैसे ही उन्होंने आवश्यक रन पूरे किएवह T20I क्रिकेट में 4000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला बल्लेबाज बन गईं।

    अब स्मृति मंधाना के नाम T20I क्रिकेट में कुल 4007 रन दर्ज हैंजो उन्होंने 154 मैचों की 148 पारियों में बनाए हैं। उनके T20I करियर में 1 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैंजो उनकी निरंतरता और क्लास को दर्शाता है। खास बात यह है कि मंधाना यह उपलब्धि हासिल करने वाली ओवरऑल दूसरी महिला क्रिकेटर हैं। इस सूची में शीर्ष पर न्यूजीलैंड की दिग्गज बल्लेबाज सूजी बेट्स हैंजिनके नाम 4716 रन का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं हैं। वह 3669 रनों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं और लगातार इस रिकॉर्ड के करीब पहुंच रही हैं। इससे साफ है कि भारतीय महिला क्रिकेट मौजूदा दौर में किस ऊंचाई पर पहुंच चुका है।

    अगर मैच की बात करें तो टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर सिर्फ 121 रन ही बना सकी। ओपनर विश्मी गुणरत्ने 39 रन के साथ टीम की सबसे सफल बल्लेबाज रहींजबकि अन्य कोई भी बल्लेबाज 25 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका। श्रीलंका की पारी के दौरान तीन रनआउट हुएवहीं भारत की ओर से क्रांति गौड़दीप्ति शर्मा और श्री चरणी ने एक-एक विकेट झटका।

    122 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को दूसरा झटका 9वें ओवर में लगाजब स्मृति मंधाना 67 के स्कोर पर आउट हुईं। इसके बाद नंबर तीन पर आई जेमिमा रोड्रिग्स ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। जेमिमा ने शानदार नाबाद 69 रन की पारी खेली और भारत को 8 विकेट से जीत दिलाई। टीम इंडिया ने यह लक्ष्य 32 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज की शुरुआत शानदार अंदाज में की और स्मृति मंधाना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस मैच को हमेशा के लिए यादगार बना गया।

  • भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर

    भाजपा की बड़ी जीत से बढ़ सकती है एकनाथ शिंदे की टेंशनविपक्ष और सहयोगियों पर होगा असर


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के स्थानिक निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा,शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट के गठबंधन महायुति ने भारी जीत दर्ज की है। भाजपा ने 129 सीटों के साथ सबसे ज्यादा अध्यक्ष पद जीतेजबकि शिवसेना ने 51 और एनसीपी अजित पवार ने 35 अध्यक्ष पदों पर जीत हासिल की। कुल 288 निकायों में से महायुति ने 215 निकायों में जीत हासिल कीजिससे भाजपा का इस चुनाव में वर्चस्व साफ तौर पर दिखा।

    इन परिणामों के बाद भाजपा के लिए यह एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा ने इस चुनाव में अकेले प्रचार कियाजिससे पार्टी को यह जानने का मौका मिला कि वह अपनी शत-प्रतिशत भाजपा के लक्ष्य की दिशा में कितनी दूर तक बढ़ रही है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन नतीजों से कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगाखासकर 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में।

    हालांकिइस जीत के साथ भाजपा के सहयोगी दलों के लिए चिंता भी बढ़ सकती है। भाजपा की बेजोड़ जीत यह संकेत देती है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक राह पर अकेले बढ़ सकती है और इसे अपने सहयोगियों की कम जरूरत हो सकती है। इस परिणाम के बाद कुछ समय पहले से ही कमजोर हो रही महाविकास अघाड़ी गठबंधन की स्थिति और भी अस्थिर हो सकती हैखासकर तब जब भाजपा अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे पर विचार करेगी।

    इसी तरहविपक्ष के लिए भी यह चुनाव परिणाम चिंता का कारण बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव में पहले ही झटके झेल चुका विपक्ष इस बार भी पिछड़ता दिख रहा हैखासकर जब बीएमसी बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं। शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी दोनों ही अपनी सीटों के दोहरे आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह परिणाम विपक्ष के लिए और भी समस्याएं पैदा कर सकते हैंक्योंकि फूट के कारण पहले से ही कमजोर पड़ चुकी पार्टियों को अब इस पर काबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है। उद्धव ठाकरे गुट को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैक्योंकि शिवसेना यूबीटी की स्थिति पहले से ही कमजोर हो चुकी है

    शिवसेना के 3 दशकों के प्रभाव को बनाए रखना अब चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब भाजपा की जीत से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को संगठन और सरकार के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस चुनाव में सकारात्मक विकास एजेंडे पर प्रचार किया और कभी किसी राजनीतिक नेता या पार्टी की आलोचना नहीं की। फडणवीस का मानना है कि यह पहली बार है जब पार्टी ने शत-प्रतिशत सकारात्मक वोट मांगे थेऔर उन्हें जनता का शत-प्रतिशत समर्थन मिला है। इस चुनाव परिणाम के बाद भाजपा अब राज्य की राजनीति में और भी दबदबा बना सकती हैलेकिन इसका असर महाविकास अघाड़ी गठबंधन और विपक्षी दलों पर भी होगा।

  • उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'

    उद्धव गुट का कांग्रेस पर तंज: 'मुंबई में कांग्रेस एक पर्यटक की तरह आती हैहार कर चली जाती है'


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस चुनाव को अकेले लड़ेगीजिसके बाद उद्धव गुट और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने रविवार को कांग्रेस पर तीखा तंज करते हुए कहामुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। वह पिछले तीन दशकों से लगातार मुंबई नगर निगम चुनाव हारती आ रही हैतो ऐसे में वह 2026 में कौन सा चमत्कार कर देंगे? कांग्रेस एक पर्यटक की तरह मुंबई आती हैहोर्डिंग्स लगाती हैचुनाव हारती है और फिर घर लौट जाती है।

    उद्धव गुट के प्रवक्ता ने यह बयान वीडियो के माध्यम से दियाजिसमें उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का बीएमसी से गहरा रिश्ता रहा है और पार्टी पिछले 30 सालों से मुंबई नगर निगम पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को इस चुनाव में गंभीरता से लेने की कोई वजह नहीं हैक्योंकि वे हमेशा चुनाव हारते हैं। कांग्रेस ने इस तंज का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी और इसके पीछे वैचारिक विचार है। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने बयान दियाहम पहले ही अपनी स्थिति को स्पष्ट कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी चुनाव में अकेले बढ़ना चाहती है और उसके पीछे वैचारिक विचार है। हमें इस मामले पर कोई जल्दबाजी नहीं है। पूरी पार्टी ने सोच-समझ कर यह फैसला लिया है। हम उन सभी पार्टियों के खिलाफ लड़ेंगे जो धर्मजातिक्षेत्र और भाषा के आधार पर टकराव पैदा करती हैं।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब उद्धव गुट ने महाविकास अघाड़ी में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं थीक्योंकि वह राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने में असमंजस महसूस कर रही थी। इसके चलते महाविकास अघाड़ी के भीतर एकता बनी रहीलेकिन कांग्रेस और उद्धव गुट के बीच मतभेद उभर आए। बीएमसी पर पिछले कई सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। शुरूआत से ही शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर यहां शासन चला रही थी

    । 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थीजबकि भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। उद्धव गुट अब 2022 में विभाजन के बाद बीएमसी पर पुनः कब्जा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैहालांकि इसे पहले से कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि वह इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तैयार है और इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगीचाहे वह महाविकास अघाड़ी हो या कोई अन्य गठबंधन।

  • भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता

    भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता


    नागपुर । महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को निकाय चुनावों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुल 288 जिलों के निकायों में से 215 में महायुति ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की हैजिसमें भाजपा ने 129 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत कम्पटी नगरपालिका परिषद में मिलीजहां 40 साल बाद पहली बार उसे सत्ता हासिल हुई है। कम्पटी नगरपालिका परिषद में भाजपा के कैंडिडेट अजय अग्रवाल ने 103 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। हालांकिकांग्रेस के कैंडिडेट शाकूर नागानी ने चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरे दिन चुनाव में आगे चल रहे थेलेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी कर के अजय अग्रवाल को जिताया गया।

    यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

    कांग्रेस के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर विवाद उभरेऔर यह सवाल उठने लगा कि भाजपा अब बीएमसी में जीत की कोशिश कर सकती है।
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस नगरपालिका परिषद में भाजपा की जीत का यह लंबे समय से इंतजार थाजो अब समाप्त हुआ। कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठाएऔर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यह कहा कि बीएमसी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं हैक्योंकि पिछले 30 सालों से वे ही लगातार जीत रहे हैं। इन नतीजों के बादविपक्षी गठबंधन महाअघाड़ी में भी विवाद शुरू हो गया हैजो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में और भी हलचल पैदा कर सकता है।

  • मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया

    मोहन भागवत ने कहाआरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना गलतमुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कोलकाता में आरएसएस 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम के दौरान संघ के बारे में अहम बयान दिया। भागवत ने कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और इसे भारतीय जनता पार्टी भा,ज,पा, के नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने साफ किया कि संघ और भाजपा अलग-अलग संगठन हैंजिनकी भूमिकाएं भी अलग हैंभले ही भाजपा के कई नेता संघ से जुड़े हुए हों।

    भागवत ने कहायदि आप संघ को समझना चाहते हैंतो इसका अनुभव करना पड़ेगा। अगर आप इसे सिर्फ एक और सेवा संगठन मानते हैंतो आप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संघ का काम कभी भी संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए। बहुत से लोग संघ को भाजपा से जोड़कर देखते हैंलेकिन यह एक बड़ी गलती है। संघ को राजनीति से परे और समाज की भलाईसुरक्षा और एकता के लिए काम करने वाला संगठन माना जाना चाहिए।

    संघ प्रमुख ने मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को भी पूरी तरह से नकारा किया। भागवत ने कहाऐसी धारणा पूरी तरह से तथ्यों के बजाय कथाओं पर आधारित है। हमारा काम पारदर्शी है और जो लोग हमारे काम को समझते हैंउन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हम कट्टर राष्ट्रवादी हैंजो हिंदुओं की सुरक्षा के लिए काम करते हैंलेकिन हम मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि वे संघ का दौरा करें और इसे सीधे समझें। भागवत ने संघ के मुख्य उद्देश्य को भी स्पष्ट कियाजिसमें नैतिक रूप से ईमानदार और गुणी व्यक्तियों का निर्माण करना हैजो सेवामूल्यों और राष्ट्रीय गौरव से प्रेरित हों और देश के विकास में योगदान करें। उन्होंने कहासंघ का उद्देश्य किसी से दुश्मनी रखना नहीं हैबल्कि समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है।

    इसके अलावाभागवत ने भारतीय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता पर बल दिया और हिंदू समुदाय को अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों की ओर लौटने की अपील की। बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंदराजा राम मोहन रॉय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों को याद कियाजिनकी सामाजिक सुधार में अहम भूमिका थी। उन्होंने खास तौर पर राजा राम मोहन रॉय की तारीफ कीजो सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रणी थेऔर कहा कि आरएसएस उसी सुधारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

    भागवत ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत को एक बार फिर विश्वगुरु बनाना है और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का कर्तव्य है। इसके तहतसंघ ने अपनी शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकातादिल्लीमुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लेक्चर और सेशन आयोजित करने की योजना बनाई हैताकि जनता को संघ के काम और उद्देश्य को समझने का मौका मिल सके। इस दौरानभागवत ने लोगों से अपील की कि वे संघ के बारे में राय बनाने से पहले तथ्यों का अध्ययन करेंऔर अन्य स्रोतों की बजाय खुद संघ के काम को देखें।

  • रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' के गाने 'शरारत' में तमन्ना भाटिया की बजाय दो हीरोइन क्यों कास्ट की गईं

    रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' के गाने 'शरारत' में तमन्ना भाटिया की बजाय दो हीरोइन क्यों कास्ट की गईं


    नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है और इसके गाने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। खासकर गाना शरारत चर्चाओं में है जो क्रिस्टल डिसूजा और आयेशा खान पर फिल्माया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गाने के लिए पहले तमन्ना भाटिया का नाम सामने आया था इस गाने को कोरियोग्राफ़ करने वाले विजय गांगुली ने डायरेक्टर आदित्य धर को तमन्ना भाटिया का नाम सुझाया था लेकिन आदित्य धर ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। विजय गांगुली ने बताया कि आदित्य ने साफ तौर पर कहा था कि वह गाने को आइटम सॉन्ग के रूप में नहीं देखना चाहते थे और इस कारण एक हीरोइन पर फोकस होने से फिल्म की कहानी पर ध्यान भटक सकता था।

    आदित्य धर ने यह निर्णय लिया कि गाने में दो हीरोइनों को कास्ट किया जाए ताकि कहानी की धारा से ध्यान न हटे। अगर गाना सिर्फ एक लड़की पर फोकस करता तो यह गाना उस एक्ट्रेस का गाना बन जाता और फिल्म की मूल कहानी से ध्यान हट सकता था। धुरंधर के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो फिल्म ने 500 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म के स्टार कास्ट जिसमें रणवीर सिंह अक्षय खन्ना और संजय दत्त शामिल हैं को दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म की कमाई आगे भी जबरदस्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इसके अलावा धुरंधर के दूसरे भाग का भी फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जो 19 मार्च को थिएटर पर रिलीज होगा। धुरंधर ने जहां दर्शकों को अपने कंसीप्ट और एक्टिंग से प्रभावित किया है वहीं फिल्म के गाने और कहानी पर फोकस करने की आदित्य धर की रणनीति ने इसे एक बेहतरीन फिल्म बना दिया है।