Author: bharati

  • किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला

    किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला


    उज्जैन/भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना’ को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई महीनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी

    इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय किसान संघ का कड़ा रुख रहा। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को स्थायी निर्माण के लिए नहीं देंगे। 18 नवंबर को हुए ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन के बाद सरकार ने मौखिक रूप से योजना निरस्त करने की बात कही थी लेकिन बाद में केवल संशोधन का पत्र जारी किया गया। इस वादाखिलाफी से नाराज किसानों ने 26 दिसंबर से पुनः उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी जिसके दबाव में अंततः सरकार को पूर्ण निरस्तीकरण का आदेश जारी करना पड़ा।

    अपनों ने भी उठाए थे सवाल

    सरकार के लिए स्थिति तब और असहज हो गई जब सत्तापक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर साफ कहा था कि यह योजना किसान हित में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि यदि योजना रद्द नहीं हुई तो वे स्वयं किसानों के साथ आंदोलन में बैठने को मजबूर होंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस दबाव ने सरकार को पुनर्विचार के लिए विवश किया।

    क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध

    अगला सिंहस्थ मेला वर्ष 2028 में आयोजित होना है। इसके लिए सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानों की निजी भूमि पर स्थायी निर्माण और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। इसके लिए लैंड पूलिंग नीति लाई गई थी।

    किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे

    स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
    अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।

    निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

    अब योजना निरस्त होने के बाद 2028 के सिंहस्थ मेले के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहने की संभावना है। सरकार अब किसानों से आपसी सहमति और किराए के आधार पर ही मेले के समय जमीन का उपयोग कर सकेगी। यह निर्णय न केवल किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि इसे आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के सरकारी प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।

  • उज्जैन में हैवानियत की हदें पार मासूम की हत्या के आरोपी रियाज का पुलिस ने निकाला जुलूस वकीलों का केस लड़ने से इनकार

    उज्जैन में हैवानियत की हदें पार मासूम की हत्या के आरोपी रियाज का पुलिस ने निकाला जुलूस वकीलों का केस लड़ने से इनकार


    उज्जैन/खाचरोद । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। खाचरोद तहसील के एक गाँव में 9 साल की मासूम बच्ची की हत्या के आरोपी रियाज खान का पुलिस ने मंगलवार को सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला। इस दौरान आरोपी के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता था वहीं पुलिस और आम जनता के बीच आरोपी के प्रति गहरा गुस्सा नजर आया।

    क्या है पूरी घटना

    9 साल की मासूम बच्ची अपनी नानी के घर छुट्टियां बिताने आई थी। वह घर के बाहर खेल रही थी तभी पड़ोस में रहने वाला रियाज खान उसे बहला-फुसलाकर उठा ले गया। आरोपी ने मासूम के साथ दुष्कर्म करने का असफल प्रयास किया। जब बच्ची ने खुद को बचाने के लिए शोर मचाया तो हैवान बने रियाज ने उसे चुप कराने के लिए एक बोरी में बंद कर दिया और मोगरी भारी डंडे से उस पर तब तक वार किए जब तक वह अधमरी नहीं हो गई।

    शातिर आरोपी की चाल और डॉक्टरों का खुलासा
    वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बेहद शातिराना खेल खेला। वह खुद बच्ची को लहूलुहान हालत में उठाकर परिजनों के पास पहुँचा और दावा किया कि वह छत से गिर गई है। हालाँकि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्ची के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान देखकर साफ कर दिया कि यह हादसा नहीं बल्कि हमला है। गंभीर हालत में बच्ची को रतलाम के जीएमसी अस्पताल रेफर किया गया जहाँ उसकी स्थिति देख नर्सिंग स्टाफ और पुलिसकर्मियों की आँखें भी नम हो गईं। अंततः संघर्ष करते हुए मासूम ने दम तोड़ दिया।

    भागने की कोशिश में हुआ घायल

    पुलिस जब आरोपी रियाज को घटनास्थल का मुआयना कराने ले गई थी तो उसने पुलिस को चकमा देकर भागने का प्रयास किया। इसी दौरान वह गिर गया और उसके पैर में चोट आई जिसके कारण वह जुलूस के दौरान लंगड़ाता हुआ दिखाई दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक रियाज पूछताछ में ‘साइको किलर’ की तरह व्यवहार कर रहा था लेकिन पुख्ता सबूतों के सामने उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

    वकीलों ने किया बहिष्कार
    इस जघन्य अपराध ने कानूनी बिरादरी को भी एकजुट कर दिया है। स्थानीय वकीलों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि कोई भी वकील इस दरिंदे का केस नहीं लड़ेगा। समाज के हर वर्ग से आरोपी को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग उठ रही है।

    सोशल मीडिया और जनता का संदेश

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें पुलिस आरोपी को पैदल ले जा रही है। लोग पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।

  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।

  • परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर

    परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर


    नई दिल्ली
    /भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी है। मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नाभिकीय ऊर्जा का सतत दोहन तथा उन्नयन विधेयक, 2025 या SHANTI बिल पेश किया। इस बिल के माध्यम से सरकार ने देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है, जिसे 1962 के बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस बिल को लोकसभा की पूरक कार्यसूची में शामिल कर राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में पेश किया।

    सरकार का कहना है कि SHANTI बिल का मुख्य उद्देश्य नाभिकीय ऊर्जा के सुरक्षित और सतत उपयोग को बढ़ाना है, ताकि इसका लाभ न केवल विद्युत उत्पादन में बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, जल शुद्धिकरण, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी मिल सके। बिल में निजी कंपनियों -घरेलू और विदेशी को नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश की अनुमति देने की बात की गई है। इससे 2047 तक भारत में 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य संभव हो सकेगा, विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर SMR के माध्यम से।

    बिल में प्रमुख प्रावधान

    SHANTI बिल पुराने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक नाभिकीय क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त कर एक नया, एकीकृत कानून बनाने जा रहा है। इसमें शामिल प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक की स्थापना।दायित्व नियमों में संशोधन, ताकि निजी निवेशकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बने। किसी भी विवाद या दुर्घटना के निपटारे के लिए विशेष ट्रिब्यूनल की व्यवस्था।परमाणु दुर्घटना या क्षति पर दावे प्रस्तुत करने का प्रावधान। सरकार का यह भी कहना है कि बिल विकसित भारत 2047 के विजन का हिस्सा है और यह परमाणु प्रौद्योगिकी को स्वच्छ, स्थिर और आधारभूत ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। SHANTI बिल के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और यह भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य -2070 में योगदान देने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    विपक्ष का रुख

    कांग्रेस ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना है कि यह विधेयक नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र में मानकों का उल्लंघन कर रहा है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार को इसे पेश नहीं करना चाहिए था और इस पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

    सरकार के लक्ष्य 
    SHANTI बिल के जरिए सरकार तीन बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है: निजी निवेश को प्रोत्साहित करना: घरेलू और विदेशी कंपनियों के लिए नए अवसर। सतत और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन: स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और पर्यावरण में परमाणु ऊर्जा का बहुआयामी उपयोग। पर्यावरण और जलवायु अनुकूल विकास: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में योगदान।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिल को पारित किया जाता है, तो यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि नवाचार और औद्योगिक विकास को भी गति देगा।SHANTI बिल के साथ भारत की परमाणु ऊर्जा नीति में एक नया युग शुरू हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण तीनों का संतुलित मिश्रण होगा।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी

    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी


    नई दिल्ली । मणिपुर में मंगलवार रात हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर राज्य में तनाव का माहौल बन गया है। बिष्णुपुर जिले के बाहरी इलाकों में खासकर चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों के पास कई बार गोलीबारी हुई जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी के कारणों और इसके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घटना के बाद सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ताजा गोलीबारी ने पहले से भड़क चुके जातीय संघर्ष को और उग्र बना दिया है। मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा के बाद यह पहली बार नहीं है जब गोलीबारी की घटना सामने आई है।

    इस बीच राज्य में सरकार गठन की कवायद भी जारी है। बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर में स्थिरता लाने के लिए राज्य के बीजेपी विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है। इनमें कुकी और मैतेई समुदाय के बीजेपी विधायक भी शामिल हैं। मणिपुर विधानसभा के स्पीकर सत्यब्रत और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत 34 विधायक हाल ही में पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एक साथ बैठे थे। यह मुलाकातें हिंसा के बाद पहली बार हुई थीं जब दोनों समुदायों के विधायक एक साथ बातचीत में शामिल हुए थे।

    राज्य में जातीय हिंसा के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बीजेपी नेतृत्व का उद्देश्य मणिपुर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए राज्य में एक मजबूत और समावेशी सरकार का गठन करना है।बीजेपी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और समझौते के आधार पर ही राज्य में शांति की स्थिति बहाल की जा सकती है। हालांकि मणिपुर में संघर्ष की जड़ें गहरी हैं और हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कई बार सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। मणिपुर में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राज्य के लिए आगामी समय में स्थिरता लाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली

    नीरव मोदी को झटका: भारत के आश्वासनों के बाद ब्रिटेन कोर्ट में प्रत्यर्पण अपील 2026 तक टली


    नई दिल्ली ।नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण अपील पर सुनवाई ब्रिटेन की हाई कोर्ट में टाल दी गई है। यह मामला रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि नीरव मोदी पहले भी भारत प्रत्यर्पण रोकने की कई कोशिशें कर चुका है, जो असफल रही हैं। भारत सरकार ने उसकी मुंबई की आर्थर रोड जेल में प्री-ट्रायल हिरासत की शर्तों के बारे में ठोस और विस्तृत आश्वासन पेश किए। इन्हीं आश्वासनों के आधार पर सुनवाई मार्च 2026 तक स्थगित कर दी गई।

    सुनवाई की प्रक्रिया और समय-सीमा

    अदालत ने फरवरी 2026 के मध्य तक लिखित दलीलें दाखिल करने की समय-सीमा तय की।मार्च या अप्रैल 2026 में दो दिन की सुनवाई होगी।इस सुनवाई में यह तय होगा कि नीरव मोदी की अपील दोबारा खोली जाए या नहीं।अनुमति न मिलने की स्थिति में नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण तुरंत संभव हो सकेगा।

    सुनवाई के दौरान प्रमुख बातें
    54 वर्षीय नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए उत्तर लंदन की पेंटनविल जेल से पेश हुए। CPS ने बताया कि भारत से CBI और ED के चार वरिष्ठ अधिकारी लंदन पहुंचे थे। नीरव मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी मामले का हवाला दिया, जिसमें मानवाधिकार आधार पर राहत मिली थी। CPS ने कहा कि यह मामला नीरव मोदी के केस पर लागू नहीं होता।

    पृष्ठभूमि

    नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन में हिरासत में हैं। उन पर PNB से लगभग 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और सबूतों में छेड़छाड़ के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं।अप्रैल 2021 में तत्कालीन ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल ने प्रत्यर्पण का आदेश दिया था।नीरव मोदी लगातार कानूनी दांव-पेंच अपनाते रहे हैं, लेकिन भारत के ठोस आश्वासनों और कोर्ट के सख्त समय-निर्धारण के बाद उनका प्रत्यर्पण अब और लंबित नहीं रह पाएगा।

  • हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के

    हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के


    पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला आयुष चिकित्सक के चेहरे से हिजाब हटाने का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर अब इमारत-ए-शरिया के सचिव मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदउर रहमान कासमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था और इस कदम की सख्त निंदा करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की मांग की है।

    घटना उस समय की है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम में नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान जब नुसरत परवीन नामक महिला चिकित्सक की बारी आई तो वह हिजाब पहने हुए थीं। मुख्यमंत्री ने यह देखकर कहा यह क्या है और फिर महिला के चेहरे से हिजाब हटा दिया। इससे महिला असहज हो गई और एक अधिकारी ने जल्दी से उन्हें एक और कर दिया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिस पर इमारत-ए-शरिया के सचिव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    मौलाना रहमान कासमी ने कहा कि पर्दा महिलाओं और समाज की इज्जत है और हिजाब को हटाना महिला का अपमान है। मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि यह महिलाओं की इज्जत और गरिमा की तौहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने हालांकि इस घटना पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन यह मामला अब राजनीति में भी गहरे विवाद का कारण बन गया है। विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया है। राजद ने एक्स पर पोस्ट किया नीतीश जी का क्या हो गया है अब उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह से अस्थिर हो गई है।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हाल ही में 685 आयुर्वेद 393 होम्योपैथी और 205 यूनानी पद्धति के चिकित्सकों को नियुक्त किया था जिनमें से कुछ को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। हालांकि यह घटना और इसके बाद की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे नीतीश कुमार के विचारधारा परिवर्तन के रूप में भी देखा है और इसपर तीखे हमले किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

  • IPL 2026 Mini Auction: स्टीव स्मिथ और जैक फ्रेजर समेत 5 बड़े नाम अनसोल्ड

    IPL 2026 Mini Auction: स्टीव स्मिथ और जैक फ्रेजर समेत 5 बड़े नाम अनसोल्ड


    नई दिल्ली:आईपीएल 2026 का मिनी ऑक्शन 16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में हुआ। 156 खिलाड़ियों के लिए बोली लगी, जिसमें 10 टीमों ने 77 खिलाड़ी खरीदे और कुल 215.45 करोड़ रुपये खर्च किए। केकेआर ने कैमरन ग्रीन को 25.20 करोड़ रुपये में और मथीशा पथिराना को 18 करोड़ में खरीदा।

    हालांकि, कई बड़े नाम इस बार अनसोल्ड रहे। आइए जानते हैं टॉप-5 खिलाड़ियों के बारे में जिन्हें कोई खरीदार नहीं मिला:

    – जैक फ्रेजर मैकगर्क बेस प्राइस: 2 करोड़ रुपये पिछले सीजन तक: दिल्ली कैपिटल्स
    आईपीएल 2024-2025 में 15 मैच, 385 रन ऑक्शन में कोई रुचि नहीं दिखी और वह अनसोल्ड रहे

    – स्टीव स्मिथ बेस प्राइस:2करोड़ रुपये आखिरी आईपीएल सीजन: 2021 IPL करियर:103 मैच, 2485 रन दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रह चुके इस बार किसी ने उन्हें खरीदा नहीं

    – महेश थीक्षणा पिछले सीजन तक: राजस्थान रॉयल्स बेस प्राइस: नीलामी में 4.40 करोड़ रुपये में खरीदे गए थे इससे पहले CSK का हिस्सा रहे इस बार ऑक्शन में अनसोल्ड

    -रहमानुल्लाह गुरबाज अफगानिस्तान के विकेटकीपर-बैटर  बेस प्राइस: -50 करोड़ रुपये पिछले सीजन केकेआर का हिस्सा  ऑक्शन में किसी ने खरीदा नहीं

    – डेवोन कॉनवे न्यूजीलैंड के बैटर बेस प्राइस: 2 करोड़ रुपये पिछले सीजन तक CSK का हिस्सा
    पिछली बार सीएसके ने 6.25 करोड़ में बरकरार रखा था

    इस बार अनसोल्ड 

    इस साल के IPL 2026 मिनी ऑक्शन में बड़े खिलाड़ियों के अनसोल्ड रहना दर्शाता है कि फ्रेंचाइजी इस बार नई रणनीतियों और टीम बैलेंस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।

  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।