Author: bharati

  • IPL 2025 के 5 ‘छुपे रुस्तम’ खिलाड़ी, इस बार भी मचा सकते हैं बड़ा धमाल!

    IPL 2025 के 5 ‘छुपे रुस्तम’ खिलाड़ी, इस बार भी मचा सकते हैं बड़ा धमाल!

    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग हमेशा से युवा ही खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा का सबसे बड़ा मंच बना हुआ है। हर सीज़न में कुछ नए चेहरे उभरकर सामने आते हैं, जो अपने प्रदर्शन से शौकीनों और क्रिकेट खिलाड़ियों को चौंका देते हैं। आईपीएल 2025 में भी कुछ ऐसा ही ‘छुपे रुस्तम’ खिलाड़ी आया सामने, अपने खेल से खास पहचान बनाई। अब आईपीएल 2026 में एक बार फिर इन प्लेयर्स पर नजरें टिकी होंगी।

    सूर्यवंशी: कम आयु, बड़ा विस्फोट
    वैभव सूर्यवंशी ने पिछले सीजन में 14 साल की उम्र में इतिहास रच दिया था। गुजरात टाइटंस के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 35 बॉल में शतक जड़ावतकर बोस को चौंका दिया। 7 मैचों में 206 के स्ट्राइक रेट से 252 रन बनाने वाले वैभव आईपीएल में शतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने। इस बार हमसे और भी बड़े प्रदर्शन की उम्मीद है।

    आयुष म्हात्रे: सीएसके का नया प्रतिष्ठित ओपनर
    आयुष म्हात्रे ने चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अपने आक्रामक मुकाबले में सभी का ध्यान खींचा। सिर्फ 7 मैचों में 188 के स्ट्राइक रेट से 240 रन बनाने वाले आयुष इस बार टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। संभावना है कि वह संजू सैमसन के साथ मिलकर आमोद-प्रमोद में नजर आएंगे।

    प्रभसिमरन सिंह: पंजाब की सुपरस्टार
    प्रभसिमरन सिंह ने पंजाब किंग्स को फाइनल तक के खिताब में अहम भूमिका निभाई थी। 17 मैचों में 160 के स्ट्राइक रेट से 549 रन बनाने वाले प्रभसिमरन टीम के सबसे पसंदीदा बल्लेबाज उभरे। कैप्टन श्रेयस अय्यर को इस सीज़न में भी बड़े स्कोर की उम्मीद है।

    प्रियांश आर्या: नाटकीय ड्रामा का दूसरा चेहरा
    प्रियांश आर्य ने भी अपने दोस्त प्रभासिमरण के साथ मिलकर कई स्टैब्लो पारियां फिल्में बनाईं। 17 मैचों में 179 के स्ट्राइक रेट से 475 रन बनाने वाले प्रियांश ने एक शतक और दो शतक जड़े। इस बार भी टीम के लिए उनका आक्रामक आक्रामक हथियार साबित हो सकता है।

    अनिकेत वर्मा: डेथ ओवर्स का खतरनाक फिनिशर
    अनिकेत वर्मा ने सनराइजर्स हैदराबाद के लिए डेथ ओवर्स में शानदार बल्लेबाजी की। 14 मैचों में 166 के स्ट्राइक रेट से 236 रन बनाकर वे खुद एक बेहतरीन फिनिशर के रूप में साबित हुए। इस सीज़न में भी उनके आखिरी ओवरों में बारूदी प्रदर्शन की उम्मीद बनी रहेगी।

    इस बार और उपयोगी जानकारी
    इन सभी खिलाड़ियों ने आईपीएल 2025 में अपना प्रभाव छोड़ दिया है, लेकिन रियल चैलेंज अब 2026 में खुद को लगातार साबित करने की होगी। यदि ये खिलाड़ी अपने पिछले प्रदर्शन में डबलने में सफल रहते हैं, तो इस सीज़न में भी इनका नाम हो सकता है और ये मैच के लिए मैच विनर साबित हो सकते हैं।

  • तेल संकट गहराया श्रीलंका में कीमतों का विस्फोट बस किराया बढ़ाने की नौबत

    तेल संकट गहराया श्रीलंका में कीमतों का विस्फोट बस किराया बढ़ाने की नौबत


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है और इसका ताजा उदाहरण श्रीलंका है जहां ईंधन की कीमतों में भारी उछाल ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच जारी टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है और इसका सीधा असर छोटे और आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

    इसी कड़ी में श्रीलंका सरकार ने रविवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी एक सप्ताह के भीतर दूसरी और मार्च महीने की तीसरी बड़ी वृद्धि है। नई दरों के लागू होने के बाद देश में ईंधन की कीमतें 400 श्रीलंकाई रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं जो आम जनता के लिए बड़ा झटका है।

    सरकारी ईंधन कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ऑटो डीजल की कीमत 303 रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये पहुंच गया है। 92 ऑक्टेन पेट्रोल 317 से बढ़कर 398 रुपये और 95 ऑक्टेन पेट्रोल 365 से बढ़कर 455 रुपये प्रति लीटर हो गया है। केरोसिन की कीमत में भी सबसे ज्यादा 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    दरअसल इस पूरे संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति होती है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया के चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर असर पड़ा है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी आई है।

    इस बढ़ोतरी ने श्रीलंका के परिवहन क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की कीमत में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है और बिना किराया बढ़ाए संचालन संभव नहीं है। बस मालिकों ने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है जबकि राष्ट्रीय परिवहन आयोग के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी जरूरी है। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है।

    सरकार का कहना है कि बढ़ी कीमतों के बावजूद वह ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है। सरकारी प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा के मुताबिक डीजल पर 100 रुपये और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है जिससे हर महीने 20 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो सरकार को 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त भार उठाना पड़ता।

    हालांकि विपक्ष ने सरकार पर जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाया है और कहा है कि ईंधन पर भारी टैक्स हटाकर राहत दी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने 2022 के आर्थिक संकट की यादें ताजा कर दी हैं जब देश को भारी वित्तीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा था। कुल मिलाकर वैश्विक भू राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऊर्जा पर निर्भरता किस तरह किसी देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को प्रभावित कर सकती है।

  • छठी बार खिताब जीतना ही एकमात्र सपना हार्दिक पांड्या ने खोला अपनी 'विरासत' का राज, MI फैंस को दिया खास संदेश।

    छठी बार खिताब जीतना ही एकमात्र सपना हार्दिक पांड्या ने खोला अपनी 'विरासत' का राज, MI फैंस को दिया खास संदेश।

    नई दिल्ली:इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का बिगुल बजने से पहले ही मुंबई इंडियंस के खेमे में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में मुंबई इंडियंस के एक खास इवेंट ‘MIX’ (MI Fan Zone) में कप्तान हार्दिक पांड्या ने प्रशंसकों के साथ सीधा संवाद किया और अपने दिल की बात साझा की। हार्दिक पांड्या, जिन्हें अक्सर अपनी बेबाक शैली के लिए जाना जाता है, उन्होंने इस मंच से न केवल अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि इस बार उनका असली ‘गोल’ क्या है। हार्दिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका सबसे बड़ा सपना मुंबई इंडियंस को छठी बार आईपीएल चैंपियन बनाना है। गौरतलब है कि अब तक मुंबई ने रोहित शर्मा के नेतृत्व में पांच बार खिताब जीता है, लेकिन हार्दिक की कप्तानी में टीम का पिछला सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ऐसे में पांड्या अब खुद को साबित करने और टीम को फिर से शिखर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।

    इवेंट के दौरान भावुक होते हुए हार्दिक ने अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह जब वह एक युवा खिलाड़ी के रूप में टीम में आए थे, तब मुंबई इंडियंस के कल्चर, जुनून और कड़ी मेहनत ने उन्हें संवारने में मदद की थी। हार्दिक के अनुसार, उनकी इच्छा केवल मैच जीतना नहीं है, बल्कि एक ऐसी विरासत (Legacy) छोड़ना है, जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि मुंबई इंडियंस का वह कल्चर हमेशा बना रहे, जहां खिलाड़ी आगे आएं, जी-तोड़ मेहनत करें और मैदान पर अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट का प्रदर्शन करें।” पांड्या का मानना है कि उनकी सफलता की पहचान उनके खेल के जुनून और कड़ी मेहनत से होनी चाहिए। वह चाहते हैं कि मुंबई इंडियंस न केवल अपनी जीत के लिए, बल्कि अपने जुझारू खेल और सकारात्मक टीम संस्कृति के लिए जानी जाए।

    इतिहास पर नजर डालें तो मुंबई इंडियंस आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक रही है। 2013 में पहले खिताब से शुरू हुआ यह सफर 2015, 2017, 2019 और 2020 की जीत के साथ पांच ट्रॉफियों तक पहुंचा। खुद हार्दिक पांड्या के पास भी पांच आईपीएल मेडल हैं, जिनमें से चार उन्होंने मुंबई इंडियंस के साथ जीते हैं और एक ऐतिहासिक जीत उन्होंने 2022 में अपनी कप्तानी में गुजरात टाइटन्स को दिलाई थी। अब वह उसी जादू को मुंबई इंडियंस की जर्सी में दोहराना चाहते हैं। हालिया टी20 विश्व कप की जीत ने भी हार्दिक के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। उस विश्व विजेता टीम के चार मुख्य सदस्य-सूर्यकुमार यादव, जसप्रीत बुमराह, तिलक वर्मा और खुद हार्दिक-मुंबई इंडियंस का हिस्सा हैं, जो इस टीम को कागजों पर बेहद मजबूत बनाता है।

    फैंस के साथ बातचीत के दौरान हार्दिक ने वानखेड़े स्टेडियम के उस अद्भुत माहौल का भी जिक्र किया, जो भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए सेमीफाइनल के दौरान देखा गया था। उन्होंने मुंबई के फैंस यानी ‘MI पल्टन’ को टीम की असली ताकत बताया। हार्दिक ने कहा कि फैंस टीम की आवाज होते हैं और जब वे पूरे जोश के साथ स्टेडियम में मौजूद होते हैं, तो खिलाड़ियों का हौसला दोगुना हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सीजन में भी फैंस इसी तरह टीम के साथ हर अच्छे और बुरे वक्त में खड़े रहेंगे। कुल मिलाकर, हार्दिक पांड्या ने यह साफ कर दिया है कि आईपीएल 2026 उनके लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि अपनी कप्तानी और विरासत को नए सिरे से परिभाषित करने का एक सुनहरा अवसर है।

  • टेक्नोलॉजी ने छीना फिल्मों का जादुई रोमांस जावेद अख्तर की बात ने खोल दी सोच की नई खिड़की

    टेक्नोलॉजी ने छीना फिल्मों का जादुई रोमांस जावेद अख्तर की बात ने खोल दी सोच की नई खिड़की


    नई दिल्ली । फिल्मों में कभी जो रोमांस दिलों को छू जाता था आज वही एहसास धीरे धीरे फीका पड़ता नजर आ रहा है। पुराने दौर की फिल्मों में इंतजार तड़प और अधूरी ख्वाहिशों का जो जादू था वह अब कम होता दिख रहा है। इस बदलते ट्रेंड पर दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने एक बेहद दिलचस्प और तार्किक वजह सामने रखी है जो आज की पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर देती है।

    एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी खासकर स्मार्टफोन्स ने रोमांस की बुनियाद को ही बदल दिया है। उनके मुताबिक असली रोमांस पाने में नहीं बल्कि पाने की उम्मीद में होता है। यानी जो इंतजार होता था वही प्यार को खास बनाता था। आज के दौर में सब कुछ तुरंत उपलब्ध है और यही वजह है कि उस इंतजार का रोमांच खत्म हो गया है।

    उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए रोमियो और जूलिएट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस दौर में दोनों के पास स्मार्टफोन होते तो क्या रोमियो ठंडी रात में जूलिएट की बालकनी के नीचे खड़ा होकर उसका इंतजार करता। शायद नहीं क्योंकि वह एक कॉल या मैसेज में बात कर सकता था। यही फर्क आज के और पुराने रोमांस में सबसे बड़ा बदलाव बनकर सामने आया है।

    जावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले दूरी ही आकर्षण पैदा करती थी। जब किसी को देखने मिलने या समझने के लिए वक्त लगता था तो कल्पनाएं जन्म लेती थीं। वही कल्पनाएं एक आम इंसान को भी खास बना देती थीं। लेकिन आज सब कुछ तुरंत सामने आ जाता है। न इंतजार है न कल्पना की जरूरत। इसी कारण रोमांस का वह जादू जो धीरे धीरे बनता था अब गायब होता जा रहा है।

    इस चर्चा के दौरान आमिर खान भी उनकी बात से सहमत नजर आए। यह साफ दिखा कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। आज की फिल्मों में तेजी है लेकिन भावनाओं की गहराई कहीं न कहीं कम होती जा रही है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि इन प्रोजेक्ट्स को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है लेकिन दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनी हुई है।

    कुल मिलाकर जावेद अख्तर की यह बात सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी लागू होती है। टेक्नोलॉजी ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं उसने रिश्तों के उस एहसास को भी बदल दिया है जिसमें इंतजार और कल्पना की सबसे बड़ी भूमिका हुआ करती थी।

  • ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद, लोगों ने दान किए गहने और नकद राशि

    ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद, लोगों ने दान किए गहने और नकद राशि


    नई दिल्‍ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद की खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश के बडगाम जिले में स्थानीय लोगों ने एक मस्जिद में दान केंद्र स्थापित कर आर्थिक सहयोग जुटाना शुरू किया। यहां समुदाय के लोगों ने सोने-चांदी के बर्तन, गहने और नकद राशि देकर ईरान की सहायता का प्रयास किया।

    जानकारी के अनुसार, Imam Zaman Mosque Budgam में आयोजित इस अभियान के दौरान कई महिलाएं अपने कानों की बालियां, पुराने गहने, बर्तन और अन्य घरेलू सामान लेकर पहुंचीं और उन्हें दान के रूप में सौंप दिया।

    स्थानीय लोगों ने बताई वजह

    स्थानीय निवासी मोहसिन अली ने कहा कि दान केंद्र का उद्देश्य ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया है। उनके मुताबिक, “हम सीधे जाकर मदद नहीं कर सकते, इसलिए आर्थिक सहयोग के माध्यम से समर्थन दे रहे हैं।”

    ‘कमजोरों की मदद’ बताकर दिया समर्थन

    मोहसिन अली ने कहा कि ईरान को समर्थन देना उनके लिए कमजोरों की मदद करने जैसा है। उन्होंने बताया कि समुदाय के लोगों ने स्वेच्छा से इस अभियान में हिस्सा लिया और जरूरतमंदों के लिए सहयोग दिया।

    ईरानी दूतावास ने जताया आभार

    भारत में स्थित Embassy of Iran in India ने भी इस पहल पर धन्यवाद व्यक्त किया। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के लोगों के समर्थन की सराहना की। इससे पहले ईरान के समर्थन में दान अभियान शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    वैश्विक तनाव का असर

    United States और Israel के साथ बढ़ते तनाव के चलते Iran क्षेत्र में संघर्ष जारी है। Strait of Hormuz में स्थिति तनावपूर्ण होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है, जिससे युद्ध लंबा खिंचने की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है।

  • बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी AIMIM, ओवैसी ने की घोषणा

    बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी AIMIM, ओवैसी ने की घोषणा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया समीकरण उभरकर सामने आया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में उतरेगी। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।

    हुमायूं कबीर की पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। AIMIM भी इस गठबंधन का हिस्सा होगी और लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

    अब तक कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें रानीनगर, भगवानगोला और मुर्शिदाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। हुमायूं कबीर स्वयं तीन सीटों से चुनाव लड़ेंगे, भगवानगोला, नौदा और राजीनगर, जो मुर्शिदाबाद जिले में आती हैं।

    चुनाव की तारीखें

    पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे:
    पहला चरण (152 सीटें): 23 अप्रैल 2026
    दूसरा चरण (142 सीटें): 29 अप्रैल 2026
    नतीजे: 4 मई 2026

    सियासी मायने

    ममता बनर्जी की TMC और मुख्य विपक्षी दल BJP के बीच मुकाबले में ओवैसी और कबीर का गठबंधन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 2021 के चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों का प्रभाव कम हो गया था, ऐसे में यह नया मोर्चा राज्य की राजनीति में ‘तीसरे कोण’ के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है।

  • चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में सोमवार को ही पहली पूरक मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है। इसको देखते हुए पूरे बंगाल के थानों को अलर्ट पर रखा गया है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया,उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है।

    निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए पहली सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सकता है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों ने बताया कि यह सूची अंतिम मतदाता सूची की तरह ही जारी की जाएगी, जिसकी प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जाएंगी और बाद में राज्य भर के मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी।

    निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘विचाराधीन मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया व्यापक रही है और उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। पूरक सूची में इन परिणामों को पारदर्शी रूप से शामिल किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि ये 27 लाख मतदाता उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे जिन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित किया गया था।
    बंगाल में हाई अलर्ट

    पहली पूरक मतदाता सूची के सोमवार को जारी होने की संभावना के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते सभी थानों और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। राज्य के गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। विभाग ने सभी थानों को सरकारी कार्यालयों में भीड़ संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस तैनाती का इंतजाम करने और किसी भी व्यवधान को रोकने के लिए कानून लागू करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाये रखने को भी कहा है।

    मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सोमवार को अनुपूरक मतदाता सूची जारी होने की पुष्टि की है।

    इस सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद है। इससे पहले 28 फरवरी को जारी अंतिम एसआईआर सूची में 60 लाख से अधिक नामों को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति अनसुलझी रह गयी थी।

    सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक, इनमें से लगभग 27 लाख मामलों की समीक्षा की जा चुकी है और राज्य तथा पड़ोसी क्षेत्रों से लाये गये न्यायिक अधिकारियों के पैनल ने इन्हें निपटाया है। तार्किक विसंगति के तहत रखे गये मामलों की समीक्षा के लिए कुल मिलाकर 700 से अधिक न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पहले उल्लेख किया था कि चुनाव से पहले विचाराधीन सभी मामलों के हल होने की संभावना है।

    इसके अलावा भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए राज्य भर में 19 जिला-स्तरीय अपीलीय निकाय स्थापित किए हैं।

    ये अपीलीय निकाय उन मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होंगे जो आधिकारिक निबटारे में विफल रहे थे।

    स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस शिवगणनम को कोलकाता और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में अपीलों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शेष जिलों में इसी तरह के मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी करने में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिन्होंने अधिकारियों पर वैध मतदाताओं को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है।

  • कॉलेजियम प्रणाली पर पूर्व CJI की दो टूक, बोले– फिलहाल भारत के लिए यही सबसे उपयुक्त व्यवस्था

    कॉलेजियम प्रणाली पर पूर्व CJI की दो टूक, बोले– फिलहाल भारत के लिए यही सबसे उपयुक्त व्यवस्था

    नई दिल्ली। देश के पूर्व मुख्य जस्टिस बी आर गवई (Justice B. R. Gavai) ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कॉलेजियम प्रणाली ही भारत के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था है।
    उन्होंने यह भी माना कि यह प्रणाली पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं है, लेकिन अब तक के अनुभव के आधार पर इसे बेहतर विकल्प बताया।
    यह बात पूर्व CJI ने ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। इस दौरान उन्होंने “न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना” विषय पर बोलते हुए न्यायपालिका, कार्यपालिका और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    ‘कोई भी प्रणाली परिपूर्ण नहीं’

    जस्टिस गवई ने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं, लेकिन कोई भी प्रणाली पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होती।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इसके कामकाज को देखने के बाद उन्हें लगता है कि फिलहाल यही प्रणाली देश के लिए सबसे बेहतर है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम मनमाने ढंग से काम नहीं करता। उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठ न्यायाधीश नाम सुझाते हैं, जिसके बाद प्रक्रिया केंद्र सरकार को भेजी जाती है। विभिन्न एजेंसियों से सुझाव लेने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है।

    सरकार की भूमिका पर क्या बोले

    पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि केंद्र सरकार को किसी नाम पर आपत्ति होती है, तो वह कॉलेजियम को वापस भेज सकती है। कॉलेजियम इन आपत्तियों पर विचार कर अंतिम निर्णय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए नामों पर नियुक्ति करना कार्यपालिका की जिम्मेदारी होती है।

    उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि कई मामलों में दूसरी सिफारिश के बाद भी नियुक्तियां लंबित हैं। उन्होंने इसे आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं बताते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण संस्थागत प्रश्न है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

    जजों के ट्रांसफर और भूमिका पर टिप्पणी

    जस्टिस गवई ने न्यायाधीशों के स्थानांतरण पर भी कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई न्यायाधीश बार-बार शीर्ष अदालत के फैसलों की अनदेखी करता है, तो क्या कॉलेजियम को सुधारात्मक कदम नहीं उठाने चाहिए।

    कार्यपालिका पर संयम की सलाह

    पूर्व CJI ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के संतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अदालतें हमेशा संयम बरतती हैं, लेकिन जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या शक्तियों का संतुलन बिगड़ता है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कार्यपालिका किसी व्यक्ति पर केवल संदेह के आधार पर उसका घर ध्वस्त कर देती है, तो क्या न्यायपालिका चुप बैठ सकती है। उन्होंने कहा कि यह कानून के शासन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है, जिस पर विचार होना चाहिए।

  • होर्मुज तनाव: एलएनजी संकट के बाद अब भारत में यूरिया उत्पादन पर असर, सप्लाई चेन प्रभावित

    होर्मुज तनाव: एलएनजी संकट के बाद अब भारत में यूरिया उत्पादन पर असर, सप्लाई चेन प्रभावित


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में युद्ध के बढ़ते खतरे और होर्मुज जलसंधि में रुकावट के कारण तेल और गैस संकट और गहरा गया है। इसका असर अब अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने लगा है। एलपीजी संकट के बाद अब एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से भारत में यूरिया की कमी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज तनाव के चलते देश के यूरिया संयंत्रों में उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत घट गया है।

    यूरिया उत्पादन में कटौती

    एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलसंधि के माध्यम से एलएनजी आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की उपलब्धता कम हो गई। इसका असर सीधे भारत के यूरिया संयंत्रों पर पड़ा और उत्पादन में लगभग आधी कटौती करनी पड़ी। सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर का हवाला दिया, जिससे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को भी अपने रिसीविंग टर्मिनल पर इसी तरह का कदम उठाना पड़ा। गैस की कम आपूर्ति का असर सप्लाई चेन पर भी देखने को मिला। गैल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने रासगैस कॉन्ट्रैक्ट के तहत संचालित यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति कम कर दी।

    कम उत्पादन, बढ़ा घाटा

    उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैस की आपूर्ति सामान्य स्तर की तुलना में केवल 60-65 प्रतिशत रह गई है। ईंधन की कमी के कारण प्लांटों ने यूरिया उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की। इसके लिए संयंत्रों को अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे वित्तीय नुकसान भी हो रहा है। एक प्लांट प्रबंधक के अनुसार, अचानक लोड परिवर्तन बड़े यूरिया और अमोनिया संयंत्रों के लिए संभव नहीं हैं। इससे उपकरण खराब होने, प्लांट ठप होने और परिचालन कर्मियों की सुरक्षा पर भी खतरा रहता है।

    भारत में यूरिया भंडार
    भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। लंबे समय तक उत्पादन में व्यवधान रहने से खरीफ की बुवाई से पहले यूरिया की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 मार्च 2026 तक देश में 61.14 लाख टन यूरिया का भंडार था, जबकि एक साल पहले यह 55.22 लाख टन था। इस आंकड़े से फिलहाल कुछ राहत मिलती है।

  • ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की करीबी मानी जाने वाली टिप्पणीकार Candace Owens ने दावा किया है कि मौजूदा हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

    उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (social media platform) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस युद्ध को कुछ प्रभावशाली लोग बढ़ावा दे रहे हैं और इससे वैश्विक संकट पैदा हो सकता है।

    नेतन्याहू पर युद्ध भड़काने का आरोप

    ओवेन्स ने Benjamin Netanyahu पर आरोप लगाया कि ईरान के साथ तनाव को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध को लेकर आम जनता का समर्थन नहीं है, बल्कि कुछ समूह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इजरायल या किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती हैं।

    ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम

    तनाव के बीच United States और Iran ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो Strait of Hormuz को बंद किया जा सकता है। इससे पहले ट्रंप ने समुद्री मार्ग खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

    इजरायल का पलटवार

    इस बीच Israel के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने Dimona और Arad का दौरा कर हमलों की स्थिति का जायजा लिया। उनका आरोप है कि ईरान ने रिहायशी इलाकों और संवेदनशील स्थलों को निशाना बनाया।

    ईरान का जवाब

    ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र अन्य देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को जवाब दिया जाएगा।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है और कई विश्लेषक इसे बड़े संघर्ष की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।