Author: bharati

  • भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान

    भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे और उनके आगमन पर राजधानी दिल्ली में पारंपरिक सम्मान के साथ शानदार स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय सेना की तीनों सेवाओं ने गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद थोड़ी ही देर में पुतिन और मोदी राजघाट पहुंचे, जहां दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    पुतिन के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में सात वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति इस दौरे की अहमियत को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच आज दो महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं जिनमें से एक क्लोज़्ड-डोर बैठक होगी। इनके दौरान रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और कौशल आधारित भारतीय कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि मुलाकात के दौरान 25 से अधिक द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो भविष्य में भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन का काफिला राजघाट के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई थी और रास्तों को पहले ही खाली करा लिया गया था। राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता हैदराबाद हाउस पहुँचे, जहाँ 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और अवसर है।

    पुतिन की यात्रा का एक दिलचस्प पहलू वह सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर सिग्मा-4 भी रही जिसमें पीएम मोदी और पुतिन एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ बैठे। यह गाड़ी मुंबई के एक एडिशनल पुलिस कमिश्नर के नाम रजिस्टर्ड है और अप्रैल 2024 में पंजीकृत हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से पीएम की रेंज रोवर और पुतिन की विशेष सुरक्षा वाली कारें भी काफिले में शामिल थीं।

    फ्लाइटडाटा-24 की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का विमान Ilyushin Il-96-300 मॉस्को के ज़ुकोवस्की एयरपोर्ट से उड़ा और कजाकिस्तान, कैस्पियन सागर, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर राजस्थान के ऊपर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। यह उड़ान मार्ग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से सावधानीपूर्वक तय किया गया था।

    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा ही रिश्तों की मजबूत नींव रहा है। पुतिन ने हाल ही में कहा था कि भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त का नहीं बल्कि गहरे विश्वास और तकनीकी साझेदारी का है। यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग की ओर संकेत करती है।

    पुतिन के आगमन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत कर इस दौरे को विशेष महत्व दिया। दोनों नेताओं ने एक ही गाड़ी में सफर किया और रात में पीएम आवास पर निजी रात्रिभोज हुआ। इस मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो को दुनिया भर के मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया। अमेरिका यूरोपीय देशों, यूक्रेन और एशियाई मीडिया ने भी इस दौरे के भू-राजनीतिक महत्व पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।

    भारत-रूस संबंध एक ऐसे दौर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति में बदलाव तेजी से हो रहे हैं। यह दौरा न केवल सामरिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल सकता है।

  • इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी

    इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) इस समय अपने सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। गुरुवार को एयरलाइन ने देशभर में 550 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और भयानक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी फटकार लगाई है, जिसके बाद इंडिगो ने यात्रियों और हितधारकों से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है।

    नवंबर में 1200 से अधिक रद्द, स्टाफ की कमी मुख्य वजह
    इंडिगो, जो सामान्य दिनों में लगभग 2,300 उड़ानें संचालित करती है, नवंबर महीने से ही गहरे संकट में है।नवंबर में एयरलाइन को कुल 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थींडीजीसीए की जांच के बाद, इंडिगो ने कबूल किया कि 1,232 रद्द उड़ानों में से 755 उड़ानें अकेले स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं। इसके अलावा, एटीसी फेलियर (92), एयरपोर्ट प्रतिबंध (258), और अन्य कारणों से भी परिचालन बाधित हुआ।

    DGCA की सख्ती और ‘सेवा गुणवत्ता’ पर सवाल
    प्रदर्शन में आई इस भारी गिरावट के बाद डीजीसीए ने न केवल जांच के आदेश दिए, बल्कि एयरलाइन प्रबंधन को सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। डीजीसीए ने अधिक क्रू भर्ती करने, बेहतर योजना और निगरानी की सलाह दी है।

    सीईओ का ईमेल लीक: ‘हम वादा पूरा नहीं कर सके’
    बड़े पैमाने पर रद्दीकरण के कारण यात्रियों की नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आई। इस बीच, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्ट ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका ईमेल वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया।
    हम रोजाना 3.8 लाख यात्रियों की सेवा करते हैं और चाहते हैं कि हर ग्राहक को अच्छा अनुभव मिले। पिछले दिनों हम यह वादा पूरा नहीं कर सके और हमने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी है।सीईओ ने परिचालन संकट के लिए मामूली तकनीकी खामियों, शेड्यूल बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़ और नई FDTL नॉर्म्स (Flight Duty Time Limitations Norms) के प्रभाव को मुख्य कारण बताया।

    संकट से उबरने की ‘युद्धस्तर पर’ कवायद
    इंडिगो ने अब बयान जारी कर यात्रियों को आश्वस्त किया है कि वे MoCA, DGCA और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ समन्वय करके युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं ताकि परिचालन सामान्य हो सके। एयरलाइन ने कहा है कि वह डीजीसीए के निर्देशों का पालन करेगी और स्टाफ तथा प्रबंधन की कमी से जुड़ी समस्याओं को शीघ्र सुलझाएगी।इंडिगो ने यात्रियों से अपनी उड़ान की स्थिति लगातार जांचने और एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचने की अपील की है।

  • इंदौर बगैर अपराध इंजीनियर को 30 घंटे हथकड़ी में थाने में बैठाने पर चंदन नगर टीआई की मुश्किलें बढ़ीं

    इंदौर बगैर अपराध इंजीनियर को 30 घंटे हथकड़ी में थाने में बैठाने पर चंदन नगर टीआई की मुश्किलें बढ़ीं


    इंदौर । इंदौर में एक दिलचस्प और विवादास्पद घटना सामने आई है जिसमें चंदन नगर थाना पुलिस ने एक निर्दोष इंजीनियर को बगैर किसी अपराध के 30 घंटे तक थाने में हथकड़ी लगाकर बैठाया। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस ने एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी संजय दुबे की गिरफ्तारी के लिए संजय दुबे के बेटे राजा को पकड़ लिया। 26 नवंबर को पुलिस ने राजा को सैलून से उठाया, जबकि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। राजा का नाम केवल इसलिए लिया गया क्योंकि पुलिस 12 नवंबर से आरोपी संजय दुबे को पकड़ने में विफल रही थी।

    इस घटना के बाद राजा के साले आकाश तिवारी ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि राजा निर्दोष था और उसके खिलाफ कोई अपराध नहीं था, बावजूद इसके उसे पुलिस ने बगैर कारण के गिरफ्तार कर लिया और 30 घंटे तक थाने में हथकड़ी लगाकर रखा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए।

    हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया और पुलिस कमिश्नर से सवाल

    हाई कोर्ट ने पुलिस के इस कृत्य को गंभीरता से लिया और इसे नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन मानते हुए थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को सख्त हिदायत दी। कोर्ट ने पटेल से 26 और 27 नवंबर के सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि पुलिस ने क्या सचमुच अनुचित कार्रवाई की थी। हालांकि, जब पटेल कोर्ट में पेश हुए, तो वे अपने साथ सीसीटीवी फुटेज लाने में विफल रहे और इसका कारण तकनीकी गड़बड़ी बताया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य काफी हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि राजा के साथ दुर्व्यवहार किया गया था।

    कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से पूछा कि उन्होंने पटेल के खिलाफ क्या विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की है। इस सवाल से यह स्पष्ट हो गया कि कोर्ट अब इस मामले में पटेल के खिलाफ कठोर कदम उठाने की ओर इशारा कर रहा है।

    राजा को रिहा किया गया, लेकिन मामला जारी

    राजा को 27 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे रिहा किया गया, लेकिन इस रिहाई के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि 30 घंटे के दौरान की सीसीटीवी फुटेज पेश की जाए, लेकिन पटेल ने इसे प्रस्तुत नहीं किया, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर और सवाल खड़े हो गए। इस मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है, और पुलिस को इस समय तक अपने पक्ष को स्पष्ट करने का अवसर दिया गया है।

    इस घटना से यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने का अधिकार है, और क्या पुलिस अधिकारियों को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने पर सजा मिलनी चाहिए। यह मामला न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश में पुलिस के बर्ताव और नागरिकों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि पुलिस के लिए कानून से ऊपर होना कोई विकल्प नहीं है, और हर नागरिक को अपने अधिकारों की रक्षा करने का हक है। हालांकि, मामले की आगे की सुनवाई में अदालत द्वारा की जाने वाली कार्रवाई इस बात का निर्णय करेगी कि क्या थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जाती है, या फिर इसे एक और प्रशासनिक लापरवाही के रूप में ही छोड़ दिया जाएगा।

  • वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम

    वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम


    नई दिल्ली।
    देशभर में फैली लगभग 8.8 लाख वक्फ संपत्तियों (8.8 lakh Waqf Properties) के डिजिटल रिकॉर्ड (Digital record) तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार (Central government) द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए ‘UMMEED’ पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। डेडलाइन से एक दिन पहले भी सबसे अधिक वक्फ संपत्तियों वाले राज्यों- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सिर्फ 10 से 35 फीसदी संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं।

    इसके मुकाबले पंजाब ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां लगभग 80% वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। हालांकि, पंजाब में वक्फ संपत्तियों की बजाय वक्फ एस्टेट्स पंजीकृत किए जा रहे हैं। यानी एक एस्टेट में कई संपत्तियां शामिल हो सकती हैं इसलिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही।


    राज्यवार स्थिति और चुनौतियां

    उत्तर प्रदेश- सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां, अपलोड केवल 35%
    देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं- कुल 1.4 लाख।
    सुन्नी वक्फ बोर्ड: 1.26 लाख में से 36% (45,574) संपत्तियां अपलोड
    शिया वक्फ बोर्ड: 15,386 में से 18.9% (2,909) संपत्तियां अपलोड

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि कई संपत्तियां सदियों पुरानी हैं, जिनके मूल दस्तावेज अनुपलब्ध हैं। एक अधिकारी ने कहा कि 20वीं सदी की शुरुआत में दर्ज किए गए वक्फ के कागज आखिर कहां से मिलेंगे? राजस्व रिकॉर्ड में यह वक्फ के रूप में दर्ज हैं, लेकिन पोर्टल दाखिल खारिज या रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांग रहा है। बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने भी स्वीकार किया कि डेडलाइन से पहले पंजीकरण पूरा करना संभव नहीं है। बता दें कि बिहार UP के अलावा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सुन्नी और शिया बोर्ड अलग-अलग हैं, बाकी सभी राज्यों में एक ही वक्फ बोर्ड है।


    पश्चिम बंगाल- 12% पंजीकरण, तकनीकी और भाषाई दिक्कतें

    पश्चिम बंगाल की कुल 80480 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 10000 यानी 12 फीसदी ही पंजीकृत हैं।
    मुख्य कारण:
    ग्रामीण क्षेत्रों में मुतवल्ली तकनीकी जानकारी से वंचित हैं।
    पोर्टल केवल अंग्रेजी में है, जबकि अधिकांश मुतवल्ली अंग्रेजी नहीं जानते।
    भूमि माप इकाइयों में अंतर है। एक बीघा बंगाल में अलग, बिहार-UP में अलग।
    TMC सरकार ने कई महीनों तक वक्फ संशोधन अधिनियम लागू करने से इनकार किया था, बाद में प्रशासन ने अपलोडिंग शुरू कराई।


    कर्नाटक- 10% पंजीकरण, सर्वर बार-बार क्रैश

    65242 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 6000 अपलोड हुई हैं।
    अधिकारियों के अनुसार: पोर्टल अक्सर क्रैश हो जाता है। एक संपत्ति को अपलोड करने में 10-15 मिनट लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ करना चाहिए।
    पंजाब- 80% पंजीकरण, अलग मॉडल की वजह से रफ्तार
    कुल 25,000 वक्फ एस्टेट्स में से 20,000 पंजीकृत।
    कारण:
    यहां मुतवल्ली नहीं- सभी संपत्तियां बोर्ड सीधे प्रबंधन करता है।
    संपत्ति नहीं, सिर्फ एस्टेट्स अपलोड की जा रहीं, जो आसान है।


    तमिलनाडु – 10% पंजीकरण, दस्तावेज अस्पष्ट

    66092 संपत्तियों में से लगभग 6,000 अपलोड की गई हैं। TN वक्फ बोर्ड चेयरमैन नवास कानी ने कहा: अधिकांश मुतवल्ली को तकनीकी सहयोग नहीं मिला। कई संपत्तियों के दस्तावेज अस्पष्ट या अधूरे हैं। सरकार द्वारा भूमि सर्वे पूरा किए बिना सटीक रिकॉर्ड तैयार करना कठिन है।


    केंद्र सरकार की स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    वक्फ़ संशोधन अधिनियम के तहत पंजीकरण की अवधि कानून में निश्चित है, इसलिए केंद्र ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मैं एक्ट बदले बिना तारीख नहीं बदल सकता। विशेष परिस्थितियों में वक्फ ट्रिब्यूनल ही समय बढ़ा सकते हैं।


    सांसदों और संगठनों की मांग

    सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि UP की 70% संपत्तियां पंजीकृत नहीं… सर्वर डाउन है… ऐसा लगता है जैसे धार्मिक अधिकार समाप्त हो गए हों। वहीं कांग्रेस MP इमरान मसूद ने कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण मुसलमान चिंतित हैं।


    सुप्रीम कोर्ट का रुख

    SC ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। इसने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में जाएं, वही राहत दे सकते हैं। अब डेडलाइन पूरी न कर पाने की स्थिति में बोर्ड और मुतवल्ली राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर कारण बता सकते हैं। यह बोर्ड विस्तार दे सकते हैं। लेकिन बोर्डों की चिंता है। उनका मानना है कि हजारों आवेदन आने पर ट्रिब्यूनल कैसे संभालेंगे?

  • आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!

    आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!


    मुम्बई।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India -RBI) शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में लिए गए निर्णयों की घोषणा करेगा। विशेषज्ञों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी बार रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra)​शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर एमपीसी की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

    खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो रेट में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट ने प्रमुख अल्पकालिक ऋण दर में कटौती की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है। आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है।


    कोई बदलाव नहीं होने की संभावना

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई ब्याज दर में यथास्थिति कायम रख सकता है क्योंकि आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है जो राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुख्य मुद्रास्फीति सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है।


    आरबीआई पर जिम्मेदारी

    सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई के पहली छमाही के अपेक्षा से बेहतर आंकड़ों को देखते हुए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके बढ़ाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान को अक्टूबर में 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।

  • देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू

    देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू


    नई दिल्ली।
    देशभर में टोल टैक्स सिस्टम (Country Toll Tax System ) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने गुरुवार को कहा कि एक वर्ष में वर्तमान टोल टैक्स कलेक्शन सिस्टम (बैरियर) (Toll Tax Collection System (Barrier)) को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। टोल टैक्स को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से चुकाया जाएगा।

    लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गडकरी ने बताया कि करीब दस स्थानों पर इस नई व्यवस्था को लागू किया जा चुका है। अगले एक वर्ष के अंदर इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू कर दिया जाएगा। इससे टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में करीब 10 लाख करोड़ की 4500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही है। बड़ी मात्रा में हाईवे निर्माण के साथ डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से देश में सड़क यातायात और परिवहन की रफ्तार और तेज हो जाएगी।

    टोल सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल होगा : सरकार
    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) तकनीक विकसित की है। इसका मकसद टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इसमें आरईआईडी यानी की रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह हाईवे टोल प्लाजा पर वाहन गुजरने के दौरान बिना रुके चालक से जुड़े बैंक खाते से टोल राशि अपने आप काट देता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर कहा सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है। गडकरी ने हाईड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी करार दिया।

    सरकार ने गुरुवार को बताया कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना के तहत किए गए कुल 6,833 अनुरोधों में से अब तक सिर्फ 5,480 पीड़ित ही पात्र पाए गए हैं। गडकरी ने कहा, सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना, 2025 के तहत हर दुर्घटना के मामले में पीड़ित का 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार किया जाएगा।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।

  • MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे

    MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे


    सिवनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी जिले (Seoni district) के एक सरकारी स्कूल (Government school) में बच्चों से जबरन ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाने के बाद बवाल मच गया. मामला अरी थाना क्षेत्र के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल का है। बच्चों ने आरोप लगाया कि 1 दिसंबर को गीता पाठ के बाद उनसे 16 बार ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाए गए और स्कूल की प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े ने सभी बच्चों को नारा लगाने के लिए दबाव डाला।

    घर आकर बच्चों ने ये बात परिजनों को बताई तो बवाल मच गया. 3 दिसंबर को बच्चों और अभिभावकों के साथ हिंदूवादी संगठन के लोग भी स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल का विरोध करते हुए उनको स्कूल से हटाने और सस्पेंड किए जाने की मांग करने लगे।

    हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया. थोड़ी ही देर में जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे भी स्कूल पहुंचे तो लोगों ने उनके ख़िलाफ़ भी नारेबाजी की, इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े से बात की और उन्हें स्कूल से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच कर दिया।

    गांव के लोग इस पर भी नहीं माने और प्रिंसिपल के निलंबन की मांग करने लगे तो जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके पर ही एक जांच टीम का गठन कर दिया, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रिंसिपल पर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर मामला शांत हुआ।

    जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे ने बताया, ”शिकायत के बाद मैं खुद जांच करने स्कूल गया था, जहां प्रिंसिपल ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सर्वधर्म सद्भाव का था, उन्होंने सबसे माफी भी मांगी. प्रिंसिपल को स्कूल से हटा दिया गया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है