Author: bharati

  • दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


    नई दिल्ली। हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान को लेकर भारत के रुख पर कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार देशहित में सही कदम उठा रही है।

    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए।

    पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरी
    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोले
    होसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।

    संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिका
    संघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं।

    महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं।

    बेसहारा गोवंश पर भी बोले
    बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है।

    बीजेपी से संबंध पर दिया जवाब
    राजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारी
    सभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।

    करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा।

    तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातें
    RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं।

    सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

  • LPG vs Induction: कौन सा तरीका है हेल्दी और सुरक्षित खाना बनाने के लिए?

    LPG vs Induction: कौन सा तरीका है हेल्दी और सुरक्षित खाना बनाने के लिए?


    नई दिल्ली । आज के समय में रसोई में खाना बनाने के लिए LPG गैस और इंडक्शन कुकटॉप दोनों ही आम विकल्प बन गए हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि इन दोनों में से कौन ज्यादा सुरक्षित और सेहतमंद है।

    LPG गैस कुकिंग
    LPG पर खाना बनाना दशकों से हमारी आदत रही है। गैस की आंच को कंट्रोल करना आसान होता है जिससे खाने का स्वाद और टेक्सचर बरकरार रहता है। आयुर्वेद के अनुसार अग्नि पर पका खाना सुपाच्य होता है क्योंकि यह धीरे-धीरे पकता है और पोषक तत्वों को बनाए रखता है। हालांकि बंद कमरे या छोटे किचन में गैस जलाने से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं जो लंबे समय में श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

    इंडक्शन कुकिंग

    इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए काम करता है और केवल बर्तन को गर्म करता है न कि आसपास की हवा को। इसका रेडिएशन बहुत कम होता है और केवल बर्तन तक सीमित रहता है। पेसमेकर यूज़ करने वाले मरीजों को इंडक्शन से थोड़ी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    पोषक तत्वों की सुरक्षा

    एक बड़ा मिथक यह है कि इंडक्शन खाना पोषक तत्व खो देता है। वास्तव में पोषक तत्वों का नुकसान तापमान और कुकिंग टाइम पर निर्भर करता है। इंडक्शन पर खाना जल्दी पकता है जिससे विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स सुरक्षित रहते हैं। वहीं गैस पर धीमी आंच पर पकने वाला खाना दालों और कड़े खाद्य पदार्थों के लिए बेहतर माना जाता है।

    सुरक्षा और सुविधा

    इंडक्शन गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित है क्योंकि इसमें खुली लौ नहीं होती जिससे आग लगने का खतरा कम होता है। यह किचन के तापमान को भी सामान्य रखता है। गैस की पहुंच हर जगह है और यह बिजली पर निर्भर नहीं करती लेकिन अगर किचन में वेंटिलेशन सही नहीं है तो इंडक्शन एक बेहतर और क्लीनर विकल्प साबित हो सकता है। अगर आप जल्दी और क्लीनर कुकिंग चाहते हैं तो इंडक्शन बेहतर है।अगर आप धीमी आंच और पारंपरिक स्वाद पसंद करते हैं तो LPG गैस उपयुक्त है।स्वास्थ्य और वेंटिलेशन को ध्यान में रखते हुए दोनों विकल्प सुरक्षित हैं बस इस्तेमाल और देखभाल सही हो।

  • नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव

    नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव



    नई  दिल्ली। नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल माता शारदा मंदिर मैहर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए मैहर रेलवे स्टेशन पर कई लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी ठहराव दिया जाएगा।

    रेल प्रशासन के अनुसार भारतीय रेलवे ने भोपाल मंडल से गुजरने वाली 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को मैहर स्टेशन पर 5 मिनट का अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 19 मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।

    नवरात्रि के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैहर पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सीधे मैहर पहुंचने में सुविधा मिले, इसके लिए विभिन्न राज्यों से आने-जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी हाल्ट दिया गया है। इससे खासतौर पर उत्तर भारत, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को काफी राहत मिलेगी।

    इन ट्रेनों का मैहर स्टेशन पर होगा अस्थायी ठहराव
    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    चेन्नई–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–चेन्नई एक्सप्रेस

    वलसाड–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस

    मुजफ्फरपुर–वलसाड एक्सप्रेस

    कोल्हापुर–धनबाद एक्सप्रेस

    धनबाद–कोल्हापुर एक्सप्रेस

    एलएलटी–रक्सौल एक्सप्रेस

    रक्सौल–एलएलटी एक्सप्रेस

    पुणे–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–पुणे एक्सप्रेस

    पूर्णा–पटना एक्सप्रेस

    पटना–पूर्णा एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–अयोध्या कैंट एक्सप्रेस

    अयोध्या कैंट–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–रांची एक्सप्रेस

    रांची–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    बांद्रा टर्मिनस–पटना एक्सप्रेस

    पटना–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस

    पुणे–बनारस एक्सप्रेस

    बनारस–पुणे एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गुवाहाटी एक्सप्रेस

    गुवाहाटी–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    सूरत–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–सूरत एक्सप्रेस

    रेलवे का कहना है कि नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके और यात्रा सुगम हो।

    दो लाइन का सारांश
    नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मैहर रेलवे स्टेशन पर 19 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को 5 मिनट का अस्थायी ठहराव दिया जाएगा। इससे माता शारदा मंदिर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी।

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  • शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल

    शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल


    नई दिल्ली । पारंपरिक लुक को खास बनाने में ज्वेलरी का हमेशा अहम रोल रहा है और खासकर बैंगल्स यानी चूड़ियां। ये न केवल हाथों की खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि साधारण सूट या कुर्ती को भी एक डिजाइनर टच देती हैं। फैशन की दुनिया में नए ट्रेंड्स आते रहते हैं लेकिन पारंपरिक एथनिक स्टाइल का क्रेज कभी कम नहीं होता। आइए जानते हैं 5 लेटेस्ट बैंगल डिज़ाइन जो आपके लुक को रॉयल बना देंगे।

    ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बैंगल्स

    ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी आजकल काफी ट्रेंड में है। अगर आप कॉटन कुर्ती या इंडो वेस्टर्न सूट पहन रही हैं तो चांदी जैसी दिखने वाली ऑक्सीडाइज्ड चूड़ियां बेस्ट ऑप्शन हैं। इन्हें आप जींस कुर्ती के साथ भी पहन सकती हैं। ये स्टाइलिश होने के साथ साथ आपको बोहेमियन और एथनिक लुक भी देती हैं।

    सिल्क थ्रेड बैंगल्स

    रेशमी धागों से बनी सिल्क थ्रेड बैंगल्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। इन्हें सूट के रंग के अनुसार कस्टमाइज कराना आसान है। मोती स्टोन और मिरर वर्क इन्हें हैवी सूट या छोटे फंक्शन के लिए परफेक्ट बनाता है। ये त्योहारों और हल्के समारोहों के लिए एक बेहतरीन चॉइस हैं।

    कश्मीरी बैंगल्स

    अगर आप कुछ यूनिक और कलात्मक पहनना पसंद करती हैं तो कश्मीरी बैंगल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। इन पर की गई हैंड पेंटिंग और फ्लोरल डिज़ाइन इन्हें बाकी चूड़ियों से अलग बनाती हैं। अक्सर इन्हें स्टेटमेंट ज्वेलरी के तौर पर ही पहना जाता है।

    वेलवेट बैंगल्स

    सर्दियों और रात की शादियों के लिए वेलवेट बैंगल्स बेस्ट हैं। मखमली टेक्सचर और गहरा रंग साधारण सूट को भी रॉयल और महंगा लुक देता है। आजकल इन्हें पूरी कलाई भरकर पहनने के बजाय गोल्ड या कुंदन के कड़ों के बीच में सेट करके पहनना ट्रेंड में है।

    कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े

    शादी या बड़ी पार्टी के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े सबसे शानदार विकल्प हैं। इन्हें पूरी चूड़ियों के सेट के बजाय एक एक चौड़ा कड़ा दोनों हाथों में पहनना आजकल पसंद किया जाता है। अगर आपकी कुर्ती पर हैवी एम्ब्रॉयडरी है तो ये कड़े आपको रॉयल और क्लासी लुक देंगे।बैंगल्स सही डिजाइन और सेटिंग के साथ किसी भी लुक को हाई फैशन और रॉयल बना सकते हैं। चाहे त्योहार हो या शादी इन 5 बैंगल डिज़ाइनों से आपका सूट भी एथनिक और स्टाइलिश लगेगा।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर

    चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दौरान भक्त पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 26 मार्च को होगा। इसी दिन महानवमी के साथ साथ राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।

    नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है जिसे देवी पूजा का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 6:23 बजे से 7:32 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यदि किसी कारणवश इस समय स्थापना न हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी घटस्थापना की जा सकती है। इस समय विधि विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और नौ दिनों तक नियमित पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसी आधार पर माता दुर्गा के आगमन का वाहन तय होता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है इसलिए मान्यता है कि माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। हाथी को समृद्धि अच्छी वर्षा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विशेष बात यह है कि इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग भी एक ही दिन पड़ रहा है। 26 मार्च को अष्टमी और नवमी का संयुक्त पूजन कन्या पूजन और हवन किया जाएगा। इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा जिससे यह दिन और भी अधिक शुभ माना जा रहा है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी सातवें दिन मां कालरात्रि आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों में अलग अलग भोग अर्पित करते हैं और मां से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है तथा हवन भी किया जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घटस्थापना से पहले घर और पूजा स्थान की साफ सफाई की जाती है। मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं कलश में जल सुपारी और सिक्का रखा जाता है तथा ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

    नवरात्रि के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए रोज सुबह शाम मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए और दान पुण्य करना चाहिए। वहीं मांस मदिरा का सेवन झूठ बोलना और क्रोध करने से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया नवरात्रि पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

  • कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर

    कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर


    नई दिल्ली। इस सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए समय जिम्मेदारी, आत्मविश्लेषण और प्रगति का संकेत दे रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति आपके जीवन के कई क्षेत्रोंखासकर करियर, रिश्तों और मानसिक संतुलनपर प्रभाव डाल सकती है। इस दौरान व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी रहेगा।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस सप्ताह चंद्रमा 16 मार्च को छठे भाव में, 18 मार्च को सातवें भाव में और 21 मार्च को आठवें भाव में गोचर करेंगे। वहीं सूर्य, शुक्र और शनि की युति मीन राशि में बनी हुई है, जबकि मंगल, राहु और वक्री बुध कुंभ राशि में स्थित हैं। इसके साथ ही बृहस्पति आपके दसवें भाव में मौजूद हैं, जो करियर और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

    इन ग्रह स्थितियों के कारण व्यवसाय विस्तार और विदेशी संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना बन रही है। हालांकि वक्री बुध की वजह से किसी भी बड़े फैसले या बातचीत में सावधानी रखना जरूरी होगा।

    स्वास्थ्य
    इस सप्ताह स्वास्थ्य के मामले में अनुशासन और संतुलित दिनचर्या बेहद जरूरी रहेगी। सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा का प्रभाव आपको अपने खान-पान और लाइफस्टाइल के प्रति जागरूक बनाएगा।
    मध्य सप्ताह में काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव या भावनात्मक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना आपको मानसिक शांति देगा।

    सप्ताहांत में ऊर्जा का स्तर थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है, इसलिए अधिक काम से बचें। हल्का व्यायाम, योग और ध्यान आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    परिवार और संबंध
    रिश्तों के लिहाज से यह सप्ताह आत्मचिंतन और सुधार का अवसर लेकर आएगा। शुरुआत में व्यस्तता के कारण परिवार को समय कम दे पाएंगे, लेकिन जैसे ही चंद्रमा सातवें भाव में प्रवेश करेगा, रिश्तों में सुधार दिखाई देगा।

    जीवनसाथी या पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करने से पुरानी गलतफहमियां दूर हो सकती हैं। शुक्र का मजबूत प्रभाव रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ाएगा।

    हालांकि सप्ताह के अंत में घर में किसी गंभीर विषय पर चर्चा हो सकती है, इसलिए अनावश्यक बहस से बचना ही बेहतर रहेगा।

    शिक्षा और करियर
    छात्रों के लिए यह सप्ताह मेहनत और सीखने का समय रहेगा। छठे भाव का चंद्रमा आपको अनुशासन में रखेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

    मध्य सप्ताह में ग्रुप स्टडी और शिक्षकों से मार्गदर्शन फायदेमंद साबित होगा। सप्ताहांत में शोध, विश्लेषण और गहराई से पढ़ाई करने वाले विषयों पर फोकस बढ़ेगा।एकाग्रता के साथ किया गया काम ही बेहतर परिणाम दिला सकता है।

    कुल मिलाकर यह सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए धीरे-धीरे लेकिन स्थिर प्रगति का संकेत देता है। ग्रहों की स्थिति आपको जिम्मेदारी निभाने, आत्मविकास करने और सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी।

    बृहस्पति और उच्च के शुक्र की कृपा से नए अवसर और सहयोग मिलने की संभावना है। अगर आप धैर्य और स्पष्ट संवाद बनाए रखेंगे, तो यह सप्ताह आपके लिए सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

    उपाय
    रोजाना “ओम बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।

    बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

    जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग की दाल या हरी सब्जी दान करें।

    मानसिक शांति के लिए नियमित ध्यान और योग करें।

    सुबह पक्षियों को दाना डालें।

    संक्षेप में यह सप्ताह कन्या राशि के लिए जिम्मेदारी, रिश्तों में सुधार और करियर में नए अवसरों का संकेत दे सकता है। सही संवाद और धैर्य आपके लिए सफलता के रास्ते खोल सकते हैं।

  • कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद

    कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद


    नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फलों को डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन्हीं फलों में से एक है कीवी, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। हल्का खट्टा-मीठा स्वाद रखने वाला यह फल न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि कीवी को जूस के रूप में पीना ज्यादा फायदेमंद है या इसे सीधे फल के रूप में खाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही तरीके लाभकारी हैं, लेकिन साबुत फल खाने से शरीर को ज्यादा फाइबर मिलता है, जबकि जूस जल्दी ऊर्जा देने में मदद करता है।

    कीवी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, विटामिन-ई, पोटैशियम, फोलेट, फाइबर, कॉपर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसका सेवन शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में कीवी का जूस पीना शरीर को तरोताजा रखने में सहायक होता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुबह के समय इसका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं।

    कीवी या उसके जूस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से राहत दिलाने में मदद करता है। कई बार डॉक्टर डेंगू बुखार के दौरान भी कीवी या कीवी के जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है।

    कीवी का सेवन दिल की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है, जिससे दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, इसमें मौजूद पोषक तत्व जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मददगार माने जाते हैं। कीवी आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं।

    अगर आप कीवी का जूस बनाना चाहते हैं तो इसे अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसे मिक्सर में डालकर थोड़ा पानी, स्वादानुसार काला नमक और चाहें तो थोड़ी चीनी मिलाकर ब्लेंड कर लें। अंत में इसमें थोड़ा नींबू का रस मिलाकर ताजगी से भरपूर जूस तैयार किया जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संभव हो तो कीवी को जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर को फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

  • मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

    मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली:आजकल फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मसल्स बनाने और शरीर को मजबूत रखने के लिए लोग जिम में घंटों मेहनत करते हैं और कई बार महंगे सप्लीमेंट का भी सहारा लेते हैं। हालांकि शरीर को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज संतुलित आहार और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन है। कई लोग नॉनवेज फूड्स से प्रोटीन की कमी पूरी कर लेते हैं लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में लोबिया दाल एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आती है जो स्वाद के साथ साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल को प्लांट बेस्ड प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और उनके विकास के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। अगर आप नियमित रूप से लोबिया दाल का सेवन करते हैं तो इससे मसल्स मजबूत बनने में मदद मिल सकती है। लगभग सौ ग्राम उबले हुए लोबिया में करीब आठ से दस ग्राम प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देने और मांसपेशियों को ताकत देने में सहायक होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं और बढ़ते बच्चों के लिए यह दाल काफी फायदेमंद मानी जाती है।

    लोबिया दाल वजन कम करने में भी मददगार हो सकती है। इसमें डाइटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन प्रक्रिया को धीरे चलने में मदद करती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इससे बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और व्यक्ति अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाता है। इसके साथ ही लोबिया में कैलोरी की मात्रा कम होती है और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं जिससे यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाती है।

    पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी लोबिया दाल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पेट से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसका नियमित सेवन कब्ज की समस्या को कम करने और आंतों की सफाई करने में सहायक माना जाता है। फाइबर शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है।

    लोबिया दाल केवल मसल्स और पाचन के लिए ही नहीं बल्कि दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा लोबिया बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होती है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा भी कम हो सकता है।

    भारत में महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी एक आम समस्या है। लोबिया दाल आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत मानी जाती है जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर हो सकता है और थकान तथा कमजोरी की समस्या कम हो सकती है।

    इसके अलावा लोबिया में मौजूद जिंक और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट में पौष्टिक और संतुलित भोजन शामिल करना चाहते हैं तो लोबिया दाल को नियमित रूप से खाना एक अच्छा और फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है।

  • लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

    लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा।

    उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।

  • पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को

    पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, 6 राज्यों में 8 सीटों पर उपचुनाव भी, नतीजे 4 मई को


    Election
    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग ने रविवार को पांच राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है। पुडुचेरी, केरल और असम में 09 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। सभी के नतीजे 0 4 मई को आयेंगे।

    असम, पुडुचेरी और केरल की सभी 126, 30 और 140 सीटों पर 16 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को की जाएगी। उम्मीदवार 26 मार्च तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटो पर 30 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 06 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 07 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 09 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की 142 सीटो पर 02 अप्रैल अधिसूचना जारी होगी, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 09 अप्रैल है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 10 अप्रैल को की जाएगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे।

    इसके अलावा आयोग ने आज गोवा की पोंडा, गुजरात की उमरेठ, कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ, महाराष्ट्र की राहुरी और बारामती, नगालैंड की कोरिडांग (एसटी) तथा त्रिपुरा की धर्मनगर पर उपचुनाव की घोषणा की है। इन सभी सीटों पर संबंधित विधायकों के निधन के कारण रिक्ति उत्पन्न हुई है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव कराया जाएगा। इनमें से गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल और बाकी सभी सीटों पर 09 अप्रैल को मतदान होगा।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ दिल्ली में आज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से जुड़ी पत्रकार वार्ता की। इसमें कुमार ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी जगह पर आदर्श आचार संहिता लग गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग नियम और व्यवस्था के तहत काम करता है और आचार संहिता लगने से पूर्व लिए गए सरकारी फैसलों और राजनीतिक बयानों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद दिए गए बयानों और प्रशासनिक निर्णय पर चुनाव आयोग कड़ी नजर रखेगा।

    चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं। कुल 824 विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 07 मई तमिलनाडु का 10 मई, असम 20 मई और केरल 23 मई को समाप्त होगा। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल 15 जून तक है।

    कुल 824 विधानसभा सीटों में असम में 126, केरल में 140, पुडुचेरी में 30, तमिलनाडु में 234 और पश्चिम बंगाल में 294 सीटें हैं। असम में 09 एससी और 19 एसटी सीटें, केरल में 14 एससी और 02 एसटी सीटें, पुडुचेरी में 05 एससी सीटें, तमिलनाडु में 44 एससी और 02 एसटी सीटें तथा पश्चिम बंगाल में 68 एससी और 16 एसटी सीटें आरक्षित हैं।

    आंकड़ों के अनुसार कुल मतदाता लगभग 17.4 करोड़ हैं। असम में लगभग 2.50 करोड़, केरल में 2.70 करोड़, पुडुचेरी में करीब 9.44 लाख, तमिलनाडु में लगभग 5.67 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता हैं।