Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 6 दिनों से प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई गैस की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

    सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें:
    भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग भी सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कई बार बुकिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जबकि कभी-कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल पा रहा है।

    होटल और रेस्टोरेंट्स पर असर:
    प्रदेश में करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट्स इस संकट से प्रभावित हैं। इन व्यवसायों को अपने संचालन के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे खाना पकाने में बाधा और ग्राहकों की सेवा प्रभावित हो रही है।

    विकल्प और बढ़ा खर्च:
    गैस की कमी के कारण इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। हालांकि, इनके संचालन की लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां और छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल्स अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं।

    राज्यव्यापी स्थिति:
    LPG संकट केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। राजधानी से लेकर छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में रसोई गैस की कमी ने आम जनता और व्यवसायों में हाहाकार मचा दिया है।

    विशेषज्ञों की चेतावनी:
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इससे खाद्य सेवा उद्योग और घरेलू रसोई दोनों प्रभावित होंगे। लंबे समय तक गैस की कमी के कारण लोग सस्ता और असुरक्षित विकल्प, जैसे खुले भट्ठी या कोयला, इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

    सरकारी कदम:
    इस समय सरकारी एजेंसियां और वितरक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सिलेंडर की सप्लाई बहाल हो। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस समयरेखा नहीं दी गई है।

    मध्य प्रदेश में LPG संकट से गृहस्थी और व्यापार दोनों प्रभावित हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स संचालन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, घरों में रसोई गैस की कमी आमजन की दिनचर्या पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा दोनों पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है।

  • Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट

    Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट


    नई दिल्ली। मार्च ऐसा महीना होता है जब सीज़ बिल्कुल चलता रहता है। ना कोई परेशानी होती है और ना ही गर्मी का असर होता है। विशाल धूप, साना आकाश और कम भीड़ के कारण इस समय की यात्रा का अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। अगर आप भी इस महीने कहीं भी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां आपको प्रकृति, संस्कृति और सबसे शानदार संगम देखने को मिलेगा।

    वाराणसी: अध्यात्म और शांति का अनुभव
    वाराणसी में मार्च महीने में घूमने के लिए बेहद शानदार जगह मणि मिलती है। इस समय यहां की सुबह बेहद सुहावनी होती है और धूप के बीच घाटों का दृश्य मन मोह लेता है। यहां आप प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं और शहर की पुरानी कहानियों में डूबे हुए दार्शनिक दार्शनिक को महसूस कर सकते हैं। सुबह-सुबह गंगा नदी में नाव की सवारी और शाम को घाटों पर वाली गंगा आरती का अनुभव करने के लिए हर यात्री स्मारक पर जाता है।

    यूके: झीलों की नगरी का रोमांटिक दृश्य
    राजस्थान की गर्मी मार्च से पहले शुरू होने पर उदयपुर घूमने का सबसे सही समय माना जाता है। साफ नीले आकाश की परछाई जब पिछोला झील में खूबसूरत माला है, तो पूरे शहर में किसी भी तरह की पेंटिंग नजर आती है।

    यहां का ग्रैंड सिटी पैलेस, उदयपुर और जग मंदिर की भूमिका को प्रमुखता से तैयार किया गया है। वहीं सहेलियों-की-बारी में टहलना और झील किनारे शाम की चढ़ाई बेहद सच्चा अनुभव देती है।

    वायनाड: प्रकृति प्रेमियों की पसंद
    अगर आप हरियाली और प्रकृति के करीब घूमना चाहते हैं, तो वायनाड मार्च में घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यह इस समय बेहद खूबसूरत दिखती है। यहां आप प्राचीन एडक्कल गुफाएं देख सकते हैं और बाणासुर सागर बांध के शानदार नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा चेम्बरा पीक तक ट्रैकिंग करते हुए दिल के आकार वाली लेक तक का आनंददायक अनुभव भी देखने को मिलता है।

    उटी: फूल और चाय बागानों की सुंदरता
    दक्षिण भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी मार्च में अपनी असली सुंदरता का प्रतीक है। इस समय यहां के सजावटी रंग-बिरंगे फूलों से भरपूर रहते हैं और चारों ओर चाय के हरे-भरे बाग देखने को मिलते हैं। यहां की ऊटी झील में बोटिंग करना और प्रसिद्ध नीलगिरि माउंटेन रेलवे की टेरी ट्रेन की सवारी करना बेहद यादगार अनुभव होता है। अगर आप पेपैल से शानदार दृश्य देखना चाहते हैं, तो डोड्डाबेट्टा पीक जरूर जाएं।

    गैंगटोक: पहाड़ों में वसंत का जादू
    गंगटोक में मार्च महीने में वसंत का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और आसपास के दृश्यों में साक्षात् दृश्य दिखाई देते हैं। यहां आप खूबसूरत त्सोम्गो झील का नजारा देख सकते हैं और शांत वातावरण वाले रमटेक मठ में समय सामात्यकर मनोवैज्ञानिक पवित्र पा सकते हैं। शाम के समय एमजी मार्ग, गंगटोक पर घूमना और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना और भी खास बनाना है।

  • आईपीएल 2026: Kolkata Knight Riders की नई जर्सी का अनावरण, फैंस को पसंद आया नया डिजाइन

    आईपीएल 2026: Kolkata Knight Riders की नई जर्सी का अनावरण, फैंस को पसंद आया नया डिजाइन

    नई दिल्ली।  थ्री बार आईपीएल खिताब जीता कोलकाता नाइट राइडर्स (केआर) ने आगामी सीज़न के लिए अपनी नई जर्सी का अनावरण किया है। यह जर्सी इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के लिए मुख्य थीम “लाइन्स ऑफ लिगेसी” तैयार की गई है।

    टीम प्रबंधन के अनुसार इस जर्सी के डिजाइन में उन ऐतिहासिक महलों को शामिल किया गया है जो युवाओं में केकेआर की पहचान और विरासत को आकार देते हैं। इस थीम के माध्यम से टीम अपने शानदार इतिहास और स्मारकों को बनाने की कोशिश कर रही है।

    ऐतिहासिक स्थलों के डिज़ाइन से प्रेरित है
    न्यू जर्सी के डिजाइन में केकेआर के कई ऐतिहासिक और यादगार महलों की झलक देखने को मिलती है। आईपीएल के पहले मैच में ही ब्रेंडन मैकुलम की 158 रनों की धमाकेदार पारी से लेकर हाल के वर्षों में रिंकू सिंह के आखिरी ओवर में कॉन्स्टेंसी के पांच छक्कों तक के रोल को प्रतीकात्मक रूप से लॉन्च किया गया है।

    इन दोस्तों ने ना सिर्फ केकर के इतिहास को खास बनाया, बल्कि आईपीएल के सबसे चौंकाने वाले लॉन्च में भी अपनी जगह बनाई। टीम का कहना है कि इस बार जर्सी में इन मेमोरियल लम्हों को “सिर्फ याद नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें जर्सी के डिजाइन में गढ़ा गया है।”

    जर्सी के आश्रम से जुड़ने की कोशिश
    केकर के इस जर्सी का उद्देश्य सिर्फ एक नई यूनी फॉर्म का पेशा बनाना नहीं है, बल्कि प्लेयर्स को टीम की कहानी से और उसके अनुसार बढ़ाना है।

    फ़्रैंचाइज़ी ने कहा कि इस डिज़ाइन के माध्यम से फैन टीम की उस यात्रा को कर फ़ेमस महसूस किया गया, जिसने केकेआर को आईपीएल के सबसे लोकप्रिय मैच में से एक बनाया है।

    टीम प्रबंधन ने बनाया गौरव
    नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकी मैसूर ने न्यू जर्सी के बारे में कहा कि “डी लाइन्स ऑफ लेगेसी केकेआर के शानदार इतिहास का सार है। हर लाइन टीम के उन खास लोगों के प्रतिनिधियों ने हमारी पहचान बनाई है।”

    उन्होंने कहा कि टीम ने इस विरासत पर गर्व किया है और आगामी सीज़न में वह इसी ऊर्जा और जुनून के साथ मैदान में उतरकर नई यादगार पल बनाने की कोशिश करेगी।

    29 मार्च से केकेआर का अभियान शुरू होगा
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आईपीएल 2026 में अपने अभियान की शुरुआत 29 मार्च को होगी। टीम का पहला मुकाबला मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा।

    इसके बाद कोलकाता की टीम पहली बार 2 अप्रैल को अपने घरेलू मैदान ईडन गार्डन्स में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैदान में उतरेगी।

    नीलामी में टीम में शामिल हुए बड़े खिलाड़ी
    आईपीएल 2026 की मूवी में केकेआर ने अपनी टीम को और मजबूत बनाने के लिए कई बड़े खिलाड़ियों को शामिल किया है। टीम ने कैमरून ग्रीन, मथीशा पथिराना, रोवमैन पॉवेल और फिन एलन जैसे खिलाड़ियों को खरीदकर अपनी टीम में नई ताकत जोड़ने की कोशिश की है।

    क्रिकेट विशेषज्ञ का मानना ​​है कि नए खिलाड़ी और खास थीम वाली जर्सी के साथ केकेआर इस सीजन में अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे और चौथे आईपीएल खिताब की दौड़ में मजबूत प्रस्ताव बन सकते हैं।

  • महिला कुश्ती में नया इतिहास: Geetika Jakhar बनीं अर्जुन पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला पहलवान

    महिला कुश्ती में नया इतिहास: Geetika Jakhar बनीं अर्जुन पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला पहलवान


    नई दिल्ली। भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में गीतिका जाखड़ का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी ताकत, तकनीक और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने कुश्ती की दुनिया में अलग पहचान बनाई।

    गीतिका की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उन्होंने लगातार नौ बार ‘भारत केसरी’ का खिताब जीता और एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि भारतीय महिला कुश्ती में आज भी बेहद खास मानी जाती है।

    हिसार की धरती से शुरू हुआ सफर
    गीतिका जाखड़ का जन्म 18 अगस्त 1985 को हिसार, हरियाणा में एक खेल प्रेमी परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान खेलों की ओर था और स्कूल के दिनों में वह एथलेटिक्स में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती थीं।

    बेहतर प्रशिक्षण के लिए जब उनका परिवार शहर आया तो उनके पिता उन्हें हिसार के महाबीर स्टेडियम लेकर गए, लेकिन वहां उस समय कोई कोच उपलब्ध नहीं था। निराश होकर लौटते समय उनकी नजर पास के एक कुश्ती हॉल पर पड़ी, जहां लड़कियां अभ्यास कर रही थीं। उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया और उन्होंने अक्टूबर 1998 में एथलेटिक्स छोड़कर कुश्ती को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया।

    दादा से सीखे कुश्ती के गुर
    गीतिका को कुश्ती की प्रेरणा अपने परिवार से ही मिली। उन्होंने अपने दादा चौधरी अमरचंद जाखड़ से कुश्ती के शुरुआती गुर सीखे, जो अपने समय के प्रसिद्ध पहलवान माने जाते थे। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने कुश्ती की शुरुआत कर दी थी। जल्द ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी और उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। 1999 में भारत के राष्ट्रीय खेलों में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हुए वह चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन यह शुरुआत उनके भविष्य की बड़ी सफलताओं की झलक थी।

    15 साल की उम्र में जीता ‘भारत केसरी’
    सिर्फ 15 साल की उम्र में गीतिका ने ‘भारत केसरी’ खिताब सबको चौंका दिया। वर्ष 2000 में नई दिल्ली में आयोजित एक बड़े दंगल में उन्होंने मशहूर पहलवान सोनिका कालीरमन को हराकर यह खिताब अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार नौ दशकों तक ‘भारत केसरी’ का खिताब जीतती रहीं, जो महिला कुश्ती में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर बनाया अनोखा रिकॉर्ड
    गीतिका ने वर्ष 2001 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। वह सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर-तीनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की पहलवान बनीं। यह रिकॉर्ड आज तक कायम है और इसे भारतीय कुश्ती के इतिहास में बेहद खास उपलब्धि माना जाता है।

    चोट के बाद भी शानदार वापसी
    साल 2010 में गीतिका जाखड़ गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं, जिससे उनके करियर संकट में पड़ गया था। लेकिन वे हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के दम पर दोबारा वापसी की।

  • नंबर-3 पर संजू सैमसन को मौका देने की मांग, सुरेश रैना बोले-टीम को मिलेगा फायदा

    नंबर-3 पर संजू सैमसन को मौका देने की मांग, सुरेश रैना बोले-टीम को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली।  भारतीय टीम के पूर्व स्टार बल्लेबाज और चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज खिलाड़ी रहे सुरेश रैना ने टीम के बल्लेबाजी क्रम को लेकर अहम सुझाव दिया है। रैना का मानना ​​है कि संजू सैमसन को टीम के लिए नंबर-3 पर बल्लेबाजी करनी चाहिए, क्योंकि इस स्थान पर वह टॉप ऑर्डर और मिडिल ऑर्डर के बीच मजबूत कड़ी बन सकते हैं। रैना के अनुसार इस क्रम से टीम का बैलेंस बेहतर होगा और बल्लेबाजी इकाई ज्यादा स्थिर दिखाई देगी।

    गायकवाड़ और म्हात्रे करें ओपनिंग
    बातचीत के दौरान रैना ने कहा कि सीएसके की पारी की शुरुआत रुतुराज गायकवाड़ और आयुष म्हात्रे को करनी चाहिए। इसके बाद तीसरे नंबर पर संजू सैमसन को भेजा जाए, ताकि वह शुरुआती विकेट गिरने की स्थिति में पारी को संभाल सकें और टीम को मजबूत आधार दे सकें। रैना के अनुसार सैमसन के नंबर-3 पर आने से बल्लेबाजी क्रम इस तरह संतुलित हो सकता है कि उसके बाद डेवल्ड ब्रेविस चौथे नंबर पर और शिवम दुबे पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करें।

    धोनी को अंत के ओवरों में मिल सकता है मौका
    रैना ने आगे कहा कि इस क्रम के बाद टीम के दिग्गज खिलाड़ी एमएस धोनी बल्लेबाजी के लिए आ सकते हैं और उन्हें मुख्य रूप से अंतिम दो या तीन ओवर खेलने का मौका मिलेगा।उनकी गिनती है कि इस तरह का बल्लेबाजी क्रम टीम को आक्रामक और संतुलित दोनों बना सकता है, क्योंकि शुरुआती बल्लेबाज तेजी से रन बनाएंगे और मध्यक्रम पारी को आगे बढ़ाएगा।

    विकेटकीपर के तौर पर भी सैमसन पर भरोसा
    रैना ने सैमसन को विकेटकीपर के रूप में भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सैमसन टीम के ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक माहौल बनाने वाले खिलाड़ी हैं और कप्तानी का अनुभव होने के कारण टीम के लिए उनकी भूमिका और भी अहम हो जाती है।

    सैमसन लंबे समय तक राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रह चुके हैं और आईपीएल में उनके पास काफी अनुभव है।

    आईपीएल में शानदार रिकॉर्ड
    आईपीएल में संजू सैमसन का रिकॉर्ड भी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अब तक 177 मैचों में लगभग 31 की औसत से 4700 से ज्यादा रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 3 शतक और 26 शतक भी निकले हैं। आईपीएल 2026 की नीलामी से पहले चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें राजस्थान रॉयल्स से ट्रेड कर अपनी टीम में शामिल किया था, जिससे टीम की बल्लेबाजी और मजबूत मानी जा रही है।

    टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन
    हाल ही में हुए ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी संजू सैमसन ने शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण मुकाबलों में बेहतरीन पारियां खेलकर भारत को खिताब दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

    क्वार्टर फाइनल में वेस्टइंडीज राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ नाबाद 97 रन, सेमीफाइनल में 89 रन और फाइनल में भी 89 रन की पारी खेलकर उन्होंने टीम की जीत में अहम योगदान दिया। टूर्नामेंट में कुल 5 मैचों में 321 रन बनाने के बाद उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया।

    सीएसके फैंस की उम्मीदें बढ़ेंगी
    विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के बाद चेन्नई सुपर किंग्स के फैंस की उम्मीदें संजू सैमसन से और भी बढ़ गई हैं। क्रिकेट एथलीटों का रुझान है कि अगर वह नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हैं तो टीम को एक स्थिर और आक्रामक बल्लेबाज मिल सकता है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखता है।

  • शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में संयम जरूरी, रिटेल निवेशकों को सेबी प्रमुख की सलाह

    शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में संयम जरूरी, रिटेल निवेशकों को सेबी प्रमुख की सलाह


    नई दिल्ली। भारतीय पूंजी बाजार वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार मजबूत और व्यापक होते जा रहे हैं। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों तुहिन कांता पांडे ने रिटेल इंजीनियरों से अपील की है कि वे बाजार की स्थानीय गिरावट या तेजी से घबराकर जल्दबाजी में फैसला न लें।

    राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और बढ़ोतरी के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार और संकुचन बढ़ता है, वैसे-वैसे वैश्विक घटनाओं का प्रभाव भी अधिक देखने को मिलता है। पांडे ने मवेशियों को सलाह दी कि बाजार के छोटे समय के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय दीर्घकालिक नजरिया अपनाना अधिक फायदेमंद साबित होता है।

    धैर्य ही रिटेल इंजीनियरों की सबसे बड़ी रणनीति
    सेबी प्रमुख ने कहा कि रिटेल इंजीनियरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि इतिहास गवाह है कि बड़े वैश्विक संकटों के बाद भी शेयर बाजारों ने समय के साथ वापसी की है और भारतीयों को अच्छा रिटर्न दिया है।

    उनका कहना था कि बाजार में अस्थिरता के दौर अक्सर अस्थायी होते हैं और लंबे समय में मजबूत आर्थिक आधार वाले देशों के बाजार फिर से स्थिर हो जाते हैं। इसलिए भारतीयों को घबराकर अपने निवेश से बाहर निकलने के बजाय समझदारी और संयम के साथ फैसला लेना चाहिए।

    भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट का असर
    पांडे ने स्वीकार किया कि मौजूदा समय में वैश्विक बाजार कई तरह की जबड़े का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट जैसे कारक वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं को बढ़ा रहे हैं।

    विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज के वित्तीय बाजारों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि उनमें अस्थिरता पहले की तुलना में अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सूचना और खबरें बेहद तेजी से फैलती हैं।

    तकनीक से तेजी से बदल रहा बाजार
    सेबी प्रमुख के अनुसार आधुनिक वित्तीय बाजार तकनीक के कारण पहले से कहीं ज्यादा तेज और जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि संस्थागत ट्रेडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के कारण बाजार की गतिविधियां बहुत तेजी से होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं और बेटियों की राय उससे भी तेज बनती है। यही कारण है कि कई बार बाजार वास्तविक आर्थिक आयामों के बजाय खबरों या धारणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं।

    स्थिरता बनाए रखना नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी
    सेबी प्रमुख ने कहा कि बाजार की तेजी के साथ उनकी स्थिरता बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं और नीति निर्माताओं का दायित्व है कि वे बेटियों के हितों की रक्षा करते हुए बाजार में भरोसा और भरोसा बनाए रखें। उन्होंने बताया कि भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए मजबूत बॉन्ड बाजार, बेटियों की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी नवाचार बहुत अहम होंगे।

    बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम
    निवेशकों की सुरक्षा को लेकर सेबी कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसमें सोशल मीडिया पर फैलाने वाली बातचीत या फर्जी निवेश सलाह की निगरानी को मजबूत करना भी शामिल है। इसके अलावा नियामक संस्था अपनी निगरानी तंत्र को भी लगातार उन्नत कर रही है, ताकि बाजार में संभावित हेरफेर, अंदरूनी ट्रेडिंग या गलत जानकारी के प्रसार को समय पर रोका जा सके।

    विशेष रूप से सेबी अपनी उन्नत निगरानी प्रणाली PARRVA निगरानी प्रणाली को मजबूत कर रहा है, जिससे बाजार में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों का जल्दी पता लगाया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे पैदल चलने वालों से इंजीनियरों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय पूंजी बाजार भविष्य में और अधिक मजबूत बन सकेगा।

  • दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती

    दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

    International Monetary Fund के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।

    जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं और वैश्विक चुनौतियों के कारण अपने विकास अनुमान घटा रही हैं, तब भारत की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार पूरे वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, भले ही वैश्विक व्यापार में चुनौतियां बनी रहें।

    वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का सबसे बड़ा योगदान
    आईएमएफ का अनुमान है कि वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान लगभग 17 प्रतिशत हो सकता है। यह आंकड़ा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखता है।

    रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक वृद्धि में योगदान के मामले में अमेरिका दूसरे स्थान पर रह सकता है, जहां से लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा अन्य देशों में

    Indonesia से 3.8 प्रतिशत

    Turkey से 2.2 प्रतिशत

    Saudi Arabia से 1.7 प्रतिशत

    Vietnam से 1.6 प्रतिशत योगदान का अनुमान लगाया गया है।

    वहीं Nigeria और Brazil से करीब 1.5 प्रतिशत योगदान की संभावना जताई गई है।

    तुलनात्मक रूप से देखें तो China की विकास दर लगभग 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारत की तुलना में कम है।

    घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मिल रही मजबूती
    भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का असर देश के पूंजी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है।

    घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग ने वर्ष 2025 में अपने एसेट बेस में लगभग 14 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की। इसके साथ कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब 81 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय निवेशक अब लंबे समय के लिए पूंजी बाजार में निवेश करने के प्रति अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।

    एसआईपी निवेश में रिकॉर्ड वृद्धि
    साल 2025 में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी Systematic Investment Plan के जरिए निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान एसआईपी के माध्यम से कुल 3.34 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। तुलना करें तो 2024 में यह आंकड़ा 2.68 लाख करोड़ रुपये था जबकि 2023 में यह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तेजी से बढ़ते निवेश से साफ है कि छोटे और मध्यम निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगातार बढ़ रहा है।

    विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हो रही
    पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी हद तक विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की संरचना धीरे-धीरे बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है और लंबे समय में यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

    निवेश के क्षेत्र में अभी भी बड़ी संभावनाएं
    हालांकि भारत में निवेश की संभावनाएं अभी भी काफी व्यापक हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी केवल 15 से 20 प्रतिशत परिवार ही शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसके मुकाबले United States में लगभग 50 से 60 प्रतिशत परिवार पूंजी बाजार से जुड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में भारत में घरेलू निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार दोनों को मजबूती मिलेगी।

  • आईपीओ को बढ़ावा: सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव

    आईपीओ को बढ़ावा: सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। देश में बड़ी कंपनियों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार का मानना है कि इससे बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ लाना आसान होगा और पूंजी बाजार में निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    नए नियमों के तहत कंपनियां अब आईपीओ के समय पहले की तुलना में कम हिस्सेदारी जनता को ऑफर कर सकेंगी। इसके बाद तय समय सीमा के भीतर धीरे-धीरे अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करनी होगी। यह व्यवस्था खास तौर पर बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिन्हें पहले आईपीओ के समय बड़ी हिस्सेदारी बेचने की अनिवार्यता के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। यह संशोधन Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत जारी Securities Contracts (Regulation) Amendment Rules, 2026 के माध्यम से किया गया है, जिसे Ministry of Finance ने अधिसूचित किया है।

    कंपनियों के आकार के अनुसार तय होगा पब्लिक ऑफर
    सरकार ने नई व्यवस्था में कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी के आधार पर न्यूनतम पब्लिक ऑफर तय किया है। जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये के बीच होगी, उन्हें कम से कम 400 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे।

    4,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 10 प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे और तीन साल के भीतर इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना होगा। सरकार ने कहा है कि इस हिस्सेदारी को बढ़ाने की समयसीमा और प्रक्रिया बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India द्वारा तय की जाएगी।

    बड़ी कंपनियों के लिए अलग व्यवस्था
    नई नीति में अत्यधिक बड़ी कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान बनाए गए हैं। 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और प्रत्येक श्रेणी के शेयरों में कम से कम 8 प्रतिशत पब्लिक हिस्सेदारी होनी चाहिए।

    1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 6,250 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और लिस्टिंग के समय कम से कम 2.75 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना होगा।

    वहीं 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 15,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और कम से कम 1 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग रखना अनिवार्य होगा।

    छोटी कंपनियों के लिए पुराना नियम ही लागू
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ रुपये तक है, उनके लिए पहले से लागू नियम ही जारी रहेंगे। ऐसे मामलों में कंपनियों को आईपीओ के समय कम से कम 25 प्रतिशत शेयर जनता को देना अनिवार्य रहेगा।

    न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के लिए नई शर्त
    नई व्यवस्था के तहत कंपनी के आकार की परवाह किए बिना किसी भी कंपनी को कम से कम 2.5 प्रतिशत इक्विटी या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जनता को ऑफर करना अनिवार्य होगा।

    इसके अलावा यदि किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से कम होती है, तो उसे पांच वर्षों के भीतर इसे 15 प्रतिशत और दस वर्षों के भीतर 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा।

    पूंजी बाजार को मिलेगा बढ़ावा
    विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से भारत के पूंजी बाजार में बड़ी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। कई बड़ी कंपनियां, जो पहले बड़ी हिस्सेदारी बेचने की शर्त के कारण आईपीओ लाने से हिचकिचाती थीं, अब आसानी से बाजार में लिस्ट हो सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की गहराई और मजबूती भी बढ़ेगी।

  • ईरान देगा भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग, नए सुप्रीम लीडर की गंभीर चोटों की खबरें

    ईरान देगा भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग, नए सुप्रीम लीडर की गंभीर चोटों की खबरें


    नई दिल्ली। ईरान ने दो भारतीय गैस टैंकरों को होरमुज़ जलसंधि से सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने का दावा किया गया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह कदम भारत में घरेलू गैस आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद करेगा। सूत्रों ने बताया कि ये टैंकर जल्द ही भारत की ओर रवाना होंगे।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक कच्चे तेल का टैंकर पहले ही 1 मार्च के आसपास होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और सऊदी अरब का तेल लेकर शनिवार तक भारत पहुंच सकता है। इससे भारतीय ऊर्जा बाजार में आपूर्ति सुचारु रहने की उम्मीद है।

    इससे पहले गुरुवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा था कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते और आपसी भरोसा रहा है इसलिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट में भारत के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा।

    वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रिपोर्टें आई हैं। ब्रिटिश मीडिया सूरज की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सीना विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके एक पैर को काटना पड़ा और लिवर को गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल का एक हिस्सा पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है।

    मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को मृत्यु के बाद 9 मार्च को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। उनके घायल होने की खबरों ने ईरान की राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के सुप्रीम लीडर की स्थिति गंभीर बनी रहती है तो फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं भारतीय टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलने से घरेलू गैस आपूर्ति में अस्थायी राहत मिल सकती है।

  • बगदाद में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला, स्थिति पर अभी अस्पष्टता

    बगदाद में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला, स्थिति पर अभी अस्पष्टता


    बगदाद । इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास के आसपास ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। मीडिया में जारी एक वीडियो में दूतावास परिसर के पास किसी इमारत से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दे रही हैं। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमला सीधे अमेरिकी दूतावास परिसर पर हुआ है या किसी अन्य नजदीकी इमारत पर। घटना के कारणों और संभावित हताहतों की जानकारी अभी मीडिया और अधिकारियों को नहीं मिल पाई है।इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए अमेरिकी विदेश विभाग से संपर्क किया गया है। अधिकारियों ने अभी तक इस घटना की पुष्टि या विस्तृत विवरण साझा नहीं किया है।

    इराक और अमेरिका के बीच सुरक्षा और तनाव का यह नया मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य और कूटनीतिक घटनाओं को लेकर वैश्विक बाजार और राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और क्षेत्रीय सुरक्षा बल तथा अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां हमले के स्रोत और संभावित प्रभाव का अध्ययन कर रही हैं।