Author: bharati

  • स्मृति मंधाना शीर्ष पर बरकरार, हरमनप्रीत कौर और अन्य स्टार खिलाड़ियों ने रैंकिंग में लगाई छलांग

    स्मृति मंधाना शीर्ष पर बरकरार, हरमनप्रीत कौर और अन्य स्टार खिलाड़ियों ने रैंकिंग में लगाई छलांग


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना एक बार फिर आईसीसी महिलाओं की वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर बरकरार हैं। मंगलवार, 10 मार्च को जारी रैंकिंग में मंधाना ने अपनी स्थिरता और बेहतरीन फॉर्म का परिचय देते हुए टॉप पायदान बनाए रखा। उनके अलावा भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर भी रैंकिंग में शीर्ष 10 में शामिल हैं और वर्तमान में वे 8वें स्थान पर हैं।

    हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल ही में तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारत की 0-3 से हार के बावजूद टीम के अन्य खिलाड़ियों ने रैंकिंग में अच्छे अंक जुटाए। जेमिमा रोड्रिग्स 12वें स्थान पर खिसक गई हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन भविष्य में उन्हें फिर से शीर्ष पायदान दिला सकता है।

    न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने भी मचाया धमाल
    न्यूजीलैंड की टीम शानदार फॉर्म में है। नई कप्तान मेलानी केर ने सीरीज के पहले मैच में चार विकेट और दूसरे मैच में सात विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। केर अब एकदिवसीय गेंदबाजों की सूची में पांच पायदान ऊपर बढ़कर 11वें स्थान पर हैं और ऑलराउंडर रैंकिंग में पांचवें नंबर पर बनी हुई हैं।

    टीम की अन्य स्टार खिलाड़ियों में ब्रुक हैलीडे ने आठ पायदान ऊपर उठकर 11वें स्थान पर कब्जा किया, वहीं मैडी ग्रीन चार पायदान ऊपर आकर 22वें स्थान पर पहुंचीं। हैलीडे ने पहले मैच में 117 गेंदों में नाबाद 157 रन बनाए, जबकि ग्रीन ने लगातार दो मैचों में 94 रन का योगदान दिया।

    वेस्टइंडीज और श्रीलंका की झलक
    वेस्टइंडीज की बल्लेबाज हसिनी परेरा ने श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया और तीसरे मैच में नाबाद अर्धशतक लगाकर टीम को जीत दिलाई। इससे हसिनी रैंकिंग में 15 स्थान ऊपर उठकर 28वें पायदान पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा इमेशा दुलानी को 17 स्थान का फायदा हुआ और वे 72वें नंबर पर आ गई हैं। उनकी हमवतन कविशा दिलहारी ने गेंदबाजी रैंकिंग में तीन स्थान ऊपर जाकर 21वें और ऑलराउंडर रैंकिंग में 11वें स्थान पर अपनी स्थिति मजबूत की।

    गेंदबाजी में भी वेस्टइंडीज की एफी फ्लेचर ने आखिरी दो मैचों में तीन विकेट लेकर चार स्थान ऊपर चढ़कर सातवें पायदान पर जगह बनाई।

    इस रैंकिंग से साफ है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम में स्टार खिलाड़ियों की निरंतरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन टीम की मजबूती को दर्शाता है। स्मृति मंधाना का शीर्ष स्थान बरकरार रहना और हरमनप्रीत कौर की टॉप 10 में मौजूदगी टीम के भविष्य के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।

  • जब टीवी पर सुनी श्रेया घोषाल की आवाज, संजय लीला भंसाली ने दिया पहला बड़ा मौका

    जब टीवी पर सुनी श्रेया घोषाल की आवाज, संजय लीला भंसाली ने दिया पहला बड़ा मौका


    नई दिल्ली। अक्सर आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को यह भी स्पष्ट नहीं होता कि वे आगे किस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, लेकिन उसी उम्र में एक लड़की बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने का सपना देख रही थी। वह नहीं जानती थी कि एक दिन उसकी आवाज हिंदी सिनेमा की पहचान बन जाएगी। हम बात कर रहे हैं मशहूर गायिका Shreya Ghoshal की, जो 12 मार्च को अपना 41वां जन्मदिन मना रही हैं। कोटा के एक छोटे से गांव से निकलकर संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली श्रेया आज भारतीय फिल्म संगीत की सबसे लोकप्रिय आवाजों में से एक मानी जाती हैं।

    मां से मिली संगीत की पहली सीख
    कहा जाता है कि मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है और श्रेया घोषाल के जीवन में भी यह बात पूरी तरह सच साबित हुई। उनकी मां स्वयं बहुत अच्छा गाती थीं और उन्होंने ही छोटी उम्र में श्रेया की प्रतिभा को पहचान लिया था। महज छह साल की उम्र में ही उन्होंने श्रेया को संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू कर दी। स्कूल के वार्षिक समारोहों में जब भी श्रेया मंच पर गातीं, उनकी आवाज सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते। आगे चलकर उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार Kalyanji और गुरु Mukta Bhide से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिसने उनकी गायकी को मजबूत आधार दिया।

    पढ़ाई में साइंस, दिल में संगीत
    बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रेया घोषाल पढ़ाई में साइंस की छात्रा रही हैं। उन्होंने 12वीं तक साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनके जुनून ने उन्हें आगे चलकर आर्ट्स की पढ़ाई और संगीत प्रशिक्षण की ओर मोड़ दिया। हालांकि तब तक उनकी आवाज लाखों लोगों तक पहुंचने लगी थी और उनका करियर एक नए मोड़ की ओर बढ़ रहा था।

    टीवी शो से मिला बड़ा मौका
    श्रेया घोषाल के करियर का सबसे अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने लोकप्रिय म्यूजिक रियलिटी शो Sa Re Ga Ma Pa में हिस्सा लिया। इस शो में उनकी गायकी ने जजों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया और वे फाइनल तक पहुंचीं। इसी दौरान एक दिन निर्देशक Sanjay Leela Bhansali अपनी मां के साथ टीवी पर यह शो देख रहे थे। उस समय वे फिल्म Hum Dil De Chuke Sanam बना रहे थे और उनके मन में भविष्य में Devdas बनाने का विचार भी चल रहा था। श्रेया की आवाज सुनते ही वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तय कर लिया कि आने वाली फिल्म में पारो के किरदार के लिए यही आवाज उपयुक्त रहेगी।

    ‘बैरी पिया’ से बदल गई किस्मत
    भंसाली ने शो के जरिए ही श्रेया से संपर्क किया और उन्हें फिल्म देवदास का गाना Bairi Piya गाने का मौका दिया। उस समय श्रेया की उम्र सिर्फ साढ़े पंद्रह साल थी। शास्त्रीय संगीत की मजबूत पृष्ठभूमि होने के कारण यह गाना उनके लिए बहुत कठिन नहीं था। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दिन उन्होंने पहली ही कोशिश में गाना इतनी खूबसूरती से गाया कि सभी लोग हैरान रह गए। भंसाली उनकी गायकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें गले लगा लिया।

    पहले ही गाने से मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
    श्रेया घोषाल के करियर की शुरुआत ही ऐतिहासिक रही। देवदास के इस गाने ने उन्हें रातोंरात पहचान दिला दी और उन्हें अपने पहले ही फिल्मी गीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छूती चली गईं।

    20 से अधिक भाषाओं में गाए गीत
    आज श्रेया घोषाल हिंदी ही नहीं बल्कि 20 से अधिक भाषाओं में गाने गा चुकी हैं। उनकी मधुर आवाज ने भारतीय संगीत जगत को कई यादगार गीत दिए हैं। उन्होंने Sun Raha Hai Na Tu, Tujh Mein Rab Dikhta Hai, Jadu Hai Nasha Hai और Manwa Laage जैसे कई सुपरहिट रोमांटिक गीत गाए हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका नाम सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली महिला गायिकाओं में भी दर्ज किया जाता है।

    संगीत की दुनिया की अमिट आवाज
    टीवी के एक मंच से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय संगीत जगत की सबसे चमकदार कहानी बन चुका है। श्रेया घोषाल की आवाज ने न सिर्फ फिल्मों को नई पहचान दी बल्कि लाखों श्रोताओं के दिलों में भी खास जगह बनाई है। उनकी गायकी आज भी उतनी ही ताजगी और भावनाओं से भरी हुई है, जितनी उनके करियर की शुरुआत में थी।

  • ग्वालियर में HPV वैक्सीन लगने के बाद 5 किशोरियों की तबीयत बिगड़ी, सिविल अस्पताल में भर्ती; परिजन बोले बिना जानकारी वैक्सीन लगाई गई

    ग्वालियर में HPV वैक्सीन लगने के बाद 5 किशोरियों की तबीयत बिगड़ी, सिविल अस्पताल में भर्ती; परिजन बोले बिना जानकारी वैक्सीन लगाई गई

    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र में सर्वाइकल कैंसर बचाव अभियान के तहत HPV वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस वैक्सीन लगवाने के बाद पांच किशोरियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रभावित बच्चियां पिछोर के बारकरी जिगनिया गांव की रहने वाली बताई जा रही हैं। उनका नाम क्रमशः अनजली, पूनम, रजनी, भारती और रेखा है।

    मिली जानकारी के अनुसार सभी बच्चियां 14 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी थीं और राज्य सरकार के मुफ्त वैक्सीनेशन अभियान के तहत टीका लगवाया गया था। वैक्सीन लगने के कुछ ही समय बाद सभी बच्चियों को चक्कर, उल्टी और कमजोरी जैसी शिकायतें हुईं। तुरंत उन्हें डबरा के सिविल अस्पताल डबरा में भर्ती कराया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने उनकी जांच की और इलाज के बाद स्थिति में सुधार हुआ।

    परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने उनकी सहमति और जानकारी के बिना ही वैक्सीन लगा दी। उनका कहना है कि यदि उन्हें पहले जानकारी दी जाती तो वह टीका लगवाने से पहले तैयार हो सकते थे। परिवार का यह भी कहना है कि वैक्सीन के बाद उनकी बच्चियों की अचानक तबीयत बिगड़ना चिंता का विषय है और इस पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

    मध्य प्रदेश सरकार ने फरवरी मार्च 2026 में 14 15 वर्ष की लगभग 8 लाख किशोरियों को मुफ्त HPV वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया है। यह वैक्सीन बाजार में लगभग 4000 रुपये प्रति डोज की कीमत वाली है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर से बचाव करना है, जो महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है और HPV वायरस के संक्रमण से होता है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैक्सीन सुरक्षित है और सभी जरूरी मानक का पालन करते हुए लगाई जाती है। वहीं इस घटना की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या वैक्सीन के बाद होने वाली समस्याएं वैक्सीन से संबंधित थीं या किसी अन्य कारण से हुईं। विभाग ने आश्वस्त किया है कि सभी प्रभावित बच्चियों का उचित इलाज किया जा रहा है और उन्हें पूर्ण स्वास्थ्य लाभ दिलाया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार HPV वैक्सीन से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम संभव है और यह किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। परिजनों और स्वास्थ्य अधिकारियों को बेहतर सूचना और जागरूकता के माध्यम से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

  • एलपीजी संकट के बीच चमके इंडक्शन चूल्हा कंपनियों के शेयर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    एलपीजी संकट के बीच चमके इंडक्शन चूल्हा कंपनियों के शेयर, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच भारत में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और रिटेल बाजारों में इन उपकरणों की खरीदारी बढ़ने लगी है। इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग और बढ़ सकती है।

    घरेलू उपकरण कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी
    इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बढ़ती मांग का सीधा फायदा होम अप्लायंसेज कंपनियों को मिला है। किचन अप्लायंसेज बनाने वाली कंपनी Butterfly Gandhimathi Appliances के शेयर में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। दोपहर करीब 12:45 बजे कंपनी का शेयर करीब 7.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 651 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान इसने 660 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग बढ़ने से कंपनी के कारोबार को फायदा मिल सकता है।

    टीटीके प्रेस्टीज और स्टोव क्राफ्ट के शेयर भी चढ़े
    इसी तरह किचन उपकरण क्षेत्र की एक और प्रमुख कंपनी TTK Prestige के शेयर में भी तेज उछाल देखा गया। कंपनी का शेयर करीब 9.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 530 रुपये के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 556 रुपये तक भी गया। वहीं Stove Kraft, जो ‘पिजन’ ब्रांड के नाम से उत्पाद बेचती है, के शेयर में भी करीब 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। कंपनी का शेयर लगभग 510 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया और दिन के दौरान इसने 525 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि एलपीजी की संभावित कमी से इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की बिक्री में तेजी आ सकती है।

    विशेषज्ञों ने इंडक्शन स्टोव को बताया बेहतर विकल्प
    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी आपूर्ति में संभावित दबाव को देखते हुए शहरी परिवारों को इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव जैसे विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े शोध संस्थान Council on Energy, Environment and Water (सीईईडब्ल्यू) के फेलो Abhishek Kar ने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है। इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति पश्चिम एशियाई देशों से आती है, जिनमें United Arab Emirates, Qatar और Saudi Arabia प्रमुख हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है।

    ‘गिव इट अप’ अभियान जैसे नए प्रयास का सुझाव
    अभिषेक कर ने सुझाव दिया कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे प्रावधानों का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही एलपीजी सब्सिडी के लिए चलाए गए ‘गिव इट अप’ अभियान की तर्ज पर एक नया अभियान शुरू किया जा सकता है। इस अभियान का उद्देश्य उन परिवारों को एलपीजी का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित करना हो सकता है, जिनके पास पहले से इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव हैं या जो इसे आसानी से खरीद सकते हैं। इससे घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सकता है।

    रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाह
    एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच होटल और रेस्तरां उद्योग को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। National Restaurant Association of India (एनआरएआई) ने अपने सदस्यों से गैस की खपत कम करने के उपाय अपनाने का आग्रह किया है। संगठन ने सुझाव दिया है कि रेस्तरां ऐसे मेनू पर अधिक ध्यान दें जिनमें कम गैस की खपत होती हो या जिनका खाना जल्दी तैयार हो सके।

    इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्प अपनाने पर जोर
    एनआरएआई ने अपने सदस्यों को जारी सलाह में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आ सकती हैं। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो रेस्तरां उद्योग को संचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जहां संभव हो, वहां खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों के विकल्प अपनाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    उद्योग की स्थिरता के लिए जरूरी कदम
    संगठन ने कहा कि व्यापार की निरंतरता, रोजगार और पूरे खाद्य सेवा क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखने के लिए ईंधन संरक्षण के उपाय अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता और वैकल्पिक कुकिंग तकनीकों को बढ़ावा देना भविष्य में इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकता है।

  • इंदौर के विजयनगर में पुलिस की हाईटेक निगरानी: 40 से ज्यादा CCTV कैमरे लगे, जल्द 150 कैमरों से होगी पूरे क्षेत्र की मॉनिटरिंग

    इंदौर के विजयनगर में पुलिस की हाईटेक निगरानी: 40 से ज्यादा CCTV कैमरे लगे, जल्द 150 कैमरों से होगी पूरे क्षेत्र की मॉनिटरिंग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अपराध पर लगाम लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस लगातार नई तकनीकों का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में शहर के व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाने वाले विजयनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने हाईटेक निगरानी व्यवस्था शुरू की है। क्षेत्र में फिलहाल 40 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनके माध्यम से पूरे इलाके की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में इन कैमरों की संख्या बढ़ाकर 150 से अधिक करने की योजना भी तैयार की गई है।

    जानकारी के मुताबिक इन सभी कैमरों का कंट्रोल सीधेमध्य प्रदेश पुलिस के विजय नगर पुलिस स्टेशन से किया जा रहा है। खास बात यह है कि थाना प्रभारी के कक्ष में ही एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां से पुलिसकर्मी लगातार कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस व्यवस्था के जरिए पुलिस संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रख सकती है और किसी भी घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई कर सकती है।

    विजयनगर थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस इस्तेमाल से अपराधियों पर नजर रखना आसान हो गया है। उनके अनुसार सीसीटीवी कैमरे अपराध रोकने और वारदात के बाद आरोपियों की पहचान करने में बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। कैमरों के माध्यम से न केवल क्षेत्र की निगरानी की जा रही है बल्कि कई मामलों में अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है।

    पुलिस अब इस निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। अगले चरण में क्षेत्र के घरों अस्पतालों मॉल दुकानों और अन्य निजी संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी पुलिस के कंट्रोल रूम से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह योजना सफल होती है तो पूरे विजयनगर क्षेत्र की निगरानी एक ही जगह से संभव हो सकेगी। इससे पुलिस को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

    थाना प्रभारी के मुताबिक कैमरे लगने के बाद क्षेत्र में चोरी और अन्य अपराधों की घटनाओं में कमी देखने को मिली है। कई मामलों में कैमरों में कैद फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे कैमरों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे अपराधियों के लिए क्षेत्र में वारदात करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

    फिलहाल पुलिस का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द विजयनगर थाना क्षेत्र में 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि पूरे इलाके के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सके। पुलिस का कहना है कि इस हाईटेक निगरानी व्यवस्था से न केवल अपराध पर नियंत्रण मिलेगा बल्कि आम लोगों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

  • मुरैना बालिका सुधार गृह से दो नाबालिग सहित तीन फरार: वार्डन पर हमला कर छीनी चाबी, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

    मुरैना बालिका सुधार गृह से दो नाबालिग सहित तीन फरार: वार्डन पर हमला कर छीनी चाबी, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

    मुरैना । मध्य प्रदेश के Morena जिले में स्थित बालिका सुधार गृह से फरार होने की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। Badokhar स्थित बालिका सुधार गृह से एक बालिग महिला और दो नाबालिग बालिकाएं वार्डन पर हमला कर चाबी छीनकर फरार हो गईं। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और पुलिस तीनों की तलाश में जुट गई है।

    मिली जानकारी के अनुसार घटना मंगलवार रात की बताई जा रही है। उस समय सुधार गृह में तैनात महिला वार्डन सो रही थी। इसी दौरान वहां रह रही एक बालिग महिला और दो नाबालिग बालिकाओं ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि एक बालिका ने वार्डन की गर्दन दबा दी जबकि दूसरी ने उसके हाथ पर चोट पहुंचाई। दोनों ने मिलकर वार्डन के साथ मारपीट की और उसके पास मौजूद मुख्य गेट की चाबी छीन ली। इसके बाद तीनों ने गेट का ताला खोला और मौके से फरार हो गईं।

    वार्डन ने खुद को छुड़ाने के बाद शोर मचाया लेकिन तब तक तीनों परिसर से निकल चुकी थीं। घटना की जानकारी मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। वार्डन की शिकायत के आधार पर स्टेशन रोड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है।

    पुलिस ने फरार बालिकाओं और महिला की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में सर्च अभियान शुरू कर दिया है। साथ ही आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तीनों किस दिशा में भागीं और किस रास्ते से बाहर निकलीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तीनों को पकड़ लिया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक फरार हुई दो नाबालिग बालिकाएं महज एक दिन पहले ही सुधार गृह में लाई गई थीं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने कम समय में उन्होंने भागने की योजना कैसे बना ली। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बाहरी मदद या पहले से बनाई गई साजिश तो नहीं थी।

    घटना के बाद सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी मुरैना के सुधार गृहों से फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिससे सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस सुधार गृह में मौजूद अन्य बालिकाओं से भी पूछताछ कर रही है ताकि फरार हुई तीनों के बारे में कोई सुराग मिल सके।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही फरार महिला और दोनों नाबालिगों को पकड़कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सुरक्षा में चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

  • ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित

    ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। देश में कुकिंग गैस की संभावित कमी को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के बीच सरकार ने वैकल्पिक आयात मार्गों और नए स्रोतों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों और वैकल्पिक समुद्री मार्गों से प्राप्त की गई एलपीजी और एलएनजी की खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की यह रणनीति घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है।

    घरेलू रिफाइनरियों ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादन
    सरकार द्वारा तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसका उद्देश्य संभावित आयात बाधाओं के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण बनाए रखने में सहूलियत होती है।

    जामनगर रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाने पर जोर
    देश की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी Reliance Industries Limited ने भी इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। कंपनी का Jamnagar Refinery परिसर कुकिंग गैस एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय घरों के लिए जरूरी ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालन को लगातार अनुकूलित किया जा रहा है और टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

    केजी-डी6 गैस से भी मिलेगी मदद
    कंपनी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप KG‑D6 Basin से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और शहरों में पाइप्ड गैस और सीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस उत्पादन का बेहतर उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार ने नागरिकों को किया आश्वस्त
    इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश विभिन्न देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रहा है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    सीएनजी और पीएनजी आपूर्ति भी सामान्य
    सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। अधिकारियों के अनुसार शहरों में गैस वितरण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का प्रबंधन किया जा रहा है।

    उद्योगों को भी मिल रही पर्याप्त गैस
    भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को भी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। सरकार के अनुसार उद्योगों को उनकी कुल गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों पर अधिक असर नहीं पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश भर में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार देश के हर घर तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से वैश्विक संकट के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है।

  • नेतन्याहू का ईरान की जनता से सीधा संदेश, कहा—अयातुल्ला शासन हटाने का मौका न गंवाएं

    नेतन्याहू का ईरान की जनता से सीधा संदेश, कहा—अयातुल्ला शासन हटाने का मौका न गंवाएं

    तेल अवीव। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Benjamin Netanyahu ने ईरान की जनता को सीधा संदेश देते हुए उन्हें अपने देश में बदलाव के लिए तैयार रहने की अपील की है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात एक ऐतिहासिक मौका बन सकते हैं, जब ईरान के लोग अयातुल्ला शासन के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।

    नेतन्याहू ने कहा कि यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि आजादी और बदलाव की लड़ाई है। उनके मुताबिक यह अवसर बार-बार नहीं आता और ईरान की जनता को इसे पहचानकर अपने भविष्य के लिए निर्णायक कदम उठाना चाहिए।

    ईरान की जनता से क्या बोले नेतन्याहू

    नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि ईरान के लोग लंबे समय से आजादी चाहते हैं और मौजूदा हालात उन्हें बदलाव का मौका दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब सही समय आएगा तो बदलाव की मशाल ईरान की जनता के हाथ में होगी, इसलिए लोगों को उस पल के लिए तैयार रहना चाहिए।

    ईरान में सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व का प्रतीक अयातुल्ला प्रणाली है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में Ali Khamenei के हाथ में है।

    अमेरिका-इजरायल की रणनीति

    नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका मिलकर तेहरान की सत्ता पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिका और इजरायल की रणनीति का उद्देश्य ईरान के शासकों को कमजोर करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना है।

    उनके अनुसार सैन्य और रणनीतिक दबाव के जरिए ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, जिनसे ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव की संभावना बढ़ सकती है।

    ईरान की आंतरिक राजनीति पर असर

    विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान ईरान की घरेलू राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। ईरान लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व वाले शासन के तहत चल रहा है और बाहरी दबाव या युद्ध जैसी स्थितियां देश के भीतर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती हैं।

    हालांकि तेहरान की सरकार ऐसे बयानों को अक्सर विदेशी हस्तक्षेप बताकर खारिज करती रही है।

    क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका

    पश्चिम एशिया में पहले से ही हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद Iran कई जगह जवाबी कार्रवाई कर चुका है।

    ऐसे में नेतन्याहू का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति को और संवेदनशील बना सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे संघर्ष पर बनी हुई है, क्योंकि इसका असर पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।

  • बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

    बुलियन मार्केट में नरमी, गोल्ड-सिल्वर के दाम घटे; ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार में मुनाफावसूली के कारण दोनों कीमती धातुओं के दाम कमजोर पड़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा के चलते निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति दिशा ही इन धातुओं की आगे की चाल तय करेंगे।

    एमसीएक्स पर सोना-चांदी के दाम फिसले
    घरेलू वायदा बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर सुबह करीब 10:30 बजे सोने के 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,62,795 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का भाव 0.78 प्रतिशत गिरकर 2,75,690 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में सोने और चांदी में आई तेजी के बाद निवेशकों ने कुछ मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखा गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम दबाव में रहे। अमेरिकी वायदा बाजार COMEX पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,212.64 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी करीब 1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 88.493 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वैश्विक निवेशकों का ध्यान फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका हुआ है, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

    युद्ध के संकेतों से बाजार में अनिश्चितता
    कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का एक बड़ा कारण मध्य-पूर्व में जारी तनाव भी है। हाल के दिनों में Donald Trump के बयान और युद्ध से जुड़े मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। पहले संकेत मिले थे कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन ताजा घटनाक्रमों से तत्काल तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है और युद्ध लगातार बारहवें दिन तक जारी रहने की खबरों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
    स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब ईरान ने दावा किया कि उसने जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के लिए Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से ईरान पर हमले रोकने का आग्रह किया है। इन घटनाओं के कारण ऊर्जा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं पर पड़ता है।

    अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर
    विशेषज्ञों के अनुसार अब कमोडिटी बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई है। निवेशक विशेष रूप से अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति यानी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई ज्यादा रहती है तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।

    जीडीपी और मुद्रास्फीति से तय होगी आगे की दिशा
    विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी जीडीपी और मुद्रास्फीति के आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की नीतिगत दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी। ऐसे में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और नए आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत
    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत आर्थिक आंकड़े आने पर कीमती धातुओं पर दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?

    ऑयल संकट: पहाड़ की गुफाओं से बना टैंकर, बुरे से बुरे वक्त के लिए है तैयारी, जानें भारत ने कहां छिपाया तेल भंडार?


    नई दिल्‍ली। मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं.
    देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
    दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है.
    1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.
    दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.
    तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो.
    अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.
    इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके