Author: bharati

  • टीम इंडिया पर शर्म आती है…,1983 WC टीम का हिस्सा रहे पूर्व क्रिकेटर ने कप्तान सूर्या और ICC अध्यक्ष पर उठाए सवाल

    टीम इंडिया पर शर्म आती है…,1983 WC टीम का हिस्सा रहे पूर्व क्रिकेटर ने कप्तान सूर्या और ICC अध्यक्ष पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। भारत को टी-20 विश्व कप की ट्रॉफी जीते पूरे-पूरे 24 घंटे भी नहीं बीते हैं और इस पर अब विवाद शुरू हो गया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली टीम ने यह कारनामा कर कई इतिहास भी रचे। सभी खिलाड़ी जीत के जश्न में मशगूल रहे। इसी सिलसिले में मैच की अगली सुबह भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव आईसीसी अध्यक्ष जय शाह और मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना करने गए। कप्तान सूर्यकुमार यादव मंदिर ट्रॉफी के साथ गए और पूजा की।

    भारतीय कप्तान, कोच और आईसीसी अध्यक्ष का इस तरह ट्रॉफी के साथ मंदिर जाना और हनुमान जी की पूजा अर्चना करना पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीमएमसी के लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद को रास नहीं आया है। 1983 विश्व कप विनिंग टीम का हिस्सा रहे कीर्ति आजाद ने कप्तान सूर्यकुमार यादव और आईसीसी अध्यक्ष जय शाह पर सवाल उठाए हैं और इसे भारतीयता के विरुद्ध बताया है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए लिखा, “टीम इंडिया पर शर्म आती है। जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे। आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?” उन्होंने संजू के शानदार प्रदर्शन का सहारा लेते हुए कहा कि संजू सैसमन या सिराज ट्रॉफी लेकर मस्जिद या चर्च क्यों नहीं जा सके। यह ट्रॉफी सिर्फ मंदिर के दरवाजों पर क्यों घसीटी जा रही है।

    उन्होंने लिखा “यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं। सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए। संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए। संजू ने टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है, किसी एक धर्म की जीत का जश्न मनाने की जगह नहीं।”

    2024 WC जीतने के बाद रोहित भी ट्रॉफी के साथ गए थे मंदिर
    यह पहली बार नहीं है जब कोई भारतीय कप्तान ट्रॉफी के साथ मंदिर में पूजा करने पहुंचे है। इससे पहले साल 2011 के लंबे इंतजार के बाद 2024 में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने जब टी-20 विश्व कप का खिताब जीता था, तब बीसीसीआई सचिव जय शाह के साथ, 21 अगस्त, बुधवार को मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे थे। वे दोनों अपने साथ टी20 विश्व कप 2024 की बहुचर्चित ट्रॉफी भी ले गए थे। टी20 विश्व कप में जीत के बाद रोहित और जय शाह ने इस प्रतिष्ठित मंदिर में भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया था। ट्रॉफी भी सिद्धिविनायक मंदिर पहुंची थी, जहां दुनिया भर की हस्तियां दर्शन करने आती हैं। दर्शन के बाद रोहित और जय शाह गुलाबी रंग के शॉल पहने नजर आए थे। तब ट्रॉफी को बाकायदा माला भी पहनाई गई थी।

  • अल्फा की रिलीज डेट बदली: अब सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ से नहीं होगा बॉक्स ऑफिस क्लैश

    अल्फा की रिलीज डेट बदली: अब सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ से नहीं होगा बॉक्स ऑफिस क्लैश


    नई दिल्ली । बॉलीवुड में बड़े बजट की फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस क्लैश से बचने के लिए रिलीज डेट बदलना आम बात है और अब इसी कड़ी में आलिया भट्ट की बहुप्रतीक्षित फिल्म अल्फा की रिलीज डेट एक बार फिर आगे बढ़ा दी गई है। काफी समय से चर्चा थी कि इस फिल्म का सामना सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान से हुआ था। से हो सकता है लेकिन अब यह क्लैश टल गया है।

    दरअसल आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की इस एक्शन एंटरटेनर फिल्म की रिलीज डेट पोस्टपोन कर दी गई है। पहले खबरें थीं कि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है या फिर इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जा सकता है। हालांकि अब मेकर्स ने साफ कर दिया है कि फिल्म सीधे सिनेमाघरों में ही रिलीज होगी लेकिन नई तारीख के साथ। अब यह फिल्म 10 जुलाई 2026 को थिएटर्स में दस्तक देगी।

    फिल्म के निर्माताओं ने सोमवार 9 मार्च को इसके टीजर पोस्टर के साथ नई रिलीज डेट की घोषणा की। पोस्टर में अल्फा का सिंबल दिखाई देता है जिसमें आलिया भट्ट की झलक भी देखने को मिलती है। यह फिल्म एक एक्शन थ्रिलर है और इसमें जबरदस्त एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि फिल्म में आलिया भट्ट और शर्वरी वाघ दोनों दमदार एक्शन करती नजर आएंगी।

    फिल्म में अनिल कपूर और बॉबी देओल भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। दोनों ही कलाकार अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं और उनके किरदार फिल्म की कहानी को और भी दिलचस्प बनाएंगे।

    दिलचस्प बात यह है कि अल्फा की रिलीज डेट पहले भी दो बार बदली जा चुकी है। शुरुआत में इसे क्रिसमस 2025 पर रिलीज करने की योजना बनाई गई थी लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ाकर 17 अप्रैल 2026 कर दिया गया। उसी दिन सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान रिलीज होने वाली थी। ऐसे में माना जा रहा है कि बड़े बॉक्स ऑफिस क्लैश से बचने के लिए मेकर्स ने फिल्म को जुलाई तक टालने का फैसला किया।

    फिल्म की नई रिलीज डेट की जानकारी खुद आलिया भट्ट ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा की। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा अल्फा 10.07.2026 सिनेमाज में मिलते हैं। उनके इस पोस्ट पर फैंस ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने कमेंट कर लिखा कि उन्हें फिल्म का बेसब्री से इंतजार है वहीं कुछ ने आलिया की तारीफ करते हुए कहा कि वह अक्सर मजबूत और फीमेल सेंट्रिक किरदारों वाली फिल्में चुनती हैं।

    अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो अल्फा दरअसलयशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स का हिस्सा है। इसी यूनिवर्स में पहले टाइगर पठान और वॉर जैसी सफल फिल्में बन चुकी हैं। हाल ही में रिलीज हुई वॉर 2 के पोस्ट क्रेडिट सीन में भी अल्फा की झलक दिखाई गई थी जिससे दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। फिल्म का निर्देशन शिव रवैल कर रहे हैं और इसकी कहानी दो महिला जासूसों के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में यह फिल्म एक्शन और स्पाई थ्रिलर के शौकीनों के लिए खास होने वाली है।

  • जानिए क्या है सनी देओल की फिल्म लाहौर 1947 की कहानी? मुस्लिम होगा किरदार, आमिर खान हैं प्रोड्यूसर

    जानिए क्या है सनी देओल की फिल्म लाहौर 1947 की कहानी? मुस्लिम होगा किरदार, आमिर खान हैं प्रोड्यूसर

    नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर सनी देओल के लिए ये साल बेहद खास होने वाला है। इस साल उनकी शानदार फिल्में आ रही हैं जिसमें से एक लाहौर 1947 है। हालांकि, अभी ये टाइटल कन्फर्म नहीं है। लेकिन ये वही फिल्म है जिसे प्रोड्यूस करने के लिए आमिर खान आगे आए थे। सनी देओल को एक्शन अवतार में देखने वालों के लिए ये फिल्म सरप्राइज कर सकती है। नाम लाहौर 1947 से ऐसा माना गया था कि ये एक एक्शन से भरपूर फिल्म होगी जिसमें भारत-पाकिस्तान के बंटवारे को दिखाया जाएगा। लेकिन इस फिल्म की कहानी से सनी देओल आपको रुला देंगे। वो एक्शन नहीं बल्कि एक इमोशनल अवतार में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म की कहानी सनी देओल के दिल के बेहद करीब है जिस पर वो सालों से फिल्म बनाना चाहते थे। अब डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने इस खास कहानी पर फिल्म बना दी है।

    लाहौर 1947 की कहानी
    लाहौर 1947 एक इमोशनल कर देने वाली फिल्म होने वाली है जिसकी कहानी एक मुस्लिम परिवार के भारत से पाकिस्तान बसने को दिखाया गया है। इस कहानी में एक माई भी हैं जो रतन की मां हैं और बंटवारे के दौरान अपने उसे पाकिस्तान में ही छोड़ आए। लाहौर में बूढी माई की एक शानदार हवेली है जिसमें अब भारत से आया वो मुस्लिम परिवार रहता है। लाहौर 1947 इसी बूढी माई और भारत के लखनऊ को छोड़ कर पाकिस्तान गए सिकंदर मिर्जा और उनके परिवार की कहानी है।

    भारत और पाकिस्तान का बंटवारा
    सिकंदर अपनी पत्नी हामिद मिर्जा, बेटा जावेद और बेटी तनवीर मिर्जा के साथ भारत के लखनऊ में खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। लेकिन तभी देश का बंटवारा होता है और सिकंदर को अपने परिवार के साथ मजबूरन लखनऊ छोड़ पाकिस्तान के लाहौर में जाना पड़ता है। ये वही समय था जब भारत और पाकिस्तान रिफ्यूजी के संकट से जूझ रहे थे। उसी समय लाहौर की बड़ी हवेली में अपने परिवार के साथ रहने वाली माई का साथ भी अपनों से छूट जाता है। रतन अपनी माई को पाकिस्तान में ही छोड़ भारत में बस जाता है।

    लाहौर की वो हवेली
    लाहौर में सिकंदर और उनके परिवार को रहने के लिए एक शानदार हवेली मिलती है। ये वही हवेली होती है जहां माई रहा करती थी। अब माई दर-दर भटकती है और सिकंदर पर उनकी हवेली पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाती है। याकूब पहलवान जो खुद को मुस्लिम धर्म का रक्षक बताता है उसे हिंदू माई रास नहीं आती और वो उसे परेशान करता है। इसी दौरान माई और सिकंदर के परिवार के बीच एक खास रिश्ता बन जाता है। माई सिकंदर के घर का हिस्सा बन जाती हैं। इसी बीच एक कवि नासिर काजमी की एंट्री होती है जो याकूब पहलवान को धर्म से हटकर इंसानियत की सीख देता है।

    कहानी का अंत
    कहानी में आगे माई का निधन हो जाता है और अब बहस होती है उनके अंतिम संस्कार की। काजमी साहब कहते है कि वो एक हिंदू महिला थीं उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से होना चाहिए। हिंदू धर्म समर्थन की ये बात याकूब को पसंद नहीं आती और वो काजमी साहब को जान से मार देता है। अंत में सिकंदर और लाहौर के मुस्लिम माई का अंतिम संस्कार हिंदू तरीके से करते हैं।

    फिल्म के किरदार और रिलीज
    सनी देओल की फिल्म लाहौर 1947 की कहानी प्रोफेसर असगर वजाहत के 1989 के एक नाटक पर आधारित है जिसका नाम है ‘जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नई’। इसका मतलब है जिसने लाहौर नहीं देखा उसने जीवन जिया नहीं है। विकिपीडिया की मानें तो इस फिल्म में सिकंदर का किरदार सनी देओल निभा रहे हैं, प्रीति जिंटा उनकी पत्नी हामिदा के किरदार में होंगी। शबाना आजमी माई का किरदार निभा रही हैं। म्यूजिक AR रहमान ने तैयार किया है। गानों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। फिल्म इस साल अगस्त में थिएटर पर दस्तक दे सकती है।

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इतिहास: पहली बार एक ही एडिशन में चार बल्लेबाजों ने पार किया 300 रन का आंकड़ा

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में इतिहास: पहली बार एक ही एडिशन में चार बल्लेबाजों ने पार किया 300 रन का आंकड़ा


    नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में 2026 का एडिशन कई मायनों में यादगार और ऐतिहासिक बन गया। इस टूर्नामेंट ने बल्लेबाजी के ऐसे नए कीर्तिमान स्थापित किए, जिनकी पहले कल्पना भी कम ही की गई थी। टी20 विश्व कप की शुरुआत को लगभग 19 साल हो चुके हैं और अब तक इसके 10 एडिशन खेले जा चुके हैं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब एक ही सीजन में चार बल्लेबाजों ने 300 से अधिक रन बनाकर इतिहास रच दिया। इससे पहले टी20 वर्ल्ड कप में 300 रन का आंकड़ा पार करना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता था और यह कारनामा भी अलग-अलग सीजन में ही देखने को मिला था।

    टी20 वर्ल्ड कप के पिछले एडिशनों पर नजर डालें तो 2009 में श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान ने 317 रन बनाकर सबसे पहले यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके बाद 2010 में महेला जयवर्धने ने 302 रन बनाए। फिर 2014 में भारत के विराट कोहली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 319 रन बनाए और यह लंबे समय तक एक एडिशन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड रहा। वहीं 2021 में पाकिस्तान के बाबर आजम ने 303 रन बनाकर इस सूची में अपना नाम दर्ज कराया। खास बात यह थी कि इन सभी बल्लेबाजों ने अलग-अलग टूर्नामेंट में 300 से ज्यादा रन बनाए थे।

    हालांकि टी20 वर्ल्ड कप 2026 ने इस परंपरा को पूरी तरह बदल दिया। इस बार बल्लेबाजों ने ऐसा धमाल मचाया कि एक ही एडिशन में चार खिलाड़ियों ने 300 से ज्यादा रन बना दिए। सबसे शानदार प्रदर्शन पाकिस्तान के ओपनर साहिबजादा फरहान का रहा। उन्होंने सिर्फ 6 पारियों में 383 रन बनाकर न सिर्फ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाए बल्कि टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास का नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया।

    न्यूजीलैंड के आक्रामक बल्लेबाज टिम सीफर्ट भी इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आए। उन्होंने 326 रन बनाकर रन बनाने वालों की सूची में दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने भी अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने मात्र 5 पारियों में 321 रन बनाए और शानदार प्रदर्शन के चलते प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार भी अपने नाम किया।

    इसके अलावा भारत के ही एक और बल्लेबाज ईशान किशन ने भी इस टूर्नामेंट में 300 रन का आंकड़ा पार किया। उन्होंने 9 पारियों में 317 रन बनाकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि में अपना योगदान दिया। खास बात यह रही कि पहली बार किसी एक टीम के दो बल्लेबाजों ने एक ही एडिशन में 300 से ज्यादा रन बनाए।

    इस तरह टी20 वर्ल्ड कप 2026 बल्लेबाजी के लिहाज से सबसे यादगार टूर्नामेंट बन गया। चार बल्लेबाजों का एक ही एडिशन में 300 से ज्यादा रन बनाना इस बात का संकेत है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले वर्षों में ऐसे रिकॉर्ड और भी देखने को मिल सकते हैं।

  • कल्कि 2898 एडी’ में सबसे महंगे एक्टर कौन? जानिए किसे मिले थे रोजाना 2 मिलियन डॉलर

    कल्कि 2898 एडी’ में सबसे महंगे एक्टर कौन? जानिए किसे मिले थे रोजाना 2 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली। साइंस-फिक्शन फिल्म Kalki 2898 AD रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। निर्देशक Nag Ashwin की इस महत्वाकांक्षी फिल्म में कई बड़े सितारे नजर आए, जिनमें Prabhas, Amitabh Bachchan, Deepika Padukone और Kamal Haasan जैसे नाम शामिल थे। फिल्म का भव्य विजुअल, दमदार कहानी और शानदार स्टारकास्ट दर्शकों को खूब पसंद आई। हालांकि फिल्म की सफलता के साथ एक और बात चर्चा में आई-इस फिल्म में सबसे ज्यादा फीस किस अभिनेता ने ली।

    कमल हासन बने सबसे महंगे स्टार
    रिपोर्ट्स के अनुसार इस फिल्म में सबसे ज्यादा फीस साउथ के दिग्गज अभिनेता Kamal Haasan को मिली। फिल्ममेकर युगी सेतु ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि कमल हासन को इस फिल्म के लिए करीब 150 करोड़ रुपये दिए गए थे। खास बात यह है कि उन्होंने फिल्म की शूटिंग के लिए बहुत कम समय दिया था, लेकिन उनकी फीस फिर भी सबसे ज्यादा रही। युगी सेतु ने बताया कि कमल हासन को लगभग 20 दिनों की कॉल शीट के लिए यह रकम दी गई थी।

    हर दिन की फीस ने चौंकाया
    इंटरव्यू में युगी सेतु ने कहा कि कमल हासन का कद और अनुभव ही ऐसा है कि उन्हें इतनी बड़ी फीस दी गई। उन्होंने बताया कि अगर 150 करोड़ रुपये को शूटिंग के दिनों के हिसाब से देखा जाए तो उनकी प्रति दिन की फीस लगभग 1 मिलियन डॉलर बनती है। बाद में जब यह सामने आया कि उन्होंने वास्तव में लगभग 10 दिन शूटिंग की थी, तो यह रकम करीब 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 16 से 18 करोड़ रुपये प्रतिदिन के बराबर हो जाती है। इस तरह कमल हासन इस फिल्म के सबसे महंगे अभिनेता साबित हुए।

    फिल्म में निभाया दमदार किरदार
    फिल्म में कमल हासन ने सुप्रीम यास्किन नाम के किरदार को निभाया, जो एक रहस्यमयी और शक्तिशाली शासक है। कहानी में वह ‘द कॉम्प्लेक्स’ नाम की डायस्टोपियन दुनिया पर शासन करता है। हालांकि फिल्म के पहले भाग में उनका स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन उनका किरदार कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दर्शकों को उनकी खलनायकी और अभिनय काफी प्रभावशाली लगा।

    सीक्वल में बढ़ सकती है भूमिका
    फिल्म के अंत में यह संकेत भी मिलता है कि आने वाले सीक्वल में सुप्रीम यास्किन का किरदार और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कमल हासन का रोल अगले भाग में ज्यादा विस्तृत और दमदार नजर आएगा। फिल्म की भव्यता और इसकी स्टारकास्ट को देखते हुए ‘कल्कि 2898 एडी’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी साइंस-फिक्शन फिल्मों में से एक माना जा रहा है।

  • आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद

    आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब सऊदी अरब से मांगी दीर्घकालिक आर्थिक मदद


    इस्लामाबाद।
    आर्थिक चुनौतियों (Economic Challenges) से जूझ रहे कंगाल पाकिस्तान (Poor Pakistan) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) से दीर्घकालिक आर्थिक सहायता की मांग की है। सोमवार को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने रियाद से कई वित्तीय सहायताओं का अनुरोध किया है, जिनमें 5 अरब डॉलर की मौजूदा अल्पकालिक जमा राशि को 10 साल की दीर्घकालिक सुविधा में बदलने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब से स्थगित भुगतान पर मिलने वाली तेल सुविधा को 1.2 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने और उसकी अवधि बढ़ाने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजे गए लगभग 10 अरब डॉलर के धन के प्रतिभूतिकरण (सिक्योरिटाइजेशन) का प्रस्ताव भी रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ जारी युद्ध से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव के कारण पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।


    आईएमएफ के साथ भी चल रही बातचीत

    दूसरी ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ 7 अरब डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) कार्यक्रम की तीसरी समीक्षा पूरी करने के लिए बातचीत कर रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब पहले से ही व्यापक आर्थिक सहयोग पैकेज पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन हालिया वैश्विक तनावों ने इन वार्ताओं को और तेज कर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में जमा 5 अरब डॉलर की सऊदी राशि को दीर्घकालिक ऋण में बदलने का अनुरोध किया है। इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा अल्पकालिक जमा को अनुकूल दरों पर 10 साल की ऋण सुविधा में बदला जा सकता है। दूसरे प्रस्ताव में स्थगित भुगतान के आधार पर मिलने वाली तेल सुविधा को बढ़ाने की मांग की गई है। इसके तहत मौजूदा 1.2 अरब डॉलर की व्यवस्था को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक करने और भुगतान अवधि को एक साल से बढ़ाकर तीन साल करने का सुझाव दिया गया है।


    प्रवासी धन और अंतरराष्ट्रीय फंड जुटाने की योजना

    तीसरे प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान ने प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी गई धनराशि के प्रतिभूतिकरण की योजना रखी है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और महंगे विदेशी ऋण पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। चौथे प्रस्ताव में सऊदी अरब से पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय सुकुक (इस्लामिक बॉन्ड) जारी करने के प्रयासों के लिए गारंटी देने पर विचार करने को कहा गया है, जिससे पाकिस्तान को कम ब्याज दरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूंजी जुटाने में मदद मिल सके।


    व्यापार और निवेश से जुड़े प्रस्ताव

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब से एक्सिम ऋण लाइन उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। इसके अलावा इस्लामाबाद ने आयात से जुड़े लेनदेन के लिए बैंक गारंटी की अनिवार्यता को समाप्त करने पर भी विचार करने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष (PIF) से देश में संभावित निवेश के अवसर तलाशने का भी आग्रह किया है। साथ ही आईएमएफ कार्यक्रम के अनुरूप कर सुधारों और प्राथमिक अधिशेष लक्ष्यों में संभावित समायोजन के लिए भी समर्थन मांगा गया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से किए गए इन आठ प्रमुख अनुरोधों पर सऊदी अरब की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। अखबार ने बताया कि उसने इस संबंध में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान से भी संपर्क किया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली हैं।

  • ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,

    ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द (Iran War) ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

    यह गिरावट सोमवार को हुए उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद आई है, जब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दायरा महामारी के दौरान कीमतों के नकारात्मक होने के बाद सबसे ज्यादा था। बता दें मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल एनर्जी माार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और मुद्रास्फीति संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    ब्लूमबर्ग के मुताबिक फ्लोरिडा में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह तेल से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज स्ट्रेट्स से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं।

    ट्रंप ने सोमवार देर रात पत्रकारों से कहा, “हम तेल की कीमतों को कम रखना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “इस संकट की वजह से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इस सप्ताह के अंत तक खत्म होगा।


    तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थीं

    सोमवार को तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जब फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों को होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह संकरे जलमार्ग आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल के प्रवाह का पांचवां हिस्सा संभालता है। हालांकि, बाद में सत्र में कीमतों में गिरावट आई क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आपातकालीन भंडार जारी करने के प्रयास पर विचार किया।


    ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव

    यह संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में है और इसमें एक दर्जन से अधिक देश शामिल हो गए हैं, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और गैसोइल जैसे उत्पादों सहित ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका में खुदरा पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या तेल संबंधी प्रतिबंधों में छूट देने की योजना पर अतिरिक्त जानकारी नहीं दी, सिवाय इसके कि उन्होंने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर इस विषय पर चर्चा की थी। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद में अस्थायी रूप से वृद्धि करने का रास्ता साफ कर दिया, जो इस व्यापार पर महीनों से चल रहे दबाव से उलट था।


    बाजार की नजरें होर्मुज पर

    बाजार की नजरें होर्मुज से टैंकरों के आवागमन को फिर से शुरू होते देखने पर टिकी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले के कारण अधिकांश जहाजों ने इस जलमार्ग से बचना शुरू कर दिया है। फिर भी, हाल के दिनों में सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाला एक टैंकर वहां से गुजरा, जबकि ईरान ने इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा है।


    होर्मुज के बंद होने के कारण

    भंडारण तेजी से भर जाने के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने उत्पादन कम कर दिया है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल और तेल उत्पादों के प्रवाह पर पड़े इस संकट के कारण रिफाइनरियों ने कुछ कार्यों और आपूर्ति को रोक दिया है, और एशियाई ऊर्जा खरीदारों ने मूल रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए जाने वाले ईंधन शिपमेंट को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धियों से आगे बढ़कर बोली लगाई है।

  • Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य

    Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran America War) के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी तरफ, इस अनिश्चितता के बीच सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। लिहाजा, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से वैश्विक स्तर पर सोने का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य भारत और ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) की संयुक्त अर्थव्यवस्था यानी साझा GDP से भी काफी बड़ा माना जा रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता आई है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने वाली है।


    क्यों कहा जा रहा है ‘फाइनेंशियल सुपरपावर’?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में इस तेज बढ़ोत्तरी के कारण दुनिया में मौजूद कुल सोने का अनुमानित मूल्य 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की कुल जीडीपी फिलहाल लगभग 3.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर के बीच है जिसके जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यूनाइडेट किंगडम यानी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस तरह सोने का कुल मूल्य दोनों देशों की संयुक्त जीडीपी से कई गुना बड़ा हो गया है। इसी कारण कुछ विश्लेषक इसे “गोल्ड सुपरपावर” कह रहे हैं।


    निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना

    जब दुनिया में युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। इसलिए हर बार किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद, महामारी के बाद बढ़ी महंगाई, डॉलर और अन्य मुद्राओं पर बढ़ती अनिश्चितता।


    आगे क्या होगा?

    हालांकि विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष कम होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कागजी मुद्राओं पर कम होते भरोसे के कारण सोना लंबे समय तक मजबूत निवेश बना रह सकता है। बहरहाल, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभर रहा है, जिसका कुल मूल्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक हो चुका है।

  • ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?

    ईरान युद्ध के कारण देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित… जानें कैसे पूरी होगी जरूरतें?


    नई दिल्ली।
    वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध (America, Israel, and Iran War) ने मध्य पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर गहरा असर पड़ रहा है। इस तनाव के कारण भारत की 40% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई अचानक ठप हो गई है। यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं है; इसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था, उद्योगों की रफ्तार और भविष्य में महंगाई की दर पर पड़ सकता है। सरकार एक्शन मोड में है और पेट्रोलियम मंत्रालय युद्ध स्तर पर ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ (गैस वितरण की नई योजना) तैयार कर रहा है। आइए इस संकट की गहराई, उद्योगों पर इसके प्रभाव और भारत के ‘प्लान बी’ का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।


    संकट के मुख्य कारण

    वर्तमान संकट की जड़ मध्य पूर्व में है। मार्च 2026 तक, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। कतर ने अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे यूरोप और भारत जैसे आयातकों पर दबाव बढ़ा है। भारत के लिए यह इसलिए गंभीर है क्योंकि उसकी लगभग 52% कच्चे तेल की आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरती है। इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक तेल कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो फरवरी 2026 के 72 डॉलर से 15% ऊपर है। भारत में एलपीजी (कुकिंग गैस) की कीमतें 7% बढ़कर दिल्ली में 913 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर हो गई हैं, जबकि कमर्शियल एलपीजी 1,883 रुपये तक पहुंच गई है।

    भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता FY26 के पहले 10 महीनों में 88.6% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 88.2% से अधिक है। घरेलू उत्पादन स्थिर रहने (23.5 मिलियन टन) के बावजूद मांग 1.6% बढ़कर 202.2 मिलियन टन हो गई है। एलएनजी आयात में भी 50% कटौती की संभावना है, क्योंकि पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से सप्लाई पर फोर्स मेजर घोषित कर दिया है।

    यह खबर आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
    यह संकट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। LNG का उपयोग सिर्फ कारखानों में नहीं होता, बल्कि यह शहरों में पाइप वाली गैस (PNG), वाहनों के ईंधन (CNG), बिजली उत्पादन और कृषि (उर्वरक) के लिए रीढ़ की हड्डी है। गैस की सप्लाई घटने से खुले बाजार में इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे परोक्ष रूप से परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा के उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इसलिए, इस संकट को समझना हर नागरिक के लिए आवश्यक है।


    किन उद्योगों पर गिरेगी गाज?

    सरकार के नए ‘ऑप्टिमाइजेशन प्लान’ के तहत गैस की राशनिंग तय है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर बांटा जाएगा। गैर-प्राथमिकता वाले उद्योग (सबसे बड़ा खतरा): रिपोर्ट के अनुसार, गैर-प्राथमिकता वाले सेक्टरों को गैस सप्लाई में भारी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें तुरंत कोयला, नेफ्था या फर्नेस ऑयल जैसे वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख करना होगा।

    आम तौर पर सिरेमिक, कांच उद्योग, स्पंज आयरन और कुछ पेट्रोकेमिकल इकाइयों को गैर-प्राथमिकता की श्रेणी में रखा जाता है। इन उद्योगों में उत्पादन धीमा होने की आशंका है। फर्टिलाइजर सेक्टर प्राथमिकता वाला है, लेकिन कटौती संभव है: यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली 60% LNG अकेले कतर से आती है। हालांकि सरकार इसे ‘प्राथमिकता’ मानती है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उर्वरक क्षेत्र की सप्लाई में भी हल्की कटौती से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

    खेती और किसानों के लिए क्या है स्थिति?
    कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए फिलहाल पैनिक (घबराने) का कोई कारण नहीं है। सरकार और उद्योग ने इसके लिए पहले से एक मजबूत ‘शॉक-एब्जॉर्बर’ तैयार रखा है। खरीफ की बुवाई जून में शुरू होगी। अभी मांग कम है, इसलिए उर्वरक कंपनियां अपने कारखानों का नियमित रखरखाव कर रही हैं। देश में उर्वरक का 17.7 मिलियन टन (MT) का सुरक्षित भंडार है, जो पिछले साल (लगभग 13 MT) की तुलना में 36.5% अधिक है। DAP और NPK की बहुतायत: इनका स्टॉक पिछले साल से 70-80% अधिक है। फॉस्फेटिक उर्वरकों के लिए भारत ने अपनी सप्लाई चेन को विविध किया है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता न रहे।


    भारत कैसे करेगा अपनी जरूरतें पूरी?

    भारत हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। गैस की इस भारी कमी को पूरा करने के लिए ‘प्लान बी’ पर तेजी से काम हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की ओर रुख: भारत अपनी 60% LNG पहले से ही पश्चिम एशिया के बाहर से मंगाता है। अब कतर की भरपाई के लिए ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की कंपनियों से अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत तेज कर दी गई है।


    सामने खड़ी हैं 2 बड़ी चुनौतियां

    जहाजों का इंतजाम: अचानक नई जगह से गैस लाने के लिए विशेष क्रायोजेनिक LNG टैंकर (जहाज) रातों-रात जुटाना बेहद मुश्किल है।
    लिक्विफिकेशन क्षमता: जिन नए देशों से हम गैस मांग रहे हैं, उनके पास गैस को तरल में बदलने की अतिरिक्त क्षमता तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए।

  • देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    पश्चिम एशिया संकट (West Asian Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों (Crude Oil and LPG Prices) में उछाल के बीच सरकार (Government) ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि भारत में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं है। पर रसोई गैस (LPG) और पीएनजी की घरेलू सप्लाई को तरजीह देने के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए हैं। इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में कमी और घरेलू गैस का बुकिंग टाइम बढ़ाना शामिल है।


    बुकिंग अवधि बढ़ाई

    सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। मतलब यह कि गैस सिलेंडर सप्लाई के अगले 25 दिन तक उपभोक्ता दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, सरकार की दलील है कि आम उपभोक्ता एक वर्ष में औसतन सात सिलेंडर इस्तेमाल करता है। ऐसे में वह एक सिलेंडर को तकरीबन 50 दिन इस्तेमाल करता है। ऐसे में 25 दिन की बुकिंग अवधि से कोई मुश्किल नहीं आएगी।


    फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे

    सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, पर अभी वह स्थिति नहीं आई है कि कीमतों में इजाफा किया जाए। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 120 -125 डॉलर के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों पर खास दबाव नहीं पड़ेगा। पर कीमत ऊपर चली जाती है, तो वह अलग स्थिति होगी।


    घरेलू पीएनजी को तरजीह

    सरकार का कहना है कि घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी गैस की कोई मुश्किल नहीं आएगी। गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ऐसे में सरकार ने कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो एलएनजी को लेकर दबाव की स्थिति बन सकती है।


    कमर्शियल एलपीजी कम

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को बरकरार रखने के लिए होटल और उद्योगों में एलपीजी की सप्लाई में कमी लाने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी क्योंकि, इस वक्त घरेलू उपभोक्ताओं को वक्त पर रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार और तेल कंपनियों की पहली प्राथमिकता है।


    कमर्शियल एलएनजी के दामों में बढ़ोतरी

    पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कमर्शियल एलएनजी की कीमतों में इजाफा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। ऐसे में कमर्शियल एलएनजी के दामों में वृद्धि पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। यह सवाल किए जाने पर कि क्या इसका असर सीएनजी की कीमतों पर भी होगा, उन्होंने कहा कि सीएनजी प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उस पर प्रभाव की संभावना कम है।


    रिफाइनरी एलपीजी उत्पादन बढ़ाए

    पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सभी रिफाइनरी को दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी का उत्पादन किया जाए। इसके साथ सरकार अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी एलपीजी खरीद रही है। सरकार का कहना है कि इन देशों से गैस के आयात को और तेज किया गया है।


    अमेरिका का रुख करेगा तय

    पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। ऐसे में अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे में अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने का निर्णय करता है, तो उसके उपभोक्ताओं को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।