Author: bharati

  • IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    नई दिल्‍ली। इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत की घरेलू राजनीति को भी तेज कर दिया है। ईरानी जहाज को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिंद महासागर में हुई इस घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है। यह न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय सिद्धांतों का अपमान है, बल्कि हमारी उस विदेश नीति का भी अपमान है, जिसे तमाम सरकारों ने बड़ी मेहनत से बनाया और अपनाया है।

    सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में खरगे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 से लौट रहा था।

    ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस अतिथि के डूबने पर भारत की तरफ से कोई चिंता या संवेदना व्यक्त नहीं की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप हैं। पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब आप अपने ही आंगन में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो हमें महासागर सिद्धांतों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ होने के सिद्धांतों पर उपदेश क्यों दे रहे हैं।
    होर्मुज की खाड़ी में फंसे 1100 भारतीय नाविक: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने इस युद्ध की वजह से होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीयों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 1100 नाविक फंसे हुए हैं।

    प्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत हो गई है। समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? पीएम मोदी कहते हैं कि कच्चे तेल और अन्य तेल का भंडार केवल 25 दिनों के लिए बचा है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, हमारी ऊर्जा संबंधी इमरजेंसी योजना क्या है, खासकर भारत सरकार द्वारा रूसी तेल का आयात रोकने की मांग को लगभग स्वीकार करने के बाद। खाड़ी देशों के साथ अन्य प्रमुख वस्तुओं के व्यापार का क्या होगा।
    विदेश नीति को बर्बाद कर रहे हैं: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि विदेश मंत्रालय के 3 मार्च के बयान के अनुसार, “कुछ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है या वे लापता हैं”। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद की गुहार लगाते हुए हताश वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं।

    भारत सरकार उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की कोई योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बीच “स्पष्ट रूप से, मोदी जी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों का अपमान करता है और हमारी उस विदेश नीति को खत्म कर रहा है, जिसे वर्षों से लगातार सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और मेहनत से बनाया और अपनाया गया है।”

    गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई यह जंग अब पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर में पहुंच गई है।

    भारत में फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम के तहत आए ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब डुबो दिया। इस घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। बाकियों को श्रीलंकाई नेवी से बचाव अभियान के तहत बचाया था। फिलहाल यह सैनिक श्रीलंका में मौजूद हैं।
  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • ट्रंप बोले- जमीनी युद्ध की जरूरत ही नहीं, ईरान की नौसेना खत्म

    ट्रंप बोले- जमीनी युद्ध की जरूरत ही नहीं, ईरान की नौसेना खत्म

    नई दिल्‍ली। इजरायल-ईरान संघर्ष सातवें दिन और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान ने अज़रबैजान और क़तर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि भारतीय महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबाने के लिए अमेरिका को ‘पछतावा’ होगा। इसी बीच एक धार्मिक नेता ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘खून’ की मांग करने वाला बयान दिया।
    दूसरी ओर, इजरायली सेना ने बताया कि पिछले 24 घंटों में लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के 80 ठिकानों पर हमला किया गया। साथ ही ईरान के अंदर भी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमलों की एक नई लहर चलाई गई।

    इस बीच एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत डूब गया जिसमें कम से कम 87 लोगों की मौत हो गई।

    लगभग 32 लोगों को बचाकर श्रीलंका के दक्षिणी शहर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि वह युद्धपोत ‘शांत तरीके से डूब गया।’ इसी दौरान कुवैत के पास खाड़ी क्षेत्र में एक तेल टैंकर में भी धमाका हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज के बाईं ओर बड़ा विस्फोट देखा गया जिसके बाद उसमें पानी भरने लगा। जहाज के कप्तान ने बताया कि धमाके के बाद एक छोटी नाव को उस इलाके से दूर जाते हुए देखा गया। यह घटना कुवैत के मुबारक अल कबीर पोर्ट से लगभग 30 नॉटिकल मील (करीब 56 किमी) दक्षिण-पूर्व में हुई
  • टी-20 विश्व कप फाइनल में भारत की एंट्री पर MP में जश्न: इंदौर के राजवाड़ा पर ढोल-ताशे, जबलपुर-उज्जैन में आतिशबाजी

    टी-20 विश्व कप फाइनल में भारत की एंट्री पर MP में जश्न: इंदौर के राजवाड़ा पर ढोल-ताशे, जबलपुर-उज्जैन में आतिशबाजी


    मध्यप्रदेश । टी 20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बना ली। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार खेल दिखाया। मैच के आखिरी ओवर तक रोमांच बना रहा लेकिन भारतीय टीम ने शानदार संयम और रणनीति के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत की इस जीत के साथ ही देशभर में जश्न का माहौल बन गया और मध्य प्रदेश के कई शहरों में क्रिकेट प्रेमी खुशी से झूम उठे।

    इंदौर में जीत का जश्न सबसे ज्यादा ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला। जैसे ही भारत की जीत तय हुई बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर राजवाड़ा चौराहे पर पहुंच गए। युवाओं ने ढोल ताशों की धुन पर जमकर नाचते हुए जीत का जश्न मनाया। पूरे इलाके में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंजने लगे। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और जमकर आतिशबाजी की। देर रात तक राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

    भारत की इस जीत के बाद क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है और अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि टीम इंडिया फाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करेगी।

    वहीं जबलपुर में भी भारत की जीत के बाद क्रिकेट फैंस सड़कों पर उतर आए। शहर के मालवीय चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और भारत की जीत का जश्न मनाया। यहां युवाओं ने पटाखे जलाए और एक दूसरे को बधाई दी। भारत की जीत के नारे और देशभक्ति के गीतों के बीच पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया।

    उज्जैन में भी टीम इंडिया की जीत की खुशी साफ नजर आई। शहर के हृदय स्थल टॉवर चौक पर युवाओं की टोलियां एकत्रित हो गईं। यहां लोगों ने तिरंगा लहराते हुए जमकर आतिशबाजी की और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के नारे लगाए। युवा बुजुर्ग और बच्चे सभी इस जीत के जश्न में शामिल दिखाई दिए।

    क्रिकेट प्रेमियों ने कहा कि टीम इंडिया का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है और सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को हराना बड़ी उपलब्धि है। अब सभी को उम्मीद है कि भारतीय टीम फाइनल में भी इसी तरह का दमदार खेल दिखाकर देश को एक और विश्व कप जीत का जश्न मनाने का मौका देगी।

  • ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।

    ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’IRGC ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’Strait of Hormuz अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से दी गई यह चेतावनी सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाती है जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े हैं। IRGC ने दो टूक कहा है कि यदि इन प्रतिबंधित देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निश्चित रूप से हमला करके नष्ट कर दिया जाएगा।

    हालाँकि, इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सख्त नाकेबंदी के दायरे से बाहर है। बुधवार को जहाँ केवल चीनी जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी, वहीं अब नए ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित रहेगा। तेहरान का यह रुख भारत के साथ उसके पुराने और विश्वसनीय संबंधों को दर्शाता है। भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।

    ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। उनका कहना है कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को अपनी सीमाओं से लगे जलमार्गों पर नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले शनिवार को शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में लिया गया है। गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फारस की खाड़ी के तमाम बंदरगाहों, जिनमें दुबई का जेबेल अली भी शामिल है, के लिए यह एकमात्र निकास मार्ग है।

    वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर साफ देखा जा सकता है। कुवैत और दुबई के तटों के पास सैकड़ों टैंकर और कमर्शियल जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो इस नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब हॉर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह पूरी तरह बंद किया गया है। यहाँ तक कि 1980 के दशक के भीषण ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी से भले ही एशिया-यूरोप के मुख्य मार्गों पर तुरंत असर न पड़े, लेकिन खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए हॉर्मुज का यह ‘खुला दरवाजा’ एक बड़ी कूटनीतिक जीत और आर्थिक राहत का संकेत है।

  • सिवनी में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हिस्ट्रीशीटर अजीत उपाध्याय और प्रबुद्ध शुक्ला समेत तीन गिरफ्तार, हथियार बरामद कर निकाला जुलूस

    सिवनी में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हिस्ट्रीशीटर अजीत उपाध्याय और प्रबुद्ध शुक्ला समेत तीन गिरफ्तार, हथियार बरामद कर निकाला जुलूस

    सिवनी । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हत्या के प्रयास के गंभीर मामले में फरार चल रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दबिश देकर अजीत उपाध्याय प्रबुद्ध शुक्ला और एक अन्य आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। तीनों आरोपियों को पेंच टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई उस मामले में की गई है जिसमें एक युवक पर सरेआम जानलेवा हमला किया गया था। घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने लगातार अलग अलग स्थानों पर दबिश दी और आखिरकार पेंच टाइगर रिजर्व इलाके में घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार एक पिस्टल जिंदा कारतूस और एक चाकू भी बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि ये सभी आरोपी जिले के कुख्यात अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें मारपीट धमकी अवैध हथियार रखने और अन्य गंभीर अपराध शामिल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को शहर में लाकर उनका जुलूस भी निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा और आरोपियों को पैदल घुमाया गया ताकि अपराधियों में पुलिस का खौफ बना रहे और आम जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत हो सके।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि आरोपियों से फिलहाल पूछताछ की जा रही है और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के पास से बरामद हथियार कहां से आए और इनका इस्तेमाल किन किन घटनाओं में किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की भी समीक्षा की जा रही है और उनके आपराधिक नेटवर्क को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।

  • ईरान में नेतृत्व का महासंग्राम: ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को बताया 'लाइटवेट', कहा- शांति के लिए अमेरिकी दखल जरूरी।

    ईरान में नेतृत्व का महासंग्राम: ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को बताया 'लाइटवेट', कहा- शांति के लिए अमेरिकी दखल जरूरी।


    नई दिल्ली । ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया मृत्यु ने न केवल तेहरान में सत्ता का शून्य पैदा किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक युद्ध को भी जन्म दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ‘एक्सियोस’ को दिए एक इंटरव्यू में सनसनीखेज बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें मोजतबा खामेनेई, जो अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, बिल्कुल भी मंजूर नहीं हैं। ट्रंप ने मोजतबा को एक ‘लाइटवेट’हल्का खिलाड़ी करार देते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे जो खामेनेई की पुरानी और कट्टरपंथी नीतियों को आगे बढ़ाए।

    ट्रंप का यह दावा केवल विरोध तक सीमित नहीं है; उन्होंने ईरान के अगले नेता की नियुक्ति में प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी की मांग की है। इसके लिए उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण दिया, जहाँ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारीजनवरी 2026 के बाद डेल्सी रोड्रिगेज के साथ ‘मैनेज्ड ट्रांजिशन’ किया गया था। ट्रंप का मानना है कि यदि ईरान में शांति और सौहार्द लाना है, तो वाशिंगटन को नेतृत्व चयन की प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान ने फिर से किसी कट्टरपंथी को अपना नेता चुना, तो अमेरिका को अगले पांच वर्षों के भीतर दोबारा युद्ध के मैदान में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

    दूसरी ओर, ईरान का आंतरिक ढांचा इस समय भारी दबाव में है। 88 सदस्यीय विशेषज्ञों का पैनलAssembly of Experts नया उत्तराधिकारी चुनने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। मोजतबा खामेनेई, जिनके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्सIRGC के साथ बेहद गहरे और मजबूत रिश्ते हैं, फिलहाल मौलवी संगठन में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माने जा रहे हैं। हालांकि, ईरान का संविधान वंशानुगत शासन की अनुमति नहीं देता, लेकिन मोजतबा का प्रभाव उन्हें इस दौड़ में सबसे आगे रखता है। ट्रंप के इस हस्तक्षेप ने अब ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या एक संप्रभु राष्ट्र के सर्वोच्च धार्मिक नेता का चुनाव बाहरी शक्तियों के दबाव में हो सकता है।

    ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का भी मानना है कि ट्रंप का यह रुख ईरान के साथ भविष्य के परमाणु समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। फिलहाल, ईरान ने आधिकारिक रूप से नए नेता के नाम की घोषणा को टाल दिया है, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच पहले से ही जारी तनाव की आग में घी डालने का काम किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें विशेषज्ञों के उस पैनल पर टिकी हैं, जिसे कानून के अनुसार जल्द ही नया उत्तराधिकारी घोषित करना है।

  • ईरान पर हमले के विरोध में सीनेट में हंगामा, पूर्व मरीन का टूटा हाथ; सांसद की भूमिका पर विवाद, VIDEO वायरल

    ईरान पर हमले के विरोध में सीनेट में हंगामा, पूर्व मरीन का टूटा हाथ; सांसद की भूमिका पर विवाद, VIDEO वायरल


    नई दिल्ली । अमेरिका में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विरोध के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक पूर्व अमेरिकी मरीन ने ईरान पर हमले के विरोध में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पूर्व सैनिक का हाथ टूट गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।

    घायल प्रदर्शनकारी की पहचान ब्रायन मैकगिनेस के रूप में हुई है जो वर्ष 2000 से 2004 तक यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स में सार्जेंट के पद पर तैनात रह चुके हैं। जानकारी के मुताबिक मैकगिनेस सीनेट की सुनवाई के दौरान अचानक खड़े हो गए और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध करने लगे। उन्होंने पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य भूमिका और इजरायल के समर्थन पर भी सवाल उठाए।

    स्थिति बिगड़ती देख यूएस कैपिटल पुलिस ने उन्हें हॉल से बाहर निकालने की कोशिश की। इसी दौरान मैकगिनेस ने दरवाजे के फ्रेम को पकड़ लिया और बाहर जाने से इनकार कर दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे हैं और खींचतान के दौरान उनका हाथ दरवाजे में फंस जाता है। इसी अफरा-तफरी में उनका हाथ टूट जाता है। कमरे में मौजूद लोगों की आवाजें भी वीडियो में सुनाई देती हैं जहां कुछ लोग चिल्लाते हुए कहते हैं उसका हाथ… उसका हाथ… ओह माय गॉड! वहीं पुलिस अधिकारी लगातार उन्हें दरवाजा छोड़ने के लिए कहते हुए सुनाई देते हैं।

    इस घटना में एक अमेरिकी सांसद की भूमिका भी सामने आई है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों के साथ अमेरिकी सीनेटर टिम शीही भी प्रदर्शनकारी को बाहर निकालने में मदद करते नजर आ रहे हैं। हालांकि झड़प के दौरान उनका हाथ किस तरह टूटा इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

    हॉल से बाहर ले जाए जाने के दौरान मैकगिनेस जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहते सुने गए कोई भी सैनिक इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता। उनका यह बयान पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य नीतियों के विरोध को दर्शाता है और इसी वजह से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

    घटना के बाद सीनेटर टिम शीही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कैपिटल पुलिस एक असंतुलित प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी और वह केवल स्थिति को शांत करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने लिखा कि यह व्यक्ति टकराव के इरादे से कैपिटल आया था और पुलिस अपनी ड्यूटी निभा रही थी। शीही ने उम्मीद जताई कि घायल व्यक्ति को उचित मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

    वीडियो सामने आने के बाद अमेरिका में ईरान नीति इजरायल के समर्थन और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और विदेश नीति को लेकर गहरी असहमति को भी उजागर करती है।

  • Gen Z' आंदोलन का असर: नेपाल चुनाव में पारंपरिक पार्टियों का अंत, बालेन शाह की RSP ने रचा इतिहास।

    Gen Z' आंदोलन का असर: नेपाल चुनाव में पारंपरिक पार्टियों का अंत, बालेन शाह की RSP ने रचा इतिहास।


    नई दिल्ली । नेपाल की सियासत में 5 मार्च 2026 का दिन एक ऐसी तारीख के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने हिमालयी राष्ट्र के पूरे राजनीतिक मानचित्र को बदल कर रख दिया है। पिछले साल सितंबर 2025 में हुए ऐतिहासिक ‘जनरेशन जेड’ (Gen Z) आंदोलन की धमक अब मतपेटियों से निकल रही है। शुरुआती मतगणना के रुझान किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह (बालेंद्र शाह) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) एक ऐसी प्रचंड सुनामी बनकर उभरी है, जिसमें नेपाल की पुरानी और पारंपरिक पार्टियों, विशेष रूप से वामपंथी धड़े का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है।

    इस चुनाव का सबसे हाई-प्रोफाइल और दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है। यहाँ से आ रहे आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि देश की बदलती सोच का आईना भी हैं। चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, जिन्हें नेपाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था, अपने ही गढ़ में RSP के बालेन शाह से बुरी तरह पिछड़ते दिख रहे हैं। शुरुआती गिनती में जहाँ बालेन शाह ने 1,478 वोटों के साथ मजबूत बढ़त बनाई है, वहीं ओली महज 384 वोटों पर टिके हुए हैं। यह केवल एक सीट की हार-जीत नहीं है, बल्कि नेपाल के युवाओं द्वारा पुरानी व्यवस्था को नकारने का स्पष्ट संदेश है।

    काठमांडू के सभी 10 निर्वाचन क्षेत्रों में RSP का ‘क्लीन स्वीप’ होता दिख रहा है। पार्टी की युवा उम्मीदवार रंजू दर्शना ने काठमांडू-1 से भारी अंतर से जीत हासिल की है, उन्हें अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस के प्रबल थापा छेत्री से लगभग दोगुने वोट मिले हैं। इसी तरह बिराज भक्त श्रेष्ठ और गणेश पराजुली जैसे नए चेहरों ने भी अपनी सीटों पर जीत का परचम लहराया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार 60% मतदान हुआ, जिसमें करीब 10 लाख नए युवा वोटरों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इन युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब गवर्नेंस के खिलाफ मतदान कर ‘घंटी’ (RSP का चुनाव चिह्न) को अपनी पहली पसंद बनाया है।

    दूसरी तरफ, वामपंथी दलों और नेपाली कांग्रेस के लिए ये नतीजे किसी दुःस्वप्न से कम नहीं हैं। पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और केपी शर्मा ओली की पार्टियां अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने में नाकाम रही हैं। यहाँ तक कि गगन थापा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस भी RSP की आंधी के आगे बेबस नजर आ रही है। भारत ने भी नेपाल की इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल की जनता को इस ऐतिहासिक चुनाव के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए शांति और प्रगति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है। मतगणना 9 मार्च तक पूरी होने की उम्मीद है, लेकिन रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि नेपाल अब एक नए और युवा नेतृत्व की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।

  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच राहत: भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, कनाडा-ऑस्ट्रेलिया से LPG आयात की तैयारी

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच राहत: भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, कनाडा-ऑस्ट्रेलिया से LPG आयात की तैयारी

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है लेकिन भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। छह दिन से जारी युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है और ब्रेंट क्रूड लगभग 85.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है और घरेलू बाजार पर इसका तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर तेजी से काम किया है। एलपीजी के मामले में भारत केवल कतर पर निर्भर नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी गैस की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन देशों से आयात बढ़ाकर किसी भी संभावित कमी को पूरा किया जा सकता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भारत लगातार विभिन्न ऊर्जा उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।

    दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच कतर ने अस्थायी रूप से अपना गैस उत्पादन रोक दिया है जिसका असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। वर्तमान में भारत लगभग 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का आयात करता है जिसमें करीब 60 एमएमएससीएम यानी लगभग 30 प्रतिशत गैस कतर से आती है। सरकार का कहना है कि इस कमी को पूरा करने के लिए अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की योजना तैयार है। यदि जरूरत पड़ी तो गैस कंपनियां उद्योगों को गैस आपूर्ति की प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकती हैं लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीएनजी और सीएनजी जैसे घरेलू उपयोग वाले गैस उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उद्योगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध होते हैं इसलिए गैस की संभावित कमी की स्थिति में आपूर्ति का संतुलन बनाया जा सकता है। फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है जिससे आम उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत पड़े।

    ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि देश में फिलहाल करीब 50 दिनों के लिए तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसमें 25 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक और लगभग 25 दिनों की जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। इसके अलावा भारत लगातार दूसरे देशों से भी तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

    ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की दी जा रही धमकी को लेकर भी सरकार ने कहा है कि इसका भारत पर सीमित असर पड़ेगा। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही इस मार्ग से गुजरता है जबकि बाकी 60 प्रतिशत अन्य रास्तों से आता है। सरकार ने सुरक्षित मार्गों से आयात बढ़ाने की रणनीति भी तैयार कर ली है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध कुछ समय और चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं लेकिन संघर्ष थमते ही कीमतों में गिरावट की संभावना है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता पर्याप्त है। इस बीच भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और ओपेक जैसे संगठनों के साथ भी आपूर्ति को लेकर लगातार बातचीत कर रहा है। साथ ही समुद्री परिवहन को सुरक्षित और सस्ता बनाए रखने के लिए अमेरिका की वित्तीय संस्था डीएफसी के साथ जहाजों के बीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी है।