Author: bharati

  • अलवर में सड़क हादसा: कार की चपेट में आए युवक की मौत, दो घायल

    अलवर में सड़क हादसा: कार की चपेट में आए युवक की मौत, दो घायल


    अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में भिवाड़ी मेगा हाईवे पर शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह घटना रात करीब 10 बजे छठी मील के पास हुई। भिवाड़ी की तरफ से आ रही एक कार विपरीत दिशा से आ रही कार से आमने-सामने टकरा गई। इस जबरदस्त टक्कर के कारण कार अनियंत्रित होकर पास की दुकान में जा घुसी।

    हादसे के समय दुकान के सामने खड़ा 25 वर्षीय पप्पू खान कार की चपेट में आ गया। पुलिस ने बताया कि पप्पू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। सदर थाना पुलिस ने बताया कि दोनों कारों के ड्राइवरों और गाड़ियों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और सड़क पर अनियंत्रित गाड़ी चलाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने कहा कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दुर्घटना की पूरी रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाईवे अक्सर तेज रफ्तार गाड़ियों की वजह से हादसों का शिकार होता है। पुलिस ने इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और ड्राइवरों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस हादसे ने इलाके में सुरक्षा और सड़क नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
  • 2016 का दर्द फिर याद आया, कंगना बोलीं-ऋतिक के साथ लीगल बैटल ने बना दी थी जिंदगी मुश्किल

    2016 का दर्द फिर याद आया, कंगना बोलीं-ऋतिक के साथ लीगल बैटल ने बना दी थी जिंदगी मुश्किल

    नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों 2016 की यादें ट्रेंड कर रही हैं, जिसमें लोग उस साल की तस्वीरें और किस्से साझा कर रहे हैं। इसी बीच बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी अपनी कुछ पुरानी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं, लेकिन उनके लिए 2016 की यादें खुशियों से नहीं भरीं। कंगना ने उस साल को अपने जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण समय बताया और इशारों में अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ हुए कानूनी विवाद का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उस समय उनका करियर भले ही नई ऊंचाइयों पर था और वे सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं, लेकिन जनवरी 2016 में सह-कलाकार की ओर से भेजा गया विवादित लीगल नोटिस उनके लिए मानसिक रूप से बेहद परेशान करने वाला साबित हुआ। इस विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री को दो हिस्सों में बांट दिया और लगातार कानूनी लड़ाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। कंगना ने कहा कि उस समय कामयाबी उनके लिए जहर जैसी थी और जिंदगी नरक जैसी महसूस होने लगी थी।

    2026 में सुकून और कानूनी विवाद का इतिहास

    कंगना ने आगे लिखा कि अगर उन्हें दस साल पहले पता होता कि 2026 में उनकी जिंदगी इतनी बदलेगी, तो वे शायद उस दौर में खुद को इतना टूटता हुआ महसूस नहीं करतीं। आज वे खुलकर हंसती हैं, अपनी डाइट एंजॉय करती हैं और पुराने विवाद अब मायने नहीं रखते। कंगना ने कहा कि उस समय जिन घटनाओं को जीवन का केंद्र समझा जाता था, वे अब समय के साथ फीके पड़ गए हैं। उन्होंने भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह राहत की बात है कि अब वे 2016 में नहीं बल्कि 2026 में हैं, जहां उनकी जिंदगी अधिक सुकूनभरी है।

    2016 के विवाद की जड़ें उस समय फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचाने वाले ऋतिक रोशन के साथ उनके निजी रिश्ते से जुड़ी थीं। कंगना ने कई इंटरव्यू में ऋतिक को अपना एक्स बताया था, जबकि ऋतिक ने सभी दावों को खारिज करते हुए कंगना को कानूनी नोटिस भेजा और सार्वजनिक माफी की मांग की। कंगना ने माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे लंबी कानूनी और मीडिया लड़ाई में बदल गया। कंगना ने इस विवाद और मानसिक तनाव को अपने जीवन का सबसे कठिन समय बताया।

  • अमिताभ बच्चन ने नई तकनीक न सीख पाने का जताया अफसोस: ब्लॉग में कहा काश पहले सीख लेता

    अमिताभ बच्चन ने नई तकनीक न सीख पाने का जताया अफसोस: ब्लॉग में कहा काश पहले सीख लेता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग पोस्ट में नई तकनीक सीखने और उम्र के साथ आने वाली चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की है। ब्लॉग में बिग बी ने स्वीकार किया कि उन्हें अफसोस है कि कई चीजें उन्होंने समय रहते नहीं सीखीं खासकर वो तकनीक और प्रणालियाँ जो उनके दौर में मौजूद नहीं थीं।

    ब्लॉग में अमिताभ ने लिख
    हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है लेकिन अफसोस इस बात का है कि जो सीखना जरूरी था वह सालों पहले सीख लिया जाना चाहिए था। आज आविष्कारों और नई प्रणालियों की रफ्तार इतनी तेज है कि जब तक कोई उसे सीखना शुरू करता तब तक वक्त आगे निकल चुका होता है।

    उम्र और सीखने की चुनौती
    अमिताभ ने बताया कि उम्र के साथ सीखने की इच्छा ऊर्जा और प्रयास धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। उन्होंने हालिया अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी भी काम की बुनियादी समझ होना जरूरी है लेकिन उसके बाद काम को योग्य और विशेषज्ञ लोगों को सौंप देना चाहिए। बिग बी ने स्पष्ट किया कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह सक्षम न हो तो इसमें कोई समस्या नहीं है विशेषज्ञों की मदद लेना सही और समय बचाने वाला विकल्प है।

    आउटसोर्सिंग और विशेषज्ञों की भूमिका
    ब्लॉग में अमिताभ ने पुराने और नए दौर की तुलना करते हुए बताया कि पहले अगर किसी को कोई काम नहीं आता था तो या तो वह काम नहीं कर पाता था या पछतावा होता था।आज के समय में आउटसोर्सिंग के जरिए काम आसानी से पूरा किया जा सकता है जो मेरे लिए राहत की बात है।

    साधारण दिनचर्या में बदलाव
    अमिताभ ने साधारण दिनचर्या के कामों में उम्र के असर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले वे सामान्य गतिविधियों को सहजता से कर लेते थे लेकिन अब कुछ कामों के लिए सोचने की जरूरत होती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पैंट पहनने जैसे साधारण काम में भी संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उन्हें बैठकर ही काम करना चाहिए।

    वर्क फ्रंट अपडेट
    वर्क फ्रंट पर बिग बी हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति सीजन 17 को खत्म कर चुके हैं। इसके अलावा वे तमिल एक्शन ड्रामा वेट्टैयन में नजर आए जिसमें रजनीकांत फहाद फासिल राणा दग्गुबाती और मंजू वारियर जैसे सितारे भी शामिल हैं।

    विशेषज्ञों की राय
    विशेषज्ञों के अनुसार अमिताभ का ब्लॉग नई और पुरानी तकनीकी दुनिया में सीखने की चुनौतियों को समझने और स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उम्र बढ़ने के साथ काम को सही तरीके से संभालने के लिए विशेषज्ञों और आउटसोर्सिंग का सहारा लेना स्मार्ट और समय बचाने वाला तरीका है।अमिताभ बच्चन की यह ब्लॉग पोस्ट न केवल उनके प्रशंसकों को व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ती है बल्कि नई तकनीक सीखने उम्र के साथ बदलती जरूरतों और विशेषज्ञ मदद लेने का महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।

  • राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते

    राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते


    जयपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाते, वे बाद में अदालत से राहत की उम्मीद नहीं कर सकते। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि अत्यधिक देरी और निष्क्रियता किसी भी दावे की वैधता को कमजोर कर देती है और इसे कानून भी स्वीकार नहीं करता। यह निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें एक कर्मचारी ने करीब 30 वर्ष बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामला 1994 का था, लेकिन कर्मचारी ने 2024 में जाकर याचिका दायर की।
    न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुप बैठे रहने के बाद अब व्यक्ति को यह अधिकार नहीं रह जाता कि वह अदालत से तत्काल न्याय की मांग करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून उन लोगों की सहायता करता है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग और सक्रिय रहते हैं। न्यायालय ने तर्क दिया कि इतने वर्षों की देरी से न केवल दस्तावेज़ और साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है। इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया कि कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय और समय पर कदम उठाना अनिवार्य है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों में कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक होगा। यह न केवल न्यायिक प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि ऐसे मामलों में देरी से होने वाले विवादों को भी रोकेगा। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों की जानकारी और उनके लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई न आए। इस मामले में न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वालों को न्याय मिलने की संभावना बेहद कम होती है और ऐसे कर्मचारियों को यह समझना होगा कि समय पर कार्रवाई करना ही उनके अधिकारों की रक्षा की कुंजी है। अदालत ने अपने फैसले में प्रशासनिक दक्षता और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।

  • धौलपुर में प्रिंसपल के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक अधिकारी पर नाराजगी

    धौलपुर में प्रिंसपल के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक अधिकारी पर नाराजगी


    भरतपुर। राजस्थान के धौलपुर जिले में बाड़ा हैदर शाह सरकारी स्कूल में प्रिंसपल नरेश जैन के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रिंसपल के झालावाड़ स्थानांतरण के फैसले के विरोध में छात्राओं ने स्कूल परिसर में प्रदर्शन किया और मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक अपनी आवाज पहुंचाई।

    इस दौरान छात्राओं के आंदोलन को शांत करने और समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी अशोक उपाध्याय और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश शर्मा स्कूल पहुंचे। लेकिन छात्राओं ने तबादले रद्द करने की मांग पर अड़ी रहीं और अधिकारियों के समझाने के प्रयासों को खारिज कर दिया। वहीं, अधिकारियों के कथित हड़काने और धमकी देने के तरीकों से ग्रामीणों में भी आक्रोश फैल गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, छात्राओं का कहना है कि प्रिंसपल नरेश जैन उनके लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति से स्कूल की पढ़ाई और अनुशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि छात्राएं तबादले को लेकर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाह रही हैं। इस मामले में ग्रामीण भी छात्राओं के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों और स्थानीय समुदाय की भावनाओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और निर्णय नियमों के तहत लिया गया है।

    विदित हो कि यह विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन तक जारी रहा और छात्राओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भी शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने हालात पर नजर रखी है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि स्कूल स्तर पर निर्णय लेने में छात्रों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी और उनकी भावनाओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।

  • Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    नई दिल्ली।  हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन लंबे समय तक जवां और हेल्दी बनी रहे, लेकिन व्यस्त दिलचर्या, बढ़ती जिम्मेदारियां और सेल्फ-केयर की कमी के कारण अक्सर महिलाएं अनजाने में कुछ ऐसी स्किनकेयर मिस्टेक्स कर बैठती हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इन गलतियों की वजह से स्किन पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन जल्दी नजर आने लगता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में, जो ज्यादातर महिलाएं करती हैं और जिनसे बचकर स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है।

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना
    अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ धूप में बाहर जाने पर लगाना जरूरी है। जबकि हकीकत यह है कि सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें घर या ऑफिस के अंदर भी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सनस्क्रीन न लगाने से समय से पहले झुर्रियां और पिगमेंटेशन बढ़ने लगता है।

    स्किन की जरूरत के हिसाब से प्रॉडक्ट न चुनना
    बहुत सी महिलाएं बिना अपनी स्किन टाइप को समझे ही प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल कर लेती हैं। गलत प्रॉडक्ट्स स्किन को ड्राई, ऑयली या एक्ने-प्रोन बना सकते हैं। समय के साथ ये स्किन बैरियर को कमजोर कर देते हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखने लगते हैं।

    चेहरे को ज्यादा रगड़ना या हार्श क्लेंजर यूज करना
    चेहरे की सफाई जरूरी है, लेकिन इसे ज्यादा रगड़ना या कठोर क्लींजर का इस्तेमाल स्किन की नेचुरल नमी छीन लेता है। ड्राई और डैमेज्ड स्किन पर फाइन लाइन्स जल्दी नजर आती हैं और एजिंग के साइन बढ़ जाते हैं।

    हाइड्रेशन की अनदेखी करना
    पर्याप्त पानी न पीना और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल न करना स्किन को डल और बेजान बना देता है। डिहाइड्रेशन से स्किन पर झुर्रियां जल्दी उभर आती हैं। स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।

    स्लीप रूटीन नजरअंदाज करना
    कम नींद लेना या अनियमित नींद की आदत स्किन की हेल्थ को प्रभावित करती है। नींद के दौरान स्किन रिपेयर होती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, पफी आईज और समय से पहले एजिंग की समस्या हो जाती है।

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट
    जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस और जंक फूड, मीठे व तैलीय खाने का सेवन स्किन को नुकसान पहुंचाता है। ये आदतें कोलेजन प्रॉडक्शन को कम करती हैं और स्किन की इलास्टिसिटी घटा देती हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखते हैं।

    नाइट केयर स्किप करना
    दिनभर की थकान के बाद बिना चेहरा साफ किए सो जाना या नाइट क्रीम/सीरम का इस्तेमाल न करना स्किन के लिए हानिकारक है। रात का समय स्किन रिपेयर का होता है, इसे इग्नोर करना एजिंग प्रॉसेज को बढ़ाता है।

  • विप्रो का Q3FY26 नतीजा: मुनाफा 3,119 करोड़, सालाना 7% गिरावट; 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

    विप्रो का Q3FY26 नतीजा: मुनाफा 3,119 करोड़, सालाना 7% गिरावट; 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान


    नई दिल्ली। आईटी सर्विस प्रोवाइडर विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही Q3FY26 अक्टूबर–दिसंबर के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 7% गिरकर ₹3,119 करोड़ रह गया जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,354 करोड़ था। हालांकि विप्रो ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक आईटी माहौल के बीच रेवेन्यू में 5.5% की बढ़ोतरी दर्ज की है। तिमाही का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹23,556 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹22,318 करोड़ था। मुनाफे में गिरावट के पीछे मुख्य कारणों में लागत दबाव, वैश्विक क्लाइंट खर्च में सतर्कता और कुछ प्रमुख बाजारों में धीमी डिमांड को माना जा रहा है।

    शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
    नतीजों के दिन गुरुवार को विप्रो का शेयर 2.54% की बढ़त के साथ ₹266.80 पर बंद हुआ। हालांकि, कैलेंडर ईयर आधार पर स्टॉक अब तक लगभग 7.38% कमजोर हुआ है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹2.80 लाख करोड़ है। विश्लेषकों के अनुसार, मुनाफे में गिरावट पहले से अनुमानित थी इसलिए निवेशकों की प्रतिक्रिया संतुलित रही।

    निवेशकों के लिए डिविडेंड
    विप्रो के बोर्ड ने ₹6 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड की मंजूरी दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आईटी सेक्टर की ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डिविडेंड की घोषणा लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    कर्मचारियों और संचालन अपडेट
    कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हुआ है और एट्रिशन रेट में मामूली स्थिरता देखने को मिली। मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि धीरे-धीरे डिमांड में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, खासकर कंसल्टिंग और डिजिटल सर्विसेज सेगमेंट में।विप्रो एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनी है, जिसकी मौजूदगी 65 से अधिक देशों में है। वैश्विक आर्थिक हालात और आईटी खर्च में सुस्ती के बीच कंपनी लागत नियंत्रण और बड़े डील्स पर फोकस कर रही है। आने वाली तिमाहियों में निवेशक डिमांड रिकवरी और मार्जिन सुधार पर नजर रखेंगे।

  • भजनलाल ने राजस्थान में ग्राम पंचायतों में 23 जनवरी से विशेष शिविर लगाने के दिए निर्देश

    भजनलाल ने राजस्थान में ग्राम पंचायतों में 23 जनवरी से विशेष शिविर लगाने के दिए निर्देश


    जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट ग्राम 2026 से पूर्व ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। ये शिविर 23 जनवरी, बसंत पंचमी से शुरू होंगे और इसका उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाना है। श्री शर्मा ने शुक्रवार रात मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस मीट में अधिक से अधिक कृषकों और पशुपालकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ये शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि शिविरों में विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जाए और किसानों को उनके लाभों का सीधा लाभ दिलाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से न केवल किसानों और पशुपालकों की योजनाओं से रूबरू होने की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों और कृषि-उन्नयन के उपायों की जानकारी भी मिलेगी। ये शिविर ग्राम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे सभी हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित हो सके। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविरों का समुचित प्रचार-प्रसार किया जाए और सभी पंचायतों में उनका प्रभावी आयोजन सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि मीट से पहले होने वाले इन शिविरों में जुटाए गए अनुभव और सुझावों का मीट में उपयोग किया जाए, ताकि प्रदेश के कृषकों और पशुपालकों के हित में रणनीतियाँ और बेहतर बनाई जा सकें।

    गौरतलब है कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 मार्च में आयोजित होने वाला है और यह मीट कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, निवेश और किसानों के लाभ को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले शिविरों से किसानों और पशुपालकों को धरातल पर विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त होगी और उन्हें व्यावहारिक सहायता भी मिलेगी। राजस्थान सरकार की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर योजनाओं की पहुंच बढ़ाना और कृषकों को उनकी खेती और पशुपालन गतिविधियों में सुधार हेतु जानकारी प्रदान करना है। इससे प्रदेश में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • तमन्ना भाटिया के आइटम नंबर ‘आज की रात’ ने यूट्यूब पर बनाया रिकॉर्ड, 100 करोड़ व्यूज पार

    तमन्ना भाटिया के आइटम नंबर ‘आज की रात’ ने यूट्यूब पर बनाया रिकॉर्ड, 100 करोड़ व्यूज पार

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अपने करियर का एक और बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। उनकी फिल्म स्त्री-2 का आइटम नंबर आज की रात अब यूट्यूब पर 100 करोड़ व्यूज का आंकड़ा पार कर चुका है। यह उपलब्धि न केवल तमन्ना के लिए, बल्कि भारतीय फिल्म संगीत जगत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।तमन्ना ने इस ऐतिहासिक क्षण पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने शूटिंग के बीहाइंड द सीन क्लिप्स साझा करते हुए लिखा, “पहले व्यू से लेकर 1 बिलियन व्यूज तक। आप सभी के प्यार के लिए शुक्रिया।” इन क्लिप्स में तमन्ना को कोरियोग्राफर विजय गांगुली और टीम के अन्य सदस्यों के साथ डांस और परफॉर्म करते देखा जा सकता है।

    गाने की खासियत
    आज की रात में श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव भी फिल्म में नजर आए हैं, लेकिन गाना तमन्ना भाटिया की परफॉर्मेंस के लिए चर्चित हुआ।

    गायक: मधुबंती बागची और दिव्या कुमार

    गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य

    संगीत: सचिन-जिगर

    तमन्ना की ऊर्जा और डांसिंग स्किल्स ने गाने को सोशल मीडिया और यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर लगातार दर्शकों का प्यार दिलाया। यही वजह है कि यह गाना 100 करोड़ व्यूज क्लब में शामिल हो गया।

    डिजिटल युग में बॉलीवुड का प्रभाव
    इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि बॉलीवुड में संगीत, परफॉर्मेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं। तमन्ना और मेकर्स ने दर्शकों की प्रतिक्रिया को देखते हुए गाने के BTS वीडियो और क्लिप्स भी सोशल मीडिया पर साझा किए, जिससे गाने की लोकप्रियता और बढ़ी।

    रिकॉर्ड की सूची में शामिल अन्य गाने

    भारतीय गानों में 100 करोड़ व्यूज का आंकड़ा पार करने वाले अन्य हिट्स में शामिल हैं:

    श्री हनुमान चालीसा-हरिहरन

    पंजाबी गाने लॉग लाची और लहंगा

    हरियाणवी गाना 5 गज का दामन

    बॉलीवुड हिट्स दिलबर, आंखे मारे, राउडी बेबी

    विशेषज्ञों के अनुसार 100 करोड़ व्यूज दर्शकों की व्यापक स्वीकार्यता और गाने की स्थायी लोकप्रियता का संकेत हैं। तमन्ना भाटिया का यह आइटम नंबर दर्शकों में रोमांच और उत्साह दोनों पैदा करता है।इस उपलब्धि के साथ तमन्ना बॉलीवुड के चुनिंदा कलाकारों में शामिल हो गई हैं, जिनके गाने ने यूट्यूब पर 100 करोड़ से अधिक व्यूज हासिल किए हैं। यह डिजिटल युग में भारतीय सिनेमा के लिए एक नया रिकॉर्ड और मील का पत्थर है।

  • राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी पर सरकार को घेरा, बोले– लोग पानी पीकर मर रहे, यही अर्बन मॉडल

    राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी पर सरकार को घेरा, बोले– लोग पानी पीकर मर रहे, यही अर्बन मॉडल


    इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर शुक्रवार को सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि लोग पानी पीकर मर रहे हैं और इसे ही स्मार्ट सिटी और अर्बन मॉडल बताया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही है और इसे पूरे मामले की जवाबदेही लेनी होगी। शनिवार को इंदौर पहुंचे राहुल गांधी ने सबसे पहले बॉम्बे हॉस्पिटल का दौरा किया, जहां उन्होंने दूषित पानी से प्रभावित मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की। वहां उन्होंने रोगियों की हालत और उनके परिवारों की समस्याओं को बारीकी से समझा और अस्पताल प्रशासन से स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद वे भागीरथपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने दूषित पानी के कारण अपनी जान गंवाने वाली गीता बाई और जीवनलाल के परिवारों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    राहुल गांधी ने दोनों परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में चेक भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश का नहीं है, बल्कि पूरे देश में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली की कमजोरी का उदाहरण है। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्रवाई करने और लोगों को सुरक्षित पीने के पानी की गारंटी देने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि जल संकट और दूषित पानी की आपूर्ति जैसी समस्याओं को अर्बन मॉडल और स्मार्ट सिटी की उपलब्धियों के नाम पर छुपाया जा रहा है। उनका कहना था कि जनता की जान से खेलना स्वीकार्य नहीं है और इस मुद्दे पर सभी स्तरों पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल गांधी के इस दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी उनसे मिलकर अपने अनुभव साझा किए और मांग की कि सरकार ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इंदौर का मामला चेतावनी है कि शहरों में जल प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए। राहुल गांधी की यह पहल लोगों के बीच संवेदनशीलता और तत्काल कार्रवाई की मांग को उजागर करती है। उनका यह दौरा केवल समर्थन और सहानुभूति दिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने वास्तविक मदद और आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिली।