सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
मंगलादित्य योग का निर्माण
उच्च शिक्षा और विदेश यात्रा के लिए शुभ समय
धन और करियर में प्रगति
सामाजिक प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी

युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया और निलंबन की वजह
डीईओ की कार्रवाई
निलंबित शिक्षकों की सूची
सम्बंधित अधिकारी और कदम

सेल्समैन का बयान
दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।
कलेक्टर का आश्वासन
कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।
सरपंच की शिकायत
ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

शनिवार का दान और शनिदेव की कृपा
शनिवार का दिन विशेष रूप से शनिदेव के साथ जुड़ा होता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन दान करना बहुत फलदायी माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, पुराने और व्यर्थ सामान को निकालने, और अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाने का होता है। लेकिन ध्यान रहे कि इस दिन दान करते समय कुछ खास सावधानियाँ रखनी चाहिए। यदि किसी भी वस्तु का दान बिना ध्यान के किया जाए, तो यह शनिदेव को नाराज कर सकता है और जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शनिवार को दान करते समय कौन सी चीजों से बचें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को कुछ वस्तुओं का दान करना निषेध माना जाता है। इन वस्तुओं को दान करने से शनिदेव की नाराजगी हो सकती है और इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
नमक का दान
शनिवार के दिन नमक का दान करना अशुभ माना जाता है। नमक का दान करने से घर में दरिद्रता और वित्तीय संकट आ सकता है। यह शनि के दुष्प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकते हैं।
धारदार वस्तुएं चाकू, कैंची, सुई
धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची, या सुई का दान करना भी शनि दोष को बढ़ा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पारिवारिक रिश्तों में तनाव और विघटन हो सकता है। साथ ही यह धन की हानि का कारण बन सकता है।
काले रंग की चीजें
शनिवार को काले रंग की वस्तुओं का दान करना भी उचित नहीं माना जाता। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि काले रंग का दान यदि जरूरतमंद व्यक्ति को किया जाए तो लाभकारी हो सकता है, लेकिन बिना ध्यान के इसका दान नुकसानदायक हो सकता है।
झूठे आभूषण या टूटे सामान का दान
पुराने या टूटे हुए सामान का दान भी सही नहीं माना जाता। इसके बजाय नए और उपयोगी सामान का दान करना चाहिए। पुरानी या टूट चुकी चीजों का दान शनि दोष को और भी बढ़ा सकता है, जिससे जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
क्या करें, और क्या न करें
शनिवार के दिन दान करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो चीजें आप दान कर रहे हैं, वे पूरी तरह से साफ और उपयोगी हों। इससे दान का पुण्य और अधिक बढ़ता है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि दान करते समय मन में शुद्धता और शुभकामनाओं का भाव हो। दान करने के साथ ही अपनी नकारात्मकता और बुरे कर्मों को भी छोड़ने का प्रयास करें। साथ ही, यह भी याद रखें कि शनिवार को उपवास रखने और पूजा अर्चना करना भी शनि देव की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावी उपाय है। शनिदेव की आराधना करने से शनि दोष की मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
शनिवार का दिन शनि देव की कृपा पाने और जीवन में खुशहाली लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन किए गए दान से न सिर्फ शनि दोष समाप्त होता है, बल्कि इसके प्रभाव से जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान भी मिलता है। हालांकि, यह जरूरी है कि दान करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाए। नमक और धारदार वस्तुओं का दान न करने से आप शनिदेव की कृपा पा सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

क्या है कंपनी का प्लान?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के जरिए रिलायंस ग्रुप की यह कंपनी अपनी 2.50 परसेंट की हिस्सेदारी बेचकर 4.5 अरब डॉलर जुटा सकती है. इसी के साथ यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इससे पहले साल 2025 में ह्युडई मोटर इंडिया 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लेकर आई थी इसलिए अभी तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड इसी कंपनी के नाम है.
जेरोधा वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, “अगस्त 2025 में 48वीं रिलायंस इंडस्ट्रीज AGM में मुकेश अंबानी ने औपचारिक रूप से कहा था कि जियो IPO के लिए फाइल करने की सभी तैयारियां कर रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी भारतीय मार्केट अथॉरिटीज से सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद 2026 के पहले छमाही में जियो को लिस्ट करने का प्लान बनाकर चल रही है इसलिए रिलायंस जियो IPO के जून 2026 तक भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है.
कितना है GMP?
रिलायंस जियो IPO GMP बिगुल के मुताबिक, रिलायंस जियो IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल 93 रुपये प्रति शेयर चल रहा है. इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर DRHP फाइलिंग से काफी पहले ग्रे मार्केट में उपलब्ध हैं. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कंपनी आईपीओ के जरिए 2.50 परसेंट हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इससे पहले, मार्केट रेगुलेटर सेबी IPO लाने वाली बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बिक्री का न्यूनतम साइज 5 परसेंट की जगह घटाकर 2.5 परसेंट करने का प्रस्ताव लेकर आई थी, जो अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी के अधीन है.
कितना रहेगा प्राइस बैंड?
रिलायंस जियो IPO की अनुमानित प्राइस बैंड को लेकर बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा, “कंपनी के बताए गए वैल्यूएशन रेंज 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के हिसाब से और रिटेल इन्वेस्टर्स को 15-20 परसेंट तक डिस्काउंट मिलने की बात को लेकर चले, तो रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिलायंस जियो IPO शेयर की अनुमानित कीमत 1,048 से 1,457 प्रति शेयर के बीच रहने की संभावना है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आखिर में कौन सा वैल्यूएशन बैंड तय होता है.’

पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले ईडी ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर बुधवार (14 जनवरी 2026) को सुनवाई प्रस्तावित है। हाई कोर्ट में ईडी ने कहा कि जांच में जानबूझकर रुकावट डाली गई, जिससे एजेंसी का काम प्रभावित हुआ।
याचिका में ईडी ने मामले की सीबीआई जांच कराने और केस दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।
ED से टकराव के बीच ममता सरकार का जवाब
ईडी की कार्रवाई के जवाब में ममता बनर्जी सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष जरूर सुना जाए, ताकि कोई एकतरफा फैसला न हो।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला गुरुवार (8 जनवरी 2026) को शुरू हुआ, जब ईडी ने कोयला घोटाला मामले में राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापेमारी की।
ईडी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ अहम फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखवाए गए, जिसके बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमा गया।

पैर घसीटकर चलना
कई लोग चलते वक्त पैर घसीटकर चलते हैं, यह आदत ज्योतिष के अनुसार राहु और शनि ग्रहों को कमजोर करती है। इससे व्यक्ति के जीवन में अचानक परेशानियां आ सकती हैं, मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है, और कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं। राहु के प्रभाव से व्यक्ति को अचानक धन हानि या व्यवसायिक नुकसान हो सकता है। शनि ग्रह का प्रभाव करियर में अड़चनें उत्पन्न कर सकता है। उपाय चरणों को पूरी तरह से उठाकर चलें, ताकि आपके कदम मजबूती से आगे बढ़ें और राहु-शनि की नकारात्मकता दूर हो।
पैर पर पैर चढ़ाकर बैठना
यह आदत भी चंद्रमा और राहु को प्रभावित करती है। जब आप पैर पर पैर चढ़ाकर बैठते हैं, तो यह आपके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। साथ ही, इस आदत से सामाजिक रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं। माना जाता है कि इस तरह से बैठने से किसी की अनदेखी या असम्मान हो सकता है, जिससे जीवन में तनाव बढ़ सकता है। उपाय साफ और सीधी स्थिति में बैठें, जिससे मानसिक शांति बनी रहे और चंद्रमा मजबूत हो।
बैठे-बैठे पैर हिलाना
यह आदत भी बहुत सामान्य होती है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार यह राहु और शनि को कमजोर करती है। यह आदत मानसिक अस्थिरता और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। लोग अक्सर बैठे-बैठे पैर हिलाते हैं, लेकिन यह आदत ध्यान केंद्रित करने में बाधा डालती है और शनि के प्रभाव को नकारात्मक बनाती है। उपाय जब भी आप बैठे हों, अपने पैर को स्थिर रखें और ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।
बिना जूतों के घर में प्रवेश करना
घर में प्रवेश करते समय बिना जूतों के अंदर आना भी अशुभ माना जाता है। यह आदत राहु और शनि को प्रभावित कर सकती है। जूतों को सही तरीके से बाहर ही छोड़ना चाहिए, क्योंकि यह घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को अंदर लाने का कारण बन सकता है। उपाय घर में प्रवेश करते समय जूते बाहर ही रखें और घर में प्रवेश करने से पहले हल्का ध्यान या नमस्कार जरूर करें।
पैर को बढ़ा कर बैठना
अगर आप कभी पैर फैलाकर बैठते हैं या पैरों को चढ़ाकर बैठते हैं, तो यह भी आपके कुंडली के ग्रहों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह आदत शनि और चंद्रमा पर प्रतिकूल असर डालती है और जीवन में विरोधी परिस्थितियों को जन्म देती है।
उपाय जब भी बैठें, अपने पैर को सही तरीके से रखें और अच्छे से सीधे बैठें
हमारी दिनचर्या में बहुत सी आदतें छोटी-छोटी लग सकती हैं, लेकिन ये ग्रहों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इसलिए, इन आदतों को सुधारकर आप न केवल अपनी शारीरिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि कुंडली के ग्रहों को भी मजबूत कर सकते हैं। अगर आप इन आदतों से बचते हैं, तो आपको मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

HPV क्या है और यह कितना आम है
HPV 200 से अधिक वायरसों का समूह है, जिसमें कुछ वायरस सामान्य होते हैं, जबकि कुछ हाई रिस्क खतरनाक होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग हर सेक्शुअली एक्टिव व्यक्ति जीवन में कभी न कभी HPV से संक्रमित हो सकता है।
HPV कैसे फैलता है और यह क्यों खतरनाक है
HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है। इसमें वेजाइनल, एनल और ओरल सेक्स शामिल होते हैं। यह वायरस अक्सर बिना लक्षण के शरीर में रहता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से हाई-रिस्क HPV सर्वाइकल, एनल, गले ओरोफैरिंजियल और पेनाइल कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। HPV से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं HPV का संबंध कई प्रकार के कैंसर से है, जैसे:
HPV वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है
विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन की सही उम्र 9 से 12 साल के बीच है, क्योंकि इस उम्र में टीका वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाता है और सबसे प्रभावी होता है। HPV वैक्सीनेशन के लिए कितनी डोज जरूरी हैं 9 से 14 साल की उम्र में दो डोज काफी होती हैं। 15 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को तीन डोज की सलाह दी जाती है।
क्या सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी वैक्सीनेशन से फायदा होता है
हां, सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी HPV वैक्सीन से फायदा हो सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन पहले से मौजूद संक्रमण का इलाज नहीं करती, लेकिन यह भविष्य में होने वाले संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे वयस्क जिन्हें HPV के सभी खतरनाक प्रकारों से संपर्क नहीं हुआ, उनके लिए यह वैक्सीनेशन बेहद फायदेमंद हो सकती है।
क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है
विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं, जैसे कि इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या हल्का बुखार। गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन यदि आप गर्भवती हैं या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से गुजर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या सिर्फ अच्छी हाइजीन से HPV से बचा जा सकता है
नहीं, HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है, और इसे केवल अच्छी हाइजीन से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कंडोम के इस्तेमाल से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यह 100% सुरक्षा नहीं प्रदान करता।
अगर बचपन में वैक्सीन नहीं लगवाई हो तो क्या करें
अगर किसी ने बचपन में HPV वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो 26 साल तक कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर के परामर्श से 45 साल तक भी वैक्सीनेशन कराया जा सकता है। क्या HPV वैक्सीन से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है HPV वैक्सीन का फर्टिलिटी या हार्मोनल स्तर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, यह वैक्सीनेशन कैंसर और प्रजनन स्वास्थ्य को सुरक्षित रखती है, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है। HPV वैक्सीन HPV वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की सबसे मजबूत कड़ी है। यदि आपने पहले वैक्सीनेशन नहीं कराया है, तो डॉक्टर से संपर्क कर इसे प्राप्त करें, क्योंकि यह भविष्य में आपकी सेहत और जीवन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

देसी कफ सिरप शॉट: राहत का खजाना
इन तत्वों के फायदे
अदरक: अदरक का तीखापन गले की जलन को शांत करता है और बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है। शहद: शहद गले की सूजन कम करता है और इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण से बचाते हैं। हल्दी: हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन को कम करता है और सांस की नलियों को राहत देता है। काली मिर्च: काली मिर्च बलगम को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करती है। तुलसी: तुलसी में मौजूद वायरस-लड़ने वाले गुण इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।
देसी कफ सिरप शॉट बनाने की विधि:
सबसे पहले अदरक को हल्की आंच पर थोड़ा भून लें। अब अदरक और तुलसी की पत्तियों को एक साथ पीस लें। इस मिश्रण का रस छानकर निकाल लें। फिर इस रस में सितोपलादि पाउडर, काली मिर्च पाउडर, हल्दी और शहद डालकर अच्छे से मिला लें।

जानकारी के मुताबिक, यह विमान Cessna 208 Grand Caravan था, जो एक सिंगल-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। उड़ान के दौरान जब विमान राउरकेला एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर था, तभी उसमें अचानक तकनीकी खराबी आ गई।
जमीन से टकराने पर विमान को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन सौभाग्य से उसमें आग नहीं लगी। यही वजह रही कि एक बड़ा विस्फोट और जान-माल की भारी क्षति टल गई। विमान में कुल 4 यात्री और 2 क्रू मेंबर सवार थे। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और यात्रियों को मलबे से बाहर निकालने में मदद की। प्रशासन और राहत टीमें भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
घटना की पुष्टि करते हुए भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि यह एक गंभीर तकनीकी आपात स्थिति थी, लेकिन पायलट की सूझबूझ ने बड़ा हादसा होने से रोक लिया। वहीं, ओडिशा सरकार भी तुरंत हरकत में आई।
इस घटना की सूचना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दे दी गई है। DGCA और राज्य परिवहन विभाग की संयुक्त टीम मामले की जांच करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि तकनीकी खराबी की असली वजह क्या थी, क्या विमान की मेंटेनेंस प्रक्रिया में कोई चूक हुई थी, और क्या उड़ान से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
इंडिया वन एयर ओडिशा के कई शहरों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण निजी विमान सेवा है। ऐसे में यह हादसा क्षेत्रीय हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि छोटे विमानों की नियमित और सख्त तकनीकी जांच कितनी जरूरी है।