Author: bharati

  • नशेड़ियों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, पत्थरबाजी से डरकर भागे

    नशेड़ियों ने पुलिसकर्मियों पर किया हमला, पत्थरबाजी से डरकर भागे


    सतना । कोलगवां थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक पंद्रह स्थित पानी टंकी क्षेत्र में नशेड़ियों ने पुलिस पर पत्थर से हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब पुलिसकर्मी शराब पीकर हंगामा कर रहे युवकों को समझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। करीब एक दर्जन आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिससे पुलिसकर्मियों को जान बचाकर पीछे हटना पड़ा।

    सूचना मिलने के बाद दो पुलिसकर्मी बाइक से मौके पर पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि कुछ युवक शराब पीकर गाली-गलौज कर रहे थे और क्षेत्र में अशांति फैला रहे थे। जैसे ही पुलिसकर्मियों ने नशेड़ियों को समझाने की कोशिश की, उन युवकों ने न केवल पुलिसकर्मियों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि पत्थरबाजी भी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों को अपनी जान की सुरक्षा के लिए वहां से भागना पड़ा।

    इस हमले में पांच पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, लेकिन कोई बड़ी घटना नहीं घटी। पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद नशेड़ियों का एक समूह था जो पहले तो गाली-गलौज कर रहा था और फिर अचानक हमला कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन हमलावरों का कुछ पता नहीं चल पाया है।पुलिस ने इस हमले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना बनाई है। इस घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि इलाके में बढ़ते नशे के मामलों पर नियंत्रण रखने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

  • Republic Day Long Weekend 2026: इन छुट्टियों में घूम आएं भारत की 5 खूबसूरत जगहें, ट्रिप रहेगा यादगार

    Republic Day Long Weekend 2026: इन छुट्टियों में घूम आएं भारत की 5 खूबसूरत जगहें, ट्रिप रहेगा यादगार


    नई दिल्‍ली ।  Republic Day 2026 : रोजाना की भागदौड़ और काम के प्रेशर के बीच ब्रेक मिलना किसी बोनस से कम नहीं होता, खासकर उन युवाओं के लिए जिन्होंने नए साल पर अपने लिए Travel Goals सेट किए हैं. इस लॉन्ग वीकेंड में आप आसानी से बजट ट्रिप(Budget Trip) प्लान कर सकते हैं, जिसमें ज्यादा छुट्टियां भी नहीं लगतीं और जेब पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ता.
    राजस्थान- कम दिनों में ज्यादा कुछ देखने का प्लान हो तो राजस्थान बेहतरीन जगह है. जयपुर, उदयपुर और जैसलमेर जैसे शहर न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए मशहूर हैं बल्कि यहां का फूड, लोकसंस्कृति और हैंडलूम भी लोगों को बेहद आकर्षित करता है. जनवरी में यहां का मौसम सुहावना रहता है, इसलिए किले, हवेलियां, लेक और डेजर्ट सफारी आराम से एक्सप्लोर की जा सकती हैं.
    शिमला- सर्दियों में हिल स्टेशन का मजा लेना हो तो शिमला की ओर रुख किया जा सकता है. दिल्ली-एनसीआर से यह डेस्टिनेशन रोड ट्रिप के लिए भी फेमसहै. इस मौसम में यहां बर्फबारी देखने का मौका मिल सकता है, जो ट्रिप का अनुभव और यादगार बना देता है. मॉल रोड, रिज, आसपास के व्यू पॉइंट्स और कैफे, कम दिनों में भी आसानी से घूमे जा सकते हैं.
    ऋषिकेश- एडवेंचर और शांति दोनों साथ चाहिए हों तो ऋषिकेश एक परफेक्ट जगह है. यहां रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, कैंपिंग और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. इसके साथ ही गंगा तट पर होने वाली आरती और पहाड़ों के बीच शांत वातावरण मानसिक सुकून भी देता है.
    पचमढ़ी- मध्य प्रदेश का पचमढ़ी नेचर लवर्स के लिए खास आकर्षण रखता है. यह हिल स्टेशन अपनी हरी-भरी वादियों, झरनों और ऐतिहासिक गुफाओं के लिए जाना जाता है. जनवरी का मौसम घूमने के लिए अनुकूल रहता है, इसलिए कम दिनों में भी यहां की खूबसूरती आराम से देखी जा सकती है.
    लैंसडाउन- जो लोग भीड़-भाड़ से दूर शांत जगह तलाश रहे हैं, उनके लिए उत्तराखंड का लैंसडाउन बढ़िया विकल्प है. यहां का सुकून भरा माहौल, ऊंचे देवदार के पेड़ और साफ-सुथरी घाटियां इसे एक रिलैक्सिंग वीकेंड डेस्टिनेशन बनाते हैं.
    रिपब्लिक डे 2026 का यह लॉन्ग वीकेंड उन लोगों के लिए खास मौका है जो नए साल में खुद के लिए “मी-टाइम” या “ट्रैवल गोल्स” सेट कर चुके हैं. सही बजट, पहले से बुकिंग और थोड़ा-सा प्लानिंग करके यह छोटा ब्रेक आपकी यादों में लंबे समय तक जगह बना सकता है. तो अगर आप भी छुट्टियों को सिर्फ कैलेंडर पर देखकर छोड़ देने वालों में नहीं हैं, तो इस बार कहीं निकल पड़ें, नई जगहें देखिए, नए अनुभव जुटाइए और साल की शुरुआत पॉजिटिव एनर्जी के साथ कीजिए
  • ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल

    ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल


    ग्वालियर । ग्वालियर में कड़ाके की ठंड ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जनवरी में बीते 25 साल का रिकॉर्ड टूट गया, जब अधिकतम तापमान गिरकर सिर्फ 10.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी लुढ़ककर 5 डिग्री दर्ज किया गया।
    मौसम विभाग के अनुसार बीते 100 साल में यह दूसरी बार है जब जनवरी के महीने में ग्वालियर में इतनी गंभीर ठंड दर्ज की गई है। घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते सुबह से लेकर दिन तक ठंड का असर बना हुआ है और लोगों को दिन में भी रात जैसा एहसास हो रहा है।

    शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे तक पूरा शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपटा रहा। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। पिछले आठ दिनों से सुबह देर तक और शाम को जल्दी घना कोहरा छा रहा है। दृश्यता घटकर 60 से 100 मीटर रह गई, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

    ठंड के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्राइमरी और मिडिल स्कूलों की छुट्टियां 10 जनवरी तक बढ़ा दी हैं।

    मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 11.1 डिग्री कम रहने के कारण दिन को ‘कोल्ड सीवियर डे’ घोषित किया गया। इससे पहले साल 2019 में अधिकतम तापमान 8.3 डिग्री तक गिरा था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही जेट स्ट्रीम हवाओं के कारण घना कोहरा बना हुआ है। वहीं कश्मीर की ओर से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही बर्फीली हवाएं हिमालय की बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक ला रही हैं, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई है।

    ठंड से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव जलवाए हैं, ताकि राहगीरों और बेसहारा लोगों व जानवरों को कुछ राहत मिल सके।

    इसके बावजूद धूप न के बराबर दिखाई दे रही है और सूरज के तेवर पूरी तरह ढीले पड़े हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। अगले 48 घंटों में न्यूनतम तापमान और गिर सकता है और घना कोहरा भी बना रहेगा।

    कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्वालियर आने वाली कई ट्रेनें 5 से 6 घंटे तक देरी से चल रही हैं। दिल्ली से आने वाली पंजाब मेल करीब 4 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस लगभग 2 घंटे और मंगला एक्सप्रेस करीब 5 घंटे लेट रही। वहीं भोपाल से आने वाली मंगला एक्सप्रेस भी साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंची, जबकि केरल और समता एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से काफी देर से चल रही हैं।

    हवाई यातायात पर भी कोहरे का असर पड़ा है। ग्वालियर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स 2 से 3 घंटे तक देरी से संचालित हो रही हैं। गुरुवार को इंडिगो की मुंबई और दिल्ली फ्लाइट्स और एयर इंडिया की बेंगलुरु फ्लाइट कोहरे के कारण देर से आईं और रवाना हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर ग्वालियर में ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है और आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

  • भोपाल एयरपोर्ट पर नया आईएलएस सिस्टम: उड़ानें अब समय पर, यात्रियों को मिली राहत

    भोपाल एयरपोर्ट पर नया आईएलएस सिस्टम: उड़ानें अब समय पर, यात्रियों को मिली राहत


    भोपाल । भोपाल राजा भोज एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को मौसम के खराब होने और कोहरे के कारण होने वाली उड़ान देरी से राहत मिल गई है। एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक कैटेगरी-2 इंस्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम आईएलएस की स्थापना के साथ अब उड़ानों की टाइमिंग पर ब्रेक लग गया है। पहले जहां मौसम खराब होने और घने कोहरे के कारण उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ता था, वहीं अब इस नए सिस्टम की मदद से ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है। पिछले दिसंबर-जनवरी के महीने में भोपाल एयरपोर्ट पर उड़ानें लेट होने और डायवर्ट होने की समस्या आम थी, लेकिन अब नए सिस्टम के चलते एक भी उड़ान डायवर्ट नहीं हुई है।
    आईएलएस सिस्टम की स्थापना का काम तीन साल से चल रहा था, जिसमें मौसम उपकरणों के अपग्रेडेशन के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रनवे से लगी कुछ ज़मीन सेना की थी, जिसके कारण इस उपकरण की स्थापना में रुकावट आ रही थी। हालांकि, इस समस्या का समाधान होते ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस अत्याधुनिक सिस्टम की स्थापना पूरी की। अब जब दृश्यता 350 मीटर तक घट जाती है, तब भी विमान इस सिस्टम की मदद से सुरक्षित लैंड कर सकते हैं।
    नए सिस्टम की स्थापना से न केवल उड़ान की देरी में कमी आई है, बल्कि यात्रियों को भी राहत मिली है। इस अपग्रेडेशन को नागर विमानन महानिदेशालय डीजीसीए से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद पूरी तरह से लागू किया गया है। अब यह सिस्टम अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोहरे और खराब मौसम के बावजूद उड़ानें समय पर चल सकें।
    एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इस अपग्रेडेशन से यात्रा की सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। पिछले कुछ समय से एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है, और यह नया सिस्टम उनके लिए एक बड़ी राहत साबित हो रहा है। अब भोपाल एयरपोर्ट देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है, जहां अत्याधुनिक कैटेगरी-2 आईएलएस सिस्टम की स्थापना की गई है। यह एयरपोर्ट इस प्रणाली के साथ प्रदेश का पहला और देश का तीसरा एयरपोर्ट बन चुका है, जिसने अपने उड़ान संचालन को और भी सुरक्षित और प्रभावी बना लिया है।

  • साकेत कोर्ट में दर्दनाक हादसा: काम के दबाव और मानसिक तनाव से परेशान कर्मचारी ने इमारत से कूदकर की आत्महत्या

    साकेत कोर्ट में दर्दनाक हादसा: काम के दबाव और मानसिक तनाव से परेशान कर्मचारी ने इमारत से कूदकर की आत्महत्या




    नई दिल्ली।
    दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां कोर्ट में कार्यरत कर्मचारी हरीश सिंह महार ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना से पूरे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें हरीश ने इस कठोर कदम के पीछे की वजह विस्तार से बताई है।
    डीसीपी साउथ के अनुसार मृतक 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और लंबे समय से दफ्तर के काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। सुसाइड नोट में हरीश ने लिखा है कि अहलमद पद पर जिम्मेदारी बढ़ने के बाद उन्हें नींद आनी बंद हो गई थी और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक स्थिति के चलते उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लेने पर विचार किया था, लेकिन नियमों के कारण पेंशन 60 वर्ष की आयु के बाद ही मिलने की बाध्यता थी, जिससे वह और टूट गए।
    मरने से पहले हरीश ने कोर्ट प्रशासन से अपील की कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए नियमों में मानवीय बदलाव किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी मानसिक पीड़ा न सहनी पड़े। उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी भी अधिकारी या सहकर्मी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और पूरा दोष खुद पर लिया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मृतक के परिवार, दोस्तों व सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल किसी आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं और इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। यह घटना एक बार फिर काम के दबाव और मानसिक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान खींचती है, जिन्हें समय रहते समझना और समाधान निकालना बेहद जरूरी है।
  • Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली। थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहा सेंसर सर्टिफिकेट विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को तुरंत फिल्म को UA सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
    फिल्म के निर्माताओं ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेशन में हो रही देरी को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि बिना किसी ठोस वजह के सर्टिफिकेट रोका जा रहा है, जिससे प्रोड्यूसर्स को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 6 जनवरी को CBFC द्वारा जारी उस पत्र को भी रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजने की बात कही गई थी।
    CBFC चेयरपर्सन पर भी कोर्ट की टिप्पणी
    मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CBFC चेयरपर्सन के पास फिल्म को दोबारा रिव्यू कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, फिल्म के खिलाफ की गई शिकायतें बाद में सोची-समझी प्रतीत होती हैं और यदि ऐसी शिकायतों को महत्व दिया गया, तो यह एक खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है।
    UA सर्टिफिकेट के साथ रिलीज का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद ‘जना नायकन’ को बिना किसी और देरी के UA सर्टिफिकेट देने का फैसला लिया गया। UA सर्टिफिकेट का मतलब है कि यह फिल्म बच्चों सहित सभी दर्शकों के लिए उपयुक्त है, हालांकि छोटे बच्चों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है।

    सुनवाई में शामिल रहे दिग्गज वकील
    इस मामले में फिल्म प्रोडक्शन हाउस की ओर से सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन और CBFC की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरसन ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने निर्माताओं के हक में फैसला सुनाया।

    गौरतलब है कि थलपति विजय की यह फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण रिलीज टल गई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद ‘जना नायकन’ के आसपास बना सारा विवाद खत्म हो चुका है और दर्शक जल्द ही इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे।

  • कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में फोन से नहीं बना पाएंगे वीडियो, जंगल सफारी के दौरान मोबाइल बैन

    कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में फोन से नहीं बना पाएंगे वीडियो, जंगल सफारी के दौरान मोबाइल बैन

    नई दिल्‍ली ।  उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब पर्यटक सफारी के दौरान मोबाइल फोन नहीं ले जा पाएंगे. वन्यजीवों की सुरक्षा और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है. पर्यटकों, गाइडों और कर्मचारियों को गेट पर फोन जमा करने होंगे. नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी. इससे जानवरों को होने वाली परेशानी कम होगी.
    उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक जाते हैं और जंगल सफारी के जरिए जंगल के अंदर मौजूद हिरण, हाथी, अलग-अलग पक्षियों और बाघ देखने का अनुभव करते हैं. इस दौरान लोग अपने इस जबरदस्त एक्सपीरियंस को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करते हैं और वीडियो बनाते हैं, लेकिन अब पर्यटक सफारी के दौरान मोबाइल अपने साथ नहीं ले जा पाएंगे.
    हालांकि, प्रकृति और वन्यजीवों की फोटोग्राफी करने वाले पर्यटकों को DSLR जैसे प्रोफेशनल कैमरे ले जाने की इजाजत रहेगी, ताकि वह बिना शोर-शराबे के अपने अनुभव को कैमरे में कैद कर सकें. दरअसल, प्रशासन की ओर से ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें वन्यजीवों के प्राकृतिक घर में इंसानों की दखलअंदाजी कम करने के निर्देश दिए गए हैं.
    नई गाइडलाइन की जा रही तैयार
    पार्क के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है. इस नई व्यवस्था के चलते जंगल में एंट्री से पहले ही पर्यटकों को अपने मोबाइल फोन गेट पर जमा करने होंगे. यह नियम सिर्फ सैलानियों पर नहीं, बल्कि रजिस्टर्ड टूर गाइड, जिप्सी ड्राइवर, नेचरलिस्ट और यहां तक कि कोर जोन में मौजूद होटल और लॉज के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. यानी कोई भी अपना फोन अपने साथ नहीं ले जा पाएगा. इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
    जीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह
    इस सख्त फैसले के पीछे वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और एक्सपीरियंस नेचर राइड्स का कहना है कि मोबाइल फोन जंगल में कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे थे. फोटो और वीडियो लेने की होड़ में लोग जानवरों के बहुत करीब पहुंच जाते थे, जिससे वह घबरा जाते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं.

    इसके अलावा, मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानवरों की लोकेशन एक-दूसरे को बताई जाती थी. नतीजा यह होता था कि एक ही जगह पर कई जिप्सियां जमा हो जाती थीं. वहीं, रील और सेल्फी बनाने की सनक में लोग अपनी जान के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे थे. यह नया आदेश कॉर्बेट के सभी प्रमुख क्षेत्रों में लागू होगा. इनमें ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, सोनानदी, पाखरो और सितावनी जैसे डे-सफारी और नाइट-स्टे वाले इलाके शामिल हैं.

  • गणतंत्र दिवस परेड 2026 टिकट , कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए कैसे बुक करें टिकट? जानिए पूरा प्रोसेस

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 टिकट , कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए कैसे बुक करें टिकट? जानिए पूरा प्रोसेस


    नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस परेड 2026 भारत के नागरिकों के लिए गर्व का प्रतीक होती है जिसमें भारतीय सेना सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस साल गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य थीम वंदे मातरम् रखी गई है। 26 जनवरी को मुख्य परेड का आयोजन होगा, जबकि बीटिंग द रिट्रीट समारोह 28 और 29 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। यदि आप इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं और कर्तव्य पथ पर बैठकर परेड देखना चाहते हैं, तो इसके लिए टिकट बुक करना अनिवार्य है।

    कहां से खरीद सकते हैं 26 जनवरी की परेड के टिकट

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए टिकट अब आधिकारिक वेबसाइट aamantran.mod.gov.in से खरीदी जा सकती हैं। यहां से आप 26 जनवरी की मुख्य परेड, 28 जनवरी को होने वाली फुल ड्रेस रिहर्सल, और 29 जनवरी के बीटिंग द रिट्रीट समारोह के टिकट ऑनलाइन बुक कर सकते हैं।

    कब तक खरीद सकते हैं टिकट

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए टिकट की बिक्री 5 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है। टिकट खरीदने की अंतिम तारीख 14 जनवरी 2026 है। ध्यान रखें कि टिकट की बिक्री हर दिन सुबह 9 बजे से शुरू होगी और सीटें समाप्त होने तक जारी रहेगी, इसलिए जल्दी से टिकट बुक करना बेहतर रहेगा।

    टिकट की कीमत क्या है

    26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड के टिकट की कीमत ₹20 और ₹100 है, जो सीट की पोज़िशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। 28 जनवरी 2026 को होने वाली बीटिंग द रिट्रीट फुल ड्रेस रिहर्सल के टिकट की कीमत ₹20 है। 29 जनवरी 2026 को होने वाले बीटिंग द रिट्रीट मुख्य समारोह के टिकट ₹100 में उपलब्ध हैं। घर बैठे गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए ऑनलाइन टिकट कैसे बुक करें ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करें सबसे पहले aamantran.mod.gov.in पोर्टल पर जाएं।

    पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करें। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पता और ईमेल आईडी भरना होगा। एक वैध आईडी प्रूफ जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, आदि अपलोड करें। सभी विवरण भरने और सत्यापित करने के बाद बुकिंग पूरी होगी, और आपको एक डिजिटल टिकट प्राप्त होगा।

    ऑफलाइन टिकट काउंटर पर टिकट कैसे खरीदें

    यदि आप ऑनलाइन बुकिंग से बचना चाहते हैं, तो दिल्ली में कई जगहों पर ऑफलाइन टिकट काउंटर भी खोले गए हैं, जहां से आप गणतंत्र दिवस परेड के टिकट खरीद सकते हैं।

    टिकट काउंटर का समय

    सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक, दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक

    टिकट उपलब्ध स्थान

    सेना भवन गेट नंबर 5,शास्त्री भवन गेट नंबर 3,जंतर-मंतर मुख्य द्वार,संसद भवन रिसेप्शन,राजीव चौक मेट्रो स्टेशन डी ब्लॉक कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन क्या डॉक्यूमेंट्स जरूरी हैं?चाहे आप ऑनलाइन टिकट बुक करें या ऑफलाइन काउंटर से, फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट का होना अनिवार्य है।

    परेड की खासियत

    गणतंत्र दिवस परेड के दौरान दर्शक भारतीय सेना के आधुनिक टैंक, तोपें, और लड़ाकू विमानों का हैरतअंगेज प्रदर्शन देख सकेंगे। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक झांकियां भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करेंगी। बीटिंग द रिट्रीट समारोह में सेना के तीनों अंगों थल जल और नभ के बैंड्स स्कूल के बच्चों और लोक कलाकारों के प्रदर्शन और ऐतिहासिक इमारतों पर शानदार लाइट शो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा।

    मुख्य आकर्षण

    आर्मी नेवी और एयर फोर्स बैंड का भव्य प्रदर्शन शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत के साथ प्रिसिजन ड्रिल ऐतिहासिक स्थलों पर रोशन होने वाला लाइट शो गणतंत्र दिवस परेड 2026 भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा होने जा रहा है और इसे देखने का अनुभव देशवासियों के लिए बेहद खास होगा। इस ऐतिहासिक परेड को कर्तव्य पथ पर बैठकर देखने के लिए जल्दी से टिकट बुक करें और इस अद्भुत मौके का हिस्सा बनें

  • PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील

    PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील


    नई दिल्ली । अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अटके होने की एक चौंकाने वाली वजह का खुलासा किया है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच यह व्यापार डील किसी नीतिगत मतभेद की वजह से नहीं रुकी बल्कि इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन न करना था। लटनिक ने कहा कि पूरी डील तैयार थी, लेकिन यह सिर्फ एक फोन कॉल की वजह से रुक गई। अब अमेरिका उस पुराने समझौते पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला कर चुका है।

    क्या हुआ था

    लटनिक के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तैयार था लेकिन भारत ने तय समय पर ट्रंप को फोन नहीं किया। यह फोन कॉल प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से ट्रंप को किया जाना था, जो अंततः नहीं हुआ । ट्रंप का अहंकार इस बात से आहत हुआ और उन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने का विचार बदल दिया। लटनिक ने साफ कहा कि अब वह समझौता लागू नहीं होगा और भारत को मिलने वाला लाभ अब नहीं मिलेगा।

    अमेरिका का निर्णय

    लटनिक ने आगे कहा कि अमेरिका ने उस व्यापार समझौते से खुद को पीछे खींच लिया है, जिस पर पहले सहमति बन चुकी थी। अमेरिका ने अब इंडोनेशिया, फिलीपींस, और वियतनाम के साथ डील कर ली है, जबकि भारत से उस समझौते पर उम्मीद थी कि वह पहले होगा। अब ट्रंप प्रशासन मान चुका है कि भारत से डील पहले होती, लेकिन देरी के कारण अमेरिका ने अन्य देशों से समझौते कर लिए।

    भारत को भुगतनी पड़ी कीमत

    लटनिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को 50 प्रतिशत तक टैरिफ की भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि डील नहीं हो पाई। ट्रंप अब भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की बात भी कह चुके हैं। इससे यह साफ हो जाता है कि यह मामला अब सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि ट्रंप के अहंकार और विदेशी नीति से जुड़ा हुआ है।

    क्या था मामला

    ट्रंप और मोदी के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई बार बातचीत हुई थी। दोनों देशों के बीच यह डील कई मामलों में लगभग तय हो चुकी थी लेकिन मोदी सरकार ने उस निर्णायक पल में ट्रंप को फोन नहीं किया। लटनिक ने कहा यह ट्रंप की डील थी, और उसे पूरी तरह से ट्रंप ही अंजाम तक पहुँचाते। बस मोदी को ट्रंप को कॉल करना था। वे इसके लिए असहज थे और कॉल नहीं किया।

    अमेरिकी नीति में बदलाव

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब ठंडे बस्ते में चला गया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह इस पर आगे विचार नहीं करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे भारत के खिलाफ अपने टैरिफ बढ़ा सकते हैं और भारत को इस मामले में नुकसान उठाना पड़ेगा।

    भारत की प्रतिक्रिया

    इस मामले पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध हमेशा ही रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे हैं, और यह कदम निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।

  • दिल्ली में लुटेरी बस का आतंक कम किराये का लालच देकर यात्रियों को बनाते थे शिकार, पुलिस ने 3 बदमाशों को किया गिरफ्तार

    दिल्ली में लुटेरी बस का आतंक कम किराये का लालच देकर यात्रियों को बनाते थे शिकार, पुलिस ने 3 बदमाशों को किया गिरफ्तार


    नई दिल्ली । दिल्ली में एक लुटेरी बस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो यात्रियों को कम किराये का लालच देकर उन्हें अपनी प्राइवेट बसों में बिठाकर लूटपाट करता था। दिल्ली पुलिस ने इस गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले दो महीनों से इस प्रकार की वारदातों को अंजाम दे रहा था।

    गिरफ्तार आरोपी

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान योगेश 41 साल, अरशद 46 साल, और प्रेम शंकर उर्फ अजय 28 साल के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि योगेश इस गिरोह का सरगना था और बस ड्राइवर के रूप में काम करता था। जबकि अरशद और प्रेम शंकर कंडक्टर और हेल्पर के तौर पर यात्रियों को लूटने के लिए उनका सहयोग करते थे। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 1,850 रुपये नकद और लूट में इस्तेमाल की गई बस भी बरामद की है।

    कैसे काम करता था गिरोह

    गिरोह के सदस्य यात्रियों को आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के पास आकर्षक ऑफर देकर अपनी बस में बिठाते थे। वे सिर्फ 30 रुपये में सेंट्रल या नॉर्थ दिल्ली तक पहुँचाने का वादा करते थे। जैसे ही यात्री बस में बैठते उनका सफर और लूट का खेल शुरू हो जाता था।बस जैसे ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहुंचती, ये बदमाश यात्रियों को धमकाते, मारते और उनकी जेबें साफ कर देते थे। इसके बाद, यात्रियों को सुनसान जगहों पर उतारकर गिरोह के सदस्य फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक ये बदमाश जानबूझकर रात या सुबह जल्दी बस चलाते थे ताकि निगरानी कम हो और वे दिन में दो से तीन बार वारदातों को अंजाम दे सकें।

    कैसे पकड़ा गया गिरोह

    पुलिस को पीड़ितों की कई शिकायतें मिली थीं जिसके बाद डिप्टी कमिश्नर निधिन वल्सन की टीम ने लोकल जानकारी और पेट्रोलिंग के जरिए इस गिरोह को ट्रैक किया। जब ये बस राजघाट के पास रेड लाइट पर रुकी पुलिस ने मौके पर छापा मारा और तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। उस समय बदमाश यात्रियों को लूट रहे थे। पुलिस ने बस जब्त की और कुछ लूटी हुई रकम भी बरामद की।

    गिरोह की कमाई और पुराना रिकॉर्ड

    पुलिस ने बताया कि ये बदमाश अपनी बस किराए पर लेकर चलाते थे और रोजाना 1,500 रुपये किराया देते थे। इसके अतिरिक्त लूटपाट से उन्हें रोज़ 1,000 से 2,000 रुपये की कमाई होती थी। दो महीने में इस गिरोह की कमाई एक लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी थी। पुलिस ने यह भी बताया कि योगेश जो इस गिरोह का सरगना था, का पहले से ही क्रिमिनल रिकॉर्ड था और उसके खिलाफ लूट, मारपीट और हथियारों से संबंधित मामले दर्ज थे।