Author: bharati

  • भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम की दिशा में बड़ा कदम

    भोपाल में जल्द शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी बिना चीरफाड़ के पोस्टमॉर्टम की दिशा में बड़ा कदम


    भोपाल । भोपाल में जल्द ही एक नई और आधुनिक तकनीक की शुरुआत होने जा रही है जो पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल सकती है। एम्स भोपाल में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब इसे वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। अगर यह परियोजना मंजूर हो जाती है तो एम्स भोपाल मध्य प्रदेश का पहला अस्पताल होगा जहां यह तकनीक लागू की जाएगी।

    वर्चुअल ऑटोप्सी जिसे “नॉन-इवेजिव पोस्टमॉर्टम” भी कहा जाता है शव की सर्जिकल कट के बिना जांच करने का एक तरीका है। जापान और अन्य विकसित देशों में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसका मुख्य लाभ यह है कि इसमें शव को बिना किसी शारीरिक नुकसान के पूरी तरह से स्कैन किया जाता है। वर्चुअल ऑटोप्सी से प्राप्त रिपोर्ट डिजिटल साक्ष्य के रूप में बेहद मजबूत होती है और इनका उपयोग कानूनी मामलों में भी प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति की मौत नस में ब्लॉकेज के कारण हुई है तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी तस्वीर मौजूद होगी जिसमें तीन स्तरों पर ब्लॉकेज की स्थिति दिखाई जाएगी।

    एम्स भोपाल के लिए यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि पारंपरिक पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में शव की चीरफाड़ होती है जो कई बार परिजनों के लिए मानसिक आघात का कारण बन सकती है। विशेष रूप से कुछ धार्मिक और सामाजिक कारणों से परिवार इस प्रक्रिया के खिलाफ होते हैं और ऐसे मामलों में विवाद भी उत्पन्न हो सकता है। वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से परिजनों को शव सही अवस्था में सौंपा जा सकेगा और उन्हें किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया पारंपरिक पोस्टमॉर्टम से काफी तेज होती है। जहां पारंपरिक प्रक्रिया में कई घंटे लग जाते हैं वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी केवल आधे घंटे में पूरी हो सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ट्रॉमा केस सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों से जुड़ी मौतों के मामलों में अत्यधिक प्रभावी मानी जा रही है। कोविड जैसी महामारियों के दौरान यह तकनीक स्वास्थ्यकर्मियों के लिए संक्रमण के खतरे को भी कम करती है।

    वर्तमान में भारत में वर्चुअल ऑटोप्सी का उपयोग कुछ चुनिंदा स्थानों पर किया जा रहा है जैसे कि एम्स दिल्ली और शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस। अब भारत सरकार ने 2026 तक देशभर में 38 वर्चुअल ऑटोप्सी केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस तकनीक को लागू करने से पूरे देश में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सांसद आलोक शर्मा ने इस परियोजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और आशा जताई है कि जल्दी ही इसके लिए फंड जारी किया जाएगा। एम्स भोपाल के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है जो न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में चिकित्सा विज्ञान में एक नई दिशा की शुरुआत कर सकता है।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
  • आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड

    आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत के साथ आधार कार्ड से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू हो गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणUIDAI ने आधार PVC कार्ड बनवाने की फीस में वृद्धि कर दी है। अब नागरिकों को आधार PVC कार्ड के लिए पहले की तरह ₹50 नहीं, बल्कि ₹75 शुल्क देना होगा। यह नई दरें 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं। UIDAI ने साफ किया है कि यह फैसला मैटेरियल कॉस्ट, प्रिंटिंग खर्च और सुरक्षित डिलीवरी लागत में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    UIDAI के अनुसार, आधार PVC कार्ड एक आधुनिक, टिकाऊ और सुविधाजनक विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह कार्ड सामान्य प्लास्टिक कार्ड की तरह मजबूत होता है, जिसे आसानी से वॉलेट में रखा जा सकता है। कागज़ी आधार लेटर की तुलना में यह पानी, नमी और टूट-फूट से अधिक सुरक्षित रहता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच PVC आधार कार्ड की मांग लगातार बढ़ी है। बढ़ती मांग के साथ उत्पादन, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत भी बढ़ी, जिसके चलते शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो गया।

    UIDAI ने यह भी बताया कि आधार PVC कार्ड में कई अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इसे ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं। इसमें सिक्योर QR कोड, होलोग्राम, माइक्रोटेक्स्ट और घोस्ट इमेज जैसे फीचर्स दिए जाते हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। प्राधिकरण ने नागरिकों को यह चेतावनी भी दी है कि बाजार में निजी एजेंसियों द्वारा छपवाए गए PVC आधार कार्ड मान्य नहीं होते। केवल UIDAI द्वारा जारी किया गया आधार PVC कार्ड ही आधिकारिक और वैध माना जाएगा।

    आधार PVC कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बेहद सरल और सुविधाजनक है। इच्छुक नागरिक UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करना होता है, जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से लॉगिन किया जाता है। लॉगिन के बाद विकल्प पर क्लिक कर विवरण की पुष्टि करनी होती है। अंतिम चरण में ऑनलाइन भुगतान करना होता है, जिसमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। भुगतान सफल होते ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

    UIDAI के मुताबिक, भुगतान के बाद लगभग पांच कार्यदिवस के भीतर आधार PVC कार्ड प्रिंट कर भारतीय डाक को सौंप दिया जाता है। इसके बाद स्पीड पोस्ट के जरिए कार्ड सीधे आवेदक के पते पर भेज दिया जाता है। जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं, उनके लिए ऑफलाइन विकल्प भी मौजूद है। ऐसे नागरिक नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर PVC कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    फिलहाल आधार तीन स्वरूपों में उपलब्ध है—आधार लेटर, ई-आधार और आधार PVC कार्ड। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फीस में ₹25 की बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन इसकी मजबूती, लंबी उम्र और सुविधाजनक उपयोग को देखते हुए आधार PVC कार्ड की लोकप्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

  • महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश

    महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश


    धार ।जानकारी के अनुसार बजरंग दल के गोरक्षक प्रमुख मोहन को यह सूचना मिली थी कि धार जिले की ओर से एक पिकअप वाहन क्रमांक MH-05 DK-0327 में गौवंशों को भरकर महाराष्ट्र ले जाया जा रहा है। जैसे ही यह सूचना गोरक्षकों के पास पहुंची मोहन ने तुरंत अपने साथियों प्रदीप मनीष और शुभम के साथ पिकअप वाहन को पकड़ने की योजना बनाई। वे रात करीब एक बजे धार फाटा स्थित नागौरी ढाबे के पास सिरसोदिया धामनोद पहुंचे और पिकअप वाहन को रुकवाया।

    गोरक्षकों ने वाहन की तलाशी ली और पाया कि उसमें कई गौवंशों को बुरी तरह से ठूस-ठूसकर भरा गया था। तस्करों ने गौवंशों को बिना किसी सुविधाजनक व्यवस्था के वाहन में लाकर उन्हें महाराष्ट्र ले जाने की कोशिश की थी। गोरक्षकों की सतर्कता से यह तस्करी नाकाम हो गई और गौवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

    इस कार्रवाई से साबित होता है कि गोरक्षकों की सजगता और समाज की जागरूकता से ऐसी अवैध गतिविधियों पर काबू पाया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन को सूचित कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है जबकि गौवंशों को सुरक्षित और उचित देखभाल के लिए एक गोशाला भेज दिया गया है।

    यह घटना यह भी दर्शाती है कि तस्करी के मामले में समाज के विभिन्न हिस्सों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। गोरक्षकों की सतर्कता से ना केवल गौवंशों की जान बची बल्कि तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।

  • Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    नई दिल्ली। भारत में कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 है, जिन्हें केंद्र सरकार कंट्रोल करती है। बैंक ऑफ इंडिया भी देश के 12 सरकारी बैंकों की लिस्ट में शामिल है। ये सरकारी बैंक अपने ग्राहकों को एफडी खातों पर काफी अच्छा ब्याज दे रहा है। बताते चलें कि पिछले साल आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई 1.25 प्रतिशत की कटौती के बाद तमाम बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में संशोधन कर दिया था। बैंक ऑफ इंडिया ने भी 1 दिसंबर, 2025 से अपनी एफडी स्कीम की ब्याज दरों में संशोधन किया था। यहां हम आपको बैंक ऑफ इंडिया की एक ऐसी एफडी स्कीम के बारे में बताएंगे, जिसमें 2 लाख रुपये जमा कर गारंटी के साथ 77,945 रुपये तक का फिक्स ब्याज पाया जा सकता है।
    एफडी खातों पर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है बैंक ऑफ इंडिया
    बैंक ऑफ इंडिया में कम से कम 7 दिनों के लिए और ज्यादा से ज्यादा 10 साल के लिए एफडी खाता खुलवाया जा सकता है। ये सरकारी बैंक एफडी खातों पर 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है। बैंक ऑफ इंडिया 450 दिनों की स्टार स्वर्णिम स्पेशल एफडी स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है। बैंक इस स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.70 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 7.20 प्रतिशत और अति वरिष्ठ नागरिकों को 7.35 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पब्लिक सेक्टर का ये बैंक 3 साल से ज्यादा और 5 साल से कम अवधि वाली एफडी स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 6.75 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है।

    2 लाख रुपये जमा करने पर मिलेगा 77,945 रुपये तक का ब्याज
    अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने (5 साल से कम) की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो 6.25% की ब्याज दर से आपको मैच्यॉरिटी पर कुल 2,71,302 रुपये मिलेंगे, जिसमें 71,302 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है। इसी तरह, अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो आपको 6.75 प्रतिशत की ब्याज दर से मैच्यॉरिटी पर कुल 2,77,945 रुपये मिलेंगे, जिसमें 77,945 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है।

  • हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक चुनौती जरूर है, लेकिन 2026 के हेल्दी ईटिंग और फूड ट्रेंड्स इसे पहले से कहीं आसान बना रहे हैं। अब हेल्दी खाना सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिनभर ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने का अहम जरिया बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ लोग अब ऐसे फूड ऑप्शन्स की तलाश में हैं जो नैचुरल हों, कम प्रोसेस्ड हों और शरीर को संपूर्ण पोषण दें।2026 के फूड ट्रेंड्स में नैचुरल इंग्रीडिएंट्स, लो-कार्ब डाइट और प्लांट-बेस्ड फूड्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। लोग पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाकर घर के बने, ताज़े और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्विनोआ, ओट्स, मिलेट्स, मील शेक्स और वेजिटेबल-फ्रूट स्मूदीज़ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये पचाने में आसान होने के साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं।

    रेसिपी ट्रेंड्स की बात करें तो इस साल स्वाद और सेहत के बीच बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हल्दी, ग्रीन टी, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स जैसे सुपरफूड्स को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करना अब आम हो गया है। ये न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, बल्कि हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डिनर में लो-कार्ब वेजिटेबल प्लेट्स और प्रोटीन रिच स्नैक्स का चलन भी बढ़ रहा है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज, पैन-ग्रिल्ड सब्जियां या हर्ब-ग्रिल्ड चिकन जैसे विकल्प स्वादिष्ट होने के साथ वजन कंट्रोल और मसल स्ट्रेंथ में मदद करते हैं।हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर भोजन करना और छोटे-छोटे पोर्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू पानी से करने, दिनभर पर्याप्त पानी पीने और हर 3-4 घंटे में हल्का व पौष्टिक स्नैक लेने से शरीर एक्टिव बना रहता है और थकान महसूस नहीं होती।

    फिट रहने के लिए अब लोग भारी-भरकम एक्सरसाइज की बजाय हल्की व नियमित गतिविधियों को अपनाने लगे हैं। योग, मॉर्निंग स्ट्रेचिंग और वर्क फ्रॉम होम के दौरान छोटे-छोटे वॉक ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। धूप से विटामिन डी, खट्टे फलों से विटामिन सी और हरी सब्जियों व बीन्स से आयरन लेना अब लोगों की डेली रूटीन का हिस्सा बनता जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी रूटीन की सफलता किसी एक बड़े बदलाव में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों में छिपी होती है। अचानक डाइट बदलना या एक्सट्रीम फास्टिंग करने की बजाय धीरे-धीरे हेल्दी आदतें अपनाना लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। 2026 के ये हेल्दी ईटिंग ट्रेंड्स यही संदेश देते हैं कि सेहतमंद जीवन कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं, बल्कि सही चुनावों से बना एक आसान सफर है।

  • डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी

    डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक नया ठगी का तरीका अपनाया, जिसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है। अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह घटना बुजुर्ग व्यक्ति बसंत कुमार मैदमवार 80 के साथ हुई, जो एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर 2025 को फरियादी को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें स्क्रीन पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है जिसे ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा।

    डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी और बार-बार वीडियो कॉल्स से भयभीत हो गए बुजुर्ग बसंत कुमार से ठगों ने उनके बैंक खातों की “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। फरियादी ने कई बार अपने बैंक खातों से रकम ट्रांसफर की, और इस प्रक्रिया में कुल 23.50 लाख रुपये की ठगी हो गई। जब दो दिसंबर को बसंत कुमार गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने इस मामले को साइबर ठगी का मामला बताया। इसके बाद, उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया।

    यह ठगी का तरीका साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और तकनीकी ज्ञान को दर्शाता है। वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस अधिकारियों के द्वारा बनाई गई डर की स्थिति का फायदा उठाकर बुजुर्गों और अन्य असुरक्षित लोगों को ठगना अब सामान्य होता जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। यह घटना एक चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक सक्रिय नहीं होते। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कभी भी किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

  • शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज

    शालीमार गार्डन हिंसा: पिंकी चौधरी और बेटे सहित 12 आरोपियों पर कार्रवाई तेज


    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां हिंदू रक्षा दल के लोगों द्वारा तलवारों का वितरण और शक्ति प्रदर्शन का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाया। शालीमार गार्डन थाने की पुलिस ने इस मामले में हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि कुछ दिन पहले दोनों ने स्थानीय लोगों में तलवारें बांटी और कहा कि “
    जिहादियों से सुरक्षा के लिए इसे अपने घर में रखें और अगर कोई बहन या बेटी पर बुरी नजर डाले तो इसका प्रयोग करें।

    यह मामला पहले भी चर्चा में रहा था। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की और अब तक कुल 12 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हथियार वितरण और शक्ति प्रदर्शन की यह घटना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    इस मामले पर विपक्ष भी सख्त है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश सरकार को कानून व्यवस्था में चूक के लिए कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज देश में क्या हो रहा है, तलवारें बांटी जा रही हैं, एक संप्रदाय के खिलाफ भावनात्मक नारे लगाकर हिंसा की कोशिश की जा रही है, लेकिन सरकार को दिखाई नहीं दे रहा।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना।

    पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि शालीमार गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि समाज में हथियारों का वितरण और युवा वर्ग को हिंसा के लिए उकसाना कितनी गंभीर समस्या बन सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घटनाक्रम न केवल समाज में भय और असुरक्षा पैदा करते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और सामुदायिक शांति पर भी गंभीर असर डालते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय थाने को दें और कानून का पालन सुनिश्चित करें।

    शालीमार गार्डन मामला यह भी दर्शाता है कि हथियारों का गलत तरीके से वितरण और सामूहिक शक्ति प्रदर्शन केवल राजनीतिक या सामाजिक तनाव ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने राज्य में राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों के आरोपों और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई ने इसे अब तक के सबसे बड़े हथियार वितरण मामलों में शामिल कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि किसी भी व्यक्ति को हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा नहीं होने दिया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार गाजियाबाद की शालीमार गार्डन घटना ने यह संदेश दिया है कि हथियारों का वितरण और सामूहिक हिंसा किसी भी समाज के लिए गंभीर खतरा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई अनिवार्य है।

  • ऑस्कर की दौड़ में भारत की 'होमबाउंड' से बढ़ी उम्‍मीदें, इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के अगले राउंड में पहुंची फिल्म

    ऑस्कर की दौड़ में भारत की 'होमबाउंड' से बढ़ी उम्‍मीदें, इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी के अगले राउंड में पहुंची फिल्म

    नई दिल्‍ली । ऑस्कर में भारत की उम्मीदें अभी जिंदा हैं। भारत की ओर से आधिकारिक एंट्री के तौर पर भेजी गई फिल्म ‘होमबाउंड’ ने अकादमी अवॉर्ड्स की अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में अगले चरण के मतदान में जगह बना ली है। अकादमी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस कैटेगरी में दुनिया भर से चुनी गई 15 फिल्मों को अगले दौर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। इस सूची में भारत की ‘होमबाउंड’ के साथ अर्जेंटीना, ब्राजील, फ्रांस, जर्मनी, इराक, जापान, जॉर्डन, नॉर्वे, फिलिस्तीन, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ताइवान और ट्यूनीशिया की फिल्में भी शामिल हैं।

    इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी में 15 फिल्मों की शॉर्टलिस्ट जारी
    भारत की ‘होमबाउंड’ के साथ इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में जिन अन्य फिल्मों ने अगले दौर में जगह बनाई है, उनमें अर्जेंटीना की ‘बेलेन’, ब्राजील की ‘द सीक्रेट एजेंट’, फ्रांस की ‘इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट’ और जर्मनी की ‘साउंड ऑफ फॉलिंग’ शामिल हैं।

    इसके अलावा इराक से ‘द प्रेसिडेंट्स केक’, जापान की ‘कोकुहो’, जॉर्डन की ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, नॉर्वे की ‘सेंटीमेंटल वैल्यू’, फिलिस्तीन की ‘पैलेस्टाइन 36’, दक्षिण कोरिया की ‘नो अदर चॉइस’, स्पेन की ‘सिरात’, स्विट्जरलैंड की ‘लेट शिफ्ट’, ताइवान की ‘लेफ्ट-हैंडेड गर्ल’ और ट्यूनीशिया की ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। अकादमी अवॉर्ड्स ने यह जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए साझा की है। अब ऑस्कर के लिए अंतिम नामांकन की घोषणा गुरुवार, 22 जनवरी को की जाएगी।

    ऑस्कर इतिहास में ‘होमबाउंड’ का नाम दर्ज
    ऑस्कर की शॉर्टलिस्ट में जगह बनाकर फिल्म ‘होमबाउंड’ ने भारतीय सिनेमा के लिए एक और अहम मुकाम हासिल कर लिया है। अकादमी अवॉर्ड्स के 98 साल के इतिहास में यह केवल पांचवीं भारतीय फिल्म है, जो सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी की शॉर्टलिस्ट तक पहुंची है। ईशान खट्टर और विशाल जेठवा अभिनीत यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए इंटरनेशनल फीचर कैटेगरी में अंतिम नामांकन की दौड़ में शामिल 15 फिल्मों में जगह बनाने में सफल रही है। इस उपलब्धि के साथ ‘होमबाउंड’ ने वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की मौजूदगी को और मजबूत किया है।

    नीरज घेवान के निर्देशन में बनी है होमबाउंड
    फिल्म ‘होमबाउंड’ का निर्देशन नीरज घेवान ने किया है, जबकि इसका निर्माण करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले हुआ है। यह कहानी बचपन के दो दोस्तों शोएब (ईशान खट्टर) और चंदन (विशाल जेठवा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका पुलिस सेवा में जाने का सपना उनके भविष्य की दिशा तय करता है। कहानी दोस्ती, जिम्मेदारी और आज के युवा भारत पर पड़ने वाले सामाजिक दबावों को दर्शाती है। इस फिल्म में जाह्नवी कपूर भी एक अहम किरदार में नजर आती हैं।

  • दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या

    दिल्ली त्रिलोकपुरी: इंस्टाग्राम विवाद में 11वीं के छात्र की नाबालिग साथियों ने की हत्या


    नई दिल्ली।  दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें 11वीं कक्षा का 17 वर्षीय छात्र अपने नाबालिग साथियों द्वारा बेरहमी से पीट-पीट कर मारा गया। यह घटना सोशल मीडिया पर हुए मामूली विवाद के कारण घटी, जिसने पूरे इलाके में डर और हड़कंप मचा दिया। मृतक छात्र इंद्रा कैंप का निवासी था और अपने परिवार में सबसे छोटा था।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोमवार, 5 जनवरी की शाम को यह घटना हुई। छात्र ने एक नाबालिग आरोपी की इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर ‘तू तो मेरा छोटा भाई है’ कमेंट किया, जिसे आरोपी ने पसंद नहीं किया। इसी नाराज़गी में आरोपी ने अपने पांच अन्य नाबालिग साथियों के साथ मिलकर छात्र को घेर लिया और उसकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी।

    हिंसा इतनी गंभीर थी कि छात्र की हालत तुरंत बिगड़ गई। उसे जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से मारा गया, जिससे शरीर पर गंभीर चोटें आईं। चश्मदीदों की मदद करने की कोशिश विफल रही क्योंकि आरोपी ने बीच-बचाव करने वालों पर भी हमला किया। छात्र को तत्काल लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर स्थिति के कारण उसे GTB अस्पताल रेफर किया गया। मंगलवार, 6 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया।

    पुलिस ने छात्र के परिवार की शिकायत पर 6 नाबालिगों को हिरासत में लिया। ट्रिलोकपुरी पुलिस की क्राइम टीम और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज़ी से शुरू की जाएगी। इस घटना ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी नाबालिगों में जानलेवा हिंसा को जन्म दे सकते हैं।

    परिवार और पड़ोसियों ने बताया कि मृतक छात्र शांत और होशियार था, किसी से विवाद नहीं करता था।

    केवल एक साधारण इंस्टाग्राम कमेंट ने यह भयानक घटना जन्म दी, जो समाज और परिवार दोनों के लिए चेतावनी है। स्थानीय लोग घटना से स्तब्ध हैं और ऐसे हादसों की रोकथाम की मांग कर रहे हैं।

    दिल्ली पुलिस ने सभी छह नाबालिगों को बाल संरक्षण कानून और पॉक्सो एक्ट के तहत हिरासत में रखा है। उनकी मानसिक स्थिति, मामले में भूमिका और हिंसा के स्तर की पूरी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय और राज्य बाल संरक्षण प्राधिकरण भी इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं ताकि नाबालिगों द्वारा अपराध के मामलों में सख्त और उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो।

    इस घटना ने सोशल मीडिया और युवा पीढ़ी के बीच साइबर एथिक्स और जिम्मेदारी पर गंभीर बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर छोटे विवाद भी युवा मनोविज्ञान पर भारी असर डाल सकते हैं। यह घटना साबित करती है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन में संवेदनशीलता, सहिष्णुता और हिंसा से बचाव की शिक्षा देना बेहद जरूरी है।

    दिल्ली पुलिस ने आसपास के स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। परिवार और समाज से अपील की गई है कि वे बच्चों के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

    त्रिलोकपुरी की यह घटना पूरे देश के लिए चेतावनी बन गई है। यह याद दिलाती है कि नाबालिगों के बीच छोटे विवाद भी जानलेवा साबित हो सकते हैं और बच्चों को मानसिक, नैतिक और डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।