Author: bharati

  • वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है

    वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है


    अहमदाबाद । वडोदरा जिले के सावली तालुका स्थित वेमार प्राइमरी स्कूल आज गुजरात के सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह स्कूल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षा के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।गुजरात सरकार की ज्ञान ही शक्ति है पहल के तहत स्कूल में रचनात्मकता आत्मनिर्भरता और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी छिपी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यहां रोबोट निर्माण हस्तशिल्प मार्बल आर्ट मार्शल आर्ट और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं जिन्हें लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।वेमार प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल पढ़ाई पर ध्यान देते हैं बल्कि बच्चों को प्रयोगात्मक सीख के लिए भी प्रेरित करते हैं। कक्षा में पढ़ाई और हाथों से सीखने के इस संतुलन ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बना दिया है।

    शिक्षकों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके बौद्धिक विकास और जीवन कौशल को मजबूत करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इसी सोच के साथ यह स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में लागू मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस और समग्र शिक्षा अभियान की नीतियों को जमीन पर उतार रहा है। अकादमिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर जोर देकर वेमार प्राइमरी स्कूल ने गुजरात के सरकारी स्कूल तंत्र में समग्र और व्यावहारिक शिक्षा का एक नया मानक स्थापित किया है।गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और लगातार बढ़ता हुआ बुनियादी ढांचा तैयार किया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक राज्य में सार्वजनिक निवेश और नीतिगत फोकस के चलते हजारों सरकारी और अनुदानित स्कूलों को उन्नत कक्षाओं डिजिटल लर्निंग टूल्स विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों से लैस किया गया है।

    उच्च शिक्षा के स्तर पर गुजरात में विश्वविद्यालयों इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। आईआईटी गांधीनगर आईआईएम अहमदाबाद और एम्स राजकोट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राज्य की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद गांधीनगर वडोदरा सूरत और राजकोट जैसे शिक्षा केंद्रों में मजबूत ढांचा छात्रावास शोध सुविधाएं और इनक्यूबेशन सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत कर रहे हैं जिससे गुजरात देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।

  • गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

    गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखाश्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस करुणा और बलिदान की मूर्ति हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हमें सच्चाई न्याय धर्म के लिए खड़े होने और मानवीय गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का विजन पीढ़ियों को सेवा और निस्वार्थ कर्तव्य के लिए मार्गदर्शन करता रहता है।

    उन्होंने इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की अपनी यात्रा की कुछ यादगार तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री को गुरुद्वारे में प्रार्थना करते जोड़ा साहिब के दर्शन करते और सेवादारों के साथ लंगर परोसते हुए देखा जा सकता है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखाअन्याय और दमन के विरुद्ध चेतना जागृत करने वाले खालसा पंथ के संस्थापक सरबंस दानी साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखागुरु साहिब का जीवन शौर्य त्याग और आध्यात्मिक उत्कर्ष का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने मानवता को यह संदेश दिया कि धर्म सत्य और मर्यादा की रक्षा हेतु सर्वस्व का समर्पण ही सर्वोच्च मानवीय कर्तव्य है। उनके आदर्श बलिदान और महान गुरु परंपरा के प्रति उनकी अडिग निष्ठा युगों-युगों तक समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहेगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने दशम गुरु के चरणों के नमन करते हुए लिखाउनके सत्य सेवा और बलिदान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। पटना साहिब वह पवित्र स्थल है जहां 1666 में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो साहस समानता और न्याय का प्रतीक बना। मुगल अत्याचारों के खिलाफ उन्होंने योद्धा बनकर संघर्ष किया और पांच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा का जन्म दिया।

  • MP: भोपाल एयरपोर्ट यात्री संतुष्टि सर्वे में लगातार दूसरी बार देश में नंबर बन, खजुराहो एयरपोर्ट भी अव्वल

    MP: भोपाल एयरपोर्ट यात्री संतुष्टि सर्वे में लगातार दूसरी बार देश में नंबर बन, खजुराहो एयरपोर्ट भी अव्वल


    भोपाल।
    भारतीय विमानन प्राधिकरण (एएआई) (Aviation Authority of India -AAI) के एक सर्वेक्षण में भोपाल और खजुराहो एयरपोर्ट (Bhopal and Khajuraho Airport) ने देश के 62 हवाईअड्डों को पीछे छोड़ दिया है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट देश भर के 62 हवाई अड्डों में से 58 से प्राप्त फीडबैक पर आधारित है। असम का रूपासी हवाई अड्डा सबसे निचले स्थान पर रहा, जिसे 5 में से केवल 3 अंक मिले।

    भारतीय विमानन प्राधिकरण (एएआई) के अखिल भारतीय ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण (All India Customer Satisfaction Survey) में मध्य प्रदेश के भोपाल और खजुराहो के हवाईअड्डों को सबसे ज्यादा अंक प्राप्त हुए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट देश भर के 62 हवाईअड्डों में से 58 से मिले फीडबैक पर आधारित है।

    अधिकारी ने बताया कि जनवरी से जून के बीच आयोजित सर्वेक्षण के पहले चरण में ग्राहक संतुष्टि के मामले में भोपाल, खजुराहो और राजस्थान के उदयपुर के हवाई अड्डों ने पूरे अंक प्राप्त करके शीर्ष स्थान हासिल किया। सर्वेक्षण का दूसरा चरण जून से दिसंबर के बीच आयोजित किया गया। इस दौरान भोपाल, खजुराहो और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के हवाई अड्डों को 5 में से 4.99 अंक प्राप्त हुए।

    चार हवाई अड्डों – शिमला (हिमाचल प्रदेश), भावनगर (गुजरात), तेजपुर (असम) और कालाबुर्गी (कर्नाटक) को यात्री उड़ानें नहीं होने के कारण सर्वेक्षण में शामिल नहीं किया गया। असम का रूपासी हवाई अड्डा सबसे निचले स्थान पर रहा, जिसे 5 में से केवल 3 अंक मिले।

    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो अपनी मंदिर शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। यहां भारी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट से पता चलता है कि विश्व स्तरीय यात्री सेवाएं अब भारत के छोटे शहरों में भी पहुंच रही हैं।

    खजुराहो हवाई अड्डे के निदेशक संतोष सिंह ने बताया कि 2025 में लगातार दो बार शीर्ष स्थान प्राप्त करना गर्व की बात है। यह हमारी पूरी टीम की प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और यात्रियों को सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान करने के हमारे निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

  • आज अपना 60वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे सलमान खान… फैंस को एक दिन पहले दिया ये खास गिफ्ट

    आज अपना 60वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे सलमान खान… फैंस को एक दिन पहले दिया ये खास गिफ्ट


    मुम्बई
    । बॉलीवुड दबंग एक्टर (Bollywood’s Dabangg actor) सलमान खान (Salman Khan) की फैन फॉलोइंग आज देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी काफी जबरदस्त है। अपने करियर में सलमान ने कई सुपरहिट फिल्में (Superhit movies) दी हैं। प्रोफेशनल लाइफ के साथ सलमान अपनी पर्सनल लाइफ (Personal Life) को लेकर भी खूब सुर्खियों में रहते हैं। ऐसे में अब सलमान खान के फैंस के लिए आज का दिन बेहद खास है। 27 दिसंबर को भाईजान अपना 60वां बर्थडे सेलिब्रेट करने वाले हैं। इस मौके पर उन्होंने अपने फैंस के लिए एक खास वीडियो शेयर किया है।


    बर्थडे पर फैंस को दिया सरप्राइज

    दरअसल, सलमान खान ने अपने बर्थडे के ठीक एक दिन पहले अपने फैंस को एक खास तोहफा दिया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो पेटिंग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि सलमान ब्लैक टीशर्ट और डेनिम में नजर आ रहे हैं। सलमान इस दौरान एक खूबसूरत पेंटिंग बनाते हुए दिख रहे हैं। इस पेटिंग के साथ सलमान अपने बीइंग ह्यूमन ब्रांड को प्रमोट करते दिख रहे हैं। वो कहते हैं दिख रहे हैं कि उनके आर्टवर्क को देखने के लिए बीइंग ह्यूमन के पॉपअप स्टोर्स पर आएं।


    जल्द नजर आएंगे इस फिल्म में

    सलमान खान के फिल्मों की बात करें तो वो आखिरी बार फिल्म ‘सिकंदर’ में नजर आए थे। हालांकि, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप रही थी। इसके अलावा सलमान, शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की डायरेक्टोरियल डेब्यू सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में स्पेशल कैमियो करते दिखे थे। भाईजान की अपकमिंग मूवी की बात करें तो वो जल्द ही ‘बैटल ऑफ गलवान’ में नजर आएंगे, जिसमें वह चित्रांगदा सिंह के साथ दिखेंगे। बता दें कि ये मूवी 2020 में गलवान वैली में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की कहानी है। इस फिल्म को अपूर्व लाखिया डायरेक्ट कर रहे हैं।

  • पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध

    पिछले 6 माह में बिगड़े भारत से रिश्ते… अमेरिकी ही कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप की नीति का विरोध


    वाशिंगटन।
    भारत (India) और अमेरिका (America) के रिश्ते पिछले 6 महीनों से लगातार खराब स्थिति में हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने खुले तौर पर अमेरिकी बयानों का विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरूप ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने पाकिस्तान (Pakistan) के साथ अपनी नजदीकी बढ़ाते हुए भारत पर आर्थिक हमला करने की कोशिश की। राष्ट्रपति ट्रंप की इस नीति का अमेरिका में ही कई लोगों ने विरोध किया, यहां तक कि उनके सहयोगियों ने भी भारत को लेकर अपनाई जा रही इस नीति का विरोध ही किया। अब अमेरिकी वैश्विक मामलों के जानकार, लेखक और प्रोफेसर फ्रांसिस फुकुयामा ने ट्रंप की इस नीति को लेकर उन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने निजी व्यवहार के लिए अमेरिका के हितों को दरकिनार कर दिया।

    एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर बात करते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी वैश्विक नीति क्या है इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “ट्रंप की वैश्विक नीति निजी लाभ पर आधारित है। उदाहरण के लिए पिछले 20 से 30 वर्षों में अमेरिका में किसी की भी सरकार रही हो, वह भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करती रही है। क्योंकि हम दक्षिण एशिया में चीन को काउंटर करना चाहते हैं। लेकिन ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को केवल इसलिए खराब कर दिया क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन नहीं किया था।”

    प्रोफेसर ने कहा, “ट्रंप के इस फैसले से आप पूरी तरह से समझ सकते हैं कि कैसे उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए अमेरिकी हितों को अलग रख दिया। ऐसे में अगर कोई यह सोच रहा है कि ट्रंप प्रशासन की कोई वैश्विक नीति होगी, तो वह परेशान ही होगा।”

    आपको बता दें, इस साल जनवरी में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आए थे, तो भारत में लोगों की राय यह थी कि भारत और अमेरिका के रिश्ते सही होंगे। ट्रंप और पीएम मोदी की निजी दोस्ती दोनों देशों के बीच में मजबूत साझेदारी का आधार बनेगी। शुरुआती समय में ऐसा दिखा भी। लेकिन मई के महीने में सबकुछ बदल गया।

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप टीम का बयान दोस्ती वाला नहीं था। भारत सरकार के ऐलान करने से पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीजफायर का ऐलान कर दिया। यह भारत सरकार के लिए असहज करने वाली स्थिति थी। इसके बाद ट्रंप लगातार इस बात को कहते रहे कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर करवाया है, जबकि भारत ने शुरुआत से ही इस बात को कहा कि सीजफायर के लिए पाकिस्तानी डीजीएमओ की तरफ से फोन आया था इसके बाद यह हुआ।

    दोनों देशों के बीच बिगड़ती इस परिस्थिति का पाकिस्तान ने बड़ी अच्छी तरह से फायदा उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुले तौर पर इस सीजफायर के लिए ट्रंप को धन्यवाद किया और लगे हाथ उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए समर्थन भी दे दिया। इस पूरे वाकये के बाद भारत और अमेरिका के संबंध लगातार गिरावट की तरफ जाने लगे। अमेरिका ने भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी की जाने लगी। भारत ने भी अपनी स्थिति को साफ किया और ट्रंप या अमेरिका के आगे किसी भी तरीके से झुकने से इनकार कर दिया।

    दरअसल, कश्मीर और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय स्थिति पर भारत की स्थिति दशकों से साफ रही है कि भारत इसमें किसी भी तीसरे देश का दखल नहीं चाहता है। शिमला समझौते के तहत पाकिस्तान भी इस पर राजी है, लेकिन पाकिस्तान हमेशा से ही इस मुद्दे में तीसरे देश को शामिल करने के लिए तैयार रहता है। ऐसे में अगर पीएम मोदी नोबेल के लिए ट्रंप को समर्थन देते तो यह भारत की साख के लिए सही नहीं होता और न ही भारत के स्टैंड के मुताबिक होता।

  • इजरायल ने सोमालिलैंड को दी स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता…अफ्रीकी संघ ने किया विरोध

    इजरायल ने सोमालिलैंड को दी स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता…अफ्रीकी संघ ने किया विरोध


    येरूशलम।
    इजरायल (Israel) ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से सोमालिलैंड (Somaliland) को एक स्वतंत्र देश (Independent Country) के रूप में मान्यता दे दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने सोमालिया से अलग हुए इस देश को मान्यता देने के का ऐलान करते हुए यहां के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही (President Abdirahman Mohamed Abdullahi) को इजरायल के आधिकारिक दौरे का न्यौता भी दिया। गौरतलब है कि यह देश सोमालिया में चल रहे गृहयुद्ध के बाद अलग हुआ है, यह काफी समय से एक अलग देश के रूप में अपनी सत्ता चला रहा है। वहीं, दूसरी ओर अफ्रीकी संघ ने इजरायल के इस फैसले का विरोध किया है।

    टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के अनुसार सोमालिया से अलग हुए इस क्षेत्र को 30 साल से अधिक समय के बाद किसी देश ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दी है। इस ऐतिहासिक घोषणा पत्र पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली विदेश मंत्री गिदेओन साआर ने हस्ताक्षर किए, जबकि सोमालिलैंड की तरफ से राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने।

    दोनों ही नेताओं ने इस मान्यता पत्र को ऐतिहासिक पल बताया। नेतन्याहू ने कहा कि इस क्षण से दोनों देशों के बीच में ऐतिहासिक मित्रता की शुरुआत होती है। दोनों देश आर्थिक क्षेत्रों , कृषि और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे। इजरायल का यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुए अब्राहम अकॉर्ड की भावनाओं के अनुरूप है। इजरालय से मान्यता मिलने के बाद सोमालिलैंड ने कहा है कि वह भी इस समझौते में शामिल होना चाहता है। राष्ट्रपति ने एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिसाहिक क्षण है। हम इसका गर्मजोशी के साथ स्वागत करते हैं।” सोमालिलैंड की राजधानी हरगेसा में भी लोगों ने इजरायल के इस कदम का स्वागत किया और सड़कों पर आकर जश्न मनाया।


    अफ्रीकी संघ, सोमालिया समेत कई देशों ने जताई आपत्ति

    इजरायल की नेतन्याहू सरकार के इस फैसले की कई देशों ने निंदा की है। सोमालिया ने इसे उसकी संप्रभुता पर जानबूझकर किया गया हमला बताया। सोमालिया के विदेश मंत्री ने कहा कि इस फैसले की वजह से क्षेत्र की शांति कमजोर होगी। वहीं, अफ्रीकी संघ ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा करते हुए इस कदम को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सोमालिलैंड नामक क्षेत्र अफ्रीकी महासंघ के सदस्य सोमालिया का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा, “सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने की कोई भी कोशिश एक खतरनाक मिसाल का काम कर सकती है, जिससे पूरे महाद्वीप की शांति और स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव होगा।

    गृहयुद्ध से जूझ रहे सोमालिया के मुख्य सहयोगी तुर्किए ने इजरायल के इस फैसले का विरोध किया है। तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल की यह पहल उसकी विस्तारवादी नीति से मेल खाती है। यह सोमालिया के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप है। तुर्किए सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


    क्या है सोमालिलैंड की कहानी?

    अफ्रीकी महाद्वीप के हॉर्न पर बसे सोमालिया के अंतर्गत माने जाने वाले सोमालिलैंड को मान्यता देने वाला इजरायल पहला देश बना है। अभी तक इस क्षेत्र को किसी भी देश ने स्वतंत्र देश की मान्यता नहीं दी है। हालांकि, ब्रिटेन इथियोपिया, तुर्किए, यूएई,डेनमार्क, कीनिया और ताइवान जैसे देशों के साथ उसके अनौपचारिक राजनयिक संबंध हैं।

    ऐतिहासिक दृष्टि से 1960 के दशक में सोमालिलैंड को कुछ समय के लिए स्वतंत्रता मिली थी और उस समय इजरायल समेत कुल 35 देशों ने उसे मान्यता दी थी। लेकिन फिर बाद में वह स्वेच्छा से सोमालिया के साथ एकीकृत हो गया था। बाद में जब 1991 में सोमालिया गृहयुद्ध में उलझ गया तो सोमालिलैंड ने फिर से खुद को स्वतंत्र घोषित कर लिया। तब से लेकर अभी तक सोमालिलैंड एक अलग राज्य के रूप में ही काम कर रहा है। इसकी अपनी सरकार, अपनी मुद्रा और सुरक्षा बल है। सोमालिया के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के विपरीत सोमालिलैंड में अपेक्षाकृत शांत और स्थिर शासन देखने को मिलता है।


    क्या हैं इसके मायने?

    इजरायल का यह फैसला एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, सोमालिलैंड की भौगौलिक स्थिति महत्वपूर्ण है। रेड सी के पास इजरायल को साझेदारों की जरूरत है। इन साझेदारों की मदद से वह भविष्य में यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा अब्राहम अकॉर्ड में एक और देश के शामिल होने से इजरायल को भी इसका लाभ होगा। हालांकि, इससे अन्य देश भड़क भी सकते हैं। वहीं,दूसरी ओर सोमालिलैंड पिछले 30 साल से अंतर्राष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इजरायल की तरफ से मिली यह मान्यता उसके लिए एक बड़ी संभावना की तरह है। मान्यता के बिना यह क्षेत्र गंभीर गरीबी से जूझ रहा है। क्योंकि इसे विदेशी लाभ भी लगभग न के बराबर मिलता है।

  • राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित

    राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के सबसे छोटे नायक सरवन को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से किया सम्मानित


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के सबसे छोटे नायक पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले सरवन सिंह (Sarwan Singh) को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Children’s Award) से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने यह पुरस्कार दिया।

    फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव तारावाली के रहने वाले 10 वर्षीय सरवन सिंह ने मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए बिना डरे पानी, चाय और लस्सी पहुंचाई और उनका हौसला बढ़ाया। मई 2025 में जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण थे। दुश्मन देश के ड्रोन लगातार सीमा में घुसपैठ कर रहे थे और हर वक्त खतरा बना हुआ था। ऐसे माहौल में लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे थे, लेकिन उस समय यह छोटा बच्चा अपनी जान की परवाह किए बिना सीमा की अग्रिम चौकियों की ओर निकल पड़ता था। वह रोज अपनी छोटी साइकिल से या पैदल ही भारतीय सेना के जवानों तक ठंडा पानी, बर्फ, दूध, लस्सी, चाय और जरूरी राशन पहुंचाता था। चिलचिलाती धूप, दुश्मन की निगरानी और हमले के खतरे के बीच भी वह पीछे नहीं हटा। यह पुरस्कार उन्हें उनकी अद्वितीय बहादुरी और भारतीय सेना के प्रति निष्ठा के लिए दिया गया।


    अवाॅर्ड मिलने पर बहुत खुश हूं: सरवन

    सम्मान पाने के बाद सरवन ने कहा कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सेना के जवान हमारे गांव आए। मैंने सोचा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए। मैं उनके लिए रोज दूध, चाय, छाछ और बर्फ ले जाता था। मुझे पुरस्कार पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी इसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा था।


    पंजाब के सीएम ने दी बधाई

    पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सरवन को बधाई देते हुए एक्स पर लिखा कि पंजाबियों के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि आज राष्ट्रपति द्वारा हमारे फिरोजपुर के निवासी 10 वर्षीय सरवन सिंह को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हमारे गुरुओं द्वारा दी गई शिक्षाओं पर चलते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरवन सिंह ने घर से चाय-पानी और भोजन लाकर सैनिकों की जो सेवा की, वह काबिल-ए-तारीफ है। बच्चे के देश के प्रति हौसले और जज्बे को सलाम।


    सेना ने उठाया पढ़ाई का सारा खर्च

    सरवन के इस जज्बे को भारतीय सेना भी सलाम कर चुकी है। फिरोजपुर छावनी में एक समारोह के दौरान पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने बच्चे को सम्मानित भी किया था। साथ ही सेना ने उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का जिम्मा उठाया है। सरवन ने पहले कहा था कि वह भी बड़ा होकर सेना में भर्ती होना चाहता है। उसने कहा कि मैं बड़ा होकर फौजी बनना चाहता हूं और देश की सेवा करना चाहता हूं।

  • MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम

    MP: गुना में 1 जनवरी से पुलिसकर्मियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर मिलेगी छुट्टी, SP ने जारी किए नए नियम


    गुना।
    लंबी ड्यूटी और काम के बोझ से परेशान पुलिसवालों (Policemen) के लिए अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना जिले (Guna District) के पुलिसकर्मियों के लिए नया साल नई खुशियों की सौगात लेकर आएगा। गुना के पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी (SP Ankit Sony) ने पुलिस बल के लिए नए अवकाश नियम (New Leave Rules) जारी किए हैं। अब पुलिस कर्मियों को अपने, पत्नी और बच्चों के जन्मदिन के साथ-साथ शादी की सालगिरह पर एक दिन का अवकाश मिलेगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2026 से लागू होगी।

    बता दें कि, कठिन ड्यूटी और काम के दबाव के चलते पुलिसकर्मी अक्सर परिवार के खास मौकों में शामिल नहीं हो पाते थे। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए एसपी ने यह मानवीय निर्णय लिया है, ताकि जवान परिवार के साथ समय बिता सकें।

    नए आदेश के अनुसार, पुलिसकर्मी अपने जन्मदिन, जीवनसाथी के जन्मदिन, बच्चों के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर एक दिन का अनिवार्य आकस्मिक अवकाश ले सकेंगे।

    आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी पुलिसकर्मी के परिवार में घनिष्ठ परिजन के निधन की स्थिति में मामले को संवेदनशील मानते हुए बिना किसी कागजी देरी के तुरंत अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। सभी थानों और कार्यालयों को कर्मचारियों की जन्मतिथि और विवाह वर्षगांठ का कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छुट्टी स्वीकृति में कोई बाधा न आए।

    एसपी अंकित सोनी के इस फैसले की जिले ही नहीं पूरे पुलिस विभाग में सराहना हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जवानों का मनोबल बढ़ेगा और पुलिसकर्मियों व उनके परिवारों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

  • Delhi की फिजा फिर हुई जहरीली…. धुंध और कोहरे की मोटी परत छाई, AQI- 353 दर्ज

    Delhi की फिजा फिर हुई जहरीली…. धुंध और कोहरे की मोटी परत छाई, AQI- 353 दर्ज


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी (Capital) में हवा (Air) की गति धीमी होने और तापमान गिरने के कारण शुक्रवार को हवा एक बार फिर से खराब से बेहद खराब श्रेणी (Worst Category) में पहुंच गई। जो शनिवार को भी बेहद खराब श्रेणी (Worst Category) में बरकरार है। आज फिर सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई, जिससे चलते विजिबिलिटी (Visibility) बेहद कम हो गई। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, शनिवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 353 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है।

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 377, आनंद विहार में एक्यूआई 410, अशोक विहार में 388, आया नगर में 272, बवाना में 400, बुराड़ी में 342, चांदनी चौक इलाके में 380 एक्यूआई दर्ज किया गया है।

    वहीं, डीटीयू में 402, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 366, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 259, आईटीओ में 379, जहांगीरपुरी में 415, लोधी रोड 270, मुंडका 377, नजफगढ़ में 271, नरेला में 408, पंजाबी बाग में 361, आरकेपुरम 363, रोहिणी 409, सोनिया विहार 370, विवेक विहार 424, वजीरपुर में 397 दर्ज किया गया है।


    क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

    यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। 101-200 का मतलब वायु प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब और 301 से 400 के बीच का अर्थ वायु गुणवत्ता की बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है। 401 से 500 की श्रेणी में वायु की गुणवत्ता गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति में इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचता है। पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है।