कहानी और कास्ट की डिटेल्स
Author: bharati
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दृश्यम 3: अजय देवगन 2 अक्टूबर, 2026 को विजय सालगांवकर के रूप में वापसी करेंगे
नई दिल्ली/अजय देवगन ‘दृश्यम 3’ में विजय सालगांवकर के रूप में वापसी करेंगे जो 2 अक्टूबर 2026 को दुनिया भर में सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इस बहुप्रतीक्षित सीक्वल की शूटिंग ज़ोरों पर चल रही है जिसमें ओरिजिनल कास्ट भी वापसी करने वाली है।एक्टर अजय देवगन ‘दृश्यम 3’ में विजय सालगांवकर के रूप में वापसी करने वाले हैं। मेकर्स ने सोमवार को घोषणा की कि यह फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस पॉपुलर फ्रेंचाइजी की बहुप्रतीक्षित तीसरी किस्त की शूटिंग फिलहाल ज़ोरों पर चल रही है।विजय सालगांवकर की वापसीअजय देवगन द्वारा शानदार ढंग से निभाए गए विजय सालगांवकर एक साधारण मध्यम वर्गीय व्यक्ति हैं जो हर मुश्किल का सामना हिंसा से नहीं बल्कि अपनी इच्छाशक्ति बुद्धिमत्ता और अपने परिवार के प्रति अटूट प्यार से करते हैं।विजय सालगांवकर एक आइकॉनिक ऑन-स्क्रीन पिता के रूप में उभरे जो अपनी तेज़ सोच और भावनात्मक ताकत से हर मुश्किल का सामना करते हैं।
कहानी और कास्ट की डिटेल्समेकर्स के अनुसार फिल्म की शूटिंग कई शहरों और लोकेशन्स पर की जा रही है। कहानी स्थापित ‘दृश्यम’ टाइमलाइन के भीतर आगे बढ़ेगी जिसमें सालगांवकर परिवार के जीवन में नए और अप्रत्याशित मोड़ आएंगे।अजय देवगन तब्बू श्रिया सरन और रजत कपूर सहित ओरिजिनल कलाकारों की टीम अन्य जाने-माने एक्टर्स के साथ अपनी भूमिकाओं को दोहराएगी। मेकर्स ने कहानी के आगे बढ़ने के साथ ही रोमांचक ड्रामा का संकेत दिया है। -

संभल में 'मुस्कान कांड' की पुनरावृत्ति: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतारा मौत के घाट शव के किए कई टुकड़े
संभल । उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज ‘मुस्कान कांड’ की खौफनाक यादें अभी जनता के मानस पटल से धुंधली भी नहीं हुई थीं कि संभल जिले के चन्दौसी क्षेत्र में वैसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक पत्नी ने अपने प्रेम संबंधों में बाधक बन रहे पति को न केवल रास्ते से हटाया बल्कि हत्या के बाद उसके शव के साथ जो दरिंदगी की उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति के शव को कसाई की तरह टुकड़ों में काटा और उन्हें पॉलीथिन में भरकर शहर के विभिन्न हिस्सों में ठिकाने लगा दिया।ईदगाह के पास मिले मांस के लोथड़े फैली सनसनी
वारदात का खुलासा सोमवार को तब हुआ जब पतरोआ रोड स्थित ईदगाह के बाहर लावारिस पॉलीथिन बैग्स मिले। जब स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा तो उनमें मानव शरीर के कटे हुए हिस्से और मांस के लोथड़े थे। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हत्यारों ने पहचान छुपाने के उद्देश्य से सिर हाथ और पैरों को बड़ी ही बेरहमी से काटकर अलग कर दिया था। पुलिस के लिए बिना सिर वाले धड़ और अंगों की शिनाख्त करना एक बड़ी चुनौती बन गई थी।हाथ पर गुदे ‘नाम’ और झूठी ‘गुमशुदगी’ ने खोला राज
अंधे कत्ल की इस गुत्थी को सुलझाने में मृतक के हाथ पर लिखा उसका नाम संजीवनी साबित हुआ। पुलिस ने जब जिले में दर्ज हालिया गुमशुदगी की रिपोर्टों को खंगाला तो कड़ियाँ जुड़ने लगीं। जांच में सामने आया कि मोहल्ला चुन्नी निवासी राहुल मृतक की पत्नी रूबी ने ही 18 नवंबर को कोतवाली जाकर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस को रूबी की बातों पर संदेह तब हुआ जब उसके बयानों में लगातार विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ और मोबाइल सर्विलांस की मदद से पुलिस जब रूबी के प्रेमी गौरव तक पहुँची तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया। रूबी ने स्वीकार किया कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।मेरठ के ‘मुस्कान कांड’ की तर्ज पर रची गई खूनी साजिश
यह मामला पूरी तरह से मेरठ के सौरभ हत्याकांड मुस्कान कांड की कार्बन कॉपी नजर आता है। जिस तरह मेरठ में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति के टुकड़े किए थे ठीक उसी तरह रूबी और गौरव ने राहुल की हत्या घर के भीतर ही की। हत्या के बाद आरी या धारदार हथियार से शव को काटा गया और साक्ष्यों को मिटाने के लिए टुकड़ों को पॉलीथिन में भरकर अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया गया।गायब अंगों की तलाश और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस की फोरेंसिक टीम ने आरोपी के घर से साक्ष्य जुटाए हैं जहाँ खून के धब्बे और हत्या में प्रयुक्त सामान मिलने की संभावना है। हालांकि पुलिस के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती राहुल के ‘सिर’ और शरीर के अन्य लापता हिस्सों को बरामद करना है जिन्हें आरोपियों ने कहीं दूर ठिकाने लगाया है। कोतवाली प्रभारी के अनुसार दोनों आरोपियों रूबी और गौरव को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे गहन पूछताछ जारी है ताकि हत्या में प्रयुक्त हथियार और शेष अंगों को बरामद किया जा सके। इस घटना ने समाज में पनप रहे अपराध और रिश्तों के कत्ल की भयावह तस्वीर पेश की है। -

एयरपोर्ट पर दिखी जीत की झलक, रणवीर-दीपिका के स्टाइल ने फैंस को किया दीवाना
नई दिल्ली।बॉलीवुड के पावर कपल रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण मुंबई एयरपोर्ट पर हाथ में हाथ डाले नजर आए। रणवीर की हालिया रिलीज़ फिल्म धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाया है और भारत में ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म की सफलता के बाद पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में आए रणवीर का जोश साफ नजर आया। दोनों ने ब्लैक आउटफिट्स में ट्विनिंग करते हुए मीडिया और फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचा।रणवीर-दीपिका का मैचिंग लुक और फैंस की प्रतिक्रियाएं
एक इंस्टाग्राम वीडियो में रणवीर और दीपिका को रविवार शाम एयरपोर्ट पर आते हुए देखा गया। दोनों ब्लैक ड्रेस में हाथ में हाथ डाले कार से बाहर निकले और कैमरे की फ्लैश के बीच मुस्कुराते रहे। फैंस ने सोशल मीडिया पर रणवीर को उनकी फिल्म धुरंधर और तस्वीर के लिए जमकर मैसेज किए। एक यूजर ने लिखा चॉकलेट बॉय से लेकर खिलजी बाजीराव और अब हमजा रणवीर की एक्टिंग रेंज कमाल की है रणबीर और विक्की से कहीं बेहतर। वहीं कई लोगों ने लिखा कि रणवीर-दीपिका की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे हॉट जोड़ी है और उनकी मैचिंग ड्रेस देखकर फैंस काफी खुश हुए।धुरंधर का धमाकेदार प्रदर्शन और फिल्म की खासियत
धुरंधर एक स्पाई थ्रिलर है जिसमें रणवीर सिंह ने भारतीय जासूस की भूमिका निभाई है जो पाकिस्तान के लियारी में आतंक नेटवर्क में घुसपैठ करता है। फिल्म में संजय दत्त अर्जुन रामपाल और आर. माधवन भी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की कहानी अभिनय और एडिटिंग ने दर्शकों को फिल्म थियेटर में खींचा और बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कराई। फिल्म का दूसरा पार्ट अगले साल मार्च में रिलीज़ होने वाला है जिसे दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।रणवीर का विक्ट्री वॉक और फैंस की दीवानगी
फैंस ने रणवीर के विजय रूटीन को स्टाइलिश बताते हुए सोशल मीडिया पर कई कमेंट्स किए। एक यूजर ने लिखा Victory walk but make it stylish! वहीं कई ने दीपिका और रणवीर की जोड़ी की तारीफ की और उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में स्थिरता की सराहना की। रणवीर और दीपिका की यह तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और फैंस इसे जमकर शेयर कर रहे हैं। -

भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 मिलियन डॉलर निवेश का ऐलान, ट्रंप को लगा झटका
नई दिल्ली/भारत और न्यूजीलैंड ने नौ महीनों की तेज वार्ता के बाद ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते FTA की घोषणा की है जो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। भारत ने वैश्विक व्यापार और कूटनीति के मोर्चे पर एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन वार्ता में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते FTA की ऐतिहासिक और संयुक्त घोषणा की गई। यह समझौता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।9 महीने में पूरा हुआ ऐतिहासिक समझौताभारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी जब प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भारत दौरे पर आए थे। मात्र नौ महीनों के भीतर इस समझौते का पूरा होना दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक सोच को दर्शाता है। इस तेजी ने वैश्विक व्यापार जगत में भी ध्यान खींचा है।पांच साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि एफटीए के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाएगा। यह समझौता व्यापार निवेश नवाचार और सप्लाई चेन सहयोग को नई गति देगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कृषि डेयरी फूड प्रोसेसिंग शिक्षा टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्रों में विशेष अवसर खुलेंगे।15 साल में भारत में 20 मिलियन डॉलर का निवेश
न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में कुल 20 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इससे न सिर्फ नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि तकनीकी और औद्योगिक सहयोग भी मजबूत होगा। यह निवेश भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।
भारत का सातवां बड़ा FTA वैश्विक नेटवर्क मजबूतन्यूजीलैंड के साथ यह भारत का सातवां प्रमुख FTA है। इससे पहले भारत ने ओमान UAE यूके ऑस्ट्रेलिया मॉरीशस और EFTA देशों के साथ समझौते किए हैं। यह श्रृंखला भारत को तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करती है।ट्रंप की व्यापार नीति को परोक्ष झटका
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब अमेरिका खासकर डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी और टैरिफ-केंद्रित नीति पर जोर दे रहा है भारत का लगातार नए FTA करना वैश्विक व्यापार के लिए वैकल्पिक और खुला मॉडल पेश करता है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। -

अरावली की परिभाषा बदली नहीं खनन को लेकर भ्रम फैलाया गया: 100 मीटर विवाद पर केंद्र सरकार की सफाई
नई दिल्ली । अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में बदलाव कर बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति दिए जाने से जुड़ी खबरों को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि न तो अरावली की परिभाषा कमजोर की गई है और न ही 100 मीटर से नीचे के क्षेत्रों में खनन को खुली छूट दी गई है। बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित एक मानकीकृत परिभाषा के जरिए अरावली क्षेत्र को पहले से अधिक मजबूत सुरक्षा प्रदान की गई है। केंद्र सरकार ने यह सफाई उन रिपोर्ट्स के बाद दी जिनमें दावा किया गया था कि अरावली पर्वतमाला की नई परिभाषा के चलते खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस प्रतिबंध का हवाला दिया जिसके तहत अरावली पर्वतीय क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर रोक लगी हुई है। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक एक व्यापक और वैज्ञानिक प्रबंधन योजना को अंतिम रूप नहीं दिया जाता। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सुंदरबन बाघ अभयारण्य में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित परिभाषा के लागू होने से अरावली क्षेत्र का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संरक्षित क्षेत्र के दायरे में आ जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को कमजोर करना नहीं बल्कि कानूनी अस्पष्टताओं को दूर कर अरावली की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित करना है।दरअस 100मीटर के मापदंड कोलेकर पैदा हुए विवाद के बीच सरकार ने स्पष्ट किया कि यह परिभाषा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर सभी संबंधित राज्यों में एकरूपता लाने के लि तैयार की गई है। इसका मकसद उन खामियों को खत्म करनाहै जिनका फायदा उठाकर पहाड़ियों के आधार के बेहद करीब खनन जारी रखा जाता था।पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई के दौरान मई 2024 में एक समिति के गठन का निर्देश दिया था।इस समिति का काम अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की एक ‘समान और स्पष्ट परिभाषा’ सुझाना था।समिति की अध्यक्षता पर्यावरण मंत्रालय के सचिव ने की जबकि इसमें राजस्थान हरियाणा गुजरात और दिल्ली के प्रतिनिधियों के साथ-साथ तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल थे। समिति ने अपनी जांच में पाया कि चारों राज्यों में अरावली की परिभाषा को लेकर अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे थे। केवल राजस्थान में ही वर्ष 2006 से एक औपचारिक और स्पष्ट परिभाषा लागू थी। अंततः समिति ने राजस्थान की उसी परिभाषा को आधार बनाकर सभी राज्यों में लागू करने की सिफारिश की जिस पर सभी राज्य सहमत हो गए।इस परिभाषा के अनुसार स्थानीय भू-भाग से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को पहाड़ी माना जाएगा। इसके साथ ही ऐसी पहाड़ियों को घेरने वाली सबसे निचली सीमा रेखा के भीतर खनन पूरी तरह निषिद्ध रहेगा भले ही उस सीमा के भीतर मौजूद भू-आकृतियों की ऊंचाई या ढलान कुछ भी हो। सरकार ने यह भी साफ किया कि 100 मीटर से नीचे की सभी भू-आकृतियों को खनन के लिए खुला मानना पूरी तरह गलत निष्कर्ष है। यह प्रतिबंध केवल पहाड़ी के शिखर तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी पहाड़ी प्रणाली और उसके भीतर आने वाले सभी क्षेत्रों पर लागू होता है।
इसके अलावा परिभाषा को और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़े गए हैं। इनमें 500 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ियों को एक ही पर्वत श्रृंखला मानना खनन से पहले भारतीय सर्वेक्षण विभाग के मानचित्रों पर अनिवार्य मैपिंग और खनन निषिद्ध मुख्य व संरक्षित क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान शामिल है। सरकार ने दोहराया कि अरावली की परिभाषा में बदलाव को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम तथ्यात्मक रूप से गलत है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 20 नवंबर 2025 को इन सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के बाद अरावली पर्वतमाला की कानूनी सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
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ठंड में घूमने का प्लान? ये 10 हिल स्टेशन बना देंगे ट्रिप को खास
Winter travel Indiaनई दिल्ली/ज़्यादातर राज्य में नवंबर-दिसंबर में ठंड का मौसम शुरू हो जाता है. अगर आप भी इस सर्दी में हिल स्टेशन जाने का प्लान बना रहे है. तो यहां भारत की 10 छिपी हुई और खूबसूरत जगहों की लिस्ट है जो सर्दियों में घूमने के लिए एकदम सही है.मेचुका वैली, अरुणाचल प्रदेशनवंबर-दिसंबर के दौरान अरुणाचल प्रदेश बर्फ से ढका रहता है. आप इस समय मेचुका वैली घूमने जा सकते है. सर्दियों में यहां का तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे चला जाता है. इसके अलावा यह वैली दूसरी जगहों के मुकाबले बहुत कम भीड़ वाली है. यहां आप पंचमुखी शिव मंदिर 400 साल पुरानी योंगचा मठ और कई झरने देख सकते है.कल्पा वैली, हिमाचल प्रदेश
कांगड़ा, शिमला और मनाली के बजाय आप कल्पा वैली जा सकते है. यह एक छोटा सा गांव है जिसकी आबादी दूसरे गांवों के मुकाबले कम है. नवंबर से फरवरी तक यह वैली बर्फ की सफेद चादर से ढकी रहती है. यह जगह अपने पार्टनर और परिवार के साथ समय बिताने के लिए एकदम सही है.ज़ीरो वैली, अरुणाचल प्रदेशज़ीरो वैली की खूबसूरती हर किसी को मोह लेती है. यह समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां होने वाला म्यूजिक फेस्टिवल दुनिया भर में मशहूर है. अगर आप नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति को करीब से देखना और अनुभव करना चाहते है, तो यह जगह एकदम सही है.
चोपता, उत्तराखंडसमुद्र तल से लगभग 2,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चोपता, तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रेक के लिए जाना जाता है. सर्दियों में यहां से हिमालय की चोटियां और भी खूबसूरत दिखती है. इस जगह से चौखंबा और नंदा देवी जैसी चोटियां साफ देखी जा सकती है. अगर आप कम बजट में शानदार अनुभव चाहते हैं, तो आप यहां आ सकते है.लंबासिंगी, आंध्र प्रदेश
लंबासिंगी दक्षिण भारत की एकमात्र ऐसी जगह है जहां सर्दियों में तापमान शून्य डिग्री के करीब रहता है. इतना ही नहीं, यहां कभी-कभी बर्फबारी भी होती है. यह हिल स्टेशन नवंबर से जनवरी के बीच कोहरे की चादर से ढका रहता है. यहां आखिरी बार बर्फबारी 2012 में हुई थी. अगर आप सुहावनी ठंड के साथ घाटियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप यहां आ सकते है.मैनपाट, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में मैनपाट को मिनी तिब्बत के नाम से जाना जाता है. हालांकि यहां बहुत ज़्यादा ठंड नहीं पड़ती, लेकिन यहां एक सुहावनी ठंडक रहती है. यहां कई घूमने की जगहें है, जिनमें धकपो शेड्रूपलिंग मठ, परपतिया व्यू पॉइंट और टाइगर पॉइंट शामिल है. इनके अलावा यहां कई छोटे-बड़े झरने भी है जिनका आप मज़ा ले सकते है. मैनपाट में दिसंबर से जनवरी तक एक आदिवासी त्योहार मनाया जाता है, जो आपकी यात्रा में रोमांच का अनुभव देगा.तवांग, अरुणाचल प्रदेश
3,048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, तवांग स्वर्ग का दूसरा नाम है. यहां सेला पास और सेला झील पूरी तरह से जम जाते है. एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ तवांग मठ यहीं स्थित है. आप बटर टी के साथ पारंपरिक भोजन और संस्कृति का आनंद ले सकते है.लोहाजंग, उत्तराखंड
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित लोहाजंग गांव, ब्रह्मताल, अली बेदनी और बुग्याल ट्रेक के लिए बेस कैंप है. यहां से नंदा देवी और त्रिशूल चोटियों के शानदार नज़ारे दिखते है. दिन में धूप रहती है, लेकिन रात में तापमान -28°C से नीचे चला जाता है.बिनसर, उत्तराखंड
अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर समुद्र तल से 2,420 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां से हिमालय का 360-डिग्री नज़ारा दिखता है. अगर आप अपने साथ कुछ शांति भरे पल बिताना चाहते है, तो आप यहां आ सकते है.खिरसू, उत्तराखंड
पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित खिरसू एक शांत और छिपा हुआ हिल स्टेशन है. यहां से आप नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली सहित 300 से ज़्यादा पहाड़ों की चोटियां देख सकते है. गंडियाल देवी मंदिर सेब के बाग और देवदार के जंगल आपको एक अनोखी शांति का अनुभव देंगे. -

जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार
वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।
जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।
दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।
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आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो
इस्लामाबाद । पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से तालिबान को चेतावनी दी है। मुनीर ने तालिबान सरकार से टीटीपी या फिर पाकिस्तान में से एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकियों में अफगान नागरिक शामिल हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुनीर ने पाकिस्तान और 1,400 साल पहले पैगंबर द्वारा अरब क्षेत्र (आज के सऊदी अरब) में स्थापित राज्य के बीच समानताएं भी बताईं।हालांकि 10 दिसंबर को दिए गए भाषण का आधिकारिक विवरण सीमित था, लेकिन उनके भाषण के चुनिंदा क्लिप रविवार को स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित किए गए। मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनने के लिए कहा, और कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का बड़ा हिस्सा अफगान नागरिकों का है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आने वाले टीटीपी के गुटों में 70 प्रतिशत अफगान हैं। क्या अफगानिस्तान हमारे पाकिस्तानी बच्चों का खून नहीं बहा रहा है?” उन्होंने अपनी बात दोहराई कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और TTP में से किसी एक को चुनना चाहिए।
मुनीर ने आगे कहा कि एक इस्लामी देश में सरकार के अलावा कोई भी जिहाद का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अधिकार प्राप्त लोगों के आदेश, अनुमति और इच्छा के बिना कोई भी जिहाद का फतवा जारी नहीं कर सकता।” उनकी स्पीच में इस्लामिक बातों का जिक्र था, और उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुरान की कई आयतें भी पढ़ीं।
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धुरंधर एनिमल को पछाड़; टॉप 10 इंडियन फिल्म में हुई शामिल
मुंबई। आदित्य धर की फिल्म एक के बाद एक कई रिकॉर्ड अपने नाम कर रही है। फिल्म ने रविवार को एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया है। धुरंधर अब इस साल की टॉप 10 इंडियन फिल्मों की लिस्ट में आ गई है। फिल्म ना सिर्फ 10वें नंबर पर आ गई है बल्कि इसने रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल को भी पछाड़ दिया है।दरअसल, संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म एनिमल टॉप 10 की लिस्ट में 10वें नंबर पर थी। फिल्म ने तीसरे रविवार को 555.7 करोड़ की कमाई की। वहीं एनिमल का भारत में लाइफटाइम कलेक्शन 553 करोड़ है।
बताते हैं आपको भारत की टॉप 10 फिल्में ऑफ ऑल टाइम
पुष्पा द रूल पार्ट 2 : 1234.1 करोड़
बाहुबली 2 : 1030 करोड़
केजीएफ चैप्टर 2 : 859.7करोड़
आरआरआर : 782.2 करोड़
कल्कि 2898 एडी : 646.31 करोड़
जवान : 640.25
कंतारा चैप्टर 1: 633.42 करोड़
छावा : 601.54 करोड़
स्त्री 2 : 597.99 करोड़
धुरंधर : 555.7 करोड़
बता दें कि संदीप रेड्डी वांगा, धुरंधर की तारीफ भी कर चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, धुरंधर ऐसी फिल्म है जैसे एक आदमी जो ज्यादा बोलता नहीं, लेकिन वह काफी डेडिकेटेड है। धुरंधर टाइटल ही फिल्म पर फिट बैठता है जिसमें ताकत दिखती है। फिल्म का म्यूजिक, परफॉर्मेंस, स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन टॉप पर है। अक्षय खन्ना सर और रणवीर सिंह ने जबरदस्त काम किया है।
वहीं फिल्म धुरंधर की बात करें तो यह फिल्म का पहला पार्ट है जिसमें रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन अहम किरदार में हैं। फिल्म 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी और तबसे बॉक्स ऑफिस पर तूफानी कमाई कर रही है। फिल्म को वर्ड ऑफ माउथ का काफी फ्यादा हुआ है। अब इसका सीक्वल अगले साल मार्च में रिलीज होगा।
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नए साल का तोहफा! दिल्ली में EV खरीदने पर मिलेगी बंपर सब्सिडी, जानिए नई पॉलिसी में क्या-क्या शामिल?
नई दिल्ली/दिल्ली सरकार राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 लाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 20 दिसंबर 2025 को इस पॉलिसी से जुड़े अहम बिंदुओं की जानकारी साझा की। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता घटे और लोग तेजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर शिफ्ट हों। इसके लिए पॉलिसी में आर्थिक प्रोत्साहन के साथ मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया है।
EV खरीद पर मिलेगी बंपर सब्सिडीनई EV पॉलिसी में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर सब्सिडी एक बड़ा आकर्षण होगी। सरकार पेट्रोल-डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों के अंतर को कम करने के लिए सब्सिडी देने की योजना बना रही है। हालांकि, अभी सब्सिडी की अंतिम राशि और इसका ढांचा तय नहीं किया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि EV की ज्यादा कीमत अब आम लोगों के लिए बड़ी बाधा नहीं बनेगी। सरकार का मानना है कि इससे मध्यम वर्ग भी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के लिए प्रोत्साहित होगा।
स्क्रैपेज स्कीम से मिलेगा दोहरा फायदा
दिल्ली EV पॉलिसी 2.0 में वाहन स्क्रैपेज योजना को भी शामिल किया गया है। इसके तहत पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदता है, तो उसे अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे एक तरफ प्रदूषण कम होगा और दूसरी तरफ नई EV की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।
बैटरी रीसाइक्लिंग पर खास जोरनई पॉलिसी में बैटरी रीसाइक्लिंग को भी अहम स्थान दिया गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों की औसतन उम्र करीब 8 साल होती है। इनके निपटान और रीसाइक्लिंग को लेकर सरकार एक संगठित बैटरी रीसाइक्लिंग चेन विकसित करने की योजना बना रही है। दिल्ली में यह व्यवस्था पहली बार लागू की जाएगी, जिससे पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को कम किया जा सके।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत
दिल्ली सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक राजधानी में करीब 5,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना है। हर स्टेशन पर 4 से 5 चार्जिंग प्वाइंट होंगे। ये चार्जिंग स्टेशन मार्केट कॉम्पलेक्स, मल्टीलेवल पार्किंग, सरकारी इमारतों और ऑफिस परिसरों में लगाए जाएंगे। इससे EV यूजर्स को चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध होगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में भरोसा बढ़ेगा।कुल मिलाकर, दिल्ली EV पॉलिसी 2.0 को सरकार नए साल में लोगों के लिए एक बड़े तोहफे के तौर पर देख रही है, जो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ भविष्य की साफ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की नींव रखेगी।