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शोषण का आरोप
पुलिस कार्रवाई
आरोपी एएसआई का बयान
शोषण और असुरक्षा का माहौल
समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

काली उड़द का दान
शनिवार के दिन काली उड़द का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसे किसी गरीब ब्राह्मण या मजदूर को दान में देने से नौकरी या व्यापार संबंधी परेशानियों का समाधान होता है। यह शनि देव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली उपाय है। काली उड़द का दान शनि के प्रभाव को कम कर जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है।
काले तिल का दान
काले तिल को शनि ग्रह से जोड़ा गया है। शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। शनि दोष से राहत पाने के लिए काले तिल का दान विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। यह उपाय शनि के प्रकोप को कम करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लोहे का दान
शनि देव का धातु तत्व लोहा है। इसलिए शनिवार को लोहे की किसी भी उपयोगी वस्तु जैसे कटोरी कढ़ाई तवा या लोहे का सिक्का दान करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा दान करने से शनि दोष शांत होता है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय जीवन में आर्थिक स्थिति सुधारने और शनि के कुप्रभाव को कम करने में सहायक है।
काले जूते-चप्पल का दान
काले जूते या चप्पल का दान शनि देव की कृपा को आकर्षित करने का एक और प्रभावशाली उपाय है। इससे न केवल शनि का प्रभाव कम होता है बल्कि आर्थिक उन्नति भी होती है। काले जूते या चप्पल का दान करने से जीवन के संघर्ष और नौकरी या यात्रा में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। यह दान शनि प्रकोप को शांत करने और जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।
सरसों के तेल का दान
शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसे किसी जरूरतमंद को दान करना या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी है। यह दान जीवन में आर्थिक स्थिरता सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यह एक प्रमुख उपाय माना जाता है जो विशेष रूप से शनिदोष और आर्थिक संकट से उबरने में मदद करता है।
यदि आप शनिवार को ऊपर बताए गए पांच उपायों को नियमित रूप से करते हैं तो शनि देव का प्रभाव आपके जीवन में सकारात्मक दिशा में बदल सकता है। शनि की पूजा और दान से न केवल शनि दोष कम होते हैं बल्कि व्यक्ति के घर स्वास्थ्य और व्यवसाय में सुख और समृद्धि का प्रवाह भी सुनिश्चित होता है। इसलिए शनि देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

शीतकालीन सत्र का प्रारंभ
सत्र के पहले दिन 19 दिसंबर को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विधानसभा में योगदान देने वाले उन नेताओं को सम्मानित करना है जिनका हाल ही में निधन हुआ था। इसके बाद 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा। 22 दिसंबर को सत्र का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।
अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर चर्चा
सत्र के दौरान 22 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा जिसमें राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए प्रस्तावित खर्चों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा उसी दिन वंदे मातरम् पर पांच घंटे की विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह चर्चा भारतीय राष्ट्रवाद और संस्कृति को बढ़ावा देने के संदर्भ में होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा जन आकांक्षाओं का महत्वपूर्ण मंच है और इस चर्चा के माध्यम से सरकार सभी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करेगी।
‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र के उद्घाटन से पहले प्रदेश के ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’ पर बात की। उन्होंने पिछले सत्र में इस विषय पर हुई 27 घंटे लंबी चर्चा का हवाला दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश से लगभग 98 लाख सुझाव प्राप्त किए थे जिनका उपयोग आईआईटी कानपुर के सहयोग से अंतिम रूप देने में किया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट उत्तर प्रदेश के 2047 तक के विकास का रोडमैप तय करेगा।
एसआईआर अभियान और वीर बाल दिवस
मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर स्पेशल इन्फॉर्मेशन रिवाइज अभियान की सराहना की। इस अभियान के माध्यम से मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा जिससे लोकतंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की गई है। यह दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति बच्चों को प्रेरित करने के लिए मनाया जाएगा।
विधायी कार्य और आगामी कार्यक्रम
सत्र के अंतिम दो दिनों यानी 23 और 24 दिसंबर को विधायी कार्य और विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इन दो दिनों में विभिन्न विधेयकों पर विचार किया जाएगा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने इस बात को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हमेशा जनहित में निर्णय लेना और समस्याओं का समाधान करना रहेगा।
संपूर्ण सत्र में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह भी कहा कि इस सत्र के दौरान जनोपयोगी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दलों के सहयोग से विधानसभा का संचालन सुचारु रूप से होगा और प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

यह विवाद अहमदाबाद की एक कंपनी मेसर्स स्ट्राटाटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह कोल ब्लॉक आवंटन आदिवासी इलाकों में हो रहा है जहां पेड़ों और जमीनों की भारी कटाई की जा रही है। इस पर विरोध करते हुए स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से शांति पूर्वक आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार उनकी आवाज़ों को अनदेखा कर रही है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बिना किसी वैध अनुमति के और मनमाने तरीके से पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसके साथ ही हजारों आदिवासी परिवारों को उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है बिना पुनर्वास की कोई व्यवस्था किए। सिंगरौली में आदिवासी परिवारों के खिलाफ पुलिस बल तैनात किया जा रहा है ताकि उनका विरोध कुचला जा सके। कांग्रेस ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ है और आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन है।
इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एमपी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। कांग्रेस ने ट्वीट किया प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ कहते हैं कि ‘एक पेड़ मां के नाम लगाओ और दूसरी तरफ वही मोदी अडानी को हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि सरकार आदिवासियों के खिलाफ दमनात्मक नीतियां अपना रही है जबकि वही लोग अपनी ज़मीन पर काबिज होते हुए भी अन्याय का शिकार हो रहे हैं।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने इस मामले की जांच की और पाया कि अडानी के लिए 2672 हेक्टेयर ज़मीन आवंटित की गई है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने यह भी कहा कि एक ओर जहां आदिवासी समुदायों को अपनी ज़मीन पर काबिज होने के लिए परेशान किया जाता है वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों को विशाल भूमि और जंगल की छूट दी जा रही है।
इस विवाद में एक और गंभीर आरोप यह है कि आदिवासी लोगों को अपने घरों से बेदखल किया जा रहा है जबकि सरकार ने किसी तरह का पुनर्वास या मुआवजा नहीं दिया है। सिंगरौली में स्थानीय लोग लंबे समय से शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अब प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है। यह स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है क्योंकि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी ज़मीन और जीवन का अधिकार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर एमपी कांग्रेस ने सरकार से जवाब की मांग की है और यह सुनिश्चित करने की बात की है कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन न हो। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा कि जब तक पेड़ों की कटाई और आदिवासियों का शोषण बंद नहीं होता उनका विरोध जारी रहेगा।

दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।
रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।
निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।