Author: bharati

  • IND vs SA: हार्दिक पंड्या ने रचा इतिहास, 1000 रन–100 विकेट पूरे; गिल बने 2025 के नंबर-1 बैटर, रिकॉर्ड्स की बरसात

    IND vs SA: हार्दिक पंड्या ने रचा इतिहास, 1000 रन–100 विकेट पूरे; गिल बने 2025 के नंबर-1 बैटर, रिकॉर्ड्स की बरसात


    नई दिल्ली /भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली गई टी-20 सीरीज का तीसरा मुकाबला यादगार बन गया। धर्मशाला में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 7 विकेट से हरा दिया। 118 रन के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 15.5 ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया। इससे पहले साउथ अफ्रीका की पूरी टीम 20 ओवर में 117 रन पर सिमट गई थी।

    इस मैच की सबसे बड़ी उपलब्धि हार्दिक पंड्या के नाम रही। हार्दिक टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 से ज्यादा रन बनाने और 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1939 रन और 100 विकेट के साथ हासिल की। खास बात यह है कि हार्दिक इस क्लब में शामिल होने वाले पहले फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर भी हैं। उनसे पहले इस सूची में केवल शाकिब अल हसन, मोहम्मद नबी और सिकंदर रजा जैसे स्पिन ऑलराउंडर शामिल थे। इसके अलावा हार्दिक भारत के लिए टी-20 इंटरनेशनल में 100 विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज भी बन गए, उनसे पहले यह कारनामा जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह कर चुके हैं।

    मैच में शुभमन गिल ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। गिल ने 28 रनों की पारी खेलते हुए साल 2025 में तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वनडे और टी-20) में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया। उनके कुल रन 1764 हो गए हैं, जिससे उन्होंने वेस्टइंडीज के शाई होप 1753 रन को पीछे छोड़ दिया। गिल ने यह मुकाम अपनी पारी का 18वां रन बनाते ही हासिल कर लिया। ओपनिंग में अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल में तीसरी बार पारी की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा। इसके साथ ही वह ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय बल्लेबाज बन गए। इससे पहले रोहित शर्मा, संजू सैमसन और यशस्वी जायसवाल यह उपलब्धि एक-एक बार हासिल कर चुके हैं।

    गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती ने भी खास उपलब्धि दर्ज की। उन्होंने सिर्फ 30 पारियों में अपने 50 टी-20 इंटरनेशनल विकेट पूरे किए और इस मामले में भारत के दूसरे सबसे तेज गेंदबाज बन गए। उनसे आगे केवल कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने 29 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। गेंदों के लिहाज से भी वरुण का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 672 गेंदों में 50 विकेट पूरे कर लिए और इमरान ताहिर तथा राशिद खान जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। अर्शदीप सिंह ने भी एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वे टी-20 इंटरनेशनल के पावरप्ले ओवरों में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बन गए। उन्होंने शुरुआती छह ओवरों में अब तक 48 विकेट चटकाए हैं और भुवनेश्वर कुमार को पीछे छोड़ दिया।

    मैच के दौरान कई रोचक मोमेंट्स देखने को मिले। अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में रीजा हेंड्रिक्स को DRS के जरिए आउट कर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई। वहीं 15वें ओवर में ऐडन मार्करम को जीवनदान मिला, जब हर्षित राणा उनका कैच नहीं पकड़ सके। इसके बावजूद मार्करम ने 18वें ओवर में छक्का जड़कर अपनी फिफ्टी पूरी की। साउथ अफ्रीका के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। क्विंटन डी कॉक टी-20 इंटरनेशनल में नौवीं बार शून्य पर आउट हुए, जो उनके करियर का एक नकारात्मक रिकॉर्ड है। कुल मिलाकर यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए रिकॉर्ड्स और आत्मविश्वास से भरा रहा। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग-तीनों विभागों में भारत ने साउथ अफ्रीका पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा और सीरीज में अपनी मजबूती साबित की।

  • घने कोहरे से उत्तर भारत में हाहाकार यूपी-राजस्थान में बड़े हादसे दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स लेट

    घने कोहरे से उत्तर भारत में हाहाकार यूपी-राजस्थान में बड़े हादसे दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स लेट


    नई दिल्ली । भारत में घने कोहरे के कारण रविवार को जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोहरे ने न केवल दृश्यता को कम किया बल्कि कई सड़क हादसों को भी जन्म दिया जिनमें कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। उत्तर प्रदेश राजस्थान और पंजाब में बड़े सड़क हादसे हुए हैं और दिल्ली एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट्स में देरी की सूचना है।

    उत्तर प्रदेश में बड़े हादसे
    उत्तर प्रदेश में कोहरे के कारण कई बड़े सड़क हादसे हुए हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हमीरपुर के इचौली इलाके में रविवार सुबह करीब नौ बजे एक स्लीपर बस ने एक बोलेरो को टक्कर मार दी। इस हादसे में बोलेरो सवार दो भाइयों सहित चार लोगों की मौत हो गई। दोनों भाई अपनी मां की अस्थियां विसर्जित करने महोबा से प्रयागराज जा रहे थे। इस हादसे में अन्य दो लोग भी घायल हुए हैं जिनका इलाज जारी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 30 से ज्यादा वाहन आपस में टकरा गए जिससे कई लोग घायल हुए और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। दुर्घटनाओं के कारण राज्यभर में यातायात ठप हो गया और कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं।

    राजस्थान और पंजाब में भी हादसे

    राजस्थान और पंजाब में भी कोहरे के कारण बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुईं। पंजाब में एक कार पुल से गिर गई जिससे उसमें सवार दंपती की मौत हो गई। हादसा सोमवार सुबह हुआ जब कोहरे के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और कार पुल से गिर गई। इस हादसे में दंपती की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनका बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है।

    दिल्ली एयरपोर्ट पर देरी
    कोहरे के असर से दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी हो रही है। खराब दृश्यता के कारण कई उड़ानें लेट हो गई हैं जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार कोहरे के कारण विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में देरी हो रही है और इस स्थिति में सुधार होने तक फ्लाइट्स की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी।

    मौसम की चेतावनी

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक घने कोहरे की संभावना जताई है। पंजाब उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान में कोहरे के कारण आने वाली दोपहर तक दृश्यता में कमी रह सकती है। यातायात सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ड्राइवरों को सतर्क रहने और धीमी गति से गाड़ी चलाने की सलाह दी है।

    उत्तर भारत में घने कोहरे ने एक बार फिर जानलेवा हादसों को जन्म दिया है। सड़क सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना और मौसम की चेतावनियों का पालन करना अत्यंत जरूरी है खासकर इस समय में जब दृश्यता बहुत कम हो जाती है। वहीं दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स में देरी यात्रियों के लिए एक और चुनौती बन गई है। मौसम सुधारने तक यह स्थिति बनी रह सकती है।

  • तानसेन: संगीत सम्राट की कहानी जिनकी आवाज़ में अग्नि और बादल दोनों बसते थे

    तानसेन: संगीत सम्राट की कहानी जिनकी आवाज़ में अग्नि और बादल दोनों बसते थे


    नई दिल्ली । तानसेन जिनका नाम भारतीय संगीत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है उन्‍हें संगीत सम्राट माना जाता है। उनका जीवन और संगीत दोनों ही रहस्य और किवदंतियों से भरपूर हैं। कहा जाता है कि उनकी आवाज़ में एक विशेष प्रकार का जादू था जिससे अग्नि और बादल दोनों सक्रिय हो जाते थे। तानसेन का संगीत केवल एक कला नहीं था बल्कि यह प्रकृति के साथ एक संवाद था जो श्रोताओं के दिलों और प्रकृति दोनों को छूता था।

    तानसेन का जन्म ग्वालियर के पास स्थित बेहट गांव में हुआ था। बचपन में उनका नाम तन्ना था और वे एक शरारती और जिज्ञासु बालक थे। गांव वाले अक्सर उनकी आवाजों से चौंकते थे जो वह जानवरों और पक्षियों की तरह निकालते थे। कभी जंगल में शेर की दहाड़ सुनाई देती तो कभी पक्षियों की अजीब आवाजें आतीं। यह सब तन्ना की आवाज़ का ही जादू था। लेकिन इस प्रतिभा के साथ वह धीरे-धीरे संगीत की गहरी दुनिया में कदम रखने लगे जो अंततः उन्हें भारत के महानतम संगीतकारों में से एक बना देगा।

    तानसेन के संगीत से जुड़ी कई किवदंतियां प्रचलित हैं। उनकी आवाज़ इतनी प्रभावशाली थी कि कहा जाता है कि वह जो राग गाते थे वह न केवल श्रोताओं के दिलों में गूंजते थे बल्कि प्रकृति पर भी उनका प्रभाव पड़ता था। उनके बारे में यह किंवदंती है कि जब वह दीपक राग गाते थे तो बुझी हुई दीपक अपने आप जल उठती थीं। इसी तरह मेघ राग से वह ऐसा प्रभाव छोड़ते थे कि आसमान में बादल घिर आते और बारिश हो जाती। इसके अलावा उनके गायन से चट्टानें भी पिघलने का दावा किया जाता है।

    तानसेन का संगीत अकबर के दरबार में बहुत प्रसिद्ध हुआ। 1556 में वे अकबर के दरबार में आए और जल्द ही वह ‘नवरत्नों’ में से एक बन गए। उनकी गायन कला और संगीत में महारत के कारण उन्हें ‘संगीत सम्राट’ की उपाधि दी गई। वह दरबार में न केवल एक गायक थे बल्कि एक संगीत गुरु भी थे। अकबर और तानसेन के बीच की मित्रता और संगीत के प्रति उनका प्रेम अविस्मरणीय था। अकबर ने तानसेन के संगीत को इतना पसंद किया था कि वह अक्सर उनके रागों से मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

    तानसेन की गायन शैली में भव्यता जटिलता और गहराई थी जो उन्हें अपने समकालीन संगीतज्ञों से अलग करती थी। वह मुख्य रूप से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के बड़े प्रवर्तक थे और उनकी गायन में ध्रुपद खयाल और ठुमरी जैसे विभिन्न शैलियों का संगम था। वह केवल एक गायक नहीं थे बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत को एक नई दिशा दी। उनकी दी गई रचनाओं में कुछ ऐसे राग भी थे जो आज भी संगीतकारों द्वारा गाए जाते हैं और जिनका प्रभाव भारतीय संगीत पर सदियों तक रहेगा।

    तानसेन के संगीत के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी कला को न केवल अभ्यास बल्कि गहरी साधना और ध्यान के माध्यम से सीखा। उनका जीवन संगीत के प्रति समर्पण का प्रतीक था और इसीलिए उनकी कला ने उन्हें ‘संगीत सम्राट’ का दर्जा दिलवाया। उनके गायन की विशेषता थी कि वह केवल स्वर नहीं गाते थे बल्कि उनकी आवाज़ में एक ऐसी शक्ति थी जो श्रोताओं के दिलों को छू जाती थी।

    तानसेन के जीवन के बारे में कई रहस्यमयी कहानियाँ और किवदंतियाँ प्रचलित हैं लेकिन उनकी संगीत यात्रा हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका संगीत भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का एक अमूल्य हिस्सा है। आज भी उनके रागों और गायन को श्रद्धा के साथ याद किया जाता है और संगीत प्रेमी उनके संगीत को हर पीढ़ी में जीवित रखने की कोशिश करते हैं।

    तानसेन का जीवन यह साबित करता है कि कला और प्रतिभा न केवल व्यक्ति के जीवन को संवारती है बल्कि वह समाज और संस्कृति को भी समृद्ध करती है। उनके गायन में जो जादू था वह आज भी लोगों के दिलों में गूंजता है और भारतीय संगीत के इतिहास में उनका नाम सदैव अमर रहेगा।

  • उत्तर प्रदेश में भूतों ने एक रात में बनाया शिव मंदिर जानिए इसके रहस्यमयी इतिहास के बारे में

    उत्तर प्रदेश में भूतों ने एक रात में बनाया शिव मंदिर जानिए इसके रहस्यमयी इतिहास के बारे में


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनसे जुड़ी कई रहस्यमयी और दिलचस्प मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से कई मंदिरों का संबंध देवताओं ऋषि-मुनियों या प्रमुख धार्मिक हस्तियों से होता है। मगर उत्तर प्रदेश में स्थित एक शिव मंदिर के निर्माण को लेकर एक अनोखी और हैरान करने वाली मान्यता है जिसमें दावा किया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था। खास बात यह है कि मंदिर की संरचना और इसकी ईंटें इतनी अद्वितीय हैं कि इस पर यकीन करना काफी मुश्किल हो सकता है।

    यह मंदिर उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में स्थित है और इसके निर्माण से जुड़ी किंवदंती काफी पुरानी है। यह माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सिर्फ एक रात में हुआ था। जब गांव में भूतों की कहानी प्रचलित हुई तो लोगों का ध्यान इस मंदिर की ओर आकर्षित हुआ। खास बात यह है कि मंदिर की सभी ईंटें एक ही रंग की हैं जो आमतौर पर देखने में बहुत ही असामान्य होती हैं। कहा जाता है कि रात के अंधेरे में भूतों ने मिलकर इस मंदिर का निर्माण किया और सुबह होते ही मंदिर पूरी तरह से तैयार था।

    मंदिर के निर्माण के समय की कहानी काफी दिलचस्प और रहस्यमयी मानी जाती है। किंवदंती के अनुसार गांव में एक पुराना शिव मंदिर था लेकिन वह काफी जर्जर हो चुका था और उसकी स्थिति बहुत ही खराब थी। गांव के लोग चाहते थे कि इस मंदिर को फिर से नया रूप मिले लेकिन इसके लिए किसी तरह का कोई प्रयास नहीं हो पा रहा था। एक रात जब गांव में कोई नहीं था तो भूतों ने रात भर मेहनत करके इस मंदिर का निर्माण किया। सुबह होते ही गांववाले यह देख कर हैरान रह गए कि एक रात में मंदिर बनकर तैयार हो गया था।

    मंदिर के निर्माण को लेकर जितनी भी कथाएं प्रचलित हैं वे सभी काफी रोमांचक और रहस्यमयी हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर भगवान शिव की कृपा से बना है और भूतों ने उनकी प्रेरणा से इस मंदिर का निर्माण किया। वहीं कुछ लोग इसे एक अद्वितीय घटना मानते हैं जो बिना किसी भौतिक कारण के घटित हुई। मंदिर की ईंटों के रंग की विशेषता भी इस घटना को और अधिक रहस्यमयी बनाती है। मंदिर की दीवारें और छत पर उकेरी गई आकृतियाँ भी काफी असामान्य हैं और इन्हें देखकर कोई भी यह कह सकता है कि यह कुछ अलौकिक शक्तियों का काम है।

    मंदिर के अंदर शिवलिंग की स्थापना है और वहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु आते रहते हैं। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में शिवजी की विशेष कृपा है और यहां आने से उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। मंदिर का माहौल बहुत ही शांत और ध्यानमग्न है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

    इस मंदिर का इतिहास न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह रहस्यों और किंवदंतियों से भी भरा हुआ है। जो लोग इस मंदिर का दौरा करते हैं वे इसके रहस्यमयी इतिहास और उसकी अनकही कहानियों के बारे में सुनकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। हालांकि इस मंदिर के निर्माण के सही कारणों का पता लगाना संभव नहीं हो पाया है लेकिन यह कहानी आज भी लोगों में एक जिज्ञासा और आकर्षण का कारण बन चुकी है।

    कुल मिलाकर यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसकी रहस्यमयी उत्पत्ति और निर्माण की कहानी इसे एक अनोखा स्थान बनाती है। यह स्थान उन लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है जो रहस्य इतिहास और धर्म के बीच के कनेक्शन को समझने में रुचि रखते हैं।

  • अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप

    अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप


    नई दिल्ली। कथावाचक और धार्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर जोरदार हमला बोलते हुए उसे मंथरा का अपडेट वर्जन और धृतराष्ट्र तक कह दिया। अनिरुद्धाचार्य का आरोप है कि कुछ मीडिया संस्थान और पत्रकार टीआरपी की दौड़ में उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाने और साजिश रचने का काम कर रहे हैं। अपने बयान में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज का मीडिया सच दिखाने के बजाय सनसनी फैलाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चैनल और पत्रकार लगातार उनके नाम को विवादों से जोड़कर पेश करते हैं, जबकि उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के प्रचार के साथ-साथ वृद्धाश्रम, शिक्षा और गौसेवा जैसे कार्यों में वर्षों से सक्रिय हैं, लेकिन मीडिया इन पहलुओं को कभी प्रमुखता से नहीं दिखाती।

    अपनी उम्र और सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि वे 35 वर्ष के हैं और महज 25 साल की उम्र से ही समाजसेवा में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इसके बावजूद मीडिया उनके काम की बजाय उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कभी-कभी मीडिया बिना पुष्टि के गलत खबरें चला देता है, उसी का नतीजा है कि एक बार अभिनेता धर्मेंद्र के जीवित रहते हुए उनकी मौत की खबर फैला दी गई थी। यह मीडिया की जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदारी को दिखाता है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उन्होंने केवल भारतीय संस्कृति के संदर्भ में अपनी राय रखी थी। उनके अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का हिस्सा नहीं है। इस विषय पर राय रखने के बाद ही मीडिया का एक वर्ग उनके पीछे पड़ गया और लगातार उनके खिलाफ रिपोर्टिंग करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीआरपी के लिए उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया और जानबूझकर विवाद खड़ा किया गया।

    अनिरुद्धाचार्य ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर और अफवाहें तक फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी का नुकसान नहीं किया, न ही किसी को भड़काने का काम किया, इसके बावजूद उन्हें बार-बार विवादों में घसीटा जाता है। उनका आरोप है कि कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान सनातन धर्म के खिलाफ पूर्वाग्रह के साथ काम कर रहे हैं।अपने सबसे तीखे शब्दों में उन्होंने मीडिया की तुलना रामायण की मंथरा से करते हुए कहा कि जैसे मंथरा ने साजिश कर परिवारों में फूट डाली थी, वैसे ही आज का मीडिया समाज को बांटने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले मंथरा हिंदुओं को आपस में लड़वाती थी और अब वही भूमिका मीडिया निभा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया को धृतराष्ट्र बताते हुए कहा कि यह सच देखने के बावजूद आंखें मूंद लेता है।

    अनिरुद्धाचार्य ने यहां तक कहा कि टीआरपी की होड़ में मीडिया किसी की जान को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म की सेवा करने वालों के खिलाफ साजिशें रची जा सकती हैं और उन्हें बदनाम करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। उनके इस बयान को कई लोग धमकी भरे लहजे के तौर पर भी देख रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनके कुछ वक्तव्यों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और कुछ मामलों में कानूनी नोटिस तक की नौबत आई है। उनका ताजा बयान एक बार फिर सोशल मीडिया और मीडिया जगत में बहस का मुद्दा बन गया है। जहां उनके समर्थक इसे सच बोलने की हिम्मत बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार दे रहे हैं।

  • मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा

    मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा


    महू । इंदौर जिले के मानपुर क्षेत्र में सोमवार सुबह मुंबई-आगरा फोरलेन पर दो ट्रकों में आग लग गई जिससे पूरा इलाका हड़बड़ी में आ गया। आग की लपटें और धुआं इतना विकराल था कि वह करीब एक किलोमीटर तक दिखाई देने लगा। ट्रकों में से एक ट्रक केमिकल से भरा हुआ था जबकि दूसरा ट्रक आग की चपेट में आ गया। इस हादसे से फोरलेन पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
    घटना के बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मानपुर और महू की फायर ब्रिगेड की टीम ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान पुलिस ने जाम में फंसे वाहनों को हटाकर यातायात व्यवस्था बहाल की और स्थिति को नियंत्रण में किया।
    आगजनी का यह मामला मानपुर थाना क्षेत्र के पास हुआ। ट्रक चालक राकेश ने बताया कि वह मुंबई के भिवंडी इलाके से इंदौर की लोहा मंडी के लिए केमिकल से भरे डिब्बे लेकर जा रहा था। रास्ते में वह मानपुर में चाय पीने के लिए रुका था लेकिन अचानक ढाबे के एक कर्मचारी ने बाहर खड़े ट्रक में आग लगने की सूचना दी। चालक के अनुसार ट्रक में कल ही माल भरा गया था और जब वह बाहर गया तो देखा कि आग तेजी से फैल रही थी।
    यह ट्रक आग की चपेट में आते ही पास खड़ा दूसरा ट्रक भी प्रभावित हो गया जिसके चलते दोनों ट्रकों में जलन के कारण आसपास के इलाके में धुआं और लपटें दिखाई देने लगीं। चूंकि यह ट्रक केमिकल से भरा हुआ था यह आग और भी खतरनाक हो सकती थी। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग की लपटों ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया। फिर दमकल कर्मियों की मदद से आग को काबू किया गया।
    पुलिस अधिकारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है लेकिन यह घटना दोनों ट्रकों के बीच हुई थी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है ताकि आग के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। इस मामले में ट्रक चालक राकेश और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।
    आग लगने के कारण फोरलेन पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया था जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दमकल की टीम की तत्परता और पुलिस की सजगता से एक घंटे में स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। इसके बाद यातायात को फिर से बहाल किया गया और मार्ग खोल दिया गया।
    इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और सड़क पर दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर किया। खासकर केमिकल या अन्य खतरनाक सामग्री ढोने वाले ट्रकों के लिए सुरक्षा उपायों का पालन करना और ट्रक ड्राइवरों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। आग की घटनाओं से बचने के लिए नियमित रूप से ट्रकों की जांच और रख-रखाव करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह देखने के लिए जांच करेगी कि आग कैसे लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं




    मध्यप्रदेश / भोपाल के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने शुभकामना संदेश में श्री शर्मा के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और जनसेवा के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नेतृत्व न केवल राजस्थान के विकास को नई दिशा दे रहा है, बल्कि सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में भी राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राजस्थान में विकास की गति तेज हुई है और आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि श्री शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान आने वाले समय में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक सशक्त राज्य के रूप में उभरेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि श्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली ऊर्जा, पारदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है। वे जनसेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हुए निरंतर जनता से संवाद बनाए रखते हैं, जिससे शासन और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी स्थापित हो रही है। यह जनभागीदारी ही किसी भी राज्य के समग्र विकास की नींव होती है।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि राजस्थान निरंतर विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे। उन्होंने कामना की कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सदैव असीम ऊर्जा और सामर्थ्य प्राप्त हो, जिससे वे जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करते रहें।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह शुभकामनाएं दोनों राज्यों के बीच सौहार्द, सहयोग और सकारात्मक राजनीतिक संवाद को भी दर्शाती हैं, जो संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

  • भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल में ब्राह्मण समाज का उग्र प्रदर्शन: CM हाउस घेराव की कोशिश, पुलिस से झड़प; बैरिकेडिंग टूटी, वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    भोपाल/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब ब्राह्मण समाज के प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। यह प्रदर्शन सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया था। ब्राह्मण समाज के लोगों का आरोप है कि संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। रविवार सुबह बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर एकत्र हुए। ग्वालियर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू की और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने लगे। पुलिस ने पहले ही इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे और बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद किया गया था। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ गए।

    रोशनपुरा चौराहे से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारी बाणगंगा चौराहे तक पहुंच गए। यहां चार लेयर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे भी पार करने की कोशिश करते रहे। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए तीन बार चेतावनी दी, लेकिन जब भीड़ नहीं मानी तो मजबूरी में वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ के दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया।

    पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर रातीबड़ इलाके में ले जाकर तितर-बितर किया। काफी देर की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव किया गया। इस बीच राज्य सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ बर्खास्तगी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग GADकी ओर से 12 दिसंबर को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग DoPTको भेजा गया था। हालांकि प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव अधूरा और अस्पष्ट है।

    पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने बताया कि प्रस्ताव में यह साफ नहीं किया गया है कि सरकार संतोष वर्मा को पूरी तरह बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका प्रमोशन रद्द करना चाहती है। दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं और इनके लिए अलग तरह के तथ्यों और सबूतों की जरूरत होती है। प्रस्ताव में केवल इतना उल्लेख है कि विभिन्न संगठनों से ज्ञापन मिले हैं और वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव पैदा हुआ है। इसी अस्पष्टता के कारण आशंका जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को वापस भी कर सकती है। वहीं, ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों का कहना है कि केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक ठोस और अंतिम कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट समेत कई संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को पहली सफलता बताया है  लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार ने विवाद बढ़ने के बाद संतोष वर्मा को कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में उपसचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। बावजूद इसके, सामाजिक संगठनों का आक्रोश कम होता नजर नहीं आ रहा। 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की घोषणा पहले ही की जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी और प्रशासनिक हलचल और बढ़ने की संभावना है।

  • सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित

    सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित


    नई दिल्ली । भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कदम पार्टी की अनुशासन समिति के निर्देश पर लिया गया क्योंकि मुकीम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती असंतोष की स्थितियों के बीच आया है।

    सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई थी नाराजगी

    मुकीम जो पहले बाराबती-कटक सीट से विधायक रह चुके हैं ने हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने पार्टी की स्थिति और नेतृत्व पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस की कमजोर स्थिति का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से पार्टी के भविष्य के लिए मार्गदर्शन की अपील की थी। मुकीम ने लिखा था कि कांग्रेस वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोनिया गांधी का मार्गदर्शन पार्टी के लिए बेहद जरूरी है ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके।

    खड़गे की उम्र और नेतृत्व पर सवाल

    पत्र का सबसे विवादास्पद हिस्सा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर था। मुकीम ने खड़गे की उम्र 83 वर्ष का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता के रूप में इतनी उम्र में सक्रियता दौड़-भाग और जनसंपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने खड़गे को सलाहकार की भूमिका में रखने की सलाह दी और युवा नेतृत्व को आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुकीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को केंद्रीय भूमिका में और राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रभावी बनाए जाने की बात भी की।

    युवा नेताओं को आगे लाने की वकालत

    मुकीम ने अपने पत्र में पार्टी में युवा नेताओं को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने सचिन पायलट डीके शिवकुमार ए रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम में शामिल करने की बात की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलिंद देवड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों को समझना चाहिए और इसे पार्टी की उपेक्षा और अनदेखी का परिणाम बताया।

    राहुल गांधी से मुलाकात न होने की शिकायत

    पत्र में मुकीम ने यह भी शिकायत की थी कि वे पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें कभी समय नहीं मिल सका। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बताया।

    कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई

    कांग्रेस ने मुकीम के इस पत्र को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनुशासन बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
    कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह कदम संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है।

    संघर्षपूर्ण समय में पार्टी का कदम

    यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। मुकीम का पत्र इस असंतोष की गहराई को उजागर करता है और उनकी निष्कासन की कार्रवाई से यह भी साफ हो जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में गहरी अंतर्विरोधों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

  • MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट

    MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट


    मध्यप्रदेश में ठंड ने अब अपना असली असर दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार की सुबह प्रदेश के कई हिस्सों में इस सीजन का पहला घना कोहरा देखने को मिला। हालात सबसे ज्यादा खराब रीवा में रहे, जहां विजिबिलिटी घटकर महज 50 मीटर रह गई। मुरैना और रायसेन में भी यही स्थिति रही जिससे सुबह के समय सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और ड्राइवरों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा। राजधानी भोपाल में भी कोहरे का असर साफ दिखा। यहां दृश्यता 500 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। कई इलाकों में सुबह 11 बजे तक भी 2 से ढाई किलोमीटर दूर तकसाफ नजर नहीं आ रहा था। मौसम विभाग के अनुसार ठंड के इस सीजन में यह पहली सुबह रही, जब प्रदेश के इतने बड़े हिस्से में एक साथ घना कोहरा छाया।

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा के अलावा छतरपुर के खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर रही। भोपाल, ग्वालियर, दतिया और सीधी में दृश्यता 500 से 1000 मीटर के बीच दर्ज की गई। वहीं इंदौर, नर्मदापुरम, सागर, रतलाम, दमोह और मंडला में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। अशोकनगर, पचमढ़ी, टीकमगढ़, विदिशा, शाजापुर, सीहोर और देवास में भी सुबह कोहरे की चादर छाई रही। कोहरे के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

    प्रदेश में सबसे ठंडे स्थान पचमढ़ी और राजगढ़ रहे, जहां पारा 5.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड और नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री और नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों में कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले तीन दिनों तक शीतलहर चलने की संभावना कम है। लेकिन 17 दिसंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय होने जा रहा है जिसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिलेगा। इसके चलते ठंड फिर से तेज हो सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है। यह जमीन से करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही है। यही तेज ऊंची हवाएं उत्तर भारत और मध्य भारत में ठंड बढ़ाने का काम कर रही हैं। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ जब जेट स्ट्रीम सक्रिय होती है, तो ठंड का असर दोगुना हो जाता है।इस बार नवंबर में ही सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

    मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं। आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल, उज्जैन, भोपाल, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर और जनवरी में 20 से 22 दिन तक कोल्ड वेव चल सकती है। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में ठंड का असली दौर अब शुरू हो चुका है। कोहरा, गिरता तापमान और आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के संकेत बताते हैं कि अगले कुछ हफ्तों में लोगों को ठिठुरन के लिए तैयार रहना होगा।