Author: bharati

  • बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं

    बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं


    भोपाल।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura, Indore) में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गांवों (Villages) में पीने के पानी (Drinking water) पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ (‘Jal Jeevan Mission’) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।


    रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

    4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे।

    यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


    इन जिलों की हालत सबसे खराब

    अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।


    नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं….

    इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि ‘जहरीली सप्लाई’ का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है।

    यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है” और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।

  • स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    Smart wellness
    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते काम का दबावस्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या लोगों को तनावथकान और बीमारियों की ओर धकेल रही है। ऐसे में विशेषज्ञ स्मार्ट वेलनेस रूटीन अपनाने की सलाह दे रहे हैंजिसमें सुबह की हल्की एक्सरसाइजमेडिटेशन और हेल्दी नाश्ता को प्राथमिकता दी जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसारसुबह की शुरुआत अगर हल्की एक्सरसाइज से की जाए तो इसका असर पूरे दिन दिखाई देता है। स्ट्रेचिंगवॉकयोग या हल्की फ्री-हैंड एक्सरसाइज मांसपेशियों को सक्रिय बनाती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करती है। इससे न केवल शरीर में फुर्ती आती हैबल्कि दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और थकान की समस्या कम होती है। नियमित रूप से की गई हल्की एक्सरसाइज दिल की सेहतवजन नियंत्रण और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है।शारीरिक लाभों के साथ-साथ हल्की एक्सरसाइज मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और मूड को बेहतर बनाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह की ताजी हवा में की गई वॉक या योग दिमाग को शांत करता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखने में सहायक होता है।

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन का दूसरा अहम हिस्सा मेडिटेशन है। रोजाना 10 से 15 मिनट का ध्यान मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। मेडिटेशन से न केवल मानसिक तनाव कम होता हैबल्कि एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और भावनात्मक संतुलन बना रहता है।हेल्दी नाश्ता भी स्मार्ट वेलनेस रूटीन की बुनियाद है। सुबह का नाश्ता शरीर को दिनभर की ऊर्जा देता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसारनाश्ते में प्रोटीनफाइबर और विटामिन का संतुलन होना चाहिए। अंडादलियाओट्सफलनट्स या स्मूदी जैसे विकल्प शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखते हैं और बार-बार भूख लगने से बचाते हैं।

    इसके साथ ही आज के डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित इस्तेमाल भी जरूरी है। मोबाइललैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और नींद को प्रभावित कर सकता है। स्मार्ट वेलनेस रूटीन में डिजिटल डिटॉक्स और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट को शामिल करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि वेलनेस के लिए बड़े और कठिन बदलाव जरूरी नहीं हैं। रोज सुबह 10 मिनट वॉक10 मिनट मेडिटेशन और एक संतुलित नाश्ता जैसे छोटे कदम भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह रूटीन न केवल शरीर को स्वस्थ रखता हैबल्कि मन को भी शांत और संतुलित बनाता है।

  • माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर

    माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर


    नई दिल्ली । तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीमित जगह के कारण बड़े घरों का सपना अब हर किसी के लिए संभव नहीं रह गया है। महानगरों में बढ़ती जनसंख्या और महंगे रियल एस्टेट के बीच छोटे घरों यानी माइक्रो स्पेस लिविंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रो स्पेस लिविंग केवल मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट और स्टाइलिश जीवनशैली का नया विकल्प बन चुका है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का मूल विचार है-कम जगह में अधिक सुविधा और आराम। छोटे घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि हर कोना उपयोगी बने। मल्टीफंक्शनल फर्नीचर इस ट्रेंड की सबसे बड़ी खासियत है। सोफा-बेड फोल्डिंग डाइनिंग टेबल वॉल-माउंटेड डेस्क और स्टोरेज-बेड जैसी चीजें न केवल जगह बचाती हैं बल्कि घर को व्यवस्थित और आधुनिक लुक भी देती हैं।मिनिमल डेकोर माइक्रो स्पेस लिविंग का अहम हिस्सा बन गया है। भारी फर्नीचर और ज्यादा सजावट की जगह हल्के रंग सिंपल डिजाइन और कम लेकिन उपयोगी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। हल्के रंगों की दीवारें और बड़ी खिड़कियां घर को खुला और बड़ा महसूस कराती हैं। सही लाइटिंग खासकर नेचुरल और स्मार्ट लाइट्स छोटे घरों को आरामदायक और आकर्षक बनाती हैं।

    स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी ने माइक्रो स्पेस लिविंग को और आसान बना दिया है। स्मार्ट लाइटिंग ऑटोमेटेड क्लाइमेट कंट्रोल वॉइस-एक्टिवेटेड डिवाइस और स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम छोटे घरों में ज्यादा सुविधा प्रदान करते हैं। ये तकनीकें न केवल समय और ऊर्जा की बचत करती हैं बल्कि घर को भविष्य-अनुकूल भी बनाती हैं।छोटे घरों में काम और आराम के बीच संतुलन बनाना भी एक चुनौती होती है जिसे स्मार्ट डिजाइन के जरिए हल किया जा रहा है। मल्टीफंक्शनल वर्क डेस्क फोल्डिंग कुर्सियां और छुपा हुआ स्टोरेज कम जगह में होम ऑफिस और रिलैक्सेशन दोनों के लिए जगह तैयार करते हैं। इससे वर्क-फ्रॉम-होम करने वालों को भी सुविधा मिलती है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली है। छोटे घरों में बिजली पानी और संसाधनों की खपत कम होती है जिससे यह ट्रेंड सस्टेनेबल लिविंग को बढ़ावा देता है। कम जगह कम सामान और स्मार्ट उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है।युवाओं सिंगल प्रोफेशनल्स और छोटे परिवारों के बीच माइक्रो स्पेस लिविंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्ट डिजाइन तकनीक और सस्टेनेबिलिटी के मेल से छोटे घरों का यह ट्रेंड और मजबूत होगा। माइक्रो स्पेस लिविंग यह साबित कर रहा है कि घर का आकार नहीं बल्कि उसकी समझदारी से की गई प्लानिंग जीवन को बेहतर बनाती है।

  • प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग

    प्रेमानंद महाराज की जीवन शिक्षाएं: सत्य, करुणा और ईश्वर-भक्ति से परम आनंद का मार्ग


    नई दिल्ली ।
    प्रेमानंद महाराज का जीवन और उनके विचार आज के दौर में मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की मिसाल बन गए हैं। उनके जीवन के सूत्र सरल हैं जटिल नहीं। वे मानते हैं कि जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुखों में नहीं बल्कि मन की स्थिरता सही आचरण और ईश्वर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव में छिपा है।

    महाराज का मूल संदेश सत्य और ईमानदारी पर आधारित है। उनका मानना है कि व्यक्ति तभी संतुष्ट और आत्मविश्वासी बन सकता है जब वह अपने शब्द और कर्म में सच्चा रहे। उनके अनुसार ईमानदारी केवल नैतिक मूल्य नहीं बल्कि आत्मिक शांति और जीवन की स्थिरता का आधार है। जब हम सच के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन की उलझनें सरल हो जाती हैं और मन हल्का महसूस करता है।

    करुणा और प्रेम को महाराज जीवन का असली आभूषण मानते हैं। दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और मदद की भावना केवल समाज के लिए नहीं बल्कि अपने मन को भी प्रसन्नता और समृद्धि देती है। छोटे-छोटे अच्छे कर्म चाहे किसी की मदद करना हो या समय पर किसी का साथ देना जीवन को अर्थपूर्ण और सुखद बनाते हैं।मन पर नियंत्रण यानी क्रोध चिंता और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना महाराज के जीवन मंत्रों का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि धैर्य संयम और आत्म-अनुशासन से ही व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकता है। जब हम अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीख जाते हैं तब जीवन सहज और संतुलित हो जाता है।

    समय और कर्म के महत्व को भी वे हमेशा रेखांकित करते हैं। समय का सम्मान करना और सही दिशा में लगातार प्रयास करना ही जीवन को सार्थक बनाता है। आलस्य और टालमटोल से बचकर किया गया नियमित और शांत कर्म न केवल परिणाम देता है बल्कि आत्मसंतोष भी प्रदान करता है।भौतिक सुख की तुलना में आंतरिक खुशी को वे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। जो व्यक्ति वर्तमान में अपनी उपलब्धियों और जीवन में प्राप्त चीजों के लिए कृतज्ञ रहता है वही वास्तव में आनंदित और संतुष्ट होता है। बाहरी उपलब्धियां क्षणिक हो सकती हैं लेकिन आंतरिक संतोष स्थायी और स्थिर रहता है।

    नाम-जप को वे जीवन का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हैं। ईश्वर के नाम का स्मरण मन को स्थिर करता है और कठिन समय में मार्गदर्शन देता है। निस्वार्थ सेवा को महाराज भक्ति का सर्वोत्तम रूप मानते हैं जिसमें बिना किसी अपेक्षा के किए गए कर्म मन को हल्का और जीवन को सार्थक बनाते हैं।प्रेमानंद महाराज के जीवन के मंत्र यह संदेश देते हैं कि सादगी संयम और कोमल भाव के साथ जिया गया जीवन ही वास्तविक शांति संतुलन और आनंद प्रदान करता है। उनके विचार हमें दिखाते हैं कि बाहरी सुखों के पीछे भागने की बजाय सरल जीवन सही कर्म और ईश्वर-भक्ति ही परम आनंद का मार्ग हैं।

  • हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब

    हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब


    नई दिल्ली।  हिजाब विवाद में फंसी आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन की देरी के बाद आखिरकार अपनी नौकरी जॉइन कर ली है। नुसरत ने अधिकारियों के दबाव के बावजूद सिविल सर्जन के पास जाने की औपचारिकता को छोड़कर सीधे विभाग में जॉइनिंग की।

    नुसरत की जॉइनिंग की आखिरी तारीख कई बार बढ़ाई गई। मूल रूप से 20 दिसंबर को जॉइनिंग की लास्ट डेट थी, जिसे 31 दिसंबर और फिर 7 जनवरी तक बढ़ाया गया।

    7 जनवरी को नुसरत ने अंतिम मौका लेकर अपना CHC जॉइनिंग पूरा किया।

    15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटते समय नुसरत का हिजाब हटाया था, जिसके बाद से उनकी लोकेशन और जॉइनिंग को लेकर अफसरों में भी सवाल उठ रहे थे।

    आयुष डॉक्टर की जॉइनिंग प्रोसेस:
    आयुष विभाग नियुक्ति पत्र जारी करता है। इसे लेकर कैंडिडेट को सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है, जहां डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और बेसिक जानकारी ली जाती है। इसके बाद सिविल सर्जन जॉइनिंग लेटर जारी करते हैं, जिसे कैंडिडेट संबंधित CHC में दिखाकर जॉइन करता है।

    झारखंड ऑफर बनाम बिहार सैलरी:
    हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नुसरत को 3 लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनचाही पोस्टिंग का ऑफर दिया। वहीं बिहार में उनकी सैलरी 32 हजार रुपए प्रति माह तय है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।

    हिजाब विवाद की झलक:
    15 दिसंबर को CM नीतीश कुमार ने नुसरत को नियुक्ति पत्र थमाते हुए हिजाब पर सवाल उठाया और खुद अपने हाथ से नकाब हटाया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी भी नुसरत को रोकने की कोशिश में लगे। नुसरत थोड़ी देर असहज हुईं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नियुक्ति पत्र थमाया और जाने का इशारा किया।

    इस प्रकार, नुसरत परवीन ने विवादों के बीच अपनी नौकरी जॉइन कर भारत में महिला डॉक्टरों के लिए पेशेवर अधिकार और सम्मान की मिसाल कायम की है।

  • पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार

    पेनकिलर को कहें बाय-बाय जानें क्यों फटता है आपका सिर? ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । आजकल की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है जिसे हम अक्सर पेनकिलर लेकर दबा देते हैं। हालांकि बार-बार होने वाला सिरदर्द हमारी रोजमर्रा की आदतों और लाइफस्टाइल से जुड़ा होता है। यदि हम इसके मूल कारणों को समझें तो दवाओं के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख कारणों के बारे में जिनकी वजह से सिरदर्द हो सकता है।

    ब्रेकफास्ट स्किप करना

    रातभर के अंतराल के बाद शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अगर सुबह का नाश्ता नहीं करते तो ब्लड शुगर का लेवल गिर सकता है जिससे दिमाग की नसों में खिंचाव आ सकता है और परिणामस्वरूप तेज सिरदर्द हो सकता है। खासकर जब शरीर को जरूरी कैलोरी और पोषण नहीं मिल पाता तो इससे सिर में दर्द शुरू हो जाता है। इसलिए सुबह का नाश्ता कभी न छोड़ें!

    लंबे समय तक भूखे रहना

    वजन घटाने के प्रयास या व्रत के कारण अगर आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं तो शरीर में एसिडिटी और गैस बनने लगती है। यह गैस सिर के ऊपर की ओर चढ़कर भारीपन और दर्द का कारण बनती है। हेल्थ स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक भूखा रहने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके हल्का खाना खाना बेहतर होता है जिससे पेट में गैस बनने की संभावना कम हो जाती है और सिरदर्द से भी बचा जा सकता है।

    मानसिक तनाव

    आजकल का जीवन इतना तेज़ और व्यस्त है कि मानसिक तनाव एक सामान्य समस्या बन चुकी है। काम का बढ़ा हुआ बोझ और भविष्य की चिंता मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करती है जिसे ‘टेंशन हेडेक’ कहा जाता है। तनाव की वजह से दिमाग की नसें थक जाती हैं जो धीरे-धीरे गंभीर सिरदर्द का रूप ले सकती हैं। इसे कम करने के लिए नियमित रूप से योग मेडिटेशन या हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन

    शरीर में पानी की कमी होने पर ऊतक सिकुड़ने लगते हैं और नसों पर दबाव बढ़ने लगता है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं तो सिरदर्द की समस्या और भी बढ़ सकती है। खासकर जब आप झुकते हैं या चलने की कोशिश करते हैं तो यह दबाव सिर में दर्द का कारण बन सकता है। डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और सिरदर्द से बचा जा सके।

    आंखों की थकावट

    लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने या मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करने से आंखों में थकावट हो सकती है जो सिर में दर्द का कारण बनती है। अगर आप देर तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करते हैं तो आंखों के सामने पिघलते हुए धब्बे या धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो सिरदर्द में बदल जाती हैं। इसके लिए स्क्रीन ब्रेक्स लेना और आंखों को आराम देना महत्वपूर्ण है।

    अगर सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे पेनकिलर से दबाने की बजाय अपनी आदतों और लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं। नियमित रूप से पानी पीना मानसिक तनाव को कम करना सही समय पर भोजन करना और आंखों को आराम देना आपके सिरदर्द को कम कर सकता है। अगर फिर भी समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

  • भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव

    भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव


    नई दिल्ली । भारत में सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और यह बढ़ोतरी लगातार तीसरे दिन देखने को मिल रही है। जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार की अनिश्चितता के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में उछाल आया है। 7 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी से निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

    सोने की कीमत में बढ़ोतरी

    आज दिल्ली में 24-कैरेट सोना प्रति दस ग्राम ₹10 महंगा हो गया है और 22-कैरेट सोने की कीमत भी ₹10 बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 24-कैरेट सोने की कीमत में ₹3010 और 22-कैरेट सोने की कीमत में ₹2760 की बढ़ोतरी हुई है। सोने की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं लेकिन इसके साथ ही सोने की मांग भी बढ़ रही है खासकर अस्थिर बाजारों में।

    चांदी की कीमत में उछाल

    चांदी की कीमतों में भी लगातार तीसरे दिन बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी की कीमत में ₹12100 का इज़ाफा हुआ है। पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹12100 की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे पहले चांदी की कीमत स्थिर थी लेकिन अब 7 जनवरी को दिल्ली में चांदी ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम बिक रही है। इस दौरान चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम ₹100 का इज़ाफा हुआ है।

    शहरों के हिसाब से सोने और चांदी के भाव

    भारत के प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के दामों में भिन्नताएँ हैं। यहां 18-कैरेट 22-कैरेट और 24-कैरेट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमतें दी गई हैं:
    दिल्ली 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    मुंबई: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    कोलकाता: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    चेन्नई: 24-कैरेट सोना,₹57,550 ,22-कैरेट सोना,₹52,900

    चांदी की कीमतों में क्षेत्रीय अंतर

    चांदी के दाम में भी क्षेत्रीय अंतर दिखाई दे रहे हैं दिल्ली मुंबई और कोलकाता में चांदी का मूल्य ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम है। चेन्नई में चांदी का मूल्य ₹2,71,100 प्रति किलोग्राम है जो चार प्रमुख महानगरों में सबसे महंगा है।

    कुल मिलाकर स्थिति

    सोने और चांदी के दामों में इस समय तेजी देखने को मिल रही है जो आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है खासकर वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक तनावों के कारण। इन बढ़ी हुई कीमतों का प्रभाव निवेशकों खरीदारों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा। सुझाव,अगर आप सोने या चांदी में निवेश करना चाहते हैं तो इन कीमतों के बढ़ने के साथ सतर्क रहना और संभावित गिरावट का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।

  • अंडर-19 क्रिकेट में नई सनसनी: वैभव सूर्यवंशी का शतक, कप्तानी पारी ने भारत को साउथ अफ्रीका पर दी जीत की बढ़त

    अंडर-19 क्रिकेट में नई सनसनी: वैभव सूर्यवंशी का शतक, कप्तानी पारी ने भारत को साउथ अफ्रीका पर दी जीत की बढ़त


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के कप्तान वैभव सूर्यवंशी ने तीसरे वनडे मुकाबले में ऐसी पारी खेली कि वह चर्चा का केंद्र बन गए। बेनोनी के विलोमूर पार्क मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में वैभव ने अपने संयम और आक्रामकता के अद्भुत संतुलन से मैच की दिशा प्रारंभिक ओवरों में ही तय कर दी।

    भारतीय पारी की शुरुआत से ही वैभव ने शानदार खेल दिखाया। शुरुआती ओवरों में गेंद को भली-भांति समझने के बाद उन्होंने बड़े शॉट्स खेलना शुरू किया और मैदान के चारों ओर रन बटोरे। महज 63 गेंदों में शतक पूरा कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह केवल प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं बल्कि मैच की परिस्थिति को समझने वाले लीडर भी हैं। उनकी 127 रन की पारी में लंबी हिटिंग सटीक टाइमिंग और आक्रामकता का शानदार मेल देखने को मिला।

    वैभव को इस पारी में ओपनिंग साथी आरोन जॉर्ज का भी साथ मिला। दोनों ने पहले विकेट के लिए 200 से अधिक रन की साझेदारी की, जिससे भारतीय टीम ने मजबूत स्कोर की नींव रखी। इस साझेदारी ने न केवल रन गति को तेज रखा, बल्कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस तरह की पारियों ने टीम के आत्मविश्वास को भी ऊँचाई पर पहुंचाया।तीसरे वनडे में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। अंडर-19 वनडे में उनके कुल रन अब भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। कम मैचों में लगातार रन बनाते हुए उनका औसत और खेल का संतुलन चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

    इस सीरीज में भारत पहले ही दोनों मुकाबले जीतकर बढ़त बना चुका था। तीसरे वनडे में भी टीम ने अपनी संतुलित बल्लेबाजी और रणनीति से यह स्पष्ट कर दिया कि टीम में आत्मविश्वास और खेल भावना की कमी नहीं है। प्लेइंग इलेवन में किए गए बदलावों के बावजूद भारतीय बल्लेबाजी क्रम मजबूत और संतुलित नजर आया।वैभव सूर्यवंशी का यह प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय अंडर-19 टीम में नेतृत्व और व्यक्तिगत प्रतिभा का सही संतुलन है। उनकी कप्तानी में टीम का खेल और रणनीति दोनों बेहतर नजर आए। मौजूदा सीरीज में उनका लगातार योगदान भारत की सफलता में सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। युवा बल्लेबाज के रूप में उनकी यह पारी न केवल फैंस के लिए उत्साहजनक है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की संभावनाओं को भी उजागर करती है।

  • Diabetes में भूलकर भी न खाएं ये 7 चीजें वरना सेहत को होगा भारी नुकसान

    Diabetes में भूलकर भी न खाएं ये 7 चीजें वरना सेहत को होगा भारी नुकसान


    नई दिल्ली । डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है। अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी हार्ट अटैक किडनी फेल्योर आंखों की रोशनी जाने और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती है। डायबिटीज एक गंभीर और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है जिसमें ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो जाता है।
    अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी हार्ट अटैक किडनी फेल्योर आंखों की रोशनी जाने और स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का कारण बन सकती हैखासतौर पर कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिन्हें डायबिटीज के मरीजों को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।
    चीनी और मीठे पदार्थ
    डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा चीनी है। मिठाई केक पेस्ट्री चॉकलेट रसगुल्ला जलेबी और मीठे पेय पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा देते हैं। इससे शुगर लेवल अचानक हाई हो सकता है जो जान के लिए खतरा बन सकता है।
    मैदा और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट
    मैदा से बनी चीजें जैसे सफेद ब्रेड पिज्जा बर्गर नूडल्स और बिस्किट शरीर में जाकर तेजी से शुगर में बदल जाती हैं। इससे इंसुलिन का असर कम हो जाता है और ब्लड शुगर कंट्रोल से बाहर हो सकता है।

    तले-भुने और फास्ट फूड

    समोसा कचौरी फ्रेंच फ्राइज चिप्स और अन्य फास्ट फूड में ट्रांस फैट और कैलोरी अधिक होती है। ये न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं बल्कि हार्ट डिजीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी बढ़ाते हैं।

     मीठे फल और फ्रूट जूस

    आम चीकू केला अंगूर जैसे फलों में नेचुरल शुगर अधिक होती है। वहीं पैकेट वाले फ्रूट जूस में अतिरिक्त शुगर मिलाई जाती है। इनका अधिक सेवन ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है।

    शराब का सेवन

    शराब पीने से ब्लड शुगर कभी बहुत ज्यादा तो कभी बहुत कम हो सकता है। इससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है जो अचानक बेहोशी या जान जाने तक का कारण बन सकता है।

     ज्यादा नमक वाली चीजें

    अचार पापड़ नमकीन और प्रोसेस्ड फूड में नमक की मात्रा अधिक होती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है जो डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।

    मीठे डेयरी प्रोडक्ट्स

    फ्लेवर्ड योगर्ट मीठी लस्सी क्रीम और आइसक्रीम में शुगर और फैट दोनों ज्यादा होते हैं। ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।

    क्या करें डायबिटीज मरीज

    डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए हरी सब्जियां साबुत अनाज दालें सलाद कम शुगर वाले फल नियमित व्यायाम और समय पर दवा बेहद जरूरी है। साथ ही नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।डायबिटीज में छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। अगर ऊपर बताई गई चीजों से दूरी बनाई जाए और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो इस बीमारी को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है।