किस्मत का साथ जरूरी है
टेस्ट क्रिकेट में सफलता
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भविष्य की उम्मीदें

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साल 1983 में रिलीज हुईमासूम आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और भावनात्मक फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में शबाना आज़मी और नसीरुद्दीन शाह ने पति-पत्नी की भूमिका निभाई थी जबकि जुगल हंसराज ने उनके पति के नाजायज़ बेटे का किरदार निभाया था। यही रिश्ता कहानी की भावनात्मक धुरी भी था।हाल ही में जुगल हंसराज ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान शबाना आज़मी उनसे जानबूझकर दूरी बनाकर रखती थीं। उस वक्त जुगल महज 9 साल के थे और उन्हें यह बात समझ में नहीं आती थी कि शबाना जी उनसे बात क्यों नहीं करतीं जबकि सेट पर मौजूद अन्य बच्चों से वह बेहद प्यार और अपनापन दिखाती थीं।
जुगल ने बताया कि फिल्म में उर्मिला मातोंडकर और आराधना शबाना आज़मी की बेटियों के रोल में थीं। शबाना उनके साथ सेट पर खूब बातें करती थीं हंसती-मुस्कुराती थीं और मां जैसा स्नेह भी देती थीं। लेकिन जुगल के मामले में उनका व्यवहार बिल्कुल अलग था। वह उनसे औपचारिक दूरी बनाए रखती थीं और ज्यादा बातचीत से बचती थीं।जुगल के मुताबिक उस उम्र में उन्हें यह अजीब लगता था लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि यह सब शबाना आज़मी के अभिनय के प्रोसेस का हिस्सा था। दरअसल फिल्म में शबाना का किरदार जुगल के किरदार को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता। दोनों के बीच एक अनकहा तनाव अजनबीपन और असहजता होती है जिसे पर्दे पर दिखाना बेहद जरूरी था।
शबाना आज़मी नहीं चाहती थीं कि असल जिंदगी में जुगल के साथ अपनापन बढ़े क्योंकि ऐसा होने से कैमरे के सामने वह भावनात्मक दूरी और असहजता स्वाभाविक रूप से नहीं आ पाती। यही वजह थी कि उन्होंने जानबूझकर एक बच्चे से भी भावनात्मक फासला बनाए रखा ताकि दर्शकों को कहानी असली लगे।जुगल हंसराज ने यह भी कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि शबाना आज़मी ने कितनी खूबसूरती और ईमानदारी से अपने किरदार के साथ न्याय किया। उस दौर में इस तरह की तैयारी और किरदार में डूब जाना बहुत कम देखने को मिलता था।गौरतलब है किमासूम का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था और फिल्म में सईद जाफरी तनुजा और सुप्रिया पाठक जैसे दमदार कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली थी और बाद में इसे तेलुगु और तुर्की भाषाओं में भी रीमेक किया गया।आज भीमासूम को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और शबाना आज़मी का यह समर्पण नए कलाकारों के लिए एक मिसाल माना जाता है।

सेंधा नमक के फायदेपाचन में सहायता
सर्दी जुकाम और खांसी
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प्रमुख हादसों में शामिल घटनाएं -प्रयागराज महाकुंभ जनवरी
दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ फरवरी
गोवा नाइट क्लब अग्निकांड दिसंबर
हवाई दुर्घटना एयर इंडिया बोइंग 787 जून
जश्न के दौरान भगदड़ बेंगलुरु जून
तेलंगाना फैक्ट्री विस्फोट जून
देशभर में शोक की लहर
निरंतर बढ़ते हादसों पर सरकार का ध्यान

सीसीटीवी से पहचान
पुलिस ने घटना के बाद सीसीटीवी कैमरों को खंगाला और चालक का चेहरा पहचान लिया। अब पुलिस चालक की तलाश कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद है।यह घटना ग्वालियर में ट्रैफिक नियमों और पुलिस की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से न केवल पुलिसकर्मियों की जान को खतरा है बल्कि इससे सड़क सुरक्षा की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

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दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

एक महीने में चार लोग घायल
चाइना डोर के कारण हुए हादसों की यह कोई पहली घटना नहीं है। एक महीने के भीतर चार लोग इस खतरनाक डोर की चपेट में आ चुके हैं। 20 दिसंबर को एग्रीकल्चर थर्ड सेमेस्टर के छात्र योगेश आंजना उम्र 20 वर्ष अपने गांव पिपलियाधूमा झारड़ा से उज्जैन परीक्षा देने आया था। परीक्षा के बाद वह बाइक से घर लौट रहा था जब उसे भी चाइना डोर से गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा पहले भी इस प्रकार की घटनाएं उज्जैन में हो चुकी हैं जिनमें लोग चाइना डोर से घायल हो चुके हैं।
गंभीर चिंता का विषय
चाइना डोर की इन घटनाओं ने शहरवासियों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। हालाँकि प्रशासन ने इसके उपयोग पर रोक लगाने के लिए कई प्रयास किए हैं लेकिन इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। यह जानलेवा डोर न केवल सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई है बल्कि इसका इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसके खतरों से अनजान रहते हैं।
शहरवासियों और प्रशासन से अपील की जा रही है कि चाइना डोर के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि और किसी की जान को खतरा न हो।

शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई
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रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध

आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट के माध्यम से इन चार आसान उपायों को साझा किया है जिनमें से पहला उपाय है आई पामिंग। इस विधि में दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म किया जाता है और फिर इन्हें आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों की थकान कम होती है और आंखें रिलैक्स महसूस करती हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आई पामिंग इस दबाव को कम करने में मदद करता है।
दूसरा उपाय है त्राटक। यह एक अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए कुछ देर तक देखा जाता है। यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर करने आंखों की सफाई और आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। त्राटक से आंखों की आंतरिक स्पष्टता बढ़ती है और यह आँखों की थकान को कम करता है।
तीसरा उपाय है गीले कॉटन पैड का इस्तेमाल। गीले कॉटन पैड से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है और सिर दर्द से भी राहत मिलती है। इसके लिए रूई को ठंडे पानी या गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। यह उपाय आंखों के नीचे सूजन को कम करने और आंखों को ताजगी देने के लिए बहुत प्रभावी है। कुछ लोग इसकी जगह खीरे के टुकड़े भी इस्तेमाल करते हैं।
चौथा उपाय है भाप लेना। सर्दियों में कई बार आंखों में गंदगी जमा हो जाती है जिससे पलके चिपकने लगती हैं। हल्की भाप से आंखों को शुद्ध किया जा सकता है जिससे पलके चिपकने से बचती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि अधिक भाप लेने से आंखों की ड्राइनेस बढ़ सकती है इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लें।