Author: bharati

  • जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार

    जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार


    नई दिल्ली ।जनवरी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष महीना है क्योंकि इस महीने माघ माह की शुरुआत होती है जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना विभिन्न व्रतों और त्योहारों से भरा होता है जिनका सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा महत्व है। खासकर मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक इन दिनों का पालन लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी

    मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी बनाते हैं और दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस दिन सूर्य की उपासना और उत्तरायण के शुभारंभ के रूप में होता है।

    लोहड़ी 13 जनवरी

    लोहड़ी पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सर्दी के मौसम के अंत और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग आग जलाकर उस पर तिल गुड़ और मूंगफली डालते हैं और इसके साथ ही गाते-बजाते हैं।

    सकट चौथ 19 जनवरी

    सकट चौथ को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घर-घर खास पकवान बनते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।

    मौनी अमावस्या 20 जनवरी

    मौनी अमावस्या को विशेष रूप से उपवास और मौन रहने का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और तर्पण करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हुए अपनी बुराईयों और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

    बसंत पंचमी 25 जनवरी

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और यह विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और नए ज्ञान की प्राप्ति के लिए लोग विशेष आयोजन करते हैं। पीले रंग की विशेषता के साथ यह दिन उल्लास और उत्सव का प्रतीक बन जाता है। जनवरी का महीना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक अवसरों के साथ आता है। इस दौरान श्रद्धालु इन व्रतों और त्योहारों का पालन करके जीवन में सुख समृद्धि और पुण्य की कामना करते हैं।

  • शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!

    शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!


    नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.
    नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोले
    उन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.

    कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

    बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.

    हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था
    बता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी.

  • भारतीय खिलाड़ियों का बर्ताव गलत, आईसीसी के सामने उठाएंगे मुद्दा, मोहसिन नकवी की गीदड़भभकी

    भारतीय खिलाड़ियों का बर्ताव गलत, आईसीसी के सामने उठाएंगे मुद्दा, मोहसिन नकवी की गीदड़भभकी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने कहा है कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी खिलाड़ियों के प्रति गलत व्यवहार रहा था और वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सामने उठाएंगे.

    मोहसिन नकवी ने कहा कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को उकसाते रहे. पाकिस्तान इस घटना की जानकारी आधिकारिक तौर पर आईसीसी को देगा. राजनीति और खेल को हमेशा एक दूसरे से अलग रखना चाहिए.अंडर-19 एशिया कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मेंटर रहे सरफराज अहमद ने कहा खेल के दौरान भारत का बर्ताव सही नहीं था और क्रिकेट की भावना के खिलाफ था. इसके बावजूद, हमने अपनी जीत का जश्न खेल की भावना के साथ मनाया. क्रिकेट हमेशा खेल भावना के साथ खेला जाना चाहिए.

    भारतीय खिलाड़ियों के खेल भावना से जुड़ा मुद्दा सबसे पहले सरफराज अहमद ने ही उठाया था.पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदुर के बाद एशिया कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच पहली बार मैदान पर दूरी दिखी थी. भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाया था. इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने भी मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था. एशिया कप जीत के बाद भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार कर दिया था.

    अंडर-19 एशिया कप में भी भारतीय टीम का स्टैंड यही रहा. भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया. अंडर-19 एशिया 2025 दुबई में हाल ही में संपन्न हुई है. लीग स्टेज में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया था, लेकिन 21 दिसंबर को हुए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा. पाकिस्तान ने भारत को 348 रन का लक्ष्य दिया था. भारतीय टीम 156 पर सिमट गई और 191 रन से खिताबी मुकाबला हार गई.

  • आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल

    आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल


    नई दिल्ली । भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा।

    इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका

    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेशक सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार महानिदेशक सीसीआरएस और डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास

    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
    भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा। इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।

    प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।

    बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व

    बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।

    वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य-आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।

    भारत की प्रमुख भूमिका
    भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेश सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार सीसीआरएसऔर डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।

    WHO के वैश्विक प्रयास
    इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।

    पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल

    यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

  • BCCI ने बढ़ाई क्रिकेटरों की सैलरी घरेलू महिला खिलाड़ी और मैच अधिकारियों को मिलेगा बड़ा फायदा

    BCCI ने बढ़ाई क्रिकेटरों की सैलरी घरेलू महिला खिलाड़ी और मैच अधिकारियों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट बोर्ड BCCI ने घरेलू महिला क्रिकेटरों और मैच अधिकारियों के लिए वेतन में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है जो भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक वनडे विश्व कप 2025 की जीत के बाद किया गया है। इस फैसले से महिला क्रिकेटरों के लिए बेहतर वित्तीय सुरक्षा और सम्मान का रास्ता खुलेगा साथ ही मैच अधिकारियों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। BCCI ने घरेलू महिला क्रिकेटरों के लिए वेतन संरचना को सुधारने और समान वेतन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब घरेलू महिला क्रिकेटरों को पहले की तुलना में दोगुना या उससे अधिक मैच फीस मिलेगा जो कि पहले 20000 रुपये रिजर्व खिलाड़ियों के लिए 10000 रुपये प्रति मैच दिन था।

    महिला क्रिकेटरों की बढ़ी हुई सैलरी

    संशोधित वेतन संरचना के तहत सीनियर महिला क्रिकेटरों को घरेलू टूर्नामेंटों में एक मैच दिन के लिए 50000 रुपये से 60000 रुपये तक मिलेगा। रिजर्व खिलाड़ियों को 25000 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। इस प्रकार यह वेतन वृद्धि एक बड़ी राहत और प्रेरणा का स्रोत बनेगी। राष्ट्रीय टी20 टूर्नामेंटों में एकादश में खेलने वाली खिलाड़ियों को प्रति मैच 25000 रुपये मिलेंगे जबकि रिजर्व खिलाड़ियों के लिए यह राशि 12500 रुपये होगी।बीसीसीआई के अधिकारियों का कहना है कि अगर एक महिला क्रिकेटर पूरे सत्र के दौरान सभी प्रारूपों में खेलती है तो उसे 12 लाख से 14 लाख रुपये तक मिल सकते हैं जो पहले के मुकाबले काफी अधिक है।

    जूनियर महिला क्रिकेटरों के लिए वेतन वृद्धि

    BCCI ने जूनियर महिला क्रिकेटरों के वेतन में भी वृद्धि की है। अब अंडर-23 और अंडर-19 श्रेणियों के खिलाड़ियों को प्रतिदिन 25000 रुपये का भुगतान किया जाएगा जबकि रिजर्व खिलाड़ियों को 12500 रुपये मिलेंगे। यह कदम जूनियर स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर वित्तीय अवसर देने और उनके खेल को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

    मैच अधिकारियों के लिए वेतन वृद्धि

    बीसीसीआई ने अंपायर और मैच रेफरी सहित मैच अधिकारियों के वेतन में भी इजाफा किया है। घरेलू टूर्नामेंटों के लीग मैचों के लिए अंपायरों और मैच रेफरी के लिए प्रस्तावित आय प्रतिदिन 40000 रुपये होगी। यह वेतन वृद्धि मैच अधिकारियों के लिए एक बड़ा फायदा साबित होगी और उनके योगदान को बेहतर तरीके से मान्यता दी जाएगी।

    BCCI के कदम की सराहना

    इस फैसले के बाद बीसीसीआई की प्रशंसा की जा रही है क्योंकि इसने महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने और उनके वेतन में सुधार करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। महिला क्रिकेटरों को समान वेतन और बेहतरवित्तीय अवसर देने से न केवल उनके प्रदर्शन में सुधार होगा बल्कि आने वाले समय में और अधिकप्रतिभाओं को आकर्षित भी करेगा। BCCI के इस कदम से यह साफ होता है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड महिला क्रिकेट को लेकर गंभीर है और वे इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खेल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

    बीसीसीआई का यह कदम महिला क्रिकेट और खेल अधिकारियों के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। इस बढ़ी हुई वेतन संरचना से महिला क्रिकेटरों को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा साथ ही वे अपनी क्रिकेट करियर को और अधिक गंभीरता से आगे बढ़ा सकेंगी। यह कदम न केवल भारतीय महिला क्रिकेट को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बनाएगा।

  • दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान

    दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान


    नई दिल्ली । दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर रविवार शाम एक चलती कार में अचानक आग लग गई जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने के कारण कार का सेंट्रल लॉक जाम हो गया और चालक अंदर फंस गया। हालांकि दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपनी बहादुरी से ड्राइवर की जान बचा ली। घटना रविवार शाम की है जब बुराड़ी से मजनू का टीला की तरफ जा रही कार में वजीराबाद फ्लाईओवर पर आग लग गई। आग लगते ही कार का सेंट्रल लॉक काम नहीं करने लगा और चालक अंदर फंस गया। इस स्थिति में ट्रैफिक पुलिस की बहादुरी की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने बचाई जान
    टीम इंस्पेक्टर टीआई संतोष गुप्ता और उनके साथी पुलिसकर्मी वजीराबाद फ्लाईओवर के पास ड्यूटी पर तैनात थे जब उन्होंने देखा कि एक कार धू-धू कर जल रही है और उसके अंदर चालक फंसा हुआ है। तुरंत ही उन्होंने अपनी कार्रवाई शुरू की। संतोष गुप्ता ने बताया “कार में आग लगने के बाद ड्राइवर सेंट्रल लॉक की वजह से अंदर फंसा हुआ था। हम पहले तो दरवाजे को खोलने की कोशिश करते रहे लेकिन सफल नहीं हो सके। तब हमने शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला।

    पानी से आग पर काबू पाया गया
    इसी दौरान पास ही खड़ा एमसीडी का पानी का टैंकर भी मौके पर पहुंच गया। ट्रैफिक पुलिस ने इसका इस्तेमाल कर कार की आग पर काबू पाया। पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से आग को बढ़ने से रोका गया और चालक को किसी भी बड़ी चोट से बचा लिया गया।इस पूरी घटना के दौरान वजीराबाद फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कार के जलने और पुलिस की कार्रवाई के कारण सड़क पर जाम लग गया था। हालांकि पुलिस ने तुरंत रास्ता खाली करने और ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए काम किया।

    दमकल को देरी से सूचना
    घटना की जानकारी दमकल विभाग को दी गई थी लेकिन जाम के कारण उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में कुछ समय लग गया। इस बीच पुलिस ने अपनी तत्परता से चालक की जान बचाई और आग पर काबू पा लिया।

    टीआई संतोष गुप्ता ने दी प्रतिक्रिया
    टीआई संतोष गुप्ता ने कहा हमारा सबसे पहला उद्देश्य था कि चालक को सुरक्षित निकाला जाए। इसके बाद हमने पास ही खड़े पानी के टैंकर से आग को बुझाया। टीम की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।इस घटना से यह साबित होता है कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस और अन्य एजेंसियों की तत्परता और बहादुरी से जान बचाने में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को कई लोग सराह रहे हैं क्योंकि एक सामान्य घटना में यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए जाते तो परिणाम गंभीर हो सकते थे।

  • एशेज सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम ने की आलोचना बोले मेरे हाथ में कुछ नहीं

    एशेज सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम ने की आलोचना बोले मेरे हाथ में कुछ नहीं


    नई दिल्ली । एडिलेड ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड की टीम को एक और एशेज सीरीज हार का सामना करना पड़ा है। महज 11 दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराया और पहले दो टेस्ट तो सिर्फ 6 दिन में ही समाप्त हो गए थे। हालांकि तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने थोड़ी सी लड़ाई जरूर दिखाई लेकिन सीरीज का निर्णय एडिलेड में ही हो गया। इस हार के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम की आलोचना हो रही है।

    तीसरे टेस्ट मैच के बाद जब मैकुलम से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के हेड कोच पद से इस्तीफा देंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि यह फैसला उनके हाथ में नहीं है। मैकुलम ने कहा “मुझे नहीं पता। असल में यह फैसला मेरे हाथ में नहीं है है ना, मैं सिर्फ अपनी तरफ से काम करता रहूंगा जो भी मैंने सीखा है उसे लागू करने की कोशिश करूंगा और टीम के साथ सामंजस्य बैठाऊंगा।

    मैकुलम ने कहा कि इस काम में मजा आता है और यह एक बेहतरीन अनुभव है।आप दुनिया भर में टीम के साथ यात्रा करते हैं और रोमांचक क्रिकेट खेलते हैं। हम कुछ विशेष हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने कहा। इंग्लैंड का खेल इस बार काफी अलग था। उनकी टीम बैजबॉल की पारंपरिक शैली से हटकर खेल रही थी जिसमें स्कोरिंग रेट पर कम ध्यान दिया गया। मैकुलम ने इस बारे में कहा “हमने कभी नहीं कहा कि हमें 5.5-6 ओवर की रफ्तार से रन बनाने होंगे। हमारा उद्देश्य खेल की स्थिति को समझना और रिस्क को पहचानना था।

    मैकुलम ने यह भी कहा कि उनका फोकस हमेशा टीम के खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालने पर रहा है। उन्होंने कहा “मेरे लिए यह खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ निकलवाने की कोशिश करना है। बाकी के फैसले तो दूसरों पर निर्भर करते हैं। जब मैंने काम शुरू किया था तब से लेकर अब तक टीम में बहुत तरक्की हुई है।इंग्लैंड का बैजबॉल तरीका जो पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है उसे लेकर मैकुलम ने कहा “यह तरीका किसी खास स्कोरिंग रेट के बारे में नहीं था। हमने जो रणनीति बनाई वह खिलाड़ियों के कौशल और टैलेंट पर आधारित थी। जब तक मैं इस काम में हूं यह तरीका नहीं बदलेगा।”

    कुल मिलाकर इंग्लैंड की टीम के लिए यह एशेज सीरीज एक और निराशाजनक अनुभव रही है। हालांकि मैकुलम का कहना है कि यह एक प्रक्रिया है और टीम को सुधार की दिशा में काम करना जारी रखना होगा।
    इस हार के बावजूद मैकुलम और इंग्लैंड की टीम आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कुछ महीनों में इंग्लैंड किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या वे अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हैं या नहीं।

  • आधी रात 3.30 बजे दो अनजान शख्स…', उर्फी के साथ हुई बदतमीजी, घर में घुसे लोग, कैसे बचाई जान?

    आधी रात 3.30 बजे दो अनजान शख्स…', उर्फी के साथ हुई बदतमीजी, घर में घुसे लोग, कैसे बचाई जान?


    नई दिल्ली
    ।फैशन क्वीन उर्फी जावेद इस समय खौफ में हैं. आधी रात को उनके घर में दो लोगों ने जबरन घुसने की कोशिश की. इसके बाद उन्हें सोमवार (22 दिसंबर) की सुबह आनन-फानन में अपनी बहनों संग पुलिस स्टेशन भागना पड़ा. उर्फी ने सोशल मीडिया के जरिए जब फैंस को ये जानकारी दी तो हर कोई उनके लिए चिंतित नजर आया. अब उन्होंने बताया है कि आखिर उनके साथ क्या हुआ?
    खतरे में उर्फी जावेद?

    उर्फी जावेद ने ईटाइम्स संग बातचीत में बताया कि 22 दिसंबर रात करीब 3.30 बजे 1 अनजान शख्स लगातार करीब 10 मिनट तक उनके घर के दरवाजे की बेल बजाता रहा. बाद में उन्हें पता चला कि एक नहीं बल्कि 2 लोग उनके घर के बाहर खड़े हैं और वो उनके घर के बाहर से जा नहीं रहे थे. उर्फी को फिर पुलिस की मदद लेनी पड़ी. पुलिस के आने पर ही वो दो अनजान शख्स उनके घर से बाहर भागे. उर्फी ने बताया कि जब दो लोग लगातार 10 मिनट तक उनके घर की बेल बजाते रहे तब वो बाहर चेक करने गईं. बाहर खड़े शख्स ने उर्फी से दरवाजा खोलने और उन्हें घर के अंदर आने को कहा, जबकि दूसरा शख्स कॉर्नर पर खड़ा रहा. उर्फी बोलीं- मैंने उस शख्स से वहां से जाने को कहा, लेकिन उसने जाने से इनकार कर दिया. मैंने जब उसे वॉर्निंग दी कि मैं पुलिस को बुला लूंगी तभी वो वहां से गए.

    उर्फी संग हुई बदतमीजी

    उर्फी से आगे पूछा गया कि पुलिस के आने पर क्या हुआ था? एक्ट्रेस बोलीं- हमने पुलिस को कॉल की तो वो दोनों हमारे और पुलिस के साथ बदतमीजी करने लगे. वो दोनों काफी रूड थे और बार-बार बोल रहे थे- निकल निकल. उन्होंने वहां से जाने के लिए इनकार कर दिया था. उर्फी ने कहा कि ये उनके लिए काफी डरावना एक्सपीरियंस था. एक्ट्रेस बोलीं- जब कोई रात के 3 बजे घर के बाहर आकर खड़ा हो जाए और एक लड़की से दरवाजा खोलने को कहे और फिर वहां से जाने से भी इनकार कर दे तो ये काफी डरावना होता है. खासकर जब लड़कियां अकेली रहती हों तो ऐसी सिचुएशन काफी भयानक होती है.उर्फी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है. वो खुद को काफी असुरक्षित महसूस कर रही हैं. एक्ट्रेस बोलीं- मैं जानना चाहती हूं कि उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जाएगा? बता दें कि फैंस भी उर्फी की सेफ्टी को लेकर चिंता में हैं.

  • सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक

    सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक


    सूरत । गुजरात जिले की फैमिली कोर्ट ने 7 साल की एक बच्ची को जैन साध्वी बनने की दीक्षा लेने से रोक दिया है। यह फैसला बच्ची के पिता की याचिका पर लिया गया जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी अलग रह रही पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को दीक्षा दिलाना चाहती थी। अदालत ने मां से हलफनामा देने को कहा है कि वह बच्ची को साध्वी बनने की दीक्षा में शामिल न होने दे।

    सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

    सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।

    पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।

    पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।

    अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।

    अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।

  • यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं

    यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार में एनडीए की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी उत्तर प्रदेश में एंट्री करने की तैयारी कर रही हैं. जिससे आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि वो यूपी में डीपीए यानी दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक के साथ मिलकर बदलाव लाएंगे. रामदास आठवले ने दावा किया कि यूपी के 75 जिलों में से 62 जिलों में रिपब्लिकन पार्टी की कार्यकारिणी बन चुकी है. पार्टी अगले साल 5 अप्रैल 2026 को लखनऊ में एक बड़ी रैली करेगी, जिसमें 1 लाख से लोगों के शामिल होने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि अब बसपा की जगह रिपब्लिकन पार्टी ने ली है. दलितों और गरीब को न्याय दिलाने वाली पार्टी रिपब्लिकन पार्टी रहेगी.

    यूपी में सपा-बसपा की मुश्किल बढ़ाएंगे आठवले
    आठवले ने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद दलितों, शोषितों, वंचितों, गरीबों और महिलाओं के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए पिछड़ा वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक का नारा सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह गया है.

    पीडीए के जवाब में यूपी डीपीए की लड़ाई!

    आरपीआई आठवले अब डीपीए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक की अवधारणा को जमीन पर मजबूती से लागू करेगी और असली बदलाव लाएगी. आठवले ने सोमवार को इस संबंध में उत्तर प्रदेश कार्यकारी समिति की समीक्षा बैठक की. इस बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, दलित, शोषित और वंचित समुदायों की समस्याओं एवं पार्टी के संगठन के विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई. आठवले ने कहा कि आरपीआई इन मुद्दों पर सिर्फ नारे नहीं लगाती बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए का नारा केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया. पार्टी अब डीपीए की अवधारणा को लेकर जमीन पर मजबूती से उतरेगी और वास्तविक बदलाव लाएगी.