नई दिल्ली / गर्मियों की छुट्टी में अगर आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको दार्जिलिंग जरूर जाना चाहिए .ये शहर औऱ यहां पर मौजूद एक से बढ़कर एक खूबसूरत स्थल आपके ट्रिप को यादगार बना देंगे
Author: bharati
-

दार्जिलिंग में घूमने लायक है ये 6 खूबसूरत जगह…यादगार ट्रिप के लिए जरूर जाएं..
नई दिल्ली / गर्मियों की छुट्टी में अगर आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको दार्जिलिंग जरूर जाना चाहिए .ये शहर औऱ यहां पर मौजूद एक से बढ़कर एक खूबसूरत स्थल आपके ट्रिप को यादगार बना देंगेदार्जिलिंग में घूमने के लिए शानदार जगहेंआप दार्जिलिंग जाएं तो नाइटेंगल पार्क जरूर जाएं. पर्यटक यहां से कंचनजंगा पर्वतमाला के भव्य दृश्य को देख सकते हैं. यहां पर आकर आप प्रकृति का आनंद आराम से ले सकते हैं.घूम रॉक दार्जिलिंग का सबसे आकर्षक व्यू प्वाइंट है. इस जगह से बालसान घाटी नजर आती है. अगर आप दार्जिलिंग की खूबसूरती को करीब से देखना चाहते हैं तो घूम रॉक जरूर जाइए .बतासिया लूप नहीं घूमा तो फिर दार्जिलिंग में मानो कुछ भी नहीं घुमा. यह एक रेलवे ट्रैक में बड़ी लूप है, जिसमें एक रनिंग टॉय ट्रेन 360 डिग्री पर घूमती है.दार्जिलिंग की खूबसूरती देखने का इससे बेहतर तरीका और हो ही नहीं सकता. इस जगह को घूमने का सबसे अच्छा मौका अप्रैल से लेकर जून के महीना के बीच होता है.क्योंकि देश में जब खूब गर्मी पड़ती है तब दार्जिलिंग का तापमान काफी कम होता है.दार्जिलिंग के सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक है विक्टोरिया वॉटरफॉल. यहां पर्यटकों को चारों ओर प्रकृति के खूबसूरत नजारे ही नजर आएंगे.दार्जिलिंग में टाइगर हिल घूमने की सबसे खूबसूरत जगह है. 8442 फीट की ऊंचाई पर मौजूद ये जगह आपका मन मोह लेगी. बर्फ से ढकी हुई पहाड़ियां पर्यटकों को खूब लुभाती है.वहीं आप यहां से कंचनजंगा का खूबसूरत नजारा देख पाएंगे. यहां आने वाले पर्यटक खासकर यहां का सूर्योदय देखने के लिए सुबह 4 बजे से ही इकट्ठा होते हैं.सेंथल झील दार्जिलिंग की सबसे खूबसूरत स्थलों में से एक है. इस जगह पर लोग पिकनिक मनाने आते हैं. यहां पर शांति और सुकून इस कदर है कि एक बार आने के बाद यहां से आपका जाने का मन ही नहीं करेगा.वहीं रॉक गार्डन भी बहुत ही सुंदर जगह है. ये गार्डन पहाड़ों और चट्टानों को काटकर बनाया गया है, तो अगर आप कभी दार्जिलिंग जाते हैं तो इस जगह पर जरूर जाएं. -

गुना में भीषण सड़क हादसा जन्मदिन समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकराई दो की मौत आठ घायल
गुना । गुना जिले में मंगलवार रात करीब 2 बजे धरनावदा के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। एक फोर व्हीलर तेज गति से अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे एक पेड़ से टकरा गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि कार में सवार 12 लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई जबकि आठ अन्य घायल हो गए।मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति
मृतकों की पहचान लाल सिंह 37 निवासी उकाबद खुर्द और माया कंजर पत्नी रामदास निवासी बिलौरी चिंता कटारा के रूप में हुई है। वहीं घायल होने वालों में मोहन पुत्र बाबूलाल नरेंद्र लोधा चंचल बाई अरविंद लोधा फूल सिंह रायना बाई नगमा कंजर और रूप सिंह शामिल हैं।हादसा इतना गंभीर था कि वाहन की हालत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी स्थिति का इलाज चल रहा है।
हादसे के कारण और प्रशासन की कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि कार की गति बहुत तेज थी और संभवत: चालक का संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस और प्रशासन ने घटना स्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी घायलों का इलाज जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज गति और लापरवाही की वजह से इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो रही है और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन को और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की अहमियत को उजागर करता है और यह बताता है कि सड़क पर चलने के दौरान हमें पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। -

सतना में मंदाकिनी नदी पर अवैध उत्खनन जल संसाधन विभाग की आड़ में हो रहा है काले कारोबार
सतना । सतना जिले में मंदाकिनी नदी जो कि धार्मिक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आस्था की प्रतीक मानी जाती है एक बार फिर अवैध उत्खनन के चलते विवादों में आ गई है। मोहकमगढ़ पुल के नीचे भारी मशीनों से नदी का सीना छलनी किया जा रहा था जो एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। खास बात यह है कि यह उत्खनन जल संसाधन विभाग की परियोजना के नाम पर किया जा रहा था।सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग द्वारा मंदाकिनी नदी में घाट निर्माण के लिए सीमित खनन की अनुमति ली गई थी। लेकिन पीपीएस कंपनी के ठेकेदार ने इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए नदी किनारे से पत्थर और मुरुम का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया। आरोप हैं कि यह सब कार्य जल संसाधन विभाग के एसडीओ पुष्पेंद्र खरे के मौखिक निर्देश पर हो रहा था।
प्रशासन की कार्रवाई और संदिग्ध पहलू
स्थानीय लोगों द्वारा सूचना मिलने पर चित्रकूट तहसीलदार मौके पर पहुंचे और खनन में लगे पोकलैंड मशीन को जप्त कर लिया। हालांकि ट्रक मौके से गायब हो गए जिससे यह संदेह पैदा हो गया कि मामले में पहले से सूचना थी और यह पूरी घटना किसी संरक्षण के तहत हो रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात तब सामने आई जब प्रशासन के अधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही संबंधित जिम्मेदारों के मोबाइल फोन बंद हो गए। यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि क्या यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित और विभागीय मिलीभगत का हिस्सा है?
इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता और जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता के आरोप उभर रहे हैं। यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आस्था और पर्यावरण से जुड़े इस अहम स्थान की अवैध उत्खनन के चलते हानि हो रही है? क्या सरकारी योजनाओं की आड़ में इस तरह के काले कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है?
-

भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की
भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।
-

नए साल से पहले पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ी सौगात BSF कांस्टेबल भर्ती में 50% कोटा MHA का नोटिफिकेशन जारी
नई दिल्ली । नए साल से पहले पूर्व अग्निवीरों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल में कांस्टेबल भर्ती के लिए पूर्व अग्निवीरों का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है जो पूर्व अग्निवीरों के लिए खुशखबरी लेकर आया है।क्या है यह नया बदलाव
केंद्र सरकार ने BSF जनरल ड्यूटी कैडर नॉन-गैजेटेड भर्ती नियम 2015 में संशोधन किया है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स एक्ट 1968 की धारा 141 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए MHA ने पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती में 50% कोटा लागू किया है। यह संशोधन “बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स जनरल ड्यूटी कैडर नॉन-गैजेटेड भर्ती संशोधन नियम 2025 के तहत किया गया है और यह नियम 18 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है।
पूर्व अग्निवीरों के लिए क्या लाभ होगा
अब तक पूर्व अग्निवीरों को BSF कांस्टेबल भर्ती में केवल 10% आरक्षण मिलता था लेकिन इस नए निर्णय के बाद उन्हें भर्ती प्रक्रिया में 50% तक का आरक्षण मिलेगा। इसका मतलब है कि पूर्व अग्निवीरों को BSF में कांस्टेबल पदों पर भर्ती होने के अवसरों में आधी जगह दी जाएगी जिससे उन्हें ज्यादा अवसर मिलेंगे और उनकी भर्ती प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा।
केंद्र सरकार का यह कदम क्यों
यह कदम पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार की एक बड़ी पहल मानी जा रही है क्योंकि इस फैसले से न केवल उनकी मेहनत और योगदान को सम्मान मिलेगा बल्कि वे सेना के बाद भी अन्य सरकारी नौकरियों में अपने अनुभव और कौशल का लाभ उठा सकेंगे। पूर्व अग्निवीरों को मिली यह राहत उनके भविष्य को बेहतर बनाने में सहायक होगी और उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें एक बेहतर करियर की दिशा मिलेगी।
पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार का यह कदम एक सकारात्मक बदलाव है जो उनके भविष्य के लिए अहम साबित हो सकता है। BSF के कांस्टेबल पदों पर 50% कोटा के साथ नए साल से पहले ही इस फैसले के लागू होने से उन्हें अपने करियर में नई दिशा मिल सकती है।
-

माइग्रेन से राहत पाने के लिए दवा के बिना करें लाइफस्टाइल में ये बदलाव
नई दिल्ली । माइग्रेन सिरदर्द का एक गंभीर रूप है जो सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकता है। यह न केवल व्यक्ति की कार्य क्षमता को प्रभावित करता है बल्कि जीवनशैली को भी चुनौतीपूर्ण बना सकता है। माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में तेज दर्द मतली उल्टी तेज रोशनी और शोर से परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं। यह आम सिरदर्द से कहीं अधिक होता है और कई बार माइग्रेन के लक्षण सामान्य सिरदर्द से बढ़कर हो सकते हैं। हालांकि माइग्रेन का इलाज दवाओं से किया जाता है लेकिन अगर कुछ लाइफस्टाइल बदलाव किए जाएं तो बिना दवा के भी राहत पाई जा सकती है।माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाली आदतें अनहेल्दी डाइट
कुछ खाने-पीने की चीजें माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं जैसे चॉकलेट कैफीन शराब और कुछ प्रोसेस्ड फूड्स। अगर आप यह महसूस करते हैं कि इन चीजों के सेवन से आपका माइग्रेन बढ़ता है तो इन्हें अपनी डाइट से हटा दें।नींद की कमी
कम नींद या अत्यधिक नींद भी माइग्रेन का कारण बन सकती है। यदि आप नियमित रूप से नींद की कमी महसूस करते हैं तो दिन में कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है।तनाव
मानसिक तनाव माइग्रेन के दर्द को और बढ़ा सकता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। काम के दबाव और तनाव से बचने के लिए ध्यान योग या गहरी सांस लेने की तकनीकें अपनाई जा सकती हैं।माइग्रेन से राहत के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव नियमित व्यायाम
हल्का-फुल्का व्यायाम जैसे योग स्विमिंग या चलना माइग्रेन से राहत देने में मदद कर सकता है। व्यायाम से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होते हैं जो दर्द को कम करने में मदद करते हैं।हाइड्रेशन
शरीर में पानी की कमी से भी माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। दिनभर में पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो सिरदर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।सही खानपान
सही और पोषण से भरपूर आहार लेना माइग्रेन की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। ताजे फल हरी सब्जियां साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। कैफीन और शराब से बचें।नींद का पैटर्न ठीक करें
एक नियमित सोने का समय बनाएं और रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। सही समय पर सोना और जागना आपके शरीर को आराम देने के लिए महत्वपूर्ण है।तनाव कम करें
तरीका है तनाव कम करना। ध्यान प्राणायाम गहरी सांस लेने की तकनीकें और हल्की-फुल्की चहलकदमी करने से मानसिक तनाव कम हो सकता है। इसके अलावा आपको जो पसंदीदा एक्टिविटी करें जैसे किताबें पढ़ना या संगीत सुनना वह भी तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।कर्मस्थल पर आराम
लंबे समय तक कंप्यूटर या स्मार्टफोन का उपयोग माइग्रेन का कारण बन सकता है। इसलिए यदि आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करते हैं तो आंखों को आराम देने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लें। माइग्रेन एक गंभीर समस्या हो सकती है लेकिन अगर आप अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव करते हैं तो आप बिना दवा के भी इससे राहत पा सकते हैं। सही खानपान पर्याप्त नींद नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवन के साथ माइग्रेन के दर्द को कम किया जा सकता है। इन सरल उपायों को अपनाकर आप बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं और माइग्रेन को नियंत्रित कर सकते हैं। -

कोहरे में क्यों कैंसल हो जाती है फ्लाइट, जब आसमान में नहीं होता कोई ट्रैफिक..
नई दिल्ली /राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में कई राज्यों में कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा छाया हुआ है. हालात ऐसे हैं कि कई जगह कम विजिबिलिटी के कारण फ्लाइट और ट्रेनों के कैंसल होने की खबरें सामने आ रही है. इस कंडीशन को देखते हुए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, एयर इंडिया, इंडिगो और दिल्ली एयरपोर्ट ने शुक्रवार के लिए यात्रियों के लिए विशेष ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की थी. इनमें फ्लाइट के लेट होने या कैंसल होने की आशंका जताई गई थी.ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि जब आसमान में ट्रैफिक नहीं होता तो कोहरे की वजह से फ्लाइट्स क्यों रोकी जाती है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि कोहरे की वजह से फ्लाइट्स क्यों कैंसल की जाती है, जबकि आसमान में कोई ट्रैफिक नहीं होता है.कोहरा कैसे प्रभावित करता है फ्लाइट ऑपरेशन?
दरअसल, फ्लाइट्स भले ही आसमान में उड़ती है, लेकिन उनका संचालन पूरी तरह विजिबिलिटी और एयरपोर्ट के ग्राउंड सिस्टम पर निर्भर करता है. पायलट नक्शा, इंस्ट्रूमेंट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देशों के आधार पर विमान को कंट्रोल करते हैं. वहीं जब घना कोहरा छा जाता है तो एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी तेजी से घट जाती है. वहीं कई मामलों में विजिबिलिटी 600 मीटर से भी कम रह जाती है, जिससे सुरक्षित उड़ान संचालन मुश्किल हो जाता है.
कोहरे में फ्लाइट की सबसे बड़ी चुनौती
कई लोग मानते हैं कि कोहरे के दौरान फ्लाइट के लिए सबसे मुश्किल काम टेक ऑफ या लैंडिंग होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कोहरे में सबसे बड़ी चुनौती रनवे पर विमान को टैक्सी करना होता है. टैक्सीइंग के दौरान पायलट को रनवे के संकेत, लाइट्स और दूसरी फ्लाइट की कंडीशन साफ दिखनी जरूरी होती है और जब विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है, तो ग्राउंड मूवमेंट खतरनाक हो सकता हो जाता है. इस वजह से फ्लाइट्स को रोका या डिले किया जाता है. दरअसल जब फ्लाइट्स रनवे पर पहुंचती है तो पायलट को कुछ तय बिंदुओं को देख पाना जरूरी होता है. हर एयरपोर्ट और फ्लाइट के लिए न्यूनतम विजिबिलिटी के अलग-अलग मानक भी तय होते हैं, यह मानक पूरे नहीं होते तो फ्लाइट को टेकऑफ की अनुमति नहीं मिलती.लैंडिंग के समय में भी बढ़ जाता है खतरा
लैंडिंग को पायलट के लिए सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण स्टेप माना जाता है. लैंडिंग के समय फ्लाइट की गति काफी ज्यादा होती है और बहुत सटीक नियंत्रण की जरूरत होती है. नियमों के अनुसार मैन्युअल लैंडिंग के लिए कम से कम 550 मीटर की विजिबिलिटी जरूरी होती है, जब विजिबिलिटी इससे भी कम हो जाती है तो फ्लाइट को होल्ड पर रखा जाता है या फिर डाइवर्ट या कैंसिल कर दिया जाता है. कोहरे में फ्लाइट कैंसिल करने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जाता है. कम विजिबिलिटी की कंडीशन में एक छोटी सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती है.
-

छिंदवाड़ा में कानून की धज्जियाँ जन्मदिन पर तलवार लहराते युवक का वायरल वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ बनाई रील
छिंदवाड़ा । मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा शहर के कुण्डीपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक का जन्मदिन पार्टी के दौरान तलवार लहराते हुए वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वीडियो में युवक तेज संगीत पर अपने दोस्तों के साथ नाचते हुए खुलेआम तलवार लहरा रहा है जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर ‘सुमित मालवी’ नाम की एक आईडी से पोस्ट किया गया था और इसके बाद से यह शहर भर में चर्चा का विषय बन गया। विशेष रूप से रिहायशी इलाके में इस तरह के हथियारों का प्रदर्शन स्थानीय लोगों में डर और चिंता का कारण बन रहा है।दूसरी ओर हैरान करने वाली बात यह है कि युवक का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वह छिंदवाड़ा जिला न्यायालय परिसर के भीतर एक पुलिसकर्मी के साथ रील बनाता हुआ नजर आ रहा है। इस वीडियो में बैकग्राउंड में गाने के बोल हैं कचहरी अपना ठिकाना है” और कोतवाली से रिश्ता पुराना है जो उसकी बेखौफ मानसिकता को उजागर करता है।इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना कानून और व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। पुलिस ने इंस्टाग्राम आईडी के आधार पर युवक की पहचान शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन और प्रतिबंधित क्षेत्रों में इस तरह की रील बनाने के लिए युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने यह भी दर्शाया कि युवा वर्ग में कानून के प्रति कितनी लापरवाही और बेखौफ मानसिकता फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं और पुलिस प्रशासन को इसे सख्ती से नियंत्रित करना चाहिए।
-

कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा
नई दिल्ली । केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है जिसमें पुरुष श्रद्धालुओं को पूजा से पहले महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु देवी की आराधना से पहले साड़ी पहनते हैं चूड़ियां पहनते हैं बिंदी लगाते हैं और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह मंदिर देश-विदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
परंपरा का महत्वकोट्टनकुलंगरा मंदिर की इस परंपरा को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे समर्पण के साथ निभाते हैं। पुरुष श्रद्धालु जब पूजा के लिए तैयार होते हैं तो वे स्वयं को पूरी तरह से सजाते हैं जैसे महिलाएं पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस पूजा में श्रद्धालु देवी भाग्यवती से अच्छी नौकरी स्वास्थ्य विवाह और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा पूरी तरह से समाज में समर्पण और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए मानी जाती है। इस परंपरा के कारण मंदिर में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है जो इस अनुभव को एक अलग ही रूप में अपनाते हैं।
मंदिर के आकर्षण
कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर के अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराओं ने इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। यहां पर लोग न केवल पूजा-अर्चना करने आते हैं बल्कि इस अनोखी परंपरा का पालन करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। मंदिर का वातावरण बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण होता है जहां पर हर किसी को अपने व्यक्तिगत आस्थाओं का पालन करने का पूरा अवसर मिलता है।
सोलह श्रृंगार
सोलह श्रृंगार का पालन करने से जुड़े कई महत्व हैं जो महिलाओं के सौंदर्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस परंपरा के तहत पुरुष श्रद्धालु स्वयं को साड़ी पहनकर सजाते हैं जो उन्हें पारंपरिक रूप से महिलाओं के साथ जोड़ता है और ईश्वर के साथ एक अद्वितीय संबंध स्थापित करता है। यह एक अद्भुत दृष्टिकोण है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है साथ ही आस्था के द्वारा सभी को एकजुट करने का कार्य करता है।
कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर की यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं। पुरुषों द्वारा सोलह श्रृंगार करने की यह परंपरा एक नई सोच और धार्मिक समर्पण की दिशा में एक कदम है। इस मंदिर की विशेषता और परंपरा को देखकर यह कहा जा सकता है कि यहाँ आस्था और आचरण का अद्वितीय संगम है जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
-

महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और आस्था का एक और अनुपम उदाहरण देखने को मिला। जयपुर निवासी भक्त विपिन बंसल ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान महाकाल को 111 किलोग्राम वजन के पीतल के नंदी दान स्वरूप अर्पित किए। इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा दानदाता का विधिवत सम्मान किया गया।मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर निवासी विपिन बंसल ने पुजारी राजेश शर्मा की प्रेरणा से भगवान महाकाल के चरणों में यह विशेष दान अर्पित किया। पीतल से निर्मित इन नंदी प्रतिमाओं का कुल वजन 111 किलोग्राम है, जो अपनी कलात्मकता और भव्यता के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।दान स्वीकार किए जाने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दानदाता विपिन बंसल को भगवान महाकाल का प्रसाद और दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि दान में प्राप्त इन सुंदर पीतल के नंदी को मंदिर परिसर में उचित और सुरक्षित स्थान पर विधिवत स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।
मंदिर समिति के अधिकारियों ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार दान करते हैं। कोई सोने-चांदी के आभूषण अर्पित करता है, तो कोई नकद राशि या धार्मिक सामग्री भेंट करता है। भक्तों का मानना है कि भगवान महाकाल अपने भक्तों की सच्ची मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं, और उसी कृतज्ञता स्वरूप वे इस तरह के दान अर्पित करते हैं।जयपुर के भक्त द्वारा किया गया यह दान भी उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पीतल के नंदी के दान को सराहा और इसे भगवान महाकाल के प्रति भक्त की गहरी आस्था बताया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां भक्तों द्वारा किए जाने वाले दान और सेवा कार्य भी इसकी महिमा को और बढ़ाते हैं। इस प्रकार के दान मंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा को सशक्त बनाते हैं।