Author: bharati

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री विजय के संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया। विजय ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना भी की।

    मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए संदेश में विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मजबूत भारत के निर्माण के लिए समर्पण के साथ नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। विजय का यह संदेश 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर सामने आया।

    मुख्यमंत्री विजय के संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हुई है। इसकी वजह यह है कि विजय ने प्रधानमंत्री को केवल औपचारिक जन्मदिन की शुभकामना देने के बजाय उनके नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया। संदेश में प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और सकारात्मक भाषा दिखाई दी।

    सी. जोसेफ विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होने के साथ तमिलगा वेत्री कषगम के प्रमुख भी हैं। उनके राजनीतिक रुख को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर विशेष ध्यान गया है। हालांकि, जन्मदिन की शुभकामना में व्यक्त किए गए विचारों से किसी व्यापक राजनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना अलग विषय है। फिलहाल संदेश में प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों की सराहना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    विजय और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले विजय ने भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक विरोधी बताया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री बनने के बाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और समन्वय भी देखने को मिला है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया गया यह संदेश राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। इनमें विपक्षी दलों के नेता भी शामिल रहे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के अलावा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनका 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। जन्मदिन के अवसर पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान राजनीतिक नेताओं ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

    मुख्यमंत्री विजय का संदेश ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। उनके संदेश में प्रधानमंत्री के साथ राजनीतिक मुद्दों पर मतभेदों का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बजाय संदेश पूरी तरह जन्मदिन की शुभकामनाओं और मजबूत भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना पर केंद्रित रहा।

  • रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    रूस से तेल खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान, भारत ने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी

    नई दिल्ली । अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन पर योगी ने दी बधाई, बोले- 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख-समृद्धि का नवप्रभात ला रहे

    पीएम मोदी के जन्मदिन पर योगी ने दी बधाई, बोले- 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख-समृद्धि का नवप्रभात ला रहे

    लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ एवं यशस्वी जीवन की कामना की। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक जीवन की शुभकामनाएं दीं।

    योगी ने मोदी को बताया ‘नए भारत का शिल्पी’
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के स्वप्नद्रष्टा और ‘नए भारत के शिल्पी’ के रूप में संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख, समृद्धि, सुरक्षा और स्वाभिमान का नवप्रभात लाने के लिए प्रधानमंत्री निरंतर राष्ट्रसेवा में जुटे हैं। योगी ने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ एवं यशस्वी जीवन की कामना की।

    ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प का किया उल्लेख
    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प, कर्मनिष्ठा और लोक-कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री का समर्पित जीवन ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रेरणा देता है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। योगी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से प्रधानमंत्री को उत्तम स्वास्थ्य तथा सुदीर्घ और यशस्वी जीवन प्रदान करने की प्रार्थना भी की।

    अखिलेश यादव ने भी दी जन्मदिन की शुभकामना
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भाजपा की ओर से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है। यह अभियान प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के अवसर से भी जोड़ा गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक जीवन की कामना की।

    अयोध्या में सफाई अभियान से हुई सेवा संकल्प की शुरुआत
    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर अयोध्या के लता मंगेशकर चौक पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। इसका आयोजन अयोध्या नगर निगम की ओर से किया गया।

    अयोध्या की जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन उनके 25 वर्षों के सेवा-कार्य से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मेयर के नेतृत्व में सफाई अभियान को सम्मान के रूप में चुना गया है। उन्होंने भगवान राम से प्रधानमंत्री के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की, ताकि वे देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करते रहें।

    अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत लता मंगेशकर चौक पर विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से शहर की सफाई के साथ प्रधानमंत्री के लिए प्रार्थना भी की जा रही है, ताकि वे ‘मां भारती’ की सेवा के लिए समर्पित रहते हुए देश को ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे ले जाएं।

    लखनऊ में 17 अक्टूबर तक चलेंगे विभिन्न कार्यक्रम
    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लखनऊ नगर निगम 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा एवं सेवा संकल्प अभियान-2026’ चलाएगा। इसके तहत शहर में सफाई, श्रमदान और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बुधवार को महापौर सुषमा खर्कवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभियान की रूपरेखा तय की गई।

    अभियान की शुरुआत नगर निगम क्षेत्र की नालियों और सीवर लाइनों की सफाई से होगी। प्रत्येक वार्ड में एक नोडल अधिकारी निगरानी करेगा। सभी आठ जोनों में विशेष स्वच्छता और श्रमदान कार्यक्रम भी होंगे। ‘संकल्प फॉर वे ऑफ लाइफ’ के तहत आरडब्ल्यूए और एनजीओ सदस्यों की ओर से दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।

    25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 200 घंटे का वृहद सफाई अभियान चलेगा। जलकल विभाग पानी की टंकियों की सफाई करेगा। 27 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एकल उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलेगा। विश्व पर्यटन दिवस पर शहर के पर्यटन स्थलों पर विशेष सफाई अभियान होगा। 17 अक्टूबर तक हर जोन में सफाई मित्रों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। स्कूलों में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी होंगी।

    राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर जलेंगे तीन लाख दीप
    एलडीए की ओर से राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर तीन लाख दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम सात बजे होने वाले इस आयोजन की तैयारियों का एलडीए उपाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। उप मुख्यमंत्री और कई मंत्री भी दीप प्रज्वलन में शामिल होंगे।

    आयोजन की तैयारियों में एलडीए की टीम जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के चलते राष्ट्र प्रेरणा स्थल को तीन दिन के लिए आम लोगों के लिए बंद किया गया है।

    भाजपा कार्यकर्ता अस्पतालों में करेंगे सेवा
    भाजपा महानगर इकाई की ओर से ‘सेवा और समर्पण के 25 वर्ष-सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अस्पतालों में फल वितरण और रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सिविल अस्पताल में मरीजों को फल वितरित करेंगे। महानगर के अन्य अस्पतालों में भी जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता सेवा कार्यों में शामिल होंगे।

    अभियान के तहत सभी बूथों पर 200 लाभार्थियों के घर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने का कार्यक्रम भी है। झूलेलाल वाटिका में संगठन महामंत्री धर्मपाल दीप प्रज्वलित करेंगे, जबकि सेंट्रल पार्क, समर विहार में महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी मौजूद रहेंगे। विश्वविद्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी शामिल होंगे। इसके अलावा शहर के दस प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    नई दिल्ली । कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा के साथ मौजूदा सहयोग को एक नई और अधिक व्यापक साझेदारी में बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसी क्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोपीय संसद में यूरोप के साथ गहरे संबंधों का समर्थन किया। दोनों पक्षों के बीच चर्चा अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, अंतरिक्ष और डिजिटल व्यापार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

    कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट सदस्य बनाने की संभावना ने इस पूरी पहल को खास बना दिया है। यह पूर्ण सदस्यता से अलग व्यवस्था होगी। इसके तहत कनाडा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की तरह संगठन के सभी फैसलों में मतदान नहीं करेगा, लेकिन कई अहम क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ गहरा सहयोग कर सकेगा। मौजूदा समय में यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं। एसोसिएट सदस्यता की यह व्यवस्था अभी मौजूदा ढांचे में निर्धारित नहीं है, इसलिए इसे लागू करने के लिए आगे कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया की जरूरत होगी।

    मार्क कार्नी ने यूरोप के साथ संबंधों को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका जोर इस बात पर है कि दोनों पक्ष अपनी रणनीतिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए साथ काम करें। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से व्यापारिक संबंध मौजूद हैं, लेकिन अब दोनों पक्ष इन्हें रक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने पर विचार कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक क्षमता, AI और उन्नत तकनीक को इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र माना जा रहा है।

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच मौजूदा व्यापारिक समझौता भी इस नई पहल की आधारभूमि है। दोनों पक्ष अब उस ढांचे से आगे बढ़कर अधिक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध विकसित करने की बात कर रहे हैं। कनाडा यूरोपीय रक्षा खरीद व्यवस्था में शामिल होने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बन चुका है। इससे रक्षा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है।

    इस घटनाक्रम का असर अमेरिका के साथ कनाडा के संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के संभावित एसोसिएट सदस्य बनने के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय संघ के साथ यह व्यवस्था अमेरिका के लिए प्रतिकूल मानी गई, तो यूरोप पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई है और इसे अमेरिका के लिए संभावित रूप से शत्रुतापूर्ण कदम बताया है।

    दूसरी ओर, कनाडा यूरोप के साथ अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कनाडा का फोकस भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को विविध बनाने तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक क्षमता मजबूत करने पर है। ऊर्जा, खनिज, रक्षा, तकनीक और वित्तीय सेवाओं से जुड़े सहयोग पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।

    कनाडा और अमेरिका के बीच टैरिफ तथा व्यापार को लेकर जारी मतभेदों के बीच यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी महत्वपूर्ण है। हालांकि, कनाडा और अमेरिका के पुराने संबंध भी बने हुए हैं। वहीं यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित नई व्यवस्था का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। एसोसिएट सदस्यता की प्रकृति, अधिकार और जिम्मेदारियां आगे होने वाली बातचीत में निर्धारित होंगी। फिलहाल यह पहल कनाडा और यूरोप के बीच संबंधों को व्यापार से आगे रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

  • अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं

    अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार में बने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। सपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में किसी प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा बाद में होता है, जबकि उसके टूटने की शुरुआत पहले ही हो जाती है। उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था और इसका मेंटीनेंस अभी भी जारी है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में उद्घाटन के कुछ समय बाद क्षति की खबरें भी सामने आई हैं।

    रिवरफ्रंट और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता का किया जिक्र
    अखिलेश यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर वीडियो दिखाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली और लखनऊ वालों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला चल रहा है कि किसके पास ज्यादा मुनाफा होगा। उन्होंने सपा सरकार के दौरान बने रिवरफ्रंट और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को बेहतर बताया।

    उन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का भी जिक्र किया और कहा कि उसका डिजाइन सबसे अच्छा है, लेकिन भाजपा के लोग अब उसे खराब कर रहे हैं। उन्होंने रिवरफ्रंट पर लगे फव्वारों और सपा सरकार के दौरान बच्चों को दिए गए लैपटॉप का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अभी भी वैसे ही हैं।

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर इससे पहले भी गुणवत्ता के सवाल उठते रहे हैं। अगस्त में सड़क के हिस्सों को लेकर मरम्मत और पंखों से सुखाने का वीडियो सामने आने के बाद भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा था।

    यूपीआई भुगतान पर टैक्स को लेकर भी हमला
    अखिलेश यादव ने यूपीआई से भुगतान करने पर व्यापारियों पर लगाए गए टैक्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूपीआई को “रुपये ऐंठने वाली योजना” बताते हुए कहा कि चुंगीजीवी लोगों को रुपये ऐंठने वाली योजना बंद कर देनी चाहिए। उनका आरोप था कि ऐसी योजनाएं उद्योगपतियों की जेबें भरने के लिए बनाई जा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर उनके बयान की हालिया रिपोर्टिंग भी सामने आई है।

    https://x.com/yadavakhilesh/status/2100210386243084303

    200 करोड़ पौधे लगाने के दावे पर सवाल
    सपा प्रमुख ने प्रदेश में 200 करोड़ पेड़ लगाए जाने के सरकारी दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान एक हजार एकड़ जमीन पर एक लाख 34 हजार पेड़ लगवाए गए थे। अखिलेश ने सवाल किया कि यदि सरकार ने 200 करोड़ पौधे लगाए हैं तो वह यह भी बताए कि इतनी बड़ी संख्या में पौधे लगाने के लिए जमीन कहां है। यह दावा और उनका सवाल हालिया रिपोर्टिंग में भी दर्ज है।

    पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा सपा में लौटे
    इस दौरान पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव अपने बीच महसूस होते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बना देते, तब तक वह घर नहीं बैठेंगे।

    राजनीतिक रूप से अखिलेश यादव के इस कार्यक्रम में सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधने के साथ पार्टी में पूर्व मंत्री की वापसी को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर अन्नपूर्णा दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3000 रुपये की वित्तीय सहायता भेजी जा रही है। इस महीने करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पश्चिम बंगाल में इस दिन को अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि भेजी जा रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों के प्रति अपने लगाव का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें हमेशा पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों से बहुत प्यार मिला है। उन्होंने विश्वकर्मा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए अन्नपूर्णा योजना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस योजना के जरिए बंगाल की महिलाओं को नई ताकत मिली है। उन्होंने योजना का लाभ उठाने वाली प्रत्येक महिला को बधाई भी दी।

    प्रधानमंत्री ने बंगाल में हुए राजनीतिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस साल 4 मई को बंगाल ने बदलाव का एक नया रास्ता चुना और उन्हें पता है कि इस बदलाव में बंगाल की माताओं और बहनों ने सबसे अहम भूमिका निभाई।

    अन्नपूर्णा योजना के तहत सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में 3000 रुपये की राशि मिलने की जानकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से दी गई है। इस योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले कुछ महीनों के दौरान बढ़ी है।

    जानकारी के अनुसार जून महीने में अन्नपूर्णा योजना के तहत 28 लाख महिलाओं को राशि मिली थी। इसके बाद जुलाई में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.19 करोड़ हो गई। सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सहायता पहुंचाने की बात कही गई है।

    इस भुगतान की खास बात यह बताई गई है कि राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इसके साथ ही किसी तरह के बिचौलिये या कट-मनी की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं तक वित्तीय सहायता सीधे पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर राज्य में अन्नपूर्णा दिवस मनाए जाने के साथ महिलाओं के खातों में सहायता राशि भेजी जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को देशभर से जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दी जा रही हैं।

    अन्नपूर्णा योजना से जुड़ी इस पहल के तहत सितंबर महीने की राशि बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचाई जा रही है। 1.58 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा जून और जुलाई की तुलना में अधिक है। इस तरह 17 सितंबर का दिन योजना के लाभार्थियों के लिए वित्तीय सहायता मिलने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाए जा रहे इस दिन के दौरान योजना के लाभार्थियों को 3000 रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया जारी है। योजना के तहत लाभ पाने वाली महिलाओं को इस वित्तीय सहायता का लाभ मिल रहा है।

  • यूपी में मिशन-2027 से पहले गोरखपुर पर भाजपा का फोकस, तावड़े परखेंगे संगठन की जमीनी ताकत

    यूपी में मिशन-2027 से पहले गोरखपुर पर भाजपा का फोकस, तावड़े परखेंगे संगठन की जमीनी ताकत

    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भाजपा ने गोरखपुर क्षेत्र में संगठन को नए सिरे से कसने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों में पार्टी की जमीनी स्थिति के साथ बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का भी फीडबैक लिया जाएगा। तावड़े विधायकों और संभावित प्रत्याशियों की स्थिति, संगठन की सक्रियता और सहयोगी दलों के प्रभाव से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी जुटाएंगे।

    2024 के प्रदर्शन के बाद संगठन पर फोकस
    भाजपा के लिए तावड़े का यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में कमजोर रहा था। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को दोबारा सक्रिय और मजबूत करने पर जोर है।

    प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद तावड़े का यह पहला गोरखपुर क्षेत्र दौरा है। संगठनात्मक नजरिए से इसे भाजपा के लिए अहम क्षेत्र माना जाता है। इसकी एक वजह यह भी है कि भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी, अपना दल और सुभासपा का यहां खासा प्रभाव है। पिछले चुनाव में इन दलों के प्रत्याशी भी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

    सहयोगी दलों की दावेदारी भी अहम
    2027 के चुनाव में सहयोगी दल अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में तावड़े के दो दिन के प्रवास में भाजपा की तैयारियों के साथ सहयोगी दलों की स्थिति और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों का भी फीडबैक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीटों के तालमेल और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर संगठन स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी।

    इस बार पार्टी में महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से भी टिकट की दावेदारी सामने आ रही है। वहीं जेनजी आंदोलन के बाद युवाओं की भूमिका और उनकी राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा में है। संगठन के हालिया विस्तार में इसका असर देखने को मिला है। पार्टी इन तमाम बदलावों को ध्यान में रखते हुए आगामी चुनाव की रणनीति तैयार करने में जुटी है।

    तावड़े के दौरे में केवल संगठन की रिपोर्ट तक सीमित रहने के बजाय विधायकों और संभावित प्रत्याशियों के बारे में जमीनी फीडबैक को भी अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि उनके दौरे को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ी है।

    2022 में 62 में से 42 सीटें जीती थीं भाजपा
    संगठनात्मक दृष्टि से गोरखपुर क्षेत्र में कुल 62 विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इनमें से 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी। गोरखपुर मंडल में पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत रही। मंडल की 28 सीटों में से 27 पर भाजपा और उसके सहयोगियों को जीत मिली थी। इसके मुकाबले बस्ती मंडल की 13 विधानसभा सीटों में भाजपा को छह सीटों पर जीत मिली थी। आजमगढ़ मंडल की 21 सीटों में पार्टी के पास केवल तीन सीटें हैं। इनमें दो बलिया और एक मऊ की सीट शामिल है।

    लोकसभा चुनाव में भी क्षेत्रवार तस्वीर अलग रही
    2024 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों में भाजपा ने छह पर जीत दर्ज की थी। वहीं आजमगढ़ मंडल की आजमगढ़ और लालगंज दोनों सीटों पर भाजपा को जीत नहीं मिली। दोनों सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में गई थीं। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए इस क्षेत्र में संगठनात्मक स्थिति और चुनावी समीकरणों को नए सिरे से परखने का मौका भी माना जा रहा है।

    सहयोगियों की राजनीतिक नजदीकी से बढ़ी चिंता
    भाजपा के लिए अपना दल, निषाद पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे तथा स्थानीय समीकरणों का तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की ओर से सहयोगी दलों को अपने साथ जोड़ने की कोशिशें भी भाजपा के लिए रणनीतिक चुनौती का विषय हो सकती हैं।

    पिछले दिनों निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के घर पहुंचे थे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। ऐसे में तावड़े के दौरे के दौरान संगठन के साथ सहयोगी दलों से जुड़े समीकरणों पर भी भाजपा की नजर रहने की संभावना है।

  • मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के दौरान विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में हुई मौतों के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को इन मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई और राहत कैंपों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के माध्यम से देने का निर्देश दिया है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मणिपुर सरकार से कई सवाल किए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर राज्य सरकार से पूछा कि सामने आए मामलों पर अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण यानी MSLSA को भी मामले पर अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राहत कैंपों में हुई असामान्य मौतों के मामलों में तेजी से एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। इसके साथ ही विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी सामने रखनी होगी।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जस्टिस गीता मित्तल कमेटी और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आए। इन रिपोर्टों में मणिपुर के राहत कैंपों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया था। इनमें एक मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद होने की बात भी सामने आई थी।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने राहत कैंपों में हुई कुल 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराए जाने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि सभी मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। मौतों की परिस्थितियों और उनके कारणों की जांच को लेकर भी राज्य से जवाब मांगा गया।

    पीठ ने राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की असामान्य मौतों के बाद दिए गए मुआवजे पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। इस मुद्दे पर भी राज्य को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

    अदालत ने यह भी कहा कि राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। असामान्य मौतों के मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। MSLSA को भी अपनी रिपोर्ट के जरिए संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई और स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में वर्ष 2023 की हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी उम्मीद जताई कि केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों के लिए गठित दो विशेष अदालतें मुकदमों को तेजी से पूरा करेंगी। अदालत के निर्देशों के बाद अब मुख्य सचिव और MSLSA की स्टेटस रिपोर्ट में राहत कैंपों में हुई मौतों, जांच, एफआईआर, सुरक्षा और मुआवजे से जुड़े पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • यूपी में भाजपा की कमजोर सीटों पर सहयोगियों की नजर, लगातार हार वाली सीटों पर बढ़ाई सक्रियता

    यूपी में भाजपा की कमजोर सीटों पर सहयोगियों की नजर, लगातार हार वाली सीटों पर बढ़ाई सक्रियता

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के सहयोगी दल उन सीटों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जहां भाजपा लंबे समय से जीत के लिए संघर्ष करती रही है या उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ होने से पहले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने ऐसे क्षेत्रों में सम्मेलन और दूसरे कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। मुरादाबाद समेत मंडल की उन सीटों पर भी सहयोगी दलों की नजर है, जहां भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा है या जीत का अंतर बेहद कम रहा है।

    मुरादाबाद में भाजपा का रिकॉर्ड कमजोर
    मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों में 2022 के चुनाव में भाजपा को केवल मुरादाबाद नगर सीट पर जीत मिली थी। इससे पहले 2017 में पार्टी मुरादाबाद नगर और कांठ सीट जीतने में कामयाब रही थी। 2012 के चुनाव में भाजपा के खाते में सिर्फ ठाकुरद्वारा सीट आई थी।

    उपचुनावों को अलग रखकर देखें तो मुरादाबाद देहात और बिलारी ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा को इन तीन विधानसभा चुनावों में जीत नहीं मिली। वहीं 2014 में हुए उपचुनाव के बाद ठाकुरद्वारा सीट भी भाजपा के हाथ से निकल गई।

    सहयोगी दलों ने शुरू की चुनावी तैयारियां
    उत्तर प्रदेश में एनडीए गठबंधन में राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी प्रमुख सहयोगी दल हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) केंद्र में भाजपा की सहयोगी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये दल सीटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में सक्रिय हो गए हैं।

    मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।
    मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।

    भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने कहा, “सहयोगी दलों की सक्रियता बढ़ी है। इसमें कुछ दल सीटों पर दावेदारी भी कर रहे हैं। सीटों का बंटवारा भाजपा और सहयोगी दलों के राष्ट्रीय स्तर के नेता मिलकर तय करेंगे। फिलहाल सभी सीटों पर पार्टी की तैयारी है।”

    मुरादाबाद में सहयोगी दलों के कार्यक्रम
    13 सितंबर: मुरादाबाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का सम्मेलन।
    8 सितंबर: मुरादाबाद में निषाद पार्टी का मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन।
    2 अगस्त: मुरादाबाद में अपना दल (एस) का क्षेत्रीय सम्मेलन।
    4 जून: ठाकुरद्वारा में रालोद की विजय संकल्प महारैली।
    29 अप्रैल: कैलासा बाईपास पर सुभासपा का अति पिछड़ा सम्मेलन।

    इन विधानसभा सीटों पर लंबे समय से भाजपा को जीत का इंतजार
    विधानसभा सीट – भाजपा की आखिरी जीत
    मुरादाबाद देहात – 1993
    बिलारी – जीत ही नहीं मिली
    ठाकुरद्वारा – 2012
    कुंदरकी – 1993

    मंडल की इन सीटों पर भी भाजपा को संघर्ष
    मुरादाबाद के अलावा मंडल के दूसरे जिलों में भी भाजपा को कुछ विधानसभा सीटों पर लंबे समय से जीत का इंतजार है। इनमें अमरोहा, संभल, नगीना, नजीबाबाद और रामपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। अमरोहा में भाजपा को आखिरी बार 1996 में जीत मिली थी, जबकि संभल में 1993, नगीना में 1991 और नजीबाबाद में 1991 में पार्टी विजयी रही थी। रामपुर विधानसभा सीट पर 2022 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी।

    रामपुर में स्थापना दिवस पर अपना दल (एस) का बड़ा कार्यक्रम
    अपना दल (एस) ने भी रामपुर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर ली है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संजीव यादव के मुताबिक, 4 नवंबर को पार्टी का स्थापना दिवस है। इस मौके पर रामपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल शामिल होंगी।

  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    नई दिल्ली ।स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में है। वीडियो में वह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। अपने बयान में स्वरा ने कहा था कि वह फैसले से काफी दुखी और निराश हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि फैसले के बाद उन्होंने अपने परिचित मुस्लिम दोस्तों को संदेश भेजकर माफी मांगी थी।

    वीडियो में स्वरा भास्कर ने कहा था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला आने के बाद उन्हें लगा था कि यह फैसला उचित नहीं था। उन्होंने कहा था कि उस समय वह काफी नाराज थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि देश में ऐसा फैसला कैसे आया। उन्होंने बताया था कि उनके फोन में मौजूद कई मुस्लिम परिचितों को उन्होंने संदेश भेजे थे।

    स्वरा के अनुसार, इन लोगों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और फहाद अहमद समेत कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा था कि एक हिंदू होने के नाते वह अपने मुस्लिम परिचितों को यह बताना चाहती थीं कि फैसले को लेकर उन्हें खेद है और वह इससे सहमत नहीं हैं। उनके इस पुराने बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के बयान की आलोचना की और उनके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने धार्मिक नारे और टिप्पणियां भी कीं। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों ने उनके विचार व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका तर्क रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नागरिक को न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।

    राम जन्मभूमि विवाद पर स्वरा भास्कर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुकी थीं। 2019 में फैसले के बाद उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था। एक वकील की ओर से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उस समय अटॉर्नी जनरल ने इस कार्रवाई की मांग से असहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अधिकार देने का फैसला किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1949 में विवादित परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के अधिकार से संबंधित निष्कर्ष भी दर्ज किए थे। फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

    अब स्वरा भास्कर के पुराने बयान का वीडियो फिर सामने आने से उनके 2019 के रुख पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। बयान को लेकर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।