Author: bharati

  • घर का मुख्य द्वार: जहां छोटी-सी गलतियां रोक सकती हैं तरक्की, जानें वास्तु के जरूरी नियम

    घर का मुख्य द्वार: जहां छोटी-सी गलतियां रोक सकती हैं तरक्की, जानें वास्तु के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है क्योंकि यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। माना जाता है कि अगर घर के प्रवेश द्वार के आसपास गलत चीजें रखी जाएं तो इसका सीधा असर परिवार की तरक्की, सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए वास्तु में मुख्य द्वार को साफ, खुला और रोशनी से भरपूर रखने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य द्वार पर कभी भी कूड़ा, टूटा-फूटा सामान या बेकार चीजें नहीं रखनी चाहिए। कई घरों में पुराने जूते-चप्पल या खराब सामान दरवाजे के पास रख दिया जाता है, जिसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। इससे घर में तनाव और आर्थिक बाधाएं बढ़ सकती हैं, इसलिए ऐसे सामान को तुरंत हटा देना चाहिए।

    इसके अलावा, मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पलों का ढेर लगाना भी शुभ नहीं माना जाता है। इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है और वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। जूतों को हमेशा एक निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रखना चाहिए ताकि घर का वातावरण साफ और संतुलित बना रहे।

    वास्तु के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार पर सूखे या कांटेदार पौधे भी नहीं रखने चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है। इनके स्थान पर हरे-भरे और खुशबूदार पौधे जैसे तुलसी रखना शुभ माना जाता है। साथ ही, मुख्य दरवाजे पर पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी है, क्योंकि अंधेरा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर की सुख-समृद्धि पर असर डाल सकता है।

  • भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था

    भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था



    नई दिल्ली।
    ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को भारत का “टेंपल सिटी ऑफ इंडिया” कहा जाता है, जहां हर मोड़ पर आस्था और इतिहास की झलक देखने को मिलती है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है, और यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।

    ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, एक समय भुवनेश्वर में 2000 से भी अधिक मंदिर हुआ करते थे, हालांकि समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, लेकिन आज भी यहां 700 से ज्यादा प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में सबसे प्रमुख लिंगराज मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर कलिंग शैली की अद्भुत वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी ऊंची मीनारें और पत्थरों पर की गई नक्काशी लोगों को आकर्षित करती है।

    भुवनेश्वर सिर्फ मंदिरों का शहर ही नहीं, बल्कि यहां की रोजमर्रा की जिंदगी भी धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। सुबह की शुरुआत मंदिरों की घंटियों और भजनों से होती है, जबकि फूल, दीपक और पूजा सामग्री से जुड़ा स्थानीय कारोबार भी इसी आस्था पर आधारित है। यहां के त्योहार पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग देते हैं और ओडिया व्यंजनों में भी धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

    आज भुवनेश्वर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां नई इमारतें और बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं, लेकिन इसके बीच सदियों पुराने मंदिर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यही परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम भुवनेश्वर को एक खास और अद्वितीय शहर बनाता है, जहां हर आगंतुक इतिहास, संस्कृति और भक्ति का अनुभव एक साथ करता है।

  • भगवान शिव के गले में क्यों रहता है नाग, जानिए इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक कथा?

    भगवान शिव के गले में क्यों रहता है नाग, जानिए इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक कथा?



    नई दिल्ली।
    हिंदू धर्म में भगवान शिव की छवि जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही गहरी उनके प्रतीकों की भी मान्यता है। उनके गले में लिपटा हुआ नाग अक्सर लोगों के मन में सवाल खड़ा करता है कि आखिर भोलेनाथ ने डर और विष के प्रतीक माने जाने वाले सांप को अपने आभूषण के रूप में क्यों धारण किया। इसके पीछे केवल एक नहीं, बल्कि कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण बताए जाते हैं।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब वासुकी नाग को रस्सी बनाकर देवताओं और दानवों ने मिलकर मंथन किया था, तब यह घटना शिव और नागों के बीच गहरे संबंध की शुरुआत मानी जाती है। मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो पूरी सृष्टि संकट में आ गई। ऐसे समय में भगवान शिव ने उस विष को पीकर संसार की रक्षा की और उसे अपने कंठ में रोक लिया। इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। माना जाता है कि इसी घटना के बाद नागों की भक्ति और समर्पण शिव के प्रति और मजबूत हो गया।

    धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि भगवान शिव ने नाग को अपने गले में स्थान देकर यह संदेश दिया कि सृष्टि का हर जीव समान है, चाहे वह डरावना ही क्यों न लगे। सांप सामान्यतः भय और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है, लेकिन शिव ने उसे अपनाकर यह सिद्ध किया कि सच्चा योगी वही है जो भय पर विजय पा ले। उनके लिए जीवन और मृत्यु दोनों समान हैं, इसलिए नाग उनके लिए आभूषण बन गया।

    आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नाग को ऊर्जा और जागृति का प्रतीक माना जाता है। योग परंपरा में कुंडलिनी शक्ति को सर्प के रूप में दर्शाया जाता है, जो मानव शरीर में सुप्त अवस्था में रहती है। भगवान शिव को योग और ध्यान का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है, इसलिए उनके गले में नाग इस बात का संकेत है कि वे जाग्रत चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्वामी हैं।

    आज भी शिवभक्त सावन, महाशिवरात्रि और नाग पंचमी जैसे पर्वों पर शिव और नाग देवता की एक साथ पूजा करते हैं। शिव मंदिरों में शिवलिंग पर नाग की आकृति इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव अपने भक्तों को हर प्रकार के भय और संकट से मुक्ति दिलाते हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, संतुलन और निडरता का संदेश देता है, जो जीवन के हर पहलू में प्रेरणा बनकर सामने आता है।

  • गुजरात कोर्ट का बड़ा आदेश: ब्राह्मण समुदाय पर टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश

    गुजरात कोर्ट का बड़ा आदेश: ब्राह्मण समुदाय पर टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश



    नई दिल्ली।
    फिल्म निर्माता और अभिनेता अनुराग कश्यप एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में फंस गए हैं। गुजरात के सूरत की एक अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिस पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्ति जताई थी।

    सूरत की JMFC (जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) अदालत ने स्थानीय वकील और विश्व हिंदू परिषद के नेता कमलेश रावल द्वारा दायर निजी शिकायत पर आंशिक रूप से सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने माना कि शुरुआती स्तर पर यह पर्याप्त आधार दिखाई देता है कि कश्यप की पोस्ट से किसी विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में तनाव फैलने की स्थिति बन सकती है।

    कोर्ट ने आदेश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज करने को कहा है, जिनमें धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करना) और धारा 353(2) (भ्रामक या गलत जानकारी फैलाना) शामिल हैं।

    यह पूरा विवाद फिल्म ‘फुले’ के ट्रेलर रिलीज से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि 16 अप्रैल को ‘ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज’ ने ट्रेलर पर आपत्ति जताई थी, जिसके जवाब में अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टिप्पणी की थी, जिसे समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक माना गया।

    शिकायतकर्ता कमलेश रावल का दावा है कि कश्यप ने एक बार नहीं, बल्कि दो बार ऐसी टिप्पणियां कीं, जिससे ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मी हस्तियों की बातों का समाज पर बड़ा असर पड़ता है, इसलिए इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले 2020 में भी कश्यप के खिलाफ इसी तरह की आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें उन्हें कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए थे। इसके चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की भी बात सामने आई है।

    इस आदेश के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अनुराग कश्यप को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।

  • ‘त्रिदेव’ के ‘ओए ओए’ गाने पर क्यों मची थी हलचल? 36 साल पुरानी फिल्म से जुड़ा है हैरान करने वाला किस्सा

    ‘त्रिदेव’ के ‘ओए ओए’ गाने पर क्यों मची थी हलचल? 36 साल पुरानी फिल्म से जुड़ा है हैरान करने वाला किस्सा



    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई फिल्में अपनी कहानी और गानों की वजह से याद की जाती हैं, लेकिन 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘त्रिदेव’ से जुड़ा एक किस्सा आज भी हैरान कर देता है। इस फिल्म के एक गाने की वजह से उस दौर में देश के कई हिस्सों में विवाद की स्थिति बन गई थी और कुछ मामलों में गिरफ्तारियां तक होने की खबरें सामने आई थीं।

    साल 1989 में रिलीज हुई इस मल्टी-स्टारर फिल्म ‘त्रिदेव’ को राजीव राय ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, सनी देओल, जैकी श्रॉफ, माधुरी दीक्षित, संगीता बिजलानी, सोनम, अनुपम खेर और अमरीश पुरी जैसे बड़े कलाकारों ने काम किया था। यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही और इसने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई के साथ 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी अपने नाम किए थे।

    हालांकि, इस फिल्म की सफलता के बीच इसका एक गाना ‘ओए ओए’ काफी चर्चा में आ गया था। यह गाना युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ, लेकिन बाद में इसके इस्तेमाल को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। निर्देशक राजीव राय ने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह गाना रेडियो नशा पर काफी हिट रहा, लेकिन धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल गलत संदर्भों में होने लगा।

    रिपोर्ट्स और उस समय की चर्चाओं के मुताबिक, कुछ जगहों पर लोग इस गाने के बोलों का इस्तेमाल छेड़खानी जैसी घटनाओं में करने लगे थे, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की बातें भी सामने आईं और कई मामलों में लोगों पर कार्रवाई हुई। हालांकि, गाने पर आधिकारिक रूप से कोई बैन नहीं लगाया गया था, लेकिन यह सामाजिक स्तर पर विवाद का विषय जरूर बन गया था।

    ‘ओए ओए’ गाना ग्लोबल हिट गाने ‘Rhythm Is Gonna Get You’ से प्रेरित बताया जाता है, जिसे कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने कंपोज किया था। इस गाने को कविता कृष्णमूर्ति और सुरेश वाडकर ने अपनी आवाज दी थी। समय के साथ यह गाना पॉप कल्चर का हिस्सा बन गया, लेकिन इसके साथ जुड़ा यह विवाद आज भी लोगों को चौंका देता है।

    इस तरह ‘त्रिदेव’ सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर फिल्म ही नहीं रही, बल्कि अपने गाने की वजह से चर्चा और विवाद दोनों का हिस्सा बन गई, जिसकी गूंज 36 साल बाद भी लोगों के बीच सुनाई देती है।

  • Jio IPO अपडेट: निवेशकों की नजरें, जल्द आ सकता है ऑफिशियल अनाउंसमेंट

    Jio IPO अपडेट: निवेशकों की नजरें, जल्द आ सकता है ऑफिशियल अनाउंसमेंट


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर मेगा पब्लिक इश्यू की तैयारी तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Reliance Industries Limited की डिजिटल इकाई Jio Platforms Limited जल्द ही अपना बहुप्रतीक्षित IPO लॉन्च कर सकती है। जानकारी के अनुसार, कंपनी मई 2026 में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकती है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है।

    IPO को लेकर क्यों बढ़ी हलचल
    कंपनी ने पिछले कुछ महीनों से इस मेगा इश्यू की तैयारी तेज कर दी है। शुरुआत में मार्च तक फाइलिंग का प्लान था, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार की अस्थिरता के कारण इसे टाल दिया गया। अब कंपनी अपने वित्तीय आंकड़ों और बाजार स्थितियों का आकलन करने के बाद आगे बढ़ने की रणनीति बना रही है।

    बड़ी टीम और ग्लोबल बैंकों की भागीदारी
    इस मेगा IPO को संभालने के लिए कंपनी ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। करीब 19 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंकों को सलाहकार के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
    Goldman Sachs
    Morgan Stanley
    Bank of America
    Citigroup
    HSBC
    Kotak Mahindra Capital
    JM Financial

    कितना बड़ा हो सकता है IPO?
    हालांकि कंपनी ने अभी तक IPO साइज को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू हो सकता है। अगर यह IPO लॉन्च होता है, तो यह निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर और भारतीय टेक-टेलीकॉम सेक्टर के लिए ऐतिहासिक कदम होगा।

    क्यों है यह IPO खास?
    भारत का सबसे बड़ा संभावित IPO
    लंबे समय बाद रिलायंस समूह का बड़ा पब्लिक इश्यू
    डिजिटल और टेलीकॉम सेक्टर में मजबूत पकड़
    घरेलू और विदेशी निवेशकों की बड़ी दिलचस्पी

    जियो का संभावित IPO भारतीय शेयर बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन मई 2026 को लेकर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।

  • अजय देवगन ने टाली ‘धमाल 4’ की रिलीज, अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ को मिला बड़ा फायदा

    अजय देवगन ने टाली ‘धमाल 4’ की रिलीज, अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ को मिला बड़ा फायदा

    नई दिल्ली ।  अक्सर देखा जाता है कि कई फिल्में एक ही वक्त पर सिनेमाघरों में रिलीज हो जाती हैं, इससे दोनों ही फिल्मों के बिजनेस पर गहरा असर पड़ता है। यही नहीं मेकर्स फिल्मों के क्लैश को लेकर आलोचना का सामना भी करते हैं। इसलिए जब ऐसी टक्करों से बचा जाता है, तो यह सभी लोगों के लिए खुशी की बात होती है। इसका ताजा उदाहरण अजय देवगन की कॉमेडी फिल्म ‘धमाल 4’ और अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ है।
    बदल गई ‘धमाल 4’ की रिलीज डेट
    ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट कर जानकारी दी है कि अजय देवगन ने अपनी फिल्म ‘धमाल 4′ की रिलीज डेट बदल दी है। तरण ने अपने ट्वीट में लिखा, ”धमाल 4’ – ‘वेलकम टू द जंगल’: अजय देवगन – अक्षय कुमार का क्लैश टल गया… आपसी सम्मान और स्मार्ट बिजनेस प्लानिंग के तहत, अजय देवगन ने ‘धमाल 4′ की रिलीज डेट 17 जुलाई 2026 जो [पहले 3 जुलाई, 2026 को तय थी] उसे बदलने का फैसला किया है।’

    अजय के फैसले से मिलेगा अक्षय को फायदा

    तरण ने आगे लिखा, ‘खबर है कि अजय देवगन और अक्षय कुमार ने बात की और आपसी सहमति से दोनों फिल्मों – ‘धमाल 4’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ को उतना ही थिएटर में चलने दिया, जितना वे डिजर्व करती हैं। साथ ही यह भी पक्का किया कि ऑडियंस को दो फुल-स्केल मैडकैप एंटरटेनर उसी तरह देखने को मिलें, जैसा उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का मकसद है। जहां ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून, 2026 को सिनेमाघरों में आएगी, वहीं ‘धमाल 4′ अब 17 जुलाई 2026 को रिलीज होगी, जिससे WTTJ को बॉक्स ऑफिस पर तीन हफ्ते का अच्छा विंडो मिलेगा।’ अब ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘धमाल 4’ दोनों को लेकर ऑडियंस के बीच एक्साइटमेंट और बढ़ गई है। दोनों फ्रेंचाइजी पहले भी ऑडियंस को एंटरटेन कर चुकी हैं और इस बार भी मेकर्स बड़े लेवल पर फिल्मों को तैयार कर रहे हैं।
    ‘भूत बंगला’ से चर्चा में हैं अक्षय कुमार
    अक्षय कुमार इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर खबरों में बने हुए हैं। इस फिल्म के साथ अक्षय ने एक बार फिल्ममेकर प्रियदर्शन के साथ हाथ मिलाया है। इनकी जोड़ी ने हमेशा ही पर्दे पर कमाल किया है। ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने 29 दिनों में भारत में करीब 165 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ परेश रावल, राजपाल यादव, असरानी, तब्बू और वामिका गब्बी जैसे कलाकारों ने अहम रोल अदा किया है।

  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी

    कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र (Prime Minister Narendra) ने इस समय को तबाही का दशक घोषित करते हुए बड़ी बात कह दी है। शनिवार को नीदरलैंड्स (Netherlands) में भारतीयों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड (Covid) और मध्य एशिया (Central Asia) में छिड़े युद्ध ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया और दुनिया एक बार फिर गरीबी के गड्ढे में जा गिरी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट से जूझ रही है। पीएम मोदी इस समय पांच देशों के दौरे पर हैं। यूएई के बाद वह नीदरलैंड्स पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, विश्व के सामने अब नई चुनौतियां हैं और इनसे निपटना आसान नहीं है।


    पहले कोरोना फिर युद्ध ने मचाई तबाही

    पीएम मोदीने कहा कि यह दशक प्रलयंकारी साबित हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हालात जल्द नहीं संभले तो बीते कई दशकों के काम पर पानी फिर जाएगा और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा गरीब हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के लोगों को पहले ही सावधान कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल के कम इस्तेमाल की सलाह दी है। पीएम मोदी ने सरकारी खर्च पर भी नियंत्रण करने के निर्देश दे दिए हैं।


    पीएम मोदी की लोगों को सलाह

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों हैदराबाद में कहा था कि लोगों को जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और आना जाना कम कर देना चाहिए। इसके अलावा कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके। पीएम मोदी ने कहा कि विदेशी मुद्रा को बचाना भी एक तरह की देशभक्ति है। इसके अलावा आने-जाने के लिए कार पूल करें और खेतों में उर्वरकों का इस्तेमाल भी कम करें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोगों को एसी का भी इस्तेमाल कर देना चाहिए जिससे ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।


    पेट्रोल डीजल में लगी आग

    देश में पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजापा नहीं हुआ था। हालांकि ईरान संकट की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये का और डीजल 90.67 रुपये का हो गया है। जानकारों का कहना है कि इस वृद्धि का असर सीधा-सीधा आपकी रसोईऔर रोजमर्रा की जिंदगी पर होने वाला है। अमूल कंपनी ने अपने दूध की कीमत में भी वृद्धि की है।


    ऊर्जा संकट से निपटने का प्रयास

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ चर्चा की तथा उनसे भारत में निवेश करने का आह्वान किया।

  • बंगालः फाल्टा उपचुनाव में CM शुभेन्दु की पहली सभा…. बोले- कहां है पुष्पा, अब दिखाई नहीं दे रहा?

    बंगालः फाल्टा उपचुनाव में CM शुभेन्दु की पहली सभा…. बोले- कहां है पुष्पा, अब दिखाई नहीं दे रहा?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) ने डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव (Falta By-Election) से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee.) पर करारा हमला बोला है। शनिवार को भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पोंडा के समर्थन में फाल्टा में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर कई बड़े एलान किए। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में यह उनकी पहली जनसभा थी।

    शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के फाल्टा उम्मीदवार जहांगीर खान (Jahangir Khan) को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें घोषित कुख्यात अपराधी करार दिया। उन्होंने कहा, “2019 के चुनाव बाद हुई हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य के 19 सबसे कुख्यात अपराधियों की सूची जारी की थी। भतीजे के संरक्षण में पलने वाला यह जहांगीर खान उसी सूची में शामिल था। अब इस तथाकथित ‘पुष्पा’ को मेरे भरोसे छोड़ दीजिए, जो अब कहीं दिखाई भी नहीं दे रहा है। वह अब मेरी जिम्मेदारी है और मैं खुद उसका मामला देखूंगा।”


    क्या था ‘पुष्पा’ और ‘सिंघम’ का विवाद?

    चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक 2011 बैच के यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा (IPS Ajay PAl Sharma) ने मतदाताओं को धमकाने की शिकायत के बाद जहांगीर खान के घर और दफ्तर का दौरा किया था। इस पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पलटवार करते हुए कहा था कि “अगर वह सिंघम हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं।” मुख्यमंत्री ने इसी बयान पर तंज कसा है।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि जब से बंगाल के राजनीतिक पटल पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का उदय हुआ है, तब से पिछले एक दशक में डायमंड हार्बर और फाल्टा के लोग स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए हैं।

    उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, “अब बंगाल का परिदृश्य बदल चुका है। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई 2026 को होने वाला पुनर्मतदान यहां के लोगों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार वापस दिलाएगा। मैं फाल्टा के मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे भाजपा उम्मीदवार को 1 लाख से अधिक वोटों के अंतर से विजयी बनाएं।” इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से कानून अपने हाथ में न लेने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की अपील की।


    फाल्टा में दोबारा चुनाव क्यों?

    चुनाव आयोग ने फाल्टा में 29 अप्रैल को हुए मतदान को ईवीएम (EVM) से छेड़छाड़ और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों के बाद रद्द कर दिया था।

    भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अभिषेक बनर्जी को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ (Leaps and Bounds) कंपनी से जुड़ी संपत्तियों की फाइलें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कोलकाता नगर निगम से फाइलें मांगी थीं। अब मेरे पास दक्षिण 24 परगना जिले के आमताला में एक आलीशान दफ्तर सहित इस कंपनी की 24 संपत्तियों की पूरी सूची और विवरण है। बहुत जल्द इन सभी संपत्तियों के खिलाफ गहन जांच शुरू की जाएगी।”


    5 साल पुराने मामले भी खुलेंगे

    चुनाव के बाद डर के मारे पलायन कर चुके लोगों की वापसी को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी, लेकिन यह सशर्त होगी। उन्होंने कहा, “2021 की चुनाव बाद हुई हिंसा में भाजपा के 57 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी और 12,500 एफआईआर दर्ज की गई थीं। यदि इन फरार लोगों में से किसी का भी नाम उन एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज है, तो उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हम उन्हें बालों से घसीटकर जेल की सलाखों के पीछे भेजेंगे।”

    मुख्यमंत्री ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भले ही राजनीतिक अपराध 5 साल या उससे अधिक पुराने क्यों न हों, उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कर अपराधियों को तुरंत जेल भेजा जाए।


    धार्मिक भावनाओं का सम्मान

    अक्टूबर 2025 में दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में मां काली की खंडित मूर्ति को पुलिस द्वारा कैदी वैन में रखने के विवाद का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा, “जिस पुलिस अधिकारी ने मां काली की मूर्ति को जेल वैन के अंदर रखा, उसके लिए बंगाल में कोई जगह नहीं है। हिंदू देवी-देवताओं के अपमान और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सभी पुलिस फाइलें दोबारा खोली जाएंगी।”


    विशेष विकास पैकेज का एलान

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा की जनता के लिए भाजपा के चुनावी घोषणा-पत्र के वादों से अलग एक विशेष विकास पैकेज देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें सत्ता की कुर्सी सिर्फ बैठने के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए सौंपी है और वे राज्य में न्याय का शासन स्थापित करके रहेंगे।