Author: bharati

  • राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती

    राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं के मामले ने जांच एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र करना है, क्योंकि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप सीमित अवधि का ही है। जानकारी के अनुसार, सिस्टम में केवल लगभग 45 दिन का ही रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे पुराने समय की गतिविधियों की पुष्टि कर पाना बेहद कठिन हो गया है।

    जांच में सामने आया है कि उपलब्ध फुटेज में कुछ जगहों पर छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है। इसी कारण अब जांच मुख्य रूप से फोरेंसिक विश्लेषण, कर्मचारियों के बयान और पूछताछ में सामने आ रहे तथ्यों पर केंद्रित हो गई है। एसआईटी लगातार संदिग्ध कर्मचारियों और संबंधित पदाधिकारियों से अलग अलग पूछताछ कर रही है ताकि घटनाक्रम की परतें खोली जा सकें।

    राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि कुछ महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट की गई थी। हालांकि तकनीकी सीमाओं और बैकअप उपलब्ध न होने के कारण इन दावों की पुष्टि करना कठिन साबित हो रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि हाल के 45 दिनों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसके साक्ष्य मिलने की संभावना अधिक है, लेकिन उससे पहले की घटनाओं को प्रमाणित करना चुनौतीपूर्ण है।

    सूत्रों के अनुसार, जांच में अब तक पूछताछ के दौरान कई विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। कुछ संदिग्धों ने लंबे समय से वित्तीय हेरफेर की बात स्वीकार करने के संकेत दिए हैं, जिससे जांच को एक नई दिशा मिली है। हालांकि यह स्पष्ट करना अभी बाकी है कि कथित गड़बड़ी कब से और किस स्तर पर चल रही थी।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित रूप से नकदी और अन्य चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। लेकिन बिना मजबूत डिजिटल साक्ष्य के केवल बयानों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसी वजह से एसआईटी का फोकस अब तकनीकी जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और क्रॉस वेरिफिकेशन पर बढ़ गया है।

    पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीमित सीसीटीवी डेटा और विवादित आरोपों के बीच वास्तविक सच्चाई को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीद है कि नए तथ्य सामने आएंगे, जो पूरे प्रकरण की परतें खोल सकते हैं।

  • मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धियां गिनाते हुए खट्टर ने सराहा मध्य प्रदेश, इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर को बताया क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का गेम चेंज

    मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धियां गिनाते हुए खट्टर ने सराहा मध्य प्रदेश, इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर को बताया क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का गेम चेंज

     मध्य प्रदेश: में अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे मालवा क्षेत्र के भविष्य को बदलने वाली परियोजना बताया है। भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि राज्य आज विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समान प्राथमिकता देकर आगे बढ़ रहा है, जो देश के समग्र विकास मॉडल का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    कार्यक्रम के दौरान खट्टर ने कहा कि इंदौर और उज्जैन केवल दो शहर नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख केंद्र हैं। इंदौर जहां उद्योग, व्यापार और रोजगार का प्रमुख हब है, वहीं उज्जैन देश की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में दोनों शहरों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली यह परियोजना क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि लगभग 48 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर यात्रा समय कम करने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण उद्योगों, निवेशकों और पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप नए रोजगार अवसरों का सृजन होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास का आधार बनने की क्षमता रखती है।

    केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहरी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, शहरी सुविधाओं और आधुनिक परिवहन नेटवर्क के विकास से मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    अपने संबोधन में खट्टर ने उज्जैन में हुए विकास कार्यों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों ने शहर को नई पहचान दी है। आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं होता, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया जिसमें विकास और विरासत को साथ लेकर चलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण के साथ-साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के तहत देशभर में कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं को विकसित किया गया है।

    अपने भाषण में उन्होंने केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सड़क, रेल, आवास, पेयजल, बिजली और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लाखों परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार देखने को मिला है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए खट्टर ने आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं और देश के कई क्षेत्रों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार जिन इलाकों में कभी विकास की पहुंच सीमित थी, वहां अब बुनियादी सुविधाओं और निवेश के अवसरों का विस्तार हो रहा है।

    कार्यक्रम में विभिन्न शहरी विकास और आवास योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए। इस अवसर पर अधोसंरचना और शहरी विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं का उल्लेख किया गया। खट्टर ने विश्वास व्यक्त किया कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर आने वाले वर्षों में मालवा क्षेत्र की आर्थिक प्रगति, धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक विस्तार का प्रमुख आधार बनेगा तथा मध्य प्रदेश को तेज विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • शनिवार का महत्व और शनिदेव की, निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की कथा

    शनिवार का महत्व और शनिदेव की, निष्पक्ष न्याय व्यवस्था की कथा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्म फल के अधिपति के रूप में जाना जाता है। शिव पुराण और स्कंद पुराण में उनका वर्णन अत्यंत विस्तार से मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार शनिदेव हर प्राणी को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वाले को सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है जबकि बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। शनिदेव का यह न्याय किसी भेदभाव पर आधारित नहीं होता बल्कि पूर्ण रूप से निष्पक्ष होता है। यही कारण है कि उन्हें ब्रह्मांड का न्यायाधीश कहा जाता है।

    कथा के अनुसार शनिदेव का जन्म सूर्यदेव और माता छाया के घर हुआ था। उनका रंग श्याम वर्ण का था। जन्म के समय ही उनका तेज और गंभीर स्वरूप सभी को प्रभावित करता था। लेकिन सूर्यदेव ने उनके रंग को देखकर माता छाया के चरित्र पर संदेह कर लिया। इससे माता छाया अत्यंत दुखी हुईं और उन्होंने कठोर तप और पीड़ा के बाद सूर्यदेव को श्राप दिया। इस घटना से शनिदेव का मन व्यथित हो गया और उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या प्रारंभ की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें विशेष वरदान दिया। इसी वरदान के कारण शनिदेव को नवग्रहों में सर्वोच्च न्याय करने का अधिकार प्राप्त हुआ।

    इसके बाद शनिदेव को कर्म फल देने की शक्ति प्राप्त हुई। वे सभी जीवों के जीवन में उनके कर्मों के अनुसार परिणाम निर्धारित करते हैं। जब किसी व्यक्ति के जीवन में साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव आता है तब उसके जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। साढ़ेसाती का समय लगभग साढ़े सात वर्ष का होता है जबकि ढैय्या का समय ढाई वर्ष का होता है। इस अवधि में व्यक्ति को अपने कर्मों का सामना करना पड़ता है। यह समय केवल दंड नहीं बल्कि आत्म सुधार का अवसर भी माना जाता है।

    पुराणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि जब अधर्म बढ़ता है तब शनिदेव अपनी वक्र दृष्टि से बड़े से बड़े शक्तिशाली व्यक्तियों को भी उनके कर्मों का फल देते हैं। रावण जैसे अहंकारी शासक और सत्यनिष्ठा के प्रतीक राजा हरिश्चंद्र भी अपने कर्मों के प्रभाव से अछूते नहीं रहे। यह कथाएं यह संदेश देती हैं कि कर्म का सिद्धांत सर्वोपरि है और समय आने पर हर किसी को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है।

    शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए सरल उपाय बताए गए हैं। शनिवार के दिन व्रत रखना और शनि चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही गरीबों की सेवा करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शनिदेव को प्रसन्न करता है। सरसों का तेल काले तिल काली उड़द और वस्त्रों का दान विशेष रूप से शुभ माना गया है। छाया दान का महत्व भी बताया गया है जिसमें सरसों के तेल में अपना प्रतिबिंब देखकर दान किया जाता है। शनिदेव का संदेश यही है कि जीवन में कर्म ही सबसे बड़ा सत्य है और न्याय समय के साथ अवश्य मिलता है।

  • महासागर के भीतर मंडरा रही बड़ी तबाही की चेतावनी, AMOC करंट के कमजोर होने से बढ़ा खतरा

    महासागर के भीतर मंडरा रही बड़ी तबाही की चेतावनी, AMOC करंट के कमजोर होने से बढ़ा खतरा


    नई दिल्ली । धरती पर जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर जंगलों की आग, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ते समुद्र स्तर की तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा अदृश्य खतरा तेजी से बढ़ रहा है जो पूरी दुनिया के मौसम चक्र को बदल सकता है। यह खतरा अटलांटिक महासागर की गहराइयों में बहने वाली विशाल समुद्री धारा AMOC यानी अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन से जुड़ा है, जिसे धरती की जलवायु प्रणाली की रीढ़ भी माना जाता है।

    AMOC एक ऐसा महासागरीय तंत्र है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म पानी को उत्तरी अटलांटिक और यूरोप की ओर ले जाता है। वहां यह पानी ठंडा होकर भारी हो जाता है और हजारों मीटर गहराई में जाकर वापस दक्षिण दिशा की ओर बहता है। यह निरंतर प्रक्रिया सदियों से वैश्विक तापमान, समुद्री लवणता और मौसम संतुलन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती रही है।

    हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों और उपग्रह डेटा संकेतों के अनुसार यह शक्तिशाली समुद्री धारा अब धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह प्रणाली और अधिक धीमी पड़ गई या पूरी तरह असंतुलित हो गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसके कमजोर होने से उत्तरी यूरोप में सर्दियां और अधिक कठोर हो सकती हैं, जहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे तक गिर सकता है। वहीं दूसरी ओर, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा अमेरिका के पूर्वी तट पर समुद्र स्तर बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

    इस पूरे मुद्दे की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह खतरा दिखाई नहीं देता। यह समुद्र की हजारों मीटर गहराई में बेहद धीमी गति से काम करता है, इसलिए इसका कोई स्पष्ट दृश्य प्रमाण नहीं होता जिसे कैमरे में कैद कर दिखाया जा सके। इसी कारण यह विषय आम जनता की नजरों से अक्सर दूर रह जाता है, जबकि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर बेहद बड़ा हो सकता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि आधुनिक जलवायु संकटों में सबसे बड़ी समस्या यही है कि कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अदृश्य हैं। वे न तो तूफान की तरह दिखाई देती हैं और न ही आग की तरह तुरंत महसूस होती हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय में कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है।

    इस स्थिति की तुलना अक्सर महासागरों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण से की जाती है, जो आंखों से दिखाई नहीं देता लेकिन पूरे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है। इसी तरह AMOC भी एक ऐसा सिस्टम है जिसकी गिरावट धीरे-धीरे लेकिन गहरे प्रभाव के साथ सामने आ सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जलवायु संकेतों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े संकट को जन्म दे सकता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर इस पर लगातार निगरानी और शोध बेहद जरूरी है ताकि समय रहते इसके प्रभावों को समझा और नियंत्रित किया जा सके।

  • हैदराबाद कोर्ट का बड़ा आदेश, अल्लू अर्जुन को संध्या थिएटर केस में करना होगा पेश

    हैदराबाद कोर्ट का बड़ा आदेश, अल्लू अर्जुन को संध्या थिएटर केस में करना होगा पेश


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन एक बार फिर कानूनी मुश्किलों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट ने उन्हें संध्या थिएटर भगदड़ मामले में समन जारी करते हुए 22 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला फिल्म पुष्पा 2 की स्क्रीनिंग के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे से जुड़ा है जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी और उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था।

    जानकारी के अनुसार चिक्कड़पल्ली पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में अल्लू अर्जुन को आरोपी नंबर 11 बनाया गया है। इस मामले में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है जबकि संध्या थिएटर के प्रबंधन से जुड़े 10 लोगों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया है। अदालत ने सभी आरोपियों को समन जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    यह घटना 4 दिसंबर 2024 की है जब हैदराबाद के संध्या थिएटर में पुष्पा 2 के स्पेशल शो के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई जिसमें रेवती नाम की महिला की मौत हो गई जबकि उनका बेटा श्रीतेज गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा उस वक्त चर्चा में आया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे।

    इस मामले में अल्लू अर्जुन की लीगल टीम ने बयान जारी करते हुए कहा है कि अदालत ने उन्हें सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है और वे आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। टीम ने कहा कि वे इस मामले में आवश्यक जानकारी समय पर साझा करेंगे।

    घटना के बाद अल्लू अर्जुन के परिवार ने पीड़ित परिवार से मुलाकात भी की थी। उनके पिता अल्लू अरविंद और पत्नी स्नेहा रेड्डी ने अस्पताल जाकर घायल श्रीतेज का हाल जाना था और परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने श्रीतेज की बहन की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की भी बात कही थी।

    मौजूदा समय में घायल श्रीतेज का इलाज और पुनर्वास जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई महीनों तक आईसीयू में रहने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई लेकिन अभी भी उनका न्यूरोलॉजिकल इलाज और थेरेपी चल रही है। परिवार के अनुसार उनकी हालत में बहुत धीरे सुधार हो रहा है और वह अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं।

    इस पूरे मामले ने फिल्म इंडस्ट्री में भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें 22 जून को होने वाली अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं जहां आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

  • अक्षय–फराह की मस्ती भरी बातचीत, सेट के पुराने राज और हेलिकॉप्टर वाले किस्से का खुलासा

    अक्षय–फराह की मस्ती भरी बातचीत, सेट के पुराने राज और हेलिकॉप्टर वाले किस्से का खुलासा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और फिल्ममेकर फराह खान जब भी साथ नजर आते हैं माहौल हल्का-फुल्का और हंसी-मजाक से भर जाता है। हाल ही में दोनों एक बार फिर नेटफ्लिक्स इंडिया के एक इंटरव्यू में साथ नजर आए जहां उन्होंने अपनी फिल्मों और पुराने शूटिंग अनुभवों को याद करते हुए कई मजेदार किस्से साझा किए। बातचीत के दौरान दोनों के बीच हंसी-मजाक और हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली जिसने फैंस का खूब मनोरंजन किया।

    इंटरव्यू में अक्षय कुमार ने फराह खान के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि वह डांस कॉम्पटीशन में हिस्सा लेती थीं और धीरे-धीरे इंडस्ट्री की सबसे सफल कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर बन गईं। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे की टांग खींचते हुए पुराने दिनों के किस्से भी साझा किए।

    अक्षय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह फराह को लंबे समय से जानते हैं और उन्होंने उनके संघर्ष के दिनों को भी देखा है। वहीं फराह ने तुरंत उनकी बात काटते हुए अपनी कमाई और शुरुआती दिनों की जानकारी को लेकर हंसी-मजाक किया। बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की पर्सनल लाइफ को लेकर भी चुटकी ली जिससे माहौल और भी मजेदार हो गया।

    इसी बातचीत के दौरान अक्षय कुमार ने फिल्म ओम शांति ओम के एक कैमियो सीन का जिक्र किया जिसे फराह खान ने निर्देशित किया था। अक्षय ने उस सीन को याद करते हुए हंसते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान कुछ ऐसे एंगल और विजुअल्स शामिल किए गए थे जिन्हें लेकर वह सहज नहीं थे। मजाकिया अंदाज में उन्होंने फराह को “वल्गर” भी कह दिया जिस पर सेट पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े।

    फराह खान ने भी तुरंत जवाब देते हुए इस पूरे किस्से को मजाक में लिया और अपनी स्टाइल में अक्षय की टांग खींची। उन्होंने शूटिंग के दौरान हुई बातचीत और सीनिंग से जुड़े कई मजेदार अनुभव साझा किए जिससे यह साफ हो गया कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती और सहजता है।

    इसी दौरान फिल्म तीस मार खान के शूटिंग दिनों का भी जिक्र हुआ। फराह ने बताया कि शूटिंग लोकेशन दूर होने के बावजूद अक्षय कुमार हर दिन समय पर पहुंचते थे और कई बार वह विशेष व्यवस्था के तहत हेलिकॉप्टर से भी ट्रैवल करते थे। इस खुलासे पर वहां मौजूद अभिनेता राजपाल यादव भी हैरान रह गए।

    फराह ने मजाक में यह भी कहा कि उन्होंने पहली बार किसी अभिनेता को शूटिंग के लिए हेलिकॉप्टर को टैक्सी की तरह इस्तेमाल करते देखा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अक्षय हमेशा अपने काम के प्रति बेहद अनुशासित रहते थे और समय पर सेट पर पहुंचते थे।

    अक्षय कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस फिल्म के वे खुद भी प्रोड्यूसर थे इसलिए शूटिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका भी थी। फराह ने हंसते हुए कहा कि फिल्म से सबसे ज्यादा फायदा भी उन्हीं को हुआ।

    पूरा इंटरव्यू इस बात का उदाहरण बन गया कि कैसे बॉलीवुड सितारे अपने पुराने अनुभवों को हल्के-फुल्के अंदाज में साझा कर सकते हैं और दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ उनके पीछे की कहानियों से भी जोड़ सकते हैं।

  • ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ

    ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ


    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। उन्होंने पीएम मोदी को महान नेता और बहुत सख्त इंसान बताते हुए उनकी नेतृत्व शैली और राजनीतिक क्षमता की प्रशंसा की। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें वैश्विक नेतृत्व, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के चुनिंदा नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हैं जिनकी वे सबसे अधिक इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का लंबे समय से सत्ता में बने रहना और भारत जैसे विशाल लोकतंत्र का नेतृत्व करना उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में स्थिर नेतृत्व बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन पीएम मोदी ने यह काम सफलतापूर्वक किया है।

    ट्रंप ने आगे कहा कि पीएम मोदी बाहर से शांत स्वभाव के दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वह बेहद दृढ़ और सख्त निर्णय लेने वाले नेता हैं। उनके अनुसार, यही संयोजन उन्हें एक प्रभावशाली वैश्विक नेता बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व के उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए बुद्धिमत्ता और कठोर निर्णय क्षमता दोनों जरूरी हैं, और मोदी में यह दोनों गुण मौजूद हैं।

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों को इस विकास का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी अक्सर शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, जो उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाता है।

    इंटरव्यू में ट्रंप ने वैश्विक नेताओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ की और दोनों नेताओं को मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बताया। हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से पीएम मोदी को ऐसे नेताओं में शामिल किया जिनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे अधिक पहचान और सम्मान है।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं और लंबे समय से देश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है।

    भारत और अमेरिका के संबंधों में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे बड़े कार्यक्रमों ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों को भी विशेष पहचान दी थी। ट्रंप की यह ताजा टिप्पणी एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ले आई है।

  • मई में बीएफएसआई फंड्स ने निवेशकों को दिया सबसे बेहतर रिटर्न, फिर भी लार्ज-कैप योजनाओं में बरकरार रहा एसआईपी निवेशकों का मजबूत भरोसा

    मई में बीएफएसआई फंड्स ने निवेशकों को दिया सबसे बेहतर रिटर्न, फिर भी लार्ज-कैप योजनाओं में बरकरार रहा एसआईपी निवेशकों का मजबूत भरोसा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में मई महीने के दौरान निवेशकों के व्यवहार और विभिन्न फंड श्रेणियों के प्रदर्शन ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। जहां कुछ विशेष थीमैटिक और माइक्रो-कैप फंड्स ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, वहीं निवेश का सबसे बड़ा प्रवाह अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर माने जाने वाले लार्ज-कैप फंड्स की ओर जारी रहा। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि निवेशक बेहतर रिटर्न की तलाश के साथ-साथ जोखिम प्रबंधन को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

    मई के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र पर आधारित बीएफएसआई थीमैटिक फंड्स ने शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी ने लगभग 5.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जिससे यह महीने की सबसे चर्चित निवेश श्रेणियों में शामिल रही। इन फंड्स में बड़ी संख्या में प्रमुख बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर शामिल होने के कारण निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न प्राप्त हुआ। बेहतर प्रदर्शन के चलते इस श्रेणी में उल्लेखनीय निवेश भी दर्ज किया गया।

    इसी अवधि में माइक्रो-कैप फंड्स ने लगभग 5.7 प्रतिशत का रिटर्न देकर सभी प्रमुख श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि रिटर्न के मामले में यह सबसे आगे रहे, लेकिन निवेशकों की ओर से इन फंड्स में अपेक्षाकृत सीमित निवेश देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो-कैप कंपनियों में जोखिम अधिक होने के कारण अधिकांश निवेशक अभी भी सावधानी बरत रहे हैं।

    स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। स्मॉल-कैप योजनाओं ने निवेशकों को संतोषजनक रिटर्न दिया और इनमें अच्छा निवेश प्रवाह बना रहा। वहीं मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, हालांकि रिटर्न अपेक्षाकृत सीमित रहा। यह दर्शाता है कि निवेशक मध्यम और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को देखते हुए इन श्रेणियों में अपनी हिस्सेदारी बनाए हुए हैं।

    दिलचस्प तथ्य यह रहा कि मई में सबसे कम रिटर्न देने वाली प्रमुख श्रेणी लार्ज-कैप फंड्स रही, लेकिन निवेश के मामले में यही वर्ग सबसे आगे रहा। इन फंड्स में हजारों करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो अन्य कई श्रेणियों की तुलना में कहीं अधिक था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के माध्यम से होने वाला नियमित निवेश है, जो बड़ी और स्थापित कंपनियों पर आधारित योजनाओं में लगातार प्रवाहित होता रहता है।

    फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। विभिन्न बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश की स्वतंत्रता के कारण ये योजनाएं निवेशकों को विविधीकरण का लाभ देती हैं। इसी वजह से इन फंड्स में भी उल्लेखनीय निवेश दर्ज किया गया और इनका प्रदर्शन स्थिर बना रहा।

    मई के दौरान एसआईपी निवेश ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। देशभर के करोड़ों निवेशकों ने नियमित निवेश के माध्यम से बाजार में अपनी भागीदारी बनाए रखी। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो यह संकेत देती है कि भारतीय निवेशक अब दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के लिए व्यवस्थित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति आधार भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है। बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बड़ी मात्रा में खरीदारी कर बाजार को स्थिरता प्रदान की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी अब भारतीय शेयर बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेशकों का ध्यान प्रदर्शन और स्थिरता दोनों पर केंद्रित रहेगा। ऐसे में लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और मजबूत सेक्टोरल फंड्स निवेशकों की पसंद बने रह सकते हैं, जबकि उच्च जोखिम लेने वाले निवेशक माइक्रो और स्मॉल-कैप अवसरों पर भी नजर बनाए रखेंगे।

  • स्विट्जरलैंड बैठक टली, ईरान–अमेरिका के बीच नई बातचीत की तैयारी तेज

    स्विट्जरलैंड बैठक टली, ईरान–अमेरिका के बीच नई बातचीत की तैयारी तेज


    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है जहां ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता फिलहाल टल गई है। स्विट्जरलैंड में होने वाली दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक को स्थगित कर दिया गया है हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी रुकी नहीं है और जल्द ही नई बैठक की योजना पर काम चल रहा है।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार अगले चरण की बातचीत को लेकर मध्यस्थों के माध्यम से लगातार परामर्श जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए नई तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का कहना है कि प्रस्तावित समझौते की आगे की प्रक्रिया कुछ महत्वपूर्ण शर्तों पर निर्भर करती है। इनमें क्षेत्रीय संघर्षों का अंत सैन्य गतिविधियों में कमी और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि तेल निर्यात और फ्रीज की गई संपत्तियों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा आवश्यक है।

    बयान में यह भी संकेत दिया गया है कि हालिया बातचीत का उद्देश्य किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करना था लेकिन कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बैठक को फिलहाल आगे बढ़ाना पड़ा।

    ईरानी पक्ष का दावा है कि हाल के दिनों में क्षेत्रीय स्तर पर कुछ अहम समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए हैं जिसके बाद मौजूदा बैठक की आवश्यकता पर दोबारा विचार किया गया है। हालांकि कूटनीतिक चैनल सक्रिय बने हुए हैं और बातचीत की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह खुली हैं।

    इस बीच क्षेत्रीय तनाव भी चर्चा में बना हुआ है जहां ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पिछले कुछ समय से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में इस नई वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत आगे बढ़ती है तो यह न सिर्फ ईरान–अमेरिका संबंधों के लिए बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

    अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय शेयर बाजार को सप्ताहभर सकारात्मक दिशा प्रदान की। निवेशकों के बीच बढ़े भरोसे का असर यह रहा कि प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का प्रदर्शन निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता में राहत मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसी का लाभ भारतीय बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की।

    सप्ताह के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद पूरे सप्ताह का रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में कायम है।

    कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में गिरावट का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करती हैं। भारत के लिए यह स्थिति महंगाई नियंत्रण, व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। इसी कारण निवेशकों ने कई क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई।

    सप्ताह के दौरान भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति बेहतर होने से विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण में सुधार देखा गया। वित्तीय बाजारों में मुद्रा की स्थिरता को निवेश के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, रियल एस्टेट, फार्मा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस क्षेत्र ने सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। मजबूत ऑर्डर बुक, दीर्घकालिक विकास संभावनाएं और सरकारी नीतिगत समर्थन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

    इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग को लेकर जारी चिंताओं और कमजोर कारोबारी अनुमानों के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे संबंधित सूचकांक सप्ताह के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे सतर्क रुख के कारण ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारत में भी नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण फिलहाल संतुलित और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है।

    आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण मांग से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की सतर्क निगाह बनी रहेगी।