Author: bharati

  • दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो अब सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि घर से गंतव्य तक की पूरी यात्रा का समाधान बनने जा रही है. यात्रियों की सुविधा और प्रदूषण कम करने के लक्ष्य के साथ दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इंटीग्रेटेड लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत मेट्रो स्टेशनों से आगे की यात्रा अब और आसान, किफायती और डिजिटल होगी.

    दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ बन चुकी है. रोजाना लाखों यात्री तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन मेट्रो स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक पहुंचना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है. इसी कमी को दूर करने के लिए DMRC ने संगठित लास्ट माइल सेवाओं को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की पहल की है.

    सहकार टैक्सी के साथ DMRC की साझेदारी
    DMRC ने सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. सहकार टैक्सी एक मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्था है जो भारत टैक्सी नामक मोबिलिटी प्लेटफॉर्म संचालित करती है. यह प्लेटफॉर्म भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की पहल है और पारदर्शी एवं न्यायसंगत सेवाओं को बढ़ावा देता है.

    बाइक टैक्सी, ऑटो और कैब की मिलेगी सुविधा
    इस साझेदारी के तहत मेट्रो यात्रियों को बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा और कैब सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. यात्री दूरी, समय और किराये के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे. इससे अनऑर्गेनाइज्ड और असुरक्षित साधनों पर निर्भरता कम होगी.

    10 मेट्रो स्टेशनों से होगी शुरुआत
    DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि, पहले चरण में यह लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा 10 चिन्हित मेट्रो स्टेशनों से शुरू की जाएगी. पायलट प्रोजेक्ट के तहत मिलेनियम सिटी सेंटर और बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर 31 जनवरी 2026 तक विशेष बाइक टैक्सी सेवाएं शुरू होंगी. इस दौरान यात्रियों की प्रतिक्रिया और संचालन की व्यवहारिकता का आकलन किया जाएगा.

    भारत टैक्सी ऐप और सारथी ऐप होंगे इंटीग्रेट
    इस पहल की सबसे बड़ी खासियत डिजिटल इंटीग्रेशन है. भारत टैक्सी मोबाइल ऐप को DMRC के सारथी ऐप से जोड़ा जाएगा. इसके बाद यात्री एक ही प्लेटफॉर्म से मेट्रो और लास्ट माइल दोनों सेवाओं की प्लानिंग और बुकिंग कर सकेंगे. ऐप इंटीग्रेशन से यात्री उपलब्ध वाहनों की जानकारी, अनुमानित किराया और रियल टाइम ट्रैकिंग देख सकेंगे. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और इंतजार का समय घटेगा. यात्रा का अनुभव ज्यादा सहज और भरोसेमंद होगा.

    किराया रहेगा किफायती और नियंत्रित
    इस योजना के तहत किराये बाजार दरों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रहेंगे. पीक ऑवर में मांग के अनुसार किराया बढ़ सकता है, लेकिन इसकी एक सीमा तय होगी. इसका उद्देश्य यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न डालना है.
    यात्रियों को जागरूक करने के लिए मेट्रो स्टेशनों पर साइनएज लगाए जाएंगे. इनमें बुकिंग प्रक्रिया, सेवा उपलब्धता और पिकअप पॉइंट की जानकारी होगी. इससे यात्रियों को फैसले लेने में आसानी होगी.

    यह पहल DMRC की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है. बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी से निजी वाहनों का इस्तेमाल घटेगा. इससे ट्रैफिक और वायु प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है.

    पैसेंजर सेंट्रिक और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की ओर कदम
    DMRC का यह प्रयास पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और आकर्षक बनाएगा. निजी वाहनों से मेट्रो की ओर यात्रियों का रुझान बढ़ेगा. यह योजना सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल इंडिया और सहकारी विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती देगी.

  • सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..

    सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही कुछ गरमागरम और मीठा खाने की इच्छा अपने आप बढ़ जाती है। ऐसे में अगर स्वाद के साथ सेहत भी मिले, तो वह डेज़र्ट और भी खास बन जाता है। खसखस का हलवा एक ऐसा ही पारंपरिक व्यंजन है, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को भीतर से गर्म रखने और ताकत देने में भी मदद करता है। यह हलवा खासतौर पर उत्तर भारत और आयुर्वेदिक परंपराओं में सर्दियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

    आमतौर पर सर्दियों में गाजर का हलवा या मूंग दाल का हलवा ज्यादा बनाया जाता है, लेकिन खसखस से बना हलवा अपनी अलग खुशबू, मलाईदार टेक्सचर और पोषण गुणों के कारण खास पहचान रखता है। खसखस कैल्शियम, आयरन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है, जो ठंड के मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देता है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है।खसखस का हलवा बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। आधा कप खसखस, एक कप दूध, 3 से 4 टेबलस्पून देसी घी, आधा कप चीनी या गुड़, थोड़ी सी इलायची और पसंद के ड्राई फ्रूट्स से यह स्वादिष्ट हलवा तैयार हो जाता है। सबसे पहले खसखस को अच्छे से धोकर 3–4 घंटे या रातभर के लिए भिगो देना चाहिए। इससे खसखस नरम हो जाता है और पीसने में आसानी होती है। भीगने के बाद थोड़ा दूध डालकर इसे मिक्सर में बारीक पीस लें, ताकि पेस्ट एकदम स्मूद बन जाए।

    अब कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें पिसा हुआ खसखस डालें। मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए इसे भूनें। कुछ ही देर में इसमें से खुशबू आने लगेगी और घी अलग दिखाई देने लगेगा। इसके बाद इसमें दूध डालें और धीमी आंच पर पकाते रहें। जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें चीनी या गुड़ डालें और अच्छी तरह मिलाएं। आखिर में इलायची पाउडर और कटे हुए काजू, बादाम व किशमिश डालकर 2–3 मिनट तक और पकाएं। बस तैयार है गरमागरम खसखस का हलवा।

    सेहत के लिहाज से खसखस का हलवा सर्दियों में बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है, कमजोरी और थकान दूर करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और पाचन तंत्र को बेहतर करता है। साथ ही यह तुरंत ऊर्जा देने वाला पौष्टिक डेज़र्ट भी है।अगर आप रिफाइंड चीनी से परहेज करते हैं, तो इस हलवे में गुड़ या खजूर का पेस्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हलवा और भी हेल्दी बन जाता है। सर्दियों में परिवार के साथ बैठकर खसखस के हलवे का आनंद लेना स्वाद और सेहत-दोनों का बेहतरीन संगम साबित हो सकता है।

  • पहली फिल्म से बने दिलों की धड़कन, फिर फ्लॉप्स ने रोकी रफ्तार, लेकिन इस फिल्म के बाद छा गए सिद्धार्थ मल्होत्रा

    पहली फिल्म से बने दिलों की धड़कन, फिर फ्लॉप्स ने रोकी रफ्तार, लेकिन इस फिल्म के बाद छा गए सिद्धार्थ मल्होत्रा

    नई दिल्ली बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से जबरदस्त पहचान बना ली, लेकिन इंडस्ट्री में टिके रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। कुछ कलाकार लगातार हिट्स देकर आगे बढ़ते हैं, तो कुछ को अपने करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक अभिनेता की, जिसने डेब्यू से ही लाखों दिलों की धड़कन बनकर एंट्री की, लेकिन इसके बाद लगातार फ्लॉप फिल्मों के चलते उनका करियर सवालों के घेरे में आ गया।

    यह अभिनेता कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ मल्होत्रा हैं, जो आज 16 जनवरी को अपना 41वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जानते हैं उनके फिल्मी सफर, संघर्ष और दमदार कमबैक की कहानी।

    पर्दे के पीछे से कैमरे के सामने तक का सफर

    सिद्धार्थ मल्होत्रा ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म ‘माई नेम इज खान’ से की, जहां उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। कैमरे के पीछे रहकर सिनेमा की बारीकियां सीखने के बाद सिद्धार्थ ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।

    साल 2012 उनके करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ, जब करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से उन्होंने बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में एंट्री की। इस फिल्म से आलिया भट्ट और वरुण धवन ने भी अपने करियर की शुरुआत की थी। सिद्धार्थ का स्टाइल, लुक और स्क्रीन प्रेजेंस देखते ही देखते उन्हें यूथ आइकन बना गया।

    सफलता के बाद आया फ्लॉप फिल्मों का दौर

    ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के बाद सिद्धार्थ साल 2014 में रोमांटिक ड्रामा ‘हंसी तो फंसी’ में नजर आए। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर औसत रही, लेकिन इसके गाने काफी लोकप्रिय हुए। इसके बाद आई ‘एक विलेन’, जिसने सिद्धार्थ के करियर को नई उड़ान दी और उन्हें इंडस्ट्री के भरोसेमंद अभिनेताओं की सूची में शामिल कर दिया।

    हालांकि इस सफलता के बाद उनका करियर फिर डगमगा गया। ‘ब्रदर्स’, ‘बार-बार देखो’, ‘ए जेंटलमैन’, ‘इत्तेफाक’, ‘अय्यारी’, ‘जबरिया जोड़ी’ और ‘मरजावां’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर निराश किया। लगातार फ्लॉप फिल्मों के चलते सिद्धार्थ का करियर एक बार फिर संकट में नजर आने लगा।

    ‘शेरशाह’ बनकर बदली किस्मत

    लगातार असफलताओं के बाद साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘शेरशाह’ सिद्धार्थ मल्होत्रा के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली।

    ‘शेरशाह’ न सिर्फ उस साल की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में शामिल रही, बल्कि इसने सिद्धार्थ को एक गंभीर और दमदार अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया। फिल्म में कियारा आडवाणी के साथ उनकी केमिस्ट्री को भी खूब पसंद किया गया।

    रील से रियल लाइफ तक का सफर

    ‘शेरशाह’ के दौरान सिद्धार्थ और कियारा की नजदीकियां बढ़ीं, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गईं। लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने साल 2023 में शादी कर अपने रिश्ते को नया नाम दिया।

    आज सिद्धार्थ मल्होत्रा न सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं, बल्कि संघर्ष के बाद कमबैक करने वाले कलाकारों की सूची में भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

  • अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    नई दिल्ली अकाल तख्त के सामने पेश होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोपों को लेकर उन्होंने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका अकाल तख्त से किसी भी तरह का टकराव नहीं है और वे सिख संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं। सीएम मान ने बताया कि अब जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज की अगुवाई में पांच सिंह साहिबानों की बैठक होगी, जिसमें उनके जवाब पर विचार कर आगे का फैसला लिया जाएगा।

    फॉरेंसिक जांच के लिए तैयार: सीएम मान

    पेशी के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं। सीएम मान ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त के जत्थेदार को पूरी जानकारी दे दी है और कहा है कि वे हर तरह की फॉरेंसिक जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के कामकाज को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उन्होंने जत्थेदार साहिब के समक्ष रखा है।

    “जो भी फैसला होगा, मंजूर होगा”

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे अकाल तख्त के साथ टकराव की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और उनकी अकाल तख्त में पूर्ण आस्था है। सीएम मान ने दो टूक कहा कि तख्त की ओर से लिया गया हर फैसला उन्हें स्वीकार होगा।

    उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पंजाब सरकार धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    नई दिल्ली वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कदम काशी की आत्मा और उसकी परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    PM मोदी पर खरगे का तीखा हमला

    गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिरों और देवालयों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है। खरगे का आरोप है कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में जुटी है।

    तस्वीरें और वीडियो किए साझा

    खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बुलडोजर, टूटती मूर्तियां और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को सुरक्षित कर संग्रहालयों में क्यों नहीं रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा भक्तों के साथ धोखा करने का है?”

    मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व

    मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका ऐतिहासिक संबंध माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

    पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य

    मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके तहत घाट को चौड़ा करना, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सुविधाएं, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का उपयोग कर लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का दावा किया गया है।

    क्यों हो रहा है विवाद?

    इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखते हुए बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।

    वाराणसी जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

  • राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत राज्य तिलहन मिशन का गठन: मुख्य सचिव करेंगे अध्यक्षता


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन NMEO-OS के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य तिलहन मिशन का गठन किया गया है।समिति में कृषि उत्पादन आयुक्त सहकारिता, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण/ फूड प्रोसेंसिंग इंडस्ट्रीज, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर/ राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, आयुक्त/ संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, निदेशक भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इन्दौर म.प्र, प्रभारी अधिकारी नाबार्ड, समन्वयक स्टेट लेवल बैंकर समिति, तिलहन क्षेत्र में कार्यरत एफपीओ/ को-ऑपरेटिक्स के दो प्रतिनिधि प्रत्येक से एक , बीज एवं खाद्य तेल उत्पादक उद्योग से संबंधित दो प्रतिनिधिप्रत्येक से एक-एक , भारत सरकार, कृषि मंत्रालय द्वारा नामित अधिकारी संयुक्त सचिव स्तर सदस्य होंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास राज्य मिशन संचालक NMEO-OS को सदस्य-सचिव नामित किया गया हैं।

    राज्य तिलहन मिशन की बैठक का आयोजन कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन की अध्यक्षता में किया जा सकेगा। मिशन के दायित्व अंर्तगत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, मिशन में निहित समग्र नीति दिशा-निर्देशों के भीतर राज्य में मिशन कार्यान्वयन की समग्र निगरानी की जायेगी। राज्य को सौंपे गए क्षेत्र, उत्पादन, और उत्पादकता लक्ष्यों और इसकी निगरानी के आधार पर तिलहन की खेती और उत्पादन के लिए राज्य तिलहन कार्य योजना को अंतिम रूप देना , कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार को प्रस्तुत करने से पहले मिशन के लक्ष्यों और उद्देश्यों के अनुरूप संभावित और वार्षिक राज्य कार्य-योजना को अंतिम रूप देना, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को प्रस्तुत नियमित रिपोर्टों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर नजर रखकर राज्य स्तर पर मिशन की प्रगति की निगरानी की जायेगी।

    समिति द्वारा आवश्यक बुनियादी ढांचे इंफास्ट्रक्चर और कटाई के बाद प्रसंस्करण सुविधाओं आदि को विकसित करने के लिए राज्य स्तरीय वित्तीय संसाधन आवंटन की देखरेख करना, जिला मिशनों, मूल्य श्रृंखला भागीदारों और तकनीकी सहायता एजेंसियों के कामकाज और प्रगति की निगरानी करना और उनकी दक्षता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी करना और एस.ओ.पी निर्धारित करना, प्रमुख मिशन के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करने तथा इसे राज्य कृषि नीतियों और विकास योजनाओं के साथ जोडने के लिए संबंधित विभागों कृषि, सिंचाई वित्त. ग्रामीण विकास आदि के साथ समन्वय करके अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण सुनिश्चित करने के कार्य किए जा

  • अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    अपनी सांस्कृतिक अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में करें उपयोग : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रशिक्षणअधिकारियों को सशस्त्र सीमा बल के लिये केवल अधिकारी नहींबल्कि एक जिम्मेदार संवेदनशील और सजग राष्ट्र-प्रहरी के रूप में तैयार करने का समन्वित प्रयास है। प्रशिक्षण व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक-दूसरे के राज्य की संस्कृति विशेषताओं और विविधताओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। विविधता में एकता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अपने राज्य की विशिष्टताओं की अनुभूतियों और प्रशिक्षण के निर्देशों का देश हित में उपयोग कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण में योगदान दे। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल के प्रशिक्षु सहायक कमांडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्र के प्रतिष्ठित बल में चयन की बधाई और शुभकामनाएं दी। लोकभवन में आयोजित सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आप सभी उन सौभाग्यशाली लोगों में शामिल हैं जिन्हें सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल का हिस्सा बनकर माँ भारती की सेवा का अवसर मिला है। आपकी वर्दी केवल पहचान नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक है। इसी वर्दी के साये में देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। आप जब अपने परिवार से दूर सीमाओं पर तैनात होकर देश की रक्षा करते हैं तभी हर देशवासी चैन और शांति की नींद सो पाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कर्तव्यों का पालन करने वाले अधिकारी ही समाज में विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं। आप सभी निष्ठा समर्पण और साहस के साथ राष्ट्र की सेवा करें। सशस्त्र सीमा बल अकादमी भोपाल की गौरवशाली परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएं।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के समक्ष आंतरिक सुरक्षा सीमा प्रबंधन नक्सलवाद तस्करी साइबर अपराध और असामाजिक गतिविधियाँ जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियां है। राष्ट्र प्रहरी के रूप में आपके निर्णय और कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपनी प्रतिभा से सीमा सुरक्षा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक व्यावसायिक ज्ञान शारीरिक और मानसिक सक्रियता के नए मानक स्थापित करे। यह सुनिश्चित होना चाहिए कि असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर कठोरता से नियंत्रण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करें। उनके अनुभवों से सीखें और अपने ज्ञान को सहकर्मियों के साथ साझा भी करें।

    राज्यपाल श्री पटेल का एस.एस.बी. अकादमी भोपाल के निदेशक श्री बी.एस. जायसवाल ने पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। एस.एस.बी. अकादमी भोपाल निदेशक श्री जायसवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री अनुष्का मनियारा और श्री अनुराग भार्गव ने प्रशिक्षण में अनुभवों को साझा किया। कमांडेंट प्रशिक्षण श्रीमती सुवर्णा सजवाल ने आभार व्यक्त किया। कोर्स डायरेक्टर डिप्टी कमांडेंट प्रशिक्षण श्री रोहित शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। सौजन्य भेंट कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव लोकभवन और एस.एस.बी. के अधिकारी-कर्मचारी एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

  • अचानक आने वाली उदासी से कैसे पाएं छुटकारा ऋतिक रोशन ने बताया 90 सेकंड का साइंस

    अचानक आने वाली उदासी से कैसे पाएं छुटकारा ऋतिक रोशन ने बताया 90 सेकंड का साइंस


    नई दिल्ली /मुंबई-बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन न सिर्फ अपनी फिटनेस और फिल्मों के लिए जाने जाते हैं-बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मचिंतन जैसे विषयों पर भी खुलकर बात करते रहे हैं। इसी कड़ी में ऋतिक ने सोशल मीडिया पर एक गहरा और विचारोत्तेजक पोस्ट साझा किया है-जिसमें उन्होंने अचानक बिना किसी कारण आने वाली उदासी से निपटने का एक आसान लेकिन वैज्ञानिक तरीका बताया है। इसे उन्होंने 90 सेकंड का नियम कहा है।ऋतिक ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में करते हुए लिखा- कानूनी चेतावनी: बेमतलब की सुबह की बकवास। इसके बाद उन्होंने उस मानसिक स्थिति का जिक्र किया-जिससे लगभग हर इंसान कभी न कभी गुजरता है। उन्होंने लिखा कि कई बार जब सबकुछ ठीक चल रहा होता है-तभी अचानक दुनिया की नकारात्मकता सामने आने लगती है। अच्छी चीजें भी अपना दूसरा-नकारात्मक पहलू दिखाने लगती हैं और मन एक अजीब सी उदासी से घिर जाता है।

    ऋतिक ने बताया कि ऐसी स्थिति में हम अपने दिमाग से उस उदासी के कारण ढूंढने लगते हैं। हम तर्क गढ़ते हैं-थ्योरी बनाते हैं-समाधान सोचते हैं-लेकिन फिर भी उस बेवजह की उदासी से बाहर नहीं निकल पाते। यह भावना बिना किसी चेतावनी के हमें अपनी गिरफ्त में ले लेती है और पूरा दिन भारी लगने लगता है।अपने पोस्ट में अभिनेता ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह भी उसी वक्त अपनी भावनाओं को शब्दों में ढाल रहे थे। उन्होंने लिखा कि कैसे हम बड़े-बड़े शब्दों के जरिए अपनी उदासी को खूबसूरत या तार्किक बनाने की कोशिश करते हैं। ऋतिक ने इस प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया कि आज की दुनिया में कैसे बेमतलब चीजों को भी इस तरह पेश किया जाता है कि वे जरूरी और समझदारी भरी लगने लगती हैं।

    इसके बाद ऋतिक ने विज्ञान का हवाला देते हुए एक अहम बात साझा की। उन्होंने न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जिल बोल्टे टेलर का जिक्र करते हुए लिखा कि कोई भी भावना अपने शुद्ध रूप में सिर्फ 90 सेकंड तक ही रहती है। अगर हम उस भावना को बार-बार सोचकर जिंदा न रखें-तो वह या तो बदल जाती है या किसी दूसरी भावना में मिल जाती है। यानी-अगर हम खुद को 90 सेकंड तक संभाल लें-तो उदासी अपने आप कमजोर पड़ने लगती है।

    ऋतिक ने मजाकिया अंदाज में लिखा-इस पोस्ट को लिखने में मुझे 45 सेकंड लगे हैं-45 सेकंड अभी बाकी हैं। पोस्ट के अंत में उन्होंने उन लोगों को टैग किया जो शायद इस पोस्ट को समझ न पाएं या इसे पढ़कर नाराज हो जाएं। उन्होंने लिखा कि ऐसे लोग असल में जिंदगी को सही मायनों में जी रहे हैं।ऋतिक रोशन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फैंस इसे मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ईमानदार और जरूरी संदेश बता रहे हैं।
     

  • अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    नई दिल्ली मशहूर सिंगर यो यो हनी सिंह एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक शो के दौरान दिए गए उनके कुछ बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिनमें उन्होंने राजधानी की ठंड को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में अब अयोध्या के साधु-संतों की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के बयान को अशोभनीय और समाज की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल दिल्ली के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

    साधु-संतों ने की सार्वजनिक माफी की मांग

    मीडिया से बातचीत में अयोध्या के संत सीताराम दास महंत ने कहा कि दिल्ली की ठंड को लेकर दिया गया हनी सिंह का बयान पूरी तरह निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगर ने मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिल्लीवासियों की भावनाओं का अपमान किया है। महंत ने कहा कि एक कलाकार का काम समाज को सकारात्मक संदेश देना होता है, लेकिन हनी सिंह ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हनी सिंह को तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। संतों का मानना है कि सस्ती लोकप्रियता और पैसे के लिए इस तरह की अश्लीलता फैलाना समाज के लिए घातक है।

    “हनी सिंह समाज के लिए कलंक”

    साधु-संतों ने अपने बयान में कहा, “हनी सिंह समाज के लिए कलंक हैं। वे मशहूर जरूर हैं, लेकिन ज्ञान और संस्कार के मामले में नहीं। मंच से दिए गए उनके शब्द माताओं और बहनों का अपमान हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।” संतों का कहना है कि ऐसे बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी कलाकार इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करे।

    अश्लीलता समाज के लिए खतरा: महामंडलेश्वर

    महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी हनी सिंह के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हनी सिंह एक गायक हैं, लेकिन जिस तरह की भाषा का प्रयोग वे कर रहे हैं, वह समाज में गंदगी फैलाने का काम कर रही है। महामंडलेश्वर ने कहा कि मौसम कुदरत की देन है और उसे लेकर इस तरह की अभद्र टिप्पणियां करना बिल्कुल अनुचित है।

    उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार मंच पर आता है, तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन हनी सिंह ने अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए अश्लीलता फैलाई है। महामंडलेश्वर ने दो टूक कहा कि हनी सिंह को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

  • करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण

    करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण


    नई दिल्ली: करेला का नाम सुनते ही अधिकतर लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन यही कड़वा करेला सेहत के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं है। आयुर्वेद में करेला को औषधि के रूप में माना गया है और इसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। सिर्फ खाने से ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से लगाने पर भी करेला शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है।

    आयुर्वेद में करेले को करवेल्लक कहा जाता है। इसे ऐसा पौधा माना गया है जो दूषित रक्त को शुद्ध करने, बढ़ी हुई शर्करा को नियंत्रित करने और शरीर में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। करेला विटामिन A, B और C का अच्छा स्रोत है, जो इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ-साथ त्वचा और आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी माने जाते हैं।करेला अग्नि और अग्न्याशय तक प्रभाव डालता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह आंतों की गहराई से सफाई कर वहां मौजूद कीड़े, हानिकारक बैक्टीरिया और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार पेट साफ न होने, गैस, अपच या भूख न लगने की समस्या रहती है उनके लिए करेले का जूस या सलाद बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    अगर शरीर में लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी रहे, तो इससे आंतों में कीड़े पनप सकते हैं और पोषक तत्व शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। ऐसे में करेला शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को फिर से सक्रिय बनाता है। इसके कड़वे स्वाद को कम करने के लिए इसे काटकर नमक लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाए, तो इसका कड़वापन काफी हद तक कम हो जाता है।त्वचा संबंधी समस्याओं में भी करेला बेहद उपयोगी माना जाता है। चेहरे पर मुंहासे, एक्ने, खुजली या रूखापन अक्सर रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में करेले के जूस का सेवन रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और एक्ने की समस्या कम होती है। साथ ही यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी बढ़ाता है।

    करेला स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी लाभकारी बताया गया है, क्योंकि यह दूध बनाने वाले हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, इस दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। वहीं, अगर शरीर पर कोई घाव, फोड़ा या सूजन हो जाए, तो करेले का लेप लगाने से घाव जल्दी भरता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।कुल मिलाकर करेला भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसके फायदे इतने ज्यादा हैं कि इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।