Author: bharati

  • करोड़ों का फ्लैट, भारी EMI… फिर भी घर में घुटन क्यों? जानें वास्तु का इंद्र–जयंत रहस्य

    करोड़ों का फ्लैट, भारी EMI… फिर भी घर में घुटन क्यों? जानें वास्तु का इंद्र–जयंत रहस्य




    नई दिल्ली। आज के समय में लोग लाखों-करोड़ों रुपये लगाकर लग्जरी फ्लैट खरीद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग शिकायत करते हैं कि घर में घुसते ही बेचैनी, तनाव और भारीपन महसूस होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसका कारण अक्सर घर की पूर्व दिशा में ऊर्जा संतुलन का बिगड़ना होता है, जिसे इंद्र और जयंत क्षेत्र से जोड़ा जाता है।

    वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा सूर्य की पहली किरणों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी जाती है। इसी दिशा में इंद्र भाग सामाजिक प्रतिष्ठा, अवसर और सफलता से जुड़ा होता है, जबकि जयंत भाग आत्मविश्वास, मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जब ये क्षेत्र बाधित होते हैं, तो घर में मानसिक अस्थिरता और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    आजकल कई आधुनिक फ्लैट्स में जगह की कमी के कारण पूर्व दिशा में भारी फर्नीचर, कबाड़, शू-रैक या बंद बालकनी जैसी चीजें रख दी जाती हैं। इससे प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे घर में “भारी ऊर्जा” महसूस हो सकती है। हालांकि यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध अवधारणा नहीं है, लेकिन जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश और वेंटिलेशन के असर को आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार सुबह की धूप और ताजी हवा शरीर के हार्मोन बैलेंस, मूड और नींद पर सकारात्मक असर डालती है। इसलिए घर में खुली जगह, साफ-सफाई और पर्याप्त रोशनी बेहद जरूरी मानी जाती है।

    समाधान के आसान उपाय
    सुबह कुछ समय के लिए पूर्व दिशा की खिड़कियां खोलें

    उस क्षेत्र को हल्का और साफ रखें, भारी सामान न रखें

    प्राकृतिक रोशनी और हवा का अधिक से अधिक उपयोग करें

    हल्के रंगों और पौधों का इस्तेमाल करें

    कुल मिलाकर, चाहे इसे वास्तु कहा जाए या लाइफस्टाइल साइंस घर में खुलापन, रोशनी और साफ-सफाई मानसिक शांति के लिए जरूरी है। असली खुशी महंगे फ्लैट में नहीं, बल्कि संतुलित और शांत वातावरण में होती है। 

  • हर दिन की शुरुआत नींबू पानी से करें, पाचन सुधरेगा, वजन कंट्रोल रहेगा और शरीर रहेगा तरोताजा

    हर दिन की शुरुआत नींबू पानी से करें, पाचन सुधरेगा, वजन कंट्रोल रहेगा और शरीर रहेगा तरोताजा

    नई दिल्ली । सुबह की शुरुआत अगर सही आदतों के साथ की जाए तो उसका असर पूरे दिन शरीर और सेहत पर दिखाई देता है। इन्हीं आदतों में से एक है खाली पेट नींबू पानी पीना, जिसे आज के समय में एक आसान और प्राकृतिक हेल्थ ड्रिंक माना जाता है। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ताजगी देने के साथ कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी पहुंचा सकता है।

    रातभर के बाद शरीर को सबसे पहले पानी की जरूरत होती है और नींबू पानी इस जरूरत को पूरा करने में मदद करता है। यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और दिन की शुरुआत को ऊर्जावान बनाने में सहायक माना जाता है। खासकर गर्मियों में यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद कर सकता है।

    पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी नींबू पानी को फायदेमंद माना जाता है। इसका सेवन पेट की सफाई में मदद कर सकता है और गैस, अपच या कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है। यह पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद करता है, जिससे भोजन को पचाना आसान हो जाता है।

    वजन नियंत्रित करने की कोशिश करने वालों के लिए भी नींबू पानी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर अधिक कैलोरी बर्न कर सकता है। साथ ही यह भूख को नियंत्रित करने में भी सहायक माना जाता है, जिससे अनावश्यक खाने की आदत पर रोक लग सकती है।

    त्वचा के लिए भी नींबू पानी को फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा साफ, फ्रेश और ग्लोइंग नजर आ सकती है।

    इसके अलावा नींबू पानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी मदद कर सकता है। यह शरीर को बदलते मौसम में होने वाली सामान्य बीमारियों से बचाने में सहायक माना जाता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है।

    इसे बनाने का तरीका भी बहुत आसान है। गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर सुबह खाली पेट इसका सेवन किया जा सकता है। चाहें तो स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी मिलाया जा सकता है। नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच एक नया बदलाव देखने को मिला है, जहां स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष मार्केटप्लेस की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत में बने उत्पादों को एक संगठित डिजिटल मंच प्रदान करना है, ताकि छोटे कारीगरों, किसानों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जा सके।

    इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता अब बिना किसी मध्यस्थ के सीधे उन लोगों से खरीदारी कर सकेंगे, जो अपने हाथों से या स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करते हैं। इसमें रोजमर्रा की जरूरत के सामान से लेकर हस्तशिल्प, कपड़े, कृषि उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और कई अन्य श्रेणियां शामिल की गई हैं।

    इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी को भी कम करता है। लंबे समय से यह समस्या देखी जा रही थी कि छोटे उत्पादक बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाते थे, जिससे उनकी आय सीमित रह जाती थी।

    नए प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सीधे उत्पादक और ग्राहक के बीच संबंध स्थापित करता है। इससे न केवल कीमतों में पारदर्शिता आती है, बल्कि उत्पादकों को उनके काम का उचित मूल्य भी मिल पाता है। यह व्यवस्था छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है।

    इस प्रणाली से जुड़ने वाले कारीगरों और किसान समूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ग्रामीण भारत भी अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले जहां स्थानीय उत्पाद केवल सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंच पाते थे, अब वे देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

    इस प्लेटफॉर्म को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य में केवल एक खरीदारी मंच तक सीमित न रहे, बल्कि एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो सके। इसमें कई प्रकार की सेवाओं को जोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से भारत की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। छोटे उद्योगों को डिजिटल बाजार मिलने से उनकी पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

    कुल मिलाकर, यह नया डिजिटल मार्केटप्लेस केवल एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादन को सम्मान और पहचान देने का एक प्रयास है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय उत्पादों को न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान दिला सकती है।

  • EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने निजी क्षेत्र के प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। नए नियमों के तहत अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को मनमानी ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। यह कदम कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
    ब्याज दर पर सख्त लिमिट लागू
    EPFO के नए नियमों के अनुसार अब कोई भी प्राइवेट या छूट प्राप्त PF ट्रस्ट EPFO द्वारा तय की गई सालाना ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत तक ही ज्यादा ब्याज दे सकेगा। इससे पहले कुछ कंपनियां अधिक ब्याज दरों का वादा कर कर्मचारियों को आकर्षित कर रही थीं, जिससे भविष्य में वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका थी।
    ऑडिट सिस्टम में बड़ा बदलाव
    EPFO ने अब सभी ट्रस्ट्स के लिए हर साल अनिवार्य ऑडिट को खत्म कर दिया है। इसकी जगह अब रिस्क बेस्ड ऑडिट सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि केवल उन्हीं कंपनियों का ऑडिट होगा जहां नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी की संभावना होगी। इससे अनुपालन करने वाली कंपनियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा।
    कर्मचारियों की बचत पर फोकस
    देश में हजारों कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं। EPFO ने स्पष्ट किया है कि इन ट्रस्ट्स को कर्मचारियों को कम से कम EPFO जैसी या उससे बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। साथ ही अगर कोई कंपनी अपना छूट प्राप्त दर्जा छोड़ती है, तो उसे सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी ताकि कर्मचारियों को किसी तरह का नुकसान न हो।
    क्यों जरूरी हुआ यह कदम?
    हाल के समय में कुछ प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा ज्यादा ब्याज दरों का लालच देकर निवेश आकर्षित करने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे भविष्य में फंड की स्थिरता पर सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए EPFO ने यह सख्त फैसला लिया है ताकि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रहे।
  • ईरान की 'शर्तों' पर भड़के ट्रंप: बोले-बिल्कुल मंजूर नहीं! जंग या समझौता? फैसला अब अमेरिका के हाथ

    ईरान की 'शर्तों' पर भड़के ट्रंप: बोले-बिल्कुल मंजूर नहीं! जंग या समझौता? फैसला अब अमेरिका के हाथ

    नई दिल्ली। मध्य पूर्व (Middle East) की धरती एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए कूटनीतिक प्रस्ताव को ‘कचरे के डिब्बे’ में डालते हुए उसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया है। इस एक बयान ने दुनिया भर के बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

    ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ धमाका: “मुझे यह बिल्कुल मंजूर नहीं!”
    सोमवार रात डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान के प्रस्ताव की धज्जियां उड़ाते हुए लिखा। “मैंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है। मुझे यह जरा भी पसंद नहीं आया बिल्कुल भी मंजूर नहीं!”

    ट्रंप के इस कड़े तेवर के बाद उनके करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है और ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम प्लस’ (सैन्य विकल्प) ही एकमात्र रास्ता बचा है।

    ईरान की ‘रेड लाइन’: वो शर्तें जिन पर भड़का अमेरिका
    लेबनानी नेटवर्क ‘अल-मयादीन’ के अनुसार, ईरान ने समझौते के बदले जो मांगें रखी हैं, वे अमेरिका के लिए किसी ‘सरेंडर’ से कम नहीं थीं:

    आर्थिक घेराबंदी का अंत: ईरान ने मांग की है कि उसके तेल निर्यात पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए।

    फ्रीज फंड की रिहाई: विदेशों में जप्त ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तत्काल मुक्त किया जाए।

    होर्मुज पर कब्ज़ा: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण हो।

    लेबनान युद्धविराम: ईरान ने इसे अपनी ‘रेड लाइन’ घोषित किया है।

    परमाणु दांव: क्या यह ईरान की चाल है?
    दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने पहली बार ‘लचीलापन’ दिखाते हुए 30 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दे पर चर्चा करने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध टालने या वक्त हासिल करने की एक सोची-झीली रणनीति हो सकती है।

    दूसरी ओर, अमेरिका की मांग बेहद सख्त है: “ईरान अपना 60% शुद्ध यूरेनियम सौंप दे, परमाणु प्लांट नष्ट करे और अगले 20 साल तक संवर्धन भूल जाए।”

    ईरान का पलटवार: “हम ट्रंप को खुश करने के लिए नहीं बैठे”
    तेहरान ने भी साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान ट्रंप को खुश करने के लिए अपनी नीतियां नहीं बनाता। सरकारी मीडिया ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप की मांगें “बेतुकी” हैं और ईरान उनके आगे घुटने नहीं टेकेगा।

     युद्ध या कूटनीति?
    दुनिया के सामने अब तीन ही रास्ते बचे हैं:इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करे। युद्ध के बिना ईरान का दम घोंटने के लिए समुद्र में उसकी घेराबंदी और सख्त की जाए। ट्रंप अपनी ‘आर्ट ऑफ द डील’ का इस्तेमाल कर ईरान से कोई ऐसी बड़ी रियायत छीन लें जो अब तक असंभव मानी जाती थी।अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा।

  • मंगलवार के 5 महाउपाय: बजरंगबली की कृपा से दूर होंगे हर संकट और बाधाएं

    मंगलवार के 5 महाउपाय: बजरंगबली की कृपा से दूर होंगे हर संकट और बाधाएं


    नई दिल्ली।मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन के संकट दूर कर सुख-समृद्धि और सफलता दिलाते हैं। जानिए हनुमान जी को प्रसन्न करने वाले 5 सरल और प्रभावी उपाय।

    मंगलवार को क्यों खास माना जाता है?
    सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई हनुमत साधना व्यक्ति के भय, संकट और दुखों को दूर करती है। बजरंगबली को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जाती है।

    1. हनुमान चालीसा का करें पाठ
    हनुमान जी की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय हनुमान चालीसा का पाठ माना गया है। मंगलवार के दिन स्नान-ध्यान के बाद लाल रंग के आसन पर बैठकर कम से कम 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है।

    2. श्रीराम नाम का जाप जरूर करें
    हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। इसलिए उनकी पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक श्रीराम के नाम का स्मरण न किया जाए। मंगलवार को “श्रीराम” मंत्र का जाप करने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    3. सिंदूर का चोला चढ़ाएं
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। मंगलवार के दिन बजरंगबली को सिंदूर का चोला चढ़ाने और उनके चरणों का सिंदूर माथे पर लगाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    4. मंदिर में केसरिया ध्वज चढ़ाएं
    मंगलवार को हनुमान मंदिर में केसरिया ध्वज चढ़ाना बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    5. दीपदान से मिलता है शुभ फल
    हनुमान जी की पूजा में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। उड़द या गेहूं के आटे से बने दीपक में शुद्ध घी या सरसों का तेल डालकर दीप जलाना शुभ माना जाता है। लाल कलावे की बाती से दीपदान करने पर सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

    मंगलवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए ये सरल उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बजरंगबली अपने भक्तों के सभी संकट हरकर उन्हें सुख, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

  • नारियल के छिलकों से छिपे हैं जबरदस्त फायदे, फेंकने से पहले जान लें ये चौंकाने वाली बातें

    नारियल के छिलकों से छिपे हैं जबरदस्त फायदे, फेंकने से पहले जान लें ये चौंकाने वाली बातें


    नई दिल्ली। नारियल के छिलकों में प्राकृतिक रूप से कई बायोएक्टिव कंपाउंड, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इनमें फेरुलिक एसिड और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं।

    सेहत के लिए संभावित फायदे
    नारियल के छिलकों में मौजूद गुण शरीर को कई तरह से सपोर्ट कर सकते हैं। इनमें डाइटरी फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को सुधारने और कब्ज जैसी समस्या में मदद कर सकता है। इनके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में सहायक हो सकते हैं जिससे इम्यूनिटी मजबूत रहने में मदद मिलती है। कुछ रिसर्च और विशेषज्ञ मानते हैं कि ये मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट कर सकते हैं और ब्लड शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस करने में भी सहायक हो सकते हैं।

     इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?
    नारियल के सूखे छिलकों को सुखाकर और पीसकर पाउडर बनाया जाता है जिसे सीमित मात्रा में स्मूदी या अन्य खाने में मिलाया जा सकता है। कुछ लोग इसे उबालकर हर्बल चाय के रूप में भी उपयोग करते हैं। इसके अलावा इनका पाउडर प्राकृतिक स्क्रब की तरह स्किन पर भी इस्तेमाल किया जाता है जिससे त्वचा की सफाई में मदद मिल सकती है।

     सावधानी भी जरूरी है
    हालांकि नारियल के छिलके प्राकृतिक होते हैं लेकिन इनका अधिक या गलत तरीके से उपयोग नुकसानदायक हो सकता है। प्रेग्नेंसी या किसी मेडिकल कंडीशन में बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी होता है।

    नारियल के छिलके केवल कचरा नहीं बल्कि प्राकृतिक गुणों से भरपूर एक उपयोगी संसाधन हो सकते हैं। सही जानकारी और सावधानी के साथ इनका उपयोग करके कुछ हद तक सेहत और स्किन को फायदा पहुंचाया जा सकता है।

  • नेचुरल ग्लो का सीक्रेट है हल्दी! चेहरे की कई समस्याओं में ऐसे करती है असर

    नेचुरल ग्लो का सीक्रेट है हल्दी! चेहरे की कई समस्याओं में ऐसे करती है असर

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली हल्दी अब स्किनकेयर का भी अहम हिस्सा बन चुकी है। सदियों से आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। आज भी कई ब्यूटी एक्सपर्ट्स और स्किन केयर रूटीन में Turmeric यानी हल्दी को खास महत्व दिया जाता है। इसमें मौजूद करक्यूमिन नामक तत्व त्वचा को हेल्दी रखने और कई स्किन समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।

    मुंहासों से दिला सकती है राह
    हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स और एक्ने की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और सूजन घटाने में असरदार मानी जाती है।

    त्वचा में लाती है नेचुरल ग्लो
    हल्दी का नियमित उपयोग स्किन को चमकदार बनाने में मदद कर सकता है। कई लोग फेस पैक में हल्दी मिलाकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे त्वचा फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। शादी-ब्याह में होने वाली हल्दी रस्म भी इसी वजह से खास मानी जाती है।

    दाग-धब्बे कम करने में मददगा
    हल्दी त्वचा के दाग-धब्बों और टैनिंग को कम करने में भी उपयोगी मानी जाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को रिपेयर करने और रंगत सुधारने में मदद कर सकते हैं।

    बढ़ती उम्र के असर को कर सकती है कम
    विशेषज्ञों के मुताबिक हल्दी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं। इससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जैसी एजिंग समस्याओं का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।

    ऐसे करें इस्तेमाल
    हल्दी को दही, बेसन, शहद या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा फ्रेश महसूस हो सकती है। हालांकि ज्यादा मात्रा में हल्दी लगाने से स्किन पीली दिख सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।

    सावधानी भी जरूर
    अगर आपकी स्किन बेहद संवेदनशील है या किसी चीज से एलर्जी होती है, तो हल्दी का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

  • मंगलवार को क्या नहीं करना चाहिए? (हनुमान जी के दिन के जरूरी नियम)

    मंगलवार को क्या नहीं करना चाहिए? (हनुमान जी के दिन के जरूरी नियम)


    नई दिल्ली।  मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ कामों से बचना जरूरी माना गया है, वरना व्रत और पूजा का फल कम हो सकता है।

     मंगलवार को ये काम भूलकर भी न करें-


    1. नमक का सेवन न करे
    अगर आप व्रत रखते हैं तो इस दिन साधारण नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। यह व्रत की शुद्धता को प्रभावित करता है।

     2. प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से बचे
    मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन मंगलवार को अशुभ माना जाता है।

     3. क्रोध और झगड़े से दूर रहें
    इस दिन गुस्सा करना या किसी से विवाद करना नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकता है और पूजा का प्रभाव कम करता है।

     4. बाल और नाखून काटने से बचे
    धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार को बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता।

     5. उधार देना या लेना टालें
    इस दिन पैसों का लेन-देन सावधानी से करें। उधार देने या लेने से आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है।

     6. आलस्य और देर तक सोना न करे
    मंगलवार को देर तक सोना या दिन की शुरुआत देर से करना अशुभ माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर पूजा करना शुभ होता है।

    मंगलवार संयम, भक्ति और अनुशासन का दिन माना जाता है। अगर इस दिन नियमों का पालन किया जाए और गलत आदतों से बचा जाए, तो भगवान हनुमान की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

  • ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक

    ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक


    नई दिल्ली। ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्री लोअर बर्थ को सबसे आरामदायक मानते हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और लंबी दूरी के यात्री लोअर सीट को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन टिकट कन्फर्म होने के बाद भी कई बार अपर या मिडिल बर्थ मिल जाती है। अगर आप भी हर बार लोअर बर्थ चाहते हैं, तो IRCTC की टिकट बुकिंग के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    1. Reservation Choice में जरूर चुनें Lower Berth
    टिकट बुक करते समय “Reservation Choice” सेक्शन में “Lower Berth” का विकल्प जरूर चुनें। इससे रेलवे का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम आपकी प्राथमिकता को रिकॉर्ड करता है और सीट अलॉटमेंट के दौरान उसे ध्यान में रखता है। हालांकि यह 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन संभावना काफी बढ़ जाती है।

    2. जितनी जल्दी बुकिंग, उतने ज्यादा चांस
    लोअर बर्थ पाने का सबसे बड़ा नियम है  जल्दी टिकट बुक करना। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, लोअर बर्थ उपलब्धता कम होती जाती है। Tatkal या आखिरी समय की बुकिंग में अक्सर मिडिल और अपर बर्थ ही बचती हैं।

    3. सीनियर सिटीजन कोटे का लें फायदा
    भारतीय रेलवे बुजुर्ग यात्रियों और 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ कोटा देता है। अगर बुकिंग के दौरान सही उम्र और विवरण भरे जाएं तो सिस्टम प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ अलॉट कर सकता है।

    4. ज्यादा लोगों की बजाय छोटे ग्रुप में करें बुकिंग
    अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा लोगों की टिकट बुक करते हैं, तो सिस्टम सभी को साथ सीट देने की कोशिश करता है। ऐसे में लोअर बर्थ मिलने की संभावना कम हो सकती है। कम यात्रियों के साथ अलग-अलग बुकिंग करने पर लोअर सीट मिलने के चांस बढ़ सकते हैं।

    5. चार्ट बनने के बाद TTE से जरूर बात करें
    कई बार अंतिम समय में यात्रियों के टिकट कैंसिल हो जाते हैं या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में चार्ट बनने के बाद TTE से विनम्रता से बात करने पर लोअर बर्थ मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में TTE सीट एडजस्ट करने में मदद कर सकते हैं।

    ध्यान रखें ये जरूरी बात
    रेलवे का सीट अलॉटमेंट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होता है, इसलिए हर बार लोअर बर्थ मिलना तय नहीं होता। लेकिन सही विकल्प, समय पर बुकिंग और रेलवे नियमों की जानकारी आपकी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकती है।