Author: bharati

  • धनपुरी में मंदिर के पास खंभे से लटका मिला युवक का शव, इलाके में सनसनी

    धनपुरी में मंदिर के पास खंभे से लटका मिला युवक का शव, इलाके में सनसनी


    शहडोल, मध्यप्रदेश: शहडोल जिले के धनपुरी थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब खेर माता मंदिर के पास स्थित छोटी तालिया इलाके में एक युवक का शव खंभे से लटका मिला। सुबह टहलने निकले स्थानीय लोगों ने शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद धनपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

    मृतक की पहचान पुरानी बस्ती धनपुरी निवासी बबलू कोल (21) के रूप में हुई है, जो मजदूरी का काम करता था। परिजनों के अनुसार, बबलू रविवार रात घर से निकला था, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटा। अगली सुबह उसका शव मिलने की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया और परिजन मौके पर पहुंच गए।

    घटनास्थल से नहीं मिला सुसाइड नोट 

    पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना है, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इसी कारण मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं और मौत के कारणों को लेकर संशय बना हुआ है। पुलिस ने शव को खंभे से नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस जांच में जुटी, कई एंगल पर पड़ता
    धनपुरी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस परिजनों से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि युवक की मानसिक स्थिति कैसी थी और उसकी अंतिम गतिविधियां क्या थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना देर रात की हो सकती है क्योंकि सुबह मंदिर की ओर जाने वाले लोगों ने शव देखा। कुछ लोग इसे आत्महत्या मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संदिग्ध घटना बता रहे हैं।

     इलाके में दहशत का माहौ
    घटना के बाद इलाके में डर और तनाव का माहौल है। मंदिर के आसपास होने के कारण लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है ताकि सच सामने आ सके।

  • ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड

    ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड


    नई दिल्ली ।
    आज के बदलते दौर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऑफिस जाकर काम करने की पारंपरिक व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक नए मॉडल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां घर से काम करना या कहीं से भी काम करने की आजादी लोगों के लिए एक नया विकल्प बनता जा रहा है। इस बदलाव के बीच चर्चा तब और तेज हो गई जब वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने आया, जिसमें इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    इस नए कामकाज के मॉडल में यह माना जा रहा है कि अगर लोग रोजाना ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करें, तो इससे ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इससे उन लोगों को फायदा मिल सकता है जिन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़नी पड़ती है, खासकर महिलाएं, जो घर से ही काम करके करियर को आगे बढ़ा सकती हैं।

    वर्क फ्रॉम होम और रिमोट वर्क को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर होता है। वर्क फ्रॉम होम आमतौर पर उसी कंपनी के लिए घर से काम करने की सुविधा होती है, जहां कर्मचारी का ऑफिस पहले से होता है, जबकि रिमोट वर्क में व्यक्ति किसी भी जगह से काम कर सकता है और किसी एक निश्चित स्थान से जुड़ा नहीं होता। यह मॉडल पूरी तरह लोकेशन-इंडिपेंडेंट माना जाता है।

    इस बदलाव के साथ छात्रों और युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। डिजिटल दौर में कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया हैंडलिंग, ऑनलाइन ट्यूशन और बेसिक डेटा वर्क जैसी नौकरियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए घर से ही शुरुआत की जा सकती है और धीरे-धीरे अनुभव के साथ बेहतर अवसर भी मिलते हैं।

    हालांकि इस बढ़ते ट्रेंड के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। घर से काम करने में कई बार एकांत महसूस होता है और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा तकनीकी समस्याएं जैसे इंटरनेट या बिजली की दिक्कत भी काम को प्रभावित कर सकती हैं।

    सबसे बड़ी चिंता वर्क फ्रॉम होम के नाम पर होने वाले फ्रॉड को लेकर भी है। कई बार फर्जी कंपनियां आकर्षक कमाई के वादे करके लोगों से पैसे मांगती हैं या गलत तरीके से नौकरी का लालच देती हैं। इसलिए किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में हाइब्रिड मॉडल यानी ऑफिस और घर दोनों का मिश्रण अधिक देखने को मिल सकता है। यह बदलाव जहां एक तरफ सुविधा और लचीलापन लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सतर्कता और समझदारी की भी जरूरत को बढ़ा रहा है।

  • फेसबुक से शुरू हुआ प्यार, बना खौफनाक मर्डर केस: एक महिला और तीन मर्दों की सनसनीखेज कहानी

    फेसबुक से शुरू हुआ प्यार, बना खौफनाक मर्डर केस: एक महिला और तीन मर्दों की सनसनीखेज कहानी


     नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश: सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती और रिश्तों का उलझा जाल नरसिंहपुर में एक खौफनाक हत्या तक पहुंच गया। फेसबुक के जरिए बने प्रेम संबंधों, पुराने रिश्तों की जलन और बढ़ती नजदीकियों ने मिलकर ऐसी साजिश रची, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया।

    मामला रीना किरार नाम की महिला से जुड़ा है, जो अपने पति से अलग रह रही थी। इसी दौरान उसकी फेसबुक पर राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू जाट से दोस्ती हुई। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ी और वीरू का उसके घर आना-जाना भी शुरू हो गया। लेकिन इसी बीच कहानी में एक और मोड़ तब आया, जब रीना के पुराने प्रेमी अरुण पटेल को इस नए रिश्ते की जानकारी लगी।

    अरुण पटेल और रीना के बीच पहले से प्रेम संबंध थे और अरुण ही उसके घर का खर्च भी उठा रहा था। लेकिन रीना की बढ़ती नजदीकियां वीरू जाट से उसे नागवार गुजरीं। गुस्से और जलन में उसने रीना के साथ मिलकर एक खतरनाक साजिश रच डाली।

    योजना के तहत वीरू जाट को नरसिंहपुर के साईंखेड़ा इलाके में स्थित घर पर बुलाया गया। वहां पहले से तैयार प्लान के मुताबिक उस पर बेसबॉल बैट से बेरहमी से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद शव को रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र में टेडिया पुल के नीचे फेंक दिया गया, ताकि पहचान और शक दोनों से बचा जा सके।

    हालांकि पुलिस की त्वरित जांच में यह पूरा मामला खुल गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रीना किरार, उसके प्रेमी अरुण पटेल और उनके एक सहयोगी हरणाम किरार को गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हत्या प्रेम संबंधों में पैदा हुई रंजिश और ईर्ष्या का नतीजा थी। रीना ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि पुराने और नए रिश्तों के बीच टकराव ने इस वारदात को जन्म दिया।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला और उसके सहयोगियों ने हत्या को हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सबूतों और पूछताछ के आधार पर पूरा षड्यंत्र उजागर हो गया।

    यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर बनने वाले रिश्तों और उनमें छिपे खतरों को उजागर करता है, जहां एक क्लिक ने जिंदगी और मौत के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया।

  • सऊदी से नरसिंहपुर पहुंचे युवक की बिगड़ी मानसिक हालत, पुलिस ने मिलवाया परिवार से

    सऊदी से नरसिंहपुर पहुंचे युवक की बिगड़ी मानसिक हालत, पुलिस ने मिलवाया परिवार से


    नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश: मानवीय संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल नरसिंहपुर जिले से सामने आई है, जहां सऊदी अरब से भटककर भारत पहुंचे एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को पुलिस ने न सिर्फ सुरक्षित पाया, बल्कि उसे उसके परिवार से भी मिलवाया। यह पूरी घटना नरसिंहपुर पुलिस की तत्परता और इंसानियत की मिसाल बन गई है।

    मामला 44 वर्षीय उनसाद मियां का है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले हैं। वे सऊदी अरब में ड्राइवर के रूप में काम करते थे, लेकिन कुछ समय पहले उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उन्हें 24 अप्रैल 2026 को रियाद एयरपोर्ट से भारत वापस भेज दिया गया।

    भारत आने के बाद वे मुंबई एयरपोर्ट पर उतरे, लेकिन मानसिक अस्वस्थता के कारण अपने घर नहीं पहुंच सके। वह भटकते हुए भुसावल होते हुए मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले तक आ पहुंचे और कई दिनों तक शहर में इधर-उधर घूमते रहे।

    इसी दौरान 5 मई 2026 को नरसिंहपुर कोतवाली में तैनात आरक्षक पंकज राजपूत की नजर उन पर पड़ी। उनकी स्थिति देखकर आरक्षक ने मानवता दिखाते हुए उनसे बातचीत शुरू की। शुरुआती बातचीत में वे ज्यादा कुछ नहीं बता पा रहे थे, लेकिन धैर्यपूर्वक संवाद के बाद उन्होंने अपनी पहचान उजागर की।

    उनसाद के पास सिर्फ पासपोर्ट था, जबकि उनका मोबाइल फोन खो चुका था। आरक्षक पंकज राजपूत ने उन्हें भोजन कराया, कपड़े उपलब्ध कराए और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। बातचीत के दौरान उनसाद ने अपनी पत्नी का मोबाइल नंबर बताया, जिसे उन्होंने याद रखा था।

    आरक्षक ने उस नंबर पर संपर्क कर परिवार को पूरी जानकारी दी। लंबे समय से लापता अपने परिजन की सूचना मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। 9 मई को उनके बड़े भाई जैश मोहम्मद और दो भतीजे नरसिंहपुर पहुंचे।

    परिवार के लोग जब उनसे मिले तो माहौल भावुक हो गया। अपनों को सामने देखकर उनसाद भी भावुक हो उठे। परिजनों ने नरसिंहपुर पुलिस और आरक्षक पंकज राजपूत का आभार व्यक्त किया।

    बाद में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित ट्रेन के माध्यम से उनके घर रवाना किया गया। स्टेशन पर विदाई का दृश्य बेहद भावुक था, जहां पुलिस और परिजनों दोनों की आंखें नम हो गईं।

    यह घटना न सिर्फ पुलिस की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

  • बुजुर्ग की मौत के बाद हाईवे पर बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

    बुजुर्ग की मौत के बाद हाईवे पर बवाल, परिजनों ने पुलिस पर लगाए प्रताड़ना के आरोप


    हरदा, मध्यप्रदेश: हरदा जिले में पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोपों के बीच एक 80 वर्षीय बुजुर्ग अजबसिंह कोरकू की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। बुजुर्ग की इंदौर में इलाज के दौरान मौत होने के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए पहले थाने में और फिर हाइवे पर प्रदर्शन किया, जिससे कई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

    पूरा मामला ग्राम रेलवा का है, जहां रहने वाले अजबसिंह कोरकू ने 1 मई को कथित रूप से कीटनाशक पी लिया था। परिजनों का आरोप है कि हंडिया थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत ने उनसे 25 हजार रुपये लेने के बावजूद लगातार प्रताड़ित किया, जिससे परेशान होकर बुजुर्ग ने यह आत्मघाती कदम उठाया।

    जहर पीने के बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 4 मई को छुट्टी दे दी गई। घर लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रेफर किया गया, जहां शनिवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    पोस्टमार्टम के बाद रविवार को परिजन शव लेकर सीधे हंडिया थाने पहुंचे और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला गरमा गया और करीब तीन घंटे तक थाना परिसर में धरना चलता रहा। प्रदर्शन में स्थानीय विधायक डॉ. आरके दोगने, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन साई और एससी-एसटी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

    विधायक डॉ. आरके दोगने ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसपी और कलेक्टर पीड़ित परिवार से बात करने को तैयार नहीं हैं, जो बेहद संवेदनहीनता को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को एसपी और कलेक्टर के बंगले के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया जाएगा।

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी थाने से निकलकर हाइवे पर बैठ गए। इससे सड़क पर लंबा जाम लग गया और वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। मौके पर एएसपी अमित मिश्रा ने लोगों को समझाने की कोशिश की और जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।

    लगातार बढ़ते दबाव और प्रदर्शन के बाद देर रात प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हेड कॉन्स्टेबल कंचनसिंह राजपूत को लाइन अटैच कर दिया। हालांकि इसके बावजूद परिजनों की नाराजगी पूरी तरह शांत नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग जारी है।

    यह पूरा घटनाक्रम जिले में पुलिस कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • बाजार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव हावी, निफ्टी टूटा 24000 का स्तर, चौतरफा बिकवाली से निवेशक चिंतित

    बाजार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव हावी, निफ्टी टूटा 24000 का स्तर, चौतरफा बिकवाली से निवेशक चिंतित

    नई दिल्ली ।
    सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुई, जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत ही लाल निशान में हुई और शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसल गए। निफ्टी ने 24000 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़ते हुए 23900 के आसपास कारोबार शुरू किया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स भी भारी गिरावट के साथ खुला और करीब 900 अंकों से अधिक टूट गया। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई, जिसका असर सीधे इक्विटी बाजार पर पड़ा। बाजार में हर तरफ बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और किसी भी सेक्टर में मजबूती टिक नहीं पाई।

    कारोबार के दौरान लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और मीडिया सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में भारी बिकवाली के कारण बाजार की गिरावट और गहरी हो गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कमजोरी व्यापक स्तर पर फैली हुई है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। आमतौर पर जब बड़े शेयरों में दबाव होता है तो छोटे शेयर कुछ हद तक स्थिर रहते हैं, लेकिन इस बार सभी वर्गों में समान रूप से कमजोरी रही। इससे यह संकेत मिला कि बाजार में विश्वास की कमी गहराती जा रही है और निवेशक फिलहाल सुरक्षित रुख अपना रहे हैं।

    वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा, लेकिन एशियाई बाजारों के कई हिस्सों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और राजनीतिक अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई की आशंका भी बढ़ गई है। इसी कारण निवेशकों ने इक्विटी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।

    इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े देशों के बीच जारी तनाव माना जा रहा है, जहां कूटनीतिक बातचीत में अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। शांति प्रस्तावों पर सहमति न बनने और रणनीतिक मुद्दों पर टकराव के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि जब तक वैश्विक तनाव में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निफ्टी के लिए 24000 का स्तर अब मजबूत प्रतिरोध बन चुका है, जबकि नीचे की ओर दबाव जारी रहने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों के लिए फिलहाल यह समय सावधानी और सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा को तेजी से बदल रहे हैं।

  • पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी तैयारी, कुत्तों का वैक्सीनेशन कर टाला खतरा

    पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी तैयारी, कुत्तों का वैक्सीनेशन कर टाला खतरा


    सिवनी, मध्यप्रदेश: सिवनी जिले के प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों, खासकर बाघों को एक गंभीर खतरे से बचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है। बफर जोन के 120 गांवों में पाए गए करीब 1560 आवारा श्वानों का वैक्सीनेशन किया जाएगा, ताकि खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) को फैलने से रोका जा सके।

    वन विभाग ने यह कदम तब उठाया है जब पड़ोसी कान्हा टाइगर रिजर्व में इसी वायरस के कारण पांच बाघों की मौत की पुष्टि हुई थी। इसके बाद पेंच प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है, क्योंकि दोनों टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर होने के कारण बाघों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

    पार्क प्रबंधन ने वन रक्षकों की मदद से बफर क्षेत्र के गांवों में सर्वे कराया, जिसमें सिवनी जिले के 80 और छिंदवाड़ा जिले के 40 गांव शामिल हैं। सर्वे में कुल 1560 आवारा कुत्तों की पहचान की गई है, जिन्हें अब चरणबद्ध तरीके से टीका लगाया जाएगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि वैक्सीनेशन का काम कौन करेगा, लेकिन इसके लिए एनजीओ, पशु चिकित्सा विभाग और वाइल्डलाइफ हेल्थ संस्थानों से सहयोग लेने की योजना बनाई जा रही है।

    कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों को प्रभावित करती है। यह बीमारी बाघ, तेंदुआ, लोमड़ी, भेड़िया और लकड़बग्घा जैसे जानवरों तक भी फैल सकती है। संक्रमित आवारा कुत्ते जंगल के आसपास घूमते हुए इस वायरस को वन्यजीवों तक पहुंचा देते हैं, जिससे बड़ी वन्यजीव क्षति का खतरा बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई, लगातार खांसी, उल्टी-दस्त, कमजोरी, शरीर कांपना और चलने में लड़खड़ाहट शामिल हैं। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकती है।

    वन विभाग के सामने इस अभियान में बजट की चुनौती भी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही वैक्सीनेशन कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल ने बताया कि योजना तैयार है और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा।

    यह पहल न केवल बाघों की सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..

    गोल्ड-सिल्वर में मिला-जुला रुख, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निवेशक सतर्क..


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर एक बार फिर कमोडिटी बाजार में साफ दिखाई दिया है। सप्ताह की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों की कीमतों ने निवेशकों को मिश्रित संकेत दिए, जहां एक ओर सोना दबाव में रहा तो दूसरी ओर चांदी में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    घरेलू वायदा बाजार में Gold की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और इसके बाद पूरे सत्र में कीमतें उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में घूमती रहीं। बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी के कारण निवेशक सतर्क नजर आए और बड़ी खरीदारी से बचते दिखे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में यह दबाव मुख्य रूप से वैश्विक घटनाक्रमों और निवेशकों की बदलती रणनीति के कारण देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता के चलते सुरक्षित निवेश की मांग तो बनी हुई है, लेकिन साथ ही अनिश्चितता ने बाजार को अस्थिर भी कर दिया है, जिससे कीमतों में स्थिरता नहीं बन पा रही है।

    इसके विपरीत Silver ने शुरुआती कारोबार में हल्की मजबूती दिखाई। चांदी की कीमतों में दिनभर सकारात्मक रुझान बना रहा, हालांकि इसमें तेज उछाल नहीं देखा गया। सीमित बढ़त के बावजूद निवेशकों की रुचि बनी रही और खरीदारी का माहौल थोड़ा बेहतर नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं का रुख समान रूप से अस्थिर रहा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि सोने और चांदी दोनों में स्पष्ट ट्रेंड के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में कमोडिटी बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर हो गया है। किसी भी बड़े राजनीतिक या आर्थिक संकेत का सीधा असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    इस बीच वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विभिन्न देशों के बीच जारी मतभेद और कूटनीतिक अस्थिरता का असर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग पर पड़ रहा है, लेकिन साथ ही बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में सोने और चांदी का बाजार संतुलन की तलाश में नजर आ रहा है। दोनों धातुएं सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं और निवेशक फिलहाल स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही इस बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

  • टाटा ट्रस्ट्स में बड़ा प्रशासनिक मोड़, नोएल टाटा ने दो वरिष्ठ ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति पर जताई असहमति, संगठन में बढ़ी हलचल

    टाटा ट्रस्ट्स में बड़ा प्रशासनिक मोड़, नोएल टाटा ने दो वरिष्ठ ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति पर जताई असहमति, संगठन में बढ़ी हलचल

    नई दिल्ली ।
    टाटा समूह के परोपकारी ढांचे में हाल ही में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संगठन की निर्णय प्रक्रिया और आंतरिक संतुलन पर ध्यान आकर्षित किया है। ट्रस्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर असहमति सामने आई है, जिसके बाद चर्चा का माहौल और तेज हो गया है। यह मामला टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है, जहां दो वरिष्ठ ट्रस्टियों की पुनर्नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय सर्वसम्मति पर आधारित था।

    जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर असहमति जताई और इसके खिलाफ मतदान किया। चूंकि इस प्रक्रिया में सभी सदस्यों की सहमति आवश्यक थी, इसलिए एक मतभेद सामने आने के बाद यह पुनर्नियुक्ति आगे नहीं बढ़ सकी। इसके चलते यह संभावना बन गई है कि दोनों ट्रस्टी अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद पद से अलग हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रस्ट के भीतर लंबे समय से निर्णय आम सहमति के आधार पर लिए जाते रहे हैं। ऐसे में किसी प्रमुख प्रस्ताव पर असहमति सामने आना संगठन के भीतर बदलते दृष्टिकोण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में संभावित बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

    टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट, टाटा समूह के परोपकारी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी कई पहलें संचालित करता है। इसमें छात्रवृत्ति, शैक्षणिक सहायता और समाज कल्याण से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। हालांकि यह इकाई सीधे तौर पर व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव सामाजिक क्षेत्र में काफी व्यापक माना जाता है।

    इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक प्रशासनिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे ट्रस्ट के भीतर चल रहे व्यापक बदलावों का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतृत्व संरचना और प्रतिनिधित्व जैसे कई अन्य मुद्दों पर भी विचार-विमर्श जारी है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में संगठनात्मक ढांचे में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि कुछ अन्य नामों और नियुक्तियों पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है, जिससे ट्रस्ट के भीतर रणनीतिक स्तर पर नई दिशा तय होने की संभावना बनती है। पहले जहां कई निर्णय सहज सहमति से हो जाते थे, वहीं अब अलग-अलग मत सामने आने से प्रक्रिया अधिक जटिल होती दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम टाटा ट्रस्ट्स के भीतर निर्णय लेने की शैली और नेतृत्व संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। नोएल टाटा का यह कदम संगठन के भीतर बढ़ती चर्चा और नए दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

  • शहडोल में सनसनी: तेंदूपत्ता गिनती से लौट रहे किसान की जंगल मार्ग में हत्या, बाइक पर मिला शव

    शहडोल में सनसनी: तेंदूपत्ता गिनती से लौट रहे किसान की जंगल मार्ग में हत्या, बाइक पर मिला शव


    शहडोल, मध्यप्रदेश: शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक किसान की बेरहमी से हत्या कर दी गई। देवराव गांव निवासी तुलसी दास कुशवाहा का शव सोमवार सुबह गांव के पास जंगल मार्ग में उनकी बाइक पर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

    मृतक रविवार शाम तेंदूपत्ता की गिनती के लिए घर से निकला था। बताया जा रहा है कि वह गांव में चल रहे तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में शामिल होने गया था। परिजनों के अनुसार, तुलसी दास देर रात तक घर नहीं लौटे, जिसके बाद परिवार में चिंता बढ़ गई। सुबह जब उनकी कोई जानकारी नहीं मिली तो तलाश शुरू की गई।

    इसी दौरान गांव के कुछ लोग जंगल मार्ग से गुजर रहे थे, जहां उन्होंने सड़क किनारे खड़ी बाइक पर एक व्यक्ति का शव पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर वह तुलसी दास कुशवाहा निकले। शव के आसपास बड़ी मात्रा में खून फैला हुआ था, जिससे स्पष्ट हो रहा था कि हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई है।

    सूचना मिलते ही ब्यौहारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मृतक पर किसी धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना को लेकर परिजनों ने पुरानी रंजिश की आशंका जताई है। उनका कहना है कि किसी विवाद के चलते तुलसी दास की हत्या की गई हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और सभी संभावित एंगल से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस टीम आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल के आसपास से सबूत जुटाए जा रहे हैं। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश तेज कर दी गई है।

    अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हत्या के तरीके और कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा जा रहा है।