Author: bharati

  • प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए

    प्रियंका चतुर्वेदी का चुनाव आयोग पर हमला: अब आयोग को BJP ऑफिस से काम करना चाहिए



    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र नगर निगम और निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चरम पर है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रियंका ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के दौरान खुलेआम धांधली हो रही है, लेकिन राज्य चुनाव आयोग जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठा है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में चुनाव चोरी हो रहा है।

    राज्य चुनाव आयोग अंधा बन चुका है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को बंद कर देना चाहिए और अब उसे बीजेपी ऑफिस से ही काम करना चाहिए।”

    प्रियंका ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर चुनाव के दौरान खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। उनके अनुसार, इस वजह से आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।

    इंदौर दूषित पानी मामले पर भी सरकार को घेरा
    प्रियंका चतुर्वेदी ने मध्य प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को देश को शर्मसार करने वाली घटना बताया और कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका ने आरोप लगाया कि इससे पहले मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, और अब इंदौर की घटना में भी सरकार जवाबदेही से बच रही है।

    प्रियंका के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनके आरोप-प्रत्यारोप ने चुनाव आयोग और राज्य सरकारों की निष्पक्षता पर बहस को तेज कर दिया है।

  • Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    नई दिल्ली। पिछले साल चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड उछाल देखा था। तेजी के चलते चांदी की कीमत प्रति किलो 2.54 लाख रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि, अब घरेलू बाजार में यह गिरकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई में कमी थी। लेकिन अब मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक चांदी की कीमत में 60% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

    तेजी के पीछे की वजहें

    चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।

    एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।

    इतिहास खुद को दोहरा सकता है

    चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

  • टीम इंडिया का बड़ा ऐलान: शुभमन गिल बने कप्तान, सिराज-श्रेयस की धमाकेदार वापसी, ऋतुराज बाहर!

    टीम इंडिया का बड़ा ऐलान: शुभमन गिल बने कप्तान, सिराज-श्रेयस की धमाकेदार वापसी, ऋतुराज बाहर!


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम की नए साल में पहली बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड के खिलाफ होने जा रही है। 11 जनवरी से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए बीसीसीआई ने शनिवार को टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है। इस सीरीज में एक बार फिर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी भारतीय जर्सी में नजर आएंगे, जबकि तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और उप-कप्तान श्रेयस अय्यर की टीम में वापसी हुई है। वहीं शानदार फॉर्म में होने के बावजूद ऋतुराज गायकवाड़ को वनडे टीम से बाहर रखा गया है, जो चयनकर्ताओं के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज की कमान युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को सौंपी गई है। शुभमन साउथ अफ्रीका के खिलाफ पिछली वनडे सीरीज में चोट के कारण नहीं खेल पाए थे, उस दौरान केएल राहुल ने कप्तानी संभाली थी और भारत ने वह सीरीज 2-1 से जीती थी।

    अब शुभमन पूरी तरह फिट होकर कप्तान के रूप में वापसी कर रहे हैं, जिससे टीम को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

    टीम चयन में सबसे बड़ी राहत मोहम्मद सिराज की वापसी को माना जा रहा है। सिराज के आने से भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण और मजबूत हुआ है। वहीं श्रेयस अय्यर को उप-कप्तान बनाया गया है, हालांकि उनका खेलना फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगा। श्रेयस ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान चोटिल हो गए थे और तभी से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर हैं।

    चयनकर्ताओं ने साफ किया है कि मेडिकल टीम से हरी झंडी मिलने के बाद ही वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनेंगे।

    हालांकि अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को एक बार फिर टीम में जगह नहीं मिल पाई है। शमी आखिरी बार आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत के लिए खेले थे, जहां टीम इंडिया ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता था। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे देवदत्त पडिक्कल और ईशान किशन को भी वनडे स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है। विकेटकीपर के तौर पर ऋषभ पंत और केएल राहुल पर चयनकर्ताओं ने भरोसा जताया है।

    टीम चयन का सबसे चौंकाने वाला फैसला ऋतुराज गायकवाड़ को बाहर करना रहा।

    ऋतुराज साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में शतक लगा चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। उनके साथ ध्रुव जुरेल और तिलक वर्मा को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह फैसला फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान*), वॉशिंगटन सुंदर, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, कुलदीप यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह और यशस्वी जायसवाल को शामिल किया गया है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 11 जनवरी को वडोदरा में खेला जाएगा, दूसरा वनडे 14 जनवरी को राजकोट में और तीसरा वनडे 18 जनवरी को इंदौर में होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच 21 जनवरी से पांच मैचों की टी20 सीरीज भी खेली जाएगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ यह दौरा टीम इंडिया के लिए साल 2026 की शुरुआत में खुद को परखने का बड़ा मौका माना जा रहा है।

  • भारत का इटली’ कहलाती है ये खूबसूरत जगह, नज़ारे देख लौटने का मन नहीं करेगा

    भारत का इटली’ कहलाती है ये खूबसूरत जगह, नज़ारे देख लौटने का मन नहीं करेगा


    भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं, जो विदेशी लोकेशन्स को कड़ी टक्कर देती हैं। इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र का आकर्षक हिल स्टेशन लवासा, जिसे लोग प्यार से “भारत का इटली” कहते हैं। रंग-बिरंगी इमारतें, पहाड़ियों के बीच बसा सुनियोजित शहर, झील के किनारे बने कैफे और साफ-सुथरी सड़कें लवासा को किसी यूरोपियन टाउन जैसा लुक देती हैं। यहां पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप भारत नहीं, बल्कि इटली की किसी शांत और खूबसूरत जगह पर आ गए हों।
    सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसी प्लान्ड हिल सिटी
    लवासा महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक प्लान्ड हिल सिटी है, जो सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच बसी हुई है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत झील इसे बेहद खास बनाते हैं। लवासा की सबसे बड़ी खासियत इसकी इटालियन स्टाइल आर्किटेक्चर है। खुले चौक, वॉटरफ्रंट प्रोमेनेड, रंगीन इमारतें और झील के किनारे बने कैफे इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। सुबह झील के किनारे टहलना और शाम को सनसेट देखना यहां का सबसे सुकून भरा अनुभव माना जाता है।
    घूमने के साथ एडवेंचर का भी भरपूर मजा
    लवासा सिर्फ देखने में ही खूबसूरत नहीं है, बल्कि यहां करने के लिए भी बहुत कुछ है। यहां बोटिंग, कयाकिंग, साइकलिंग और ट्रेकिंग जैसी कई एक्टिविटीज का आनंद लिया जा सकता है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए जिप लाइनिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। वहीं, शांति पसंद करने वाले लोग झील किनारे किसी कैफे में बैठकर कॉफी या इटालियन फूड का लुत्फ उठा सकते हैं। यही वजह है कि लवासा कपल्स, फैमिली ट्रैवलर्स और दोस्तों के ग्रुप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन माना जाता है।
    कब जाएं लवासा, जानिए सही समय
    लवासा घूमने के लिए मानसून और सर्दियों का मौसम सबसे बेहतर माना जाता है। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और झील का नजारा और भी मनमोहक हो जाता है, हालांकि इस दौरान फिसलन से सावधान रहना जरूरी होता है। वहीं सर्दियों में मौसम ठंडा और सुहावना रहता है, जिससे घूमना काफी आरामदायक हो जाता है।
    कम बजट में प्लान करें शानदार ट्रिप
    लवासा की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां घूमने का खर्च ज्यादा नहीं आता। पुणे से लवासा की दूरी करीब 60 किलोमीटर है और मुंबई से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। पेट्रोल और टोल मिलाकर आने-जाने का खर्च लगभग 2,000 से 3,000 रुपये तक आ सकता है। यहां होटल और रिसॉर्ट्स बजट के अनुसार उपलब्ध हैं। सामान्य होटल में एक रात का किराया करीब 2,500 से 4,000 रुपये तक होता है, जबकि लग्जरी रिसॉर्ट्स में यह खर्च 6,000 रुपये या उससे अधिक हो सकता है।
    कम खर्च में विदेश जैसा अनुभव
    अगर आप कम बजट में विदेश जैसा ट्रैवल अनुभव लेना चाहते हैं, तो लवासा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। प्राकृतिक खूबसूरती, शानदार आर्किटेक्चर और सुकून भरा माहौल इसे वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनाता है।
  • एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं

    एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं


    देवास: एबी रोड स्थित सम्राट होटल के एक कमरे में शुक्रवार दोपहर अज्ञात कारणों से आग लग गई। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, और आग को जल्द ही दमकल द्वारा बुझा लिया गया। नगर निगम के दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण बड़ा हादसा टल गया।जानकारी के अनुसार सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के एक कमरे में आग लगने से कमरे में रखा सामान जलकर क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय होटल के कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर पर थे। जब उन्हें दूसरी मंजिल से धुआं उठते हुए दिखाई दिया, तो उन्होंने तुरंत नगर निगम के फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इसके बाद दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।

    नगर निगम के अधिकारी और स्थानीय नेताओं ने मौके का दौरा किया। निगम सत्तापक्ष के नेता मनीष सेन ने बताया कि होटल के कर्मचारी जब धुआं उठता हुआ देखा, तो उन्होंने बिना समय गंवाए दमकल विभाग को सूचित किया। आग के फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित कर लिया गया जिससे कोई बड़ा हादसा टल गया।इसी दौरान पुलिस अधिकारी सीएसपी सुमित अग्रवाल भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के कमरे में आग लगी थी जिसे समय रहते काबू कर लिया गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद, जैसे ही सूचना प्राप्त हुई, फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। इन गाड़ियों में आधुनिक उपकरण थे जिनकी मदद से आग को जल्दी बुझाया जा सका। हालांकि आग से कमरे में रखे कुछ सामान जल गए लेकिन बड़ा नुकसान टल गया।आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पहले अनुमान के अनुसार यह शॉर्ट सर्किट के कारण हो सकती है, लेकिन इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस और दमकल विभाग दोनों ही आग के कारणों की जांच में जुटे हैं।

    सुरक्षा की महत्वता

    इस घटना ने होटल मालिकों और अधिकारियों को आग से संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। होटल में आग बुझाने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे, लेकिन फिर भी आग की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा था।होटल में आग बुझाने की व्यवस्था के अलावा, अग्निशमन विभाग ने होटल मालिकों को आग से बचाव के लिए समय-समय पर निरीक्षण करने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
  • यश की टॉक्सिक से तारा सुतारिया का फर्स्ट लुक रिवील बोल्ड लुक में दिखी जानिए निभाएंगी कौन सा किरदार

    यश की टॉक्सिक से तारा सुतारिया का फर्स्ट लुक रिवील बोल्ड लुक में दिखी जानिए निभाएंगी कौन सा किरदार


    नई दिल्ली । साउथ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में इस फिल्म से कियारा आडवाणी हुमा कुरैशी और नयनतारा का लुक सामने आया है। अब तारा सुतारिया का फर्स्ट लुक भी सामने आ चुका है।
    बोल्ड अंदाज में दिखीं तारा सुतारिया
    अभिनेता यश ने और फिल्म टॉक्सिक के मेकर्स ने तारा सुतारिया का लुक शेयर किया है। पोस्ट के साथ उनके किरदार का नाम भी शेयर किया गया है। इस फिल्म में वह रेबेका नाम का किरदार निभाएंगी। फिल्म टॉक्सिक के नए पोस्टर में तारा सुतारिया ने हाथ में बंदूक ली हुई है। साथ ही उनका लुक भी बोल्ड है।
    चर्चा में रहे कियारा से लेकर हुमा कुरैशी तक के लुक
    टॉक्सिक के मेकर्स ने तारा सुतारिया से पहले नयनतारा हुमा कुरैशी और कियारा आडवाणी के लुक भी शेयर किए थे। हर एक्ट्रेस का लुक बिल्कुल हटकर रहा। इन एक्ट्रेस के लुक देखकर लगता है कि फिल्म में उनके किरदार काफी स्ट्रॉन्ग हाेने वाले हैं।
    कब रिलीज होगी यश की फिल्म
    फिल्म टॉक्सिक 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होनी है। इसमें यश लीड रोल में नजर आएंगे। फिल्म को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। यह एक मेगा बजट फिल्म है इसे लेकर यश के फैंस काफी उत्साहित भी हैं। वैसे इस फिल्म का मुकाबला थिएटर में फिल्म धुरंधर 2 से होने वाला है।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।

  • कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल

    कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल


    मंडला । मंडला जिले के चौकी पिंडरई क्षेत्र में शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें 21 वर्षीय युवक करण यादव की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब वह परीक्षा देने जबलपुर जाने के लिए बाइक से पिंडरई जा रहा था।

    घटना के अनुसार करण यादव बाइक पर अपने पिता बसंत यादव के साथ जा रहा था। जैसे ही वह तुमेगांव मंदिर के पास पहुंचे घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी पिकअप वाहन दिखाई नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि बाइक सीधे पिकअप वाहन से टकरा गई। हादसे के समय पिकअप वाहन पूरी तरह से खड़ा था और कोहरे के कारण करण को उसे देखने का मौका नहीं मिला।

    इस गंभीर हादसे में करण को बहुत गंभीर चोटें आईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके पिता बसंत यादव को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नैनपुर में भर्ती कराया गया।
    घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

    प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है लेकिन घना कोहरा और सड़क पर खड़ी गाड़ी को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
    अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है खासकर कोहरे जैसे मौसम में।