Author: bharati

  • हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस

    हंता वायरस का बढ़ता खतरा: कैसे फैलता है संक्रमण, किन देशों में पहुंचा और कितना जानलेवा है यह वायरस



    नई दिल्ली। दुनिया एक बार फिर एक नए स्वास्थ्य संकट की आशंका से जूझ रही है। हंता वायरस के ताज़ा मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप में संक्रमण और मौतों की पुष्टि के बाद यह वायरस फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    WHO की विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरकोव ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस न तो कोविड-19 जैसा है और न ही सामान्य इन्फ्लूएंजा। यह वायरस अलग तरीके से फैलता है और इसकी प्रकृति भी अलग है। अच्छी बात यह है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता, जिससे इसका व्यापक प्रसार सीमित रहता है।

    कैसे शुरू हुआ संक्रमण
    ताजा मामला एक डच झंडे वाले क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जो अटलांटिक और दक्षिणी महासागर के मार्ग से गुजर रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के दौरान 70 वर्षीय एक यात्री में शुरुआती लक्षण दिखे, जिनमें बुखार, सिरदर्द और कमजोरी शामिल थे। बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद दो और मौतों की पुष्टि हुई, जिनमें एक दक्षिण अफ्रीका और दूसरी जर्मनी की महिला यात्री शामिल थी।

    जहाज पर लगभग 150 लोग सवार थे, जो अर्जेंटीना से यात्रा पर निकले थे। यात्रा के दौरान सेंट हेलेना और अन्य द्वीपों पर कुछ यात्रियों ने उतरकर संपर्क किया, जिससे संक्रमण के फैलाव की आशंका और जांच तेज कर दी गई।

    किन देशों तक पहुंचा मामला
    WHO और संबंधित स्वास्थ्य एजेंसियों ने कई देशों को अलर्ट किया है, जिनमें शामिल हैं:

    अर्जेंटीना (जहां से यात्रा शुरू हुई)

    सेंट हेलेना

    दक्षिण अफ्रीका

    नीदरलैंड

    ब्रिटेन

    केप वर्डे

    इसके अलावा कनाडा, अमेरिका, जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, सिंगापुर और न्यूजीलैंड जैसे देशों को भी जानकारी दी गई है क्योंकि इनके नागरिक इस यात्रा से जुड़े हुए थे या संपर्क में आए थे।

    हंता वायरस कितना खतरनाक है
    हंता वायरस को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है।
    पहला “ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस” जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है और मुख्य रूप से किडनी पर असर डालता है। इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम होती है, लगभग 1% से 15% के बीच।

    दूसरा और अधिक खतरनाक “न्यू वर्ल्ड हंता वायरस” है, जो अमेरिका में पाया जाता है। यह हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम का कारण बनता है, जिसमें फेफड़ों में तेजी से तरल भर जाता है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। इसकी मृत्यु दर 35% से 50% तक हो सकती है, जिससे यह बेहद घातक संक्रमणों में शामिल है।

    कैसे फैलता है वायरस
    यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित धूल या सतहों को सांस के जरिए शरीर में लेने से संक्रमण हो सकता है। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में इसका संक्रमण दुर्लभ माना जाता है।

    क्या कहती हैं स्वास्थ्य एजेंसियां
    WHO का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और यात्रियों की ट्रैकिंग की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समय पर पहचान और सावधानी से इसके फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

  • सुरक्षा ढांचे में अहम नियुक्ति: लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे भारत के नए सीडीएस का दायित्व

    सुरक्षा ढांचे में अहम नियुक्ति: लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे भारत के नए सीडीएस का दायित्व

    नई दिल्ली ।
    भारतीय रक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया है। इस निर्णय के साथ देश की सैन्य संरचना में एक नए चरण की शुरुआत मानी जा रही है, जहां तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त रणनीति को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा। वे मौजूदा सीडीएस का स्थान संभालेंगे और आने वाले समय में भारतीय सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

    लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि का सैन्य जीवन बेहद लंबा और अनुभवपूर्ण रहा है। उन्होंने वर्ष 1985 में गढ़वाल राइफल्स के साथ भारतीय सेना में अपने करियर की शुरुआत की थी। अपने लगभग चार दशक लंबे सेवा काल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और विभिन्न सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई। सीमावर्ती क्षेत्रों में उनकी रणनीतिक समझ और संचालन क्षमता ने उन्हें एक मजबूत और भरोसेमंद सैन्य नेता के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मोर्चों पर अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रभावशाली परिचय दिया है।

    अपने करियर में वे सेना के उप-प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी कार्य कर चुके हैं और मध्य कमान के प्रमुख के रूप में भी उन्होंने बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं। सैन्य संचालन और संगठनात्मक सुधारों में उनकी भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। उनकी नेतृत्व शैली में स्पष्टता, अनुशासन और रणनीतिक सोच का संतुलन देखने को मिलता है, जो उन्हें अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से अलग बनाता है।

    सीडीएस बनने से पहले वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने देश की सुरक्षा रणनीतियों और रक्षा नीतियों को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि भी काफी सशक्त है, जिसमें रक्षा अध्ययन और रणनीतिक प्रबंधन से जुड़ी उच्च शिक्षा शामिल है। उन्हें सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं, जो उनके लंबे और सफल करियर को दर्शाते हैं।

    नए सीडीएस के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी तीनों सेनाओं को थिएटर कमांड प्रणाली के तहत एकीकृत करना होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी युद्ध या आपात स्थिति में सेना, नौसेना और वायु सेना मिलकर एक साझा रणनीति के तहत तेजी से कार्रवाई कर सकें। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों के बीच उनकी नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण से उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रक्षा व्यवस्था और अधिक आधुनिक, संगठित और प्रभावशाली बनेगी। आने वाले समय में उनके नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति को नई दिशा और मजबूती मिलने की संभावना है।

  • चीन दौरे पर जा सकते हैं बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, राजदूत बोले- द्विपक्षीय रिश्तों में आएगा नया मोड़

    चीन दौरे पर जा सकते हैं बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, राजदूत बोले- द्विपक्षीय रिश्तों में आएगा नया मोड़



    नई दिल्ली। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित चीन यात्रा को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। चीन के राजदूत याओ वेन ने संकेत दिया है कि अगर यह दौरा होता है तो यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। यह बयान ढाका में आयोजित ‘चीन-बांग्लादेश शासन अनुभव आदान-प्रदान’ विषय पर हुई एक गोलमेज बैठक के दौरान दिया गया।

    राजदूत याओ वेन ने कहा कि चीन बांग्लादेश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और हर परिस्थिति में उसके विकास और स्थिरता का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक सहयोग पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

    उन्होंने बांग्लादेश के ‘वन चाइना’ नीति के समर्थन के लिए आभार जताते हुए इसे दोनों देशों के भरोसेमंद रिश्तों की नींव बताया। साथ ही कहा कि उच्च-स्तरीय संपर्क लगातार बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में यह सहयोग और गहरा होगा।

    आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए चीनी राजदूत ने बताया कि हाल ही में चीनी कंपनियों ने बांग्लादेश में बड़े स्तर पर निवेश किया है, जिससे हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर बने हैं। इसके अलावा तीस्ता नदी प्रोजेक्ट, बंदरगाह आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में भी चीन सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    याओ वेन के अनुसार, दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही भी तेजी से बढ़ रही है और इस साल बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को चीन का वीजा दिया गया है। इससे व्यापार और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा मिला है।

    हालांकि अभी तक प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा की आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन इस संभावित दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दक्षिण एशिया की कूटनीतिक रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है, खासकर उस समय जब क्षेत्रीय देशों के बीच संतुलन और साझेदारी की दिशा बदल रही है।

  • यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं

    यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं


    नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय से गोपनीय रखी गई यूएफओ (UFO) से जुड़ी फाइलों का पहला बड़ा सेट सार्वजनिक कर दिया गया है। ट्रम्प प्रशासन के निर्देश पर जारी इन दस्तावेजों में सैकड़ों वीडियो, फोटो और सरकारी रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनमें नासा के अपोलो मिशन से जुड़ी कई रहस्यमयी घटनाओं का भी उल्लेख है। इन खुलासों के बाद एक बार फिर एलियन जीवन और अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना (UAP) को लेकर बहस तेज हो गई है।

    जारी दस्तावेजों में सबसे ज्यादा चर्चा अपोलो 12 और अपोलो 17 मिशन से जुड़ी तस्वीरों और संवादों की हो रही है। एक तस्वीर में चांद की सतह के ऊपर आसमान में तीन चमकदार बिंदुओं के दिखने का दावा किया गया है, जिन्हें अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया जा सका है।

    सबसे दिलचस्प हिस्सा अपोलो 17 मिशन का रिकॉर्ड बताया जा रहा है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री उड़ान के दौरान अपने यान के पास अजीब चमकती वस्तुओं को देखने की बात कर रहे हैं। रिकॉर्ड में एक अधिकारी को यह कहते सुना जा सकता है कि “मेरी खिड़की के बाहर कई चमकती चीजें दिख रही हैं, जैसे आतिशबाजी हो रही हो।” हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ये दृश्य अक्सर अंतरिक्ष मलबे, प्रकाश परावर्तन या तकनीकी कारणों से भी हो सकते हैं।

    इन फाइलों को जारी करने का आदेश खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने रक्षा विभाग को दिया था, ताकि UFO और UAP से जुड़ी सभी उपलब्ध जानकारी को सार्वजनिक किया जा सके। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि किसी निष्कर्ष को साबित करना।

    पेंटागन द्वारा पहले भी कई बार स्पष्ट किया गया है कि अब तक किसी भी UFO घटना को एलियन जीवन या विदेशी तकनीक का ठोस सबूत नहीं माना गया है। कई मामलों की जांच में सामने आया कि रहस्यमयी दिखने वाली वस्तुएं दरअसल सैन्य ड्रोन, उपग्रह, गुब्बारे या प्राकृतिक घटनाएं थीं।

    नए जारी दस्तावेजों में 1999 के आसपास अमेरिकी सैन्य विमानों के पास देखी गई रहस्यमयी उड़ती वस्तुओं का भी जिक्र है। कुछ पायलटों ने दावा किया कि उन्होंने तेज रफ्तार से चलती चमकदार वस्तुओं को अपने विमान के पास देखा, जिन्हें कुछ समय तक रडार पर ट्रैक किया गया लेकिन बाद में वे गायब हो गईं।

    इसी तरह एक रिपोर्ट में 2024 में ओमान की खाड़ी के ऊपर इंफ्रारेड सेंसर द्वारा रिकॉर्ड की गई एक तेज रफ्तार “बूंद जैसी वस्तु” का भी उल्लेख है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि ये सभी केवल अवलोकन और शुरुआती रिपोर्टें हैं, किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

    इस बीच, सोशल मीडिया पर इन खुलासों के बाद एलियन जीवन को लेकर चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं। लेकिन वैज्ञानिक समुदाय लगातार यही कह रहा है कि किसी भी दावे को साबित करने के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अगले हफ्ते इस्लामाबाद में नई दौर की बातचीत हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक 14-बिंदु ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान के जवाब का इंतजार है और अगर प्रगति हुई तो समझौते की दिशा आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को रोकने के लिए किसी समझौते पर तैयार नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोका है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी दखल पर क्षेत्र में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।

    UAE ने भी दावा किया है कि ईरान ने उसके ऊपर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते तेल और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    रूस ने अमेरिका और बहरीन के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस लेने की मांग की है, जबकि चीन और अन्य देशों की स्थिति इस पूरे मामले में अलग-अलग नजर आ रही है।

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप



    नई दिल्ली। चीन की ओर से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मदद देने के दावे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चीनी सरकारी मीडिया के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि इंजीनियरों ने पाकिस्तान को तकनीकी सपोर्ट और रियल-टाइम इनपुट दिए थे। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और चीनी टीवी इंटरव्यू में दावा किया गया है कि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता की बात स्वीकार की है। कहा गया कि टीम का काम J-10CE जैसे लड़ाकू विमानों और उनके सिस्टम को ऑपरेशनल रूप से तैयार रखना था। यह भी दावा है कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10CE फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें AVIC की सहयोगी कंपनियां बनाती हैं। इसी दौरान रियल-टाइम डेटा सपोर्ट और सैटेलाइट इनपुट देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

    भारत की ओर से पहले ही यह कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मदद दी थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने अपने नेटवर्क और सिस्टम के जरिए क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखी और पाकिस्तान को जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं चीन ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब आए इंटरव्यू और रिपोर्ट्स ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी गहरा है और J-10CE जैसे एडवांस फाइटर जेट्स इसकी बड़ी मिसाल हैं। पाकिस्तान पहले से ही चीन से बड़े पैमाने पर हथियार आयात करता रहा है और हाल के वर्षों में यह निर्भरता और बढ़ी है। इसी बीच चीन द्वारा नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 को पाकिस्तान को देने की चर्चा ने भी क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान चीन ने अपने तकनीकी और सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थिति पर नजर रखी, जिसे कुछ विशेषज्ञ “लाइव लैब” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन सभी दावों पर अभी तक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

  • CSK में कैसे हुई अश्विन की एंट्री? पूर्व स्पिनर ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    CSK में कैसे हुई अश्विन की एंट्री? पूर्व स्पिनर ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपने आईपीएल करियर और शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक घरेलू टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन और सही समय पर मिले अवसर ने उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स में जगह दिलाई।

    अश्विन ने बताया कि 2009 की आईपीएल नीलामी के दौरान जब चेन्नई सुपर किंग्स ने श्रीलंकाई दिग्गज मुथैया मुरलीधरन को टीम में शामिल किया था, तब उन्हें लगा था कि टीम में जगह बनाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। उस समय टी20 क्रिकेट में स्पिनरों की भूमिका को लेकर भी काफी संदेह था।

    उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि चेन्नई के चेपॉक मैदान पर एक अहम घरेलू मैच के दौरान उन्होंने 6 विकेट झटके थे। इस प्रदर्शन ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उस मैच में मौजूद काशी विश्वनाथन और पूर्व भारतीय क्रिकेटर क्रिस श्रीकांत ने उनके खेल की तारीफ की थी और यहीं से उनका नाम चयनकर्ताओं की नजर में आया।

    अश्विन ने बताया कि उनके गुरु रहे दिवंगत वीबी चंद्रशेखर ने उनके करियर में अहम भूमिका निभाई। चंद्रशेखर ने उनका खेल पिछले कई वर्षों से देखा था और उनके टैलेंट को पहचानते हुए सीएसके से जोड़ने में मदद की। इसके बाद उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स का कॉन्ट्रैक्ट मिला और यहीं से उनके आईपीएल सफर की शुरुआत हुई।

    अश्विन ने यह भी कहा कि जब उन्हें बाद में सीएसके में दोबारा खेलने का मौका मिला, तो उनका सपना था कि वे अपने करियर का अंत उसी टीम के साथ करें, जहां से शुरुआत हुई थी। उन्होंने चेपॉक स्टेडियम में अपने आईपीएल करियर के अंत की भी इच्छा जताई थी, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका।

    अपने करियर पर नजर डालते हुए अश्विन ने कहा कि सीएसके ने उन्हें एक पहचान दी और शुरुआती अवसर ने उनके पूरे क्रिकेट जीवन की दिशा तय की। उन्होंने यह भी माना कि सही समय पर मिले मौके और मार्गदर्शन ने उन्हें एक सफल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने में मदद की।

  • IPL 2026: DC vs KKR – टॉस जीतकर केकेआर ने चुनी गेंदबाजी, दिल्ली ने किए 2 बदलाव

    IPL 2026: DC vs KKR – टॉस जीतकर केकेआर ने चुनी गेंदबाजी, दिल्ली ने किए 2 बदलाव


    नई दिल्ली। अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे आईपीएल 2026 के 51वें मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स (DC) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) आमने-सामने हैं। टॉस के दौरान केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने जीत हासिल करते हुए पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।
    टॉस जीतने के बाद अजिंक्य रहाणे ने कहा कि पिच को पढ़ना आसान नहीं है और पिछले कुछ मैचों में विकेट के व्यवहार को देखते हुए पहले गेंदबाजी करना बेहतर विकल्प रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि टीम ने इस मुकाबले के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया है।
    दूसरी ओर दिल्ली कैपिटल्स ने अपनी टीम में दो अहम बदलाव किए हैं। विपराज निगम को करुण नायर की जगह शामिल किया गया है, जबकि मुकेश कुमार को नटराजन के स्थान पर मौका मिला है। कप्तान अक्षर पटेल ने कहा कि दिल्ली की पिच पर पहले बल्लेबाजी करना फायदेमंद रहता है, लेकिन टीम संतुलन को देखते हुए तीन स्पिनरों के साथ उतर रही है।
    दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है क्योंकि टीम को प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए हर हाल में जीत जरूरी है। अब तक खेले गए 10 मैचों में दिल्ली ने 4 जीत और 6 हार दर्ज की हैं। टीम का बल्लेबाजी क्रम निरंतर प्रदर्शन नहीं कर पाया है, जबकि गेंदबाजी में भी स्थिरता की कमी दिखी है।
    वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रदर्शन भी इस सीजन मिश्रित रहा है। 9 मैचों में केवल 3 जीत के साथ टीम अंक तालिका में नीचे है, हालांकि पिछले तीन मुकाबलों में लगातार जीत ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है। रिंकू सिंह और वरुण चक्रवर्ती इस समय अच्छी फॉर्म में नजर आ रहे हैं, जबकि गेंदबाजी में भी टीम ने सुधार दिखाया है।
    केकेआर की प्लेइंग इलेवन में सुनील नरेन, कैमरून ग्रीन और अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं, जो टीम को मजबूत संतुलन प्रदान कर रहे हैं। दिल्ली की टीम में केएल राहुल, अक्षर पटेल और मिचेल स्टार्क जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं, जो मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
    अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या केकेआर की जीत की लय जारी रहती है या दिल्ली कैपिटल्स प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखने में सफल होती है।
  • शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव

    शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव


    नई दिल्ली। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है।

    पानी की कमी का सबसे पहला असर शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई मामलों में ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत आने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं।

    त्वचा पर भी डिहाइड्रेशन का सीधा असर दिखाई देता है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और डल हो सकती है। साथ ही होंठ फटने और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ने की समस्या भी देखी जा सकती है।

    पाचन तंत्र पर भी इसका असर पड़ता है। पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज, पेट भारी लगना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पानी आंतों के सुचारू कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी पाचन को धीमा कर देती है।

    इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर 7-8 गिलास पानी रोजाना पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

    पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, फलों का जूस और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है।

    गर्मियों के मौसम में पसीना ज्यादा निकलने के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष रूप से पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए।

    सही मात्रा में पानी पीना न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि त्वचा, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।