Author: bharati

  • US-Iran War: भारतीय नाविकों की मौत पर उठे सवाल, होर्मुज में 6 की जा चुकी हैं जान

    US-Iran War: भारतीय नाविकों की मौत पर उठे सवाल, होर्मुज में 6 की जा चुकी हैं जान


    तेहरान।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (America-Iran War) में भारतीय नाविकों (Indian sailors) की मौत के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 6 भारतीयों की मौत हो चुकी है। वहीं बीते एक सप्ताह में भारतीय नाविकों वाले 3 जहाजों पर हमले हुए हैं। अमेरिका (America) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में ओमान के तट के पास इन जहाजों को लगातार निशाना बना रहा है। बीते बुधवार को पालाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर हुए हालिया हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। ये नाविक हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। इसके बाद अब इलाके में तैनात भारतीयों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। ऐसे में समझते हैं कि इस वक्त कितने भारतीय नाविक समंदर में तैनात हैं और किस तरह उन्हें हर रोज अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है।

    आंकड़ों की बात करें तो भारतीय नाविक आज अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री की रीढ़ बन चुके हैं। भारत मर्चेंट नेवी वर्कफोर्स के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल मर्चेंट नेवी वर्कफोर्स के मामले में भारत की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है। इसके अलावा इस वक्त 3 लाख से अधिक भारतीय अंतरराष्ट्रीय कंटेनर जहाजों, बल्क कैरियर और तेल टैंकरों पर सक्रिय रूप से तैनात हैं।

    ये भारतीय अपनी बेहतरीन ट्रेनिंग, फर्राटेदार अंग्रेजी और तकनीक में निपुण होने की वजह से वैश्विक शिपिंग कंपनियां की पहली पसंद होते हैं। यही वजह है कि फारस की खाड़ी, लाल सागर या ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले लगभग हर बड़े कमर्शियल जहाज पर भारतीय नाविक होते हैं।


    क्यों जान जोखिम में डालने को मजबूर?

    हर साल हजारों भारतीय युवा इस नौकरी की तरफ क्यों आते हैं? इसके पीछे कई वजहें हैं। विदेशी झंडे वाले जहाजों पर मिलने वाली सैलरी डॉलर में होती है। यह सैलरी भारत में मिलने वाली किसी भी शुरुआती कॉर्पोरेट या इंजीनियरिंग नौकरी की तुलना में कई गुना अधिक होती है। वहीं भारतीय कानूनों के अनुसार, अगर कोई नाविक एक वित्तीय वर्ष में 183 दिनों से अधिक देश से बाहर बिताता है, तो उसे NRI का दर्जा मिलता है और कमाई पूरी तरह से टैक्स-फ्री हो जाती है। इस तरह युवा इस जॉब की तरफ आकर्षित होते हैं।


    नहीं होता रास्ता बदलने का ऑप्शन

    अब समझते हैं कि नाविकों को रिस्क क्यों लेना पड़ता है। जहाजों पर काम करने वाले नाविकों के लिए खतरा तब बढ़ जाता है जब वे अनजाने में ‘ग्रे फ्लीट’ या ‘डार्क फ्लीट’ का हिस्सा बन जाते हैं। ये वैसे संदिग्ध जहाज होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर चोरी-छिपे तेल और ईंधन की सप्लाई करते हैं। इनमें क्रू मेंबर्स के पास यह चुनने का अधिकार बहुत कम या न के बराबर होता है कि उनका जहाज किस देश से होकर गुजरेगा। रूट शिपिंग कंपनियां ही तय करती हैं। समुद्री यूनियनों ने लगातार यह मांग उठाई है कि नाविकों को संकट की घड़ी में हाई-रिस्क जोन में जाने से इनकार करने का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियम न होने के कारण भारतीय नाविकों को मजबूरन इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

  • जेलर 2 में दिखेगा ऋतिक रोशन का धमाकेदार कैमियो, चेन्नई में रजनीकांत के साथ हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस करेंगे शूट

    जेलर 2 में दिखेगा ऋतिक रोशन का धमाकेदार कैमियो, चेन्नई में रजनीकांत के साथ हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस करेंगे शूट


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि देश के सबसे बड़े फिल्म स्टार्स में शुमार रजनीकांत और ऋतिक रोशन लगभग चालीस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर एक साथ बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। निर्देशक नेल्सन दिलीप कुमार के निर्देशन में बन रही बहुप्रतीक्षित और ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी फिल्म ‘जेलर 2’ में ऋतिक रोशन की एंट्री हो चुकी है। फिल्म उद्योग के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, इस फिल्म में ऋतिक एक बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण कैमियो भूमिका में दिखाई देंगे, जो फिल्म की कहानी को एक नया मोड़ देने का काम करेगा।

    इस ऐतिहासिक रीयूनियन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज से ठीक चालीस साल पहले वर्ष 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘भगवान दादा’ में इन दोनों कलाकारों ने पहली बार एक साथ स्क्रीन साझा की थी। हालांकि, उस समय ऋतिक रोशन महज एक बाल कलाकार थे और उन्होंने अपने पिता राकेश रोशन के निर्माण और नाना जे. ओमप्रकाश के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रजनीकांत के बेटे की भूमिका निभाई थी। अब चार दशक बीत जाने के बाद, जब ऋतिक खुद भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और स्थापित सुपरस्टार्स में से एक बन चुके हैं, रजनीकांत के साथ उनका यह दोबारा स्क्रीन साझा करना प्रशंसकों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है।

    वैरायटी इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेकर्स और ऋतिक रोशन के बीच पिछले कई हफ्तों से इस विशेष भूमिका को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। पटकथा और किरदार की महत्ता को समझने के बाद आखिरकार अभिनेता ने इस प्रोजेक्ट के लिए आधिकारिक तौर पर अपनी सहमति दे दी है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, ऋतिक रोशन आगामी 22 और 23 जून को चेन्नई में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ शामिल होंगे और अपने विशिष्ट दृश्यों की शूटिंग पूरी करेंगे। इस दो दिवसीय शूटिंग शेड्यूल को लेकर चेन्नई में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

    फिल्म के मुख्य विजुअल्स की शूटिंग शुरू होने से पहले मेकर्स ऋतिक रोशन के साथ कई तरह के लुक टेस्ट आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि निर्देशक नेल्सन इस फिल्म में ऋतिक रोशन को एक बिल्कुल नए और अनोखे अवतार में पेश करना चाहते हैं, जिसे दर्शकों ने इससे पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा होगा। इस विशेष कैमियो को बहुत बड़े पैमाने पर फिल्माया जाएगा, जिसमें दर्शकों को एक हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेगा, जो पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स से लैस होगा।

    पटकथा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कहानी के एक बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण मोड़ पर ऋतिक रोशन के किरदार की एंट्री होगी। जब फिल्म के मुख्य नायक यानी रजनीकांत का चरित्र एक बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थिति में फंसा होगा, तब ऋतिक का किरदार संकटमोचक बनकर उभरेगा और कहानी की दिशा बदल देगा। यह दृश्य फिल्म का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अभिनेता ऋतिक रोशन के करियर ग्राफ की बात करें तो अगस्त 2025 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘वॉर 2’ के बाद ‘जेलर 2’ उनके करियर का अगला सबसे बड़ा और नया प्रोजेक्ट होने जा रहा है, जिसे लेकर सिनेमाई हलकों में भारी उत्साह है।

    कुछ समय पहले प्रदर्शित हुई एक डाक्यूमेंट्री सीरीज के दौरान ऋतिक ने रजनीकांत के साथ बचपन में काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि मात्र दस साल की उम्र में जब वे ‘भगवान दादा’ की शूटिंग कर रहे थे, तो अभिनय के दौरान होने वाली गलतियों का दोष रजनीकांत सहर्ष अपने ऊपर ले लेते थे ताकि एक बच्चे के रूप में उनके मन में कोई हीनभावना या झिझक पैदा न हो। अब जब दोनों कलाकार परिपक्वता के इस दौर में दोबारा एक साथ आ रहे हैं, तो बॉक्स ऑफिस पर एक नया रिकॉर्ड बनने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

  • दीपिका पादुकोण की तारीफ में बोलीं कंगना रनौत: ‘बॉलीवुड में बढ़ रही है नेगेटिविटी और इनसिक्योरिटी’

    दीपिका पादुकोण की तारीफ में बोलीं कंगना रनौत: ‘बॉलीवुड में बढ़ रही है नेगेटिविटी और इनसिक्योरिटी’


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उन्होंने किसी विवादित मुद्दे पर टिप्पणी नहीं की, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ती असुरक्षा, जलन और कलाकारों के बीच कम होते भाईचारे को लेकर अपनी राय साझा की है। खास बात यह रही कि बातचीत के दौरान कंगना ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की खुलकर तारीफ की और बताया कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में उनसे कई सकारात्मक बातें सीखीं।

    एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा कि उन्हें अक्सर यह देखकर आश्चर्य होता है कि कई लोग कितनी असुरक्षा की भावना के साथ जीवन जीते हैं। उनके अनुसार किसी व्यक्ति के पास क्या है और क्या नहीं है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी मानसिकता होती है। उन्होंने कहा कि इंसान के भीतर जलन, असुरक्षा या दूसरों से खुद की तुलना करने जैसी भावनाएं होना सामान्य बात है, लेकिन इन भावनाओं को अपने ऊपर हावी होने देना या उन पर नियंत्रण रखना व्यक्ति की अपनी पसंद होती है।

    कंगना का मानना है कि नकारात्मक भावनाएं किसी भी व्यक्ति की प्रतिभा, आकर्षण और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे लोगों को देखा है जो बेहद प्रतिभाशाली, आकर्षक और सफल हैं, लेकिन असुरक्षा की भावना उन्हें भीतर से कमजोर बना देती है। यही कारण है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही यह तय कर लिया था कि वे ऐसी भावनाओं को अपने व्यक्तित्व पर हावी नहीं होने देंगी।

    अभिनेत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कम अनुभवी या कम प्रतिभाशाली है तो वे उसकी मदद करने और उसे आगे बढ़ाने की कोशिश करती हैं। वहीं यदि कोई उनसे अधिक प्रतिभाशाली है तो वे उससे सीखने में विश्वास रखती हैं। उनके अनुसार सीखने और आगे बढ़ने की यह प्रक्रिया ही व्यक्ति को बेहतर बनाती है, जबकि असुरक्षा केवल विकास की राह में बाधा बनती है।

    बातचीत के दौरान कंगना ने अपने शुरुआती संघर्षों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे बहुत कम उम्र में अपने घर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में आई थीं, तब उन्हें इस दुनिया के बारे में बहुत कम जानकारी थी। गांव से आने और सीमित अनुभव होने के कारण कई चीजें उनके लिए चुनौतीपूर्ण थीं। ऐसे समय में उन्होंने अपने आसपास के लोगों को देखकर और उनसे सीखकर खुद को विकसित किया।

    इसी संदर्भ में उन्होंने दीपिका पादुकोण का उदाहरण दिया। कंगना ने कहा कि दीपिका का खेलों से जुड़ा बैकग्राउंड रहा है और उन्होंने हमेशा उनकी फिटनेस, अनुशासन और समर्पण की भावना को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि एक विज्ञान पृष्ठभूमि से आने वाली लड़की होने के बावजूद उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से बहुत कुछ सीखा और दीपिका उनमें से एक हैं। कंगना के अनुसार किसी व्यक्ति की अच्छी बातों को स्वीकार करना और उसकी प्रशंसा करना सीखने की पहली सीढ़ी है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई किसी की खूबसूरती, प्रतिभा या विशेष गुणों को स्वीकार ही नहीं करेगा, तो उनसे सीखने का अवसर भी खो देगा। कंगना का मानना है कि प्रशंसा करने से व्यक्ति छोटा नहीं होता, बल्कि उसका दृष्टिकोण व्यापक होता है।

    अंत में कंगना ने वर्तमान पीढ़ी के कलाकारों के बीच बढ़ती दूरी पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पहले के दशकों में कलाकारों के बीच दोस्ती और अपनापन अधिक दिखाई देता था, जबकि आज बातचीत और आपसी सराहना का माहौल कम होता जा रहा है। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि आजकल लोग एक-दूसरे की खुलकर तारीफ करने से भी बचते हैं, जबकि सकारात्मकता और सहयोग किसी भी रचनात्मक क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।

  • सलमान खान के फार्महाउस विवाद में हाईकोर्ट सख्त: पड़ोसी को सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश

    सलमान खान के फार्महाउस विवाद में हाईकोर्ट सख्त: पड़ोसी को सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और उनके पनवेल स्थित फार्महाउस को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत या विवाद होने पर उसका समाधान संबंधित अधिकारियों और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक या विवादित सामग्री प्रसारित करके।

    मामला सलमान खान और उनके पड़ोसी केतन कक्कड़ के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को किसी मुद्दे को लेकर शिकायत है तो वह पहले संबंधित सरकारी अथॉरिटी या सक्षम संस्थाओं के पास क्यों नहीं जाता और सीधे सोशल मीडिया का सहारा क्यों लेता है।

    जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग अभिव्यक्ति के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ, चाहे वह कोई प्रसिद्ध हस्ती ही क्यों न हो, अपमानजनक या आधारहीन आरोपों से भरी सामग्री सार्वजनिक मंचों पर साझा करे। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया की पहुंच बहुत व्यापक है और ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और सावधानी बरतना आवश्यक है।

    मामले में अदालत ने केतन कक्कड़ द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई कुछ पोस्ट और वीडियो को लेकर आपत्ति जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि विवादित सामग्री को हटाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि किसी तीसरे पक्ष ने ऐसी सामग्री अपलोड की है, तो संबंधित इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को भी उसे हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

    गौरतलब है कि केतन कक्कड़ का आरोप है कि सलमान खान के फार्महाउस से जुड़े कुछ निर्माण कार्य पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं और उनकी संपत्ति तक पहुंच से जुड़े अधिकार प्रभावित हुए हैं। कक्कड़ का यह भी दावा है कि उन्होंने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अभी अदालत द्वारा नहीं दिया गया है और मामला विचाराधीन है।

    दूसरी ओर, सलमान खान का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और मानहानिकारक हैं। अभिनेता ने वर्ष 2022 में अपने पड़ोसी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    यह मामला उस अपील से जुड़ा है जिसमें सलमान खान ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट अब इसी मामले पर सुनवाई कर रहा है। अदालत ने फिलहाल दोनों पक्षों के तर्क सुने हैं और मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की है।

    इस बीच, सलमान खान अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में हैं। अभिनेता हाल ही में फिल्म ‘सिकंदर’ में नजर आए थे और अब आगामी फिल्म ‘मातृभूमि’ की तैयारी में जुटे हैं। इसके अलावा दक्षिण भारतीय अभिनेत्री नयनतारा के साथ उनकी नई फिल्म को लेकर भी फिल्म इंडस्ट्री में काफी उत्सुकता बनी हुई है।

    फिलहाल पनवेल फार्महाउस विवाद पर सभी की निगाहें 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।

  • ‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला

    ‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस पर बोले अक्षय कुमार: 1.8 करोड़ तो दूर, उतना भी नहीं मिला


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद जहां दर्शकों के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं अक्षय कुमार की फीस को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने इस फिल्म के लिए करीब 1.7 से 1.8 करोड़ रुपये की फीस ली है। अब खुद अक्षय कुमार ने इन चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है।

    ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान जब मीडिया ने उनसे उनकी फीस को लेकर सवाल किया तो अक्षय कुमार ने मुस्कुराते हुए इन खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “किसने कहा है ये? आपने कहा 1.7 करोड़? मैंने इतने नहीं लिए, ना ही मुझे इतने मिले हैं।” अक्षय के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    अक्षय कुमार ने इस मौके पर फिल्म से जुड़े अपने भावनात्मक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यादों से जुड़ा एक खास अध्याय है। अभिनेता ने दिवंगत लेखक और निर्देशक नीरज वोहरा को याद करते हुए कहा कि उनकी कॉमेडी की समझ को निखारने में नीरज का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

    अक्षय ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी की बारीकियां तीन दिग्गजों से सीखी हैं प्रियदर्शन, राजकुमार संतोषी और नीरज वोहरा। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार कहा है कि मेरी कॉमेडी की समझ इन तीन लोगों की वजह से बनी है। इनमें नीरज वोहरा का योगदान सबसे ज्यादा रहा है। इस फिल्म से मेरा एक भावनात्मक जुड़ाव भी है क्योंकि इसी सफर में मैं उनके साथ जुड़ा था।”

    कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने निर्माता फिरोज नाडियाडवाला के साथ अपने लंबे रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह उन्हें पिछले 36 वर्षों से जानते हैं। अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह उस समय अक्सर फिरोज नाडियाडवाला के ऑफिस जाया करते थे। दिलचस्प अंदाज में अक्षय ने कहा, “मैं तब भी स्ट्रगल कर रहा था और आज भी स्ट्रगल कर रहा हूं।” उनके इस बयान ने दर्शकों और मीडिया का ध्यान खींचा।

    ‘वेलकम टू द जंगल’ मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के अलावा कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं। फिल्म में सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, रवीना टंडन, लारा दत्ता, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    गौरतलब है कि यह साल 2007 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘वेलकम’ का तीसरा भाग है। पहली फिल्म में अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर, नाना पाटेकर और परेश रावल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। इसके बाद 2015 में ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुई थी। अब लगभग एक दशक बाद ‘वेलकम टू द जंगल’ के जरिए यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शकों को एक बार फिर हंसी और मनोरंजन का भरपूर डोज देने का वादा करती है।

  • FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया

    FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज मेजबान मेक्सिको के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा। दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराकर अपने अभियान की विजयी शुरुआत की। ऐतिहासिक एजटेका स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले को देखने के लिए 80 हजार से अधिक दर्शक मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी टीम का पूरे जोश के साथ समर्थन किया।

    मैच की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक तेवर अपनाए और दक्षिण अफ्रीका की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। घरेलू दर्शकों के उत्साह से भरी मेक्सिकन टीम ने नौवें मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली। सऊदी प्रो लीग में शानदार प्रदर्शन करने वाले जूलियन क्विनोनेस ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और मेक्सिको को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्टेडियम तालियों और नारों से गूंज उठा।

    पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन मेक्सिको की मजबूत रक्षापंक्ति और मिडफील्ड ने उसके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। मेक्सिको लगातार आक्रमण करता रहा और दूसरे हाफ में भी उसने अपना दबदबा कायम रखा।

    मैच के 66वें मिनट में अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार हेडर के जरिए दूसरा गोल दागकर मेक्सिको की बढ़त दोगुनी कर दी। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 46वां गोल था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने मेक्सिको के महान स्ट्राइकर जारेड बॉर्गेटी की बराबरी कर ली। अब वह देश के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर जेवियर “चिचारिटो” हर्नांडेज़ से केवल छह गोल पीछे हैं।

    इस मुकाबले में कोलंबिया में जन्मे 29 वर्षीय जूलियन क्विनोनेस भी आकर्षण का केंद्र रहे। मेक्सिको की राष्ट्रीय टीम के लिए यह उनका पहला विश्व कप मुकाबला था और उन्होंने अपने डेब्यू को गोल के साथ यादगार बना दिया। क्विनोनेस उन छह खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्होंने इस मैच के जरिए विश्व कप मंच पर पहला कदम रखा।

    मैच के दौरान अनुशासनहीनता के भी कई दृश्य देखने को मिले। दक्षिण अफ्रीका के स्पेफेलो सिथोल और थेम्बा ज्वाने को रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके कारण टीम को मैच के अंतिम चरण में केवल नौ खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। वहीं इंजरी टाइम में मेक्सिको के डिफेंडर सीजर मोंटेस को भी रेड कार्ड मिला। इसके बावजूद दक्षिण अफ्रीका मेक्सिको की बढ़त को कम नहीं कर सकी और मुकाबला 2-0 से हार गई।

    यह जीत मेक्सिको के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के कतर विश्व कप में टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी। ऐसे में घरेलू मैदान पर विश्व कप अभियान की जीत से शुरुआत टीम के आत्मविश्वास को नई मजबूती देगी।

    गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसके अलावा मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका संयुक्त रूप से इस विश्व कप की मेजबानी कर रहे हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन माना जा रहा है।

    मेक्सिको की जीत ने टूर्नामेंट को रोमांचक शुरुआत दी है और अब दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें आगामी मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।

  • 75 की उम्र में पहली बार विलेन बनेंगी शबाना आजमी, ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी से होगी दमदार टक्कर

    75 की उम्र में पहली बार विलेन बनेंगी शबाना आजमी, ‘आवारापन 2’ में इमरान हाशमी से होगी दमदार टक्कर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में शामिल ‘आवारापन’ के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब 19 साल बाद इस फिल्म का सीक्वल ‘आवारापन 2’ दर्शकों के बीच आने जा रहा है और इस बार फिल्म में एक ऐसा चेहरा जुड़ा है, जिसने इसकी चर्चा को कई गुना बढ़ा दिया है। हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी फिल्म में एक दमदार नेगेटिव किरदार निभाने जा रही हैं। खास बात यह है कि लंबे और शानदार फिल्मी करियर के बावजूद शबाना आजमी पहली बार पर्दे पर पूर्ण रूप से विलेन के रूप में दिखाई देंगी।

    फिल्म में इमरान हाशमी एक बार फिर अपने लोकप्रिय किरदार ‘शिवम’ के रूप में नजर आएंगे। वहीं दिशा पाटनी भी अहम भूमिका में दिखाई देंगी। लेकिन सबसे ज्यादा उत्सुकता शबाना आजमी के किरदार ‘नफीसा’ को लेकर है, जिसे अंडरवर्ल्ड की बेहद प्रभावशाली और खतरनाक महिला सरगना के रूप में पेश किया जाएगा। फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि यह किरदार कहानी का सबसे मजबूत और यादगार पहलू बन सकता है।

    जानकारी के अनुसार, फिल्म के लेखक बिलाल सिद्दीकी ने शुरुआत में इस किरदार को एक पुरुष अंडरवर्ल्ड डॉन के रूप में तैयार किया था। हालांकि बाद में निर्माता विशेष भट्ट ने कहानी में महिला विलेन को शामिल करने का सुझाव दिया। इस विचार ने पूरी कहानी की दिशा बदल दी और ‘नफीसा’ नाम का एक नया और प्रभावशाली किरदार सामने आया। इसके बाद मेकर्स को लगा कि इस भूमिका के लिए शबाना आजमी से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता।

    विशेष भट्ट के मुताबिक, शबाना आजमी की अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस इस किरदार को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगी। उनका मानना है कि दर्शक शबाना को इस रूप में देखकर चौंक जाएंगे। फिल्म में उनका किरदार केवल खलनायिका नहीं होगा, बल्कि कहानी की दिशा तय करने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण चरित्र होगा।

    फिल्म से जुड़ने का शबाना आजमी का फैसला भी मेकर्स के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने 18 सितंबर 2025 को आधिकारिक रूप से इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने की सहमति दी थी। भट्ट परिवार और शबाना आजमी के बीच वर्षों पुराने पारिवारिक संबंध भी इस सहयोग की एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

    ‘आवारापन 2’ का निर्देशन नितिन कक्कड़ कर रहे हैं, जबकि इसकी पटकथा बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है। फिल्म का निर्माण विशेष भट्ट के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत के मौके पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    गौरतलब है कि ‘आवारापन’ का पहला भाग वर्ष 2007 में रिलीज हुआ था। महेश भट्ट द्वारा निर्मित और मोहित सूरी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने अपने भावनात्मक कथानक, शानदार संगीत और इमरान हाशमी के दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। अब लगभग दो दशक बाद लौट रही इस फ्रेंचाइजी से दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की कसौटी पर कितना सफल साबित होती है।

  • भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन

    भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन


    भोपाल। जय नारायण कॉलेज भोपाल में ‘लीडकॉन 2026’ का सफल आयोजन, छात्रों को मिला करियर और नेतृत्व का मार्गदर्शन
    ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (जेएनसीबीएम), भोपाल में भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के सहयोग से दो दिवसीय “लीडकॉन 2026” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को करियर निर्माण, नेतृत्व विकास तथा उद्योग जगत की वर्तमान आवश्यकताओं से अवगत कराना था।

    बीएमए के वरिष्‍ठ समन्‍वयक अधिकारी एडवोकेट जीके छिब्‍बर ने शुक्रवार को बताया कि आगे भी हमारी इस तरह की गतिविधियों को बड़ी योजना है जिस पर कार्य चल रहा है। उन्‍होंने बताया कि कार्यक्रम में चार प्रतिष्ठित मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों का मार्गदर्शन किया। इनमें अमेरिका स्थित नेटलिंक सॉफ्टवेयर ग्रुप की एचआर प्रोफेशनल मोनिका सांगवानी, आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट के एचआर एवं औद्योगिक संबंध (आईआर) विशेषज्ञ अनिल दुबे, जीआरआई एचआर सॉल्यूशंस के एचआर सलाहकार विजय जी. जैन तथा ल्यूपिन लिमिटेड की पूर्व एचआर प्रमुख विंसी सेबेस्टियन शामिल थीं।

    विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को रोजगार की तैयारी, साक्षात्कार में सफलता, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल तथा कॉर्पोरेट जगत की अपेक्षाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

    समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. आर. जी. चौकसे (पूर्व अधिष्ठाता, अकादमिक एवं छात्र कल्याण, एनआईटीटीटीआर, भोपाल) तथा भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन (बीएमए) के प्रतिनिधि श्री आमिर खान, प्रबंधक, बीएमए विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा महाविद्यालय के वार्षिक समाचार-पत्र (न्यूजलेटर) का विमोचन किया गया। समाचार-पत्र में विद्यार्थियों की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों एवं संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों को स्थान दिया गया है।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद भार्गव, कुलसचिव डॉ. मोहित पंड्या, निदेशक डॉ. रविशंकर मिश्रा, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. मीतू सिंह, प्रवेश निदेशक अरुण पटेल एवं प्राचार्य डॉ. नेहा शर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

    सभी वक्ताओं एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, निरंतर सीखने तथा अपने कौशल का सतत विकास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को उद्योग जगत की अपेक्षाओं को समझने तथा अपने करियर को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    लगभग 250 विद्यार्थियों की सहभागिता वाला यह दो दिवसीय कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं उपयोगी रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय प्रबंधन, भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों की सराहना की गई। लीडकॉन 2026 विद्यार्थियों के लिए भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली आयोजन सिद्ध हुआ।

  • बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता

    बिहार में शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले, NDPS मामलों में 150% उछाल ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। बिहार में वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल का विशेष रूप से महिलाओं ने स्वागत किया था, क्योंकि इससे घरेलू हिंसा, आर्थिक नुकसान और शराब की लत से जुड़ी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, आठ वर्ष बाद सामने आए आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

    शराबबंदी के बावजूद बढ़े शराब सेवन के मामले
    भारत सरकार के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे NFHS-5 (2019-21) के 15.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। इतना ही नहीं, 0.4 प्रतिशत महिलाओं ने भी शराब पीने की बात मानी है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि शराबबंदी के बावजूद शराब सेवन पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है।

    ग्रामीण इलाकों में अधिक प्रभावहीन दिखी शराबबंदी
    सर्वे के मुताबिक ग्रामीण बिहार में 17.1 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 12.8 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि गांवों में अवैध शराब की उपलब्धता और निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण प्रतिबंध का असर अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।

    शराब की जगह नशीली दवाओं की ओर बढ़ा रुझान
    विशेषज्ञों के अनुसार शराबबंदी के बाद नशे के आदी लोगों का एक वर्ग अन्य विकल्पों की ओर मुड़ गया। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के चिकित्सकों ने भी नशीली दवाओं, नींद की गोलियों और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के दुरुपयोग में वृद्धि की ओर संकेत किया है।

    हाल के वर्षों में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेपें भी जब्त की हैं। कोडीन का अधिक मात्रा में सेवन नशे का प्रभाव पैदा करता है और इसे शराब के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

    चार साल में NDPS मामलों में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी
    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए लागू NDPS अधिनियम के तहत बिहार में दर्ज मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।

    वर्ष 2020 में जहां ऐसे 964 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 2,411 तक पहुंच गई। यानी चार वर्षों में करीब 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़े उठा रहे हैं बड़े सवाल
    शराबबंदी लागू होने के समय उम्मीद की गई थी कि इससे नशे की प्रवृत्ति में कमी आएगी, परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और सामाजिक समस्याओं पर नियंत्रण मिलेगा। लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि शराब सेवन पूरी तरह नहीं रुका और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    NFHS और NCRB के आंकड़े मिलकर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या केवल प्रतिबंध लगाने से नशे की समस्या का स्थायी समाधान संभव है, या इसके लिए जागरूकता, पुनर्वास और प्रभावी निगरानी जैसे व्यापक उपायों की भी आवश्यकता है।

  • 15 जून का दुर्लभ ग्रह संयोग चमकाएगा किस्मत, बुधादित्य राजयोग से 4 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

    15 जून का दुर्लभ ग्रह संयोग चमकाएगा किस्मत, बुधादित्य राजयोग से 4 राशियों को मिलेगा विशेष लाभ


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 जून को एक महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तन होने जा रहा है। ग्रहों के राजा सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही बुध देव विराजमान हैं। सूर्य और बुध की युति से अत्यंत शुभ बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा, जिसे करियर, प्रतिष्ठा, बुद्धि और आर्थिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस योग के शुरुआती चरण में चंद्रमा की उपस्थिति से त्रिग्रही योग का प्रभाव भी बनेगा, जिससे इसका शुभ असर और बढ़ जाएगा। इस महासंयोग का सबसे अधिक लाभ चार राशियों के जातकों को मिलने की संभावना है।

    मेष राशि: करियर में तरक्की और कारोबार में लाभ के संकेत
    मेष राशि के जातकों के लिए यह योग कार्यक्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति और वेतन वृद्धि मिलने के योग हैं, जबकि नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी सफलता मिल सकती है।

    व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय नई शुरुआत और विस्तार के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। बाजार में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लाभ के अवसर मजबूत होंगे। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी पुरानी परेशानियों में भी राहत मिलने की संभावना है।

    वृषभ राशि: अटके काम बनेंगे, भाग्य देगा साथ
    वृषभ राशि वालों के लिए यह राजयोग लंबे समय से रुके हुए कार्यों को गति दे सकता है। सरकारी प्रक्रियाओं या अन्य कारणों से अटके मामलों के समाधान के संकेत हैं।

    प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। इसके अलावा धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी तथा लंबी दूरी की यात्राओं के योग भी बन सकते हैं।

    मिथुन राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, मिलेगा मान-सम्मान
    मिथुन राशि में ही यह बुधादित्य राजयोग बनने से इस राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। कार्यस्थल पर नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी और वरिष्ठ अधिकारियों से सराहना प्राप्त हो सकती है।

    व्यापार में बड़ी डील या नया अवसर मिलने के संकेत हैं। आर्थिक मामलों में अचानक लाभ हो सकता है और अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना भी बन रही है। इस दौरान व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और संवाद कौशल से लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    सिंह राशि: आय में वृद्धि और पारिवारिक सुख
    सूर्य की स्वामित्व वाली सिंह राशि के लिए यह ग्रह संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और धन संचय के अवसर बढ़ेंगे।

    पारिवारिक जीवन में चल रही समस्याएं दूर होने के संकेत हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और रिश्तों में मधुरता आएगी। वहीं निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा यह संयोग
    ज्योतिष शास्त्र में बुधादित्य राजयोग को बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता, आर्थिक प्रगति और सामाजिक प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। 15 जून को बनने वाला यह विशेष ग्रह संयोग कई लोगों के लिए नए अवसर और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।