Author: bharati

  • UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!

    UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से टल रहा कैबिनेट विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, 10 से 15 मई के बीच योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की पूरी संभावना है।

    बताया जा रहा है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जहां संगठन और सरकार दोनों में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसी के साथ भाजपा नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी में है, जिसकी घोषणा कैबिनेट विस्तार के आसपास की जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की भूमिका में बदलाव या उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। प्रदर्शन के आधार पर विभागों में फेरबदल भी तय माना जा रहा है।

    जातीय संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओबीसी और दलित वर्ग से नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है, वहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी कुछ नए नामों पर विचार किया जा रहा है। करीब एक दर्जन नामों पर मंथन जारी है, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।

    इसके अलावा, सहयोगी दलों को भी साधने की रणनीति पर काम चल रहा है। अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे। साथ ही महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत 3 से 4 महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2027 के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन मंत्रियों की भूमिका में बदलाव किया जाता है, क्योंकि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

  • बंगाल नतीजों के बाद अनोखा जश्न: पंजाब में नाई ने दिनभर फ्री में काटे बाल-दाढ़ी

    बंगाल नतीजों के बाद अनोखा जश्न: पंजाब में नाई ने दिनभर फ्री में काटे बाल-दाढ़ी

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद देशभर में अलग-अलग अंदाज में जश्न देखने को मिला। इसी बीच पंजाब के फाजिल्का से एक दिलचस्प और चर्चा में आई पहल सामने आई, जहां एक सैलून मालिक ने खुशी जाहिर करने का अनोखा तरीका अपनाया।
    मन्नत पूरी हुई तो शुरू की मुफ्त सेवा

    फाजिल्का के रहने वाले सैलून संचालक नवीन सैन चिश्ती, नरेंद्र मोदी के बड़े समर्थक बताए जाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मन ही मन संकल्प लिया था कि अगर भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में जीत मिलती है, तो वे एक दिन तक लोगों को मुफ्त में हेयरकट और शेविंग सेवा देंगे।

    नतीजे सामने आने के बाद उन्होंने अपनी दुकान के बाहर “फ्री सर्विस” का बोर्ड लगा दिया और पूरे दिन बिना शुल्क के लोगों की सेवा की।

    ‘सेवा भावना’ को मानते हैं सबसे बड़ी सीख

    नवीन का कहना है कि वे प्रधानमंत्री मोदी को अपना “गुरुजी” मानते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने उनसे “सेवा भाव” की प्रेरणा ली है-यानी बिना स्वार्थ के लोगों के लिए काम करना।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    इस पहल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग इसे आम नागरिक की भावनाओं और राजनीतिक जुड़ाव का अनोखा उदाहरण बता रहे हैं।

    आगे के लिए भी योजना तैयार

    नवीन ने यह भी संकेत दिया कि अगर भविष्य में पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है, तो वे इससे भी बड़ी पहल करेंगे। हालांकि, उन्होंने अपनी अगली योजना का खुलासा नहीं किया।

    चुनावी नतीजों के बाद जहां बड़े राजनीतिक समीकरण बनते-बिगड़ते हैं, वहीं आम लोगों के ऐसे छोटे लेकिन अलग अंदाज के जश्न समाज में चर्चा का विषय बन जाते हैं।

  • बिहार कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज, मैथिली ठाकुर से लेकर श्याम रजक तक मंत्री बनने की रेस में

    बिहार कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज, मैथिली ठाकुर से लेकर श्याम रजक तक मंत्री बनने की रेस में

    पटना। बिहार में आगामी कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट के गठन को लेकर 7 मई को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस भव्य कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित आगमन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने बताया कि वीवीआईपी सुरक्षा के लिए ब्लू बुक के मानकों के अनुसार व्यवस्था की जा रही है। एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती रहेगी। सूत्रों के अनुसार, इस बार मंत्रिमंडल में एनडीए के सहयोगी दलों और भाजपा से कई पुराने चेहरों को दोबारा मौका मिल सकता है, जबकि कुछ नए चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।

    किन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा
    भाजपा खेमे से जिन नामों की चर्चा तेज है, उनमें विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, श्रेयसी सिंह, मैथिली ठाकुर और अन्य कई नाम शामिल हैं। जदयू से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेशी सिंह, मदन सहनी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा श्याम रजक, संतोष निराला और शीला मंडल जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं। सहयोगी दलों से भी कुछ नामों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    राजनीतिक हलचल तेज
    सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार में पुराने अनुभव वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है, साथ ही कुछ नए चेहरों को भी मौका मिलने की संभावना है। कार्यक्रम में एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे, जिससे यह शपथ ग्रहण समारोह और भी खास माना जा रहा है।

  • बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?

    बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद ममता बनर्जी अब अपनी सियासत को नए सिरे से साधने की तैयारी में दिख रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने नतीजों के बाद दिए बयानों में साफ किया है कि वे पीछे हटने के बजाय आक्रामक रुख अपनाए रखेंगी और विपक्षी एकता पर जोर बढ़ाएंगी।

    विपक्षी एकता पर फोकस

    राजनीतिक संकेत बताते हैं कि ममता बनर्जी अब INDIA गठबंधन के साथ तालमेल मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका बनाए रखने और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।

    “फाइटर इमेज” बरकरार रखने की कोशिश

    चुनाव नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में ममता ने हार को सीधे स्वीकार करने से बचते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया। माना जा रहा है कि यह रुख पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और यह जताने की कोशिश है कि राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

    संसद में मजबूत उपस्थिति का सहारा

    तृणमूल कांग्रेस फिलहाल केंद्र में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटें जीती थीं, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली बनाती हैं। ऐसे में विपक्षी रणनीति में उसकी भूमिका अहम बनी रह सकती है।

    कैडर को संभालना बड़ी चुनौती

    चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत बनाए रखना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए ममता बनर्जी राज्यभर का दौरा कर सकती हैं, ताकि कार्यकर्ताओं में एकजुटता बनी रहे और टूट-फूट को रोका जा सके।

    भाजपा की बढ़त रोकने की तैयारी

    बंगाल में भाजपा की मजबूती को देखते हुए आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अभी से रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। विपक्षी खेमे की कोशिश होगी कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह भरोसा दिलाया जाए कि एकजुट होकर मुकाबला किया जा सकता है।

    बंगाल के नतीजों ने ममता बनर्जी के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं, लेकिन उनके हालिया संकेत बताते हैं कि वे आक्रामक राजनीति, संगठन मजबूती और विपक्षी एकता—इन तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं।

  • अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस का कहर: 3 मौतें, भारत के लिए कितना खतरा

    अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस का कहर: 3 मौतें, भारत के लिए कितना खतरा


    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में केप वर्डे के पास एक डच क्रूज शिप पर हंता वायरस के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर इस संक्रमण से अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य यात्री बीमार हैं।

    बताया जा रहा है कि ‘एमवी होंडियस’ नाम का यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक द्वीपों की यात्रा के लिए रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 147 लोग (88 यात्री और 59 क्रू सदस्य) सवार थे। 6 से 28 अप्रैल के बीच संक्रमण के मामले सामने आए। एक मरीज की हालत गंभीर है, जबकि कुछ में हल्के लक्षण पाए गए हैं।

    क्या है हंता वायरस?

    हंता वायरस संक्रमण एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के मूत्र, मल या लार के संपर्क से फैलता है। यह वायरस फेफड़ों को प्रभावित कर गंभीर श्वसन समस्या पैदा कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं।

    WHO के मुताबिक, इस घटना में मानव-से-मानव संक्रमण की आशंका भी जताई गई है, जो आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है, लेकिन दक्षिण अमेरिका के कुछ मामलों में ऐसा पाया गया है।

    जहाज पर हालात और वैश्विक प्रतिक्रिया

    केप वर्डे ने स्वास्थ्य सुरक्षा कारणों से जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी है। WHO विभिन्न देशों-नीदरलैंड, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन-के साथ मिलकर हालात पर नजर बनाए हुए है। मेडिकल टीमें जहाज पर पहुंचकर जांच और उपचार कर रही हैं।

    यात्रियों और क्रू को आइसोलेशन में रहने, मास्क पहनने, हाथों की सफाई रखने और दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। जहाज को आगे स्पेन के कैनरी द्वीपों की ओर ले जाने पर भी विचार चल रहा है।

    भारत के लिए कितना खतरा?

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हंता वायरस संक्रमण के मामले बेहद दुर्लभ हैं। फिलहाल यह घटना भारत के लिए सीधा खतरा नहीं मानी जा रही, क्योंकि संक्रमण सीमित क्षेत्र और जहाज तक ही केंद्रित है।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य एजेंसियों को खासकर दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी गई है।

    घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

    WHO ने इस घटना को लेकर वैश्विक जोखिम को फिलहाल कम बताया है। भारत जैसे देश, जिन्होंने कोविड जैसी महामारी का सामना किया है, ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम माने जाते हैं।

    हंता वायरस गंभीर जरूर है, लेकिन इसका फैलाव सीमित होता है। सही सावधानी, जागरूकता और निगरानी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है-इसलिए घबराने के बजाय सतर्क रहना ज्यादा जरूरी है।

  • समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा

    समुद्र मंथन से प्रकट हुईं देवी अलक्ष्मी: क्यों जुड़ा है उनसे क्लेश और दरिद्रता का संबंध, जानिए विवाह की कथा


    नई दिल्‍ली । हिंदू पौराणिक मान्यताओं में जहां मां लक्ष्मी को धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, वहीं उनकी बड़ी बहन देवी अलक्ष्मी को दरिद्रता, कलह और अशुभता का प्रतीक बताया गया है। मान्यता है कि दोनों देवियां समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, लेकिन स्वभाव और प्रभाव में एक-दूसरे के विपरीत हैं।

    अलक्ष्मी का प्राकट्य और स्वरूप

    पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले देवी अलक्ष्मी प्रकट हुईं, जिनके हाथ में मदिरा थी। उनका स्वरूप दुर्बल, लाल आंखों वाला और अस्वच्छ बताया गया है। कहा जाता है कि जहां गंदगी, झगड़ा, अधर्म और नकारात्मकता होती है, वहीं उनका वास होता है।

    लक्ष्मी-विवाह से जुड़ी शर्त

    इसके बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने की इच्छा जताई। विष्णु भी इस विवाह के लिए तैयार थे, लेकिन एक शर्त आ गई—लक्ष्मी ने कहा कि पहले उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का विवाह होगा, तभी वे स्वयं विवाह करेंगी।

    अलक्ष्मी का विवाह किससे हुआ?

    अलक्ष्मी के स्वरूप और स्वभाव के कारण कोई भी उनसे विवाह को तैयार नहीं था। तब विष्णु के आदेश पर उद्दालक ऋषि ने अलक्ष्मी से विवाह किया। विवाह के बाद जब ऋषि उन्हें अपने आश्रम ले गए, तो अलक्ष्मी ने वहां रहने से इनकार कर दिया, क्योंकि वहां अत्यधिक पवित्रता और यज्ञ की सुगंध थी।

    कहां करती हैं निवास?

    अलक्ष्मी ने स्वयं बताया कि उन्हें वही स्थान प्रिय है जहां गंदगी, कलह, अधर्म, झूठ और मांस-मदिरा का सेवन होता हो। इसके बाद उद्दालक ऋषि उन्हें अस्थायी रूप से पीपल के पेड़ के नीचे बैठाकर उचित स्थान खोजने चले गए, लेकिन लौटकर नहीं आए।

    कथा के अनुसार, तब भगवान विष्णु ने कहा कि पीपल वृक्ष उनका ही स्वरूप है, इसलिए अलक्ष्मी वहां निवास कर सकती हैं। तभी से माना जाता है कि अलक्ष्मी पीपल के पेड़ के नीचे रहती हैं।

    मान्यता और संदेश

    ऐसी मान्यता है कि जो लोग पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं, उन्हें अलक्ष्मी के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

    यह कथा प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देती है कि जहां स्वच्छता, सत्य और सदाचार होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है, जबकि गंदगी और अधर्म अलक्ष्मी को आकर्षित करते हैं।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बदलेगा समीकरण, तीस्ता जल विवाद सुलझने की उम्मीद..

    ढाका। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित जल विवादों के समाधान को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

    बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है।

    तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोप
    बीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

    पुराना है जल बंटवारे का मुद्दा
    भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है।

    तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया।

    वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीद
    बीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।

  • दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    दुनिया में भारत का जलवा: विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, रेमिटेंस में फिर नंबर-1

    नई दिल्‍ली। वैश्विक स्तर पर भारतीयों की मेहनत और कौशल का असर एक बार फिर दिखा है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों ने अपने देश को रिकॉर्ड स्तर पर पैसा भेजकर नया इतिहास रच दिया है।
    इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की ‘वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, साल 2024 में भारत को करीब 137 बिलियन डॉलर (लगभग 11.4 लाख करोड़ रुपये) का रेमिटेंस मिला। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और भारत लगातार एक दशक से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।
    00 बिलियन डॉलर पार करने वाला इकलौता देश
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश बन गया है जिसने रेमिटेंस में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भारतीयों की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
    दूसरे देशों से काफी आगे भारत
    रेमिटेंस के मामले में भारत के बाद मेक्सिको दूसरे, फिलीपींस तीसरे और फ्रांस चौथे स्थान पर हैं। हालांकि इनमें से कोई भी देश अभी तक 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है।
    लगातार बढ़ता ग्राफ
    अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को करीब 53.48 बिलियन डॉलर, 2015 में 68.91 बिलियन डॉलर और 2020 में 83.15 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था।
    पिछले चार वर्षों में इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है।
    किन देशों से आता है ज्यादा पैसा?
    रेमिटेंस भेजने वाले देशों में अमेरिका सबसे आगे है, जहां से 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी भी प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।
    छात्रों की भी मजबूत मौजूदगी
    आर्थिक योगदान के साथ-साथ भारतीय छात्र भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
    आंकड़ों के मुताबिक, विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। 2022 तक 6.20 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा ले रहे थे।
    रेमिटेंस के क्षेत्र में भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि दुनियाभर में भारतीयों की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है। लगातार बढ़ता यह आंकड़ा आने वाले समय में भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत कर सकता है।
  • कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।

    शुभ मुहूर्त
    द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा।

    पूजा विधि
    शनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

    – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    – पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।
    – शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
    – पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

    क्या रखें ध्यान?
    इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।

  • गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

    गजकेसरी राजयोग: मई में चंद्रमा और गुरु की युति से इन राशियों को मिलेगा धन और तरक्की का लाभ

    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मई का महीना विशेष महत्व रखता है। इस माह के मध्य में चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी राजयोग का निर्माण होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 18 मई को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही देवगुरु बृहस्पति स्थित हैं। इस प्रकार चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा।

    ज्योतिष शास्त्र में इस योग को सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से पुराने तनाव कम हो सकते हैं, प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं और जीवन में मानसिक शांति के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा।

    वृषभ राशि
    इस राशि के लोगों को राहत महसूस हो सकती है। पुराने विवाद सुलझने लगेंगे और पारिवारिक माहौल बेहतर होगा। युवाओं की मानसिक उलझनें कम होंगी। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय में वृद्धि से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी होंगी। इस दौरान यात्रा के योग भी बन सकते हैं। युवाओं को आत्मचिंतन का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बेहतर होगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और रिश्तों दोनों में सकारात्मक परिणाम देने वाला हो सकता है। अविवाहित लोगों के लिए नए संबंध बनने की संभावना है। नौकरी और व्यवसाय में आय बढ़ने के संकेत हैं। निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं, जो भविष्य में लाभदायक रहेंगे।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के जीवन में स्थिरता आने के संकेत हैं। लंबे समय से चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होंगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। यह समय संतुलन और शांति का अनुभव कराएगा।

    मीन राशि
    मीन राशि के लोगों के लिए यह समय आत्मविश्लेषण और समझ को बढ़ाने वाला रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और मानसिक हल्कापन महसूस होगा। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।