Author: bharati

  • बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    भोपाल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक रुझानों ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी उत्सव का माहौल पैदा कर दिया है। जैसे ही बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जीत की ओर बढ़ी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास पर ‘महाविजय’ का जश्न शुरू हो गया। इस खास मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बंगाल के प्रसिद्ध व्यंजन ‘झालमुड़ी’ का आनंद लिया और जीत की खुशी साझा की।

    ‘मामा’ के घर पर आतिशबाजी और ढोल-नगाड़े
    सोमवार को जैसे-जैसे मतगणना के रुझान स्पष्ट हुए, शिवराज सिंह चौहान के आवास पर कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप और आतिशबाजी के बीच “जय श्री राम” और “मोदी-मोदी” के नारे गूंजते रहे। जीत के जश्न को बंगाली टच देने के लिए खास तौर पर झालमुड़ी बनवाई गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने खुद कार्यकर्ताओं को बांटकर बधाई दी। शिवराज सिंह ने कहा कि यह ‘असाधारण और अद्भुत’ है, उन्‍होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताया।

    “श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी”
    मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास था कि बंगाल में इस बार महाविजय होगी। आज एक बड़ा संकल्प पूरा हुआ है और एक सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी।”

    उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि “जनता ने घटिया वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति को सिरे से नकार दिया है। घुसपैठ को बढ़ावा देने वाली ताकतों को करारा जवाब मिला है। अब हारने वाले ईवीएम (EVM) का बहाना ढूंढेंगे, लेकिन सच तो यह है कि जनता ने मोदी जी के पीछे खड़े होकर ऐतिहासिक जनादेश दिया है।”

    असम से तमिलनाडु तक ‘भगवा’ लहर
    शिवराज सिंह ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के रुझानों पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा का प्रदर्शन असाधारण है और पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए (NDA) की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह की ‘अचूक रणनीति’ और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया।

    शिवराज ने कहा कि पूरा देश मानता है “मोदी है तो मुमकिन है।” उन्होंने बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने लगती है, विपक्ष भी अब हार के बहाने तलाशेगा।

  • बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय? 191 सीटों पर BJP आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु आमने-सामने

    बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय? 191 सीटों पर BJP आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु आमने-सामने


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच सियासी तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है। 293 सीटों पर जारी काउंटिंग के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त बना ली है और 191 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 88 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अब तक BJP 7 सीटें जीत चुकी है, जबकि TMC के खाते में 1 सीट आई है।

    सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं, जबकि उनके सामने सुवेंदु अधिकारी चुनौती बने हुए हैं। दोनों नेता काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात है।

    काउंटिंग के दौरान कुछ देर के लिए भवानीपुर के सखावत मेमोरियल सेंटर पर गिनती करीब 45 मिनट तक रुकी रही, हालांकि बाद में प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई।

    इस बीच कई सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज कर ली है, जिनमें मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मोंटेश्वर और आसनसोल दक्षिण जैसी अहम सीटें शामिल हैं। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित BJP दफ्तर में जश्न का माहौल है और कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे हैं।

    दूसरी तरफ, चुनावी माहौल में तनाव भी देखने को मिल रहा है। आसनसोल के चुरुलिया इलाके में TMC कार्यालय में आगजनी की घटना सामने आई है, जिसका आरोप बीजेपी पर लगाया गया है। वहीं TMC उम्मीदवारों ने कुछ बूथों पर EVM गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं।

    नंदीग्राम सीट पर भी सुवेंदु अधिकारी मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं और हजारों वोटों से आगे चल रहे हैं।

    अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो करीब 15 साल बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह न सिर्फ राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय सियासत पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

  • फिल्म ‘भूत बंगला’ के विवादित दृश्य को लेकर समाजसेवी रीतेश दुबे ने उठाई आपत्ति, सेंसर बोर्ड व केंद्र सरकार को भेजा आवेदन

    फिल्म ‘भूत बंगला’ के विवादित दृश्य को लेकर समाजसेवी रीतेश दुबे ने उठाई आपत्ति, सेंसर बोर्ड व केंद्र सरकार को भेजा आवेदन


    भोपाल। फिल्म ‘भूत बंगला’ में ज्योतिष विद्या के कथित अपमानजनक चित्रण को लेकर भोपाल निवासी समाजसेवी एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के आजीवन सदस्य रीतेश दुबे ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस संबंध में एक औपचारिक आवेदन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के अध्यक्ष, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा संबंधित सचिव को अग्रेषित किया है।
    अपने आवेदन में रीतेश दुबे ने उल्लेख किया है कि फिल्म के अंतिम दृश्य में ज्योतिषी पात्र के साथ अभद्र व्यवहार एवं आपत्तिजनक संवाद दर्शाए गए हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के प्रति असम्मानजनक हैं। उन्होंने इसे समाज में गलत संदेश देने वाला बताते हुए ऐसे दृश्यों को हटाने या संशोधित करने की मांग की है।
    दुबे ने कहा कि जब केंद्र सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है, तब इस प्रकार की प्रस्तुतियां सांस्कृतिक मूल्यों को आहत करती हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस विषय में गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
  • होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’

    होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने की कोशिश करती है, तो उस पर सीधा हमला किया जाएगा।

    ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जलमार्ग उसकी निगरानी में है और किसी भी विदेशी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अमेरिकी सेना को “आक्रामक ताकत” बताते हुए कड़ा संदेश दिया गया है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम के मिशन का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है।

    अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने मदद मांगी है, क्योंकि उनके जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे “निर्दोष” हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी है।

    CENTCOM के अनुसार 4 मई से शुरू होने वाले इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल होंगे। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े संकट का संकेत दे रहा है।

  • भारत के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी, 2026 की पहली तिमाही में निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंचा

    भारत के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त तेजी, 2026 की पहली तिमाही में निवेश 1.7 अरब डॉलर तक पहुंचा

    नई दिल्ली। भारत का रियल एस्टेट बाजार 2026 की शुरुआत में मजबूत प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ता नजर आया है। पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इस सेक्टर में निवेश गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जनवरी से मार्च के बीच कुल रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन वैल्यू 1.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 37 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाजार में स्थिरता और दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

    इस दौरान एक अहम बदलाव बड़े आकार की संपत्तियों के अधिग्रहण में देखने को मिला। निवेशकों ने छोटे सौदों की बजाय बड़े और आय-सृजन करने वाले प्रोजेक्ट्स में ज्यादा रुचि दिखाई। इसी का परिणाम रहा कि बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.03 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले समय की तुलना में काफी ज्यादा है। यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक अब सुरक्षित और नियमित रिटर्न देने वाली संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे जोखिम कम हो और लाभ स्थिर बना रहे।

    पहली तिमाही के बाद भी यह गति धीमी नहीं पड़ी, बल्कि आगे के महीनों में और तेज होती दिखाई दी। बड़े सौदों का कुल मूल्य बढ़कर 1.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि निवेशक दीर्घकालिक रणनीति के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं, जो भविष्य में स्थिर आय प्रदान कर सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल अल्पकालिक वृद्धि नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट बाजार में एक गहरे बदलाव का संकेत है। निवेश का झुकाव अब उन संपत्तियों की ओर बढ़ रहा है, जिनमें नियमित आय की संभावना हो और जो आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान भी स्थिर प्रदर्शन कर सकें। खासतौर पर ऑफिस स्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश की निरंतरता इस बात को मजबूत करती है कि इस सेगमेंट में अभी भी मजबूत आधार मौजूद है।

    पिछले दो वर्षों में भी रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया था। 2024 और 2025 के दौरान इस क्षेत्र में संस्थागत निवेश का स्तर काफी ऊंचा रहा और कुल मिलाकर 19.4 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। यह उपलब्धि इस सेक्टर के लिए एक नई दिशा तय करने वाली साबित हुई, जिससे बाजार में दीर्घकालिक विश्वास और मजबूत हुआ।

    एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि घरेलू निवेशकों की भूमिका तेजी से बढ़ी है। 2025 में पहली बार लंबे समय बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में प्रमुख हिस्सेदारी हासिल की। पहले जहां विदेशी निवेशकों का दबदबा था, वहीं अब घरेलू पूंजी इस क्षेत्र को गति दे रही है। 2026 की पहली तिमाही में कुल निवेश का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निवेशकों के पास रहा, जो इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

    वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बावजूद भारत का रियल एस्टेट बाजार लचीलापन दिखा रहा है। विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है। यह संतुलन आने वाले समय में इस सेक्टर को और अधिक स्थिर और आकर्षक बना सकता है।

    कुल मिलाकर, 2026 की पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत का रियल एस्टेट बाजार एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। लगातार बढ़ता निवेश, बड़े सौदों की ओर झुकाव और घरेलू भागीदारी इस क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करते हैं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के हवाई यातायात में अप्रैल में बड़ी गिरावट, यात्रियों की संख्या घटी

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के हवाई यातायात में अप्रैल में बड़ी गिरावट, यात्रियों की संख्या घटी

    नई दिल्ली।अप्रैल के महीने में भारत के हवाई यातायात में आई गिरावट ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वैश्विक परिस्थितियों का असर देश के परिवहन क्षेत्र पर कितना गहरा पड़ सकता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के मुकाबले अप्रैल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों में यात्रियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट सामान्य परिस्थितियों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और अस्थिर हालात को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सीधे प्रभावित किया है।

    घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या अप्रैल में लगभग 140.8 लाख रही, जो महीने-दर-महीने और साल-दर-साल आधार पर करीब 4 प्रतिशत कम है। आमतौर पर इस समय यात्रा की मांग स्थिर या बढ़ती हुई देखी जाती है, लेकिन इस बार वैश्विक परिस्थितियों ने घरेलू बाजार को भी प्रभावित किया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में गिरावट और अधिक गंभीर रही, जहां यात्रियों की संख्या घटकर लगभग 28.3 लाख रह गई। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है, जो बताता है कि विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों पर इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा।

    मध्य पूर्व क्षेत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण एयर ट्रांजिट मार्ग है, जहां से बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित होती हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों और एयरस्पेस के अस्थायी बंद होने से कई उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित करना पड़ा। इससे यात्रियों की आवाजाही में बाधा आई और एयरलाइंस के संचालन पर भी असर पड़ा। कई यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ीं, जबकि कुछ को लंबे रूट्स के जरिए सफर करना पड़ा।

    हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती नजर आ रही है। कई देशों ने अपने एयरस्पेस को फिर से खोलना शुरू कर दिया है और उड़ानों का संचालन बहाल किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत और अन्य देशों की एयरलाइंस ने उड़ानों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों की संख्या में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

    इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक एयर ट्रैफिक में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यह स्थिति एयरलाइन कंपनियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि उन्हें लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी सेवाओं में बदलाव करना पड़ रहा है।

    पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के दौर में हवाई यात्रा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि वैश्विक हालात से जुड़ा एक संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। यात्रियों के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं में लचीलापन रखें और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। आने वाले महीनों में हवाई यातायात की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता कितनी जल्दी लौटती है।

  • जेपी एसोसिएट्स विवाद में वेदांता की हार, अदाणी के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ..

    जेपी एसोसिएट्स विवाद में वेदांता की हार, अदाणी के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ..

    नई दिल्ली।भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक बड़े और जटिल दिवाला मामले में महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहां जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में वेदांता लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। इस फैसले के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता लगभग साफ हो गया है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया अध्याय शुरू हो गया है।
    मामले में वेदांता लिमिटेड ने उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें कर्जदाताओं की समिति ने अदाणी एंटरप्राइजेज के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। वेदांता का दावा था कि उसकी वित्तीय पेशकश अधिक आकर्षक थी और उसने बेहतर मूल्य की बोली लगाई थी। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में उसे उचित महत्व नहीं दिया गया।
    हालांकि, अपीलेट ट्रिब्यूनल ने वेदांता की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कर्जदाताओं की समिति द्वारा लिया गया निर्णय उनके व्यावसायिक विवेक पर आधारित था, जिसमें केवल बोली की राशि ही नहीं बल्कि अन्य कई कारकों को भी ध्यान में रखा गया था। अदालत ने यह भी पाया कि पूरी दिवाला प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता नहीं हुई है।
    इस मामले में पहले निचली अदालत ने भी अदाणी एंटरप्राइजेज के 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके बाद वेदांता ने लगातार कानूनी चुनौती दी। लेकिन विभिन्न स्तरों पर राहत न मिलने के बाद अब स्थिति लगभग स्पष्ट हो गई है।
    कर्जदाताओं की समिति ने इस पूरे मामले में केवल वित्तीय आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि नकद भुगतान क्षमता, योजना को लागू करने की क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे कई पहलुओं पर विचार किया। इसी आधार पर अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को प्राथमिकता दी गई, जिसे सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ था।
    जयप्रकाश एसोसिएट्स पर भारी कर्ज का बोझ लंबे समय से बना हुआ है, जिससे कंपनी दिवाला प्रक्रिया में शामिल हो गई थी। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई बड़े क्षेत्र की संपत्तियां मौजूद हैं, जिनका मूल्य काफी अधिक माना जाता है। इसी कारण इस मामले में कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई थी।
    वेदांता का कहना था कि उसकी पेशकश कुल मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दिवाला प्रक्रिया में केवल उच्च बोली ही निर्णायक कारक नहीं होती। इसके साथ ही यह भी माना गया कि समिति ने पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया है।
    इस फैसले के बाद अब अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना मजबूत हो गई है। यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में दिवाला समाधान प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानूनी और आर्थिक दोनों पहलुओं का गहरा असर देखने को मिला है।
    कुल मिलाकर यह निर्णय न केवल एक बड़े कॉर्पोरेट विवाद का अंत करीब लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दिवाला मामलों में केवल वित्तीय आंकड़े ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक रणनीति और कार्यान्वयन क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है।
  • एथर एनर्जी का घाटा 100 करोड़ के पार, लेकिन तेज ग्रोथ ने दिखाए मजबूती के संकेत

    एथर एनर्जी का घाटा 100 करोड़ के पार, लेकिन तेज ग्रोथ ने दिखाए मजबूती के संकेत

    नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में तेजी से उभर रही कंपनियों में शामिल एथर एनर्जी ने अपने ताजा वित्तीय परिणामों के जरिए एक संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश की है। कंपनी का घाटा तिमाही आधार पर बढ़कर 100 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जिससे यह साफ होता है कि विस्तार और निवेश की रणनीति फिलहाल उसके मुनाफे पर दबाव बना रही है। हालांकि दूसरी ओर कंपनी की आय में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जो उसके बिजनेस मॉडल की संभावनाओं को दर्शाती है।
    वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में एथर एनर्जी का नुकसान 100.23 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में अधिक है। यह बढ़ोतरी बताती है कि कंपनी अपने नेटवर्क और संचालन को विस्तार देने के लिए लगातार खर्च बढ़ा रही है। हालांकि सालाना आधार पर घाटे में बड़ी कमी आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी धीरे-धीरे अपनी वित्तीय स्थिति को संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
    राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने काफी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। परिचालन से होने वाली आय में सालाना आधार पर लगभग 74 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और कंपनी की बाजार में मजबूत होती स्थिति को दर्शाती है। ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी और बिक्री में तेजी ने कंपनी के कुल कारोबार को नई ऊंचाई दी है।
    हालांकि, बढ़ती आय के साथ खर्चों में भी तेज उछाल देखने को मिला है। कंपनी का कुल व्यय तिमाही के दौरान काफी बढ़ गया, जो इस बात का संकेत है कि एथर एनर्जी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक और बाजार विस्तार पर आक्रामक निवेश कर रही है। यही कारण है कि आय बढ़ने के बावजूद कंपनी अभी लाभ की स्थिति में नहीं पहुंच पाई है।
    एथर एनर्जी ने अपने फिजिकल नेटवर्क को तेजी से विस्तार दिया है। देशभर में उसके एक्सपीरियंस सेंटर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे ग्राहकों तक पहुंच आसान हो रही है। इसके अलावा कंपनी ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
    चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के तहत कंपनी ने कई शहरों में हजारों चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में फास्ट चार्जर्स शामिल हैं। यह पहल इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को आसान बनाने और ग्राहकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, एथर एनर्जी की रणनीति लंबी अवधि के विकास पर आधारित है। शुरुआती चरण में बढ़ते निवेश के कारण घाटा बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार में पकड़ मजबूत होगी, कंपनी को इसका लाभ मिल सकता है।
    कुल मिलाकर, एथर एनर्जी के ताजा नतीजे यह दिखाते हैं कि कंपनी एक तरफ लागत के दबाव का सामना कर रही है, तो दूसरी तरफ तेजी से बढ़ती आय और विस्तार के जरिए भविष्य के लिए मजबूत नींव तैयार कर रही है।
  • उपचुनाव नतीजे: भाजपा ने गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में जीत दर्ज की, बारामती में सुनेत्रा पवार आगे

    उपचुनाव नतीजे: भाजपा ने गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा में जीत दर्ज की, बारामती में सुनेत्रा पवार आगे

    नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती और अंतिम नतीजों में कई सीटों पर तस्वीर साफ हो चुकी है, जबकि कुछ जगहों पर परिणामों की स्थिति अभी भी बदलती नजर आ रही है।

    गुजरात, नागालैंड और त्रिपुरा की प्रमुख सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है, जिससे पार्टी के खेमे में उत्साह का माहौल देखा गया है। इन जीतों को संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय समर्थन का परिणाम माना जा रहा है।

    गुजरात की एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार ने बड़े अंतर से जीत हासिल की, जबकि नागालैंड और त्रिपुरा में भी पार्टी ने अपने प्रदर्शन को मजबूत किया। इन नतीजों ने पार्टी की क्षेत्रीय पकड़ को और मजबूत किया है।

    दूसरी ओर कर्नाटक की कुछ सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला कड़ा रहा, जहां एक सीट पर कांग्रेस ने बढ़त बनाते हुए जीत दर्ज की। इससे राज्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

    महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है, जहां प्रमुख उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यह सीट राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है और यहां के नतीजों पर सभी की नजरें टिकी हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव के ये नतीजे आने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिए संकेतक साबित हो सकते हैं, हालांकि इनका असर सीमित स्तर पर ही देखने को मिलता है।

    कुल मिलाकर उपचुनावों में कई राज्यों में भाजपा को बढ़त मिली है, जबकि कुछ जगहों पर विपक्षी दलों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है और मुकाबला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    बंगाल में बीजेपी की ‘सुनामी’ के संकेत, स्वाति मालीवाल बोलीं- खत्म होगी गुंडागर्दी और तुष्टिकरण की राजनीति

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त बढ़त बना ली है और बहुमत के आंकड़े को पार करती नजर आ रही है। 294 सीटों वाली विधानसभा में 148 का आंकड़ा जादुई माना जाता है, जिसे बीजेपी शुरुआती ट्रेंड्स में पार करती दिखाई दे रही है।

    इसी बीच आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इस संभावित जीत को “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि बंगाल में दशकों से चली आ रही हिंसा, गुंडागर्दी और वोट बैंक की राजनीति अब खत्म होने की ओर है।

    मालीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि असम और पुडुचेरी में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है।

    चुनावी रुझानों में यह भी देखने को मिल रहा है कि बीजेपी सीमावर्ती इलाकों, आदिवासी क्षेत्रों और औद्योगिक बेल्ट में मजबूत पकड़ बना रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को कोलकाता और कुछ पारंपरिक गढ़ों में बढ़त मिल रही है।

    सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना में पहले पोस्टल बैलेट और फिर ईवीएम वोटों की गिनती की जा रही है। शुरुआती आंकड़े भले ही अंतिम नतीजे न हों, लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।