Author: bharati

  • स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    स्ट्रेस और बेचैनी से पाना है छुटकारा? भ्रामरी प्राणायाम है आसान और असरदार उपाय

    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन टाइम और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग अक्सर बेचैनी और दिमागी अशांति महसूस करते हैं। ऐसे में Ministry of AYUSH ने एक आसान और असरदार उपाय सुझाया है भ्रामरी प्राणायाम

    मंत्रालय के अनुसार, यह प्राणायाम मन को शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में बेहद कारगर है। खासकर जब मन में बहुत ज्यादा विचार चल रहे हों या बेचैनी महसूस हो रही हो, तब भ्रामरी प्राणायाम तुरंत राहत देने में मदद करता है।

    International Day of Yoga से पहले भी मंत्रालय लोगों को इस प्राणायाम के फायदे बता रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।

    योग विशेषज्ञों के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे की तरह “हम्म्म” की ध्वनि निकाली जाती है। इस ध्वनि से मस्तिष्क में हल्का कंपन होता है, जो तनावग्रस्त नसों को शांत करता है। इससे न केवल स्ट्रेस कम होता है, बल्कि गुस्सा, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं में भी राहत मिलती है।

    इस प्राणायाम का नियमित अभ्यास मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जो लोग अक्सर चिंता या ओवरथिंकिंग का शिकार रहते हैं, उनके लिए यह एक सरल और प्राकृतिक उपाय है।

    भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका भी बेहद आसान है। सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से सीधे बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब अपने अंगूठों से दोनों कानों को हल्के से बंद करें। इसके बाद गहरी सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए “हम्म” की आवाज निकालें। कोशिश करें कि यह ध्वनि लंबी और स्थिर हो। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सुबह या शाम के समय इसका अभ्यास करने से मन की अशांति धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही, इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

     कहना है कि यह प्राणायाम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे घर पर बिना किसी उपकरण के आसानी से किया जा सकता है। जो लोग लगातार मानसिक थकान या तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान है।

    कुल मिलाकर, भ्रामरी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकते हैं।


  • सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ा बदलाव: मप्र में ‘डीएनए किट’ से होगी स्क्रीनिंग, महिलाएं खुद दे सकेंगी सैंपल

    सर्वाइकल कैंसर जांच में बड़ा बदलाव: मप्र में ‘डीएनए किट’ से होगी स्क्रीनिंग, महिलाएं खुद दे सकेंगी सैंपल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। अब प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर की जांच पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डीएनए किट के जरिए की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच के दौरान होने वाली झिझक को खत्म करना और ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्क्रीनिंग से जोड़ना है।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी कर रहा है। योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की जांच डीएनए आधारित किट से की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट जुलाई से शुरू हो सकता है, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार दिया जाएगा।
    नई तकनीक में महिलाओं को खुद सैंपल देने की सुविधा मिलेगी। किट में दिए गए स्वैब और विशेष कंटेनर की मदद से नमूना लेकर उसे लैब में भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से शारीरिक जांच की जरूरत कम होगी, जिससे महिलाएं बिना झिझक जांच करवा सकेंगी। इससे स्क्रीनिंग का दायरा भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
    इस जांच के जरिए सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण मानव पेपिलोमा वायरस (HPV) की पहचान की जाएगी। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो आगे की जांच और उपचार तुरंत शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पहचान होने से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है। अब तक पारंपरिक जांच पद्धतियां खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाधा बनती थीं, लेकिन डीएनए आधारित तकनीक से शुरुआती स्तर पर संक्रमण पकड़ना आसान हो जाएगा।
    साथ ही, प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी आगे है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन के तहत मध्य प्रदेश में करीब 92% किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल प्रदेश में 4 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 2100 महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है।
    कुल मिलाकर, यह नई पहल न केवल महिलाओं की झिझक को खत्म करेगी, बल्कि समय पर पहचान और इलाज के जरिए हजारों जिंदगियां बचाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

  • इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र

    इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब साल में दो बार एडमिशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

    नई व्यवस्था के तहत एक शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू होगा, जबकि दूसरा सत्र जनवरी से प्रारंभ किया जाएगा। जुलाई सत्र में सभी सीटों पर एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी और एडमिशन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।

    फिलहाल स्थिति यह है कि एडमिशन प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक खिंच जाती है और कई बार सीटों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था से इस देरी पर रोक लगेगी और एकेडमिक कैलेंडर भी तय समय पर लागू किया जा सकेगा।

    हालांकि, इस बदलाव को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। बाद में वे पहले सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इसी तरह आगे भी सेमेस्टर का क्रम उलट-पुलट तरीके से चल सकता है जैसे चौथा सेमेस्टर पहले और तीसरा बाद में।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विषय आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में बेसिक विषयों से पहले एडवांस विषय पढ़ना छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्लेसमेंट पर भी असर पड़ने की आशंका है। जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र फरवरी-मार्च के आसपास पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक पास होने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है।

    लेटरल एंट्री के छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभी डिप्लोमा के बाद दूसरे वर्ष में प्रवेश के लिए जो सीटें बचती हैं, वे अगले सत्र में भरी जाती हैं। लेकिन साल में दो बार एडमिशन होने से इन सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है।

    सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और दो अलग-अलग ग्रुप बनाकर पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सकेगी। कंपनियां भी अपने प्लेसमेंट शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं।

    कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था जहां एक ओर एडमिशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और लचीला बनाएगी, वहीं छात्रों और संस्थानों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में इसका वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

  • भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

    भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

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    नई दिल्ली। देश के सबसे साफ शहरों की सूची में लगातार ऊंचा स्थान पाने वाला भोपाल एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है स्वच्छता सर्वे का बदला हुआ तरीका और शहर की वास्तविक सफाई व्यवस्था को लेकर उठते सवाल। अब केवल ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद लोगों के बीच जाकर उनकी राय लेंगे। ऐसे में असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।

    अब तक माना जाता रहा है कि भोपाल की साफ-सफाई व्यवस्था काफी बेहतर है, लेकिन जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात की गई तो कई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोग शहर की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। उनका कहना है कि नियमित कचरा उठान, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता का स्तर पहले से बेहतर हुआ है। खासतौर पर मुख्य सड़कों और वीआईपी इलाकों में सफाई स्पष्ट दिखाई देती है।

    हालांकि, दूसरी तरफ कई नागरिकों ने सफाई व्यवस्था में खामियां भी गिनाईं। लोगों का कहना है कि अंदरूनी कॉलोनियों और पुराने इलाकों में अभी भी कचरा जमा रहता है और सफाई नियमित नहीं होती। कुछ जगहों पर डस्टबिन की कमी और कचरा प्रबंधन में लापरवाही भी देखने को मिलती है। इससे साफ जाहिर होता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है।

    स्वच्छता सर्वे के नए फॉर्मेट में अब नागरिकों की सीधी भागीदारी बढ़ा दी गई है। अधिकारी घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे हैं, जिससे केवल डिजिटल वोटिंग के बजाय वास्तविक अनुभव को महत्व मिलेगा। इससे यह तय होगा कि रैंकिंग सिर्फ आंकड़ों पर आधारित है या वास्तव में जमीनी हकीकत भी उतनी ही मजबूत है।

    भोपाल के लिए यह एक अहम मौका है, जहां उसे अपनी छवि को बनाए रखने के साथ-साथ उन कमियों को भी दूर करना होगा, जो अब तक नजरअंदाज होती रही हैं। अगर शहर प्रशासन इन फीडबैक को गंभीरता से लेता है, तो आने वाले समय में भोपाल न केवल रैंकिंग में, बल्कि वास्तविक सफाई व्यवस्था में भी एक मिसाल बन सकता है।

  • कमर्शियल गैस महंगी: भोपाल में बाहर खाना पड़ेगा और महंगा, 30% तक बढ़ सकते हैं दाम

    कमर्शियल गैस महंगी: भोपाल में बाहर खाना पड़ेगा और महंगा, 30% तक बढ़ सकते हैं दाम


    नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर भोपाल में अब महंगाई की नई लपट देखने को मिल रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की कमर तोड़ दी है। पिछले डेढ़ महीने से गैस की कमी झेल रहे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है।

    जानकारी के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2081 रुपए से बढ़कर सीधे 3074 रुपए हो गई है। यानी करीब 993 रुपए की बढ़ोतरी ने ईंधन लागत को डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर अब खाने-पीने की कीमतों पर पड़ने वाला है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि अब मेन्यू के दाम 25 से 30 फीसदी तक बढ़ाना मजबूरी हो गया है।

    कारोबारियों के अनुसार, पहले जहां गैस पर मासिक खर्च करीब 2 लाख रुपए होता था, अब यह बढ़कर 3 से सवा 3 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। छोटे कारोबारियों की हालत और भी खराब है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (छोटू) की कीमत 585 रुपए से बढ़कर 827 रुपए हो गई है, जिससे हॉकर और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ा है।

    इस बढ़ोतरी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कैटरर्स का कहना है कि पहले से बुक किए गए ऑर्डर्स में उन्हें नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि पुराने रेट पर ही काम करना होगा। एक शादी में औसतन 10 सिलेंडर खर्च होते हैं, जिससे प्रति इवेंट करीब 10 हजार रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आने वाले ऑर्डर्स में प्रति प्लेट 50 रुपए तक बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, 500 लोगों के एक आयोजन का 5 लाख रुपए का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ सकता है। इससे साफ है कि महंगाई की यह मार सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी असर डालेगी।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 अप्रैल 2025 के बाद से अब तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 16 बार बदले जा चुके हैं। इनमें 8 बार बढ़ोतरी और 6 बार कमी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी 1 मई को हुई, जिसने बाजार का पूरा संतुलन बिगाड़ दिया।

    कुल मिलाकर, गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने भोपाल के फूड इंडस्ट्री सेक्टर को मुश्किल में डाल दिया है। आने वाले दिनों में बाहर खाना अब पहले से काफी महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता के बजट पर पड़ेगा।

  • शनिवार विशेष: इन मंत्रों के जाप से पाएं शनि देव की कृपा, घर में आएंगी खुशियां और बरकत

    शनिवार विशेष: इन मंत्रों के जाप से पाएं शनि देव की कृपा, घर में आएंगी खुशियां और बरकत


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष होता है, उनके लिए यह दिन और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। सही तरीके से पूजा करने से न केवल बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और तरक्की के द्वार भी खुलते हैं।
    शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद शनि मंदिर जाना शुभ माना जाता है। मंदिर में जाकर शनि देव के दर्शन करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान काले वस्त्र धारण करना विशेष लाभकारी होता है, क्योंकि काला रंग शनि देव को प्रिय है। पूजा में सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
    इस दिन मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति देता है और जीवन में स्थिरता लाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्रयम्बकं यजामहे…” का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शनि महामंत्र “ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्…” का उच्चारण करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलती है।
    शनि गायत्री मंत्र “ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्” का जाप करने से बुद्धि और निर्णय क्षमता में सुधार आता है। वहीं वैदिक मंत्र “ॐ शन्नो देवीरभिष्टय…” का जाप सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है।
    यदि आप सच्चे मन से इन मंत्रों का जाप करते हैं और नियमपूर्वक पूजा करते हैं, तो शनि देव की कृपा से जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं। घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। शनिवार का यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक श्रेष्ठ अवसर हो सकता है।
  • गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    गर्मियों में मेथी दाना खाना सही या गलत? जानें आयुर्वेद क्या कहता है

    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में मौजूद मसाले सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं। इन्हीं में से एक है मेथी दाना, जिसका इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, गर्मियों के मौसम में इसके सेवन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं क्या इसकी तासीर शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है?

    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना की तासीर गर्म (उष्ण) होती है। यह शरीर में वात और कफ दोष को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन गर्मियों में जब शरीर में पित्त पहले से ही बढ़ा होता है, तब इसका अधिक सेवन कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में ज्यादा मात्रा में मेथी लेने से पेट में जलन, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    इतना ही नहीं, जिन लोगों को मधुमेह (डायबिटीज) है, उनके लिए भी मेथी दाने का सेवन सोच-समझकर करना जरूरी है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन करने के तरीके और मात्रा दोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, मेथी दाने को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उस पानी को छानकर पीना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है। ध्यान रहे कि गर्मियों में इसे उबालकर या गर्म करके सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे शरीर में अतिरिक्त गर्मी बढ़ सकती है।

    इसके अलावा, मेथी दाने की मात्रा सीमित रखना बेहद जरूरी है। गर्म मौसम में शरीर पहले से ही संवेदनशील होता है, इसलिए कम मात्रा में सेवन करने से ही लाभ मिलता है। आप चाहें तो मेथी दाने के पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे दही या छाछ में मिलाकर लेने से इसकी गर्म तासीर कम हो जाती है और पाचन तंत्र भी बेहतर रहता है।

    छाछ के साथ मेथी का सेवन करने से पेट की गर्मी कम होती है, साथ ही यह सूजन और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाता है। इस तरह मेथी दाना एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी की तरह काम करता है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गर्मियों में मेथी दाना खाली पेट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गैस और असहजता हो सकती है। इसे भोजन के बाद लेना अधिक बेहतर माना जाता है।

    हालांकि, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, लो बीपी या मधुमेह के मरीजों को मेथी दाने का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, मेथी दाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन गर्मियों में इसे सही मात्रा और सही तरीके से लेने पर ही इसका पूरा लाभ मिल सकता है।


  • 2 मई 2026 को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक का हाल

    2 मई 2026 को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक का हाल


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हर दिन हमारे जीवन को प्रभावित करती है। 2 मई 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ संकेत लेकर आ रहा है, तो वहीं कुछ लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक सभी राशियों का हाल।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। पुराने काम में सफलता मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं।

    वृषभ राशि वालों को मेहनत का फल मिलेगा। कार्यक्षेत्र में सराहना मिल सकती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

    मिथुन राशि के लोगों को सोच-समझकर फैसले लेने होंगे। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और मन थोड़ा अस्थिर रह सकता है, लेकिन परिवार का साथ मिलेगा।

    कर्क राशि के लिए दिन व्यस्त रह सकता है। काम का दबाव बढ़ेगा, लेकिन समझदारी से स्थिति संभाल लेंगे। सेहत का ध्यान रखना जरूरी होगा।

    सिंह राशि वालों के लिए ग्रोथ के संकेत हैं। नई योजनाएं सफल होंगी और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं।

    कन्या राशि के जातकों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। हालांकि रिश्तों में हल्की गलतफहमियां हो सकती हैं, जिन्हें बातचीत से सुलझाया जा सकता है।

    तुला राशि वालों को सावधानी बरतनी होगी। बड़े फैसले टालना बेहतर रहेगा और काम में धैर्य बनाए रखना जरूरी है।

    वृश्चिक राशि के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें और परिवार में तनाव से बचने के लिए समझदारी से काम लें।

    धनु राशि वालों का दिन सामान्य रहेगा। काम में थोड़ी धीमी प्रगति होगी, लेकिन संतुलन बनाए रखने से स्थितियां बेहतर होंगी।

    मकर राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। नए अवसर मिल सकते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

    कुंभ राशि वालों को सतर्क रहने की जरूरत है। जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है और पैसों के मामलों में सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी है।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन शुभ रहेगा। लव लाइफ और करियर में सफलता मिलेगी, साथ ही आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    कुल मिलाकर 2 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ को धैर्य और समझदारी से काम लेने की सलाह दी जाती है।

  • Shaniwar Upay: शनिवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, बढ़ सकता है शनि दोष

    Shaniwar Upay: शनिवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, बढ़ सकता है शनि दोष


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन Shani Dev को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कर्मों का विशेष प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि शनिवार के दिन कुछ खास गलतियां की जाएं तो Shani Dosh बढ़ सकता है, जिससे जीवन में बाधाएं, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

    सबसे पहले, शनिवार के दिन लोहे से बनी वस्तुओं की खरीदारी या दान करने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन लोहा खरीदने से शनि का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि, जरूरतमंद को लोहे की वस्तु दान करना कुछ परिस्थितियों में शुभ भी माना जाता है, लेकिन बिना सोच-समझकर ऐसा करना उचित नहीं होता।

    दूसरी बड़ी गलती है तेल का दुरुपयोग। शनिवार को सरसों के तेल का विशेष महत्व होता है। लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तेल चढ़ाते हैं, लेकिन तेल का अपमान करना या उसे इधर-उधर फैलाना अशुभ माना जाता है।

    तीसरी बात, इस दिन गरीबों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों का अपमान नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि देव नाराज हो सकते हैं। इसके विपरीत, जरूरतमंदों की मदद करना, दान देना और सेवा करना शनि कृपा पाने का सबसे आसान उपाय माना गया है।

    इसके अलावा शनिवार के दिन काले रंग की वस्तुओं का विशेष महत्व होता है, लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल या अहंकार दिखाना भी अशुभ हो सकता है। इस दिन सादगी और संयम बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

    शनिवार को बाल और नाखून काटने से भी कई लोग बचते हैं, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन झूठ बोलना, धोखा देना या किसी का दिल दुखाना भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

    अगर आप शनि दोष से बचना चाहते हैं, तो शनिवार को सुबह स्नान के बाद Shani Dev की पूजा करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएं और गरीबों को दान करें। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं कम हो सकती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    कुल मिलाकर, शनिवार का दिन अनुशासन, सेवा और संयम का दिन माना जाता है। इस दिन सही आचरण अपनाकर और गलतियों से बचकर आप Shani Dosh के प्रभाव को कम कर सकते हैं और जीवन में सुख-शांति बनाए रख सकते हैं।

  • Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ

    Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों में Type 2 Diabetes एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि World Health Organization (WHO) का मानना है कि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।

    WHO के अनुसार, सबसे जरूरी है अपने शरीर के वजन को संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में नियमित रूप से वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। संतुलित वजन न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

    तीसरा अहम पहलू है संतुलित और पौष्टिक आहार। WHO के अनुसार, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल डायबिटीज के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देता है।

    चौथा और बेहद जरूरी उपाय है तंबाकू से दूरी बनाना। तंबाकू का सेवन न केवल डायबिटीज बल्कि दिल और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। WHO का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू छोड़ने से शरीर की ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है।

    आज के व्यस्त जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल Type 2 Diabetes बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

    कुल मिलाकर, अगर समय रहते जागरूकता दिखाई जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज जैसी बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।