Author: bharati

  • अगस्त में शुक्र का कन्या राशि में होने जा रहा बड़ा गोचर, ग्रहों के इस महा-परिवर्तन से 7 भाग्यशाली राशियों की आर्थिक स्थिति और बैंक बैलेंस में आएगा भारी उछाल

    अगस्त में शुक्र का कन्या राशि में होने जा रहा बड़ा गोचर, ग्रहों के इस महा-परिवर्तन से 7 भाग्यशाली राशियों की आर्थिक स्थिति और बैंक बैलेंस में आएगा भारी उछाल

    नई दिल्ली । भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन को मानव जीवन और देश-दुनिया पर व्यापक प्रभाव डालने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना गया है। इसी सिलसिले में आगामी 1 अगस्त 2026 को सुख, समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य के कारक माने जाने वाले शुक्र देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। शुक्र देव का प्रवेश कन्या राशि में होने जा रहा है, जहां वे आगामी 8 जून तक विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, शुक्र का यह गोचर मुख्य रूप से 7 राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव, करियर में उन्नति और वित्तीय स्थिति में भारी सुधार लेकर आने वाला है।

    ग्रहों के इस बड़े फेरबदल से सबसे अधिक लाभान्वित होने वाली राशियों में मेष राशि के जातक शामिल हैं। शुक्र के प्रभाव से इस राशि के लोगों के लिए आर्थिक उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त होंगे और लंबे समय से अटके हुए प्रशासनिक या व्यावसायिक कार्य गति पकड़ेंगे। इसके साथ ही कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और पद प्रतिष्ठा मिलने के भी प्रबल योग बन रहे हैं। वहीं, वृषभ राशि के जातकों के लिए, जिनके स्वयं के राशि स्वामी शुक्र हैं, यह गोचर आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि करने वाला साबित होगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का माहौल रहेगा और पूर्व में किए गए निवेशों से इस दौरान बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की संभावना है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए भी आगामी समय पूरी तरह से अनुकूल दिखाई दे रहा है। समाज और कार्यस्थल पर उनके मान-सम्मान में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके काम की सराहना की जाएगी। धन संचय के मामले में कर्क राशि के लोगों के लिए यह गोचर भाग्यशाली सिद्ध हो सकता है। उनके लिए धन प्राप्ति के नए और स्थायी योग बन रहे हैं, जिससे व्यापारिक दृष्टिकोण से जुड़े जातकों को अपने कारोबार का विस्तार करने में बड़ी मदद मिलेगी।

    सिंह राशि के जातकों के जीवन में यह ग्रह परिवर्तन भौतिक सुख-सुविधाओं और विलासिता की वस्तुओं में बढ़ोतरी लेकर आएगा। पुराने समय से चले आ रहे विवादों और मानसिक तनावों से मुक्ति मिलने के कारण इस राशि के लोगों का मन प्रसन्न रहेगा। इसके अतिरिक्त, वृश्चिक राशि के लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा में इजाफा होगा। इस अवधि में उन्हें अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों का भरपूर सहयोग मिलेगा, जिसकी मदद से वे अपने बिगड़े हुए कार्यों को दोबारा पटरी पर लाने में सफल रहेंगे।

    धनु राशि के नौकरीपेशा और करियर निर्माण में लगे युवाओं के लिए यह गोचर बड़ी सफलता की सौगात लेकर आ रहा है। इस राशि के जातकों को अपनी नौकरी में पदोन्नति यानी प्रमोशन और वेतन वृद्धि के बेहतरीन अवसर प्राप्त हो सकते हैं। ज्योतिषविदों का कहना है कि यद्यपि यह गोचर इन सभी 7 राशियों के लिए वित्तीय और व्यावसायिक मोर्चे पर बेहद शुभ फल लेकर आ रहा है, लेकिन इस सकारात्मक ऊर्जा को और अधिक मजबूत करने के लिए जातकों को शुक्रवार के दिन विशेष रूप से मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। इसके साथ ही अपने दैनिक कार्यों में ईमानदारी, पारदर्शिता और धैर्य बनाए रखना ही अंतिम सफलता का मुख्य आधार बनेगा।

  • बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    बिहार सरकार ने वापस लिया सुरक्षा में कटौती का फैसला, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की 'Z' श्रेणी की सुरक्षा समेत बुलेटप्रूफ गाड़ियां दोबारा बहाल

    नई दिल्ली । बिहार की सियासत में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा चाक-चौबंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ नेताओं की ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों नेताओं को राज्य सरकार की ओर से पुनः बुलेटप्रूफ गाड़ियां भी उपलब्ध करा दी गई हैं, जिससे इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के फिलहाल थमने के आसार हैं।

    इस पूरे प्रशासनिक विवाद की शुरुआत कुछ समय पहले हुई थी, जब बिहार सरकार के गृह विभाग ने वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की थी। इस समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मिली ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा को हटाने का निर्णय लिया था। सरकार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में अचानक उबाल आ गया था और विपक्षी खेमे ने इस फैसले को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राष्ट्रीय जनता दल ने इस प्रशासनिक कटौती को पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था।

    सुरक्षा में की गई इस कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने एक कड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपनी बची हुई शेष सरकारी सुरक्षा को भी प्रशासन को वापस लौटा दिया था। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी सुरक्षा सरेंडर किए जाने की घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी थी। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि सत्तापक्ष जानबूझकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रहा है और उनके जीवन को खतरे में डालने का प्रयास किया जा रहा है।

    यह विवाद उस समय और अधिक गहरा गया जब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। तेजस्वी यादव ने सरकार के इस फैसले को विपक्ष के साथ किया जाने वाला खुला भेदभाव करार दिया था और एकजुटता दिखाते हुए अपनी स्वयं की सरकारी सुरक्षा भी प्रशासन को वापस सौंप दी थी। एक साथ तीन शीर्ष नेताओं द्वारा सुरक्षा लौटाए जाने के बाद सरकार चौतरफा दबाव में आ गई थी और इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से विचार करना अनिवार्य हो गया था।

    विपक्ष के इस कड़े और आक्रामक रुख को देखते हुए आखिरकार बिहार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और अपने पुराने फैसले की समीक्षा करनी पड़ी। सरकार के नए आदेश के तहत अब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को न सिर्फ ‘Z’ श्रेणी की कड़े घेरे वाली सुरक्षा वापस मिल गई है, बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक बुलेटप्रूफ वाहन भी उनके काफिले में दोबारा शामिल कर दिए गए हैं। इस निर्णय के बाद राजद कैंप में इसे विपक्ष की नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने इस विवाद को और अधिक लंबा न खींचना ही उचित समझा। हालांकि सुरक्षा बहाली के इस नए फैसले के बाद फिलहाल दोनों पक्षों के बीच जारी बयानबाजी और टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।

  • फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची।

    मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही।

    इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।

    हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा।

    इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।

  • उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य

    उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य


    नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन अपने विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के साथ साथ अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं में से एक है बाबा काल भैरव का प्राचीन मंदिर जहां सदियों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा आज भी निभाई जाती है जो पहली बार सुनने वाले को हैरान कर देती है। यहां भगवान को पेड़े लड्डू या मिठाई का नहीं बल्कि मदिरा का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु फूल माला और प्रसाद के साथ शराब की बोतल लेकर मंदिर पहुंचते हैं और इसे बाबा काल भैरव को श्रद्धा भाव से अर्पित करते हैं। यही अनूठी परंपरा इस मंदिर को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। तंत्र साधना और शैव परंपरा में उनका विशेष महत्व है। तांत्रिक मान्यता के अनुसार काल भैरव की पूजा में मदिरा का भोग स्वीकार्य माना गया है। इसी कारण इस मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालु बाबा को मदिरा अर्पित करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह परंपरा कई सौ वर्षों से लगातार चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि विधान के साथ निभाई जाती है।

    इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण वह रहस्यमयी दृश्य है जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। जब कोई भक्त मदिरा अर्पित करता है तो मंदिर के पुजारी उसे एक छोटी धातु की थाली या पात्र में लेकर बाबा काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाते हैं। कुछ ही क्षणों में पूरा पात्र खाली हो जाता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिमा स्वयं भोग ग्रहण कर रही हो। प्रतिमा में कोई स्पष्ट छेद या पाइप दिखाई नहीं देता फिर भी मदिरा गायब हो जाती है। वर्षों से यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का विषय बना हुआ है। इस रहस्य को लेकर अनेक तरह की चर्चाएं होती रही हैं लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह बाबा काल भैरव की दिव्य कृपा और चमत्कार का प्रतीक है।

    मंदिर के बाहर का वातावरण भी अन्य धार्मिक स्थलों से अलग दिखाई देता है। जहां अधिकांश मंदिरों के बाहर फूल माला नारियल और मिठाई की दुकानें होती हैं वहीं यहां पूजा सामग्री के साथ मदिरा की अधिकृत बोतलें भी उपलब्ध रहती हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग के लिए बोतल खरीदते हैं और मंदिर में अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करने के बाद शेष मदिरा को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है जिसे लोग आस्था के साथ ग्रहण करते हैं।

    काल भैरव को उज्जैन नगरी का कोतवाल या रक्षक भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाकालेश्वर के दर्शन के साथ काल भैरव के दर्शन किए बिना उज्जैन की धार्मिक यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और फिर काल भैरव मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विशेष अवसरों पर यहां दूरदराज के राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    काल भैरव मंदिर केवल अपनी अनोखी परंपरा के कारण ही नहीं बल्कि आस्था और आध्यात्मिक विश्वास के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले भक्तों के लिए मदिरा का भोग किसी सामान्य वस्तु का अर्पण नहीं बल्कि धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक है। यही वजह है कि उज्जैन का यह प्राचीन मंदिर आज भी देश के सबसे अनूठे और चर्चित धार्मिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

  • सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    सीनियर खिलाड़ियों के समर्थन में उतरा भारतीय क्रिकेट टीम प्रशासन, गेंदबाजी कोच ने कहा- सिर्फ एक युवा प्रतिभा के आने से रातों-रात नहीं बदला जाएगा शीर्ष क्रम का बल्लेबाजी संतुलन

    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले से पहले मैनचेस्टर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने टीम के शीर्ष क्रम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक रुख स्पष्ट किया है। पिछले कुछ समय से 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर क्रिकेट जगत में भारी उत्सुकता देखी जा रही थी, लेकिन टीम प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि किसी एक नई प्रतिभा के आने मात्र से मौजूदा स्थापित ओपनिंग जोड़ी को तुरंत टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। टीम प्रशासन का मानना है कि बड़े मंच पर देश को जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को कुछ खराब पारियों के आधार पर टीम से ड्रॉप करना सही रणनीति नहीं है।

    वर्तमान दौरे पर भारतीय सलामी जोड़ी के दोनों बल्लेबाजों का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा है। जहां एक ओर अभिषेक शर्मा ने अपनी पिछली तीन पारियों में एक अर्धशतक और 49 रनों की उपयोगी पारी खेलकर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है, वहीं दूसरी ओर विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन लगातार संघर्ष करते नजर आए हैं। सैमसन के बल्ले से पिछली तीन पारियों में क्रमशः पांच, शून्य और एक रन की बेहद संक्षिप्त पारियां निकली हैं। इस असंतुलित फॉर्म के बावजूद कोचिंग स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन किसी भी खिलाड़ी की योग्यता का आकलन महज तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर नहीं करता है, बल्कि उनके पिछले योगदान को पूरा महत्व दिया जाता है।

    गेंदबाजी कोच ने अनुभवी खिलाड़ियों का बचाव करते हुए कहा कि अभिषेक शर्मा पूर्व में टी20 क्रिकेट के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों में शुमार रह चुके हैं और संजू सैमसन विश्व कप विजेता टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं। इसके साथ ही सैमसन का पिछला आईपीएल सीजन भी बेहद शानदार रहा था। ऐसी स्थिति में कोचिंग स्टाफ और प्रबंधन की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने खिलाड़ियों के मुश्किल दौर में उनके साथ खड़े रहें और टीम के भीतर एक सुरक्षित तथा सकारात्मक सांस्कृतिक माहौल का निर्माण करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक अत्यंत युवा खिलाड़ी लगातार टीम का दरवाजा खटखटा रहा है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिहाज से काफी सुखद पहलू है।

    टीम प्रबंधन ने रणनीतिक तौर पर यह भी साफ कर दिया है कि केवल वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह देने के उद्देश्य से अन्य बल्लेबाजों की बल्लेबाजी पोजीशन में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। कोच के अनुसार, किसी भी खिलाड़ी को उसकी स्वाभाविक भूमिका और पसंदीदा पोजीशन से हटाना पूरी टीम के रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन परिस्थितियों में मैच जिताने वाले अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, जिसके बाद ही परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ शीर्ष क्रम का निर्धारण किया जाएगा।

    भले ही मोर्ने मॉर्कल ने वैभव सूर्यवंशी के आधिकारिक डेब्यू की किसी निश्चित तारीख या मैच का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस 15 वर्षीय खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता और परिपक्वता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय ड्रेसिंग रूम के दबाव को झेलना और वहां सहज रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। वैभव ने अपने आत्मविश्वास और बेहतरीन व्यवहार से बेहद कम समय में सीनियर खिलाड़ियों के साथ तालमेल बिठा लिया है। अंतरराष्ट्रीय नेट सेशन्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपनी बल्लेबाजी तकनीक से पूरे कोचिंग स्टाफ को बेहद प्रभावित किया है।

    शीर्ष क्रम के अलावा गेंदबाजी कोच ने भारतीय टीम के युवा गेंदबाजी संसाधनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि घरेलू क्रिकेट और नेट गेंदबाज के रूप में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रिंस की क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो रही है। इसके साथ ही चोट के बाद टीम में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज हर्षित राणा की रफ्तार और आक्रामकता को भी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाला संकेत बताया गया है।

  • घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ से जुड़ा है झाड़ू का नियम, शनिवार और अमावस्या के खास मुहूर्त पर पुरानी वस्तु बदलने से दूर हो सकता है बड़ा वास्तु दोष

    घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ से जुड़ा है झाड़ू का नियम, शनिवार और अमावस्या के खास मुहूर्त पर पुरानी वस्तु बदलने से दूर हो सकता है बड़ा वास्तु दोष

    नई दिल्ली । भारतीय सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र के प्राचीन सिद्धांतों में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु का संबंध परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति से जोड़ा गया है। इसी कड़ी में घर की नियमित सफाई के लिए उपयोग होने वाली झाड़ू को केवल एक साधारण वस्तु न मानकर, धन की देवी महालक्ष्मी का प्रतीक और सकारात्मक ऊर्जा का संवाहक माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, दैनिक जीवन में अनजाने में की जाने वाली कुछ छोटी-सी गलतियां और झाड़ू का गलत दिशा में रखरखाव घर में कंगाली और आर्थिक तंगी का एक बड़ा कारण बन सकता है।

    आधुनिक जीवनशैली में अक्सर लोग घर की सफाई करने के बाद झाड़ू को किसी भी स्थान पर रख देते हैं, अथवा बहुत अधिक घिस जाने और टूटने के बाद भी उसका निरंतर उपयोग करते रहते हैं। वास्तु विज्ञान के मुताबिक, यह आदत घर की सकारात्मकता को नष्ट करती है। जब किसी झाड़ू के बाल झड़ने लगें या उसका हैंडल टूट जाए, तो उसे तुरंत घर से हटा देना चाहिए। टूटी हुई झाड़ू से सफाई करने पर घर के भीतर वित्तीय बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं और संचित धन अनावश्यक कार्यों में खर्च होने लगता है।

    शास्त्रों में पुरानी झाड़ू को घर से बाहर निकालने और नई झाड़ू को घर में प्रवेश कराने के लिए भी विशेष दिन और मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। किसी भी दिन झाड़ू बदलना वर्जित माना गया है। इसके लिए शनिवार का दिन सबसे उत्तम और शुभ फलदायी माना जाता है। शनिवार के दिन नई झाड़ू को उपयोग में लाने से घर की संचित नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का पूरी तरह से नाश होता है। इसके अलावा, अमावस्या की तिथि, शुक्ल पक्ष की एकादशी या किसी भी शुभ नक्षत्र के दौरान नई झाड़ू खरीदना घर की बरकत को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

    इसके साथ ही, झाड़ू को रखने के स्थान और उसकी स्थिति को लेकर भी कड़े नियम बताए गए हैं। झाड़ू को कभी भी घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने या ऐसी जगह पर नहीं रखना चाहिए, जहां बाहर से आने वाले किसी भी अतिथि की नजर उस पर सीधे पड़े। इसे हमेशा घर के किसी छिपे हुए और सुरक्षित स्थान पर ही लिटाकर रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, झाड़ू को खड़ा करके रखना एक गंभीर दोष माना जाता है, जो घर के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद और तनाव को बढ़ाता है। दिशाओं के संदर्भ में, इसे रखने के लिए हमेशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण का ही चुनाव करना सबसे अधिक उपयुक्त माना गया है।

    समय चक्र के अनुसार भी सफाई व्यवस्था के कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनका उल्लंघन आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। भारतीय परिवारों में सूर्यास्त के बाद यानी शाम के समय घर में झाड़ू लगाना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि संध्याकाल के समय सफाई करने से घर में मौजूद लक्ष्मी जी का अनादर होता है और वह घर से बाहर चली जाती हैं, जिससे परिवार को धन की कमी का सामना करना पड़ता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, पुरानी झाड़ू का विसर्जन करते समय भी बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। जब भी घर में नई झाड़ू लाई जाए, तो पुरानी झाड़ू को केवल शनिवार या अमावस्या के दिन ही घर की सीमा से बाहर करना चाहिए। इसे किसी सुनसान स्थान पर या किसी बड़े पेड़ के नीचे छोड़ देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुपयोगी हो चुकी पुरानी झाड़ू को भूलकर भी जलाना नहीं चाहिए, क्योंकि झाड़ू को अग्नि के हवाले करना सीधे तौर पर महालक्ष्मी के अपमान के समान माना जाता है, जिससे घर की बरकत पूरी तरह से समाप्त हो सकती है।

  • आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले सुपरस्टार यश का पुराना पारिवारिक बयान इंटरनेट पर वायरल, सोशल मीडिया पर सिनेमाई मर्यादा और लैंगिक भेदभाव को लेकर छिड़ी बड़ी बहस

    नई दिल्ली । कन्नड़ सिनेमा से निकलकर देशव्यापी पहचान बनाने वाले सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का टीजर रिलीज होने के बाद से ही अभिनेता को लेकर सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, फिल्म की चर्चाओं के बीच अभिनेता का एक दशक पुराना बयान इंटरनेट पर अचानक दोबारा वायरल हो गया है, जिसने फिल्म जगत और दर्शकों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    यह पूरा मामला साल 2014 का है, जब अभिनेता यश ने मशहूर टॉक शो ‘वीकेंड विद रमेश’ में शिरकत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने फिल्मों में अपनी सीमाओं, ऑन-स्क्रीन रोमांटिक दृश्यों और अपने पारिवारिक मूल्यों को लेकर खुलकर बात की थी। उस समय दिए गए अपने इंटरव्यू में यश ने स्वीकार किया था कि सेट पर रोमांटिक सीन फिल्माते समय वह काफी असहज और नर्वस हो जाते थे। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी बताया था कि उनके इन दृश्यों को देखकर उनकी पत्नी राधिका और खुद उनकी मां भी उन पर हंसती थीं और कहती थीं कि उन्हें ठीक से रोमांस करना नहीं आता।

    इसी टॉक शो के दौरान यश ने एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत का जिक्र किया था, जिसे वह अपने अभिनय करियर में हमेशा लागू करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि वह आज भी जीवन में एक कड़ा नियम फॉलो करते हैं कि अगर वह किसी दृश्य को अपने माता-पिता के साथ बैठकर आराम से नहीं देख सकते, तो वह वैसा सीन स्क्रीन पर कभी नहीं करेंगे। उनका मानना था कि जिन दृश्यों को देखकर अभिनेता स्वयं या उसका परिवार असहज हो, उससे आम दर्शकों को भी परदे पर देखते समय निश्चित रूप से असहजता महसूस होती है।

    अब जबकि फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर दर्शकों के सामने आ चुका है, तो यश के इसी पुराने बयान के स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स इस बयान को उनकी नई फिल्म के संदर्भ से जोड़कर देख रहे हैं। कुछ प्रशंसकों का कहना है कि यश हमेशा से अपनी फिल्मों की पारिवारिक मर्यादा को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं और वे ‘टॉक्सिक’ में भी अपने इसी पुराने वादे और मूल्यों पर कायम रहेंगे।

    दूसरी तरफ, इस पुराने बयान के दोबारा सामने आने से इंटरनेट पर एक अलग सामाजिक और लैंगिक बहस भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का एक धड़ा इस फिल्म से जुड़ी उनकी सह-कलाकार कियारा आडवाणी को लेकर की जा रही टिप्पणियों और आलोचनाओं पर सवाल उठा रहा है। कई यूजर्स ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि जब यश खुद किसी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और बोल्ड या एक्शन दृश्यों का हिस्सा बनते हैं, तो समाज उनके पारिवारिक जीवन, उनकी शादी या उनके बच्चों को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता।

    इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मनोरंजन उद्योग में आज भी मौजूद दोहरे मापदंडों को रेखांकित किया है। लोगों का कहना है कि यश के शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद समाज पुरुषों से उनके ऑन-स्क्रीन किरदारों को लेकर कम सवाल पूछता है, जबकि महिला अभिनेत्रियों को उनके दृश्यों के लिए आज भी अधिक जज किया जाता है। फिलहाल, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज से पहले वायरल हुआ यह बयान फिल्म के प्रचार के साथ-साथ सिनेमा में कलाकारों की व्यक्तिगत सीमाओं और सामाजिक दृष्टिकोण पर विचार करने का एक नया जरिया बन गया है।

  • गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह

    गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह


    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने पावर सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने भारत में उत्पादन कर रही चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में भाग लेने की विशेष अनुमति दे दी है। यह छूट केवल दो वर्षों के लिए दी गई है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली क्षेत्र की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार टीबीईए एनर्जी नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को सार्वजनिक खरीद नियमों के कुछ प्रावधानों से राहत दी गई है। सामान्य तौर पर भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने से पहले संबंधित भारतीय प्राधिकरण से अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षा मंजूरी लेनी होती है। इन चार कंपनियों को फिलहाल इस प्रक्रिया से सीमित अवधि के लिए छूट प्रदान की गई है।

    सरकार का कहना है कि यह फैसला बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में वित्त मंत्रालय से सिफारिश की थी कि भारत में निर्माण इकाइयां स्थापित कर चुकी कुछ कंपनियों को विशेष अनुमति दी जाए ताकि ट्रांसमिशन और बिजली ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी न हो। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने दो वर्षों के लिए यह विशेष छूट मंजूर की।

    इन चारों कंपनियों की भूमिका भारतीय बिजली क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये कंपनियां ट्रांसफार्मर हाई वोल्टेज स्विच गियर गैस इंसुलेटेड स्विच गियर और ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में करती हैं। इनमें से न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश की कई प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम कर रही है जबकि अन्य कंपनियां भी बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में अहम योगदान दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपकरणों के बिना कई बड़ी बिजली परियोजनाएं समय पर पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

    वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के लिए कई सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत सरकारी खरीद में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसके अलावा प्रेस नोट तीन के माध्यम से चीन सहित भारत की सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए भी सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक कर दी गई थी। इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करना था।

    हालांकि बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी ने सरकार को सीमित दायरे में व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बिजली उद्योग ने भी चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा प्रक्रिया में राहत की मांग की थी क्योंकि कई परियोजनाएं विशेषज्ञों की कमी के कारण प्रभावित हो रही थीं। सरकार का मानना है कि घरेलू विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से काम कर रही इन कंपनियों को सीमित अवधि की छूट देने से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में तेजी आएगी और देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूती मिलेगी। साथ ही सुरक्षा संबंधी निगरानी और अन्य सरकारी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी ताकि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता न हो।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और निजता के अधिकार को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार किसी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से ऐसे तथ्यों को छिपाने की छूट नहीं देता जो अदालत में चल रहे व्यभिचार और तलाक के मामले की सुनवाई के लिए जरूरी हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि किसी पति या पत्नी पर विवाहेतर संबंध रखने का आरोप है तो वह प्राइवेसी का हवाला देकर अपने मोबाइल कॉल रिकॉर्ड या होटल में ठहरने से जुड़ी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता।

    न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। जब न्याय के हित और किसी मामले की सच्चाई सामने लाने की आवश्यकता हो तब इस अधिकार पर उचित और कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अदालत का मानना था कि यदि व्यभिचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी है तो संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

    यह मामला वर्ष 1998 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा है जिनकी वर्ष 2000 में एक बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पत्नी को संदेह हुआ कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेतर संबंध है। पत्नी का आरोप था कि उसका पति दूसरी महिला के साथ जयपुर के एक होटल में भी रुका था। इन आरोपों के आधार पर उसने अदालत में तलाक की याचिका दायर की और अपने दावों को साबित करने के लिए पति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा होटल में ठहरने से संबंधित दस्तावेज मंगवाने की मांग की।

    फैमिली कोर्ट ने पत्नी की मांग को उचित मानते हुए संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को पति ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इससे उसके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि जनहित तथा न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए निजता के अधिकार पर आवश्यक सीमाएं लगाई जा सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम व्यभिचार को तलाक का वैध आधार मानता है इसलिए ऐसे मामलों में आवश्यक साक्ष्य जुटाना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि अदालत के समक्ष किसी वैवाहिक विवाद में विवाहेतर संबंध का आरोप लगाया गया है तो संबंधित पक्ष को केवल निजता का हवाला देकर आवश्यक जानकारी छिपाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में सत्य का पता लगाने के लिए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण होते हुए भी न्यायिक जांच से ऊपर नहीं है। यदि किसी मामले में कॉल रिकॉर्ड होटल बुकिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए आवश्यक हैं तो अदालत उन्हें मंगवा सकती है। यह फैसला भविष्य में तलाक और व्यभिचार से जुड़े मामलों की सुनवाई में साक्ष्यों के महत्व को और अधिक मजबूत करेगा।

  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।