Author: bharati

  • गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित

    गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित


    नई दिल्ली। देशभर के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं (लू) ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है और सेहत पर गंभीर असर देखने को मिल सकता है।

    गर्मी का यह मौसम शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में सतर्क रहना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

     हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी

    हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉर्शन की स्थिति अचानक गंभीर रूप ले सकती है। इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    इन लक्षणों पर विशेष ध्यान दें-

    अचानक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होना
    चक्कर आना
    ज्यादा पसीना आना या पसीना अचानक बंद हो जाना
    मांसपेशियों में ऐंठन
    शरीर का तापमान बढ़ना

    यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है।

     हीट स्ट्रोक से बचाव के जरूरी उपाय

    गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं-

    ठंडी जगह पर रहें
    अगर अस्वस्थ महसूस हो तो तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर जाएं।
    शरीर को हाइड्रेट रखें
    भरपूर पानी पिएं और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें।
     ORS और घरेलू पेय का सेवन करें

    नींबू पानी, छाछ, नमक-शक्कर का घोल और ओआरएस शरीर में ऊर्जा और पानी की कमी को पूरा करते हैं।

    हल्के कपड़े पहनें

    ढीले और सूती कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

     हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें?

    यदि किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो तुरंत ये कदम उठाएं-

    व्यक्ति को ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं
    शरीर को ठंडा करने के उपाय करें
    तरल पदार्थ पिलाएं (अगर होश में हो)
    लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

    गर्मी का मौसम जितना सामान्य दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर सावधानी से इससे बचा जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, धूप से बचाव करना और शुरुआती लक्षणों को पहचानना इस मौसम में सबसे जरूरी कदम हैं।

  • गोरखपुर में प्रेमी की खातिर मौत से खेल गई किशोरी, बिजली के टावर पर चढ़कर घंटों मचाया कोहराम

    गोरखपुर में प्रेमी की खातिर मौत से खेल गई किशोरी, बिजली के टावर पर चढ़कर घंटों मचाया कोहराम


    नई दिल्ली। गोरखपुर के ग्रामीण अंचल में गुरुवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी जिसने कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर सवाल खड़े कर दिए। चिलुआताल इलाके के एक गांव में उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब ग्रामीणों ने एक किशोरी को जान जोखिम में डालकर बिजली के ऊंचे हाईटेंशन पोल पर चढ़ते हुए देखा। यह नजारा इतना खौफनाक था कि लोगों की रूह कांप गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और हर कोई किशोरी से नीचे उतरने की मिन्नतें करने लगा। मामला प्रेम संबंधों से जुड़ा था, जहाँ किशोरी समाज और कानून की बंदिशों को तोड़कर अपने उस साथी के पास जाने की जिद कर रही थी जिसे पुलिस ने पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया था।

    इस पूरे प्रकरण की पटकथा मार्च के महीने में शुरू हुई थी, जब किशोरी की मां ने एक युवक पर अपनी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गंभीर आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की और लड़की को बरामद कर युवक को जेल की कालकोठरी में डाल दिया था। किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था, लेकिन उसके मन में उपजा विद्रोह शांत नहीं हुआ। गुरुवार की सुबह वह घर से निकली और सीधे बिजली के टावर पर चढ़ गई। उसकी केवल एक ही मांग थी कि उसे उसके प्रेमी के घर जाने दिया जाए। इस जिद्दी रवैये ने पुलिस प्रशासन को भी मुश्किल में डाल दिया क्योंकि बिजली की लाइन चालू होने की स्थिति में कोई भी बड़ी अनहोनी घट सकती थी।

    लगभग ढाई घंटे तक चले इस ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामे के दौरान पुलिस की टीम ने सूझबूझ का परिचय दिया। जमीन पर खड़े अधिकारी लगातार फोन के जरिए किशोरी से बातचीत करते रहे और उसे यह यकीन दिलाने की कोशिश की गई कि उसकी हर बात सुनी जाएगी। जब पुलिस ने उसे भविष्य में मदद का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर उसके तेवर नरम पड़े और वह धीरे-धीरे पोल से नीचे उतरी। इस दौरान पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा और लोग अपनी सांसें थामे रहे। नीचे उतरते ही पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और थाने ले जाकर आवश्यक पूछताछ की, जिसके बाद उसे दोबारा उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।

    दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस का एक सख्त चेहरा भी देखने को मिला। एक अन्य आपराधिक मामले में जहाँ एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था, पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को न केवल गिरफ्तार किया बल्कि महज 24 घंटे के भीतर न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी। अधिकारियों का कहना है कि वे महिला अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं और इस मामले में कड़ी सजा दिलाने के लिए न्यायालय में मजबूत पैरवी करेंगे। इन दोनों घटनाओं ने एक तरफ जहाँ युवाओं में बढ़ते आवेश को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की मुस्तैदी को भी रेखांकित किया है।

  • मई का OTT कैलेंडर: 10 बड़ी फिल्में और वेब सीरीज आ रहीं रिलीज, एंटरटेनमेंट का फुल डोज तय


    नई दिल्ली। साल 2026 का मई महीना ओटीटी दर्शकों के लिए बेहद खास होने जा रहा है। इस महीने एक तरफ जहां बड़े सीक्वल्स अपनी वापसी कर रहे हैं, वहीं कई नई कहानियां भी दर्शकों को रोमांचित करने के लिए तैयार हैं। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, जी5 और सोनी लिव जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कुल 10 बड़ी फिल्में और सीरीज रिलीज हो रही हैं।

    1. अनदेखी सीजन 4 (SonyLIV)
    क्राइम थ्रिलर सीरीज अनदेखी अपने चौथे सीजन के साथ लौट रही है। 1 मई को रिलीज होने वाली इस सीरीज में एक बार फिर सस्पेंस और पावर गेम्स का रोमांच देखने को मिलेगा।

    2. सिटाडेल 2 (Amazon Prime Video)
    प्रियंका चोपड़ा जोनस की जासूसी दुनिया एक बार फिर धमाल मचाने आ रही है। 6 मई को रिलीज होने वाली यह एक्शन-थ्रिलर सीरीज हाई-ऑक्टेन ड्रामा से भरपूर होगी।

     3. लुक्खे (Amazon Prime Video)
    राशी खन्ना और पलक तिवारी स्टारर यह एक्शन ड्रामा सीरीज 8 मई को रिलीज होगी, जिसमें इमोशन और एक्शन का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा।

     4. ग्लोरी (Netflix)
    दिव्येंदु, जन्नत जुबैर और पुलकित सम्राट की यह क्राइम-स्पोर्ट्स ड्रामा सीरीज 1 मई को स्ट्रीम होगी, जो खेल और अपराध की दुनिया को जोड़ती है।

    5. जैक रयान: घोस्ट वॉर (Amazon Prime Video)
    जॉन क्रॉसिंस्की की यह एक्शन फिल्म 20 मई को आएगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय साजिशों और थ्रिल का जबरदस्त तड़का मिलेगा।

    6. स्पाइडर-नोयर (Amazon Prime Video)
    निकोलस केज की यह सीरीज 27 मई को रिलीज होगी, जिसमें डार्क एक्शन और सुपरहीरो स्टाइल कहानी देखने को मिलेगी।

     7. द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड (ZEE5)
    1 मई को रिलीज होने वाली यह फिल्म एक बार फिर सामाजिक और थ्रिलर कहानी के साथ चर्चा में रहने वाली है।

    8. सपने वर्सेज एवरीवन 2 (Amazon Prime Video)
    साइकोलॉजिकल ड्रामा का दूसरा सीजन 1 मई को आएगा, जो इंसानी सोच और संघर्षों की गहरी कहानी दिखाएगा।

     9. राकासा (Netflix)
    फैंटेसी हॉरर-कॉमेडी फिल्म 1 मई को रिलीज होगी, जिसमें डर और हास्य का अनोखा मिश्रण देखने को मिलेगा।

    10. कर्तव्य (Netflix)
    सैफ अली खान स्टारर यह क्राइम ड्रामा 15 मई को रिलीज होगी, जो न्याय और जिम्मेदारी की कहानी को दर्शाएगी।
    मई 2026 ओटीटी दर्शकों के लिए एक फुल एंटरटेनमेंट पैकेज लेकर आ रहा है। चाहे आपको एक्शन पसंद हो, थ्रिलर या फिर क्राइम ड्रामा इस महीने हर तरह का कंटेंट आपकी वॉचलिस्ट में शामिल होने वाला है।

  • हेमा मालिनी का गला, बोलीं- "खुशकिस्मत हूं कि धर्मेंद्र जैसा हमसफर मिला, अब आगे का सफर मुश्किल है"

    हेमा मालिनी का गला, बोलीं- "खुशकिस्मत हूं कि धर्मेंद्र जैसा हमसफर मिला, अब आगे का सफर मुश्किल है"

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी खूबसूरती और अदाकारी से दशकों तक राज करने वाली ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर अपने जज्बातों को काबू में नहीं रख सकीं। पिछले साल नवंबर के महीने में सिनेमा जगत के ‘हीमैन’ धर्मेंद्र के विदा होने के बाद से हेमा मालिनी खुद को काफी अकेला महसूस कर रही हैं। एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने अपने जीवनसाथी की विरासत और उनके व्यक्तित्व पर बात करना शुरू किया, तो उनकी आंखें नम हो गईं और एक समय ऐसा आया जब उनके शब्द उनका साथ नहीं दे रहे थे। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया, क्योंकि पर्दे की सबसे चहेती जोड़ी में से एक का यह दर्द बेहद व्यक्तिगत और गहरा था।

    हेमा मालिनी ने भारी मन से धर्मेंद्र के काम के प्रति उनके जुनून और समर्पण को याद किया। उन्होंने बताया कि किस तरह धर्मेंद्र कैमरे के साथ एक अनूठा रिश्ता साझा करते थे, जैसे वह उनका कोई सगा जीवनसाथी हो। उनकी नजर में धर्मेंद्र सिर्फ एक महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने अपने व्यवहार और सादगी से करोड़ों दिलों को जीता। हेमा ने साझा किया कि धर्मेंद्र हमेशा मानते थे कि फिल्मों के जरिए वह सीधे जनता के दिलों से जुड़ते हैं। उनके लिए कला केवल पेशा नहीं, बल्कि दर्शकों के प्रति उनके असीम प्यार को व्यक्त करने का एक जरिया थी, और यही कारण था कि उनकी हर भूमिका जीवंत लगती थी।

    अपने साझा जीवन को याद करते हुए हेमा मालिनी ने खुद को बेहद भाग्यशाली बताया। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा कि धर्मेंद्र के साथ बिताया गया हर पल एक आशीर्वाद की तरह था। एक दोस्त, एक अभिनेता और एक पिता के रूप में उन्होंने न केवल परिवार बल्कि पूरी इंडस्ट्री को प्रेरित किया। 1970 के दशक में शुरू हुआ उनका यह सफर कई उतार-चढ़ाव और सामाजिक चुनौतियों से होकर गुजरा, लेकिन दोनों के बीच का प्रेम कभी कम नहीं हुआ। ‘शोले’ और ‘सीता और गीता’ जैसी कालजयी फिल्मों में साथ काम करने के दौरान उनकी केमिस्ट्री ने पर्दे पर जो जादू बिखेरा, वह आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।

    जीवन के इस पड़ाव पर हेमा मालिनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके बिना भविष्य को जीने की है। उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि उनके जाने के बाद हर दिन एक खालीपन का एहसास कराता है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे का सफर वह कैसे तय करेंगी। हालांकि हेमा मालिनी अब राजनीति में सक्रिय हैं और फिल्मों से दूरी बना चुकी हैं, लेकिन उनके दिल के किसी कोने में आज भी वही ‘ड्रीम गर्ल’ बसी है जो अपने ‘हीमैन’ की यादों के सहारे अपनी जिंदगी की शाम गुजार रही है। यह भावुक संबोधन इस बात का प्रमाण था कि सच्चा प्रेम समय और मृत्यु की सीमाओं से परे होता है।

  • दहाड़ गुजरात की, पर गूँज सिर्फ कोहली की: नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फैंस की दीवानगी ने रचा नया इतिहास, पीछे छूटे सीजन के सारे रिकॉर्ड

    दहाड़ गुजरात की, पर गूँज सिर्फ कोहली की: नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फैंस की दीवानगी ने रचा नया इतिहास, पीछे छूटे सीजन के सारे रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में जब भी लोकप्रियता और दीवानगी की बात आती है, तो एक नाम सबसे ऊपर चमकता है और वह है विराट कोहली। भले ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी20 और टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन प्रशंसकों के दिलों में उनकी जगह आज भी बरकरार है। इसका जीवंत प्रमाण अहमदाबाद के ऐतिहासिक मैदान पर देखने को मिला, जहाँ गुजरात टाइटन्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच हुए मुकाबले ने इस सीजन की लोकप्रियता के सारे पुराने कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। दुनिया के इस सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में गुरुवार की शाम एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने खेल जगत को हैरान कर दिया। जहाँ आम तौर पर स्टेडियम का एक बड़ा हिस्सा खाली नजर आता था, वहाँ कोहली की एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों का हुजूम उमड़ पड़ा।

    आंकड़ों की नजर से देखें तो यह मुकाबला ऐतिहासिक रहा। इस सीजन में यहाँ खेले गए पिछले मैचों में दर्शकों की संख्या 35 से 45 हजार के बीच सिमट कर रह गई थी, लेकिन जैसे ही मैदान पर बेंगलुरु की टीम और उनके सबसे बड़े सितारे का आगमन हुआ, अटेंडेंस का ग्राफ सीधे 90 हजार के पार पहुँच गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल 90,865 दर्शकों ने स्टेडियम की दीर्घाओं को भरा, जो इस साल के खेल सत्र का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इससे पहले मुंबई और राजस्थान जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ हुए मैचों में भी दर्शकों की संख्या इस जादुई आंकड़े के आधे तक भी नहीं पहुँच सकी थी। यह भीड़ दर्शाती है कि प्रशंसकों के लिए खेल से बढ़कर खिलाड़ी का व्यक्तित्व और उसका जुड़ाव मायने रखता है।

    स्टेडियम के भीतर का माहौल पूरी तरह से एकतरफा नजर आ रहा था। हालांकि यह गुजरात टाइटन्स का घरेलू मैदान था, लेकिन स्टैंड्स में मौजूद भीड़ का समर्थन और शोर सबसे ज्यादा मेहमान टीम के पूर्व कप्तान के लिए था। ऐसा लग रहा था मानो पूरा अहमदाबाद सिर्फ अपने चहेते खिलाड़ी को खेलते देखने के लिए सड़कों पर उतर आया हो। यही स्थिति कुछ समय पहले देश की राजधानी के मैदान पर भी देखी गई थी, जहाँ टिकटों के लिए मारामारी और स्टेडियम के बाहर समर्थकों की लंबी कतारें एक आम नजारा बन गई थीं। अहमदाबाद में भी एंट्री गेट्स पर प्रशंसकों का जोश और उनकी कतारें यह बता रही थीं कि क्रिकेट का असली रोमांच आज भी मैदान के अंदर मौजूद उन सितारों से है जो खेल को एक त्योहार बना देते हैं।

    इस अभूतपूर्व भीड़ ने न केवल आयोजकों को गदगद कर दिया, बल्कि खेल के भविष्य और खिलाड़ियों की विरासत पर भी एक गहरी छाप छोड़ी है। जहाँ एक तरफ युवा खिलाड़ियों का उदय हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों का दबदबा आज भी कायम है। 90 फीसदी तक भरे हुए इस स्टेडियम ने एक संदेश साफ कर दिया है कि भले ही प्रारूप बदल रहे हों या खिलाड़ी रिटायरमेंट ले रहे हों, लेकिन मैदान पर उनकी मौजूदगी ही दर्शकों को खींच लाने के लिए काफी है। इस ऐतिहासिक उपस्थिति ने अहमदाबाद के इस मैदान को इस सीजन के सबसे सफल आयोजन केंद्रों में शामिल कर दिया है, जिसका श्रेय पूरी तरह से क्रिकेट प्रेमियों के जुनून को जाता है।

  • गुजरात के कप्तान ने खोल दिए जीत के तीन गुप्त राज, इस तरह चकनाचूर हुआ विपक्षी टीम का विजय रथ

    गुजरात के कप्तान ने खोल दिए जीत के तीन गुप्त राज, इस तरह चकनाचूर हुआ विपक्षी टीम का विजय रथ

    नई दिल्ली। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में गुजरात टाइटन्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 4 विकेट से हराकर न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि पिछली हार का बदला भी चुकता कर दिया। इस मुकाबले में जीत के बाद कप्तान शुभमन गिल ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस जीत का सबसे बड़ा कारण न तो बल्लेबाजी थी और न ही गेंदबाजी, बल्कि टीम की बेहतरीन फील्डिंग रही, जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    मैच के दौरान गुजरात की टीम ने शुरुआत से ही ऊर्जा और आक्रामकता दिखाई। गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन करते हुए RCB को 160 रन के भीतर रोक दिया, जो इस पिच पर एक प्रतिस्पर्धी स्कोर माना जा रहा था। गिल ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को सीमित स्कोर पर रोकना गेंदबाजों की बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन असली फर्क मैदान पर दिखाई गई फुर्ती और समर्पण ने पैदा किया।

    गिल ने खासतौर पर फील्डिंग की तारीफ करते हुए कहा कि टीम ने पिछले मैचों की गलतियों से सीख ली थी। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले कुछ मौकों पर टीम की फील्डिंग कमजोर रही थी, लेकिन इस मैच में हर खिलाड़ी ने जिम्मेदारी ली और एकजुट होकर प्रदर्शन किया। दूसरे ओवर के बाद जब Virat Kohli ने तेजी से रन बनाने शुरू किए, तब टीम ने दबाव में बिखरने के बजाय संयम बनाए रखा और शानदार वापसी की।

    बल्लेबाजी की बात करें तो कप्तान गिल खुद बेहतरीन लय में नजर आए। उन्होंने पावरप्ले के दौरान आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। गिल ने बताया कि वह शुरुआत से ही अच्छे टच में थे और उन्होंने परिस्थिति के अनुसार आक्रामक खेलने का फैसला किया। उनका मानना था कि जब खिलाड़ी अपने ज़ोन में होता है, तो उसे मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए।

    मैच के अंतिम चरण में Rahul Tewatia ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 17 गेंदों में 27 रन की उनकी पारी ने टीम को जीत की ओर अग्रसर किया। गिल ने तेवतिया की सराहना करते हुए कहा कि वह टीम के लिए बेहद अहम खिलाड़ी हैं और दबाव की स्थिति में मैच खत्म करने की उनकी क्षमता काबिल-ए-तारीफ है। टाइमआउट के दौरान टीम की रणनीति स्पष्ट थी कि अंत तक संयम बनाए रखना है, जिसका परिणाम जीत के रूप में सामने आया।

    इस जीत के साथ गुजरात टाइटन्स ने सीजन में अपनी पांचवीं जीत दर्ज की और अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। टीम के खाते में अब 10 अंक हो चुके हैं, जो प्लेऑफ की दौड़ में उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। यह जीत सिर्फ एक मुकाबले की सफलता नहीं, बल्कि टीम की रणनीति, एकजुटता और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है।

  • ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार

    ईरान के मुद्दे पर US-जर्मनी आमने-सामने….. ट्रंप की चेतावनी के बाद जर्मन विदेश मंत्री का पलटवार


    बर्लिन।
    जर्मनी (Germany) ने अमेरिका (America) द्वारा अपने सैनिकों की संख्या घटाने की किसी भी संभावना के लिए खुद को पूरी तरह ‘तैयार’ बताया है। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल (German Foreign Minister Johann Wadephul) ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की धमकी के बावजूद नाटो और ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि ट्रंप ने बुधवार को ईरान मुद्दे पर चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ विवाद के बीच जर्मनी में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों को कम करने का संकेत दिया था।

    जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने मोरक्को की यात्रा के दौरान कहा कि हम इसके लिए तैयार हैं। हम नाटो के सभी निकायों में इस मुद्दे पर गहन और विश्वासपूर्ण चर्चा कर रहे हैं तथा अमेरिका से निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले पर सहयोगियों के साथ उचित परामर्श किया जाएगा। इससे पहले चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को लेकर जर्मनी का रुख एक मजबूत और एकीकृत नाटो तथा विश्वसनीय ट्रांसअटलांटिक साझेदारी पर केंद्रित है। मर्ज ने ट्रंप के बयान का सीधा जिक्र किए बिना कहा कि बर्लिन वाशिंगटन समेत अपने सभी सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है।


    जर्मनी का भरोसा: पुराना मुद्दा, कोई नई चिंता नहीं

    विदेश मंत्री वाडेफुल ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने का विचार ईमानदारी से कहें तो बिल्कुल नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों के समय भी यह मुद्दा उठ चुका है। वाडेफुल ने जर्मनी में बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किसी भी तरह की चर्चा से इनकार किया। उन्होंने रामस्टीन एयर बेस का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अमेरिका और जर्मनी दोनों के लिए अपूरणीय है। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस पूरे मामले पर पूरी तरह निश्चिंत है।

    ट्रंप का गुस्सा और सैनिकों की तैनाती पर सवाल
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि ईरान संबंधी मुद्दे पर चांसलर मर्ज के साथ विवाद के चलते अमेरिका जर्मनी में तैनात हजारों सैनिकों में से कुछ को वापस बुलाने या फिर से तैनात करने पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने मर्ज पर आरोप लगाया था कि उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सही जानकारी नहीं है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए इस बात की पुष्टि की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने कहा था कि ईरान वाशिंगटन को अपमानित कर रहा है।

  • RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल

    RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India- RBI) ने पिछले छह महीनों में अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा देश के भीतर शिफ्ट किया है, जिससे गोल्ड की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है।


    6 महीने में 104 टन सोना देश में शिफ्ट

    आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 104.23 मीट्रिक टन सोना विदेश से भारत लाया गया। इसके साथ ही देश में रखा गया कुल सोना बढ़कर 290.37 मीट्रिक टन हो गया है। हालांकि, कुल गोल्ड रिजर्व में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है, जो सितंबर 2025 के 880.18 टन से थोड़ा ही ज्यादा है।

    विदेश में अभी भी कितना सोना रखा है
    आरबीआई अभी भी अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेश में सुरक्षित रखता है। करीब 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा 2.80 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है।


    गोल्ड की हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी

    सोने की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।मार्च 2026 तक फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई, जो छह महीने पहले 13.92% थी। यह दिखाता है कि RBI धीरे-धीरे अपने रिजर्व में गोल्ड का महत्व बढ़ा रहा है।


    विदेशी मुद्रा भंडार का हाल

    भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) का बड़ा हिस्सा है। कुल विदेशी मुद्रा 552.28 अरब डॉलर है। इसमें से 465.61 अरब डॉलर सिक्योरिटीज में निवेश है। 46.83 अरब डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा है। 39.84 अरब डॉलर विदेशी कमर्शियल बैंकों में जमा है।

    रणनीति में क्या बदलाव दिख रहा: रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि RBI धीरे-धीरे अपनी रणनीति बदल रहा है। सिक्योरिटीज और विदेशी बैंकों में जमा राशि थोड़ी घटाकर, अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा बढ़ाई गई है।


    क्या है इसका मतलब

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए RBI अपने रिजर्व को ज्यादा स्थिर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

  • आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव

    आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव


    नई दिल्ली।
    एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आज 1 मई से नियमों में कई बदलाव (Many changes Rules) हो गए हैं। जिसकी वजह से अब एलपीजी सिलेंडर बिना डॉक्यूमेंट के लेना और कठिन हो जाएगा। बता दें, इस बीच कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial gas cylinder) की कीमतों में आज भारी इजाफा किया गया है।

    1 मई से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बदलाव? (LPG Booking rules changed)
    अभी तक आप अपना एलपीजी बुकिंग पासबुक के जरिए भी सिलेंडर पा जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिना ओटीपी के एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाएगा। डिस्ट्रीब्यूटर्स DAC नंबर के बिना एलपीजी सिलेंडर नहीं दे पाएंगे। इस नियम को आज से और कड़ा कर दिया गया है।


    एलपीजी बुकिंग कितने दिन में? (LPG booking time)

    1 मई यानी आज से शहरी क्षेत्रों में 21 दिन की जगह 25 दिन पर एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करवाई जा सकती है। वहीं, गांव में पहले से ही 45 दिन के अंतराल पर एलपीजी सिलेंडर बुक किया जा सकता है। सप्लाई को बेहतर बनाने और गलत उपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम बनाए हैं।


    98% बुकिंग हो रही है ऑनलाइन

    मौजूदा समय में 98% सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन ही हो रही है। जबकि 94 प्रतिशत डिलीवरी कोड्स के जरिए हो रहा है। इससे कालाबाजारी पर नकेल कसी गई है।


    eKYC हुई एलपीजी सिलेंडर के लिए जरूरी (LPG booking ekyc details)

    अगर आपने अपने एलपीजी पासबुक का eKYC नहीं करवाया है तो ऐसी स्थिति में सिलेंडर नहीं मिलेगा। अब आधार आधारित eKYC करवाना जरूरी हो गया है। बता दें, जिन ग्राहकों ने eKYC नहीं करवाई है उन्हें एलपीजी सिलेंडर बुक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


    1 मई को बढ़ गए कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट (LPG price today)

    आज दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का रेट 993 रुपये बढ़ गया है। जिसके बाद 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का रेट 3071.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई भी इजाफा नहीं किया है। आखिरी बार घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट मार्च में बढ़ाया गया था। उसके बाद से ही दाम स्थिर है।

    युद्ध के बाद एलपीजी की शुरू हुई किल्लत (LPG latest News)
    भारत अपनी एलपीजी जरूरत के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन युद्ध ने आपूर्ति पर बुरा असर डाला है। जिसकी वजह से सप्लाई लगभग रुक गई है। सरकार ने घरेलू कंपनियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा है। इसके अलावा यूनाइटेड स्टेट से भी एलपीजी मंगवाया जा रहा है। हालांकि, भारत को इसके लिए और पैसे खर्च करने होंगे।

  • भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष की नई दलील… कहा- खिलजी के हमले में मंदिर तोड़ने के सबूत नहीं

    भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष की नई दलील… कहा- खिलजी के हमले में मंदिर तोड़ने के सबूत नहीं


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में गुरुवार को मुस्लिम पक्ष (Muslim side) ने दलील दी कि भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में सरस्वती मंदिर (Saraswati Temple) होने और अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले में इसे गिरा कर मस्जिद बनाने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। याचिकाकर्ता ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने हाई कोर्ट में दावा किया है कि भोजशाला परमार राजवंश के राजा भोज की ओर से साल 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। इसे मालवा क्षेत्र पर अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान 1305 में ढहाया गया था।

    संगठन ने यह दावा भी किया है कि विवादित परिसर में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के अवशेषों का पुनः उपयोग किया गया था। सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने इंदौर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के समक्ष विस्तृत दलीलें पेश कीं।

    वारसी ने विभिन्न इतिहासकारों और अभिलेखीय स्रोतों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि 14वीं सदी की शुरुआत में अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान धार में किसी सरस्वती मंदिर को तोड़े जाने का कोई भी दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है।


    खिलजी की जीत दर्ज लेकिन मंदिर तोड़ने का जिक्र नहीं

    मुस्लिम पक्ष के वकील ने वीडी महाजन, आरसी मजूमदार और अन्य देशी-विदेशी इतिहासकारों की पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि खिलजी की फौज द्वारा 1305 के दौरान मालवा में जीत हासिल करना इतिहास में दर्ज है, लेकिन इनमें से कोई भी स्रोत इस सैन्य अभियान के दौरान किसी मंदिर को तोड़े जाने या किसी इमारत को मस्जिद में बदले जाने का उल्लेख नहीं करता।


    ब्रिटिश म्यूजियम में देवी अम्बिका की मूर्ति

    इतिहासकारों के अनुसार, 1305 में मालवा पर आक्रमण का नेतृत्व खिलजी के सेनापति और प्रशासक ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने किया था। वारसी ने 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे कथित पत्र का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है।


    ASI के अलग-अलग जवाब

    वारसी ने ASI की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए यह भी कहा कि इस विभाग ने भोजशाला की धार्मिक प्रकृति को लेकर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग जवाब दिए हैं। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की 2019 में दायर जनहित याचिका पर एएसआई का जवाब, ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और कुलदीप तिवारी की 2022 में अलग-अलग पेश दो जनहित याचिकाओं पर दिए गए जवाब से अलग है।


    अब ASI की वीडियोग्राफी पर अलग-अलग दलीलें

    हाई कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है। इस दिन मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से भोजशाला परिसर में एएसआई की वीडियोग्राफी के संबंध में दलीलें रखी जाएंगी। हाईकोर्ट इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।