Author: bharati

  • धुरंधर के बाद फिर बनेगी सुपरहिट जोड़ी आदित्य धर ने क्रैक किया नया आइडिया रणवीर सिंह से बातचीत शुरू

    धुरंधर के बाद फिर बनेगी सुपरहिट जोड़ी आदित्य धर ने क्रैक किया नया आइडिया रणवीर सिंह से बातचीत शुरू


    नई दिल्ली । फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता के बाद निर्देशक आदित्य धर और अभिनेता रणवीर सिंह की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आ सकती है इस खबर ने फैंस के बीच उत्साह को और बढ़ा दिया है क्योंकि पिछली फिल्म में इस जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और अब एक बार फिर कुछ बड़ा होने की उम्मीद जताई जा रही है

    रिपोर्ट्स के अनुसार आदित्य धर को अपनी अगली फिल्म के लिए एक नया और दमदार आइडिया मिल चुका है जिस पर वह जल्द ही काम शुरू करने वाले हैं फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है और सबसे पहले इसकी स्क्रिप्टिंग पर फोकस किया जाएगा बताया जा रहा है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है तो फिल्म की शूटिंग अगले साल शुरू हो सकती है

    खास बात यह है कि इस नए प्रोजेक्ट के लिए आदित्य धर एक बार फिर रणवीर सिंह को ही अपनी फिल्म का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं दोनों के बीच इसको लेकर शुरुआती बातचीत भी शुरू हो चुकी है हालांकि अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन इंडस्ट्री में इस संभावित सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं

    फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार भी आदित्य धर अपने प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर बनाने की योजना बना रहे हैं धुरंधर की तरह ही यह फिल्म भी भव्य स्केल पर तैयार की जाएगी जिसमें दमदार कहानी के साथ साथ शानदार एक्शन और इमोशनल ड्रामा देखने को मिल सकता है हालांकि फिल्म की बाकी स्टार कास्ट को लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है क्योंकि फिलहाल पूरा ध्यान कहानी और स्क्रीनप्ले को मजबूत बनाने पर है

    रणवीर सिंह की बात करें तो वह इस समय अपने अन्य प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं बताया जा रहा है कि वह अपनी फिल्म प्रलय की शूटिंग पूरी करने के बाद ही इस नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगे प्रलय एक अलग तरह की फिल्म होगी जिसमें जॉम्बी थीम देखने को मिल सकती है ऐसे में रणवीर सिंह एक बार फिर अपने किरदारों के साथ प्रयोग करते नजर आ सकते हैं

    धुरंधर और इसके सीक्वल धुरंधर द रिवेंज ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की थी रिपोर्ट्स के मुताबिक धुरंधर ने भारत में सैकड़ों करोड़ का कलेक्शन किया था जबकि इसके दूसरे भाग ने भी हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था इस सफलता के बाद दर्शकों को इस जोड़ी से और भी बड़ी उम्मीदें हैं

    अब देखना दिलचस्प होगा कि आदित्य धर और रणवीर सिंह की यह संभावित फिल्म कब आधिकारिक रूप से अनाउंस होती है और क्या यह जोड़ी एक बार फिर वही जादू दोहरा पाएगी जिसने पहले दर्शकों का दिल जीत लिया था

  • 21 दिन खुद को कमरे में बंद और लगातार शूटिंग रणवीर सिंह ने निभाया ऐसा किरदार जो बन गया मिसाल

    21 दिन खुद को कमरे में बंद और लगातार शूटिंग रणवीर सिंह ने निभाया ऐसा किरदार जो बन गया मिसाल

    नई दिल्ली । फिल्मी दुनिया में कलाकारों का संघर्ष अक्सर पर्दे के पीछे ही रह जाता है लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो यह साबित कर देती हैं कि एक्टर अपने किरदार के लिए किस हद तक जा सकता है रणवीर सिंह की फिल्म पद्मावत से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा सामने आता है जो उनके जुनून और समर्पण की मिसाल बन चुका है

    इस फिल्म में रणवीर सिंह ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया था जिसे जीवंत बनाने के लिए उन्होंने खुद को पूरी तरह उस भूमिका में ढाल लिया था शूटिंग के दौरान उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें कई बार उल्टी तक हुई और यहां तक कि खून भी निकलने लगा लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग रोकने का नाम नहीं लिया

    रणवीर सिंह ने एक इंटरव्यू में इस अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि फिल्म की शूटिंग के दौरान लगातार काम करना पड़ा था शेड्यूल इतना टाइट था कि उन्हें बिना रुके कई दिनों तक काम करना पड़ा भारी भरकम कॉस्ट्यूम और मानसिक दबाव ने उन्हें पूरी तरह थका दिया था लेकिन उनके पास रुकने का कोई विकल्प नहीं था

    उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा होता था कि 6 से 8 दिन लगातार शूटिंग करने के बाद कलाकारों को आराम दिया जाता है ताकि वे अगले सीन के लिए तैयार हो सकें लेकिन उनके मामले में ऐसा संभव नहीं था उन्हें 30 से ज्यादा दिनों तक लगातार शूट करना पड़ा और इसी दौरान उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी

    फिल्म का एक गाना खली बली भी उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ इस गाने की शूटिंग के दौरान वह इतनी ज्यादा थक चुके थे कि ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे लेकिन फिर भी उन्होंने पूरे जोश के साथ डांस किया उनका कहना था कि उस समय उनका शरीर और दिमाग दोनों ही जवाब दे चुके थे लेकिन प्रोफेशनल कमिटमेंट ने उन्हें रुकने नहीं दिया

    इतना ही नहीं फिल्म के क्लाइमेक्स में होने वाला युद्ध सीन भी काफी कठिन था जहां उन्हें भारी कॉस्ट्यूम पहनकर लंबे समय तक शूटिंग करनी पड़ी गर्मी के मौसम में कई लेयर वाले कपड़े पहनना और आसपास जलते टायरों के बीच अभिनय करना बेहद मुश्किल था इसी दौरान उन्हें बार बार उल्टियां हुई और खून आने जैसी स्थिति भी बनी लेकिन उन्होंने शूट पूरा किया

    अपने किरदार में पूरी तरह उतरने के लिए रणवीर सिंह ने खुद को 21 दिनों तक एक कमरे में बंद कर लिया था ताकि वह मानसिक रूप से उसी दुनिया में रह सकें यह उनके अभिनय के प्रति समर्पण को दिखाता है कि वह अपने रोल को केवल निभाते नहीं बल्कि उसे जीते हैं

    यह कहानी सिर्फ एक फिल्म की नहीं बल्कि उस मेहनत और जुनून की है जो एक कलाकार को असाधारण बनाता है रणवीर सिंह का यह अनुभव दर्शाता है कि सफलता के पीछे कितनी मेहनत और दर्द छिपा होता है और यही समर्पण उन्हें दर्शकों के बीच खास बनाता है

  • US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी

    US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की लोकप्रियता (Popularity) में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप को लेकर जारी एक ताजा सर्वे में उनकी अप्रूवल रेटिंग (Approval rating) घटकर 34% पर पहुंच गई, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले सर्वे के 36% से भी कम है और जनवरी 2025 में पद संभालने के समय के मुकाबले काफी नीचे आ चुकी है। सर्वे के अनुसार, महंगाई और ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने जनता की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। इस संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल की कीमतों में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में इजाफे ने अमेरिकी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में केवल 22% लोगों ने ट्रंप के महंगाई से निपटने के तरीके को सही माना, जो यह दिखाता है कि आर्थिक मुद्दों पर सरकार के प्रति भरोसा कम हो रहा है।

    किस बात से नाराज है अमेरिका की जनता
    ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर भी अमेरिकी जनता में खासा विरोध देखा जा रहा है। सर्वे के अनुसार, केवल 34% लोग इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसके खिलाफ हैं। हालांकि, ट्रंप को रिपब्लिकन समर्थकों का मजबूत समर्थन अभी भी मिला हुआ है, जहां 78% लोग उनके साथ खड़े हैं। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर उनके अपने समर्थकों में भी असंतोष बढ़ रहा है।

    इस गिरती लोकप्रियता का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। सर्वे में यह संकेत मिला है कि स्वतंत्र मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स को बढ़त मिल रही है और कई मतदाताओं ने अभी भी कोई फैसला नहीं लिया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले की कोशिश का भी जनता की राय पर खास असर नहीं पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए आगामी मध्यावधि चुनावों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

  • क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम

    क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम


    नई दिल्ली।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म (Hinduism) में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बड़ा चार धाम’ (‘Big Four Dham’) भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए-


    किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम?

    बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है.
    बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित
    रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
    द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर
    पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार)


    बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत)

    बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे।


    रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत)

    रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है.


    द्वारका धाम (पश्चिम भारत)

    द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है.


    जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत)

    पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं.


    क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा?

    बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है।


    चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर

    छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है।

    दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है।


    बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स

    1. पहले से प्लान करें
    यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है.


    2. सही समय चुनें

    रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है.


    3. जरूरी पेपर रखें

    बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है.


    4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें

    इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें.


    5. लोकल गाइड लें

    इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी.

    6. कैश साथ रखें
    हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.

  • इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?

    इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?


    नई दिल्ली।
    हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 (Vikram Samvat 2083) खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास (Jyeshtha month) इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना ‘अधिक मास’ (Adhik Maas 2026) कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है।


    कब पड़ेगा अधिकमास 2026?

    पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा। इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी।


    अधिकमास क्यों आता है?

    – अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का। हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है।


    अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?

    अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है।


    इस दौरान ना करें ये काम

    अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए।


    क्या खास है पुरुषोत्तम मास?

    अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

  • MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश

    MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर की कलेक्टर (Maihar: Collector) IAS बिदिशा मुखर्जी (IAS Bidisha Mukherjee) इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल (Maihar Civil Hospital) का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं…

    अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं. उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?


    अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।


    महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण

    कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि “आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?”


    ग्राउंड स्टाफ को फटकार

    उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।

    कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।

  • होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट

    होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट


    नई दिल्‍ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold- Silver Rate) में अचानक से बड़ी गिरावट आई है. भारतीय कमोडिटी मार्केट (Indian Commodity Market) में सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे हैं. शाम के करोबार के दौरान चांदी करीब 7000 रुपये गिर गई. इसी तरह, 10 ग्राम सोने का फ्यूचर रेट भी गिरा है. कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी के भाव में यह गिरावट, ईरान-अमेरिका तनाव (Iran-America tension) और होर्मुज खोलने (Opening of Hormuz) की चर्चा के बीच आई है. ऐसे में यह संकेत दिख रहा है कि ग्‍लोबल मार्केट में कुछ तो हलचल चल रही है।

    मंगलवार की रात करीब 7.45 बजे कमोडिटी मार्केट MCX पर 3 जुलाई फ्यूचर के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 2.40 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई थी, जो 6900 रुपये से ज्‍यादा या 3 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह, 5 जून फ्यूचर के लिए सोने का भाव भी 1.70 फीसदी या 2500 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पर आ गया।


    अचानक क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?

    डॉलर में तेजी देखी गई है, जिस कारण कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं के दाम गिरे हैं. रुपया डॉलर की तुलना में 94.5 के ऊपर जा पहुंचा है. इसी तरह, ब्रेंट क्रूड ऑयल में भी करीब 3 फीसदी की तेजी देखी जा रही है, जो होमुर्ज पर बढ़ते तनाव का संकेत दे रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स और डोनाल्‍ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने जंग रोकने और होर्मुज खोलने का प्रताव दिया है. यह दावा तब किया जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अभी तक नहीं हो पाई है।

    वहीं कुछ खबरें यह भी दावा कर रही हैं कि अमेरिका और ईरान समुद्र में अपनी ताकत को बढ़ा रहे हैं, जो एक तनाव का संकेत दे रहा है. वहीं एशियाई, भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार में व्‍यापक स्‍तर पर गिरावट दिख रही है.


    इंटरनेशनल गोल्‍ड-सिल्‍वर प्राइस

    अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. सोना 2.30 फीसदी या 108 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4586 डॉलर पर औंस पर आ चुका है. वहीं चांदी की बात करें तो 3.20 फीसदी या 2.5 डॉलर टूटकर 72.6 डॉलर पर औंस पर आ चुका है।


    रिकॉर्ड हाई से कितना सस्‍ता हुआ गोल्‍ड-सिल्‍वर?

    एमसीएक्‍स के मुताबिक, गोल्‍ड का रिकॉर्ड हाई लेवल 2.02 लाख रुपये है, जो अब 53 हजार रुपये गिरकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है. इसी तरह, चांदी का लाइफटाइम हाई लेवल 4.57 लाख रुपये है, जो अब 2.07 लाख रुपये सस्‍ती होकर 2.40 लाख रुपये पर आ चुकी है।

  • LS में AAP को लग सकता है बड़ा झटका…. मजीठिया का दावा- इस्तीफा देने को तैयार 2 MP

    LS में AAP को लग सकता है बड़ा झटका…. मजीठिया का दावा- इस्तीफा देने को तैयार 2 MP


    चंडीगढ़।
    आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party- AAP) के लिए पंजाब में सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्यसभा (Rajya Sabha) में अपने सांसदों की बड़ी बगावत का सामना कर रही पार्टी को अब निचले सदन (लोकसभा) में भी बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal- SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि पंजाब से AAP के 2 लोकसभा सांसद भी पार्टी से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।

    बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी में मची भगदड़ केवल उच्च सदन (राज्यसभा) तक सीमित नहीं रहने वाली है। उनके अनुसार, पंजाब में AAP सरकार की कार्यप्रणाली, नेतृत्व की अनदेखी और अंदरूनी कलह से नाराज होकर अब लोकसभा के 2 सांसद भी जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं।

    2024 के लोकसभा चुनावों में पंजाब से आम आदमी पार्टी के केवल 3 सांसद ही जीतकर संसद पहुंचे थे। ये सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर, मलविंदर सिंह कंग और राज कुमार चब्बेवाल हैं। अगर मजीठिया का यह दावा सच साबित होता है और 2 सांसद इस्तीफा दे देते हैं, तो यह लोकसभा में आम आदमी पार्टी के लगभग सफाए के बराबर होगा।

    मजीठिया ने एक पोस्ट में लिखा, ‘एक और दिन, एक और विदाई की तैयारी… सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के 2 लोकसभा सांसद जल्द ही पार्टी छोड़कर जा सकते हैं। ‘बार-बार सफर करने वालों’ की यह सूची बस बढ़ती ही जा रही है।’


    राज्यसभा में लगा करारा झटका

    अकाली दल के नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब AAP इतिहास के अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। हाल ही में पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ बगावत कर दी है। प्रमुख बागी नेता: इनमें पार्टी के मुख्य रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया है।


    पंजाब की भगवंत मान सरकार पर मंडराता खतरा?

    बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य विपक्षी दल इस स्थिति का पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। मजीठिया ने इस भगदड़ को AAP सरकार के पतन की शुरुआत बताया है। हाल ही में मजीठिया ने कहा है कि सांसदों के बाद अब बड़ी संख्या में AAP के विधायक भी पार्टी छोड़ने की कतार में हैं, जो जल्द ही भाजपा या अन्य दलों में शामिल हो सकते हैं।


    फ्लोर टेस्ट की मांग

    अकाली दल ने दावा किया है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार जल्द ही अल्पमत में आ सकती है। इसके मद्देनजर उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से विधानसभा में ‘फ्लोर टेस्ट’ (बहुमत परीक्षण) कर अपना बहुमत साबित करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि ‘बदलाव’ का नारा देकर सत्ता में आई AAP की सरकार अब भ्रष्टाचार, लचर कानून-व्यवस्था और गुटबाजी का शिकार हो चुकी है, जिसके चलते उनके अपने ही संस्थापक सदस्य और नेता “डूबते जहाज” से कूद रहे हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बगावत को सिरे से खारिज करते हुए बागी नेताओं को ‘गद्दार’ करार दिया है। उनका कहना है कि जो लोग छोड़कर गए हैं उनका अपना कोई जनाधार नहीं था और पंजाब सरकार को विधायकों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। हालांकि, 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले यह राजनीतिक अस्थिरता आम आदमी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। यदि लोकसभा सांसदों के इस्तीफे की खबर हकीकत में बदलती है, तो यह पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक रूप से एक बहुत बड़ा नुकसान साबित होगा।

  • राजा रघुवंशी हत्याकांड… भाई गोविन्द बोला- सोनम इंदौर आई तो उनके घर में नहीं रहेगी

    राजा रघुवंशी हत्याकांड… भाई गोविन्द बोला- सोनम इंदौर आई तो उनके घर में नहीं रहेगी


    इंदौर।
    राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi murder case) की मुख्य आरोपी सोनम (Sonam) को मेघालय कोर्ट ने जमानत (Meghalaya court Grants Bail) दे दी है। राजा के परिवारवालों का आरोप है कि जमानत मिलने में सोनम के भाई गोविंद ने भी उसकी मदद की है। अब इस मामले में गोविंद का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अगर राजा का परिवार हाई कोर्ट जाना चाहता है तो उन्हें जाना चाहिए। वहीं ये पूछे जाने पर कि क्या वह सोनम की जमानत का विरोध करते है, उन्होंने कहा कि कानून के हिसाब से जो हुआ सही हुआ। इसी के साथ उन्होंने ये भी साफ किया है कि सोनम इंदौर आ भी गई तो उनके घर में नहीं रहेगी।

    गोविंद ने कहा, मुझे भी पता चला है कि सोनम को जमानत मिल गई है, लेकिन ऑर्डर की कॉपी आना बाकी है। मुझे भी मीडिया के जरिए पता चला कि बेल मिल गई है। हमारे पास अभी तक कोई प्राइवेट वकील नहीं है। सरकार द्वारा नियुक्त वकील अभी इस केस में लगे हुए हैं। । मुझे नहीं पता कि वह कब रिहा होंगी, कहां रहेंगी या शिलांग में होंगी या नहीं।

    सोनम की जमानत करवाने के आरोपों पर गोविंद ने कहा, मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। जेल में सोनम से मिलने से पहले मैंने राजा के भाई को साफ-साफ बता दिया था कि मुझे कुछ कागजी कार्रवाई करनी है। मैंने उन्हें पहले ही साफ-साफ बता दिया था। गोविंद ने कहा, हम सोनम को अभी घर में नहीं रखेंगे। यह संभव नहीं है। सोनम की जमानत पर उन्होंने कहा, यह एक कानूनी फैसला है और कानून के हिसाब से जो हुआ, सही हुआ। अगर यह सरकार का फैसला है, तो मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। उन्होंने आगे कहा, अगर मेरे माता-पिता उसे घर लाना चाहते हैं, तो मैं घर पर नहीं रहूंगा।


    सीबीआई जांच की मांग

    इससे पहले सोनम को जमानत मिलने पर राजा के परिवार ने असंतोष जताया और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। राजा की भावुक मां उमा ने कहा कि सोनम उनके बेटे के हत्याकांड की कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता है और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उसे जमानत कैसे मिल गई। उन्होंने कहा कि मेघालय पुलिस ने पिछले नौ महीने में इस मामले की अच्छी तरह जांच की, ‘लेकिन यह उनकी समझ से परे है कि महीने-दो महीने में खेल अचानक कैसे बदल गया?’ राजा की मां ने कहा, हम सरकार से एक ही मांग करते हैं कि हत्याकांड के शिकार मेरे बेकसूर बेटे को इंसाफ मिले। मुझे इस मामले में सीबीआई जांच चाहिए। राजा के बड़े भाई विपिन ने कहा कि उनका परिवार सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती देगा।

    10 महीने से जेल में बंद थी सोनम
    विपिन ने जांच में ‘हेर-फेर’ का संदेह जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उन्हें अब तक न तो चार्जशीट की कॉपी दी है, न ही उन्हें से ठीक से देखने का मौका मिला है। अधिकारियों ने बताया कि अपने पति राजा रघुवंशी की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से नौ जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह 10 महीने से अधिक समय तक शिलांग के जिला कारागार में न्यायिक हिरासत के तहत बंद थी।

    राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के वास्ते मेघालय के लिए रवाना हुए थे। हनीमून के दौरान 23 मई को लापता राजा रघुवंशी का शव दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में पाया गया था। राजा रघुवंशी हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम के साथ ही इस महिला के कथित प्रेमी राज कुशवाह और कुशवाह के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया गया था।

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।