Author: bharati

  • खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जिला प्रशासन ने एक चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए अवैध तरीके से संचालित हो रहे कारखाने का पर्दाफाश किया है। यहां पशुओं की चर्बी से नकली घी और आइसक्रीम बनाने का गोरखधंधा चल रहा था। संयुक्त टीम ने मौके से भारी मात्रा में सामग्री जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    शुक्रवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट, नगर निगम, खाद्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर मोघट थाना क्षेत्र के इमलीपुरा वार्ड स्थित बेगम पार्क के पास दबिश दी। संकरी गलियों में बने कमरों की तलाशी के दौरान टीम को एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य मिले।

    कार्रवाई के दौरान 79 टीन कनस्तरों और 9 नीले ड्रमों में भरा चर्बी से बना नकली घी बरामद किया गया। इसके अलावा बड़ी संख्या में बोरे भरकर पशुओं के अवशेष भी मिले। प्राथमिक जांच में सामने आया कि मृत पशुओं की चर्बी, खाल और हड्डियों का इस्तेमाल कर घी तैयार किया जा रहा था, जिसे बाजार में सप्लाई किया जाता था।

    मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पूरे परिसर को सील कर दिया और जब्त सामग्री के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने भी चर्बी और अन्य अवशेषों के नमूने लेकर यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि किन पशुओं का उपयोग किया गया।

    इस मामले में आरोपी अनवर कुरैशी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय विधायक ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अवैध कारोबार से लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

    प्रशासन का कहना है कि पूरे जिले में इस तरह के अन्य अवैध ठिकानों की भी जांच की जाएगी, ताकि खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस तरह के खतरनाक नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

  • MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा

    MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों ने पैसे कमाने के लिए मृतकों को भी नहीं बख्शा. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offences Cell) ने एक बड़े इंश्योरेंस घोटाले (Major Insurance Scams) का खुलासा किया है, जिसमें करीब 8 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है. इस पूरे मामले में बीमा एजेंट से लेकर पंचायत स्तर तक के लोग शामिल पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा हुआ है. इस घोटाले में मृत लोगों और गंभीर बीमार व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसी करवाई गई और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्लेम करने की कोशिश की गई.

    इस मामले में अब तक 21 नॉमिनी सहित कुल 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के एसपी समर वर्मा ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह स्कैम तब सामने आया जब बीमा कंपनी के पास लगातार ऐसे क्लेम आने लगे, जिनमें पॉलिसी लेने के कुछ समय बाद ही लोगों की मौत दिखाई गई थी. इस पर कंपनी को शक हुआ और उसने अपने स्तर पर जांच शुरू की.

    जांच के दौरान करीब 27 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बीमा पॉलिसी लेने के बाद जल्दी मौत दिखाई गई थी. इनमें से 8 मामले तो ऐसे निकले, जिनमें पहले से ही मृत लोगों के नाम पर पॉलिसी करवाई गई थी. यह मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को दी. ईओडब्ल्यू ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले से मृत या गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवाई. इसके बाद उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया गया.


    मृत लोगों के नाम पर बनाई गई बीमा पॉलिसियां

    कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि पहले से मृत लोगों को जीवित दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाई गई और बाद में उनकी मौत दिखाकर क्लेम करने की कोशिश की गई. इस पूरे खेल में पंचायत स्तर के अधिकारी भी शामिल पाए गए. जांच में सामने आया कि ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव ने मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए. इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी में क्लेम लगाया गया. इसके अलावा क्लेम को सही साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य भी तैयार किए गए.

    ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में 10 बीमा एजेंट शामिल थे. इनमें से कुछ एजेंटों ने एक से अधिक पॉलिसियां जारी करवाई थीं. इससे साफ है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया अपराध था, जिसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे थे. एसपी समर वर्मा ने बताया कि अब तक दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है. इन लोगों ने पहले से मृत व्यक्तियों के नाम पर दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए और उन्हें आधार बनाकर बीमा क्लेम करने की कोशिश की.

    इस मामले में अभी विस्तृत जांच जारी है. ईओडब्ल्यू दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि किस तरह कुछ लोग सरकारी सिस्टम और बीमा प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. संगठित तरीके से किए गए इस अपराध में कई स्तरों पर मिलीभगत सामने आई है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है.


    जांच में 40 आरोपी, आगे और खुलासे की संभावना

    फिलहाल ईओडब्ल्यू ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला मामला है, जहां लोगों ने पैसे के लिए मृतकों के नाम का भी दुरुपयोग किया. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और कितने लोग इस मामले में और सामने आते हैं.

  • सिलवानी इलाके में संवेदना यात्रा विधायक ने कई गांवों में पहुंचकर परिजनों को दिया संबल

    सिलवानी इलाके में संवेदना यात्रा विधायक ने कई गांवों में पहुंचकर परिजनों को दिया संबल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के जैथारी क्षेत्र में हाल ही में हुए निधन के मामलों के बाद शोक का माहौल बना हुआ है। इसी बीच देवेंद्र पटेल ने आदिवासी अंचल का दौरा कर शोकाकुल परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। उनके इस दौरे को स्थानीय स्तर पर संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है जहां जनप्रतिनिधि सीधे प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे।

    दौरे की शुरुआत ग्राम छींद से हुई जहां विधायक ने ब्रजकिशोर ठाकुर के पुत्र अमित ठाकुर के निधन पर उनके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और दुख की इस घड़ी में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद वे ग्राम फुलमार पहुंचे जहां भूरा आदिवासी के बालक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दी।

    दौरे के दौरान जैथारी क्षेत्र के अन्य गांवों में भी विधायक ने पहुंचकर लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में समाज और जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहें और उन्हें हर संभव सहारा दें।

    ग्राम फुलमार में उन्होंने सरपंच केशव धुर्वे के निवास पर भी पहुंचकर उनके पिता के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

    स्थानीय लोगों ने इस दौरे को सराहा और कहा कि जनप्रतिनिधि का इस तरह गांवों में आकर लोगों के दुख में शामिल होना विश्वास और भरोसे को मजबूत करता है। इस पहल से क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता और आपसी सहयोग की भावना भी देखने को मिली है।

  • बाबा बागेश्वर की हिन्दुओं से अपील… बोले- चार बच्चे पैदा करो…. एक RSS को समर्पित करो

    बाबा बागेश्वर की हिन्दुओं से अपील… बोले- चार बच्चे पैदा करो…. एक RSS को समर्पित करो

    नागपुर। महाराष्ट्र (Maharashtra) के नागपुर (Nagpur) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Pandit Dhirendra Shastri) ने एक बड़ा बयान दिया है, जो चर्चा का विषय बन गया है. भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वो चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के लिए समर्पित करें.

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे चार पैदा करो, जिस में एक स्वयंसेवक संघ को दो. उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

    इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत खुद मौजूद थे. इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में कई साधु संतों की भी मौजूदगी रही।


    बयान के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं

    भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. बागेश्वर बाबा के बयान के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है. फिलहाल उनके इस बयान को लेकर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • जनपद कार्यालय में हंगामा मंत्री के भाई ने सीईओ को दी जान से मारने की धमकी

    जनपद कार्यालय में हंगामा मंत्री के भाई ने सीईओ को दी जान से मारने की धमकी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में एक बार फिर सत्ता से जुड़े लोगों के परिजनों की कथित दबंगई को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस बार मामला नागर सिंह चौहान के भाई इंदरसिंह चौहान से जुड़ा है, जिन पर जनपद पंचायत कार्यालय में महिला सीईओ को धमकाने और अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना ने प्रशासनिक तंत्र की सुरक्षा और कार्यस्थल पर अधिकारियों की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार यह घटना 22 अप्रैल की है, जब प्रिया काग अपने कार्यालय पहुंचीं। आरोप है कि कन्या विवाह योजना के तहत पहले से विवाहित आवेदकों के आवेदन निरस्त किए जाने को लेकर इंदरसिंह चौहान नाराज हो गए। इसी बात को लेकर उन्होंने कार्यालय में हंगामा किया और सीईओ के साथ अभद्रता की।

    सीईओ प्रिया काग का कहना है कि इंदरसिंह चौहान ने उन्हें न सिर्फ धमकाया बल्कि मारने के लिए दौड़े भी। उन्होंने कथित रूप से कहा कि तेरे दांत तोड़ दूंगा तुझे जिंदा गाड़ दूंगा और यहां सब कुछ उनकी मर्जी से चलेगा। इस दौरान उन्होंने उनका रास्ता भी रोका जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मौके पर मौजूद लेखाधिकारी सावन भिंडे ने बीच बचाव कर स्थिति को संभाला।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इंदरसिंह चौहान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। मध्य प्रदेश पुलिस ने बीएनएस की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जमानत मिल गई। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।

    बताया जा रहा है कि इंदरसिंह चौहान पहले भी विवादों में रह चुके हैं। खाद वितरण को लेकर एक सेल्समैन से मारपीट और कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे हटवाने जैसे आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह नया मामला उनके पुराने विवादों को फिर से चर्चा में ले आया है।

    वहीं इस पूरे विवाद पर मंत्री नागर सिंह चौहान ने खुद को अलग बताते हुए कहा कि उनका अपने भाई से लंबे समय से कोई संबंध नहीं है और वह अपने निजी मामलों के लिए खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कानून अपना काम करेगा और जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जाएगी।

    यह मामला न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है बल्कि इससे कार्यस्थल पर महिला अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को भी कई बार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ता है, जो व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

  • MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत

    MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत


    मंडला।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कान्हा रिजर्व (Kanha Reserve) के कोर एरिया में एक शावक (Tiger Cub.) मृत पाया गया, जिससे इस साल जनवरी से अब तक राज्य में बाघों (Tigers) की मौत की संख्या बढ़कर 22 हो गई है. यह रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में फैला हुआ है.

    कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर अमिता बी ने बताया कि एक से डेढ़ साल के इस बच्चे का शव गुरुवार शाम को रिजर्व के मुख्य क्षेत्र के सरगी इलाके में मिला. शावक का पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को किया गया और हम इसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि मौत का सही कारण पता चल सके.

    अफसर ने आगे बताया कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि बच्चे को उसकी मां ने दूध नहीं पिलाया होगा, जिसके कारण भूख से उसकी मौत हो गई. इसी बाघिन का एक और बच्चा तीन दिन पहले मर गया था. उन्होंने कहा, “बाघिन ने चार बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है. हम बाघिन और बाकी बचे दो बच्चों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.”

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जहां 9 बाघ अभयारण्य हैं, इस साल अब तक बाघों की 22 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें शावकों की मौतें भी शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि 2026 की पहली मौत 7 जनवरी को बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में दर्ज की गई थी.


    विशेषज्ञों की चिंता और जवाबदेही

    जाने-माने वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “बाघों की मौतों के मामले में, जिनमें अप्राकृतिक मौतें भी शामिल हैं, मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, जो चिंता का विषय है.”

    दुबे ने आरोप लगाया कि निगरानी और गश्त की कमी के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की. उन्होंने पन्ना बाघ अभयारण्य के एक हालिया मामले का जिक्र किया, जहां बाघ की मौत के लगभग 20 दिन बाद उसका सड़ा-गला शव मिला था.

  • किसानों के लिए बड़ा फैसला भू अर्जन पर चार गुना मुआवजा भाजपा किसान मोर्चा ने जताया आभार

    किसानों के लिए बड़ा फैसला भू अर्जन पर चार गुना मुआवजा भाजपा किसान मोर्चा ने जताया आभार


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में किसानों के हित में लिए गए एक बड़े फैसले के बाद उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा भू अर्जन के मामलों में किसानों को चार गुना मुआवजा देने की घोषणा के बाद किसान वर्ग के साथ साथ भाजपा कार्यकर्ताओं में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। इस फैसले को किसानों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया जा रहा है।

    भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम है बल्कि उनके सम्मान और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

    कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत लिए गए इस निर्णय की खुशी में आगर मालवा के छावनी नाका क्षेत्र में भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। इस दौरान पटाखे फोड़े गए और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और उन्होंने सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए नई उम्मीद का प्रतीक बताया।

    कार्यकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से किसान उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे और यह निर्णय उनकी उस मांग को पूरा करता है। भू अर्जन के दौरान किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम बेहद जरूरी था। अब चार गुना मुआवजा मिलने से किसानों को राहत मिलेगी और वे अपनी आजीविका को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगे।

    इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष ओम मालवीय, पूर्व जिला अध्यक्ष करण सिंह यादव और किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष दिनेश परमार सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में ऐसे और भी फैसले लिए जाएंगे।

    यह फैसला प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के इस कदम से किसानों में भरोसा बढ़ा है और उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कराने में मदद मिलेगी।

  • आगर मालवा में दर्दनाक हादसा अज्ञात वाहन की टक्कर से मां की मौत बेटा घायल

    आगर मालवा में दर्दनाक हादसा अज्ञात वाहन की टक्कर से मां की मौत बेटा घायल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में 38 वर्षीय सपना माली की मौत हो गई जबकि उनका बेटा रोहित घायल हो गया। घटना आगर और आमला मार्ग पर ग्राम मोयाखेड़ा के पास हुई जब एक अज्ञात वाहन ने पीछे से उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।
    जानकारी के अनुसार सपना अपने बेटे रोहित के साथ नलखेड़ा क्षेत्र के बड़ागांव में आयोजित एक मान कार्यक्रम में शामिल होकर अपने घर लौट रही थीं। रात का समय होने के कारण सड़क पर दृश्यता कम थी और इसी दौरान तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।
    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने सपना को मृत घोषित कर दिया। वहीं उनके बेटे रोहित को गंभीर चोटें आई हैं और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका इलाज जारी है। परिजनों के अनुसार सपना एक गृहिणी थीं और परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही थीं। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी है जिनमें से बेटी की शादी हो चुकी है।
    इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों ने सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों और लापरवाही से ड्राइविंग को इस तरह के हादसों की बड़ी वजह बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर तेज गति से वाहन चलते हैं जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मध्य प्रदेश पुलिस के अंतर्गत कोतवाली थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी वाहन की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
    शनिवार सुबह जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई जिसके बाद सपना का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानी की जरूरत को उजागर किया है। वहीं पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सतर्कता बरतें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में प्रचंड गर्मी से लोग बेहाल …. अगले 4 दिन हीटवेव का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India) के मैदानी भागों और मध्य भारत (Central India) में प्रचंड गर्मी (Extreme heat.) ने कोहराम मचा दिया है। आसमान से बरसती आग और औद्योगिक इकाइयों व वाहनों से फैलते प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR.) समेत बड़े शहरों में दुश्वारियां और बढ़ा दी हैं। ज्यादातर इलाकों में लू चल रही है और सुबह 10 बजे के बाद से ही घरों से निकलना मुश्किल हो गया है।

    अभी तीन से चार दिन यही स्थित बनी रहने और लू चलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर में गरज-चमक के साथ बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से मौसम खुशनुमा बना हुआ है।

    इन राज्यों में चलेगी लू, नहीं मिलेगी गरमी से राहत
    भारतीय मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में पिछले कई दिनों से लू चल रही है। इससे लू की स्थिति और भी गंभीर हो गई। आईएमडी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, अरुणाचल, मणिपुर, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर बारिश और तेज हवाएं चलने से लोगों को गर्मी से राहत भी मिली।


    गरमी बढ़ाने वाला अल नीनो इस साल फिर ढाएगा कहर

    संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि पिछली बार दुनिया का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली मौसमी घटना अल नीनो के इस साल 2026 के मध्य में फिर से लौटने की उम्मीद है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र की मौसम एवं जलवायु एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि आगामी मई से जुलाई के बीच अल नीनो के हालात बनने के पूरे आसार हैं और इसके शुरुआती संकेत भी दिखने लगे हैं।

    यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह के तापमान को बढ़ाती है। इससे हवाओं, दबाव और वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन आता है। मौसम की स्थिति अल नीनो और उसके विपरीत ला नीना और सामान्य स्थिति के बीच बदलती रहती है। पिछले अल नीनो के कारण 2023 अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल और 2024 अब तक का सबसे गर्म साल बना।


    भीषण गर्मी की चपेट में यूपी

    उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी अपने पूरे रंग में है। शुक्रवार को प्रदेश के ज्यादातर इलाके भीषण गर्मी के चपेट में रहे। तपिश के प्रकोप से अब जनजीवन और लोगों का कामकाज प्रभावित होने लगा है। प्रयागराज, वाराणसी, हरदोई, आगरा, मेरठ,अलीगढ़ और शाहजहांपुर जैसे शहरों भयानक लू के थपेड़ों का प्रकोप रहा और दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। 45.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रयागराज प्रदेश में सर्वाधिक गर्म रहा। वहीं 44.3 डिग्री, बांदा और हमीरपुर में 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    तेजी से बढ़ रहा समुद्री सतह का तापमान

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि उसके नवीनतम मासिक वैश्विक मौसमी जलवायु अपडेट में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो मई-जुलाई की शुरुआत में अल नीनो की स्थिति की संभावित वापसी की तरफ इशारा करता है। पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि अगले तीन महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा।

    डब्ल्यूएमओ ने कहा कि हालांकि, जलवायु परिवर्तन से अल नीनो घटनाओं की तीव्रता नहीं बढ़ती है, लेकिन यह इससे जुड़े असर को बढ़ा सकता है, क्योंकि गर्म महासागर और वायुमंडल से लू और भारी वर्षा जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए ऊर्जा और नमी की उपलब्धता बढ़ जाती है।़

  • AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    AAP को सबसे बड़ा झटका, राघव चड्ढा नहीं, इस सांसद के जाने से हिला केजरीवाल का पूरा संगठन

    नई दिल्ली। 24 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी के इतिहास में एक बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। यह दिन सिर्फ राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने के कारण नहीं, बल्कि इसलिए अहम बन गया क्योंकि अरविंद केजरीवाल की टीम में पहली बार इतनी बड़ी टूट देखने को मिली। पार्टी का संसदीय दल बिखर गया और बागी गुट ने एक तिहाई सांसदों के साथ भाजपा में विलय कर लिया।

    हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा नुकसान संदीप पाठक के जाने से हुआ है। उनकी भूमिका सिर्फ एक सांसद की नहीं, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की रीढ़ के रूप में देखी जाती थी।

    साल 2022 में जब आम आदमी पार्टी ने हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे चेहरों को राज्यसभा भेजा, तब सबसे ज्यादा चर्चा संदीप पाठक को लेकर हुई थी, क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे। लेकिन पर्दे के पीछे उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली थी, जिसे पहचान देते हुए उन्हें उच्च सदन में भेजा गया था।

    2016 में पार्टी से जुड़ने वाले संदीप पाठक ने संगठन के भीतर तेजी से अपनी जगह बनाई। उनकी सार्वजनिक उपस्थिति भले कम रही, लेकिन पार्टी की रणनीति और विस्तार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। यही वजह रही कि जब तीन राज्यसभा सांसदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने का ऐलान किया, तो सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक के फैसले से लगा।

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल या राघव चड्ढा के जाने की आशंका पहले से थी, लेकिन संदीप पाठक का जाना अप्रत्याशित रहा। वहीं अशोक मित्तल और हरभजन सिंह के रुख में बदलाव को उतना चौंकाने वाला नहीं माना गया।

    रणनीति के मास्टरमाइंड थे पाठक
    संदीप पाठक को 2022 में संगठन महासचिव बनाया गया था और वे पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते थे। पंजाब में पार्टी की जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना जाता है। इसके अलावा गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। उनकी अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब उनसे मिलने के लिए सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार के साथ संदीप पाठक को ही भेजा गया था।

    कैसे जीता भरोसा
    संदीप पाठक ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आम आदमी पार्टी में दिल्ली डायलॉग कमीशन से की थी, जहां वे आशीष खेतान के साथ काम करते थे। अपनी रणनीतिक समझ और संगठन क्षमता के दम पर उन्होंने जल्दी ही केजरीवाल का भरोसा जीत लिया और पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक के बाद सबसे अहम पद तक पहुंचे।

    राघव चड्ढा का जाना क्यों कम असरदार
    हालांकि राघव चड्ढा की लोकप्रियता आम जनता में ज्यादा रही है, लेकिन पिछले डेढ़ साल में उनकी सक्रियता पार्टी में कम हो गई थी। वे पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के सदस्य जरूर थे, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी लगभग खत्म हो चुकी थी। ऐसे में उनका अलग होना अपेक्षित माना जा रहा था।